सावन मास के पहले मंगलवार को मनाया जाने वाला पहला मंगला गौरी व्रत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सुहागिन महिलाओं ने मां पार्वती के मंगला गौरी स्वरूप की पूजा-अर्चना कर पति की दीर्घायु, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की समृद्धि की कामना की। कई स्थानों पर अविवाहित युवतियों ने भी मनचाहा जीवनसाथी पाने की इच्छा से व्रत रखा।
सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। महिलाओं ने स्नान-ध्यान के बाद विधि-विधान से मां मंगला गौरी का पूजन किया। पूजा में लाल वस्त्र, सुहाग सामग्री, फल, फूल, मिठाई और पंचामृत अर्पित किया गया। इसके साथ ही मंगला गौरी व्रत कथा का श्रवण कर आरती की गई।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के प्रत्येक मंगलवार को रखा जाने वाला मंगला गौरी व्रत विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है, परिवार में खुशहाली आती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सावन माह भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस दौरान मंगला गौरी व्रत का विशेष महत्व है, क्योंकि इसे सौभाग्य, अखंड सुहाग और पारिवारिक सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
देशभर के शिव और शक्ति मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव और मां गौरी का आशीर्वाद लेकर परिवार के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

























