62 हजार हैक्टेयर में गेहूं की बोनी हो चुकी है

उप संचालक, किसान कल्याण तथा कृषि विकास ने बताया कि भोपाल जिले में सीहोर, मंडीदीप एवं सोरई इन तीन रैक पाईंटों से खाद की आपूर्ति की जाती है। राज्य शासन द्वारा प्रतिदिन वीसी के माध्यम से खाद आपूर्ति की समीक्षा की जाकर आवश्यकता अनुसार इन रैकों द्वारा उर्वरक उपलब्ध कराया जा रहा है। जिले में चार डबल लॉक केन्द्र, 34 सहकारी सोसायटियों एवं लगभग 100 निजी विक्रेताओं के माध्यम से खाद विक्रय किया जाता है।
भोपाल जिले में आज की स्थिति में लगभग 25 हजार मीट्रिक टन यूरिया तथा 15 हजार मीट्रिक टन डी.ए.पी. सहकारिता एवं निजी संस्थाओं के माध्यम से उपलब्ध कराया जा चुका है। यूरिया बोनी के 25 से 30 दिन उपरांत देने की आवश्यकता होती है तथा जिले में माह नवम्बर अंत तक बोनी पूर्ण होने की संभावना है। उसके उपरांत यूरिया का प्रथम डोज दिसम्बर माह के प्रथम / द्वितीय सप्ताह में, द्वितीय डोज जनवरी माह के प्रथम सप्ताह एवं फरवरी अंत में तृतीय डोज की आवश्यकता होगी। जिले की कुल संभाविक आवश्यकता अनुसार जिले में पर्याप्त उर्वरक की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है तथा तीनों रैक पाईंटों से लगातार यूरिया का आवंटन प्राप्त हो रहा है। उर्वरक आपूर्ति में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं है तथा पूरे सीजन आवश्यकता अनुसार खाद उपलब्ध कराया जायेगा।
भोपाल जिले में कुल 149 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलें बोई जाती है जिसमें से इस बार लगभग 62 हजार हेक्टेयर में गेहूँ की बोनी हो चुकी है। इसके अलावा चना, मटर, मसूर एवं सरसो जिले की अन्य मुख्य फसलें है, फसलों के अनुसार यूरिया एवं डी.ए.पी. प्रमुख उर्वरक है जिनकी आवश्यकता इन फसलों के लिए होती है। यूरिया मुख्य रूप से गेहूँ फसल में दिया जाता है जिससे की फसलों में नत्रजन की पूर्ति होती है। डी.ए.पी. नत्रजन एवं फॉस्फोरस युक्त उर्वरक है जो कि बोनी के समय दिया जाता है। प्रति हेक्टेयर पोषक तत्वों के आधार पर गेहूँ में दो से तीन बोरी डी.ए.पी. तथा तीन से चार बोरी (45 किलो ) यूरिया की आवश्यकता होती है।
पिछले दो दिनों में जिले को उर्वरक प्रदाय करने वाले तीनों रैक पाईंटों से लगातार यूरिया का प्रदाय प्राप्त हो रहा है तथा जिले की विभिन्न सहकारी संस्थाओं में पर्याप्त भंडारण किया गया है। खाद वितरण की नियमित मॉनिटिरिंग की जा रही है तथा जिले के कलेक्टर द्वारा सभी संबंधित अधिकारियों को नियमित रूप से आवश्यकता अनुसार आकलन करते रहने एवं जिले के कृषकों को खाद की आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु निर्देशित किया गया है।

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