सिंहस्थ-2028 से पहले 163 करोड़ रुपये से संवरेगा कालभैरव मंदिर, सबसे पहले सुधरेगा दर्शन मार्ग

सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत उज्जैन के प्रसिद्ध श्री कालभैरव मंदिर का कायाकल्प करने की योजना पर काम तेज हो रहा है। मंदिर परिसर को ‘श्री कालभैरव महालोक’ के रूप में विकसित करने के लिए करीब 163 करोड़ रुपये की योजना बनाई गई है। इसके तहत पार्किंग, धर्मशाला, सुविधा केंद्र और नई अप्रोच रोड जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता श्रद्धालुओं के दर्शन मार्ग को सुगम और सुरक्षित बनाना है।

कलेक्टर ने किया मंदिर परिसर का निरीक्षण
उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने मंदिर परिसर का निरीक्षण कर अधिकारियों को श्रद्धालुओं की सुविधाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों के दौरान दर्शन व्यवस्था प्रभावित नहीं होनी चाहिए। दर्शन मार्ग पर बिछे पत्थरों से श्रद्धालुओं को परेशानी न हो, इसके लिए मार्ग पर चूरी डालने और रास्तों को व्यवस्थित करने के निर्देश दिए गए।

इसके साथ ही मंदिर परिसर में स्पष्ट संकेतक लगाने, पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था करने और दर्शन के लिए बनाई गई जिगजैग व्यवस्था का लेवलिंग कार्य शीघ्र पूरा करने को कहा गया। निर्माण के कारण रास्तों में होने वाले बदलावों की जानकारी भी संकेतकों के माध्यम से श्रद्धालुओं तक पहुंचाई जाएगी।

तीन पार्किंग स्थल और धर्मशाला का होगा निर्माण
करीब 163 करोड़ रुपये की विकास योजना में तीन बड़े पार्किंग स्थल, श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए धर्मशाला, सुविधा केंद्र और नई अप्रोच रोड प्रस्तावित हैं। इन सुविधाओं का उद्देश्य सिंहस्थ के दौरान बड़ी संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ को व्यवस्थित करना और मंदिर तक पहुंचने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।

अतिक्रमण हटाने और निकास मार्ग पूरा करने पर जोर
निरीक्षण के दौरान मंदिर के बाहरी परिसर में सरकारी दुकानों के सामने किए गए अतिक्रमण को हटवाया गया। मंदिर के पीछे निर्माणाधीन निकास मार्ग को जल्द पूरा करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि दर्शन के बाद श्रद्धालु व्यवस्थित तरीके से बाहर निकल सकें। इसके अलावा परिसर में क्षतिग्रस्त पाइपलाइन को तत्काल दुरुस्त करने के लिए नगर निगम के अधिकारियों को कहा गया।

सिंहस्थ में बढ़ेगी व्यवस्थाओं की चुनौती
भगवान कालभैरव का मंदिर उज्जैन के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां भगवान को मदिरा अर्पित करने की विशिष्ट परंपरा के कारण भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। सिंहस्थ-2028 के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए पार्किंग, पेयजल, आवागमन, दर्शन और निकास व्यवस्था को मजबूत करना प्रशासन के लिए अहम होगा।

अब निगाह इस बात पर रहेगी कि विकास योजना के कार्य कितनी तेजी से पूरे होते हैं और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं कब तक मिल पाती हैं।

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