त्योहारी सीजन से पहले चीनी की कीमतों में तेज उछाल ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले करीब 12 दिनों में खुदरा बाजार में चीनी का भाव लगभग ₹52 से बढ़कर ₹62 प्रति किलो तक पहुंच गया है, यानी कीमत में करीब 19-21 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
थोक बाजार में भी रिकॉर्ड तेजी
चीनी के थोक भाव में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है। उत्तर प्रदेश में एक्स-फैक्ट्री कीमतें ₹5,400 प्रति क्विंटल के पार पहुंच गई हैं, जबकि दिल्ली और मुजफ्फरनगर जैसे प्रमुख बाजारों में थोक भाव करीब ₹5,800 और ₹5,754 प्रति क्विंटल तक बताए जा रहे हैं।
हालांकि, सरकारी मूल्य निगरानी के आंकड़ों के अनुसार देश में चीनी का औसत खुदरा भाव करीब ₹51.68 प्रति किलो है। अलग-अलग शहरों और बाजारों में स्थानीय मांग और आपूर्ति के कारण वास्तविक खुदरा कीमत इससे अधिक हो सकती है।
आखिर क्यों बढ़ रहे हैं चीनी के दाम?
चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। त्योहारी सीजन से पहले मांग बढ़ रही है, जबकि घरेलू बाजार में उपलब्धता को लेकर दबाव बना हुआ है। कम उत्पादन, गन्ने की उपलब्धता और एथेनॉल उत्पादन की ओर गन्ने के इस्तेमाल जैसे कारकों ने भी बाजार को प्रभावित किया है।
आने वाले महीनों में गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के कारण चीनी की मांग और बढ़ने की संभावना है। इसी वजह से कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
सरकार ने उठाए कदम
बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने चीनी के स्टॉक को लेकर नियम और सख्त किए हैं। 1 सितंबर से 30 नवंबर तक प्रति माह 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का इस्तेमाल करने वाले थोक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक सीमा 15 दिनों की खपत तक निर्धारित की गई है।
इसके अलावा सरकार रिकॉर्ड कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सीमित शुल्क-मुक्त चीनी आयात और अन्य उपायों पर भी विचार कर रही है।
ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार के फैसलों और बाजार में चीनी की उपलब्धता पर कीमतों की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।

























