सावन पूर्णिमा पर आस्था का रंग, शिव-पार्वती की पूजा के साथ स्नान-दान का विधान

सावन पूर्णिमा हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक महत्व रखने वाला पर्व माना जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करने, व्रत रखने तथा स्नान-दान की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के पवित्र महीने में शिव आराधना करने से भक्तों को भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

सावन पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालु सुबह स्नान के बाद भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित कर भगवान शिव की पूजा की जाती है। इसके साथ ही माता पार्वती की भी विधि-विधान से आराधना की जाती है। कई भक्त इस दिन ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप और महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन पूर्णिमा पर पूजा, जप, तप और दान का विशेष महत्व है। पवित्र नदियों में स्नान करने और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या अन्य सामग्री का दान करने की भी परंपरा रही है। माना जाता है कि श्रद्धापूर्वक किए गए इन धार्मिक कार्यों से सुख-समृद्धि और परिवार में शांति की कामना की जाती है।

इस वर्ष सावन पूर्णिमा और रक्षाबंधन को लेकर तिथियों के संबंध में अलग-अलग पंचांगों में गणना का अंतर देखने को मिला है। हालांकि रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त 2026 को मनाया जा रहा है। पूर्णिमा तिथि 28 अगस्त की सुबह तक रहने की जानकारी भी विभिन्न पंचांग-आधारित स्रोतों में दी गई है।

सावन पूर्णिमा के दिन देशभर के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिलती है। भक्त भगवान शिव और माता पार्वती से परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और मंगल की कामना करते हैं। इस अवसर पर मंदिरों में विशेष श्रृंगार, अभिषेक और भजन-कीर्तन जैसे धार्मिक आयोजन भी किए जाते हैं।

Previous articleरक्षाबंधन पर सजा देश, भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का आज महापर्व
Next article20 साल बाद लौटी ‘Khosla Ka Ghosla’ की दुनिया, आज रिलीज हुआ सीक्वल