देश में चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। त्योहारी सीजन से पहले बाजार में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने और जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। यह कदम करीब एक दशक बाद उठाया गया है।
सरकार ने थोक उपभोक्ताओं के लिए चीनी के स्टॉक रखने की सीमा भी सख्त कर दी है। अब महीने में 10 टन से अधिक चीनी की खपत करने वाले बड़े खरीदार अधिकतम 15 दिनों की जरूरत के बराबर स्टॉक रख सकेंगे। इससे बाजार में कृत्रिम कमी पैदा करने और जमाखोरी पर अंकुश लगाने की कोशिश की जा रही है।
कीमतों में तेज बढ़ोतरी
पिछले कुछ सप्ताह में चीनी की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 20 जुलाई को चीनी का भाव करीब ₹48.18 प्रति किलो था, जो 20 अगस्त तक बढ़कर ₹55.70 प्रति किलो पहुंच गया। कुछ बाजारों में कीमतें इससे भी ऊपर जाने की खबरें हैं।
सरकार के अनुसार मौजूदा तेजी की प्रमुख वजह चीनी उत्पादन में कमी, मौसम से फसल को हुए नुकसान और आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियां हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी को केवल एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के इस्तेमाल से जोड़ना सही नहीं है।
उत्पादन में गिरावट का अनुमान
सरकार ने मौजूदा सीजन में चीनी उत्पादन का अनुमान घटाकर करीब 306 लाख टन कर दिया है, जबकि पहले 343 लाख टन उत्पादन का अनुमान लगाया गया था। यानी शुरुआती अनुमान की तुलना में उत्पादन करीब 11 फीसदी कम रहने की संभावना है।
केंद्र सरकार का लक्ष्य त्योहारी मौसम में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों में अनावश्यक उछाल को रोकना है। स्टॉक लिमिट, स्टॉक की निगरानी और शुल्क-मुक्त आयात जैसे कदमों से बाजार में आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है।
























