किसानों को लाभान्वित करेगी भावांतर योजना : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

किसानों को लाभान्वित करेगी भावांतर योजना : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में सोयाबीन उत्पादक किसानों के हित में प्रारंभ की जा रही भावांतर योजना को लागू करने के लिए जिला स्तर पर प्रशासनिक अमले को दायित्व दिए जाएं। इस योजना की विशेषताओं को प्रत्येक स्तर पर प्रचारित किया जाए, जिससे अधिक से अधिक किसानों को इसका लाभ मिले। सांसद, विधायक एवं अन्य जनप्रतिनिधि योजना के प्रचार-प्रसार के लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्म का भी उपयोग करें। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अन्नदाताओं की चिंता कर सोयाबीन को निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूलय 5328 रूपए प्रति क्विंटल निर्धारित की है। मध्यप्रदेश सरकार किसानों को उनके उत्पादन का मूल्य दिलवाने के लिए प्रतिबद्ध है। जिस तरह धान और गेहूं पर किसानों को उनके परिश्रम की कीमत दिलवाने का कार्य किया गया है, उसी तरह सोयाबीन उत्पादक किसानों को भी लाभ दिलवाया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए लागू की जा रही भावांतर योजना के संबंध में शुक्रवार को समत्व भवन मुख्यमंत्री निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंस द्वारा कलेक्टर्स को निर्देशित कर रहे थे। वीडियो कांफ्रेंस में वरिष्ठ विधायक और प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खंडेलवाल भी उपस्थित थे। वीडियो कॉन्फ्रेंस में विभिन्न मंत्री, सांसद, विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, संबंधित वरिष्ठ अधिकारी, समस्त कलेक्टर्स-कमिश्नर्स, राजस्व और कृषि विभाग के अधिकारी भी शामिल हुए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी कलेक्टर्स किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलवाने के लिए व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें। किसी भी स्तर पर गड़बड़ी नहीं होना चाहिए। हितग्राही को सीधा लाभ मिलना चाहिए। सभी के प्रयासों से भावांतर योजना पूर्णता सफल होगी।

10 अक्टूबर से शुरू होंगे पंजीयन
भावांतर योजना के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रदेश में ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन का कार्य 10 अक्टूबर से प्रारंभ होकर 25 अक्टूबर 2025 तक चलेगा। भावांतर की अवधि 01 नवम्बर से 2025 से 31 जनवरी 2026 तक रहेगी। पंजीकृत कृषक और उनके रकबे के सत्यापन की प्रक्रिया राजस्व विभाग के माध्यम से होगी। किसानों के भावांतर की राशि पंजीयन के समय दर्ज बैंक खाते में सीधे हस्तांतरित की जाएगी।

भावांतर योजना, एक नजर में
प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के अंतर्गत अधिसूचित तिलहनी फसल के लिए भावांतर योजना वर्ष 2018-19 से लागू की गई है। भारत सरकार ने घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तथा राज्य के मंडी के मॉडल भाव/विक्रय मूल्य अंतर की राशि कृषकों को दिलवाने का प्रावधान किया है। किसान पूर्व की तरह अपनी उपज मंडियों में बेचेंगे। एमएसपी और मंडी का मॉडल भाव/विक्रय मूल्य के बीच के अंतर की राशि का किसान को डीबीटी से भुगतान किया जायेगा। किसान द्वारा ई-पोर्टल पर पंजीयन अनिवार्य होगा। उदाहरण के लिए किसान का उत्पादन मॉडल भाव 4600 रूपए पर हुआ है तो समर्थन मूल्य 5328 में से शेष अर्थात् भावांतर राशि 628 रूपए प्रति क्विंटल राज्य सरकार द्वारा प्रदान किए जाएंगे। किसान को समर्थन मूल्य बराबर ही राशि प्राप्त होगी। यदि किसान की उपज का विक्रय मूल्य एमएसपी से कम है परंतु राज्य के औसत मॉडल प्राइज के समतुल्य है, ऐसी स्थिति में भी किसान को एमएसपी और बिक्री मूल्य के भावांतर की राशि प्रदान की जाएगी। तीसरी स्थिति में कृषि उपज का विक्रय मूल्य राज्य के औसम मॉडल प्राइस से कम होने की दिशा में किसान को एमएसपी और घोषित औसत मॉडल प्राइस के भावांतर की राशि प्रदान की जाएगी। प्रत्येक स्थिति में किसान का लाभ सुनिश्चित किया जाएगा।

ये जनप्रतिनिधि जुड़े वीसी से
मुख्यमंत्री डॉ. यादव को वीडियो कॉन्फ्रेंस से जुड़े अनेक जनप्रतिनिधियों ने इस योजना को प्रारंभ करने की पहल के लिए बधाई दी। किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना, कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री गौतम टेटवाल, सांसद खण्डवा श्री ज्ञानेश्वर पाटिल, विधायक जावरा राजेन्द्र पांडे, विधायक खातेगांव आशीष शर्मा, विधायक बागली मुरली भंवरा, विधायक करैरा रमेश खटीक, विधायक सुवासरा हरदीप सिंह डंग, विधायक शाजापुर अरूण भीमावद, विधायक आगर मधु गेहलोत, विधायक नागदा खाचरौद तेज बहादुर सिंह चौहान सहित अनेक जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को धन्यवाद देते हुए कहा कि किसानों को सोयाबीन उत्पादन का पूरा लाभ मिलेगा। निश्चित ही यह सही समय पर उठाया गया सही कदम है।

सेवा पखवाड़े और अंत्योदय उत्सव को सफल बनाएं जनप्रतिनिधि
मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं हेमंत खण्डेलवाल ने प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस 17 सितम्बर से प्रारंभ होकर गांधी/शास्त्री जयंती 02 अक्टूबर तक हो रहे सेवा पखवाड़े, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती 25 सितम्बर से 02 अक्टूबर तक स्वदेशी जागरण सप्ताह और 22 सितम्बर से आगामी दीपावली तक निरंतर चलने वाले जीएसटी उत्सव की गतिविधियों को सफल बनाने का आग्रह, जनप्रतिनिधियों से किया।

मुख्यमंत्री के प्रमुख निर्देश

* सभी आवश्यक व्यवस्था की जाएं। कलेक्टर और संबंधित अधिकारी किसानों का हित निश्चित करें। अधिकारियों को क्षेत्रवार दायित्व दिए जाएं।

* भावांतर योजना के क्रियान्वयन को प्राथमिकता दें।

* जिला स्तर पर नियमित समीक्षा भी हो। किसानों को सही दाम मिले, इसकी मॉनिटरिंग हो।

* भावांतर योजना किसानों के हित में है, इसका प्रचार-प्रसार किया जाये।

* सभी जनप्रतिनिधि सोशल मीडिया से प्रचार में भी सहयोग करें।

* पात्र किसान समय पर पंजीयन करवा लें जिससे पात्र किसान लाभ से वंचित न रहें।

बिहार के बाद अब बंगाल में शुरू हुआ SIR

बिहार के बाद अब बंगाल में शुरू हुआ SIR
पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय ने प्रवासी श्रमिकों के लिए मतदाता सूची में दोहरी प्रविष्टि रोकने के लिए एक विशेष स्व-घोषणा प्रक्रिया शुरू की है। सीईओ कार्यालय के एक सूत्र ने बताया कि प्रवासी श्रमिकों को एक अलग कॉलम में स्व-घोषणा करनी होगी कि उनकी मतदाता सूची में पश्चिम बंगाल के अलावा किसी अन्य राज्य, विशेष रूप से उनके रोजगार के लिए प्रवास किए गए राज्य में, उनका नाम दर्ज नहीं है। सूत्र ने कहा, यह सुनिश्चित करने के लिए है कि किसी भी प्रवासी श्रमिक का नाम एक से अधिक राज्यों में दर्ज न हो।

SIR फॉर्म का वितरण शुरू
पश्चिम बंगाल में विशेष मतदाता सूची संशोधन (SIR) के लिए फॉर्म छपाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। प्रत्येक मतदाता को दो एसआईआर फॉर्म दिए जाएंगे—एक मतदाता के पास रहेगा और दूसरा बूथ-स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) के पास जमा होगा। इस बार का एसआईआर 2002 में हुए अंतिम मतदाता सूची संशोधन पर आधारित होगा। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, राज्य में प्रवासी श्रमिकों की संख्या लगभग 22 लाख है, हालांकि कई लोगों का मानना है कि यह संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।

बीएलओ की भूमिका पर विशेष जोर
सीईओ कार्यालय ने SIR प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक कदम उठाए हैं। बीएलओ, जो इस प्रक्रिया में जमीनी स्तर पर सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, उनकी आचरण और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बीएलओ को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि यदि उन्हें अपने काम के दौरान किसी भी राजनीतिक संगठन या राज्य प्रशासनिक मशीनरी से हस्तक्षेप, प्रतिरोध या जानबूझकर असहयोग का सामना करना पड़ता है, तो वे तुरंत इसकी सूचना सीईओ कार्यालय को दें।

प्रवासी श्रमिकों की मतदाता सूची में पारदर्शिता
सीईओ कार्यालय का यह कदम प्रवासी श्रमिकों की मतदाता सूची को और अधिक विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह प्रक्रिया न केवल दोहरी प्रविष्टियों को रोकेगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगी कि सभी पात्र मतदाताओं को उनके मताधिकार का उपयोग करने का अवसर मिले।

मणप्पुरम फाइनेंस में 4.5 करोड़ का गोल्ड घोटाला

मणप्पुरम फाइनेंस में 4.5 करोड़ का गोल्ड घोटाला

26 ग्राहकों का असली सोना बदलकर रखा नकली, मैनेजर-एएम संदेह के घेरे में

डबरा। न्यायालय के पास स्थित मणप्पुरम फाइनेंस लिमिटेड की शाखा में करीब 4.5 करोड़ का बड़ा गोल्ड घोटाला सामने आया है। कंपनी की आंतरिक ऑडिट में खुलासा हुआ कि 26 ग्राहकों का करीब 4 किलो 380 ग्राम असली सोना नकली सोने से बदल दिया गया। मामला तब सामने आया जब एक ग्राहक अपना जेवर लेने पहुंचा और उसका पैकेट नकली निकला। इसके बाद 8 लॉकरों की जांच की गई, जिसमें 26 पैकेट फर्जी पाए गए।

घोटाले की जानकारी मिलते ही कंपनी के एरिया मैनेजर और विजिलेंस अधिकारी मौके पर पहुंचे और वरिष्ठ प्रबंधन को सूचना दी। प्रारंभिक जांच में शाखा प्रबंधक चंद्रभान कुशवाहा और असिस्टेंट मैनेजर विकास शर्मा पर संदेह गहराया, क्योंकि लॉकर की चाबियाँ इन्हीं दोनों के पास रहती थीं। प्रबंधन ने दोनों को पुलिस के हवाले कर दिया है। सिटी थाना प्रभारी यशवंत गोयल ने बताया कि कंपनी अधिकारियों ने शिकायत दर्ज कराई है और मामला गंभीर जांच के दायरे में है।

जैसे ही खबर फैली, कंपनी के बाहर ग्राहकों की भारी भीड़ जुट गई। कई लोग घबराए हुए थे कि उनका सोना सुरक्षित है या नहीं। बताया जा रहा है कि शाखा में करीब 11 करोड़ रुपए मूल्य का सोना ग्राहकों का सुरक्षित रखा गया था। ग्रामीण अंचल से आए ग्राहकों में डर और गुस्से का माहौल है, जबकि कंपनी प्रबंधन का कहना है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद ग्राहकों को भरोसा दिलाने और समाधान की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

एकात्म मानवदर्शन के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय

संघ नींव में ज्ञात – अज्ञात विसर्जित पुष्प श्रृंखला 46 =

एकात्म मानवदर्शन के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय –
दीनदयालजी उपाध्याय का जन्म 25 सितम्बर 1916 को ग्राम धनकिया (राजस्थान) में हुआ था। साधन-सम्पन्न घर में जन्म लेकर उसकी सभी सुविधाओं का सहारा पाकर तो कोई भी सफलता के शिखर चूम सकता है किन्तु अभाव के कांटो में पैदा होकर हर पल दुर्भाग्य के थपेड़ों से संघर्ष करते हुए अडिग हिमालय की शुभ्र विभूति के समान चमकने-दमकने वाले बिरले ही होते है। ऐसे ही एक बिरले महापुरुष दीनदयालजी थे। धनकिया ग्राम में दीनदयाल जी के नानाजी श्री चुन्नीलालजी शुक्ल स्टेशन मास्टर थे। दीनदयालजी के पिताजी श्री भगवती प्रसाद उपाध्याय नगला चन्द्रभान फरह जिला मथुरा (उत्तरप्रदेश) के निवासी थे। 3 वर्ष की अवस्था में उनके पिताजी का देहान्त हो गया अतः उनकी माताजी श्रीमती राम प्यारी देवी उन्हें नाना के घर ले आई। जब वे 8 वर्ष के थे तब माताजी भी स्वर्ग सिधार गई। उसके बाद उनका पालन-पोषण उनके मामा राधा रमण शुक्ल ने किया जो फ्रंटियर मेल में गार्ड की नौकरी करते थे।
1932 में दीनदयालजी के एक चचेरे मामा श्री नारायण शुक्ल उन्हें रायगढ़ (अलवर रियासत) ले आयें, जहाँ वे स्टेशन मास्टर थे। 1933 में दीनदयालजी ने मिडिल पास किया और अलवर बोर्ड में प्रथम स्थान प्राप्त किया। जब नारायण शुक्ल का स्थानान्तरण सीकर स्टेशन (जयपुर रियासत) हो गया तब दीनदयालजी की पढ़ाई कल्याण हाईस्कूल सीकर में हुई। 1935 में उन्होंने मेट्रिक की परीक्षा अजमेर बोर्ड में प्रथम क्षेणी में उतीर्ण की। परिणामस्वरूप बोर्ड एवं स्कूल दोनों की तरफ से एक-एक स्वर्ण पदक दिया गया। सीकर के महाराजा ने अपनी ओर से 250 रुपये का नगद पुरुस्कार दिया तथा आगे की सम्पूर्ण पढाई के लिये छात्रवृति देने की घोषणा की। इंटरमीडियट की पढाई बिडला कालेज पिलानी से की। 1937 मैं यह परीक्षा भी दीनदयालजी ने प्रथम श्रेणी में प्रथम स्थान पाकर उतीर्ण की और इस बार भी उन्हें दो स्वर्ण पदक मिलें। इसी बीच उनका छोटा भाई शिवदयाल मात्र 14 वर्ष की आयु में स्वर्गवासी हो गया।
दीनदयाल जी की मेधावीपन को ध्यान में रखकर बी ए की शिक्षा हेतु सनातन धर्म कालेज कानपुर भेजा गया। 1939 में उन्होंने प्रथम श्रेणी में बी ए उतीर्ण की , उस वर्ष बीए मैं प्रथम आने वाले वे एकमेव छात्र थे। 1937 में कानपुर में भाऊराव देवरस की बैठक में दीनदयालजी का जाना हुआ और वे संघ से जूड गये। 1937 दिसम्बर में काशी में शीत शिविर का आयोजन हुआ जिसमें दीनदयालजी ने भाग लिया। उसके बाद ग्रीष्मावकाश में नागपुर में आयोजित संघ शिक्षा वर्ग करने पहुंच गये। 40 दिन की इस अवधि में उन्होंने संघ विचारधारा को हृदयंगम किया और मराठी भाषा भी सीख ली। वर्ग के बाद बहुत जिम्मेदारी से शाखा कार्य करने लगे। उन्होंने 1941 में द्वितीय वर्ष का संघ प्रशिक्षण पूर्ण कर लिया। तृतीय वर्ष संघ शिक्षा वर्ग में बौद्धिक परीक्षा में देशभर में उनका प्रथम स्थान रहा। अपनी मामी के आग्रह के कारण वे प्रशासनिक सेवा की प्रतियोगी परीक्षा में सम्मिलित हुए और हमेशा की तरह यहाँ भी प्रथम स्थान प्राप्त किया किन्तु राष्ट्र भक्ति की भावना से अभिभूत होने के कारण उन्होंने सरकारी नौकरी में जाने से मना कर दिया।
दीनदयालजी के दो ममेरे भाई थे, इनकी उनसे इतनी आत्मीयता थी कि इनके मामा जी इनकी गिनती अपने पुत्रों में किया करते थे और कहते थे मेरे 3 बेटे है। इनके मामा की इच्छा थी कि वे नौकरी एवं विवाह कर लें। जब मामाजी ने विवाह की चर्चा चलाई तो दीनदयालजी ने इसे विनम्रता पूर्वक अस्वीकार करते हुए यह कहा कि वे विवाह ही नहीं, नौकरी भी नहीं करना चाहते अपितु राष्ट्रसेवा में ही समर्पित होना चाहते है। इस संकल्प के बाद 21 जुलाई 1942 को अपने मामा श्री नारायण शुक्ल को पत्र लिखा कि आपने मुझे सब प्रकार से पाला-पोसा और पढाया लिखाया अतः एक संरक्षक के नाते आपकी यह इच्छा-अपेक्षा नितान्त स्वाभाविक है कि मैं घर-गृहस्थी बसाऊंगा और जीविकोपार्जन करते हुए पारिवारिक जिम्मेदारियों में हाथ बटाऊंगा किन्तु मैंने एक दुसरा ही मार्ग अपनाने का निश्चय किया है। अपने-अपने परिवार की चिन्ता तो सभी करते है। परन्तु इस हिन्दू समाजरूपी विशाल परिवार की चिंता करने वाले भी कुछ लोग चाहिये। अपने इस समाज की दशा उस विशाल समुद्री जहाज की तरह है, जिसमें सारे लोग अपनी-अपनी पोटली संभाले बैठे है किन्तु जहाज के पेंदे में हो गये छेदों से अन्दर आने वाले पानी की ओर किसी का ध्यान नहीं है। यदि इन छेदों को समय रहते भरने का समुचित प्रयास नहीं किया गया तो एक दिन ऐसा आएगा, जब पूरा जहाज ही डूब जायेगा तब न कोई पोटली बचेगी और न पोटली वाला। अतः मैंने अपनी शक्ति, बुद्धि और क्षमता के अनुसार उस महा प्रयास में योगदान करने का निश्चय किया है जो इन छेदो को भरने के लिये प्रारम्भ किया गया हैं।
1942 में उनका प्रचारक जीवन गोला गोकर्णनाथ लखीमपुर (उतरप्रदेश) से प्रारम्भ हुआ। वे उत्तर प्रदेश से निकलने वाले पहले प्रचारक थे। गोला गोकर्णनाथ में दीनदयालजी को बहुत कष्ट झेलने पड़े न रहने का ठिकाना और न खाने की व्यवस्था। एक भडभूजे के यहाँ से दो-चार पैसे के चने लेकर और लोटा भर पानी पीकर किसी प्रकार पेट की ज्वाला शांत करते। यह क्रम कई दिन चला। दीनदयाल जी के अथक परिश्रम से गोला में शाखा खुल गई। वहां के हाईस्कूल के विद्याथियों एवं अध्यापकों से दीनदयालजी ने इतना अच्छा परिचय सम्बन्ध बना लिया था कि कभी-कभी जब कोई अध्यापक नहीं आना तो दीनदयालजी पढाने के लिये जाते थे। उनका पढाना सबको इतना भाया कि जब वहां के प्रधानाध्यापक रिटायर होने लगे तो व्यवस्थापकों ने दीनदयालजी से प्रधानाध्यापक बनते का आग्रह किया और 250 रुपये वेतन का प्रस्ताव दिया किन्तु उन्होंने यह कहकर टाल दिया कि भाई मुझे दो धोतीया, दो कुर्ते और भोजन की आवश्यकता है। लगभग 30 रुपये में मेरा सब कुछ हो जाता है, मैं इतने रुपये लेकर क्या करूंगा। संघ शिक्षा वर्ग के बाद उन्हें लखीमपुर जिला प्रचारक का दायित्व दिया गया। जब लखीमपुर में अच्छा काम जम गया तो भाऊराव देवरस ने उन्हें सीतापुर एवं हरदोई जिले का भी प्रवास करने को कहा। 1947 में दीनदयालजी को उतरप्रदेश सह प्रान्त प्रचारक का दायित्व दिया गया। पूरे देश में प्रान्तीय स्तर का दायित्व लेने वाले वे पहले गैर – महाराष्ट्रीयन प्रचारक थे। 1951 में डाक्टर श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने नेहरू मंत्रीमंडल से इस्तीफा दे दिया और वे श्री गुरुजी से मिले तथा एक राष्ट्रवादी राजनैतिक दल बनाने की इच्छा व्यक्त की। तब उनके आग्रह पर गुरुजी ने दीनदयालजी को श्यामाप्रसाद मुखर्जी को सहयोग करने को कहा। 21 सितम्बर 1951 को लखनऊ में एक सम्मेलन कर भारतीय जनसंघ की स्थापना की गई। दीनदयालजी को महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई।
1952 से 1967 तक महामंत्री के रूप में भारतीय जनसंघ का मार्गदर्शन करते रहे। उनसे अनेक बार दल का अध्यक्ष पद संभालने का आग्रह किया गया किन्तु पद, प्रतिष्ठा और आत्म प्रचार से दूर रहने वाले दीनदयालजी ने इसे अस्वीकार करते रहे परन्तु आपात धर्म के नाते दिसम्बर 1967 में अध्यक्ष पद का भार उठाना स्वीकार कर लिया। उनकी अध्यक्षता में कालीकट (केरल) अधिवेशन ने देश की राजनीति में तहलका मचा दिया। एकात्म मानवदर्शन का उन्होंने नया आर्थिक एवं सामाजिक चिन्तन दिया जो साम्यवाद और पूंजीवाद की विसंगतियों से ऊपर उठकर देश को सही दिशा दिखाने में सक्षम है। 11 फरवरी 1968 को वे रेल द्वारा लखनऊ से पटना जा रहे ये तब रास्ते में किसी ने उनकी हत्या कर मुगल सराय रेल्वे स्टेशन पर लाश फेंक दी। इस प्रकार एक कुशल संगठक, प्रभावी वक्ता, लेखक, पत्रकार, चिंतक, का स्वर्गवास हो गया। इस प्रकार एक ओर पुष्प संघ नींव में विसर्जित हो गया।दीनदयाल जी के बारे में अधिक जानकारी के लिये वीरेश्वर द्विवेदी द्वारा लिखित संघ – नींव में विसर्जित द्वितीय पुष्प पढ़ सकते है।
।। भारत माता की जय।।
संदर्भ – 1. तेजोमय प्रतिबिम्ब तुम्हारे प्रदर्शनी भाग – 2
2. जीवन दीप जले भाग – एक लेखक विजय कुमार
संकलन – स्वयंसेवक एवं टीम

राज्य सरकार के लिए मार्गदर्शक हैं पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

राज्य सरकार के लिए मार्गदर्शक हैं पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति के जीवन में सुख की कामना करते हुए एकात्म मानववाद का दर्शन दिया। स्वदेशी और आत्मनिर्भरता ही हमारी संस्कृति और गांवों की व्यवस्था का आधार रही है, यह स्वावलंबन की भावना ही पं. दीनदयाल उपाध्याय के विचारों का आधार थी। पं. दीनदयाल उपाध्याय और महात्मा गांधी के विचारों में बहुत समानता थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव पं. दीनदयाल उपाध्याय की 109वीं जयंती पर लालघाटी स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर एक पेड़ मां के नाम अभियान के अंतर्गत सिंदूर का पौधा भी रोपा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पंडित दीनदयाल के विचार राज्य सरकार के लिए मार्गदर्शक हैं। हम प्रदेश के गरीब से गरीब व्यक्ति के जीवन में बदलाव लाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जीएसटी सुधारों के माध्यम से देशवासियों को बड़ी सौगात दी है। इससे छोटे व्यापारियों और कारीगरों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और देश के किसानों, कारीगरों, छोटे व्यापारियों की बेहतरी के लिए सभी से स्वदेशी अपनाने का आव्हान किया। इस अवसर पर कार्यक्रम में प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, संगठन मंत्री हितानंद शर्मा, सांसद आलोक शर्मा, विधायक रामेश्वर शर्मा, विधायक भगवानदास सबनानी तथा अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

वेस्टइंडीज सीरीज के लिए भारतीय टीम का एलान

वेस्टइंडीज सीरीज के लिए भारतीय टीम का एलान
वेस्टइंडीज के खिलाफ अगले महीने होने वाली दो मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए गुरुवार को भारतीय टीम का एलान हो गया है। भारतीय टीम इस सीरीज में शुभमन गिल की कप्तानी में खेलने उतरेगी, जबकि रवींद्र जडेजा को उपकप्तान बनाया गया है। भारत और वेस्टइंडीज के बीच दो अक्तूबर को दो मैचों की सीरीज का पहला मुकाबला अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जाएगा। इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की सीरीज के बाद पहली बार भारतीय टीम टेस्ट मैच खेलने उतरेगी।

पंत की अनुपस्थिति में जुरेल संभालेंगे विकेटकीपिंग का जिम्मा
वेस्टइंडीज के खिलाफ ध्रुव जुरेल विकेटकीपिंग का जिम्मा संभालेंगे। टीम के अनुभवी विकेटकीपर ऋषभ पंत चोट से पूरी तरह उबर नहीं सके हैं जिस कारण इस सीरीज के लिए उनका चयन नहीं किया गया है। पंत इंग्लैंड दौरे पर उपकप्तानी का जिम्मा भी संभाल रहे थे और उनकी अनुपस्थिति में अब यह जिम्मेदारी रवींद्र जडेजा को सौंपी गई है। यह पहले से ही तय माना जा रहा था कि पंत वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट सीरीज का हिस्सा नहीं होंगे। ऐसे में जुरेल पर जिम्मेदारी होगी जिन्होंने इंग्लैंड दौरे पर भी पंत की अनुपस्थिति में विकेट के पीछे जिम्मेदारी निभाई थी। विकेटकीपर के तौर पर जुरेल पहली पसंद हैं, जबकि बैकअप के तौर पर एन जगीदशन को भी टीम में जगह दी गई है।

बुमराह को नहीं दिया गया आराम
एशिया कप में भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रामण की अगुआई कर रहे जसप्रीत बुमराह को वेस्टइंडीज के खिलाफ आराम नहीं दिया गया है। इंग्लैंड दौरे पर बुमराह के कार्यभार प्रबंध का ध्यान रखा गया था और उन्होंने पांच में से सिर्फ तीन मैच ही खेले थे। इसे देखते हुए माना जा रहा था कि व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के मद्देनजर बुमराह को इस सीरीज से आराम मिल सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस बात की भी पूरी संभावना है कि बुमराह प्लेइंग-11 का हिस्सा होंगे। वहीं, उनके साथ मोहम्मद सिराज और प्रसिद्ध कृष्णा तेज गेंदबाजी का जिम्मा संभालेंगे।

करुण बाहर, सरफराज को नहीं मिली जगह
इंग्लैंड दौरे से आठ साल बाद भारतीय टीम में जगह बनाने वाले करुण नायर को वेस्टइंडीज के खिलाफ टीम में जगह नहीं दी गई है। इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टेस्ट सीरीज में उम्मीद के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सके थे। इंग्लैंड के खिलाफ ओवल पर आखिरी टेस्ट में अर्धशतक जमाने वाले करुण ने सभी पारियों में अच्छी शुरुआत की। वह खराब फॉर्म में नहीं थे लेकिन ज्यादा रन नहीं बना सके। इसके बाद उनकी अंगुली में चोट लग गई और वह दलीप ट्रॉफी नहीं खेल सके। दूसरी ओर, सरफराज खान को एक बार फिर टेस्ट टीम में जगह नहीं दी गई है। सरफराज पिछले कुछ समय से अपनी फिटनेस पर भी काम कर रहे थे और उन्होंने घरेलू क्रिकेट में रन बनाए थे, लेकिन चयनकर्ताओं ने इस सीरीज के लिए उन्हें नहीं चुना है।

श्रेयस अय्यर ने लाल गेंद के प्रारूप से लिया ब्रेक
वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज के लिए टीम के एलान से पहले बीसीसीआई ने इस बात की पुष्टि कर दी थी कि श्रेयस अय्यर ने लाल गेंद के प्रारूप से छह महीने का ब्रेक लिया है। संभवत: इसी कारण चयनकर्ताओं ने श्रेयस के नाम पर विचार नहीं किया होगा। बीसीसीआई ने बताया था कि श्रेयस की ब्रिटेन में सर्जरी हुई थी और वह इससे उबर रहे हैं। हाल ही में लाल गेंद के मैच में खेलने के दौरान उन्हें दिक्कतें हो रही थी। श्रेयस चाहते हैं कि इस पीरियड को वह अपनी फिटनेस को ठीक करने के लिए लगाएं। श्रेयस के फैसले को देखते हुए बीसीसीआई ने ईरानी कप के लिए उनका चयन नहीं किया है।

भाजपा ने बिहार चुनाव के लिए धर्मेंद्र प्रधान को बनाया प्रभारी

भाजपा ने बिहार चुनाव के लिए धर्मेंद्र प्रधान को बनाया प्रभारी
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए कमर कस ली है। इसी कड़ी में गुरुवार को पार्टी ने चुनाव प्रभारी और सह प्रभारियों का एलान किया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बिहार में प्रदेश चुनाव प्रभारी नियुक्त किया गया है। उधर केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल को प्रदेश चुनाव सह-प्रभारी का जिम्मा सौंपा गया है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य प्रदेश चुनाव सह-प्रभारी बनाया गया है।

इसके साथ ही भाजपा ने अगले साल होने वाले तमिलनाडु चुनाव के लिए पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बैजयंत पांडा को चुनाव प्रभारी नियुक्त किया है। उनके साथ सहकारिता और उड्डयन मंत्रालय में राज्यमंत्री का पद संभाल रहे मुरलीधर मोहोल को सह-प्रभारी बनाया गया है।

पार्टी ने केंद्रीय पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव को पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रभारी बनाया है, जबकि सांसद बिप्लब कुमार देव को सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है।

गौरतलब है कि बिहार में इसी साल के अंत में चुनाव होने हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में 2026 के मध्य में चुनाव कराए जाने हैं। भाजपा ने इसके लिए अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं।

समीर वानखेड़े ने शाहरुख-गौरी के खिलाफ HC में दायर किया मानहानि केस

समीर वानखेड़े ने शाहरुख-गौरी के खिलाफ HC में दायर किया मानहानि केस
एनसीबी के पूर्व अफसर समीर वानखेड़े ने शाहरुख खान और उनकी पत्नी गौरी खान के स्वामित्व वाली रेड चिली और गौरी खान पर दिल्ली हाईकोर्ट में मामला दर्ज कराया है। समीर वानखेड़े ने आर्यन खान की वेब सीरीज ‘द बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ में उनकी छवि को गलत तरीके से दिखाने का आरोप लगाया है।

छवि को नुकसान पहुंचाने के लगाए आरोप
समीर वानखेड़े एनसीबी मुंबई के जोनल निदेशक रहे हैं। रेड चिली शाहरुख खान और गौरी खान की स्वामित्व वाली कंपनी है। समीर ने रेड चिली के साथ स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स और अन्य के खिलाफ भी दिल्ली हाईकोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया है। उनका आरोप है कि रेड चिली की सीरीज ‘द बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ में झूठी, दुर्भावनापूर्ण और अपमानजनक सामग्री है, जिसका उद्देश्य उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना है। ‘द बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ का निर्देशन आर्यन खान ने किया है। ये सीरीज हाल ही में रिलीज हुई है और नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रही है।

द बैड्स ऑफ बॉलीवुड में था संंबंधित सीन
आर्यन खान के हालिया रिलीज शो ‘द बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ में एक एपिसोड में एनसीबी के पूर्व अफसर समीर वानखेड़े पर तंज कसा गया था। समीर वानखेड़े क्रूज पार्टी मामले में आर्यन खान को गिरफ्तार करने वाले एनसीबी अफसर हैं। सीरीज में समीर वानखेड़े की तरह ही दिखने वाला एक किरदार था, जिसकी भूमिका भी एनसीबी अफसर की ही थी। सीरीज में दिखाया गया कि एनसीबी अफसर बॉलीवुड की पार्टी में रेड डालने पहुंचता है। इस अफसर के हाव-भा और शकल काफी हद तक समीर वानखेड़े से मिलते थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय अचानक पहुंचे मार्ट,ग्राहकों से की मुलाकात,ग्राहक बोले जीएसटी रिफॉर्म्स, बचत क्रांति

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय अचानक पहुंचे मार्ट,ग्राहकों से की मुलाकात,ग्राहक बोले जीएसटी रिफॉर्म्स, बचत क्रांति
राजधानी रायपुर के सरोना स्थित शुभम “के मार्ट” में रोजमर्रा की ज़रूरत का सामान खरीद रहे लोग उस समय सुखद आश्चर्य से भर उठे, जब उन्होंने देखा कि जीएसटी बचत का लाभ उन्हें मिल रहा है या नहीं उसे देखने स्वयं प्रदेश के मुखिया आए है।

दरअसल, आज जीएसटी बचत उत्सव को लेकर जनभावनाओं से रूबरू होने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय “शुभम के मार्ट” पहुंचे। उन्होंने खुद ग्राहक बनकर 1,645 रुपये के घरेलू सामान की शॉपिंग की एवं यूपीआई से भुगतान भी किया।इस दौरान उन्होंने खरीदारी कर रहे लोगों से बातचीत की और जीएसटी दरों में कटौती से घरेलू सामानों के मूल्य में आए फर्क के बारे में जानकारी ली।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मार्ट पहुंचकर ज़रूरत के सामान खरीदे और जीएसटी दरों में कमी का लाभ लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आत्मीयता से लोगों का हालचाल जाना। उन्होंने खरीदारी कर रही गृहिणियों से घरेलू बजट पर आए असर की जानकारी ली, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों से उनकी दिनचर्या के बारे में पूछताछ की। इस बीच उन्होंने रोजमर्रा का सामना खरीदते हुए अन्य ग्राहकों से आत्मीयतापूर्वक वार्तालाप किया। मुख्यमंत्री का यह आत्मीय व्यवहार देखकर मौजूद लोग गदगद हो उठे और कहा कि प्रदेश का मुखिया आज हमारे बीच एक आम आदमी की तरह शामिल है। इस दौरान उन्होंने खरीददारों से चर्चा करते हुए जीएसटी सुधारों पर लोगों के विचार सुने। लोगों ने बताया कि दवाइयों और राशन की कीमत घटने से उन्हें बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री मुस्कुराते हुए बोले—”यही तो असली मकसद है कि सुधार की गूंज आम जनता तक पहुंचे।” इसके बाद उन्होंने खुद भी सामान खरीदा और नई कीमतें देखकर कहा—”यह सुधार केवल कागज पर नहीं, बल्कि हर परिवार की ज़िंदगी में दिखाई देने वाला परिवर्तन है।”

मुख्यमंत्री साय ने सभी को स्वदेशी की मुहिम का साथ देने का आग्रह भी किया, जिस पर लोगों ने कहा आप आगे बढ़े ,हम आपके साथ है।

जीएसटी कटौती नहीं, यह “बचत क्रांति” है

मुख्यमंत्री से चर्चा करते हुए खरीदारी कर रहे रिटायर्ड एयरफोर्स अधिकारी श्री टी. पी. सिंह ने कहा कि आने वाले समय में जब इस दौर का इतिहास लिखा जाएगा, तब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुए जीएसटी सुधार को ऐतिहासिक बजट क्रांति के रूप में दर्ज किया जाएगा। उन्होंने कहा—”पहले हम जितने पैसों में 30 दिन का राशन लेते थे, अब उन्हीं पैसों से 40 दिन से अधिक का राशन ले पा रहे हैं। हमारे प्रधानमंत्री ही इतना बड़ा साहसिक निर्णय ले सकते थे, कोई और ऐसा नहीं कर पाता।”

स्टेशनरी में 12 प्रतिशत था टैक्स, अब हो गया जीरो
राजधानी रायपुर के अवंती विहार निवासी लद्दाराम नैनवानी ने बताया कि जीएसटी सुधार का सकारात्मक प्रभाव शिक्षा से भी जुड़ा है। शुभम “के मार्ट” में मुख्यमंत्री को नोटबुक दिखाते हुए उन्होंने कहा—”पहले इस पर 12 प्रतिशत टैक्स लगता था, लेकिन अब प्रधानमंत्री मोदी जी ने इसे शून्य कर दिया है। इस ऐतिहासिक कदम से कॉपियाँ और आवश्यक स्टेशनरी सस्ती हो गई हैं। ऐसा निर्णय हमारे प्रधानमंत्री ही कर सकते हैं।”
उन्होंने आगे बताया—”पहले मैं बच्चों के लिए सालाना लगभग 2,000 रुपये की स्टेशनरी लेता था और अब इसमें लगभग 240 रुपये की बचत हो रही है।”

चार जरूरी समान खरीदने आए, जीएसटी छूट से खरीदा 4 गुना अधिक सामान
मार्ट में खरीदारी करने पहुंचे मुरलीधर ने मुख्यमंत्री से बातचीत में बताया—”मैं आज केवल 4 ज़रूरी सामान खरीदने आया था, लेकिन जीएसटी दरों में कमी देखकर 4 गुना अधिक सामान खरीद लिया। जीएसटी में व्यापक सुधार से रोजमर्रा की सामग्रियाँ सस्ती हुई हैं और हमें सीधा लाभ मिल रहा है।”

देवांगन दंपति ने बताया मंथली बजट में 10 प्रतिशत की कमी
शुभम “के मार्ट” में खरीदारी करने पहुंचे चंगोराभाटा निवासी दंपति श्री जितेंद्र और श्रीमती पद्मा देवांगन ने कहा—”हमारे मासिक बजट में 10 प्रतिशत की कमी आई है।” गृहिणी श्रीमती पद्मा ने नए प्राइस टैग देखकर कहा—”पहले यही डिटर्जेंट और मसाले मैं ज्यादा कीमत में खरीदती थी। अब दरों में कटौती के बाद कम दाम देखकर सचमुच खुशी हो रही है। त्योहारी खरीदारी में काफी बचत हो रही है।”

बजट से ज्यादा खरीदारी का मिला मौका
सविता मौर्य और अनीता साकार नवरात्रि में आयोजित होने वाले कन्या भोज के लिए श्रृंगार सामग्री खरीदने आईं थीं। उन्होंने कहा—”श्रृंगार सामग्री के दाम पहले से कम हो गए हैं। जीएसटी दरों में कटौती ने हमें निर्धारित बजट से अधिक खरीदारी करने का अवसर दिया है। पहली बार लगता है कि त्योहारी सेल केवल विज्ञापन नहीं, बल्कि असल में राहत है।”

उल्लखेनीय है कि जीएसटी दरों में हुए ऐतिहासिक सुधारों के बाद बाजारों में रौनक बढ़ी है और लोग लगातार खरीदारी कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में त्योहारी सीजन में लोगों को जीएसटी दरों में कटौती का बड़ा उपहार मिला है और इससे रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुएँ सस्ती हुई हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय छत्तीसगढ़ केयर कनेक्ट कार्यक्रम में हुए शामिल

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय छत्तीसगढ़ केयर कनेक्ट कार्यक्रम में हुए शामिल
छत्तीसगढ़ अब केवल कोर सेक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले समय में यह वेलनेस, हेल्थकेयर और पर्यटन के क्षेत्र में भी राष्ट्रीय पहचान बनाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज ओमाया गार्डन, रायपुर में आयोजित छत्तीसगढ़ केयर कनेक्ट कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री साय ने अपने उद्बोधन की शुरुआत शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाओं से की और कहा कि यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में लागू जीएसटी 2.0 ने अर्थव्यवस्था को सरलता, पारदर्शिता और तेजी की दिशा में आगे बढ़ाया है। इस सुधार ने निवेशकों और उद्यमियों के लिए अभूतपूर्व अवसर खोले हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के विज़न के साथ कदमताल करते हुए प्रदेश सरकार ने विकसित छत्तीसगढ़ का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को साकार करने के लिए पिछले डेढ़ वर्ष में 350 से अधिक सुधार लागू किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि अब हम इज ऑफ डूइंग बिज़नेस से आगे बढ़कर स्पीड आफ डूइंग बिज़नेस के युग में प्रवेश कर चुके हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नई औद्योगिक नीति छत्तीसगढ़ की प्रगति की आधारशिला है। इसी नीति ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है और यही कारण है कि मात्र एक वर्ष के भीतर प्रदेश को लगभग 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इन प्रस्तावों से लाखों लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे और सेवा क्षेत्र को नई पहचान मिलेगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ केयर कनेक्ट में अस्पतालों और हेल्थकेयर क्षेत्र में 11 बड़े प्रस्ताव सामने आए हैं। इनमें रायपुर का गिन्नी देवी गोयल मणिपाल हॉस्पिटल (500 बेड), नीरगंगा हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (450 बेड), बॉम्बे हॉस्पिटल (300 बेड) और माँ पद्मावती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (750 बेड) जैसे बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में कुल मिलाकर 2,466 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है, जिससे लगभग 6,000 नए रोजगार सृजित होंगे।

मेडिसिटी से बनेगा मेडिकल हब
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नवा रायपुर में विकसित हो रहा मेडिसिटी छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर का बड़ा मेडिकल हब बनाएगा। प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों से भी यहां मरीज आते हैं। मेडिसिटी के निर्माण से स्वास्थ्य सेवाएं और मजबूत होंगी और विश्वस्तरीय सुपर स्पेशलिटी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में फार्मा सेक्टर में भी निवेश की अपार संभावनाएं हैं। प्रदेश सरकार फार्मा हब तैयार कर रही है, जहां एक ही स्थान पर अनेक फार्मा इंडस्ट्री अपना संचालन करेंगी। इससे प्रदेश में दवा उद्योग को नई दिशा मिलेगी और सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों के लिए आवश्यक दवाओं की आसान आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

होटल और पर्यटन क्षेत्र में निवेश
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और जैव विविधता पर्यटन उद्योग के लिए अपार अवसर प्रस्तुत करती है। कार्यक्रम में होटल और पर्यटन क्षेत्र से भी 652 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें वेस्टिन होटल रायपुर (212.7 करोड़ रुपये), होटल जिंजर, इन्फेरियन होटल एंड रिसॉर्ट, अम्यूजोरामा अम्यूज़मेंट पार्क एंड होटल जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

पर्यटन को उद्योग का दर्जा
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया गया है और इससे निवेशकों को विशेष लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री ने आह्वान किया कि होटल, रिसॉर्ट, होम स्टे और मनोरंजन उद्योग से जुड़े उद्यमी प्रदेश की समृद्ध संस्कृति और प्रकृति का लाभ उठाकर पर्यटन को नई ऊँचाइयों तक ले जाएं।

निवेश प्रक्रिया की सरलता
मुख्यमंत्री साय ने निवेशकों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में सिंगल विंडो ‘वन क्लिक’ सिस्टम लागू है, जिसके कारण किसी भी उद्यमी को एनओसी के लिए भटकना नहीं पड़ता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली में आयोजित इन्वेस्टर्स समिट के बाद पालीमैटेक कंपनी को तीन माह से भी कम समय में भूमि आवंटन और सभी स्वीकृतियाँ प्रदान कर दी गईं और उन्होंने 1,100 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट पर कार्य आरंभ कर दिया।

नई तकनीक और एआई सेक्टर
मुख्यमंत्री साय ने बताया कि छत्तीसगढ़ एआई क्रांति का भी स्वागत कर रहा है। नवा रायपुर में एआई डाटा सेंटर पार्क का निर्माण किया जा रहा है, जो भविष्य में प्रदेश को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डाटा मैनेजमेंट का हब बनाएगा। यहां डाटा सेंटर से जुड़े उद्योगों के लिए निवेश की अपार संभावनाएं हैं।

पावर हब की ओर कदम
उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में ऊर्जा सबसे आवश्यक तत्व है। छत्तीसगढ़ देश का पावर हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। कोयला, खनिज और ऊर्जा उत्पादन में छत्तीसगढ़ की भूमिका पहले से ही महत्वपूर्ण रही है और आने वाले वर्षों में यह योगदान और भी बढ़ेगा।

कनेक्टिविटी और लोकेशन का लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की सेंट्रल इंडिया लोकेशन इसे विशेष बनाती है। कच्चे माल की प्रचुर उपलब्धता, रेल, सड़क और हवाई मार्ग की मजबूत कनेक्टिविटी तथा प्रशिक्षित मानव संसाधन इसे निवेश के लिए आदर्श गंतव्य बनाते हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में एयर कार्गो सेवा भी आरंभ हो चुकी है, जिससे व्यापार और तेज़ी से बढ़ेगा।

सेवा क्षेत्र की नई पहचान
मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि अब छत्तीसगढ़ केवल स्टील, सीमेंट, पावर और एल्युमिनियम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सेवा क्षेत्र से जुड़े उद्योगों की पहचान भी बनेगा। हेल्थकेयर, होटल, पर्यटन और एआई आधारित इंडस्ट्री आने वाले समय में प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नए आयाम देंगे।

कार्यक्रम में उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि हेल्थ, पर्यटन के साथ सभी प्रकार के निवेश में सरकार सहूलियतें उपलब्ध कराएगी। नई उद्योग नीति से उद्योगपतियों का आकर्षण प्रदेश की ओर बढ़ा है। मुख्यमंत्री ने विभिन्न प्रदेशों के साथ ही विदेश जापान और दक्षिण कोरिया जैसे स्थानों पर भी इन्वेस्टर समिट में हिस्सा लिया है। प्रदेश में 5 से अधिक बार निवेशकों के साथ बैठक हुई है, इससे नए उद्योगों की स्थापना और रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं। पिछले 10 महीनों में लगभग 7 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिल चुके है। हमने होटल एवं पर्यटन क्षेत्र को भी प्रोत्साहित करने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देशन में अच्छे से अच्छा काम हो सके हम यह प्रयास कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि राजधानी रायपुर के ओमाया गार्डन में आयोजित छत्तीसगढ़ केयर कनेक्ट कार्यक्रम में हेल्थकेयर और होटल क्षेत्र की प्रतिष्ठित कंपनियों ने निवेश के बड़े प्रस्ताव पेश किए। कार्यक्रम में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए 11 बड़े अस्पताल समूहों ने कुल 2,466.77 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव दिए, जिनसे लगभग 6000 लोगों को रोजगार मिलेगा और प्रदेश में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की नई ऊँचाइयाँ स्थापित होंगी।

कार्यक्रम में मुंबई स्थित बॉम्बे हॉस्पिटल ट्रस्ट ने 300 बेड सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के लिए 680.37 करोड़ का निवेश प्रस्तावित किया है, जिससे 500 रोजगार उपलब्ध होंगे। माँ पद्मावती इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज रायपुर 750 बेड क्षमता वाला मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल 340 करोड़ निवेश और 1,500 रोजगार अवसर प्राप्त होंगे। आरोग्यमृत वेलनेस एलएलपी रायपुर द्वारा इंटरनल वेलनेस ग्रोथ, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की स्थापना हेतु 300 करोड़ के निवेश और 1,000 रोजगार अवसरों के साथ प्रस्तावित किया गया है। फोर सीज़न हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर रायपुर 600 बेड क्षमता और 302 करोड़ के निवेश से 1,400 रोजगार सृजित करेगा। गिन्नी देवी गोयल मणिपाल हॉस्पिटल रायपुर में 500 बेड का 307 करोड़ का मल्टी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल प्रस्तावित है, जिसमें 100 लोगों को रोजगार मिलेगा। नीरगंगा हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर रायपुर (वंदना ग्रुप) द्वारा 450 बेड का मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल 205.23 करोड़ के निवेश और 302 रोजगार अवसरों के साथ प्रस्तावित किया गया है। मेमन हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड रायपुर 150 बेड क्षमता वाले संजीवनी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में 101 करोड़ निवेश और 400 रोजगार अवसर लेकर आया है। मॉडर्न मेडिकल इंस्टिट्यूट रायपुर 150 बेड सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के रूप में 91.8 करोड़ के निवेश से 555 रोजगार उत्पन्न करेगा। श्रीराम संजीवनी कैंसर हॉस्पिटल बिलासपुर 100 बेड 70 करोड़ निवेश और 200 लोगों को रोजगार के साथ प्रस्तावित है।
आरएस अरमानी हेल्थकेयर एलएलपी 50 बेड अस्पताल के लिए 59.37 करोड़ का निवेश और 76 रोजगार अवसर लेकर आया है। वृंदा चेस्ट एंड मेडिकल साइंस रायपुर 50 बेड की सुविधा 10 करोड़ के निवेश के साथ प्रस्तावित है।

होटल वेस्टिन रायपुर (सारदा ग्रुप नागपुर) ने 212.7 करोड़ का निवेश और 400 रोजगार का प्रस्ताव रखा है। पंचामृत एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड रायपुर (अम्यूज़ोरामा अम्यूज़मेंट पार्क एंड होटल) 80.91 करोड़ निवेश से 300 रोजगार सृजित करेगा। चौहान हाउसिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा इन्फेरियन होटल एंड रिसॉर्ट रायपुर 80 करोड़ निवेश के साथ प्रस्तावित है।
होटल जिंजर रायपुर (डीएसएस ग्रुप) 78 करोड़ निवेश और 135 रोजगार अवसर लेकर आया है।
एमएम होटल इन एंड रिसॉर्ट्स रायपुर 63 करोड़ निवेश से 110 रोजगार अवसर सृजित करेगा।
प्रयास मॉल एंड मल्टीप्लेक्स धमतरी 41.82 करोड़ निवेश और 30 रोजगार अवसर लेकर आया है। इन्फेरियन लेक रिसॉर्ट बालोद और होटल राजनांदगांव के लिए 25-25 करोड़ निवेश और कुल 175 रोजगार अवसर प्रस्तावित हैं। गोदरीवाला और एमएम ग्रुप रायपुर द्वारा प्रस्तावित अम्यूज़मेंट पार्क 24.9 करोड़ निवेश और 70 रोजगार अवसर प्रदान करेगा। बाफना लॉन एंड होटल धमतरी (सरोवर पोर्टिको ग्रुप) द्वारा 20.97 करोड़ निवेश और 22 रोजगार अवसर प्रस्तावित किया गया है।

इस प्रकार कार्यक्रम में घोषित कुल निवेश प्रस्ताव 3,119.07 करोड़ रुपये के हैं। इनमें स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र से 2,466.77 करोड़ और होटल-पर्यटन क्षेत्र से 652.3 करोड़ रुपये शामिल हैं। प्रस्तावित परियोजनाओं से मिलकर 7 हजार से अधिक रोजगार सृजित होंगे और प्रदेश को 2,800 से अधिक नए हॉस्पिटल बेड्स की सुविधा प्राप्त होगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने निवेशकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निवेश छत्तीसगढ़ को हेल्थकेयर, वेलनेस और पर्यटन का नया केंद्र बनाएगा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के संकल्पित विकसित भारत के निर्माण में छत्तीसगढ़ अग्रणी भूमिका निभाएगा।

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में निवेश के असीमित अवसर उपलब्ध हैं। हमारी सरकार नई औद्योगिक नीति के तहत निवेशकों को हर संभव सुविधा और सहयोग प्रदान करेगी। मुझे विश्वास है कि राज्य के उद्योगों और निवेशकों के साथ मिलकर हम छत्तीसगढ़ में विकास का नया अध्याय लिखेंगे।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, संचालक संस्कृति विवेक आचार्य, संचालक उद्योग प्रभात मालिक, सीआईआई के चेयरमेन संजय जैन भी उपस्थित रहे।

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