महुआ का पेड़ बना आस्था का केंद्र, उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

महुआ का पेड़ बना आस्था का केंद्र, उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

होशंगाबाद पिपरिया से महज 17 किलोमीटर दूर नयागांव आस्था पर भारी पड़ी अंधविश्वास क्या हिंदू क्या मुसलमान सभी धर्म के लोग दौड़े चले आ रहे हैं बीमारी के आगे किसी की नहीं चलती लेकिन आस्था और अंधविश्वास में भारी पड़े होशंगाबाद से पिपरिया के नयागांव मैं स्थित महुआ के पेड़ पर आस्था की भीड़ देखी जा रही है जहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं लंगड़े लूले सभी अपने दुखों को दूर करने के लिए इस महुआ के पेड़ को छूने के लिए हजारों किलोमीटर का रास्ता तय कर पहुंच रहे हैं।

 

लोगों का यहां ऐसा कहना है की गांव में चरवाहा है और वहां बचपन से ही अपने लंगड़े पन से लाचार था रोज की तरह आपने गाय और बकरियों को लेकर जंगल में चराने जाता है 1 दिन से जोरो की नींद आई तो वाह महुआ के पेड़ के कुछ दूर जाकर सो गया जब उसकी नींद खुली तो उसने देखा कि वह महुआ के पेड़ के नीचे है और जैसे ही वहां खड़ा हुआ तो उसे अचंभा से अपने आपको देखता रहा क्योंकि उसका बचपन का लंगड़ा पन जा चुका था अब वह स्वस्थ हो गया और वह दौड़ता हुआ गांव वापस आया और गांव वालों को कहानी बताई वहां के कुछ लोगों ने वहां जाकर देखा उन्हीं के गांव का एक बच्चा जो कि बचपन से ही गूंगा था वह उस पेड़ को छूते ही बोलने लगा इस तरह इस पेड़ की आस्था काहे या अंधविश्वास जो भी यहां पहुंचता है उस महुआ को पेड़ को छूते ही उसके दुख दर्द दूर हो जाते हैं देखते ही देखते सतपुड़ा के घने जंगल में मानो मेला सा लग गया है जहां देखो वहां छोटी मोटी दुकान है और गाड़ियों की भीड़ नजर आती है यह आस्था कहै या अंधविश्वास या तो भगवान का ही चमत्कार है प्रशासन की मानें तो यहां पर सुरक्षा को देखते हुए भारी मात्रा में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है यहां दिन क्या रात क्या श्रद्धालुओं का ताता लगा हुआ है।

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