कोलार सिक्सलेन से गोल-कालापानी तक कंक्रीट के जंगल पर ब्रेक, मास्टर प्लान 2047 में ईको-सेंसिटिव जोन

भोपाल। कोलार सिक्सलेन से जुड़े गोल और कालापानी क्षेत्र में बड़े निर्माण और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स की संभावनाओं पर अब पर्यावरणीय प्रावधानों का असर पड़ सकता है। मास्टर प्लान ड्राफ्ट 2047 में गोल और कालापानी क्षेत्र को रातापानी टाइगर रिजर्व के बफर एवं ईको-सेंसिटिव जोन से जोड़े जाने के बाद इस क्षेत्र में प्रस्तावित बड़े निर्माण को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।

जिन निवेशकों और बिल्डरों ने इस क्षेत्र में बड़े रिसॉर्ट, टाउनशिप, कमर्शियल प्रोजेक्ट्स और अन्य निर्माण की संभावनाओं को देखते हुए जमीनें खरीदी हैं, उनके लिए अब आगे की स्थिति संबंधित पर्यावरणीय और वन्यजीव नियमों पर निर्भर करेगी।

गोल-कालापानी से कलियासोत-केरवा तक बदलेगा निर्माण का समीकरण

गोल, कालापानी, कलियासोत और केरवा क्षेत्र भोपाल के महत्वपूर्ण प्राकृतिक एवं वन क्षेत्र से जुड़े हैं। मास्टर प्लान 2047 में पर्यावरणीय संवेदनशीलता से जुड़े प्रावधानों के बाद इस पूरे क्षेत्र में भविष्य के निर्माण को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

ईको-सेंसिटिव जोन का उद्देश्य संरक्षित क्षेत्र और मानव गतिविधियों वाले क्षेत्रों के बीच एक बफर के रूप में काम करना है। इसका मकसद वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर अत्यधिक निर्माण, प्रदूषण, अवैध खनन और भारी औद्योगिक गतिविधियों के दबाव को कम करना है।

होटल-रिसॉर्ट और बड़े प्रोजेक्ट्स पर नियम महत्वपूर्ण

ईको-सेंसिटिव क्षेत्र में होटल, रिसॉर्ट, बड़े निर्माण, सड़क चौड़ीकरण और अन्य विकास गतिविधियों के लिए संबंधित पर्यावरण एवं वन्यजीव नियमों का पालन महत्वपूर्ण हो सकता है।

किस क्षेत्र में किस प्रकार का निर्माण अनुमत होगा और किन गतिविधियों के लिए अतिरिक्त अनुमति आवश्यक होगी, यह अंतिम अधिसूचना और संबंधित विभागों की स्वीकृतियों के आधार पर स्पष्ट होगा।

पहले से संचालित प्रोजेक्ट्स का क्या होगा?

गोल और कालापानी क्षेत्र में कई निर्माण एवं प्रोजेक्ट पहले से संचालित हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल मौजूदा परियोजनाओं के भविष्य को लेकर है।

इन परियोजनाओं पर नए प्रावधानों का वास्तविक प्रभाव उनकी मौजूदा स्वीकृतियों, भूमि उपयोग, निर्माण की स्थिति और लागू वन्यजीव एवं पर्यावरणीय नियमों के आधार पर तय होगा। इसलिए अंतिम स्थिति मास्टर प्लान की अधिसूचना और संबंधित विभागों की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।

कलियासोत-केरवा की हरियाली पर भी नजर

गोल और कालापानी से आगे कलियासोत और केरवा तक फैला प्राकृतिक क्षेत्र भोपाल के पर्यावरणीय संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस क्षेत्र में बढ़ते शहरी विस्तार के बीच मास्टर प्लान 2047 के प्रावधान भविष्य के विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

अब नजर मास्टर प्लान 2047 की अंतिम अधिसूचना और संबंधित वन्यजीव एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियों पर रहेगी। इसके बाद ही गोल, कालापानी, कलियासोत और केरवा क्षेत्र में जमीन के उपयोग तथा बड़े निर्माण प्रोजेक्ट्स की वास्तविक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

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