नई दिल्ली। अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले कई उत्पादों पर 10 प्रतिशत नया टैरिफ लागू करने की घोषणा की है। यह फैसला अमेरिकी प्रशासन द्वारा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में कथित जबरन श्रम (Forced Labour) से जुड़े उत्पादों पर कार्रवाई के तहत लिया गया है। नई व्यवस्था के तहत भारत को 10 प्रतिशत की दर वाले देशों में रखा गया है, जबकि कुछ अन्य देशों पर 12.5 प्रतिशत तक का टैरिफ लगाया गया है।
इस निर्णय के बाद भारतीय निर्यातकों के बीच चिंता बढ़ गई है। विशेष रूप से इंजीनियरिंग उत्पाद, वस्त्र, रसायन, ऑटो पार्ट्स और अन्य निर्यात-आधारित उद्योगों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि आवश्यक वस्तुओं जैसे ऊर्जा, खाद्य सामग्री और कुछ विशेष श्रेणी के उत्पादों को इस टैरिफ से छूट दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नए टैरिफ से भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों पर अल्पकालिक दबाव बढ़ सकता है। वहीं, दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं पर भी उद्योग जगत की नजर बनी हुई है। भारत और अमेरिका के अधिकारी व्यापारिक मुद्दों के समाधान के लिए लगातार बातचीत कर रहे हैं।
व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार यदि दोनों देशों के बीच समझौता होता है, तो भविष्य में भारतीय उत्पादों पर शुल्क में राहत मिलने की संभावना बन सकती है। फिलहाल निर्यातक उद्योग सरकार से आवश्यक सहायता और वैकल्पिक बाजारों की रणनीति तैयार करने की मांग कर रहे हैं।

























