मतदाता सूची के Special Intensive Revision पर तथ्यात्मक और आसान भाषा में पूरी जानकारी
SIR यानी Special Intensive Revision of Electoral Rolls कोई नई प्रक्रिया नहीं है।
निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड में विभिन्न राज्यों में पहले भी Intensive Revision की गई है।
मौजूदा राष्ट्रीय बहस का नया चरण 2025 में बिहार से शुरू हुआ।
1. SIR क्या है?
SIR का पूरा नाम Special Intensive Revision of Electoral Rolls है।
इसका हिंदी अर्थ है मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण।
इसका मूल उद्देश्य electoral roll को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना है।
निर्वाचन आयोग के अनुसार प्रक्रिया में पात्र नागरिकों को शामिल करना तथा मृत,
स्थानांतरित, डुप्लीकेट अथवा अन्य अपात्र प्रविष्टियों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार
सुधारना या हटाना शामिल है।
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2. क्या SIR पहली बार 2025 में हुआ?
SIR/Intensive Revision की व्यवस्था पुरानी है। निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड में
विभिन्न राज्यों के लिए पिछली Intensive Revision की qualifying dates 2002,
2003, 2005 आदि दर्ज हैं।
कुछ राज्यों की पिछली Intensive Revision
| राज्य | पिछली Intensive Revision की Qualifying Date |
|---|---|
| मध्य प्रदेश | 1 जनवरी 2003 |
| बिहार | 1 जनवरी 2003 |
| उत्तर प्रदेश | 1 जनवरी 2003 |
| राजस्थान | 1 जनवरी 2002 |
| पश्चिम बंगाल | 1 जनवरी 2002 |
| केरल | 1 जनवरी 2002 |
2002/2003 की सूची में नाम होना या न होना अपने आप में वर्तमान मतदाता की नागरिकता
या मतदान अधिकार का अंतिम फैसला नहीं है। यह निर्धारित SIR प्रक्रिया में reference
record की भूमिका निभा सकता है।
3. मौजूदा SIR की शुरुआत कब हुई?
बिहार SIR के लिए qualifying date 1 जुलाई 2025 निर्धारित की गई थी।
बिहार में पिछली Intensive Revision 2003 में हुई थी।
4. बिहार SIR इतना बड़ा मुद्दा क्यों बना?
बिहार में बड़े पैमाने पर electoral-roll verification हुआ। Draft electoral roll
के चरण में लगभग 65 लाख electors शामिल नहीं थे।
लगभग 65 लाख का आंकड़ा draft roll में non-inclusion से संबंधित था।
इसे सीधे “65 लाख लोगों के वोट हमेशा के लिए खत्म कर दिए गए” कहना सही नहीं है।
Draft stage के बाद claim, objection, scrutiny और निर्धारित प्रक्रिया मौजूद थी।
5. सुप्रीम कोर्ट की भूमिका
बिहार SIR से संबंधित मामले सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। कार्यवाही के दौरान electoral-roll
verification, excluded electors, documents और Aadhaar सहित कई प्रक्रियात्मक मुद्दों पर
निर्देश दिए गए।
27 मई 2026 — महत्वपूर्ण न्यायिक पड़ाव
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार SIR की वैधता को बरकरार रखा। अदालत ने निर्वाचन आयोग के
SIR कराने के अधिकार और exercise के उद्देश्य को स्वीकार किया, साथ ही प्रक्रिया
से जुड़े safeguards और नागरिकता संबंधी सीमाओं को स्पष्ट किया।
6. 2003 की वोटर लिस्ट क्यों महत्वपूर्ण है?
कई राज्यों में पिछली Intensive Revision की electoral roll को वर्तमान SIR में
reference के रूप में इस्तेमाल किया गया। मध्य प्रदेश और बिहार सहित कई राज्यों के
लिए 2003 की सूची महत्वपूर्ण reference है।
अगर किसी व्यक्ति का नाम पुराने reference roll में नहीं मिलता, तो केवल इसी आधार
पर यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि उसका वर्तमान मतदाता अधिकार स्वतः समाप्त हो गया।
निर्धारित verification और claim/objection प्रक्रिया महत्वपूर्ण है।
7. SIR में BLO की क्या भूमिका है?
BLO यानी Booth Level Officer मतदाता सूची से जुड़ी जमीनी प्रक्रिया में
महत्वपूर्ण अधिकारी है। SIR में BLO द्वारा Enumeration Form की प्रक्रिया, मतदाता
जानकारी का सत्यापन और संबंधित electoral-roll कार्यों में सहायता की जाती है।
Booth Level Officer
Electoral Registration Officer
Booth Level Agent
8. कांग्रेस और विपक्ष ने किन मुद्दों पर सवाल उठाए?
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने SIR की प्रक्रिया को लेकर मुख्य रूप से
पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित होने की आशंका, दस्तावेजों की उपलब्धता,
समय-सीमा, पारदर्शिता और claim/objection प्रक्रिया जैसे मुद्दे उठाए।
- पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से प्रभावित न हो।
- गरीब, बुजुर्ग और प्रवासी नागरिकों को दस्तावेज संबंधी कठिनाई न हो।
- नाम हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी हो।
- प्रभावित मतदाता को notice और अपना पक्ष रखने का अवसर मिले।
- Electoral-roll data और deletion के कारणों में पर्याप्त पारदर्शिता हो।
संपादकीय नोट: ऊपर दिए गए बिंदु कांग्रेस/विपक्ष द्वारा उठाई गई
राजनीतिक आपत्तियों का सार हैं। इन्हें निर्वाचन आयोग या न्यायालय के निष्कर्ष के रूप
में नहीं पढ़ा जाना चाहिए।
9. Phase-II में कौन-कौन से राज्य शामिल हुए?
छत्तीसगढ़ • गोवा • गुजरात • केरल • मध्य प्रदेश • राजस्थान • तमिलनाडु • उत्तर प्रदेश • पश्चिम बंगाल
केंद्रशासित प्रदेश: अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह • लक्षद्वीप • पुडुचेरी
10. मध्य प्रदेश में SIR क्यों महत्वपूर्ण है?
मध्य प्रदेश Phase-II में शामिल था। निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड में मध्य प्रदेश की
पिछली Intensive Revision की qualifying date 1 जनवरी 2003 दी गई है।
11. आम मतदाता के लिए SIR का मतलब क्या है?
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SIR Timeline: शुरुआत से आज तक
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12. सबसे जरूरी तथ्य — एक नजर में
| सवाल | तथ्य |
|---|---|
| SIR का पूरा नाम | Special Intensive Revision |
| क्या 2025 में पहली बार हुआ? | नहीं |
| मौजूदा SIR का नया चरण | बिहार, 24 जून 2025 |
| बिहार की पिछली Intensive Revision | 2003 |
| बिहार draft roll में non-inclusion | लगभग 65 लाख electors |
| Supreme Court फैसला | 27 मई 2026 |
| Phase-II शुरुआत | 4 नवंबर 2025 |
| मध्य प्रदेश Phase-II में? | हाँ |
| MP पिछली Intensive Revision | 1 जनवरी 2003 qualifying date |
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अंतिम बात: SIR को कैसे समझें?
SIR का मूल विषय मतदाता सूची की शुद्धता और पात्र मतदाताओं का समावेश है।
2025 में बिहार से शुरू हुए नए चरण ने इसे देश की बड़ी राजनीतिक और न्यायिक बहस बना दिया।
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SIR को समझने के लिए तीन अलग-अलग पक्षों को अलग रखना जरूरी है:
प्रक्रिया और electoral-roll revision
आपत्तियां, आरोप और मांगें
कानूनी सवाल और न्यायिक निर्देश
आम मतदाता के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात है—अपना नाम, विवरण और electoral-roll status
समय-समय पर आधिकारिक स्रोत से जांचना और आवश्यकता होने पर निर्धारित दावा-आपत्ति
प्रक्रिया का उपयोग करना।
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electoral-roll information. राजनीतिक दलों के दावों और आपत्तियों को संबंधित पक्ष के
बयान के रूप में समझा जाना चाहिए।























