सिंहस्थ के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का त्याग, अपने पुश्तैनी घर का हिस्सा खुद हटाया

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यादें अपनी जगह रहेंगी… लेकिन जब बात महाकाल के भक्तों की सेवा की हो, तो विकास के लिए, भक्तों की सुविधाओं के लिए त्याग भी जरूरी हो जाता है।

कुछ घर सिर्फ मकान नहीं होते, वे जीवन की कहानी के साक्षी होते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का उज्जैन स्थित पुश्तैनी मकान भी ऐसा ही है। इसी घर में उनका बचपन बीता, शिक्षा से जुड़ी यादें रहीं और छात्र जीवन में उन्होंने छात्र संघ का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।

सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण में इस मकान का हिस्सा प्रभावित हुआ। मुख्यमंत्री ने स्वयं गैंती चलाकर उसके हटाने की शुरुआत की।

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस घर में बचपन बीता हो, उसका हिस्सा हटाना भावनात्मक रूप से आसान नहीं होता। लेकिन सिंहस्थ में आने वाले श्रद्धालुओं को आवागमन में कोई अड़चन न हो और उन्हें बेहतर सुविधाएं मिलें, इसके लिए ऐसे फैसले जरूरी हैं।

यह सिर्फ एक मकान का हिस्सा हटाने की घटना नहीं, बल्कि सिंहस्थ में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखकर किया गया त्याग है। जिस घर ने उनके बचपन और छात्र जीवन को देखा, आज उसी का एक हिस्सा सिंहस्थ की तैयारियों और शहर के बेहतर यातायात के लिए जगह बना रहा है।

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