जिसको आज तक किसी ने छुआ तक नहीं है, वैसी 18 साल की और 120 किलो की अनिका को पता चलता है, कि वो माँ बनने वाली है। 6 साल बाद अनिका अपनी बच्ची के साथ बड़े शानदार तरीक़े से मनाली लौटती है
Chapter 1
“अनिका…तुम सुन्न रही हो ना मेरी बात?? तुम मां बनने वाली हो अनिका..!”
डॉक्टर के ये शब्द सुनते ही १८ साल की अनिका की कमज़ोर आँखें एकदम से चौड़ी हो गयी। वो समज नहीं पा रही थी, की वो आखिर प्रेग्नेंट कैसे हो सकती है?
अभी तो उसकी शादी को २४ घंटे भी पूरे नही हुए थे… और न तो किसी लड़के ने आज तक उसे छुआ था। ऐसे में.. अनिका..”प्रेग्नेंट” कैसे हो सकती है??? जितनी शॉकड अनिका थी, उतने ही शॉकड उसके पापा भी थे, जो वही डॉक्टर की केबिन में खड़े, मानो आने वाले तूफ़ान जो भांप रहे थे..
तभी डॉक्टर ने गौतम से कहा – “देखिए.. mr. गौतम गुलेरिया, मैं समज सकती हूँ की आप दोनों इस वक्त बोहुत परेशान होंगे। मगर आप लोग कोई भी फैसला ले उसके पहले मैं एक बात बता दू.. की प्रेगनेंसी ४ महीने पार हो चुकी है। so abortion is out of question!
अनिका को लग रहा था के हो न हो, डॉक्टर से ज़रूर कोई गलती हुई होगी… इसलिए नर्स के सहारे खड़ी होते हुए कमज़ोर अनिका ने थोड़ी ताकत जुटा कर डॉक्टर को डांट दिया… “यह आप क्या कह रही है। यह नामुमकिन है…” लेकिन डॉक्टर के कुछ बोले उसके पहले ही गौतम गुस्से से तिलमिला कर अनिका के पास आये और उसे ज़ोर से तप्पड़ मार दिया…! “इसका जवाब डॉक्टर को नहीं, तुम्हे देना है बेशरम।”
अक्र कार की बैकसीट पर बैठने वाले गौतम आज अनिका को पीछे बिठा कर खुद ड्राइवर के साथ वाली सीट पर बैठ गए थे… मानो ऐसा कर के वो अनिका को अपनी नाराज़गी जाता रहे हो…! अनिका जानती थी की एक बेटी होने के नाते आज उसने अपने पिता को दुनिया का सबसे बड़ा दुःख दिया था… एक बिन-बियाही माँ बन कर…!!! इतना दुख उन्हें अनिका की मां के गुजरने पर भी नही हुआ होगा। लेकिन ये सब जानते हुए भी अनिका फिलहाल कुछ भी करने के लिए physically या mentally सक्षम नहीं थी. उसका शरीर कार की बेक सीट पर कमज़ोरी के साथ साथ शर्म से मानो जम गया था।
मनाली भारत का बेहद खुबसूरत शहर है। यहां देश विदेश से आए टुरिस्ट्स के कारण शहर में रोनक लगी रहती है। मगर अनिका को ऐसा लग रहा था मानो आज मनाली का हर इंसान उसे सवालिया नज़रो से बस एक ही सवाल पूछ रहा हो… की आखिर कौन है इस बच्चे का बाप?.. लेकिन इसका जवाब तो अनिका के पास भी नहीं था…! वो बस नम आँखों से एक ही बात सोचे जा रही थी… की जब आज तक उसे कभी किसी लड़के ने छुआ तक नहीं… तो वो प्रेगनेंट कैसे हो सकती थी???
अनिका इसी उधेड़बुन्द में थी, तभी उसकी कार उसके घर के बोहोत ही बड़े लेकिन पूराने और जंग लगे गेट में एंटर होती है।
गुलेरिया हाउस ब्रिटिश के ज़माने का मकान था। कहा जाता था यहाँ इंग्लैंड के अधिकारी वैकेशन मनाने आते थे। पुराने मगर शानदार एंटिक्स, बड़ा गार्डन.. और बीचमे फवारा। लेकिन अछे से मेंटेन न करने की वजह से पिछले कुछ सालो से थोड़ा बंजर सा लगने लगा था।
गौतम ने घर में एंटर होते ही अनिका के रिपोर्ट्स को ग़ुस्से से सोफ़ा पर फेंका और अपने सर पे हाथ रख कर.. एक घुर्राते हुए शेर की तरह हॉल में इधर से उधर टहलने लगे। अनिका कमजोर शरीर और भारी कदमों से गौतम के पीछे पीछे घर में दाखिल हुई.. आज अनिका को उसका शरीर रोज़ के मुक़ाबले कुछ ज्यादा ही भारी लग रहा था। वैसे अनिका का वजन उसकी उमर की लड़कियोसे कम से कम ३ गुना ज्यादा था। गोल मोटा सा चेहरा, मोटा पेट और ठुड्डी इतनी वजनदार की अनिका की पूरी गर्दन छिप जाती। १२० किलो की अनिका की तुलना अक्सर लोग अनाज की भरी हुई बोरी से करते। लेकिन अनिका का शरीर जितना मोटा था, उसकी शकल उतनी ही मासूम और क्यूट थी! चेहरे के दोनो तरफ़ एक एक रसगुल्ला लगाया हो वैसे नरम मुलायम सफ़ेद गाल…. ठंड की वजह से हमेशा लाल रहती उसकी नाक और पूरे जहां कि मासूमियत को समेट कर बनायी गयी हो वैसी उसकी २ आँखें! लेकिन आज तक किसी को उसका मासूम चेहरा नहीं दिखा… दिखा था तो बस उसका शरीर… बेडोल और निराकार। बिन माँ की बच्ची अनिका को आज सब से ज़्यादा जरुआत थी… तो उसके पापा के इमोशनल सपोर्ट की। इस लिए अनिका नम आँखों से गौतम की तरफ बढ़ी ही थी की तभी गौतम भारी पहाड़ी आवाज में उस पर गरज पडे…
“मुश्किल से एक मौका मिला था हमें… हमारी ज़िन्दगी को थोड़ा बेहतर बनाने का… नसीब वाली थी तुम.. जो डोगरा खानदान के एक लौते वारिस कुणाल डोगरा से तुम्हारी शादी हुई थी। डू यू नो कितने पावरफुल है वो लोग… मनाली का सबसे पावरफुल खानदान… डोग्रास!!……. हमारे सारे कर्ज, पेंडिंग कोर्ट केस.. हमारी हर तकलीफ से हमें बाहर निकाला था उन लोगो ने। लेकिन शादी के २४ घंटे में ही तुमने हमारी ज़िन्दगी वापस जहन्नुम बना दी… उनको तुम्हारे इस कारनामे के बारे में पता चलेगा तो पता नहीं क्या होगा??? और तुम्हारी छोटी बेहेन कामिनी? उसके साथ कौन शादी करेगा? भले ही वो तुम्हारी सौतेली बेहेन हो.. लेकिन तुम्हारे इस कारनामे की वजह से उसकी भी तो बदनामी होगी.. नहीं नहीं..जब तक ये मामला ख़तम नहीं हो जाता तब तक मैं तुम्हारी छोटी बेहेन कामिनी को और तुम्हारी नयी माँ मनीषा को उसके भाई के घर भेज दूंगा… लेकिन आज नहीं तो कल..सब को पता चल ही जायेगा.. ” ये बोलते हुए गौतम अपना सर पकड़ कर सोफे पर बैठ गए थे… अब उनकी आवाज़ में गुस्सा कम.. और डर ज़्यादा सुनाई दे रहा था… लेकिन गौतम के आंसू मानो करारे शब्द में बदल कर उसके मुँह से निकल रहे थे…! “तेरा पति कुणाल तो शादी करते ही एक घंटे के अंदर ही शहर चला गया था.. अब इस प्रेग्नेंसी के बारे में जब तेरे ससुराल वालों को पता चलेगा… तो भगवन जाने वो लोग क्या करेंगे..!! समाज में इज्जत तो उछलेगी ही, मगर हम फिर से उसी दलदल में फंस जाएंगे जहाँ से निकाल कर लाए थे हमे वो लोग… काश तुम भी अपनी माँ के साथ ही….”
अनिका वो सुन चुकी थी… जो गौतम कहते कहते रुक गया था। अनिका को कड़वे शब्द सुनने की आदत तो थी ही.. मगर आज सवाल उठा था उसके चरित्र पर.. उसकी पवित्रता पर। अनिका इस चक्रव्यूह से जल्द से जल्द बाहर निकलना चाहती थी… मगर उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करें… वो सोच रही थी की जो कुछ भी हो रहा है अगर वो झूठ था, तो फिर उसके पेट में सांस लेने को उत्सुक ये सच क्या था?
अगले दिन गौतम ने घर में लगे सारे सीसीटीवी कैमरे कि पिछले पांच महीने की फुटेज मँगवायी और बारीकी से देखने के बाद वो ये जानकर हैरान हो गया था कि पिछले पांच महीनों से छोटी मोती बीमारी के चलते अनिका घर के बाहर कही गई ही नहीं थी…! ये देख कर गौतम का गुस्सा अब आश्चर्य में बदल गया था। उसको इतना तो समाज में आ गया था की कही कुछ तो गड़बड़ थी… लेकिन उससे कई ज़्यादा उसे ये चिंता थी की अब डोगरा खानदान क्या करेगा?
जल्द ही अनिका की देखभाल के लिए एक नर्स रखी गई… लगातार देखभाल और दवाइयों से अनिका की तबियत में सुधार आ रहा था…लेकिन साथ ही उसे ये बात रोमांचित कर रही थी की उसके अंदर एक नन्हा सा जीव सांस ले रहा था…. अनिका की उम्र भले ही कच्ची हो, मगर उसके अंदर की एक माँ जल्द ही जन्म लेने को उत्सुक थी..! उसकी जिंदगी में आखिरकार वो आने वाला था जो सिर्फ और सिर्फ उसका होगा…
और चार महीने बीत चूके थे.. अनिका अपनी प्रेगनेनसी में लगभग सब कुछ भूल चुकी थी.. ना वो किसी से मीलती, न कोई उससे मिलता.. सिर्फ़ वो अपने अंदर पनप रही उस नन्ही सी जान से बात करती रहती! ऐसे में एक दिन अनिका पाइप से अपने घर के बहार के गार्डन में पानी छिड़क रही थी तभी अचानक उसने अपने पेरो के नीचे कुछ हलचल महसूस की… वो कुछ समज पाती उसके पहले, उसके घर के मेन गेट से एक स्पोर्ट्स बाइक अंदर आयी.. मशीन गन से जैसे गोलियां निकलती है वैसी बाइक की आवाज़ सुनकर ऐसा लगा मानो बॉर्डर पर जंग शुरू हो गई हो…… बाइक की आवाज़ सुन कर अनिका ने पानी का पाइप छोड़, दोनों हाथों से अपना पेट पकड़ लिया.. जैसे अपने डरे हुए बच्चे को आंचल में छुपा रही हो। बाइक आकर बंगले की सीढ़ियों के पास रुकी। लेधर शूज, टाइट जीन्स, डार्क ब्लू टी शर्ट और चेहरे पर लगे पीले चश्मे के आर पार लड़के की गहरी लाल आंखें साफ दिखाई दे रही थी… आनिका ने जैसे ही इस लड़के को देखा, उसकी धड़कन मानो डर और टेंशन से तेज़ हो गयी… ये लड़का और कोई नहीं, बल्कि अनिका का पति कुणाल डोगरा था… २१ साल का कुणाल अपनी नज़र अनिका पर गड़ाए हुए बड़े ही स्टाइल के साथ बाइक से उतरा.. और अनिका की तरफ धीरे धीरे आगे बढ़ने लगा. अनिका और कुणाल, दोनों ही एक दूसरे को देखे जा रहे थे… कुणाल की शादी अनिका से भले ही उसकी मर्ज़ी के खिलाफ करवायी गयी थी… लेकिन अपनी बीवी की कोख में किसी और का बच्चा देखना कोई भी मर्द शायद बर्दाश्त न कर पाए…! कुनाल शादी के बाद, मंडप से सीधा दिल्ली अपनी कॉलेज की पढाई पूरी करने चला गया था.. और वही पोहोच कर शादी के दूसरे दिन उसे अनिका की प्रेगनेंसी की खबर मिली थी.. अनिका उस दिन से लगभग रोज़ सोचती, की जिस दिन उसका सामना कुणाल से होगा.. उस दिन पता नहीं वो कैसे रियेक्ट करेगा… आज जब कुणाल उसके सामने आ रहा था तब पता नहीं क्यों, निर्दोष होने के बावजूद डर और शर्म के मारे कनिका को एक अजीब सी बेचैनी महसूस होने लगी थी…
अनिका तुरंत अपने पापा को फ़ोन लगाती है लेकिन उनका फ़ोन नहीं लग रहा था. कुणाल को अपनी और बढ़ता देख, अनिका की घबराहट इतनी बढ़ गयी थी की वो डर के मारे बड़बड़ाने लगी…. “वो.. पापा तो नहीं..है.. घर…पे।” ऐसे में कुणाल अनिका के सामने आ कर अर्रोगंस से खड़ा था… वो अनिका को ऊपर से नीचे तक देख रहा था… सुजा हुआ चेहरा, 8 महीने की प्रेगनेंसी वाला मोटा पेट, गद्दी जैसे मोटे हाथ और पांव…. प्रेग्नेंसी की वजह से अनिका पहले से भी ज्यादा मोटी नजर आ रही थी.. अनिका को देख कर कुणाल ने अपने होंठों को दबाया… और एक गहरी सांस लेकर.. ज़ोर से जमीन पर थूक दिया। ये देखते ही अनिका की कमजोरी मनो अचानक से वापस आ गयी हो… . वो ठिकसे अपने पैरो पर खड़ी नहीं रह पा रही थी .. मानो जैसे उसे खुद का बोझ लग रहा हो … कुनाल गुस्से में घूरते हुए जैसे जैसे आगे बढ़ रहा था वैसे वैसे अनिका एक डरे सहमे मेमने की तरह घभराकर पीछे होती जा रही थी….. ऐसा लग रहा था मानो कुनाल के नोकीले लेदर शूज किस्सी भी वक़्त अनिका के नंगे मुलायम पाँव को कुचल देंगे ….. तभी मेन गेट से गौतम की कार अंदर आ कर रुकी…….गौतम कार से उतरकर तेज़ कदमो से कुनाल के पास आया जैसे कोई सेक्रेटरी अपने बॉस के पीछे भाग रहा हो….. अनिका ने अपने पापा को ऐसा पहले कभी नहीं देखा था….
गौतम कुणाल के पास आ कर उसको कहता है “अरे कुणाल बेटा.. आज अचानक से तुमने फ़ोन किया की तुम आ रहे हो …?!! तुम्हारी कॉलेज में छुट्टियाँ शुरू हो गई क्या?”
कुनाल ने गुरराके कहा “पुरे 4 महीने बाद आया हु.. ऐसा बोल कर अपने दामाद को वेलकम करोगे आप? वैसे.. काफी कुछ बदल गया है यहाँ पे” कुणाल ने अनिका के पेट की तरफ देख कर अपनी जेब से रम की बोतल निकाली और मुह से लगा ली. वो आया तब से उसकी नज़र अनिका के पेट पर ही जमी हुई थी.. माहौल को थोड़ा ठीक करने के लिए गौतम ने कुणाल से कहा …..“आओ कुनाल बेटा.. अंदर चल कर बात करते है” लेकिन गौतम की बात को अनसुना करते हुए और रम के घूँट लेते हुए कुनाल अनिका के पेट को घूरता रहा.. गौतम को भी थोड़ा अजीब तो लग रहा था.. लेकिन कही न कही वो कुणाल के मन की बात को भांप रहा tha.. इसलिए बड़े ही सहजता से गौतम ने कुणाल से कहा..”देखो कुनाल, अगर तुम ये शादी तोडना चाहते हो, तो मैं समज सकता हु..” ये सुनते ही कुणाल चिल्ला उठा… “जो बात तुम समज सकते हो वो बात मेरे बुड्ढे दादाजी नहीं समज सकते ना… जबरदस्ती इस मोटी के साथ मेरी शादी करवादी… और अब दादाजी चाहते है की इसके नाजायज़ बच्चे को भी मैं अपना नाम दू… एक तो इस मोटी को मेरे गले बांध कर पता नहीं किस बात का बदला ले रहे है मुझसे…! और फिर अनिका की और देखते हुए कुणाल ने कहा “एक तो इससे देख ता हु तो ऐसा लगता है जैसे मुझे किस्सी ऐसे गुन्हा की सजा दी जा रही है जो मैंने किया ही न हो! शादी के मंडप से तुरंत इस्सी लिए भागा था मैं.. ताकि मुझे इसके साथ एक पल भी न रहना पड़े..!” बोलते बोलते कुनाल की सासें फूलने लगी थी जैसे की वो महीनो से अपने अंदर भरी हुई भड़ास निकाल रहा हो… अनिका और गौतम, दोनों ही कुणाल की बात सुन्न कर ऐसा महसूस कर रहे थे जैसे अभी के अभी ये धरती फट जाए और दोनों बाप-बेटी उसके अंदर समां जाये…
कुणाल का आक्रोश अपनी चरम सीमा पर था. अब भी कोई कसर बाकि रह गयी हो वैसे उसने अनिका की तरफ इशारा करते हुए आगे कहा “देखो इस बेशरम लड़की को.. शादी के फेरे लेते वक़्त पेट में किसी और का बच्चा लिए घूम रही थी. और इतना होने के बाद भी आज मेरे सामने ऐसे बेशर्मो की तरह खड़ी है…!! क्या लगा तुजे… की मैं तेरे इस बच्चे को मेरा नाम दे दूंगा? कुनाल डोगरा का नाम???? पता नहीं किस गटर का कीड़ा है..” ये बोलते हुए वो गुस्से में अनिका की तरफ आगे बढ़ता है, मानो जैसे वो गुस्से में पता नहीं अनिका को क्या कर देगा.. लेकिन तभी शराब की वजह से कुणाल के पैर लड़खड़ाए… और वो अपना बैलेंस खो बैठा.. लेकिन तुरंत गौतम ने आगे आ कर कुणाल को पकड़ कर संभाल लिया..
अनिका कुणाल की बातें सुन कर जितना ज़्यादा हर्ट थी, उतनी ही ज़्यादा गुस्से में भी थी… वो भले ही अपने मोटापे की वजह से ऐसी सब बाते सुनने की आदि थी मगर अभी उसे इस बात पर कुणाल से ज़्यादा खुद पर घिन आ रही थी.. की कोई उसके होनेवाले बच्चे को गाली दे रहा था और वो मजबूर खड़ी सुन क्यों रही थी?… बच्चे का ख्याल आते ही नजाने कैसे.. अचानक अनिका के अंदर अजीब सी हिमत आ गयी… और बिना कुछ सोचे, वो बोल पड़ी “मैं इस शादी को नहीं मानती….”
ये सुन्न कर गौतम और कुणाल, दोनों शॉकड थे… कुणाल सोच रहा था की कल की आयी फिद्दी सी लड़की में इतनी हिमत कहाँ से आ गयी की वो मेरे यानी कुणाल डोगरा के सामने ऐसे बोले..?!! लेकिन इसके पहले की वो कुछ रियेक्ट कर पाता, गौतम ने बात को सँभालते हुए कुणाल से कहा की “इस वक़्त अनिका की तबियत ठीक नहीं है.. इसलिए तुम उसकी बातो पर ध्यान मत दो… और रहा सवाल बच्चे का… तोह उसके पैदा होते ही उसे अनिका से हमेशा के लिए अलग कर दिया जेयेगा… मेरा यकीन करो”
अपने पापा की ये बात सुनकर अनिका को ऐसा लगा जैसे किसी बड़े से ट्रक ने उसे पीछे से टक्कर दे मारी हो… और वो ज़िन्दगी और मौत के बीच जूझ रही हो… टेंशन में अनिका की साँसे फूलने लगी… और एक पल के लिए वो सास लेना चुक गयी… ठीक उसी पल में अचानक से अनिका के पेट में जोरसे दर्द शुरू हो गया… दर्द के मारे अनिका एक झटके से अपने पीठ के बल गिरी….. और ओझल होती आँखों से उसने देखा की गौतम दौड़ कर उसके पास आ रहा था…. गौतम ने हड़बड़ी में फ़ोन करके एम्बुलेंस को बुला लिया था, लेकिन ये सब देखने के बावजूद कुणाल वही खड़ा बे-शर्म और बे-रहम बन कर रम के घुट मार रहा था… मानो उसे किसी भी चीज़ से कोई फरक नहीं पड़ रहा हो… शाम की मद्धम रौशनी अनिका के सामने धुंधली हो रही थी.. उसे बस एक छोटी बच्ची की आवाज़ सुनाई दे रही थी. मम्मी…मम्मी…उठो न मम्मी……
देखते ही देखते आज ६ साल बीत चुके थे… लेकिन आज भी वही आवाज़ अनिका के कानो में गूंज रही थी..
“मम्मी.. उठो मम्मी प्लेन लैंड होने वाला है.” फ्लाइट के बिज़नस क्लास की आरामदायक सीट पे सोयी अनिका की आंखें झटके से खुली.. और सामने थी उसकी ६ साल की बेटी रिया…!
रिया का मासूम चेहरा और उसकी खूबसूरत कत्थई आंखें देख कर अनिका की जान में जान आई… उसका गुजरा हुआ कल कोई बुरे सपने से कम नहीं था….! आज अनिका अपनी बेटी रिया के साथ बेंगलुरु से मनाली ६ साल बाद लौट रही थी…. रिया ने अपना गेमिंग टेबलेट मां के पर्स में रखते हुए बड़े प्यार से अनिका से पूछा
“मोम..क्या हम मेरे डैड को ढूंढने मनाली जा रहे हैं?”
लेकिन अनिका ने बड़े ही सरल तरीके से उसे समझाया की “मैंने तुम्हें कितनी बार कहा है.. तुम्हारे कोई डैड नहीं है”
इस पर रिया जवाब देते हुए कहती है “ओह कम ऑन मोम.. स्कूल में हमे टीचर कहती है की हर बच्चे के मां-बाप होते हैं.. अब मेरे गेमिंग वर्ल्ड के कैरेक्टर्स की तरह मैं किसी दूसरी दुनिया से तो आयी नहीं हूँ न… तो ऑब्वियस्ली मेरे पापा भी तो होंगे ही..?!! या किसी जादूगर ने मुझे अपनी हैट में से बाहर निकाला है??? आबरा का डाबरा रिया बाहर आ जा” रिया की ये बात पर माँ-बेटी दोनों ही ज़ोर से हंस पड़े.
अपनी हसी पे काबू पाते हुए रिया ने दूसरा सवाल पूछा.. “तो क्या हम यहां मेरे भाई को ढूंढने आए हैं?!” रिया का ये सवाल सुन्न कर अनिका एक गहरी सोच में डूब गयी.. उसे याद आ गया की कैसे 6 साल पहले अस्पताल में उसने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था.. और अनिका के पापा की कद काठी के एक आदमी ने उसके दोनों बच्चों को उससे छीनने की कोशिश की थी.. कमजोर अनिका ने बड़ी हिम्मत से उस आदमी का सामना कर के रिया को तो बचा लिया था ..मगर अफसोस की वो अपने बेटे को नहीं बचा पायी.. और वह आदमी उसके बेटे को लेकर भाग निकला था.. इस हाथापाई में अनिका को चोट भी लगी थी.. चोट इतनी गहरी थी कि उसका बचना लगभग नामुमकिन था.. और इसी वजह से अनिका की मौसी उसे अपने साथ बेंगलुरु ले गई थी जहां अनिका का इलाज हुआ था.. हालांकि इन 6 सालों में अनिका पूरी तरह से बदल चुकी थी.. हार्मोनल इंबैलेंस की वजह से बढ़ा हुआ उसका शरीर अब एकदम ही नॉर्मल हो चुका था.. घने लंबे कमर तक के बाल.. काली नोकीली आंखें.. गोरे गोरे गाल with a perfect jaw लाइन.. गुलाब की पंखुड़ी जैसे नरम होंठ… और सुराही लम्बी गर्दन.. शिफॉन की लाल साड़ी में अनिका की कमर ऐसी लग रही थी.. मानो कोई नदी समंदर से मिलने के लिए करवट ले रही हो.. फ्लाइट अटेंडेंट हो या फ्लाइट के अन्य यात्री… सब लोग आते जाते अनिका पे एक नज़र ज़रूर डालते…
मासूमियत से सवाल कर रही रिया को ये नहीं पता था की अनिका के मनाली लौटने का मुख्य कारण यह था कि पिछले ६ सालो में कुणाल के दादाजी किसी भी हालत में अनिका और कुणाल की शादी तोड़ने की मंज़ूरी नहीं दे रहे थे.. लेकिन ६ साल बाद आखिरकार कुणाल की जिद के आगे उन्हें झुकना पड़ा.. और वह यह शादी तोड़ने राजी हो गए…. मनाली वापस जा कर वो डाइवोर्स पेपर्स पर साइन करने के साथ साथ अपने खोये हुए बेटे को भी ढूंढना चाहती थी…
थोड़ी ही देर में फ्लाइट ने लैंड किया !
मनाली की जमीन पर कदम रखते ही न जाने क्यों अनिका की बाई आंख फड़कने लगी.. उसे ऐसा लगा कि आगे जरूर कुछ बुरा होने वाला था….. वो ये सोच कर लगेज काउंटर की तरफ बढ़ ही रही थी… के तभी उसकी नज़र पीछे की तरफ पड़ी… जहा फ्लाइट के सभी यात्री मुस्कुरा कर उसी को देखते हुए आगे बढे जा रहे थे… मानो सब उसकी खूबसूरती में गुम हो कर उसके पीछे पीछे चले आ रहे हो.. अनिका थोड़ी कॉन्ससियस हो कर और रिया को सँभालते हुए फटाफट आगे चलने लगी.. लगेज काउंटर पर से जैसे ही अनिका अपना लगेज लेने के लिए जुकी, फटाक से ३ और लोग भाग कर आये और उसका लगेज उठा कर अनिका को देने लगे….मानो सब इसी बहाने अनिका से बात करने की कोशिश करना चाहते हो.. अनिका चुकचाप अपना लगेज ट्राली पर डाल कर और रिया का हाथ पकड़ कर एयरपोर्ट के बहार की तरफ निकलने लगी.. तभी उस्के फोन पर उसके पापा गौतम का फ़ोन आया. अनिका के फ़ोन उठाते ही गौतम ने बिना कोई खैर खबर पूछे अनिका से कहा की
“कुणाल तुम्हें लेने एयरपोर्ट आ रहा है.. उसके साथ सीधे घर आ जाना…. यहां तुम्हे दो पेपर साइन करने हैं.. एक डिवोर्स पेपर्स और दूसरे वो….”
इतना कहकर गौतम अटक गया….और फिर कुछ सोच कर वो आगे कहा की
“खैर तुम घर आओ.. मैं तुम्हे सब बताता हूं”
अनिका ने भी बिना कुछ कहे ही फोन काट दिया.
जैसा की गौतम ने कहा था, कुणाल एयरपोर्ट के बहार बड़ी ही बेसब्री से अनिका का वेट करते हुए खड़ा था.. ६ सालो में कुणाल भी काफी बदल चूका था.. अब वो एक स्टूडेंट नहीं, बल्कि एक बिजनेसमैन था..
डार्क ब्राउन कलर का कड़क सूट, शार्पली कटे हुए और जेल से सेट किये हुए बाल.. और ट्रिम की हुई दाढ़ी में कुणाल की पर्सनालिटी तो निखर रही थी मगर उसके तेवर अब भी वही थे.. रूड और अर्रोगंस से भरपूर.. वो तो कनिका का इंतज़ार भी सिर्फ इसलिए कर रहा था क्यूंकि उसे जल्द से जल्द कनिका से मुक्ति चाहिए थी.. कुणाल का एक पैर ज़मीं पर तो दूसरा पेर रेलिंग पर टिकाया हुआ था.. जिसे वो constantly हिला रहा था… exit door की तरफ देखते हुए कुणाल ने बड़ी ही बेसब्री से अपने ड्राइवर से कहा..
“ज तक इस दुनिया में किसी आदमी को डिवोर्स मिलने की इतनी ज्यादा खुशी नहीं हुई होगी… किसी भी कीमत पर आज ही उस मोटी से मैं डाइवोर्स पेपर्स पर साइन करवा लूंगा..“
कुणाल के ड्राइवर राजू ने बीड़ी फूकते हुए कहा..
“आप फिक्र मत कीजिये.. आज सुबह-सुबह मैं माता के दर्शन करके निकला हूं.. मैंने भगवान से प्रर्थना की है की आज आपकी ६ सालो purani यह मनोकामना पूरी हो.. आज पक्का पेपर्स साइन हो ही जायेंगे..”
ये सुन कर कुणाल ने बड़े ही कटीले अंदाज़ में कहा “अबे सिर्फ डिवोर्स नहीं चाहिए.. अनिका की कंपनी भी तो चाहिए.. जो उसकी मरी हुई मां उसके नाम करके गई थी”
राजू, जिसने अपने हाथ में अनिका के नाम का बोर्ड पकड़ा हुआ है, वो उस बोर्ड को सीधा करते हुए कहता है की अरे वो फैक्ट्री भी मिल जाएगी.. फ़िक्र नॉट.”
तभी कुणाल के दिमाग में कुछ आता है…और वो ड्राइवर से कहता है “अच्छा सुन.. उसको देखते ही हमेशा मेरा मूड ऑफ हो जाता है. और आज इतने अच्छे दिन पर मैं अपना मूड ख़राब नहीं करना चाहता… इसलिए मैं उल्टा घूम के खड़ा हो जाता हूँ.. ठीक है?? तूने भले ही उसे न देखाहो.. लेकिन तेरे हाथ में उसके नाम का बोर्ड देख कर वो तेरे पास आ ही जाएगी..”
कणाल आलस लेते हुए उल्टा घूमने ही वाला होता है की तभी अचानक उसकी नज़र एयरपोर्ट के दरवाजे पर पड़ी.. और कुछ देख कर उसकी नज़र और कमर वही अटक गयी… कुणाल ने एयरपोर्ट से बहार आते हुए एक लड़की को देखा तो वो देखता ही रह गया.. मानो जैसे उसने आज से पहले किसी खूबसूरत लड़की को देखा ही ना हो.. उस लड़की को देख कर कुणाल के मुँह से निकल जाता है है की “यार इतनी खूबसूरत लड़की तो मनाली में कभी दिखी ही नहीं….”
ड्राइवर राजू ने भी उसकी बात में हामी भरी..
कुणाल बिना वक़्त गवाए, रेलिंग कूदकर उस लड़की की ओर दौड़ पड़ा.. और अचानक से वो उस लड़की के सामने आ कर खड़ा हो गया और उसका रास्ता रोक लिया…. ये खूबसूरत लड़की और कोई नहीं, बल्कि अनिका थी. कुणाल इस बात से बिल्कुल अनजान था… अचानक कुणाल को अपने सामने देखकर अनिका हैरान थी…. और उसे एक ही पल में वह सब कुछ याद आ गया जो वह हमेशा से भूलना चाहती थी….
अनिका एक पल के लिए सेहम गयी.. और उसको लगा की कही पहले की तरह कुणाल फिर से उसका इंसल्ट न कर दे, और इसलिए अनिका सीधा कुणाल को थप्पड़ जड़ देना चाहती थी.. मगर वह अपनी बेटी रिया के सामने कोई तमाशा नहीं करना चाहती थी….. और तभी अचानक कुणाल बोल पड़ा..
“हेलो मिस gorgeous ! आप मनाली में पहली बार आई लगती हैं.. क्योंकि अगर पहले आई होती तो यह तो पॉसिबल नहीं है कि अब तक आप मेरी नज़रो से unnoticed रहती..”
अनिका को पहले तो कुछ समज में नहीं आया लेकिन अगले ही पल वो समज गयी की कुणाल उसे पहचान नहीं पाया था.. अनिका ने रिया की तरफ देखा.. तो वो अपने टेब में वीडियो गेम खेलने में मस्त थी.. और क्यूंकि उसने हैडफ़ोन पहने थे, उसे आस पास की कोई बात सुनाई नहीं दे रही थी.. ये देख कर अनिका को राहत मिली.. अनिका कुणाल की बात को अवॉयड करते हुए वहां से साइड हो कर टैक्सी को आवाज़ देने लगी..”टैक्सी…. टैक्सी”
अनिका नहीं चाहती थी की कुणाल उसे पहचाने.. लेकिन कुणाल भी हार मानने वालो मेसे थोड़ी था…!
कुनाल ने उसकी तरफ भाग कर फिर से उसका रास्ता रोक दिया…..
“अरे अरे.. टैक्सी की क्या जरूरत है.. मैं अपनी गाड़ी में आपको जहां चाहे छोड़ देता हूं न…और एक मिनट.. यह नन्ही गुड़िया कौन है?” यह कहते हुए उसने रिया की तरफ इशारा किया..और उसके गाल पर हाथ फिराया.. लेकिन रिया जब टेब पर गेम खेल रही होती है तब उसे कोई डिस्टर्ब करें वो उसे बिल्कुल अच्छा नहीं लगता… इसलिए टेब से बिना ऊपर देखे, उसने अपना गाल जट्टक लिया. ऐसा करने में रिया के कान से हैडफ़ोन निचे की तरफ स्लाइड हो कर गिर के उसके कंधे पर आ गया था. लेकिन अभी भी उसका ध्यान वीडियो गेम खेलने में ही था.
अनिका टैक्सी ढूंढने में बिजी हो गयी लेकिन कुणाल पीछे पीछे आ कर उससे एक नहीं तो दूसरे तरीके से बात करने की कोशिश करता रहता था..
कुनाल: “ओह..समझ गया यह आपकी छोटी बहन है…है ना?
यह सुनकर रिया ज़ोर ज़ोर से हंस पड़ी..
तभी कुणाल को वापस गौतम का फ़ोन आया.. कुणाल ने जैसे ही फ़ोन उठाया, गौतम ने पूछा.. “क्या तुम्हें अनिका दिखी???” कुणाल ने बड़ा ही तीखा जवाब देते हुए कहा “ना दिखने के लिए आपकी बेटी कोई सुई तो है नहीं…. जब वह गेट से बाहर आएगी तो सिर्फ वह ही दिखेगी…. बल्कि उसके पीछे खड़े लोग भी दिखना बंद हो जाएंगे huhh ” और वो रूडली फ़ोन काट देता है.
कुणाल की बात सुन्न कर अनिका को अंदाज़ा आ गया था की वो पक्का उसी के बारे में बात कर रहा था.. अनिका को कुणाल पर बोहोत ही ज़यादा गुस्सा आ रहा था.. लेकिन उसे बस अब जल्दी से टैक्सी चाहिए थी.. वो पूरे जोश और गुस्से के साथ जोर से चिल्लायी ….टैक्सी …. ये सुन कर कुणाल और ज़्यादा इम्प्रेस हो गया और बडे ही मीठे अंदाज में बोलै.. “सुनिए मिस मैं आपको छोड़ देता हूं ना…. वैसे भी मैं जिसे लेने आया था.. लगता है वह आई ही नहीं……आप अगर बेंगलुरु की फ्लाइट में आई है तो आपने फ्लाइट में किसी बेहद मोटी औरत को देखा होगा..” ये सुन्न कर अनिका एक पल को रूकी और उसने कुणाल की तरफ मूड कर देखा..कुणाल आगे कहता है की “दरअसल 6 साल पहले वो 120 किलो की थी.. अब 6 साल में तो उसने पक्का डबल सेंचुरी पार कर ही ली होगी”
अनिका बिना कुछ बोले कुणाल की बाते सुन्न कर सोच रही है की पता नहीं क्या क्या सोच रहा है वो उसके बारे में… अपनी बातो को सुनते हुए कुणाल अनिका तो देखता है तो वो उसे इम्प्रेस करने के चक्कर में और उसे हसाने के लिए आगे कहता है के “वैसे मुझे लगता है की फ्लाइट वालों ने उसे बिठाने से मना कर दिया होगा….. कहा होगा कि अगर तुम बैठोगी तो फ्लाइट कैसे उड़ेगी???” कहते हुए वो खुद भी हस्ता है और उम्मीद करता है की उसके जोक से अनिका को भी हसी आएगी.. लेकिन अनिका बड़े ही ठन्डे तरीके से उसको देखती रही..
अनिका को हस्ता हुआ ना देख कर कुणाल ने भी अपनी हसी रोकी और बोला “अजी छोड़िए मैं भी किसकी बातें लेकर बैठ गया.. कहां आप और कहां वो??”
तभी एक टैक्सी अनिका के पास आ कर रुक गयी.. दूसरी तरफ पीछे से कुणाल का ड्राइवर हाथ में अनिका गुलेरिया का बोर्ड लेकर दौड़ा चला आ रहा था.. वो आ कर कुणाल के बाजु में खड़ा हो गया.. मानो वो कुणाल को कुछ बताने आया हो..
अनिका ने जल्दी जल्दी में रिया को टैक्सी में बिठाया और खुद जब टैक्सी में बैठने जा रही थी तब कुणाल ने थोड़ा मायूस होते हुए कहा.. “वैसे आपको मनाली में किसी भी चीज की जरूरत हो तो सिर्फ एक ही नाम याद रखिएगा – कुणाल डोगरा – किसी से भी मेरा नाम पूछियेगा.. मेरे घर तक छोड़ जाएगा आपको.” टैक्सी वहाँ से निकलने ही वाली थी की तभी कुणाल ने टैक्सी रोकी.. और विंडो के पास जुक कर बड़े ही flirtious अंदाज़ में कहा.. “अरे मिस..मिस..अपना नाम तो बताती जाओ” ये सुन कर अनिका ने कुणाल को देखते हुए अपनी आंखों से काला चश्मा निकाला.. और बड़े ही तेज और कटीली नजर से कुणाल को देखते हुए, बिना किसी भी हावभाव से धीरे से कहा…”अनिका गुलेरिया”
Chapter 2
मनाली के छोटे से एयरपोर्ट के बहार की चहल पहल के बीच कुणाल ने अनिका को पूछा
“अरे मिस..मिस..अपना नाम तो बताती जाओ” ये सुन कर अनिका ने कुणाल को देखते हुए अपनी आंखों से काला चश्मा निकाला.. और बड़े ही तेज और कटीली नजर से कुणाल को देखते हुए, बिना किसी भी हावभाव से धीरे से कहा…”अनिका गुलेरिया”
कुणाल यह सुनकर दंग रह गया… वो कन्फूसिओं में खड़ा सोच रहा था की इस खूबसूरत लड़की ने अपना नाम अनिका क्यों बताया होगा? लेकिन तभी टैक्सी के अंदर बैठी अनिकाने कुनाल के पीछे खड़े ड्राईवर के हाथ का बोर्ड दिखाते हुए कहा…..
“तुम अनिका गुलेरिया को पिक करने आए हो ना????……”
अब तक कुणाल भी अनिका के नाम वाला बोर्ड देख चूका था.. उसने सोचा की टैक्सी में बैठी लड़की बस वह बोर्ड का लिखा नाम पढ़ रही थी….!
इस लिए कुणाल ने आगे बढ़ कर कहा की “अरे उस मोटी को तो मैं टैक्सी से भेज दूंगा.. आप दोनों आराम से मेरे साथ कार में चलिए ना…” कुणाल की यह बात सुनकर अनिका ने उसे एक एर्रोगंट स्माइल दी और टैक्सी ड्राइवर को टैक्सी चलने को कह दिया.
कुणाल के मुंह पर धुआं छोड़ती टैक्सी रफ्तार पकड़ कर कुणाल के सामने से निकल गयी…. दो पल के लिए कुणाल मायूस हुआ… लेकिन तभी उसे कुछ याद आया… इस लिए हड़बड़ाहट में उसने ड्राइवर के हाथ से बोर्ड लिया…. और ड्राइवर को कहा
“तू फटाफट इस टैक्सी के पीछे जाकर मैडम का पीछा कर और मुझे यह बता कि वह कौन सी होटल में रुकी है.. और सुन.. उन्हें बिल्कुल शक नहीं होना चाहिए…. चल भाग”
ड्राइवर झट से गाड़ी निकाल कर अनिका की गाड़ी का पीछा करने लगा…. एयरपोर्ट से मनाली लगभग 1:00 से 1:30 घंटे का रास्ता था…. रिया ने वापस अपने कान पर हेड फ़ोन्स लगाए और वो टेबलेट पर गेम खेलने में बिजी हो गयी. वैसे रिया को देख कर कोई यह नहीं कह सकता कि वह एक लड़की है….. जींस.. स्पोर्ट्स शूज.. टीशर्ट.. छोटे बाल.. और सर पर कैप…… रिया की उम्र भले ही छोटी थी.. मगर उस पर मॉडर्न टेक्नोलॉजी का काफी ज्यादा प्रभाव था…..! गेमिंग की दुनिया में रिया ‘स्वीट एंजल’ के नाम से काफी पॉपुलर थी…. रिया को गेम खेलते हुए देख अनिका सोच रही थी की पाता नहीं रिया को मनाली ला कर उसने सही काम किया था या गलत..! मोबाइल की रिंग से अनिका अपने खयालो से बहार आयी..तो उसने देखा की उसके पापा गौतम बार-बार अनिका के फोन पर कॉल किए जा रहे था….. अनिका ने बिना फ़ोन उठाये अपने मोबाइल को साइलेंट मोड पर किया और आँखें बांध कर बैठी रही.. मानो जैसे वो आने वाले तूफ़ान के लिए खुद को मन ही मन तैयार कर रही हो..!
अगले एक घंटे में अनिका की टैक्सी मनाली की सबसे बड़ी ५ स्टार होटल ‘पैराडाइज इंटरनेशनल’ में दाखिल हुई….. लेकिन उसका पीछा कर रहे राजू को होटल के मैं गेट पर ही रोक दिया …होटल का बेल बॉय अनिका का इंतजार पहले से कर रहा था….. अनिका के आते ही बेल बॉय उसका सामान लेकर उसे लिफ्ट की ओर ले गए..
होटल का प्रीमियम फर्नीचर, आकर्षित अम्बिएंस और वेल्कमिंग स्टाफ को देख कर समाज आ रहा था की क्यों देश विदेश से आये टूरिस्ट मनाली की ये शानदार होटल में रहना पसंद करता था.. बेलबॉय अनिका को लिफ्ट की तरफ लेजाता हुआ बोला की उसका बुकिंग प्रेसिदेन्तिअल् सुइट में है.. जो होटल के टॉप फ्लोर पे है..
लिफ्ट में दाखल होते ही बेल्ल्बोयने २४वे फ्लोर का बटन दबाकर अनिका से कहा
“मैडम इस टॉप फ्लोर पर सिर्फ दो ही अपार्टमेंट्स है….. एक आपका…. और दूसरा है हमारी होटल के मालिक मिस्टर रोहित मारवा का…..वह अपने बेटे और छोटे भाई के साथ यही रहते हैं…”
कुछ ही पल में लिफ्ट २४ वे माले पे पोहोच गयी थी.. लिफ्ट का दरवाज़ा खुलने पर अनिका ने देखा की यह फ्लोर होटल के बाकि के फ्लोर्स से ज़्यादा सुकून वाला था.. इतना सुकून…जितना अनिका ने शायद अपने घर में भी महसूस किया हो..
अनिका के रूम के पास जा कर बेलबॉयने कार्ड से दरवाजा अनलॉक किया… वो कार्ड अनिका के हाथ में देकर और सामान वही छोड़ कर चला गया….. रिया अभी भी गेम खेलने में बिजी थी.. अनिका रिया को रूम के अंदर ले कर आयी और उसने रूम का दरवाज़ा बांध किया. प्रेसिदेन्तिअल् सुइट एक काफी लग्जरीअस अपार्टमेंट था…. मॉडर्न और कंफर्टेबल बैडरूम एक शानदार लिविंग एरिया.. और बड़ी सी बालकनी जहां से पूरा मनाली का नजारा दिखाई दे रहा था.. यह प्रेसिडेंटिअल सुइट हर कोई afford कर सकता था.. क्यूंकि कमरे का दिन का किराया पचीस हज़ार था… मगर world फेमस न्यूरो सर्जन डॉ.अमृता उर्फ़ अनिका ko को इससे क्या फरक पड़ने वाला था….!! थोड़ी देर नई जगह का आनंद उठाने के बाद रिया थक कर बिस्तर पर सो गयी थी……. अनिका प्यार से उसे चद्दर ओढ़ा ही रही थी…. तभी उसका फोन vibrate हुआ.. अनिका ने देखा की उसके पापा गौतम का फ़ोन आ रहा था.. अनिका की आवाज़ से कहीं रिया जाग ना जाए इसलिए हड़बड़ाहट में अनिका बेडरूम से बाहर आकर, बेडरूम का दरवाजा बंद करके फ़ोन उठती है.. जैसे ही अनिका ने फ़ोन उठाया, गौतम ने गुस्से से तिलमिलाकर कर कहा “अनिका व्हाट काइंड ऑफ बिहेवियर इस थिस??? कुणाल 2 घंटे एयरपोर्ट पर तुम्हारा इंतजार करता रहा…. तुम उसके साथ आई क्यों नहीं??? कहां हो तुम???”
इस पर बड़े ही शांत अंदाज़ से अनिकाने अपने पापा से कहा….
“बस आ रही हूं मैं….”
यह कहते ही अनिकाने फोन काट दिया…… न-जाने क्यों लेकिन अनिका काफी डिस्टर्ब हो गयी थी… गौतम ने बचपन से लेकर आज तक अनिका के साथ चाहे जैसा भी व्यवहार किया हो.. आखिर वो थे तो अनिका के पापा ही..जिनसे अनिका 6 साल बाद मिलने वाली थी.. अनिका ने कुछ सोच कर होटल रूम को बहार से लॉक किया.. और वो होटल की लॉबी में लिफ्ट के पास आ कर लिफ्ट के आने का इंतज़ार करने लगी… तभी अनिका के फोन पर उसकी असिस्टेंट राजलक्ष्मी का फ़ोन aaya….
अनिका ने फ़ोन पिक किया तो रा ने अनिका का हाल पूछते हुए कहा की “मैडम आशा करती हूं आपकी फ्लाइट सेफ और कंफर्टेबल थी.. और आपकी नींद भी पूरी हुई होगी…. याद है ना..आपको रोज़ compulsory ८ घंटे सोना ही है?
अनिका उसकी बात को काटते हुए कहती है की “हां हाँ याद है..तुम ये बताओ, तुमने मुझे फिर से वही बात बताने के लिए फ़ोन किया है जो तुम पिछले एक महीने से रोज़ मुझे बताती आ रही हो? या आज कुछ नहीं बात बताने के लिए फ़ोन किया है?”
राजलक्ष्मी थोड़ा हिचकिचाते बोली.. “अरे मैडम क्या करून में.. फिर से वो बिजनेस टाइकून रोहित मारवा का मेल आया है…. वह अपनी दादीमां का इलाज देश की सबसे बड़ी न्यूरो सर्जन डॉक्टर अमृता यानी कि आपके पास करवाना चाहते हैं…. इस वक्त वो मनाली में ही है.. और आप भी मनाली में है…. तो मैंने सोचा.. क्या मैं.. अपॉइंटमेंट फिक्स कर दू..?”
लेकिन तभी अनीका ने कड़क शब्दों में कहा…..
“बिल्कुल नहीं.. यह बड़े लोग अपने बड़े बुजुर्गों की चिंता का सिर्फ ढोंग करते हैं….. इनका असली मकसद तो कुछ और ही होता है…. बुजुर्गों की प्रॉपर्टी, बिजनेस या और कुछ….. हमें इन लोगों से दूर ही रहना चाहिए…. और वैसे भी, मनाली आने के पीछे मेरा मकसद कुछ और है….उस मकसद से मैं अपना ध्यान नहीं भटकाना चाहती.. और हां राजलक्ष्मी यह मत भूलो कि मैं इस वक्त ऑफिशल लीव पर हूं…”
राजलक्ष्मी अनिका की असिस्टेंट ही नहीं, बल्कि उसकी दोस्त भी थी.. इसलिए उसने अनिका का मूड लाइट करते हुए कहा “ok mam, as you wish! मगर एक बात बता दू… मैंने सुना है यह रोहित मारवा की पर्सनालिटी काफी डेशिंग है…. टोल डार्क हैंडसम ….और हां इतनी सी उम्र में इतना बड़ा बिजनेस टाइकून…… देश की काफी लड़कियां उनसे सिर्फ बात करने को मर मिटने को तैयार होती है….और आप हैं कि रोहित आपसे खुद मिलना चाहता है और आप उसे अवॉइड कर रही हैं?!!…अगर लाइफ में थोड़ा सा रोमांस आ ही जाता है तो इसमें नुकसान क्या है…??? बाकी आपकी मर्जी.. सोच लो…. रोहित का फोटो भेजू ????”
अनिका समाज गयी थी की राजलक्ष्मी अब उसकी टांग खींच रही थी.. तभी अनिका ने लिफ्ट को ऊपर आता देख, राजलक्ष्मी से जल्दी जल्दी में कहा की “अगर ऐसा है तो तुम एक एक काम करो……तुम ही उसे डॉक्टर अमृता बन कर मिल लो…. वैसे भी यहां डॉक्टर अमृता को चेहरे से कोई नहीं जानता.. यहां तो मैं सिर्फ अनिका गुलेरिया हूं…! अब चलो फ़ोन रखो..”
लेकिन राजलक्ष्मी ने भी जल्दी जल्दी में बोला “ठीक है ठीक है.. I होप यू एन्जॉय योर वेकेशन. और हाँ.. रोहित की फोटो भेजूंगी एक बार देख जरूर lenaaaaaaaa…….” इसके पहले की राजलक्ष्मी अपनी बार पूरी कर पति, अनिका हस्ते हुए फ़ोन काट देती है.
लेकिन इसके पहले की अनिका लिफ्ट के अंदर जा पाती, लिफ्ट वापस बांध हो कर निचे चली जाती है. तभी अनिका को लगा जैसे मानो उसके पीछे कोई खड़ा हो…. अनिका ने जैसे ही पीछे मुड़ कर देखा, तो वो हैरान हो गयी.. पीछे रिया खड़ी थी… उसका चेहरा कुछ उखड़ा हुआ था.. और वो बस अनिका को एकटक देखे जा रही थी.. अनिका को लगा की रिया नींद से अचानक उठ कर उसने अनिका को पास नहीं देखा होगा इस लिए ऐसे कड़ी होगी..इस लिए अनिकाने नीचे झुक कर प्यार से रिया के दोनों गालों पर किस किया और बोली…….
“मम्मा जल्दी वापस आ जाएगी…. और आते वक्त तुम्हारी फेवरेट चॉकलेट आइसक्रीम लेकर आएगी.. ठीक है??? चलो अब जाओ कमरे में.. और आराम करो.. या तो अपना favourite वीडियो गेम खेलो.”
तभी वापस लिफ्ट आ चुकी थी.. लिफ्ट का दरवाजा खुला और अनिका लिफ्ट के अंदर चली गई….अन्दर जा कर अनिका ने रिया से फिर एक बार कहा…
“सीधे रूम में चले जाना हाँ… मम्मा विल मिस यू…. एंड मम्मा लवज यू ” लिफ्ट का दरवाज़ा बांध हो गया और लिफ्ट निचे जाने लगी… बहार जाने की जल्दी में अनिका एक बात भूल रही थी.. की उसने अपने कमरे का दरवाज़ा बहार से बंध किया था… फिर भी रिया रूम में बहार कैसे आ गयी थी??
अनिका की लिफ्ट के निचे जाते ही अनिका के रूम के सामने वाले रूम का दरवाजा खुला.. और उसमे से एक 26…27 साल का हैंडसम आदमी बाहर आया.. ब्लैक चमकीले लाठर शूज, ब्लैक ट्राउर्स, वाइट शर्ट और ब्लैक ब्लेजर.. किसी रियासत के राजकुमार से बिलकुल काम नहीं लग रहा था वो आदमी..
और लगे भी क्यों नहीं… क्योंकि यह आदमी था मारवा इंडस्ट्रीज का सीईओ रोहित मारवा…. रोहित अपने कमरे से निकला.. और लिफ्ट के पास खड़े बच्चे की तरफ बढ़ते हुए और उस बच्चे को डांटते हुए रोहित ने कहा..
“beta कितनी बार कहा है तुम्हें… की ऐसे ही बिना बताये कमरे से बाहर मत निकला करो.. तुम मेरी बात सुनते क्यों नहीं आर्यन…?”
आर्यन??? जिस लड़की को रिया समज कर अभी कुछ ही पल पहले अनिका ने बात की थी, उसी बच्चे को रोहित किसी दूसरे नाम से पुकार रहा था??!!! लेकिन सच बात वो यही थी.. की वो बच्चा रिया नहीं… बल्कि आर्यन था..
दरअसल अनिका जिस बच्चे को रिया समझ कर उससे बात कर रही थी, वह बच्चा मशहूर बिजनेस टाइकून रोहित मारवा का इकलौता बेटा था आर्यन tha…… मारवा इंडस्ट्रीज का इकलौता वारिस आर्यन…!! और इन सब में सबसे मज़ेदार बात ये थी.. की कि रोहित का बेटा आर्यन और अनिका की बेटी रिया दोनों की शकल एक दूसरे से मिलती जुलती थी.. यानी की रिया और आर्यन… हमशक्ल थे……!!
तो रोहित लॉबी में जिस बच्चे से बात कर रहा था, वो दरअसल आर्यन नई था… और रिया अभी भी अनिका के कमरे में सो रही थी.. रोहित आर्यन से बात कर रहा था लेकिन आर्यन की नज़रे अभी भी लिफ्ट के दरवाजे पर जमी हुई थी… आर्यन की गोल मटोल कठै आँखें और और खूबसूरत मासून सा चेहरा देखकर ऐसा महसूस होता था जैसे उसने अभी अभी आकाश से उतरता हुआ टिमटिमाता तारा देख लिया हो… रोहितने पीछे से फिर से आर्यन को आवाज़ देते हुए कहा..
“आर्यन ध्यान कहां है तुम्हारा…. सुना नहीं बीटा.. अंदर चलो….”
रोहित आर्यन का हाथ पकड़ के उसे लगभग खींचते हुए रूम के अंदर ले जा रहा होता है.. तभी आर्यन ने झटके से अपना हाथ छुड़ाकर रोहित से कहा…..
“मुझे चॉकलेट आइसक्रीम चाहिए..” ये सुन कर रोहित थोड़ा हैरान हो गया… हमेशा गुमसुम और गुपचुप रहने वाले आर्यन का बर्ताव आज रोहित को कुछ अजीब लग रहा था. रोहित ने तुरंत कुछ सोच कर अपनी जेब से फोन निकाला…. और होटल के cctv रूम में फ़ोन कर के उसके रूम के बहार का cctv फुटेज तुरंत मंगवाया… वह देखना चाहता था कि अभी अभी लिफ्ट के पास आर्यन के साथ क्या हुआ था.. कुछ ही पल में सिक्योरिटी इंचार्ज लैपटॉप पर cctv ले कर आया गया.. फुटेज मैं रोहित ने जो देखा वह देखकर वह दंग हो गया….
आर्यन एक ऐसा बच्चा था….. जो किसी अजनबी से तो दूर बल्कि रिश्तेदारों से भी ज्यादा ज़्यादा बात नहीं करता था, ना ही उसके पापा के अलावा किसी के साथ मिक्स हो पता होता था… लेकिन cctv में आर्यन ने एक बिल्कुल अनजान औरत को अपने पास आने दिया….यहां तक की उसे किस भी करने दिया….ये बात रोहित को बड़ी अजीब लगी… रोहित सोच रहा था की ये कैसे हो गया, वही आर्यन बार-बार दोहरा रहा था..
“चॉकलेट आइसक्रीम चाहिए…. मुझे चॉकलेट आइसक्रीम चाहिए…”
दूसरी तरफ अनीका, गुलेरिया हाउस पोहोच गयी थी.. गुलेरिअ हाउस… उसका अपना घर… जो ६ साल पहले टक खंडर जैसा था, लेकिन अनिका ने आज घर के मैं गेट में कदम रखा तो देखा की घर का रूप रंग पूरी तरफ से बदल चुका था…. गार्डन फिर से हरा भरा हो चुका था… और उसी हरे भरे बगीचे के बीचो बीच रंगीन लाइटों वाला शानदार फवारा था.. घर के मैं गेट से अंदर आते ही अनिका को महसूस हुआ… की घर के अंदर पार्टी चल रही थी….. अनिका ने गार्डन में खड़े हुए देखा की वहां यंग लड़के लड़कियां अंग्रेजी गानों पर नाचते झूमते नजर आ रहे थे…. वही कही एक बोर्ड लगा हुआ था…जिसपे लिखा था..”Happy birthday कामिनी”… कामिनी… यानी अनिका की सौतेली छोटी बहन.. उसी के बर्थडे की पार्टी चल रही थी. तभी गार्डन के किसी कोने से एक लड़की के गिर गिराने की आवाज आई…. अनिका ने आवाज़ की दिशा में घूम कर देखा तो एक लड़की ज़मीन पर गिरी हुई थी.. जैसे ही वो लड़की अपने कपडे साफ़ करती हुई उठी, अनिका को याद आया की वो लड़की अनिका की बुआ की बेटी प्रीति थी…..
हु….अगले साल… मिस हिमाचल बनूंगी… और उसके बाद मिस इंडिया… क्या तुम अब भी कहोगी कि तुम्हारी अनिका दीदी मुझसे ज्यादा खूबसूरत है….?
डरी सहमी प्रीतिने दबी आवाज मे कहा…
“हां… अनिका दीदी बहुत सुंदर है… हां अनिका दीदी सब से ज़्यादा सुंदर है….”
प्रीति की बात सुनकर सब हंस पड़े….. कामिनी ने बड़े ही स्टाइल और एटीट्यूड में चलते हुए…..सब लोगों से कहा.. “अच्छा एक काम करते हैं… वोटिंग कर लेते हैं..आप को वोट करना है के इस मोटी और मुझ में ज्यादा खूबसूरत कौन है…. ठीक है?” यह बात कह कर कामिनिने अपने एक दोस्त से सिगरेट जलाने का लाइटर लिया और उससे अनिका की फोटो जला दी… दूर कड़ी अनिका चुपचाप ये सब देख रही थी.. कामिनी ने जले हुए फोटो के टुकड़े एक जूस के गिलास में मिला दिए….और कहा,
“तो गाइस.. क्या आप अपने वोट के साथ तैयार हो??? तो बोलो मुझे कितने वोट….?”
कामिनी के सारे दोस्तों ने अपना हाथ कामिनी को वोट देने के लिए एक साथ हवा में उठा लिए..
“बेचारी प्रीति…. सारे वोट तो मुझे ही मिल गए… तुम तो हार गई… चलो कोई बात नहीं.. अब हार गयी हो.. तो तुम्हे सजा भी मिलेगी ना… तो तुम्हारी सजा ये है…की..तुम्हारी इस खूबसूरत मोटी दीदी के जले हुए फोटो की राख को मैंने इस जूस के गिलास में मिला दिया है.. तुम्हे बस ये जूस पीना है….लेकिन जैसे ही प्रीती ने उस जूस को पिने से मन किया, कामिनी ने प्रीति के मुँह को अपने हाथ से पकड़ कर, उसके गालो को दबाया.. और कामिनी ने प्रीति को ज़बरदस्ती जो जूस पिलाने की कोशिश की.. लेकिन इसके पहले की वो प्रीति के मुँह में जूस दाल पति, ऐन वक़्त पर एक हाथ आकर बीच में कामिनी का हाथ पकड़ कर उसे रोक लेता है….. ये हाथ अनिका का था.. अनीका ने गुस्से में कामिनी का हाथ इतना कस के पकड़ा था कि कामिनी की चीख निकल गई….
बिन माँ की अनिका को बचपन में साक्षी बुआ से ही माँ का प्यार मिला था.. और प्रीति तो मानो अनिका की cousin नहीं, बल्कि सगी छोटी बेहेन हो.. अनिका प्रीति की तरफ आगे बढ़ ही रही थी, इतने में उसे लगा की प्रीति की हालत कुछ ठीक नहीं.. ऐसा लग रहा था जैसे काफी वक्त से उसकी सहेलियां उसका मजाक उड़ा कर उसका तमाशा बना रही थी और इन सब की लीडर थी कामिनी….. हाथ में वाइन का गिलास, लाल रंग का बैकलेस टॉप, काले रंग का मिनी स्कर्ट और गोल्डन रंग की ऊंची हीलस मे कामिनी किसी ग्लैमरस मॉडल से कम नहीं लग रही थी…..
प्रीति ठीक से उठ पाए उसके पहले कामिनीने प्रीति को उसकी कलाइ से पकड़ कर वापस जमीन की ओर पटक दिया…. कामिनी के हाथ में अनिका का पुराना फोटो था… वह अपनी सहेलियों को फोटो दिखा कर पूछ रही थी ..
“ध्यान से देखो इस मोटी को…… ये पागल प्रीति कह रही है कि यह मोटी मुझसे ज़्यादा सुंदर दिख है…. अब तुम लोग बताओ….. जिसे यह मोटी सुंदर लगे….. वह तो कोई पागल ही होगी ना…?”
जमीन पर गिरी प्रीति दबी कुचली आवाज में कहती है…
“अनीका दीदी सचमुच बहुत सुंदर है… बस उनका वजन थोड़ा सा ज्यादा है..”
लेकिन इस बात पर तो कामिनी तिलमिला उठी…
“यू स्टुपिड गर्ल…. तुजे पता भी है की खूबसूरती क्या होती है? मुझे देख.. मेरे फेस को.. मेरे बॉडी को देख.. ये होती है खूबसूरती. ऊपर से मैं मेडिकल स्टूडेंट हूं… और इस साल मिस मनाली कंपटीशन भी जीत चुकी
अनिकाने कामिनी के हाथ से गलास चिनकर कहा….
“हार और जीत का फैसला खेल खत्म होने के बाद होता है…. और खेल अब तक खत्म नहीं हुआ….”
अनिकाने जमीन पर गिरी प्रीति को उठाया. …प्रीति ने अनिका की आंखों को गौर से देखा.. प्रीति इस आँखों को, इस आवाज़ को पहचानती थी… वह समझ गयी की ये लड़की और कोई नहीं बल्कि उसकी अनिका दीदी ही थी..प्रीति अनिका का नाम ले कर तुरंत उसके गले लग गयी.. ये देख कर कामिनी शौकड थी.. उसे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा था… वो समज नहीं पा रही थी की कल टक की १२० किलो की अनिका, आज इतनी फिट, फाइन एंड गॉर्जियस कैसे दिखने लगी??? यह चमत्कार आखिर हुआ कैसे…?
आसपास खड़े कामिनी के सभी दोस्त भी सरप्राइज हो गए …….दोस्त आपस में ही बातें करने लगे
दोस्त १: अरे यार ये anika इतनी खूबसूरत कैसे हो गई…
दोस्त २: यह तो किसी फिल्म की हीरोइन जैसी लगती है…
दोस्त ३: माय गॉड she looks so gorgeous and sexy….
सब की बाते सुन कर अनिका ने बड़े ही रुआब से कहा.. “चलो.. जीत किसकी हुई यह तो पक्का हो गया… अब जो सजा तय की थी वह पूरी कर ली जाए??”
ये कहते हुए अनिका ने कामिनी की कलाई को पकड़ा.. और अनिका ने वही जूस का गिलास कामिनी को देते हुए उसे पिने को कहा.. कामिनी ने गुस्से से अनिका के हाथ को जातक दिया जिससे जूस का गिलास निचे गिर गया.
कामिनी गुस्से में जुलस रही थी.. “यह कैसे हो सकता है.. तुम तुम इतनी बदल कैसे गई…?”
और तभी गिलास टूटने की आवाज़ सुनकर गौतम और अनिका की सौतेली मां मनीषा वहां भागते हुए आ गए…. उनके वहां देखते ही कामिनी ने नाटक शुरु कर दिया….और एकदम से बेचारी बन्न कर कहने लगी..
“देखो मां… पापा…. अनिका मेरी बर्थडे पार्टी में आकर मेरी पार्टी खराब करना चाहती है…. मैंने सिर्फ इतना पूछा कि तुमने अपना वजन कैसे घटाया तो मुझसे कहने लगी…. अब मैं तुमसे काफी ज्यादा खूबसूरत हूं भला तुम्हारी औकात ही क्या है मेरे सामने…”
और ये कहते ही कामिनी झूठ मुठ रोने लगी…. इससे पहले कि अनीका अपनी सफाई में कुछ कहती…. हमेशा की तरह गौतम ने बिना सचाई जाने अनिका को डांटना शुरू कर दिया..
“बस करो अब अनिका… बहुत तमाशा हो गया…एक डिवोर्स पेपर पर साइन करने के लिए कितना नाटक करोगी और???” घर के अंदर चलो कुछ जरूरी बात करनी है तुमसे…” ये कहते हुए गौतम और मनीषा, अनिका का हाथ पकड़ कर उसे अंदर ले गए….
घर में घुसते ही गौतम दरवाजा बंद करता है.. और ६ साल बाद अपनी बेटी को मिलने की कोई भी ख़ुशी ना जताते हुए और सीधा मुद्दे की बात करते हुए उसने गौटन सीधे मुद्दे की बात शुरू करता है..
“देखो अनिका…. जो हो गया सो हो गया …हम लोगों को और परेशान करके तुम्हें क्या मिलेगा…? तुम मेहरबानी करके इन दो कागजात पर साइन कर दो…” अनिका ने देखा तो उसके सामने रूमके सेण्टर टेबल पर २ पेपर्स और एक पेन पड़ा था.
अनिका ये सुन्न कर थोड़ा चौक गयी.. वह यहां अपने डिवोर्स पेपर पर साइन करने आई थी…. फिर यह दूसरे पेपर्स किस चीज के थे…? गौतम ने मानो अनिका के मन की बात सुन ली हो वैसे उसने कहा
“दरअसल तुमसे डिवोर्स लेने के बाद हम.. यानी की मैं और तुम्हारी नयी माँ चाहते हैं की कुणाल और कामिनी की शादी हो जाए.. कुणाल को भी इस शादी से कोई ऐतराज़ नहीं है.. और कामिनी तो पहले से ही कुणाल को पसंद करती थी…. बस कुणाल के दादाजी की एक ही इच्छा है….” यह कहते हुए गौतम ने अपना गाला साफ़ किया.. मानो जैसे वो आगे कुछ बोलने के लिए हिमत जूता रहा हो.. और आखिर में गौतम ने उसे वो बात बता ही दी, जिसके लिए वो आज सुबह से अनिका को फ़ोन कर कर के घर पे आने को कह रहा था…
गौतम ने असली मुद्दे पे आते हुए कहा “अनिका.. दरअसल..तुम्हारी मां के गुज़र जाने के बाद उसकी फार्मा कंपनी जो तुम्हारे नाम पर हो गयी थी… वह कंपनी तुम अपनी छोटी बहन कामिनी को शादी के तोहफे में दे दो बीटा…… मैंने सारे डाक्यूमेंट्स तैयार करवा लिए हैं…. तुम सिर्फ सिग्नेचर कर दो….”
अनिका ये सुन कर कुछ देर गौतम की और देखती रही.. वो सोच रही थी.. की क्या सच में उसके पापा ने वो कह दिया था… जिसे वो सुन कर भी मान ना नहीं चाहती थी? और तो और..वह कभी सोच भी नहीं सकती थी.. कि डोगरा खानदान के साथ रिश्ता बनाए रखने के लिए उसके पापा इतना नीचे गिर सकते थे….. एक पल के लिए भले ही अनिका थोड़ी कमज़ोर पड़ गयी हो.. लेकिन दूसरे ही पल उसने खुद को सँभालते हुए उसे मेज पर रखे उन् पेपर्स को देखा…… बिना कुछ कहे अनिका पेपर्स की तरफ आगे बढ़ी.. उसने पेन उठाई और कुछ सोच कर वो डिवोर्स पेपर के पन्नो पर फटाफट साइन करने लगी…. गौतम और मनीषा ने ये देख कर थोड़ी राहत की सांस ली.. उनको लगा की अनिका सब सब कागज़ पर साइन करने को मान गयी.. लेकिन तलाक के पेपर्स पर साइन करने के बाद उसने धीरे से अपनी मां की कंपनी के कागजात उठाये.. और बोली…
“अपना कहने को इस दुनिया में इस कंपनी के अलावा कुछ नहीं है मेरे पास…. माफ कीजिएगा लेकिन.. यह कंपनी में आपको नहीं दे सकती….” अनिका बड़ी ही शालीनता से मना करके सीधा वहां से निकल जाती है…. गौतम और मनीषा को यकीन नहीं हो रहा था की अनिका, जिसने आज तक उसके पापा की हर एक बात चुपचाप मान लेती थी, उसने आज उनकी बात मानने से साफ़ मना कर दिया था? अनिका की सौतेली माँ मनीषा भाग कर अनिका के पीछे जाती है और उसे रोकते हुए बोली..
“क्यों हमें बर्बाद करने पर तुली हो अनिका? पहले ही एक बिन-बियाही माँ बन्न कर तुमने समाज में हमारी इतनी इज्जत उछाली वह कम थी क्या…? अब अपनी बहन की जिंदगी भी बर्बाद करना चाहती हो…?” मनीषा की बातो को अनसुना करते हुए अनिका घर के मैनगेट से बहार निकलने ही वाली थी की.. तभी कामिनी उसके सामने आ खड़ी हुई.. और बोला..
“तुम्हें क्या लगा… तुम वह कंपनी मेरे नाम नहीं करोगी तो कुणाल मुझसे शादी नहीं करेगा?? वेहम है यह तुम्हारा..!! कुणाल मुझसे शादी इसलिए करना चाहता है क्योंकि मैं उसे पसंद हूं… ना की तुम्हारी उस फैक्ट्री के लिए.. जैसे उसे तुम्हारे साथ करनी पड़ी थी.. और तुम यह सब नहीं देख सकती.. क्योंकि तुम बचपन से ही मुझसे जलती हो….”
अनिका ने एक कटाक्ष बरी मुस्कान के साथ कामिनी से कहा
“कौन किससे जलता है इसका नमूना तुम बाहर दिखा चुकी हो…. और रहा सवाल बचपन का.. तो तुम्हें तो आदत है…. मेरी हर चीज़ को चीन ने की… मेरे लिए जो भी अच्छे कपड़े, अच्छे खिलोने ,अच्छी सैंडल आती थी, वह तुम ही तो रख लेती थी…. लगता है.. अभी भी वो आदत गयी नहीं तुम्हारी.. जिस लड़के को मैंने divorce दिया, उसी से तुम शादी करना चाहती हो..?!! तो ठीक है… कर लो..कोई बात नहीं.. मगर कंपनी तो मैं नहीं दे सकती…”
बचपन में अनिका का फायदा हर कोई उठा ले जाता था.. लेकिन इसके बावजूद उसके मुँह से कभी चु तक नहीं निकलती थी.. शायद इसी लिए सब ने सोचा होगा होगा की अभी भी अनिका को बेहला फुसला कर, समाज का और बेहेन के भविष्य का वास्ता दे कर बेहला कर उसका फायदा उठाया जा सकता है.. लेकिन किसी को नहीं पता था की अनिका का शरीर ही नहीं, उसका मन, उसके विचार.. हर कुछ इन ६ सालो में बदल चूका था.. आज अनिका को इस तरफ सब के अरमानो पर पानी फेरता देख, सब लोग गहरे शॉक में थे.
अनिका से मुँह से ऐसे तीखे शब्द कामिनी पहली बार सुन रही थी.. और अब कामिनी का पारा सातवें आसमान पर था..
वो घुर्राती हुई अनिका से बोली “समझती क्या हो खुद को??? वजन घटा लिया तो ज़बान भी लड़ाना सिख गयी क्या? चाहे कुछ भी कह लो, मैन कल भी तुमसे ज़्यादा खूबसूरत थी… और मैन हमेशा तुमसे ज़्यादा खूबसूरत रहूंगी… दिखने में भी तुमसे आगे… और पढ़ने में भी तुमसे आगे.. कुछ ही साल में डॉक्टर बन जाऊंगी…. मुझ जैसी लड़की को छोड़कर कुणाल तुम्हारे पास वापस आ ही नहीं सकता….” कामिनी भी नहीं जानती थी की उसके मुँह से आखिर कुणाल की बात क्यों निकल गयी थी.. लेकिन उसकी इसबात पर अनिका ने भी मुस्कुरा कर कह दिया..
“तो चलो एक और शर्त लगाये….??”
अनिका की यह बात सुनकर ना-जाने क्यों, कामिनी का कॉन्फिडेंस अचानक से थोड़ा कम हो गया.. क्योंकि कही ना कही उसे हकीकत पता थी… वह अनिका का नया रूप भी देख चुकी थी.. और वो कुणाल की फितरत से वाकिफ भी थी….. और तभी घर के मैन गेट के बाहर से कुणाल की आवाज aayi…
“कहां गई वह मोटी मुझे एयरपोर्ट पर 2 घंटे वेट करवाया.. आज छोडूंगा नहीं उसे…”
कुणाल की ये बात सुन कर कामिनी टेंशन में आ गयी.. लेकिन अनिका वही खड़े कामिनी के सामने मुस्कुरा रही थी…
Chapter 3
कुनाल: “समजती क्या है वो अपने आप को???”
कुणाल की आवाज सुनते ही कामिनी डर गई। वो नहीं चाहती थी, के कुणाल अनिका का ये बदला हुआ रूप देखें। वो दौड़कर घर गार्डन के बाहर की ओर गई.. हाय हील्स के कारण उसे दौड़ने में परेशानी हो रही थी.. मगर इन्सेक्युरिटी के मारे वो किस्सी तरह भाग कर गयी.. और किसी तरफ गिरती पड़ती कुणाल के पास पहोच कर पहली हुई साँसों से उसने कुणाल से कहा
कामिनी:: कुणाल अंदर मत जाओ
कुनाल ये सुनकर चौका.. लेकिन तभी कामिनी बात बदलते बोली…
“मेरा मतलब उस मोटी के मु लग कर आज के दिन तुम अपना मूड खराब मत करो ना.. प्लीज..”
लेकिन कुणालने कामिनी को साइड में धकेलते हुए अंदर जाने की कोशीश की। इससे कमीनी और ज़्यादा गभरा गयी.. और उसने अपने दोनो हाथो से ताकत लगा कर कुणाल को पकड़ कर वही रोक लिया। कुणाल इस वक़्त इतना गुस्से में था की उसने वही खड़े खड़े अनिका पर चिल्लाना शुरू किया..
“huhh समझती क्या है वो अपने आप को? 2 घंटे तक मुझे एयरपोर्ट पर धुप में खड़ा रखा..”
बात हाथ से निकल जाए इसके पहले कामिनी ने कुछ सोचा और कहा..
“वो दरअसल.. तुमसे मिलने में उसे शर्म आ रही थी। जब गयी थी। तब 120 किलो वजन था। अब 6 साल बाद.. और भी मोटी हो चुकी है ना.. इस लिए..”
इतना कह कर कुणाल का ध्यान भटकने के लिए कामिनी धीरे से अपनी उंगलियां कुणाल की जैकेट पर फेरने लगी.. और थोड़ा रोमेंटिक अंदाज से बोली
“देखो कुणाल.. आज मेरा बर्थडे है.. और आज मैं तुम्हें एक ऐसी गिफ्ट देने वाली हूँ.. जो तुम हमेशा याद रखोगे.. वैसे.. मम्मी पापा अंदर बैठकर अभी अनिका से डिवोर्स पेपर्स पर साइन करवा रहे हैं”
कुनाल का ध्यान अब भी घर के दरवाज़े की और था मगर कामिनी ने उसे बातो में उल्जा दिया.. और अपने हाथो से कुणाल का चेहरा अपनी तरफ करते हुए कामिनी आगे बोली
” you know what…वो तो मान ही नहीं रही थी.. वो तो थोड़े पैसों की लालच दी.. तब जा कर वो डिवोर्स पेपर्स पर साइन करने को राज़ी हुई…”
कुणाल, जिसके साथ कामिनी की शादी होने वाली थी, उसकी आँखों में आँखे डाल कर कामिनी जूठ पर जूठ बोले जा रही थी। और फिर.. अचानक से वो कुणाल का हाथ पकड़कर बोली..
“कम विथ मी.. मैंने तुम्हारे और तुम्हारे दोस्तों के लिए बंगले के पीछे शानदार दावत रखी है। तुम अपने दोस्तों के साथ यहाँ एन्जॉय करो, मैं अभी तुम्हारी मनपसंद शराब और खाना भिजवाती हु।” कहते हुए वो कुणाल का हाथ पकड़ कर उसे घर के पीछे की तरह ले गयी..
कामिनी ने कुणाल को अपने दोस्तो के साथ छोड़ दिया और खुद बंगले के आगे की तरफ भगति हुई चली गयी….
उसी वक़्त कुनाल के फ़ोन पर उसके ड्राईवर राजू का मैसेज आया.. जिस में लिखा था…”होटल पैराडाइस इंटरनेशनल”…. मैसेज पढ़ कर कुनाल के गुस्से से लाल चेहरे पर तुरंत ही एक स्माइल आ गई।… उसे लगा की अब तो बोहोत ही जल्द वो एअरपोर्ट वाली लड्कि से उसकी दूसरी मुलाक़ात होगी.. इसी ख़ुशी में बड़े ही अंदाज़ से उसने अपने पास पड़ी शैम्पेन की बोतल उठायी… और उसे शेक कर के खोली.. और ख़ुशी ख़ुशी दोस्तों के साथ एन्जॉय करने लगा…
कामिनी भागी भागी घर के आगे की तरफ अपने दोस्तों के पास आयी और उन् सब से कामिनी ने कहा की जाओ और जा कर कुणाल को एंटरटेन करो.. और उसको बातो में उलझा कर रखो… ताकि वो अनिका की तरफ ना जाए.. और वो अनिका का बदला हुआ रूप ना देख सके.. उसके दोस्तो के जाते ही कामिनी तेज कदमों से अनिका के पास आयी, जो एक कोने में खड़ी सब कुछ देख रही थी… कामिनी ने जट से अनिका का हाथ पकड़ा और इधर उधर देखते हुए वो अनिका को घर के अंदर ले गयी.. और पहली हुई साँसों से अपने माथे का पसीना पोछते हुए वो गुस्से से अनिका को देखने लगी। अनिका भी कामिनी के सामने देख रही थी… मानो दोनों आँखों आँखों से एक दूसरे को चेतावनी दे रहे हो.. कुछ देर तो दोनों बहनों के बीच “कौन पहले आंख झपकेगा” वाला युद्ध चलता रहा… लेकिन कुछ पल के बाद फाइनली कामिनी ने एक गेहरी सांस छोड़ते हुए अनिका से पूछा
“ओके फाइन.. क्या चाहती हो तुम?”
अनिका के चेहरे पर एक हलकी सी मुस्कराहट आ गयी.. और उसने अपना सर हिलाते हुए बड़े ही शांत और सरल तरीके से कहा
“छोटी बहन हो तुम मेरी.. बस इतना कहूँगी…कुणाल के पीछे इतना पागलपन ठीक नहीं। वो अच्छा लड़का नहीं है।”
ये सुनते ही कामिनी के अंदर का गुस्सा फुट पड़ा… और उसने अनिका के सामने अपनी ऊँगली ताकते हुए कहा..
“जस्ट शट अप। माइंड योर ऑन बिज़नेस। मुझे सब पता है कौन कैसा है।”
कामिनी जितनी मुँहफट थी, उतनी ही शातिर भी.. उसे पता था की अपनी बेहेन के इमोशंस का फायदा कैसे उठाया जा सकता था.. इसलिए उसने तुरंत मौके का फायदा उठा कर कहा.. “अगर तुम्हें मेरी इतनी ही फिक्र है तो कंपनी मेरा नाम क्यों नहीं कर देती?”
अनिका कामिनी जितनी शातिर नहीं थी.. लेकिन अब वो पहले जैसी भोली और ना-समाज भी नहीं रही थी.. अब पहले की तरह वो किसी को अपना फायदा नहीं उठाने देने वाली थी.. कामिनी के इस सवाल से अनिका इतना तो समज चुकी थी की कामिनी को समजाने का कोई फायदा नहीं था…
इसलिए वो आगे कुछ भी कहे बिना, मूड कर जाने लगी.. ये देख कर कामिनी तुरंत अनिका के सामने, उसका रास्ता रोक कर जा खड़ी हुई… और फिर टेबल पर पड़े कंपनी के पेपर्स उठा कर बड़े ही स्टाइल में पन्ने पलटते हुए कामिनी बोलो…”वैसे.. किसके लिए बचा कर रखनी है ये कंपनी? अपने किसी यार के लिए? या अपनी उस नाजायज औलाद के लिए?”
इसके पहले की कामिनी बात ख़तम करे, अनिका ने कामिनी को जोरदार तमाचा जड़ दिया। घर के बहार जो लाउड music बज रहा था उससे कई ज़्यादा तेज़ गूंज थी इस तमाचे की… कामिनी के चेहरे पर मेकअप की एक मोटी परत होने के बावजूद, उसके चेहरे पर अनिका की उंगलियों के निशान साफ नजर आ रहे थे। कामिनी का मुँह खुला और आंखें चौड़ी हो गयी थी।
अनिका: “खबरदार अगर मेरी बच्ची को नाजायज कहा है तो। ज़बान खींच लुंगी। एंड आई मिन इट।” अनिका की लाल आँखों से आंसू कम और गुस्सा ज़्यादा बह रहा था.. अनिका को इतने गुस्से में पहले कभी नहीं देखा था कामिनी ने.. बिना कुछ कहे वो चुप चाप अनिका का रास्ता छोड़ कर साइड में जा कर खड़ी हो गयी. वो समज गई की अगर वो इसके आगे कुछ भी बोली तोह अनिका वो सच में कर देगी जो उसने कहा था…” अनिका गुस्से में अपना पर्स उठाकर बंगले से बाहर निकल गयी। जैसे ही अनिका ने टैक्सी रोकी, तभी वहां भागते हुए प्रीति आयी.. अनिकाने प्यार से प्रीति के गाल पर हाथ फेरा,, और फिर टैक्सी में बैठ चली गयी।
टैक्सी में बैठ कर अनिका ने पर्स से sunglasses निकाले.. और पहन लिए… तभी ड्राईवर ने रियर व्यू मिरर से अनिका को देखा… सूरज भले ही ढल चूका था.. लेकिन अनिका के आंसुओ के दौर अब तक नहीं ढला था.. वो दुनिया में हर चीज़ से लड़ सकती थी..मगर कोई उसकी बेटी को नाजायज कहे.. ये उसे बर्दाश्त नहीं था… लेकिन इसके साथ ही… उसके पास इस बात का भी कोई जवाब नहीं था.. के रिया का बाप था कौन…!
अनिका की प्रेगनेंसी खुद अनिका के लिए एक अनसुलझा सवाल था… ६ सालो में अनिका आज तक उसकी ज़िन्दगी की इस सबसे बड़ी पहेली को सुलझा नहीं पायी थी… की उसे किसी भी लड़के ने छुआ तक नहीं था, फिर भी वो कैसे प्रेग्नेंट हो गयी थी… ये सब सोच ही रही थी वो.. की तभी अचानक उसे कुछ याद आया। अनिका ने आंसू पोंछते हुए पर्स से अपना फ़ोन निकाला.. और उसने अपनी फार्मा कंपनी के पुराने वफादार मैनेजर मनोज को फ़ोन लगाया…कुछ रिंग के बाद। मैनेजर फ़ोन उठाकर कहा..
“अनिका, बेटी। कैसी हो? क्या बात है? आज इतने सालों बाद.. कंपनी की मालकिन ने इस मुलाजिम को याद किया” अनिका अपनी आवाज़ को साफ़ करते हुए कहा..”नहीं नहीं, अंकल। मैं तो सिर्फ कागज पर कंपनी की मालकिन हूँ। कंपनी के असली मालिक तो आप हैं। actually.. अंकल.. बस ये पूछने के लिए मैंने फ़ोन किया था कि.. कंपनी ठीक तो चल रही है ना?”
मैनेजर ने थोड़ा उदास होकर कहा
“बेटा, यूं समझ लो। डूबती नाव में छेद पकड़ के बैठा हूँ। फिर भी सालाना चार paanch lakh ka प्रॉफिट हो जाता है। जो मैं गौतम जी को भिजवा देता हूँ। तुम कहो तो अब से तुम्हें भिजवा दूंगा।”
अनिका ने तुरंत कहा..”नहीं अंकल, उसकी कोई जरूरत नहीं। खैर.. आप अपना खयाल रखिए।”
फ़ोन काटकर अनिका वापस से एक गहरी सोच में डूब गयी.. वो सोच रही थी.. की
आखिर ऐसी तो क्या बात है इस छोटी सी कंपनी में.. जो डोगराज हाथ धोकर इस कंपनी के पीछे पड़ गए हैं। पहले मेरे ज़रिये ये फैक्ट्री हड़पने ही कोशिश की… और उसी के चलते कुणाल से मेरी शादी करवाई… शादी के बाद मैं तुरंत प्रेग्नेंट हो गयी और फिर बंगलौर चली गयी इस लिए मुझसे कंपनी माँगने का मौका नहीं मिला इन्हे.. इस लिए अब कामिनी के ज़रिये मुझसे ये कंपनी हड़पना चाहते हैं… वो भी ऐसी कंपनी… जो ठीक से चल भी नहीं रही है…?”
होटल की तरफ टैक्सी आगे बढ़ ही रही थी तभी रस्ते में उसने आइस-क्रीम का स्टॉल देखा… तो उसे याद आ गया की उसने रिया से प्रॉमिस किया था की वो उसकी फेवरेट चॉकलेट आइसक्रीम ला कर देगी.. इस लिए उसने टैक्सी रस्ते में रोक कर अपना प्रॉमिस पूरा करने के लिए चॉकलेट आइस-क्रीम खदिरी और वापस टैक्सी में बैठ कर होटल की तरफ चल दी.. कुछ देर बाद अनिका की टैक्सी होटल पैराडाइस इंटरनेशनल पहुंची। होटल की रिसेप्शन से होकर अनिका लिफ्ट के पास पहुंचने ही वाली थी.. कि चार पांच बॉडीगार्ड उसके आगे आ गए और हड़बड़ाहट में उन्होंने अनिका का रास्ता रोक लिया। इसी दौरान अनिका के हाथ से समान जमीन पर गिर गया। अनिका थोड़ी सी घभरा गई.. उससे लगा “कही कंपनी पाने के चक्कर में किसीने मेरे पीछे गुंडे तो नही भेजे।” खुद के डर को छुपाते हुए उसने उन् बॉडी गार्ड्स से पूछा..
“कौन.. है..आप लोग?” और इस तरह मेरा रास्ता रोकने का क्या मतलब है?”
एक बॉडीगार्ड ने अनिका से कहा
“सॉरी मैडम। हमें आपका सामान चेक करना होगा।”
अनिका को कुछ समझ नहीं आया.. की उसका सामान चेक कर के किया मिलेगा? उसके पास सिर्फ एक पर्स… और रास्ते से लिया हुआ चॉकलेट आइसक्रीम का पार्सल था। बॉडीगौडने निचे जुक कर वो पार्सल जमीन से उठाया.. और उसे खोल कर चेक किया.. और फिर अचानक एक बॉडीगार्डने अपनी एक ऊँगली आइसक्रीम पैक के डाली.. और फिर वही ऊँगली उसने अपने मुँह में डाल दी….और फिर अपने ब्लूटूथ पर किसी से बात करने लगा
“येस सर.. पॉज़िटिव। इट इस चॉकलेट आइस क्रीम।”
बॉडीगार्ड की बातों से ऐसा लग रहा था जैसे अनिका के पास उसे कोई बॉम्ब मिल गया हो।
ये देख कर अनिका हैरान थी .. और समझने की कोशिश कर रही थी… की आखिर ये बॉडी गार्ड्स कर क्या रहे हैं? तभी एक टोल, स्मार्ट और हैंडसम आदमी उसके सामने आकर खड़ा हो गया। नुकीली जो लाईन, स्टबल बीयर्ड… सिंपल जीन्स और पोलो नेक टी शर्ट में रोहित मारवाह हॉलीवुड के किसी हीरो से कम नहीं लग रहा था।
अनिका ने रोहित की फोटो देखी थी। वो उसे तुरंत पहचान गई। लेकिन इस वक्त रोहित अनिका के लिए किसी गुंडे से कम नहीं था। अनिका ने बड़ी ही सख्ती से पूछा
“एक्स्क्यूस मी? वॉट नॉनसेंस इस थिस। यू कांट डू दिस टू मी। I will कॉल थे पुलिस”
अचानक रोहित की नजर अनिका के चेहरे पर पड़ी। अनिका की गहरी काली आंखें, लम्बे काले घने कमर तक के बाल… और सिंपल पहनावे में निखरती उसकी खूबसूरती को देखकर रोहित एक सेकंड भूल गया, वो क्या कहने आया था..!” तभी दूसरे पल को वो अपनी senses में आया.. और चेहरे पर बिना किसी भाव के उसने कहा
“हाँ। परफेक्ट पहले खुद चोरी करो, फिर खुद ही पुलिस बुलाओ।”
अनिका समझने की कोशिश कर रही थी की आखिर रोहित बोल क्या रहा है.. तभी रोहित ने अनिका को वार्न करते हुए आगे कहा..
“मुझसे और मेरे बेटे से दूर रहना।” अनिका ने इरिटेट होकर कहा ..
excuse me .. मैं कब तुम्हारे पास आयी? and listen .. इस आलिशान होटल के मालिक होने का ये मतलब नहीं है कि तुम अपने guest के साथ ऐसी बदतमीजी करो। आई कैन सू यू इन धी कोर्ट मिस्टर रोहित मरवा।
रोहित अनिका की ये बात तुरंत पकड़ लेता है और कहता है के
“I knew it .. तो तुम जानती हो कि मैं रोहित मारवाह हूँ.. और ये होटल मेरी हैं। तब तो ये भी जानती होंगी कि मेरे परिवार वाले मेरी शादी करवाना चाहते हैं लेकिन मुझे मेरे बेटे के लिए सौतेली माँ नहीं चाहिए..!! इसीलिए तुमने प्लान बनाया होगा,, की पहले मेरे बेटे को फंसा लो.. तो फिर बाप अपने आप कंट्रोल में आ जाएंगे.. क्यों?”
होटल की लॉबी में मौजूद लोग अनिका को शक की नजरों से देखे जा रहे थे । अनिका अपनी इंसल्ट का बदला ले तो सकती थी लेकिन रिया की सेफ्टी के लिए वह कोई तमाशा खड़ा करना नहीं चाहती थी। इस लिए वो ज़्यादा कुछ बोली नहीं…
रोहित जाने से पहले चुटकी बजाके अनिका को फाइनल वॉर्निंग देता है।
“स्टे अवे from माय son !”
इतना कह कर रोहित मुड़कर जाने लगा.. होटल के सभी लोग इस हद तक सकपका गए थे की इतनी बड़ी होटल की लॉबी में, इतने सरे लोगो के बीच.. सिर्फ और सिर्फ रोहित के जूतों की टॉकटॉक गूंज रही थी..रोहित भले ही अनिका से दूर जा रहा था.. मगर अनिका का चेहरा उसके दिल पर छाप छोड़ गया था। ना जाने क्यों, जाते जाते उसको एक बार और अनिका की तरफ देखने का मैं किया.. और इस लिए मूड कर अनिका को देखने जाता है तभी सामने से सर्विस प्लेट ले जाते वेटर से वो ज़ोर से टकराया… और सारी प्लेट्स जमीन पर गिर गई। रोहितने वेटर को देखा… और फिर, अनिका को देखा… और फिर सिर्फ सॉरी कहकर वहाँ से चला गया।
बेहद गुस्से में अनिका ने लिफ्ट का बटन पांच छह बार दबा दिया… और जैसे ही लिफ्ट का दरवाज़ा खुला, वो पांव पटकर अंदर गई और सीधा टॉप फ्लोर का बटन दबाया। दरवाजा बंद होने ही वाला होता था की तभी एक पांव दरवाज़े के बीच में आया जिसने दरवाझे को बांध होने से रोक लिया.. सामने ek 19 साल का लड़का प्रिंटेड टीशर्ट और रेड शॉर्ट्स में खड़ा था… उसके पेअर की वजह से लिफ्ट का दरवाज़ा फिर से खुल गया.. अनिका के गुस्से में सोचा की कौन बत्तमीज़ है ये.. रिया की तरह इस लड़के ने भी कान में हेडफोन और हाथ में मोबाइल पकड़ा हुआ था.. ये लड़का और कोई नहीं… बल्कि रोहित मरवा का कुज़ीन भाई सनी था। सनीने अपनी उम्र से ज्यादा मैच्योर आवाज निकालने की कोशीश की और anika se कहाँ
“देखो दीदी। मेरे भैया आसानी से फंसने वालों में से नहीं है। बहुत लड़कियां आप की तरह कोशीश कर चुकी है।”
अनिका का गुस्सा अब अपने पीक पर था। उसे समझ नहीं आया.. की ये सब उसके साथ क्यों हो रहा था? तभी सनी ने अनिका के जख्म पर नमक छिड़कते हुए कहा..
“काफी लड़कियां ट्राई कर चुकी है ये वाला तरीका.. थिंक सम थिंग आउट ऑफ द बॉक्स…!! इन्फैक्ट.. कई बॉलीवुड एक्ट्रेस भी भाई के साथ जान पहचान बढ़ाने के लिए अपनी शूटिंग मनाली में रखवाती हैं.. मगर मेरे भाई बहुत स्ट्रिक्ट है.. ना वो किसी के पास जाते हैं, न कोई उनके और आर्यन के पास आ सकता है… मेरे सिवा..!!” अनिका की बरदाश्त करने की लिमिट खत्म हो इससे पहले सनीने अपना पांव लिफ्ट के दरवाजे से हटा लिया और दरवाजा अपने आप बंद हो गया… अनिका अब भी सोच रही थी… की आखिर ये उसके साथ हो क्या रहा था…?!!!
दूसरी तरफ गुलेरिया हाउस में पार्टी लगभग खत्म हो गई थी। सारे गेस्ट जा चूके थे.. कुणाल और उसके दोस्त बंगले के पीछे अपनी ही मस्ती में और full on नशे में थे…वो शायद यह तक भूल चूके थे कि वो कामिनी की बर्थडे पार्टी में आए थे.. कुणाल अब नशे में था और बेहद खुश था… क्युकी वो जानता था की कल उसकी मुलाकात फिर से एअरपोर्ट वाली लड़की से होगी.. तभी वहा गौतम, कामिनी और मनीषा हाथ में डिवोर्स पेपर लेकर पहुंचे.. कामिनी ने कुणाल को खुश देखकर उसका एक हाथ पकड़कर कहा
“आई एम सो हैप्पी के कुणाल ने पार्टी एन्जॉय की..”
लेकिन कामिनी इस हकीकत से अनजान थी की कुणाल एयरपोर्ट वाली लड़की और उसकी खूबसूरती के बारे में अपने दोस्तों से बात कर रहा था.. और इस लिए वो इतना खुश नज़र आ रहा था..! तभी गौतम ने भी खुश हो कर kunal se कहा..
gautam: कांग्रचुलेशन आज कामिनी की बर्थडे के मौके पर मेरी तरफ से तुम दोनों को यह तोहफा।
गौतामने कुनाल को डाइवोर्स पेपर्स थमा दिए… कुणालने जल्दीसे पेपर्स लिए। और गौर से देखने लगा। फिर खुश होकर बोला
कुनाल: थैंक यू वेरी मच। इस डिवोर्स पेपर्स को देखकर मैं बता नहीं सकता। कितना हल्का फील कर रहा हूँ। आई एम अ फ्री बर्ड अगेन।
गौतमने भी मज़ाकिया अंदाज में कहा..
गौतम: बट नॉट फॉर लॉन्ग टाइम। जल्द ही तुम्हारी और कामिनी की शादी कर देंगे।
ये सुनते ही कुणाल का मूड खराब हो गया .. वो गौतम से रूडली कहता है,
kunal: इसमें सिर्फ डिवोर्स पेपर्स है। जब तक कंपनी के पेपर्स नहीं होंगे। तब तक ना मेरे घर वाले शादी करवाएंगे। न मैं करूँगा….
कुनाल आखिरी पेग नीट पी लेता है और वहाँ से निकल जाता है।होटल पैराडाइस।
तिलमिलाई अनिका अपने कमरे में आई । अपना पर्स सोफा पर फेंककर पांव center table पर रखकर सोफे पर बैठ गई। उसे ये समझ नहीं आ रहा था नीचे लॉबी में उसके साथ क्या हुआ और क्यों हुआ? उसने होटल बदलने का मन बना लिया। और रिया को लेने। बेडरूम में गयी। बेडरूम का दरवाजा खोलकर उसेने देखा रिया बिल्कुल शांति से सो rahi थी। रीया को इस तरह देखकर अनिका का गुस्सा एक सेकंड में shaant हो गया। वो रिया के माथे को चूमती है। तभी उसके फ़ोन में एक नोटिफिकेशन आया।अनिकाने मोबाइल चेक किया तो देखा की उसके डॉक्टर अमृता नाम वाले मेल बॉक्स में रोहित मारवा का मैसेज आया था। “Want to meet you urgently.. एक पेशेंट है जिसके दिमाग का ऑपरेशन करना है। जो सिर्फ आप कर सकती है।”
मैसेज पढ़कर अनिका को अपनी इंसल्ट का बदला लेने का मौका मिल गया था। उसने तेज उंगलियों से। मैसेज टाइप करके बिना सोचे एक सेकंड में बटन दबा दिया। वहाँ रोहित डॉ अमृता का मैसेज पढ़कर शॉक हो गया। मेल में लिखा था। “दिमाग का इलाज पहले आपको करवाना चाहिए।” रोहित को समझ नहीं आया कि डॉक्टर अमृता जैसी बड़ी न्यूरोसर्जन उसे ऐसा क्यों कह रही थी? रोहित ने मेल पर कुछ टाइप किया लेकिन फिर मैसेज डिलीट कर दिया.. और अपनी कंपनी के आईटी हेड सैम को फ़ोन लगाया। रोहित काफी डॉमिनेट आवाज में कहता है।
रोहित: हैलो सेम।
रोहित की आवाज सुनकर सैम को जैसे पसीने छूटने लगे। रोहित का प्रभाव कुछ ऐसा था लोगों पर कि अगर रोहित ने याद किया है तो जरूर कोई गडबड हुई होगी हमसे। सेम डर के पूछता है।
सैम: येस, येस सर एनीथिंग आई कैन डू फॉर यू?
रोहित सैम को सिर्फ इतना कहता है
रोहित: मेरे ऑफिसियल मेल अकाउंट पर डॉक्टर अमृता का मेल आया है। पता करो वह मेल की लोकेशन कहाँ है? वो जहाँ भी होंगी मैं उसे चार्टर फ्लाइट में जाकर मनाली ले आऊंगा।
सेम के लिए ये काम आउट ऑफ़ ऑफिसियल वर्क था। वो हिम्मत करके जवाब देता है।
सैम: सर ऐक्चुअली। कोई नेटवर्क हमें अपने क्लाइंट का एग्ज़ैक्ट लोकेशन नहीं शेयर करेंगे। इट्स इल्लीगल?
रोहित कहीं नाराज न हो जाए इसलिए खुद अपनी ओर से कह देता है
सैम: बट सर गीव मि सम टाइम आई विल ट्राई एंड फाइन्ड आउट।
निराश होकर रोहितने फ़ोन काट दिया। तभी उसके फ़ोन पर सनी का मैसेज आता है “भैया कम फास्ट आर्यन इस नॉट वेल..”
रोहित उसी वक्त लिफ्ट की ओर दौड़ने लगा। होटल का स्टाफ रोहित को ऐसे भागते देख परेशान हो गया। रोहितने लिफ्ट में टॉप फ्लोर का बटन दबाया मगर आज उसे अपनी लिफ्ट की स्पीड बहुत स्लो लग रही थी। आर्यन पर ज़रा सी तकलीफ आये तो रोहित बर्दाश्त नहीं कर सकता था। जब तक लिफ्ट 24th फ्लोर तक पहुंचती है तब तक तो रोहित के मन में हजारों खयाल गुजर चूके थे। फाइनली लिफ्ट का दरवाजा खुला। सनी दरवाजे पर रोहित का इंतजार कर रहा था । रोहित सीधा बेडरूम की तरफ भागा.. और वहाँ रोहित ने जो देखा वो उसकी समझ से बाहर था। आर्यन गहरी नींद में था। और वो नींद में एक ही चीज़ बोले जा रहा था। “मम्माँ.. चॉकलेट आइस क्रीम… मम्माँ… चॉकलेट आइस क्रीम।”





