इस्लामाबाद में ईरान-US की पीस टॉक
ईरान-अमेरिका पीस टॉक के बीच भारत और अमेरिका सोमवार (20 अप्रैल) को वॉशिंगटन में ट्रेड टॉक के नए दौर की शुरुआत करने जा रहे हैं. 20 से 22 अप्रैल तक 3 दिवसीय वार्ता का मकसद प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले चरण को अंतिम रूप देना है. मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन के नेतृत्व में 12 सदस्यीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल अक्टूबर 2025 के बाद पहली बार अमेरिका में आमने-सामने की वार्ता में भाग लेगा.
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के 10 प्वाइंट
1. भारत के मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन के नेतृत्व में 20 से 22 अप्रैल तक वॉशिंगटन में बातचीत होनी है. वाणिज्य, सीमा शुल्क और विदेश मंत्रालयों के अधिकारी इसमें शामिल हैं.
2. ये बातचीत अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद हो रही हैं, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) के तहत लगाए गए टैरिफ को रद्द कर दिया गया था. इसके बाद अमेरिकी टैरिफ व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है.
3. इसकी जगह पर वॉशिंगटन ने 24 फरवरी से 23 जुलाई तक सभी देशों पर 150 दिनों के लिए 10% का अस्थायी टैरिफ लागू किया है.
4. इसका सबसे बड़ा कारण सभी व्यापारिक साझेदारों पर लागू 10% का अमेरिकी टैरिफ है. इससे पहले भारतीय प्रोडक्ट्स पर अमेरिकी टैरिफ 50% से घटकर 18% तक होने वाला था. इसमें रूस से तेल की खरीद पर लगने वाले 25% जुर्माने को हटाना भी शामिल था. अब ये लगभग समाप्त हो गया है.
5. समझौते पर अभी हस्ताक्षर नहीं हुए हैं, इसलिए भारत के पास पुनर्विचार करने की गुंजाइश है. अधिकारियों ने पीटीआई को बताया कि नए वैश्विक टैरिफ ढांचे के तहत भारत को नुकसान न हो, इसके लिए समझौते को फिर से जांचा-परखा जाएगा.
6. नई दिल्ली का एक मकसद अमेरिकी बाजार में पहले से प्राप्त कॉस्ट एडवांटेज को फिर से हासिल करना है. पिछली शर्तों के तहत कम टैरिफ ने भारतीय निर्यातकों को कंपीटीटर्स पर बढ़त दी थी.
7. फरवरी में हुए समझौते के तहत भारत ने अमेरिका को कई रियायतें दीं हैं. इनमें अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं पर टैरिफ को समाप्त करना या कम करना, कृषि उत्पादों (मेवे, फल, सोयाबीन तेल, डीजी, शराब और स्पिरिट) की एक पूरी सीरीज पर टैरिफ में कटौती करना और कई गैर-टैरिफ बाधाओं को हटाना शामिल था. इनमें से कई पर अब पुनर्विचार किया जा सकता है.
8. भारत ने पहले 5 सालों में 500 अरब डॉलर तक के अमेरिकी सामान खरीदने की योजना का संकेत दिया था. इसमें ऊर्जा, विमान, सेमीकंडक्टर इनपुट, कीमती धातुएं और कोकिंग कोयला शामिल थे. समझौते के दौरान इस योजना का भी फिर से मूल्यांकन होने की संभावना है.
9. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) द्वारा धारा 301 के तहत भारत सहित अन्य देशों में कथित अधिक मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी को टारगेट करते हुए चल रही दो जांचें एक प्रमुख मुद्दा बनने की उम्मीद है. भारत ने इन जांचों का कड़ा विरोध किया है और इन्हें वापस लेने के लिए दबाव बना रहा है. नई दिल्ली का कहना है कि ये जांचें अनुचित हैं.
10. टैरिफ विवाद के कारण फरवरी में मुख्य वार्ताकारों की बैठक स्थगित कर दी गई थी. वॉशिंगटन में चल रहा वर्तमान दौर मूल रूप से एक नई शुरुआत है. यह पूरी तरह से बदले हुए वैश्विक व्यापार माहौल में हो रहा है.
चीन-भारत व्यापार बढ़ा
ये बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब चीन 2025-26 में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनने के मामले में अमेरिका से आगे निकल गया है. भारत का अमेरिका को निर्यात मामूली रूप से 0.92% बढ़कर 87.3 अरब डॉलर हो गया है. अमेरिका से आयात 15.95% बढ़कर 52.9 अरब डॉलर हो गया है. ट्रेड सरप्लस 40.89 अरब डॉलर से घटकर 34.4 अरब डॉलर रह गया है.


















