CWC की बैठक में क्या होगा खास, 3 सीएम समेत 170 नेता पहुंचे पटना

CWC की बैठक में क्या होगा खास, 3 सीएम समेत 170 नेता पहुंचे पटना
पटना आज कांग्रेस की सियासत का केंद्र बनने जा रहा है। आजादी के बाद पहली बार बिहार में कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक होने जा रही है। यह ऐतिहासिक बैठक आज बुधवार सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक चलेगी। कांग्रेस इसे महज़ औपचारिकता नहीं, बल्कि 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले अपने संगठन और कार्यकर्ताओं को नई ऊर्जा देने का बड़ा मौका मान रही है।

गांधी परिवार की मौजूदगी से बढ़ी धड़कनें
इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी मौजूद रहेंगे। राहुल और सोनिया गांधी आज सुबह पटना पहुंचेंगे, जहां एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत किया जाएगा। बैठक में 170 से अधिक शीर्ष नेता शामिल होंगे, जिनमें तीन राज्यों के मुख्यमंत्री, हिमाचल प्रदेश के सुखविंदर सिंह सुक्खू, कर्नाटक के सिद्धरमैया और तेलंगाना के रेवंत रेड्डी भी शामिल हो रहे हैं।

पटना बनेगा कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन का मंच
कांग्रेस इसे सिर्फ एक आंतरिक बैठक की तरह नहीं देख रही है। इसे बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र पार्टी का शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है। कांग्रेस बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरु ने कहा है कि बिहार में कांग्रेस ‘दूसरा स्वतंत्रता संग्राम’ लड़ रही है। उनका आरोप है कि बीजेपी केंद्र की सत्ता का दुरुपयोग कर रही है और चुनावों में वोट चोरी जैसे अनुचित साधनों का इस्तेमाल कर रही है।

बिहार की मेहमाननवाज़ी और लिट्टी-चोखा का स्वाद
बैठक स्थल सदाकत आश्रम को भव्य तरीके से सजाया गया है। 30,000 स्क्वायर फीट में बना एसी टेंट किसी सम्मेलन से कम नहीं है। इसमें विभिन्न राज्यों की संस्कृति को दर्शाती पेंटिंग्स लगाई गई हैं, कोलकाता से झूमर और डिजिटल लाइटिंग मंगाई गई है। नेताओं के ठहरने के लिए पटना और आसपास के होटलों में

300 से अधिक कमरे बुक किए गए हैं।
नवरात्र को देखते हुए मेन्यू पूरी तरह शाकाहारी रखा गया है। लेकिन राहुल गांधी और अन्य नेताओं के लिए बिहार का मशहूर व्यंजन लिट्टी-चोखा भी खास तौर पर तैयार कराया जाएगा। इससे कांग्रेस यह संदेश देना चाहती है कि वह स्थानीय संस्कृति और जनता की भावनाओं से जुड़ी है।

चुनावी रणनीति पर होगी गहन चर्चा
इस बैठक में कई बड़े एजेंडे पर चर्चा होनी है। खासकर 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव की रणनीति, संगठन को मज़बूत करना और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना इसमें प्रमुख होगा। इसके अलावा मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ विपक्षी भूमिका को कैसे तेज़ किया जाए, इस पर भी विचार होगा। पार्टी को उम्मीद है कि जैसे 2023 में तेलंगाना चुनाव से पहले हैदराबाद में हुई CWC बैठक का असर वहां के नतीजों में दिखा, वैसे ही पटना की बैठक भी बिहार कांग्रेस को मजबूत आधार देगी।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से जोड़ने की कोशिश
कांग्रेस इस बैठक को इतिहास से भी जोड़कर देख रही है। सदाकत आश्रम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कई अहम बैठकों का गवाह रहा है। महात्मा गांधी, डॉ. राजेंद्र प्रसाद और जवाहरलाल नेहरू जैसी हस्तियां यहां बैठकर आज़ादी की लड़ाई की रणनीति तैयार करती थीं। कांग्रेस चाहती है कि उसी धरती से एक बार फिर उसके संगठन और आंदोलन को नई दिशा मिले।

जीएसटी बचत उत्सव का जायजा लेने बाजार पहुंचे मुख्यमंत्री साय

जीएसटी बचत उत्सव का जायजा लेने बाजार पहुंचे मुख्यमंत्री साय
नवरात्रि पर्व के शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर के एम.जी. रोड एवं आसपास के प्रमुख बाजारों का भ्रमण कर व्यापारियों और उपभोक्ताओं से आत्मीय संवाद किया। यह अवसर इसलिए भी विशेष रहा क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में लागू जीएसटी 2.0 ने कर प्रणाली को नई सरलता और पारदर्शिता प्रदान की है। मुख्यमंत्री के आगमन से पूरे बाजार का वातावरण उल्लास और उत्साह से भर गया। जगह-जगह व्यापारियों और नागरिकों ने उनका स्वागत किया और “मोदी जी को धन्यवाद” के नारे गूंजते रहे। मुख्यमंत्री ने दुकानदारों से प्रत्यक्ष संवाद करते हुए जाना कि नई कर व्यवस्था से व्यापारियों और उपभोक्ताओं दोनों को कितना बड़ा लाभ मिला है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शाम को राजधानी रायपुर स्थित जयस्तंभ चौक से महात्मा गांधी मार्ग होते हुए गुरुनानक चौक तक पैदल बाजार भ्रमण किया और जीएसटी बचत उत्सव का जायजा लेने विभिन्न प्रतिष्ठानों में पहुंचे। इस दौरान मुख्यमंत्री साय ने दुकानों में बचत उत्सव के स्टीकर भी लगाए और स्थानीय दुकानदारों एवं ग्राहकों से आत्मीय चर्चा की।

बाजार भ्रमण के दौरान व्यापारियों में खासा उत्साह देखने को मिला। विभिन्न व्यापारी संगठनों एवं संचालकों ने मुख्यमंत्री साय का गर्मजोशी से स्वागत किया।
इस मौके पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जीएसटी सुधार से देश की आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी, जिससे स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार द्वारा हाल में किए गए व्यापक जीएसटी सुधारों से टैक्स में कमी आई है और ग्राहकों को इसका सीधा लाभ मिल रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने शारदा चौक स्थित श्री शंकर हनुमान मंदिर में दर्शन कर बाजार भ्रमण की शुरुआत की।
मुख्यमंत्री से बातचीत में लीला श्रीराम इलेक्ट्रॉनिक्स में खरीददारी करने आई समता कॉलोनी निवासी सुश्री ऋचा ठाकुर ने कहा कि जीएसटी में कटौती से उनकी बड़ी चिंता दूर हुई है। उन्होंने बताया कि उन्हें अपने हॉस्टल के लिए 5 एसी खरीदने थे। पहले 35,000 रुपये प्रति एसी की कीमत वाले उत्पाद अब कटौती और डिस्काउंट के बाद 30,000 रुपये में मिले, जिससे एक बार में ही 25,000 रुपये की बचत हुई। ऋचा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस निर्णय के लिए धन्यवाद दिया।

इसी प्रकार एम.एस. ट्रेडर्स के प्रोप्राइटर मोहन नेभानी ने बताया कि बचत उत्सव के दौरान मुख्यमंत्री स्वयं उनकी दुकान पर आए और ग्राहकों के लाभ की जानकारी ली। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि जीएसटी में कटौती से ग्राहकों की खरीददारी बढ़ी है और हर सामान पर 1,000 से 2,000 रुपये तक की बचत हो रही है।

मुख्यमंत्री साय ने महात्मा गांधी मार्ग स्थित विभिन्न दुकानों में भ्रमण कर दुकानदारों और ग्राहकों से आत्मीय बातचीत की। बाजार में पैदल भ्रमण के दौरान आमजन ने मुख्यमंत्री पर पुष्पवर्षा कर स्वागत और अभिनंदन किया।

जयस्तंभ चौक पर मुख्यमंत्री का स्वागत चैम्बर ऑफ कॉमर्स और पार्टी पदाधिकारियों ने किया। इसके बाद वे शारदा चौक पहुंचे और वहाँ देवी प्रतिमा के दर्शन कर भक्तों से आत्मीय संवाद किया। इस दौरान नवरात्रि की शुभकामनाएँ दीं।

इसके पश्चात मुख्यमंत्री पूनम होटल से लेकर मंजू ममता होटल तक पैदल भ्रमण करते हुए आगे बढ़े। सड़क किनारे खड़े छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े प्रतिष्ठानों तक, सभी ने मुख्यमंत्री से संवाद करने की उत्सुकता दिखाई। मुख्यमंत्री ने भी आत्मीयता के साथ सभी की बातें सुनीं और जीएसटी 2.0 के लाभों पर उनकी प्रतिक्रियाएँ जानीं।

मुख्यमंत्री साय ने टिनी टीज़र और किड्स ऑन व्हील साइकिल स्टोर जैसे प्रतिष्ठानों पर जाकर बच्चों से जुड़ी वस्तुओं और घरेलू सामग्री पर घटे कर दरों की जानकारी ली। इलेक्ट्रॉनिक्स दुकानों में जाकर उन्होंने जाना कि उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में कितनी सस्ती दरों पर सामान मिल रहा है। दुकानदारों ने बताया कि नए प्रावधानों से व्यापार करना आसान हुआ है और ग्राहकों का भरोसा भी बढ़ा है।

मुख्यमंत्री साय ने अनुभव साझा करते हुए कहा कि नवरात्रि पर्व और जीएसटी दरों में ऐतिहासिक कटौती का यह संयोग व्यापार और उपभोक्ताओं दोनों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में कर प्रणाली और अधिक पारदर्शी एवं सरल बनी है। इससे न केवल व्यापारियों को सुविधा होगी बल्कि आम उपभोक्ताओं की जेब में भी प्रत्यक्ष बचत होगी।

मुख्यमंत्री ने विस्तार से कहा कि अब केवल दो स्लैब रह गए हैं। आवश्यक वस्तुएँ जैसे साबुन, टूथपेस्ट, साइकिल और रसोई सामग्री अब मात्र 5 प्रतिशत कर पर उपलब्ध होंगी, जिससे हर परिवार को सालाना 3,000 से 5,000 रुपये की बचत होगी। इसी प्रकार ब्रेड, दूध, पैक्ड नमकीन और चना जैसी खाद्य वस्तुएँ पूरी तरह करमुक्त हो गई हैं, जिससे सालाना ढाई से साढ़े तीन हजार रुपये तक की बचत होगी। स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर भी कर हटने से लोगों को 25,000 रुपये की पॉलिसी पर लगभग 4,500 रुपये और वरिष्ठ नागरिक बीमा पर 8 से 10 हजार रुपये सालाना की बचत होगी।

मुख्यमंत्री साय ने अंत में कहा कि जीएसटी 2.0 से व्यापार जगत को भी बड़ा लाभ होगा। यह सुधार उद्योग, व्यापार, निवेश और रोजगार सभी क्षेत्रों पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा।

मुख्यमंत्री ने उद्यमियों और व्यापारियों से आग्रह किया कि वे स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा दें और उपभोक्ताओं से भी आह्वान किया कि वे गर्व से कहें – “मैं स्वदेशी खरीदता हूँ और स्वदेशी बेचता हूँ।” उन्होंने इसे भारत के आर्थिक भविष्य को नई ऊँचाइयों तक ले जाने वाला मंत्र बताया।

इस मौके पर कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप, विधायक सुनील सोनी, पुरंदर मिश्रा, मोती लाल साहू, नान के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, अमित चिमनानी, रमेश ठाकुर, नंदन जैन सहित स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, विभिन्न व्यापारी संगठन एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया ‘मनरेगा दर्पण’ का शुभारंभ

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया ‘मनरेगा दर्पण’ का शुभारंभ
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज धमतरी जिले के करेली बड़ी गांव में आयोजित राज्य स्तरीय महतारी सदन लोकार्पण कार्यक्रम में मनरेगा दर्पण नागरिक सूचना पटल का विधिवत शुभारंभ‘ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मनरेगा दर्पण से आम जनता को मनरेगा कार्यों की पूरी जानकारी आसानी से उपलब्ध होगी। यह पहल पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि मनरेगा दर्पण छत्तीसगढ़ सरकार की अभिनव पहल है, जो न केवल पारदर्शिता की नई मिसाल है बल्कि हर ग्रामीण को योजनाओं से सीधे जोड़ने का माध्यम भी है। क्यूआर कोड और जीआईएस तकनीक आधारित यह कदम गांवों में डिजिटल सशक्तिकरण और सुशासन की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

तीन साल में हुए मनरेगा कार्यो की रिपोर्ट देख सकेंगे ग्रामीण
छत्तीसगढ़ में मनरेगा के अंतर्गत चल रहे कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने डिजिटल क्रांति की दिशा में कदम बढ़ाया है। अब प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में नागरिक सूचना पटल लगाए गए हैं। इन पर प्रदर्शित क्यूआर कोड को स्कैन करके कोई भी ग्रामीण पिछले तीन वर्षों में किए गए कार्यों का विवरण, व्यय की जानकारी और प्रगति रिपोर्ट देख सकता है।

इस प्रणाली से अब गांव का हर व्यक्ति यह जान सकेगा कि मनरेगा के तहत उसके इलाके में कौन-कौन से कार्य स्वीकृत हुए हैं, कितनी राशि खर्च हुई है और काम की वर्तमान स्थिति क्या है। फाईल और दस्तावेज हटकर अब हर सूचना मोबाइल पर उपलब्ध हो सकेगी। ग्रामीणों को जानकारी के लिए किसी कार्यालय या अधिकारी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
मनरेगा दर्पण पोर्टल और सूचना पटल के माध्यम से सभी रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेंगे। ग्राम पंचायत स्तर पर संधारित जानकारी को समय-समय पर अपडेट किया जाएगा। इससे योजनाओं पर अनावश्यक भ्रम की स्थिति समाप्त होगी और जनता खुद निगरानी कर पाएगी। इस पहल से ग्रामीणों का विश्वास और अधिक मजबूत होगा। पारदर्शी व्यवस्था से न केवल भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा बल्कि ग्रामीणों की सीधी भागीदारी भी सुनिश्चित होगी।

इस अवसर पर कार्यक्रम में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, सांसद रूप कुमारी चौधरी, विधायक अजय चन्द्राकर, सचिव निहारिका बारिक सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन और जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

AAP नेता सत्येंद्र जैन पर ED ने की बड़ी कार्रवाई

AAP नेता सत्येंद्र जैन पर ED ने की बड़ी कार्रवाई
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता सत्येंद्र जैन के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा एक्शन लिया है। ईडी ने आप नेता की 7.44 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की है। सत्येंद्र जैन के खिलाफ ईडी ने यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 के प्रवाधानों के तहत की है।

ED ने लगाया था ये आरोप
ED ने AAP नेता सत्येंद्र जैन पर 14 फरवरी 2015 से 31 मई 2017 के बीच दिल्ली सरकार में मंत्री के रूप में कार्य करते हुए आय से अधिक संपति अर्जित करने का आरोप लगाया है।। बता दें कि इससे पहले भी ईडी ने आप नेता की 4.81 करोड़ रुयपे की संपत्ति कुर्क की थी।

ED ने क्या कहा
ED ने बयान जारी करते हुए कहा कि नवंबर 2016 में नोटबंदी के बाद आम आदमी पार्टी नेता सत्येंद्र जैन के करीबी सहयोगियों अंकुश जैन और वैभव जैन ने आय प्रकटीकरण योजना (IDF) के तहत बैंक में 7.44 करोड़ रुपये नकद जमा किए थे।

जेल में रहे 18 महीने
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता सत्येंद्र जैन को ईडी ने मई 2022 में गिरफ्तार किया था। वे करीब 18 महीने जेल में रहे और अक्टूबर 2024 में कोर्ट ने उन्हें जमानत दी थी। दिल्ली कोर्ट ने कहा कि ट्रायल में देरी और लंबी कैद के कारण वे जमानत के हकदार है।

AAP नेता को मिली थी राहत
पिछले महीने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने के बाद AAP नेता जैन को भ्रष्टाचार के एक मामले में अदालत से राहत मिली। यह मामला लोक निर्माण विभाग मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान एक निजी कंपनी को टेंडर देने से संबंधित था।

नवरात्रि : उपासना, का महत्व और आध्यात्मिक संदेश

नवरात्रि : उपासना, का महत्व और आध्यात्मिक संदेश
भारत की सांस्कृतिक परंपराएँ केवल उत्सवों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनमें गहन आध्यात्मिक और सामाजिक दर्शन भी निहित है। नवरात्रि इसी श्रंखला का एक प्रमुख पर्व है, जो शक्ति, साधना और आत्मानुशासन का प्रतीक है। “नवरात्रि” का अर्थ है – नौ रातें। इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है और दसवें दिन विजयादशमी के रूप में बुराई पर अच्छाई की विजय का उत्सव मनाया जाता है।

नवरात्रि की उपासना पद्धति
नवरात्रि में भक्तजन व्रत, ध्यान, जप और पूजा का अनुष्ठान करते हैं। देवी के नौ रूपों – शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक – की क्रमवार पूजा की जाती है। प्रत्येक स्वरूप मनुष्य के जीवन में एक विशेष गुण का प्रतीक है।

काली रूप हमें अहंकार और अज्ञान का विनाश करने की प्रेरणा देता है।

लक्ष्मी रूप भौतिक और आध्यात्मिक समृद्धि का प्रतीक है।

सरस्वती रूप ज्ञान और विवेक की साधना का मार्ग प्रशस्त करता है।

नवरात्रि में उपवास का भी विशेष महत्व है। ऋतु परिवर्तन के इस समय सात्त्विक आहार और संयमित जीवनशैली शरीर को रोगमुक्त और मन को एकाग्र बनाती है।

नवरात्रि का महत्व और तर्क
1. आध्यात्मिक उत्थान – साधक आत्मचिंतन और साधना के द्वारा अपने भीतर की नकारात्मक प्रवृत्तियों पर विजय प्राप्त करता है।
2. शारीरिक और मानसिक शुद्धि – उपवास और ध्यान शरीर से विषैले तत्वों को दूर करते हैं और मन को शांति प्रदान करते हैं।
3. सामाजिक एकता – गरबा, डांडिया और सामूहिक पूजन जैसी परंपराएँ सामाजिक मेल-जोल को प्रगाढ़ बनाती हैं।
4. विजय का संदेश – यह पर्व याद दिलाता है कि असत्य और अधर्म चाहे कितना भी बलवान क्यों न हो, अंततः सत्य और धर्म की विजय होती है।

परंपरा का उद्गम
नवरात्रि की परंपरा वैदिक और पुराणकाल से चली आ रही है। दुर्गा सप्तशती और मार्कण्डेय पुराण में देवी महात्म्य का विस्तृत वर्णन मिलता है। महिषासुर के वध की कथा इस पर्व का मूल आधार है, जिसमें देवी ने नौ रातें युद्ध कर अंततः विजय प्राप्त की। इतिहासकार मानते हैं कि यह पर्व गुप्तकाल से पूर्व भी प्रकृति की उपासना और ऋतु परिवर्तन के यज्ञों से जुड़ा रहा है।

नवरात्रि केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन की एक साधना है। यह पर्व हमें सिखाता है कि संयम, भक्ति और आत्मशक्ति के बल पर जीवन के अंधकार को दूर कर हम ज्ञान, विवेक और समृद्धि के प्रकाश की ओर बढ़ सकते हैं। यही नवरात्रि का वास्तविक आध्यात्मिक संदेश है।

मध्यप्रदेश ने नवकरणीय ऊर्जा में राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया है नया मानक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मध्यप्रदेश ने नवकरणीय ऊर्जा में राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया है नया मानक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मुझे गर्व है कि मुरैना सोलर प्लस स्टोरेज परियोजना के शुभारंभ के साथ ही नवकरणीय ऊर्जा में मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर नया मानक स्थापित किया है। यह भारत की पहली परियोजना है, जो रिकार्ड न्यूनतम 2 रूपए 70 पैसे प्रति यूनिट टैरिफ पर स्थिर और डिस्पैचेबल नवकरणीय ऊर्जा प्रदान कर रही है। मध्यप्रदेश में ऊर्जा के विभिन्न स्त्रोतों की स्थापित क्षमता तेजी से बढ़ रही है। वर्ष 2025 तक सौर क्षमता लगभग 5 हजार मेगावाट पर पहुंच चुकी है, जिसे वर्ष 2035 बढ़ाकर 33 हजार मेगावाट करने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य सरकार द्वारा इंडस्ट्रियल प्रमोशन पालिसी, रिन्यूएबल एनर्जी पालिसी 2025 और पम्प हाइड्रो पालिसी 2025 के अंतर्गत औद्योगिक निवेश के लिए कई आकर्षक प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को नई दिल्ली के होटल ताज में आयोजित सीआईआई अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा सम्मेलन को मुख्यमंत्री निवास से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में केन्द्रीय नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रहलाद जोशी, मालदीव के पर्यावरण एवं पर्यटन राज्यमंत्री श्री मुवियाथ मोहम्मद, सीआईआई और ई.वाय इंडिया के पदाधिकारी एवं उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अगला अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा सम्मेलन मध्यप्रदेश में आयोजित करने के लिए सभी को आमंत्रित किया।

प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में हम नेट जीरो के लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश अब केवल भारत का दिल नहीं, बल्कि निर्माण गतिविधियों का केन्द्र भी बन रहा है। यह समय हमारे लिए निर्णायक है, वैश्विक परिस्थितियाँ बदल रही हैं और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत आत्मविश्वास से आगे बढ़ रहा है। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करते हुए एक ऐसे भारत की नींव रखी जा रही है जो सुरक्षित, सक्षम और विश्व को मार्गदर्शन प्रदान करने की सामर्थ्य रखता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हम सभी नेट जीरो के लक्ष्य की ओर दृढ़ संकल्पित होकर कदम बढ़ा रहे हैं। आने वाले वर्षों में भारत और मध्यप्रदेश विश्व के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य का मार्गदर्शक बनेगा।

भारतीय अर्थव्यवस्था अब दुनिया की आशा और भरोसे का केंद्र
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि आज भारत को वैश्विक स्तर पर नज़र अंदाज़ नहीं किया जा सकता। हमारी मातृभूमि भारत अब केवल एक उभरती अर्थव्यवस्था नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया की आशा और भरोसे का केंद्र बन चुकी है। भारत आज ऊर्जा और नवकरणीय ऊर्जा, टेक्सटाइल, आईटी, कृषि, फार्मा, रक्षा और अंतरिक्ष हर क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने ऊर्जा क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है एवं भारत को स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी में वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित किया है। भारत ने 2070 तक नेट-ज़ीरो और 2030 तक 500 गीगावाट नॉन-फॉसिल फ्यूल क्षमता का लक्ष्य रखा है। देश 251.5 गीगावाट नॉन-फॉसिल ऊर्जा क्षमता को पार कर चुका है और सौर मॉड्यूल निर्माण क्षमता में 100 गीगावाट की ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है।

मध्यप्रदेश ऊर्जा क्षेत्र में देश के प्रमुख राज्यों में से एक
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन मिशन’, ‘पीएम-कुसुम योजना, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और स्मार्ट ग्रिड जैसी पहलों के माध्यम से भारत ने ऊर्जा क्षेत्र को आत्मनिर्भर, स्वच्छ और सतत् दिशा प्रदान की है। परिवारों को मुफ्त बिजली का लाभ मिला है। मध्यप्रदेश ऊर्जा क्षेत्र में अपनी अनूठी उपस्थिति के साथ देश के प्रमुख राज्यों में से एक बन चुका है। यहाँ देश का सबसे बड़ा ‘सौर पार्क’ रीवा में स्थापित है, जो दिल्ली मेट्रो जैसे महत्वपूर्ण उपक्रमों को ऊर्जा प्रदान करता हैं। साथ ही सांची शहर को देश का पहला सोलर सिटी बनाया गया है और ओमकारेश्वर में भारत का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट कार्यरत है। नीमच में भारत का सबसे बड़ा पंप हाइड्रो पॉवर स्टोरेज प्रोजेक्ट विकसित किया गया है, जो ऊर्जा संग्रहण क्षमता के क्षेत्र में प्रदेश को अग्रणी बनाता है।

शराब कारोबार का काला सच—71 करोड़ का गबन और 1309 करोड़ बकाया

शराब कारोबार का काला सच—71 करोड़ का गबन और 1309 करोड़ बकाया
रवि अवस्थी, भोपाल।
इंदौर के फर्जी बैंक गारंटी शराब ठेका कांड में करीब 71 करोड़ रुपए के गबन का मामला सामने आया है। इसका खुलासा प्रकरण में केंद्रीय प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की एंट्री के बाद हुआ। वाणिज्यकर विभाग अब समूची राशि का आकलन कर इसकी वसूली की तैयारी में है।

फर्जी बैंक गारंटी से शराब दुकान का ठेका हथियाने का यह मामला साल 2022–23 का है। इसमें ठेका पाने के एवज में दी गई बैंक गारंटी और डीडी में हेरफेर उजागर होने पर इंदौर के रावजी बाजार थाने में आपराधिक मामला दर्ज हुआ। प्रारंभिक तौर पर प्रकरण में वेलवर्थ बेंगलुरू के मोहन कुमार राय और अनिल सिन्हा के अलावा विभागीय डिप्टी कमिश्नर संजय तिवारी तथा असिस्टेंट कमिश्नर राजनारायण सोनी की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी। बाद में संजय तिवारी को भोपाल ट्रांसफर कर दिया गया था। इसी साल उनकी पुनः इंदौर में पदस्थापना कर दी गई। विधानसभा में इस पर सवाल उठा तो सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि घोटाले के समय तिवारी इंदौर में फ्लाइंग स्क्वॉड में पदस्थ थे।

ईडी की एंट्री से मचा हड़कंप
गबन सामने आने पर शुरुआती दौर में तत्कालीन प्रमुख सचिव ने जांच के आदेश दिए। बाद में जांच के नाम पर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। लेकिन बीते साल इस प्रकरण में केंद्रीय प्रवर्तन निदेशालय ने रुचि दिखाई। उसने आबकारी आयुक्त ग्वालियर और उपायुक्त इंदौर से पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की। ईडी की ओर से पहला पत्र बीते साल 6 मई को भेजा गया, लेकिन आबकारी अफसरों ने इसे अधिक तवज्जो नहीं दी। इसके बाद ईडी ने पुनः 21 मई को सख्त लहजे में पत्र लिखा, जिसके बाद विभागीय अफसर बैकफुट पर आए।

जांच में 71 करोड़ का गबन सामने आया
सूत्रों के मुताबिक, साल 2023 में गठित समिति ने गबन की रकम करीब 41 करोड़ 65 लाख 21 हजार 890 रुपए बताई थी। इस रिपोर्ट को भी विभागीय स्तर पर दबा दिया गया। लेकिन ईडी की सख्ती के बाद गबन राशि का नए सिरे से आकलन हुआ। तब यह रकम बढ़कर 71 करोड़ 58 लाख 52 हजार 47 रुपए पाई गई। विभाग अब इस रकम की वसूली की तैयारी में है, लेकिन इससे पहले एक बार और विभागीय वित्तीय अधिकारियों से इसके परीक्षण का बहाना तलाशा जा रहा है।

1309 करोड़ की रकम बकाया, वसूली में रुचि नहीं
प्रदेशभर में शराब और अन्य मादक पदार्थों से जुड़े कारोबार में राज्य सरकार की करीब 1309 करोड़ रुपए की लेनदारी बकाया है। यह रकम संबंधित ठेकेदारों से वसूली जानी है, लेकिन विभागीय अफसरों की इसमें कोई खास रुचि नहीं है। बल्कि कई मामलों में अफसर स्वयं ही ठेकेदारों को वॉकओवर देने वाले अंदाज में काम कर रहे हैं।

ठेकेदारों से वसूली की जानी है, लेकिन विभागीय अफसरों की लापरवाही के कारण अरबों रुपए की यह रकम डूबत खाते में है। उदाहरण के तौर पर, साल 1998–99 में शिवनारायण जायसवाल ने रीवा में शराब दुकानों का ठेका लिया। जायसवाल ने ठेके की करीब 21 लाख की रकम आज तक अदा नहीं की। विभाग जायसवाल से इसलिए वसूली नहीं कर पा रहा है, क्योंकि उसे ठेकेदार का पता-ठिकाना ज्ञात नहीं है। जबकि यही ठेकेदार बाद के वर्षों में भी रीवा व अन्य जगहों पर शराब दुकानों के ठेके लेता रहा।

साल 2020–21 में टीकमगढ़ में शराब दुकानों का ठेका हासिल करने वाले अल्सस इंडस्ट्रीज प्रा.लि. के दुष्यंत सिंह बुंदेला से 13 करोड़ के ठेके के बदले विभाग को सिर्फ पौने तीन करोड़ रुपए मिले। बकाया 10 करोड़ रुपए के मामले में कंपनी ने हाईकोर्ट दिल्ली से स्थगन आदेश ले लिया। इस स्टे को निरस्त कराने के लिए वाणिज्यकर विभाग ने कोई प्रयास नहीं किया। नतीजतन दुष्यंत महज 3 करोड़ चुकाकर मजे में हैं और विभाग उनसे बकाया वसूली के लिए भाग्य भरोसे है।

रकम डूबत खाते में डालने की सिफारिश
प्रदेशभर में आबकारी से जुड़ी वसूली के सैकड़ों प्रकरण हैं। इनमें अधिकांश को पुराना बताकर रकम को अपलेखन (राइट-ऑफ) यानी डूबत खाते में डालने की सिफारिश संबंधित अधिकारियों ने कर दी है। कई मामलों में यह तर्क दिया गया कि बकायादार के नाम कोई चल-अचल संपत्ति नहीं है, इसलिए वसूली संभव नहीं। रीवा में ही 61 लाख रुपए की वसूली प्रकरण में कहा गया कि अमर सिंह नामक ठेकेदार डभौरा बैंक घोटाले में जेल में है, इसलिए उससे वसूली की संभावना क्षीण है।

इंदौर में 6 अरब, भोपाल में 99 करोड़ रुपए बकाया
आबकारी विभाग में संभागवार बकाया रकम की बात करें तो इंदौर इस मामले में भी नंबर वन है। इंदौर संभाग में आबकारी ठेकेदारों पर करीब 689 करोड़ रुपए बकाया हैं। दूसरा स्थान उज्जैन संभाग का है, जहां 166 करोड़, रीवा संभाग में 159 करोड़ और भोपाल–नर्मदापुरम संभाग भी एक अरब के आंकड़े को छू रहे हैं। दोनों संभागों में 99 करोड़ रुपए से अधिक आबकारी ठेकेदारों से वसूले जाने हैं।

जिला स्तर पर बकायादारी में बुरहानपुर अव्वल
जिला स्तर पर शराब ठेकेदारों पर बकाया रकम की बात करें तो बुरहानपुर जिला इंदौर से आगे है। यहां करीब 425 करोड़ रुपए की बकायादारी है, जबकि इंदौर जिले की बकाया राशि करीब सौ करोड़ है। राजगढ़, सीहोर और हरदा मात्र तीन जिले ऐसे हैं, जहां ठेकेदारों पर कोई रकम बकाया नहीं है।

जानें, शराब ठेकेदारों पर कहां कितनी रकम बकाया
संभाग बकाया राशि (करोड़ रुपए में)
इंदौर 689.64
उज्जैन 166.56
रीवा 159.72
जबलपुर 85.56
सागर 65.10
भोपाल 57.06
ग्वालियर–चंबल 43.42
नर्मदापुरम 42.14

वसूली को लेकर अफसरों का बेपरवाह अंदाज
गबन हो या अरबों रुपए की बकायादारी, इसकी वसूली को लेकर जिम्मेदार अफसरों का रवैया बेहद लापरवाह है। विभाग के प्रमुख सचिव अमित राठौर का कहना है—“15–20 हजार करोड़ के ठेकों में इतनी रिकवरी की पेंडेंसी सामान्य बात है। फिर यह कोई एक साल की तो नहीं। कई मामले 10 से 15 साल पुराने भी हैं। वसूली की कार्रवाई चलती रहती है।”

वहीं भोपाल संभाग के उपायुक्त यशवंत कुमार धनोरा का कहना है—“कई मामले कोरोनाकाल के हैं, जिनमें विवाद की स्थिति है। कुछ लोग कोर्ट भी गए हैं। बावजूद इसके वसूली के प्रयास जारी हैं।”

हिंदी को लेकर केंद्र ने तमिलनाडु सकरार को दिया स्पष्ट संदेश

हिंदी को लेकर केंद्र ने तमिलनाडु सकरार को दिया स्पष्ट संदेश
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने रविवार को तमिलनाडु सरकार द्वारा तीन भाषा नीति का विरोध करने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केंद्र सरकार किसी पर भी कोई भाषा थोप नहीं रही है। उन्होंने कहा कि केवल संकीर्ण राजनीतिक सोच रखने वाले लोग ही तीन भाषा नीति को विवादास्पद बना रहे हैं।

वे यहां आइआइटी मद्रास परिसर में एक कार्यक्रम में शिरकत करने के बाद पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। उन्होंने कहा, “तमिलनाडु के स्कूलों में तमिल, अंग्रेजी, तेलुगू, उर्दू, मलयालम, कन्नड़ जैसी कई भाषाएं पढ़ाई जा रही हैं।

जब तमिल और अंग्रेजी के अलावा भी इतनी भाषाएं पढ़ाई जाती हैं, तो तीसरी भाषा से क्या समस्या है? यह तमिलनाडु का राजनीतिक निर्णय है।”

केवल राजनीतिक विरोध
उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार कोई भाषा किसी पर थोपने का प्रयास नहीं कर रही है। कक्षा 1 से 5 तक दो भाषाएं पढ़ाई जाती हैं। कक्षा 6 से 10 तक तीन भाषाएं पढ़ाई जाती हैं, इनमें से एक मातृभाषा जरूर होती है, बाकी दो छात्र अपनी पसंद से चुन सकते हैं।

भारत सरकार किसी भी भाषा को थोपने का प्रयास नहीं कर रही है। इसका विरोध राजनीतिक विचारधारा से प्रेरित है, जबकि हम समाज में नई मानसिकता लाने का प्रयास कर रहे हैं।

कई राज्यों में तीन भाषाएं
धर्मेन्द्र प्रधान ने उदाहरण देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सहित कई राज्य तीन भाषा नीति का पालन कर रहे हैं, जहां छात्र हिन्दी, अंग्रेजी, मराठी या तमिल जैसी कोई भी भाषा चुन सकते हैं।

उन्होंने तीन भाषाएं क्यों का जवाब दिया कि भारत में केवल लगभग 10 प्रतिशत लोग ही अंग्रेजी बोलते हैं, बाकी अपनी मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में संवाद करते हैं।

प्रधान ने कहा कि तमिलनाडु के लोग अपनी भाषा से गहरा प्रेम करते हैं, मैं स्वयं ओड़िया हूं और अपनी भाषा से प्रेम करता हूं, लेकिन अन्य भाषाओं का भी सम्मान करता हूं। जिन्होंने भाषा के आधार पर समाज में विभाजन की कोशिश की, वे असफल रहे हैं। समाज इससे आगे बढ़ चुका है।

शिक्षा कोष को लेकर भेद नहीं
शिक्षा कोष को लेकर तमिलनाडु के आरोपों पर धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि केंद्र सरकार तमिलनाडु के साथ कोई भेदभाव नहीं कर रही है।

उन्होंने कहा, “यह राजनीतिक मुद्दा है। मैंने कई बार तमिलनाडु में और संसद में इस पर बात की है। देश ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को अपनाया है और उसका पालन करना जरूरी है।”

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि कई योजनाओं के लिए केंद्र ने आवश्यक धनराशि दी है। “पीएम पोषण (मिड-डे मील) योजना के लिए हर साल फंड दिया गया है, इस साल भी आवंटन किया गया। वयस्क शिक्षा कार्यक्रमों के लिए भी तमिलनाडु को फंड मिला है।”

राइट टू एजुकेशन (आरटीई) फंडिंग पर प्रधान ने कहा कि अदालतों ने इस संबंध में कुछ निर्देश दिए हैं और मुख्य जिम्मेदारी राज्य सरकार की बताई है। “मैंने तमिलनाडु के शिक्षा मंत्री से मुलाकात की है, उनसे पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है।”

Trump के फैसले से IT सेक्टर में मचा भूचाल

Trump के फैसले से IT सेक्टर में मचा भूचाल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) के H-1B वीजा शुल्क को बढ़ाकर एक लाख डॉलर प्रति वर्ष करने की घोषणा ने भारतीय आइटी सेक्टर और विशेष रूप से ‘देसी सिलिकॉन वैली’ कहे जाने वाले बेंगलूरु के तकनीकी विशेषज्ञों व कंपनियों को गहरी चिंता में डाल दिया है। इस कदम का सबसे बड़ा असर उन हजारों भारतीय पेशेवरों पर पड़ा है, जो अमेरिका में नौकरी कर रहे हैं। जिनके करियर व परिवार का भविष्य इसी वीजा पर टिका हुआ है।

कैलिफोर्निया में रह रहे कर्नाटक मूल के एक तकनीकी विशेषज्ञ दंपती ने कहा कि वे असमंजस में हैं कि उनकी कंपनियां साल-दर-साल इतना बड़ा खर्च वहन करेंगी या नहीं। इनमें से एक अमरीकी कंपनी और दूसरा भारतीय कंपनी में कार्यरत है। महिला विशेषज्ञ ने कहा, क्या हमारी कंपनियां हमें अमरीका में बनाए रखने के लिए साल-दर-साल इतना खर्च करेंगी? क्या हम यह पैसा खुद चुका सकते हैं? बिल्कुल नहीं। हम पहले से ही अनिश्चितता और डर में जी रहे हैं।

भारतीय कर्मचारियों पर गहरा असर
अमरीका में कार्यरत करीब तीन लाख भारतीय तकनीकी कर्मचारियों पर इस फैसले का सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इनमें से लगभग 1.25 लाख कर्मचारी कर्नाटक से हैं। एक्सेंचर इंडिया के पूर्व अध्यक्ष और जीसीसी कंसल्टिंग फर्म के सीईओ अविनाश वशिष्ठ ने कहा कि यह शुल्क वृद्धि अमरीका और भारत दोनों जगह कंपनियों के प्रतिभा प्रबंधन में बड़ा बदलाव लाएगी। वशिष्ठ ने बताया कि सबसे अधिक कमाई करने वाले एच-1बी वीजा धारकों में से 78% भारतीय हैं। लेकिन करीब 60% कर्मचारियों की कमाई सालाना एक लाख डॉलर से कम है। ऐसे में नया शुल्क उनके वेतन के बराबर या उससे अधिक हो जाएगा, जिससे अमरीका में उनका रोजगार टिकना मुश्किल हो जाएगा।

रीशोरिंग और एआइ पर असर
कई भारतीय वीजा धारकों ने बताया कि उनके भारतीय नियोक्ताओं ने उन्हें घटनाक्रम स्पष्ट होने तक काम पर न जाने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे रीशोरिंग (काम वापस भारत लाने) की रफ्तार तेज होगी। लीडरशिप कैपिटल के सीईओ बी.एस. मूर्ति ने इसे वैश्विक पुनर्निर्धारण बताया। एक आइटी विशेषज्ञ ने कहा कि यह कदम कंपनियों को एआइ और ऑटोमेशन की ओर और तेजी से धकेलेगा। यह भारत के लिए यह रिवर्स ब्रेन ड्रेन का समय है।

जीसीसी और ऑफशोरिंग को बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि अमरीकी कंपनियां अब भारत में अपने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) और अनुसंधान केंद्रों का विस्तार करेंगी। एक्सफेनो के सह-संस्थापक कमल कारंत ने कहा कि आइटी कंपनियां इस परिदृश्य के लिए पहले से तैयारी कर रही थीं। वीजा शुल्क में वृद्धि ऑनसाइट नियुक्तियों को धीमा कर सकती है, लेकिन ऑफशोरिंग की गति और तेज होगी। भारत लागत-प्रभावी विकल्प बना रहेगा।

नैसकॉम की प्रतिक्रिया
उद्योग की शीर्ष संस्था नैसकॉम ने कहा कि आदेश का असर अमरीका के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र और व्यापक रोजगार अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। संस्था ने माना कि ऑनशोर प्रोजेक्ट्स की निरंतरता प्रभावित होगी, लेकिन कंपनियां ग्राहकों के साथ मिलकर समाधान तलाशेंगी। नैसकॉम ने यह भी रेखांकित किया कि हाल के वर्षों में भारतीय आईटी कंपनियों ने स्थानीय नियुक्तियों पर जोर देकर वीजा पर अपनी निर्भरता घटाई है।

अमरीकी कंपनियों के लिए भी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह निर्णय न केवल भारतीय आइटी पेशेवरों बल्कि अमरीका में आइटी सेक्टर की कंपनियों के लिए भी चुनौती लेकर आया है। लेकिन, तत्काल असर उन हजारों भारतीय परिवारों पर पड़ेगा जो एच-1बी वीजा के भरोसे अमरीका में जीवन और करियर बना रहे हैं या जिन्हें उनकी कंपनियां अमरीका भेजने की तैयारी कर रही थी।

महागठबंधन में सीट बंटवारे पर घमासान

महागठबंधन में सीट बंटवारे पर घमासान
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर घमासान तेज़ हो गया है। जहां राजद कांग्रेस, वाम दल और वीआईपी ने अधिक से अधिक सीटों पर दावा ठोक दिया है।

दरअसल, बिहार में महागठबंधन की ताक़त का इम्तिहान सीट बंटवारे में ही नज़र आ रहा है। सीत बंटवारे का रास्ता इतना आसान नहीं है, जितना सियासी यात्राओं के दौरान एकता दिखाई दे रही थी।

चुनाव के नजदीक आते आते हर दल अपने दावे ठोक रहा है। ऐसे में राजद के लिए सभी दलों को साथ रखना आसान नहीं होगा। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि समझौते की डोर कितनी मज़बूत रह पाती

कांग्रेस ने मांगी 70 सीटें
संगठनात्मक कमजोरी और चुनावी तैयारियों की सुस्ती के बावजूद कांग्रेस ने 70 सीटों पर दावा ठोक दिया है। पार्टी का तर्क है कि उसकी “राष्ट्रीय पहचान” और “पारंपरिक वोट बैंक” के कारण उसे बड़ी हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।

सीपीआई (माले) की आक्रामक रणनीति
महागठबंधन का महत्वपूर्ण घटक सीपीआई (माले) भी इस बार आक्रामक रुख में है। पार्टी ने 40 सीटों पर दावेदारी जताई है। महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि विपक्षी गठबंधन के सबसे बड़े सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को छोटे सहयोगियों के प्रति अधिक उदार होना चाहिए।
वहीं, कांग्रेस ने पिछली बार 70 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन 19 पर जीती थी। ऐसे में कांग्रेस को अब कम सीटों पर चुनाव लड़ना चाहिए।

वीआईपी का बड़ा दावा
विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) ने भी 50 से अधिक सीटों की मांग रख दी है। पार्टी का कहना है कि उसका समर्थन पिछड़े वर्गों में निर्णायक साबित हो सकता है।

राजद की दुविधा
महागठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी राजद अब दुविधा में है। राजद खुद 125 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। ऐसा मानना है कि राजद अपने परंपरागत वोट बैंक और प्रभाव वाले क्षेत्रों में अधिकतम सीटें जीतना चाहता है।

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