ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा पर इस मुहूर्त में करें पूजा, जानें विधि और जरूरी नियम

ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा पर इस मुहूर्त में करें पूजा, जानें विधि और जरूरी नियम
सनातन धर्म में पूर्णिमा की तिथि का काफी महत्व माना गया है। ये दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा के लिए विशेष अहमियत रखता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक अगर इस दिन कुछ शुभ काम किए जाते हैं तो व्यक्ति कुछ परिणाम की प्राप्ति होती है।

अगर आप अपने पापों से मुक्ति पाना चाहते हैं और जीवन से सारे संकटों को दूर करना चाहते हैं तो ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा पर कुछ खास बातों का ख्याल रख सकते हैं।

कब है ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा
वैदिक पंचांग के मुताबिक पूर्णिमा तिथि 30 तारीख को सुबह 11:57 पर शुरू हो जाएगी। इसका समापन 31 तारीख को दोपहर 2:14 पर होगा। ऐसे में इसे 31 मई को मनाया जाएगा। इस दिन चंद्रोदय का समय रात 7:36 पर रहने वाला है।

पूजा का मुहूर्त
अगर मुहूर्त के मुताबिक पूजा करना चाहते हैं तो सुबह 4:02 से 4:43 तक ब्रह्म मुहूर्त रहेगा।
दोपहर 2:27 से 3:37 तक विजय मुहूर्त रहने वाला है।
शाम 6:38 से 7:01 तक गोधूली मुहूर्त रहेगा।
शाम 7:13 7:33 निशिता मुहूर्त रहने वाला है।

कैसे करें पूजा
सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
मंदिर की सफाई कर गंगाजल से पूरा घर शुद्ध करें।
अब आपको एक चौकी पर लाल कपड़ा बेचकर उसे पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति है चित्र स्थापित करना है।
अब धूप, दीप, नैवेद्य और फूल माला अर्पित करें।
अब आपको घी का दीपक जलाकर आरती करनी होगी।
विष्णु चालीसा और कथा का पाठ कर मंत्रों का जाप करें।
भगवान को फल और मिठाई का भोग लगाएं।
जरूरतमंद को अन्न और धन का दान करें।

इन बातों का रखें ख्याल
पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी और सरोवर में स्नान करना शुभ माना गया है।
इस दिन व्यक्ति को किसी भी तरह का वाद विवाद नहीं करना चाहिए।
तामसिक भोजन से दूर रहें और जितना हो सके सात्विक भोजन करें।
घर और मंदिर की साफ सफाई का आपको खास ख्याल रखना है।

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