
नई दिल्ली | 4 नवंबर 2026
देश के करोड़ों असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, डिलीवरी पार्टनर्स, ऐप आधारित टैक्सी चालकों और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने 30 अक्टूबर 2026 को असंगठित श्रमिकों तथा गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए दो राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्डों के गठन की अधिसूचना जारी की है।
इनमें असंगठित श्रमिकों के लिए 40 सदस्यीय और गिग एवं प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए 22 सदस्यीय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड शामिल हैं। इन बोर्डों का उद्देश्य श्रमिकों के लिए कल्याणकारी योजनाओं की सिफारिश करना, उनके क्रियान्वयन की निगरानी करना और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी कमियों को दूर करने के लिए केंद्र सरकार को सुझाव देना है।
कौन-कौन होंगे सामाजिक सुरक्षा बोर्ड में शामिल?
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अनुसार, दोनों बोर्डों की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री करेंगे। श्रम एवं रोजगार सचिव उपाध्यक्ष की भूमिका निभाएंगे।
बोर्डों में केंद्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों के साथ नियोक्ता संगठनों, श्रमिक संगठनों, नागरिक समाज, एग्रीगेटर कंपनियों और गिग एवं प्लेटफॉर्म वर्कर्स के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है।
श्रमिकों के लिए क्या काम करेंगे ये बोर्ड?
राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्डों को कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
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असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए उपयुक्त सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की सिफारिश करना।
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केंद्र सरकार को श्रमिक कल्याण से जुड़े मामलों में सलाह देना।
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केंद्र सरकार द्वारा संचालित सामाजिक कल्याण योजनाओं की निगरानी करना।
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राज्यों में योजनाओं से जुड़े रिकॉर्ड और कार्यप्रणाली की समीक्षा करना।
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सामाजिक सुरक्षा फंड और उसके खर्च का मूल्यांकन करना।
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श्रमिकों के कल्याण के लिए केंद्र सरकार को आवश्यक सुझाव देना।
किन श्रमिकों को मिल सकता है फायदा?
इन बोर्डों के दायरे में मुख्य रूप से निम्नलिखित श्रमिक वर्गों के कल्याण से जुड़े मुद्दे आएंगे:
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असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूर।
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निर्माण कार्य और घरेलू कामगार।
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रेहड़ी-पटरी और छोटे व्यवसायों से जुड़े श्रमिक।
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ऑनलाइन फूड डिलीवरी पार्टनर्स।
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ऐप आधारित टैक्सी और बाइक चालक।
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ई-कॉमर्स एवं क्विक कॉमर्स डिलीवरी कर्मचारी।
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अन्य गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स।
किन सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं पर होगा जोर?
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के प्रावधानों के तहत इन श्रमिकों के लिए जीवन एवं दिव्यांगता बीमा, स्वास्थ्य सुरक्षा, मातृत्व लाभ, वृद्धावस्था सुरक्षा और अन्य कल्याणकारी योजनाओं पर काम किया जा सकता है।
हालांकि, बोर्डों का गठन अपने आप सभी श्रमिकों को तत्काल बीमा, पेंशन या आर्थिक सहायता मिलने की गारंटी नहीं है। इसके लिए संबंधित योजनाओं का निर्धारण, अधिसूचना और क्रियान्वयन आवश्यक होगा।
हर साल कम से कम तीन बैठकें
सरकारी अधिसूचना के अनुसार, राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्डों की बैठक वर्ष में कम से कम तीन बार आयोजित की जाएगी। इन बैठकों में श्रमिकों की समस्याओं, योजनाओं की प्रगति और सामाजिक सुरक्षा फंड के उपयोग की समीक्षा की जाएगी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
भारत में बड़ी संख्या में लोग नियमित सरकारी या संगठित रोजगार के बजाय असंगठित और ऐप आधारित कामकाज से अपनी आजीविका चलाते हैं। ऐसे श्रमिकों के लिए रोजगार की अनिश्चितता, दुर्घटना, स्वास्थ्य खर्च और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा बड़ी चुनौतियां हैं।
इन दोनों बोर्डों का गठन ऐसे श्रमिकों के लिए नीतिगत स्तर पर सामाजिक सुरक्षा का दायरा मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
केंद्र सरकार की यह पहल असंगठित श्रमिकों और तेजी से बढ़ते गिग इकोनॉमी क्षेत्र के कामगारों को सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण है। अब इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रस्तावित योजनाएं कितनी जल्दी और प्रभावी ढंग से श्रमिकों तक पहुंचती हैं।




