महर्षि याज्ञवल्क्य सनातन कल्याण समिति के तत्वावधान में आयोजित
संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा एवं सामूहिक मूलपाठ के द्वितीय दिवस
कथा व्यास आचार्य अविनाश मिश्रा ने
शुकदेवजी के जन्म, भीष्म मोक्ष और भीष्म स्तुति के प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया।
ठाकुरजी की कृपा से मिल रहा भागवत कथा श्रवण का अवसर
कथा की शुरुआत करते हुए आचार्य अविनाश मिश्रा ने कहा कि सभी श्रद्धालुओं पर ठाकुरजी की कृपा है,
जिसकी वजह से वे अपने पितरों को समर्पित श्रीमद्भागवत कथा का आनंद ले पा रहे हैं और
भागवत कथा का रसपान कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि
जितना गोविंद प्रदान करते हैं, उतना ही मनुष्य को प्राप्त होता है।
यदि कोई व्यक्ति भागवत कथा सुनकर कुछ पाना या सीखना चाहता है तो उसे कथा में
प्यासे मन से और कुछ सीखने की भावना के साथ आना चाहिए। ऐसी श्रद्धा के साथ सुनी गई
भागवत कथा जीवन में बहुत कुछ प्रदान करती है।
जन्म-जन्म के पुण्य से आती है भक्ति और वैराग्य
आचार्य मिश्रा ने भीष्म मोक्ष एवं भीष्म स्तुति का विस्तारपूर्वक वृतांत सुनाते हुए कहा कि
जब जन्म-जन्म के पुण्य उदय होते हैं, तब मनुष्य के जीवन में भक्ति और वैराग्य आता है।
यही वह अवस्था है, जहां से वास्तविक भाग्योदय की शुरुआत होती है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य का जीवन केवल सांसारिक भोग के लिए नहीं मिला है।
मानव जीवन का उद्देश्य विषय-वस्तुओं को भोगना नहीं, बल्कि भगवान की भक्ति और
कृष्ण प्राप्ति की दिशा में आगे बढ़ना होना चाहिए।
आचार्य मिश्रा का संदेश
आज का मानव भगवान की भक्ति को छोड़कर सांसारिक विषय-वस्तुओं को भोगने में लगा हुआ है।
उसका अधिकांश ध्यान संसारिक विषयों में लगा है। जबकि मानव जीवन का उद्देश्य
कृष्ण प्राप्ति है। यदि मनुष्य दृढ़ निश्चय कर ले कि उसे जीवन में कृष्ण को पाना ही है,
तो इससे बढ़कर कोई अन्य सुख, संपत्ति या सम्पदा नहीं है।
भागवत कथा श्रवण से होता है कल्याण
आचार्य अविनाश मिश्रा ने कहा कि भागवत कथा का श्रवण करने वालों का सदैव कल्याण होता है।
भागवत कथा के समय श्रद्धालुओं को यह भाव रखना चाहिए कि स्वयं श्रीकृष्ण उनसे मिलने आए हैं।
उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति भागवत के तट पर आकर विराजमान हो जाता है,
भागवत उसका कल्याण करती है। भागवत में कभी छोटे और बड़े का भेद नहीं होता।
श्रद्धा से मांगी गई मनवांछित इच्छा की पूर्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
आचार्य मिश्रा ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति कुछ नहीं मांगता, तब भी भागवत उसे
मोक्ष पर्यंत की यात्रा का मार्ग दिखाती है।
शुकदेवजी के जन्म का सुनाया प्रसंग
कथा के द्वितीय दिवस आचार्य अविनाश मिश्रा ने शुकदेवजी के जन्म का वृतांत भी
विस्तार से सुनाया। कथा के दौरान धार्मिक प्रसंगों और संगीत के माध्यम से
श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत के संदेश से जोड़ा गया।
मूलपाठ के यजमान और श्रद्धालु रहे उपस्थित
इस अवसर पर मूलपाठ यजमान परिवार, सुश्री राजो मालवीय, किसान मोर्चा के जिला मंत्री
साहब सिंह पटेल, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष संतोष मालवीय, शशि मालवीय,
साहब सिंह पटेल, पांजरा महिला मोर्चा मंडल अध्यक्ष सरिता चौरसिया सहित
समस्त मूलपाठ के यजमान एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को कृष्ण भक्ति, वैराग्य,
पुण्य और मानव जीवन के उद्देश्य का संदेश दिया गया।






















