8 फरवरी शुक्रवार को शुभ संयोग बना हैमाता गौरी की पूजा, माघ मास शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि

8 फरवरी शुक्रवार को शुभ संयोग बना है. माता गौरी की पूजा होगी. माघ मास शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है. इस तिथि को तीज की तरह मनाया जाता है, जिससे सुहाग और संतान की रक्षा होती है और कन्याओं का शीघ्र विवाह होता है. इस दिन व्रत करने से महिलाओं को लाभ मिलता है. महिलाएं संतान और पति सुख प्राप्त करती हैं. कन्याओं को मनचाहा पति मिलता है. कन्याओं की शादी अच्छे घर में हो जाती है. मां पार्वती ने घोर तपस्या कर के शंकर जी को वर के रूप में प्राप्त किया था. इसके बाद उन्हें गणेश जी और कार्तिकेय जैसे दो बेटे प्राप्त हुए थे.

तीज की तरह मनाएं त्योहार
इस पर्व को तीज की तरह ही मनाते हैं. तृतीया तिथि माता गौरी जन्म तिथि है. महिला या कन्या तीज की तरह सजती संवरती हैं. मेहंदी लगाती हैं. सुहागिन महिलाएं दुल्हन की तरह सजती हैं. लाल शादी का जोड़ा पहनती हैं. लाल सिंदूर लगाकर मंदिर जाती हैं और फिर पूरे शिव परिवार की पूजा करती हैं.

माता गौरी समेत शिव परिवार को क्या चढ़ाएं
शिव परिवार को लाल, पीले फूल, केला, लडडू चढ़ाएं.
बेलपत्र और धतूरा चढ़ाएं.
शिव जी का दूध, जल और चावल से अभिषेक करें.
गणपति जी को तिल गुड़ के लड्डू और केला चढ़ाएं.
रेवड़ी भी चढ़ा दें. इसके बााद तिल बांटें और दान करें.

गौरी-शंकर रुद्राक्ष धारण करें
गौरी तृतीया को ख़ास रुद्राक्ष धारण करें.
रुद्राक्ष धारण करने से विघ्न घट जाते है.
गौरी-शंकर रुद्राक्ष माता गौरी और शंकर जी का होता है, जो यह रुद्राक्ष धारण करता है उसकी दिमागी परेशानी दूर होती है.
रोग ठीक हो जाते हैं और ऊपर से धन आता है.
कालसर्प योग की शांति के लिए गौरी-शंकर रुद्राक्ष धारण करें.

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