तिल गुड़ खाइये और मीठा मीठा बोलिए।

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कोलार समाचार, भोपाल।। मकर संक्रांति के दिन से नए साल में त्योहारों की शुरुआत हो जाती है। इस दिन को हल्दी कुमकुम के रिवाज के नाम से कई दिनों तक मनाया जाता है।

महिलाओं द्वारा मनाए जाने वाले इस त्यौहार में विशेषता होती है कि हर घर में ये त्यौहार अलग अलग दिन मनाया जाता है।

महिलाएं घर में तिलगुड़ और तिलवड़ी बनाती है साथ ही रिश्तेदारों व पड़ोस की महिलाओं को तिलगुड़ देने के साथ ही हल्दी-कुमकुम लगाती है और अपने सुहाग की लंबी उम्र की प्रार्थना करती है। लोग एक-दूसरे को मिट्टी के बर्तन में चने के होले, तिल-गुड़ के लड्डू, मूंग, चावल, गाजर व बोर मिला कर भर कर देते हैं।

शनिवार दोपहर में ऐसा कुछ त्यौहारी माहौल गणपति एनक्लेव सोसायटी में भी दिखाई दिया।

गजभिये जी के घर भी आज हंसी ठिठोली के साथ “तीळ गुळ घ्या, गोड़ गोड़ बोला” थोड़ा मीठा तो और लो की आवाज के साथ मंगोड़े की खुशबू बता रही थी।
पता चला कि यहाँ स्वदिष्ट व्यंजन परोसा जा रहा साथ ही “हल्दी कुमकुम” मनाया जा रहा है।

धर्मश्री की टीम भी साथ हो गई और मंगोड़े पर चर्चा छिड़ी तो कार्यक्रम की आयोजक श्रीमती अन्नपूर्णा गजभिये ने बताया की हर वर्ष सोसायटी में ये कार्यक्रम मनाया जाता है। सभी एक दूसरे को हल्दी कुमकुम लगते है और “तीळ गुळ घ्या, गोड़ गोड़ बोला” शुभकामनाएं देते है।

कार्यक्रम में मेरे साथ श्रीमती रितु गजभिये, श्रीमती अनिता गजभिये, श्रीमती अंजली सोमकुंवर, श्रीमती ज्योति सक्सेना, श्रीमती सुगंधा देवराणकर, श्रीमती पार्वती प्रजापति, श्रीमती लता बाथम, श्रीमती सुरभि कामेरिकर, श्रीमती साधना दामले, श्रीमती हर्षा पाठक, श्रीमती शुक्ला भाभी, श्रीमती त्रिपाठी भाभी, श्रीमती नीतू सिसोदिया, श्रीमती मंजू कामेरिकर थी।

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