
उत्तर प्रदेश में मंडी व्यवस्था को अधिक प्रभावी और किसान हितैषी बनाने की दिशा में मंडी परिषद ने नए निर्देश जारी किए हैं। मंडी परिषद के निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह ने नवनियुक्त मंडी सचिवों से संवाद करते हुए किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता से हल करने और उनसे नियमित संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए।
निदेशक ने कहा कि मंडियां किसानों के लिए केवल कृषि उपज की बिक्री का केंद्र नहीं हैं, बल्कि उन्हें बेहतर सुविधाएं और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण माध्यम भी हैं। उन्होंने मंडी सचिवों से कहा कि मंडियों में आने वाले किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और उनकी शिकायतों का समयबद्ध एवं प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाए।
उन्होंने किसानों और आढ़तियों से नियमित संवाद स्थापित करने तथा मंडी व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं की जानकारी लेकर उनका समाधान कराने पर जोर दिया। साथ ही कृषि उपज की खरीद-बिक्री से जुड़ी व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी और कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश दिए गए।
नवनियुक्त सचिवों को मिलेगी विशेष ट्रेनिंग
मंडी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नवनियुक्त मंडी सचिवों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इसमें मंडी संचालन, विभागीय प्रक्रियाओं, किसानों की शिकायतों के त्वरित समाधान, राजस्व संबंधी कार्यों और मंडी व्यवस्थाओं की प्रभावी निगरानी जैसे विषय शामिल होंगे। किसानों को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ दिलाने पर भी प्रशिक्षण में विशेष ध्यान दिया जाएगा।
मंडी परिषद के मुताबिक, सचिवों की भूमिका किसानों और मंडी प्रशासन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी की है। इसलिए उनसे संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम करने की अपेक्षा की गई है।




