नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार के पक्षधर सोनम वांगचुक ने 26 दिनों से जारी अपना आमरण अनशन समाप्त कर दिया। केंद्र सरकार के साथ हुई बातचीत और मिले आश्वासनों के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया। उनके अनशन का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने तथा प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं पर कड़ी कार्रवाई की मांग उठाना था।
वांगचुक ने कहा कि सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया है और शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधारों के लिए ठोस कदम उठाने का भरोसा दिया है। इसके साथ ही शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का भी आश्वासन दिया गया है।
अनशन समाप्त होने के बाद वांगचुक ने कहा कि यह आंदोलन केवल किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि देश के लाखों छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने सरकार से किए गए वादों को समयबद्ध तरीके से लागू करने की अपील की।
वहीं, छात्र संगठनों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सभी मांगों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन विभिन्न रूपों में जारी रहेगा। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्ष परीक्षाएं और पेपर लीक जैसे मामलों में दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार अपने आश्वासनों को प्रभावी ढंग से लागू करती है, तो इससे परीक्षा प्रणाली में छात्रों का विश्वास मजबूत होगा और भविष्य में प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

























