खरगोन। मध्य प्रदेश के खरगोन जिले का महेश्वर अपनी ऐतिहासिक विरासत के साथ-साथ पारंपरिक हथकरघा कला के लिए भी देशभर में पहचान रखता है। यहां माहेश्वरी साड़ियों की बुनाई से जुड़ी आदिवासी महिलाओं के लिए बुनकर सुविधा केंद्र रोजगार और आत्मनिर्भरता का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। हाल ही में जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव रंजना चोपड़ा ने केंद्र का दौरा कर महिला बुनकरों से बातचीत की और उनकी आजीविका से जुड़े कार्यों की जानकारी ली।
1,000 से 2,000 साड़ियों का रोजाना उत्पादन
महेश्वर के बुनकर सुविधा केंद्र का संचालन राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत पंजीकृत सहायता समूह द्वारा किया जा रहा है। केंद्र में अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय की महिलाएं प्रसिद्ध माहेश्वरी साड़ियों की बुनाई से जुड़ी हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यहां प्रतिदिन करीब 1,000 से 2,000 साड़ियों का उत्पादन होता है।
यह काम महिलाओं को पारंपरिक हुनर के साथ नियमित आजीविका का अवसर भी दे रहा है। हथकरघा क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका देशभर में महत्वपूर्ण है और सरकार भी महिला बुनकरों को बाजार, प्रशिक्षण और उत्पादन से जोड़ने पर जोर दे रही है।
बाजार से जोड़ने में TRIFED और SHGs की भूमिका
बुनकरों के सामने अक्सर उत्पादन के साथ-साथ अपने उत्पाद को बड़े बाजार तक पहुंचाने की चुनौती रहती है। महेश्वर के इस केंद्र में इस दिशा में भी सहयोग मिल रहा है। TRIFED, स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और जिला पंचायतों के माध्यम से साड़ियों को बाजार से जोड़ने के लिए फॉरवर्ड लिंकेज उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे स्थानीय महिला बुनकरों को अपने उत्पाद के लिए व्यापक बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिल रही है।
दिल्ली के फैशन शो तक पहुंचा स्थानीय हुनर
केंद्र से जुड़ी एक महिला बुनकर हाल ही में दिल्ली में आयोजित फैशन शोकेस में भी अपने काम का प्रदर्शन कर चुकी हैं। यह उपलब्धि बताती है कि स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाली माहेश्वरी साड़ियां अब केवल क्षेत्रीय बाजार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिल रही है।
पारंपरिक कला के साथ महिला सशक्तिकरण
माहेश्वरी हथकरघा केवल कपड़ा बनाने की परंपरा नहीं है, बल्कि यह स्थानीय परिवारों के लिए आजीविका का साधन भी है। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार खरगोन जिले का माहेश्वरी हथकरघा क्षेत्र हजारों बुनकरों को रोजगार देता है और इसमें महिलाओं की भूमिका बुनाई, कताई और रंगाई जैसे कार्यों में महत्वपूर्ण है।
महेश्वर में बुनकर सुविधा केंद्र जैसे प्रयासों से आदिवासी महिलाओं की आजीविका, स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी और पारंपरिक हथकरघा कला को एक साथ बढ़ावा मिल रहा है। इससे स्थानीय हुनर को बाजार मिलने के साथ महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी रास्ता मजबूत हो रहा है।
#MaheshwariSaree #TribalWomen #TribalWelfare #WomenEmpowerment #NRLM #TRIFED #SelfHelpGroup #Maheshwar #Khargone #MadhyaPradesh #SocialWelfare
























