नार्थ‑ईस्ट की औषधीय विरासत वन मेले से रहेंगी दूर,इंडिगो की रद्द उड़ानें बनी बाधक

नार्थ‑ईस्ट की औषधीय विरासत वन मेले से रहेंगी दूर,इंडिगो की रद्द उड़ानें बनी बाधक
भोपाल। राजधानी भोपाल में 17 दिसंबर से शुरू होने जा रहे 5 दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय वन मेले में इस बार एक बड़ा खालीपन साफ नजर आएगा। उत्तर‑पूर्वी भारत की दुर्लभ और बहुमूल्य जड़ी‑बूटियाँ, जिनका बेसब्री से इंतज़ार था, इस बार मेले का हिस्सा नहीं बन पाएंगी। वजह—इंडिगो एयरलाइंस की लगातार रद्द होती उड़ानें,जिनके चलते नार्थ‑ईस्ट के औषधि कारोबारी और पारंपरिक वैद्यों ने मेले में शामिल हो पाने में असमर्थता जताई है।

नार्थ‑ईस्ट की जड़ी‑बूटियाँ इसलिए हैं खास
उत्तर‑पूर्वी भारत जैव‑विविधता की दृष्टि से देश का सबसे समृद्ध क्षेत्र माना जाता है। यहाँ की जड़ी‑बूटियाँ आयुर्वेद, यूनानी और आधुनिक हर्बल दवाओं में अहम भूमिका निभाती…
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सदन को गुमराह करने का दुस्साहस
भोपाल। राजधानी भोपाल में 17 दिसंबर से शुरू होने जा रहे 5 दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय वन मेले में इस बार एक बड़ा खालीपन साफ नजर आएगा। उत्तर‑पूर्वी भारत की दुर्लभ और बहुमूल्य जड़ी‑बूटियाँ, जिनका बेसब्री से इंतज़ार था, इस बार मेले का हिस्सा नहीं बन पाएंगी। वजह—इंडिगो एयरलाइंस की लगातार रद्द होती उड़ानें,जिनके चलते नार्थ‑ईस्ट के औषधि कारोबारी और पारंपरिक वैद्यों ने मेले में शामिल हो पाने में असमर्थता जताई है।

नार्थ‑ईस्ट की जड़ी‑बूटियाँ इसलिए हैं खास
उत्तर‑पूर्वी भारत जैव‑विविधता की दृष्टि से देश का सबसे समृद्ध क्षेत्र माना जाता है। यहाँ की जड़ी‑बूटियाँ आयुर्वेद, यूनानी और आधुनिक हर्बल दवाओं में अहम भूमिका निभाती हैं। मेघालय, त्रिपुरा और असम से आने वाली औषधियाँ इम्यूनिटी, त्वचा रोग, जोड़ों के दर्द और पाचन संबंधी उपचारों में विशेष उपयोगी मानी जाती हैं।

इन विशेषताओं को देखते हुए मप्र लघु वनोपज संघ ने इस बार त्रिपुरा व मेघालय की आगरवुड (अगर) तथा फ्रेश‑वॉटर आधारित सीपी खेती से जुड़े उत्पादकों को आमंत्रित किया था, ताकि मध्यप्रदेश के उपभोक्ता और वन समितियाँ इन नवाचारों से लाभ उठा सकें।

आगरवुड की है अंतर्राष्ट्रीय मांग
आगरवुड को दुनिया की सबसे महंगी लकड़ियों में गिना जाता है। इसका उपयोग इत्र, अगरबत्ती, आयुर्वेदिक औषधियों और धार्मिक अनुष्ठानों में होता है। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में इसकी भारी मांग है और नार्थ‑ईस्ट भारत इसका प्रमुख उत्पादक क्षेत्र है। वन मेले में इसके लाइव डिस्प्ले और व्यापारिक संभावनाओं पर चर्चा प्रस्तावित थी, जो अब संभव नहीं हो पाएगी।

सीपी खेती,जल में उगता आर्थिक अवसर
इसी तरह,सीपी खेती यानी फ्रेश‑वॉटर में विशेष जलीय वनस्पतियों की वैज्ञानिक खेती, जिसे औषधीय और पोषक तत्वों से भरपूर माना जाता है। यह खेती आदिवासी और ग्रामीण समुदायों के लिए कम लागत में बेहतर आय का साधन बन रही है। वन मेले में इसे मप्र के जल संसाधन क्षेत्रों में लागू करने पर चर्चा होनी थी।

केरल और विदेशों की भागीदारी भी सीमित
इंडिगो की उड़ान बाधाओं का असर सिर्फ नार्थ‑ईस्ट तक सीमित नहीं रहा। केरल स्थित सीएसआईआर के प्रतिनिधि,वनोपज समिति सदस्य और वैद्य भी एक दिन की देरी से भोपाल पहुँचेंगे। वहीं, कोरोना काल के बाद से आयुर्वेदिक दवाओं को लेकर भारतीय और विदेशी मानकों में अंतर एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

भारत में औषधि तो विदेशों में फूड सप्लीमेंट
भारत में आयुर्वेदिक औषधियाँ पारंपरिक ग्रंथों और आयुष मंत्रालय के दिशा‑निर्देशों के आधार पर तैयार होती हैं, जबकि अन्य कई देशों में हर्बल उत्पादों को दवाओं की बजाय फूड सप्लीमेंट की श्रेणी में रखा जाता है। इसके चलते गुणवत्ता,पैकेजिंग और परीक्षण मानकों में बड़ा अंतर सामने आता है। यही कारण है कि अंतर्राष्ट्रीय वन मेला अब भूटान और नेपाल तक सीमित रह गया है। इन देशों के प्रतिनिधि भी इस बार आईआईएफएम के माध्यम से केवल कार्यशाला और विशेषज्ञ सत्रों तक सीमित हैं।

कच्चा माल मप्र का, दाम बाहर तय—संघ की नाराज़गी
मप्र लघु वनोपज संघ ने इस बार वन समितियों को राहत देने के लिए कच्चे माल के दाम में करीब 25 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव ट्राइफेक (दिल्ली) को भेजा है। संघ का तर्क है कि बढ़ती महंगाई के अनुरूप संग्रहकर्ताओं को उचित मूल्य मिलना चाहिए। विडंबना यह है कि कच्चा माल मध्यप्रदेश का होता है, लेकिन उसकी कीमतें राज्य के बाहर तय होती हैं। इसी को देखते हुए संघ ने सभी वन मंडलाधिकारियों को स्थानीय स्तर पर लागत और मूल्य निर्धारण के निर्देश दिए हैं।

सौंदर्य प्रसाधन में कदम रखेगा बरखेड़ा अनुसंधान केंद्र
वन मेले का एक सकारात्मक पहलू यह भी है कि बरखेड़ा पठानी,भोपाल अनुसंधान केंद्र अब सौंदर्य प्रसाधन क्षेत्र में प्रवेश करने जा रहा है। महुआ से बने लोशन,माउथ फ्रेशनर जैसे उत्पाद पहली बार रिटेल स्वरूप में मेले में उपलब्ध होंगे। इससे वनोपज आधारित उत्पादों को नया बाज़ार मिलने की उम्मीद है।

अनोखा होगा इस बार का मेला
मप्र राज्य लघु वनोपज संघ की प्रबंध संचालक समिता राजौरा ने कहा कि संघ, मेले का अंतर्राज्यीय व अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप बढ़ाने के हरसंभव जतन कर रहा है। उक्त प्रयास भी इसी दिशा में किए गए। उन्होंने कहा कि बावजूद इसके इस बार का मेला कई मायनों में अनोखा रहने वाला है।

मुख्यमंत्री डॉ यादव करेंगे मेला का शुभारंभ
वहीं,वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार ने एक प्रेस कांफ्रेंस में मेला आयोजन की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मेले का शुभारंभ 17 दिसम्बर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। समृद्ध वन खुशहाल वन की थीम पर आयोजित होने वाले मेले में 350 स्टॉल लगाये जा रहे हैं।

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