भोपाल मास्टर प्लान-2047 में बाघों के रास्ते पर फिर सड़क, NTCA की पुरानी चिंता के बीच उठे सवाल

भोपाल। भोपाल मास्टर प्लान-2047 में केरवा–कलियासोत, मेंडोरा, मेंडोरी और चंदनपुरा क्षेत्र में सड़क और विकास के प्रस्तावों को लेकर वन्यजीव सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। यह क्षेत्र बाघों की आवाजाही के लिए जाना जाता है और रातापानी टाइगर रिजर्व से जुड़े वन परिदृश्य का हिस्सा है।

मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) ने अगस्त 2020 में मध्यप्रदेश सरकार को पत्र लिखकर केरवा–कलियासोत के राजस्व और वन क्षेत्रों में विकास गतिविधियों को लेकर चिंता जताई थी। NTCA ने बाघों के सुरक्षित आवागमन और क्षेत्र की वन्यजीव महत्ता को देखते हुए विकास योजना की समीक्षा की जरूरत बताई थी।

इसी क्षेत्र में Kerwa Main Road से Chandanpura तक सड़क निर्माण और चौड़ीकरण का प्रस्ताव Forest Clearance पोर्टल पर भी दर्ज है। इसमें मेंडोरा और मेंडोरी की वन भूमि से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। ऐसे में मास्टर प्लान में सड़क प्रस्ताव को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि पूर्व की आपत्तियों और वन्यजीव संबंधी चिंताओं का नए प्लान में किस तरह परीक्षण किया गया है।

पर्यावरण विशेषज्ञ रशीद नूर ने कहा कि पिछले मास्टर प्लान में भी बाघ मूवमेंट क्षेत्र में प्रस्तावित सड़क को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई थी। नए मास्टर प्लान में फिर सड़क दिखाई दे रही है, इसलिए इस बार भी आपत्ति दर्ज कराई जाएगी।

केरवा–कलियासोत से जुड़े मामलों में NGT के समक्ष प्रस्तुत रिपोर्ट में भी बाघों की आवाजाही और चंदनपुरा क्षेत्र में विकास गतिविधियों को लेकर पर्यावरणीय मुद्दों का उल्लेख हुआ है। रिपोर्ट में क्षेत्र के लिए समेकित विकास योजना की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया था।

मास्टर प्लान-2047 अगले दो दशकों में भोपाल के विकास की दिशा तय करेगा। ऐसे में सड़क प्रस्तावों का मूल्यांकन केवल यातायात और शहरी विस्तार के आधार पर नहीं, बल्कि वन भूमि, वन्यजीव आवागमन और संबंधित पर्यावरणीय प्रावधानों को ध्यान में रखकर किए जाने का मुद्दा सामने है।

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