DAVV के छात्रों ने इंडियन आर्मी के लिए बनाए दो नए अचूक ड्रोन

DAVV के छात्रों ने इंडियन आर्मी के लिए बनाए दो नए अचूक ड्रोन
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने 413 ड्रोन और कई मिसाइलों से भारत की सीमा पर हमला किया था, लेकिन भारतीय सेना ने सभी को हवा में नष्ट कर देश की ताकत और तकनीक का लोहा मनवाया। इन्हीं घटनाओं से प्रेरणा लेकर देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के इंस्टिट्यूट आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलाजी (आइईटी) के विद्यार्थियों ने भारतीय सेना के लिए दो उन्नत ड्रोन तैयार किए हैं।

आइईटी प्रबंधन के मुताबिक भारतीय सेना के सहयोग से विद्यार्थियों ने एक छोटे डिवाइस से दो उन्नत ड्रोन विकसित किए हैं। इन्हें बनाने में महज 20-25 दिन का समय लगा है। विद्यार्थियों का कहना है कि प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना की ड्रोन क्षमताओं को और मजबूत करना है।

भारतीय सेना से मिला था प्रोजेक्ट
भारतीय सेना की तरफ से विशेष प्रकार का ड्रोन बनाने का प्रोजेक्ट मिला था। बकायदा इसके लिए सेना की तरफ से पूरा खर्च उठाया गया है। आइईटी मैकेनिकल ब्रांच के अंशुमन शुक्ला-अखिलेश सिंह राठौर और इलेक्ट्रानिक एंड टेली कम्युनिकेशन के अभिजीत पटेल ने प्रोजेक्ट पर काम किया है। मेरठ आर्मी कैंट में प्रोजेक्ट अधिकारी कमांडिंग लेफ्टिनेंट कर्नल नितिन वर्मा (808 वर्कशाप, 609 ईएमई बटालियन) ने ड्रोन की डिजाइन को लेकर मार्गदर्शन किया है, जिसमें कमिकाज और सर्विलांस ड्रोन शामिल हैं।

एक नष्ट और दूसरा करता है निगरानी
छात्रों ने बताया कि सेना ने विशेष प्रोजेक्ट दिया था और पूरा खर्च भी उठाया। इसके तहत उन्होंने दो अलग-अलग ड्रोन बनाए। पहला कमिकाज ड्रोन है, दुश्मन के इलाके में जाकर तय लक्ष्य पर हमला करता है और ब्लास्ट के साथ खुद भी नष्ट हो जाता है। इसकी रेंज 5 किमी है और यह 2 किलो तक का पेलोड ले सकता है। जबकि दूसरा सर्विलांस ड्रोन बनाया है, जो नष्ट स्थान की निगरानी कर डेटा और सूचना जुटाता है। इसमें नाइट विज़न कैमरा लगा है, जिससे यह रात में भी मिशन पूरा कर सकता है। इसकी रेंज 10 किमी तक है।

टैक्स्ट मैसेज से ड्रोन होंगे एक्टिव
दोनों ड्रोन की स्पीड लगभग 180 किमी प्रति घंटा है और इन्हें तैयार करने में छात्रों को सिर्फ 20-25 दिन लगे।
दोनों ड्रोन में एक सिम कार्ड इंस्टाल है, जिसके जरिए दूर से सक्रिय करने की व्यवस्था बताई गई।
सर्विलांस ड्रोन में नाइट-विज़न कैमरा लगा हुआ है और इसे दूरी पर निगरानी के लिए डिज़ाइन किया गया है।
कमिकाज ड्रोन को लक्षित मिशन के लिए तैयार किया गया है और यह निर्धारित आवश्यकताओं के अनुसार पेलोड कैरी कर सकता है।

सुरक्षा और नियमों का पालन
प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों ने साफ किया कि यह सिस्टम सिर्फ सेना की अनुमति और नियंत्रित परिस्थितियों में ही इस्तेमाल होगा। सभी परीक्षण सैन्य मानकों और सुरक्षा प्रोटोकाल के अनुसार किए गए हैं।

निरंतर करेंगे टेक्नोलॉजी अपग्रेड
अब इन ड्रोन का आगे मूल्यांकन और परख होगी। परिणामों के आधार पर इन्हें और उन्नत बनाया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी प्रगति के साथ-साथ नैतिक और सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य रहेगा।

भारत ने पाक को 7 विकेट से चटाई धूल

भारत ने पाक को 7 विकेट से चटाई धूल
भारत और पाकिस्तान (Ind vs Pak Cricket Match) दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में एशिया कप (Asia Cup 2025) के तहत भिड़ रहे है।

पाकिस्तान की खराब बल्लेबाजी ने मैच बिगाड़ा
पाकिस्तान की टीम इस हाईवोल्टेज मुकाबले में शुरुआत से ही दबाव में नजर आई। टॉप ऑर्डर के बल्लेबाज भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक ही नहीं पाए और लगातार विकेट गिरते रहे। शुरुआती झटकों से उबरने के बाद भी मिडिल ऑर्डर कोई खास कमाल नहीं कर सका। खराब शॉट सिलेक्शन और रन बनाने की जल्दी ने पाकिस्तान की हार की नींव रख दी।

भारतीय तेज गेंदबाजों ने शुरू से ही कसा शिकंजा
भारतीय पेस अटैक ने पहले ही ओवर से पाकिस्तान पर दबाव बना दिया। नई गेंद से भारतीय तेज गेंदबाजों ने शानदार लाइन-लेंथ पर गेंदबाजी की और लगातार विकेट निकालते रहे। पाकिस्तान के बल्लेबाज पेस अटैक को पढ़ ही नहीं पाए और टीम पावरप्ले में ही बैकफुट पर चली गई।

भारत ने पाक को चटाई धूल
भारत ने एशिया कप 2025 में पाकिस्तान को 7 विकेट से मात दी। 128 रन का पीछा करने उतरी भारतीय टीम ने यह लक्ष्य 15.5 ओवर में तीन विकेट खोकर हासिल कर लिया। भारत की तरफ से सूर्य कुमार यादव ने 37 गेंदों पर 47 रन की पारी खेली।

‘कोई हाथी रखना चाहता है तो उसमें गलत क्या’, वनतारा मामले में बोला सुप्रीम कोर्ट

‘कोई हाथी रखना चाहता है तो उसमें गलत क्या’, वनतारा मामले में बोला सुप्रीम कोर्ट
गुजरात के जामनगर के वनतारा वन्यजीव केंद्र मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर कोई हाथी को रखना चाहता है और पूरे नियमों का पालन कर ऐसा करता है तो उसमें क्या गलत है. सोमवार (15 सितंबर, 2025) को मामले की सुनवाई पूरी करते हुए कोर्ट ने यह बात कही है. हालांकि, कोर्ट ने अभी कोई आदेश पारित नहीं किया है.

आज की सुनवाई में विशेष जांच दल की रिपोर्ट भी पेश की गई. सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर वनतारा में अवैध वन्यजीव हस्तांतरण और हाथियों की अवैध कैद की गहन जांच की मांग की गई थी. 25 अगस्त की सुनवाई में कोर्ट ने इन आरोपों की जांच के लिए एसआईटी बनाने का निर्देश दिया था.

एसआईटी में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस जे. चेलामेश्वर, उत्तराखंड और तेलंगाना हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस राघवेंद्र चौहान, मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त हेमंत नागराले और वरिष्ठ आईआरएस अधिकारी अनिश गुप्ता शामिल हैं.

जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस प्रसन्ना वराले की बेंच ने इतने कम समय में रिपोर्ट देने के लिए एसआईटी की सराहना की. वनतारा के लिए पेश सीनियर एडवोकेट हरीश साल्वे ने कहा कि हम नहीं चाहते कि पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक हो. दुनिया में बहुत से लोग हमसे व्यावसायिक प्रतिद्वंदिता रखते हैं. वह दुरुपयोग कर सकते हैं. इस पर जस्टिस मिथल ने कहा कि कोर्ट ऐसा नहीं होने देगा. हम आपको रिपोर्ट देंगे ताकि आप जहां सुधार की जरूरत हो, कर सकें

एडवोकेट हरीश साल्वे ने कहा कि बिल्कुल, हम जरूरी कदम उठाएंगे. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि कमेटी की रिपोर्ट आ चुकी है. वह हमारी तरफ से तय किए गए सवालों पर है. अब किसी को बार-बार वही सवाल उठाने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

याचिकाकर्ता ने मंदिर के हाथियों का मसला उठाया तो बेंच ने उनसे पूछा, ‘आप कैसे जानते हैं कि वहां मंदिर के हाथी को अच्छे से नहीं रखा जा रहा?’ कोर्ट ने कहा कि हमारे देश में कई चीजें हैं, जिन पर हम गर्व कर सकते हैं. उन्हें व्यर्थ के विवादों में नहीं उलझाना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि अगर कोई हाथी को रखना चाहता है और पूरे नियमों का पालन कर ऐसा करता है तो क्या गलत है.

बिहार SIR पर सुप्रीम कोर्ट ने दी चुनाव आयोग को बड़ी चेतावनी

बिहार SIR पर सुप्रीम कोर्ट ने दी चुनाव आयोग को बड़ी चेतावनी
बिहार SIR पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को चेतावनी देते हुए कहा, ‘अगर उन्हें बिहार चुनाव के किसी भी चरण में निर्वाचन आयोग की ओर से अपनाई गई प्रक्रिया में कोई भी अवैधता मिलती है, तो पूरी चुनाव प्रक्रिया रद्द कर दी जाएगी।’ कोर्ट ने बिहार में एसआईआर की वैधता पर अंतिम दलीलें सुनने के लिए 7 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारा मानना है कि संवैधानिक संस्था भारत निर्वाचन आयोग बिहार में कानून और अनिवार्य नियमों का पालन कर रही है। कोर्ट ने आगे कहा कि वे बिहार में एसआईआर पर आंशिक रूप से राय नहीं दे सकते हैं, क्योंकि उनका अंतिम फैसला पूरे देश पर लागू होगा।

गड़बड़ी पर पूरी प्रक्रिया रद्द करने की चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि अगर बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) द्वारा अपनाई गई कार्यप्रणाली में कोई अवैधता पाई जाती है, तो पूरी प्रक्रिया को रद्द किया जा सकता है। पीठ ने स्पष्ट किया कि वो बिहार एसआईआर पर टुकड़ों में फैसला नहीं दे सकती क्योंकि उसका अंतिम फैसला केवल बिहार में ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में आयोजित एसआईआर पर लागू होगा।

7 अक्टूबर को SC में अंतिम बहस
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने ये भी कहा कि वह ये मानता है कि एक संवैधानिक प्राधिकारी के रूप में भारत का निर्वाचन आयोग एसआईआर प्रक्रिया को पूरा करने में कानून और अनिवार्य नियमों का पालन कर रहा है। सर्वोच्च न्यायालय ने बिहार में एसआईआर अभ्यास की वैधता पर अंतिम बहस सुनने के लिए 7 अक्टूबर की तारीख तय की।

पिछली सुनवाई में आधार कार्ड को दी थी मान्यता
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सोमवार (8 सितंबर) को आदेश दिया कि बिहार में चल रहे एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए आधार को बारहवें वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए। न्यायालय ने ये आदेश उन शिकायतों के बाद दिया, जिनमें कहा गया था कि चुनाव अधिकारी पूर्व निर्देशों के बावजूद इसे मान्यता देने से इनकार कर रहे हैं। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने आधार को औपचारिक रूप से अपनी अनुमोदित पहचान प्रमाण सूची में शामिल करने के खिलाफ भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) की आपत्तियों को खारिज कर दिया, इस बात पर जोर दिया कि हालांकि ये दस्तावेज नागरिकता स्थापित नहीं कर सकता, लेकिन ये पहचान और निवास का एक वैध संकेतक बना हुआ है।

डिप्टी सेक्रेटरी नवजोत की मौत के मामले में एक्शन शुरू

डिप्टी सेक्रेटरी नवजोत की मौत के मामले में एक्शन शुरू
दिल्ली कैंट थाना क्षेत्र में बीएमडब्ल्यू कार की टक्कर से हुई वित्त मंत्रालय के उपसचिव नवजोत सिंह की मौत के मामले में आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया गया है।

बताया गया कि गुरुग्राम निवासी आरोपी महिला गगनप्रीत को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। वहीं, जांच के दौरान बीएमडब्ल्यू कार चालक गगनदीप कौर (38 वर्ष) पत्नी परीक्षित मक्कड़, निवासी गुरुग्राम, हरियाणा को गिरफ्तार कर लिया गया है।

बता दें कि दिल्ली कैंट थाना क्षेत्र में रविवार दोपहर तेज रफ्तार बीएमडब्ल्यू कार ने मोटरसाइकिल सवार दंपती को टक्कर मार दी थी। मोटरसाइकिल पर वित्त मंत्रालय में तैनात उपसचिव नवजोत सिंह अपनी पत्नी के साथ जनकपुरी स्थित अपने घर लौट रहे थे। इस हादसे में नवजोत सिंह की मौत हो गई थी, जबकि उनकी पत्नी घायल हो गई।

डॉक्टर शकुंतला ने बताया कि 14 सितंबर दोपहर 2 बजे गगनप्रीत कौर और उसके पति परीक्षित यहां एक महिला और उसके पति को सड़क हादसे में घायल होने के बाद लेकर आए। जिसमें घायल व्यक्ति की मौत हो चुकी थी। जिसकी पहचान नवजोत सिंह के रूप में हुई थी। नवजीत की पत्नी संदीप कौर की हालत गंभीर देख उन्हें रेफर कर दिया गया। वहीं, गगनप्रीत और उसके पति को भी चोट लगी थी। जिनका इलाज किया गया। जानकारी के मुताबिक दोनों को आज पुलिस अपने साथ लेकर गई है।

नेपाल में प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के मंत्रिमंडल का विस्तार

नेपाल में प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के मंत्रिमंडल का विस्तार
नेपाल में प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने सोमवार को मंत्रिमंडल का विस्तार किया। मंत्री के रूप में रामेश्वर खनाल, ओमप्रकाश अर्याल और कुलमान घीसिंग को शपथ दिलाई गई। खनाल वित्त मंत्री, अर्याल गृह मंत्री और कुलमान घीसिंग ऊर्जा मंत्री बने। अर्याल के पास कानून मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी रहेगी। घीसिंग के पास भी ऊर्जा के अलावा भौतिक पूर्वाधार, यातायात व शहरी विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी है। खनाल आर्थिक सुधार सुझाव आयोग के अध्यक्ष रह चुके हैं। वह पूर्व सचिव भी रह चुके हैं। अर्याल पेशे से वकील हैं। घीसिंग नेपाल विद्युत प्राधिकरण के पूर्व कार्यकारी निदेशक हैं। ओली सरकार में उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था। उनका नाम पीएम पद को लेकर भी चर्चा में था।

5 मार्च तक नए चुनाव कराने की चुनौती
इससे पहले राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने शुक्रवार देर रात कार्की को अंतरिम सरकार का मुखिया नियुक्त किया और उन्होंने रविवार को औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण कर लिया। मंत्रिमंडल विस्तार पहले रविवार को होने वाला था। उनके व्यस्त कार्यक्रम के कारण इसे स्थगित कर दिया। पूर्व मुख्य न्यायाधीश कार्की के पास 5 मार्च तक नए चुनाव कराने और प्रधानमंत्री के लिए पद खाली करने का समय है, जिसका चुनाव संसद द्वारा किया जाएगा।

विनम्रता और जवाबदेही का एक कड़ा संदेश
पदभार ग्रहण करने के बाद अपने पहले संबोधन में उन्होंने विनम्रता और जवाबदेही का एक कड़ा संदेश दिया और कहा कि उनका प्रशासन सत्ता का स्वाद चखने के लिए नहीं, बल्कि देश को स्थिर करने, न्याय की मांगों को पूरा करने और छह महीने के भीतर नए चुनावों की तैयारी करने के लिए सत्ता में है। सिंह दरबार में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कार्की ने कहा, ‘मैं और मेरी टीम यहां सत्ता का स्वाद चखने नहीं आए हैं। हम छह महीने से ज्यादा नहीं रुकेंगे। हम नई संसद को जिम्मेदारी सौंप देंगे। आपके सहयोग के बिना हमें सफलता नहीं मिलेगी।’

तोड़फोड़ और हिंसा की घटनाओं की जांच करेगी
कार्की ने परिवारों को यह भी आश्वासन दिया कि सरकार मृतकों के शवों को उनके गृह जिलों तक पहुंचाने में मदद करेगी। उन्होंने विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई तबाही, जिसमें निजी संपत्ति को नुकसान भी शामिल है, को स्वीकार किया और कहा कि सरकार मदद के लिए आगे आएगी। उन्होंने आगे कहा कि सरकार तोड़फोड़ और हिंसा की घटनाओं की जांच करेगी।

79 कैदियों को सशस्त्र सीमा बल ने भारत-नेपाल सीमा पर पकड़ा
एक अधिकारी ने बताया कि नेपाल की विभिन्न जेलों से भागे कुल 79 कैदियों को सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने भारत-नेपाल सीमा पर विभिन्न चौकियों के माध्यम से भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश करते हुए गिरफ्तार किया है। इन कैदियों में से दो नाइजीरियाई, एक ब्राजीलियाई और एक बांग्लादेशी है। ये चारों विदेशी नागरिक 29 से 40 वर्ष की आयु वर्ग के हैं।

क्या कहते हैं स्थानीय लोग?

स्थानीय निवासी सूर्य बहादुर श्रेष्ठ ने बताया कि पिछले हफ्ते की तुलना में हालात सुधर रहे हैं, लेकिन पहले जैसी स्थिति नहीं लौटी है। कहना होगा कि हालात सुधर रहे हैं। हमें उम्मीद है। उन्होंने हमें भरोसा दिलाया है कि चुनाव समय पर होंगे। भरोसा ही हमारी उम्मीदों को मजबूत करता है। मुझे पूरा विश्वास है कि चुनाव समय पर होंगे।
स्थानीय निवासी सबिता सुरखेती ने बताया कि हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। लोगों की आवाजाही कम हो गई है। लोग अभी भी शोक मना रहे हैं। वे गहरे दुःख में हैं। बिक्री पर बुरा असर पड़ा है।

हरियाणवी फिल्म एक्टर उत्तर कुमार गिरफ्तार

हरियाणवी फिल्म एक्टर उत्तर कुमार गिरफ्तार
हरियाणवी फिल्मों के निर्देशक और निर्माता उत्तर कुमार को पुलिस ने दुष्कर्म मामले में गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी सोमवार को की गई। उत्तर कुमार के खिलाफ जून माह में एक युवती ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था।

लाते वक्त उत्तर कुमार की बिगड़ी तबीयत
मिली जानकारी के मुताबित, उत्तर कुमार को तबियत खराब होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फार्म हाउस से लेकर आते वक्त कार में तबियत खराब हो गई थी। इसके बाद अस्पताल में भर्ती करवाया गया। अभी तक की जांच में सामान्य स्थिति है। डीसीपी ट्रांस हिंडन ने इसकी जानकारी दी है।

पीड़िता ने लखनऊ जाकर आत्मदाह की कोशिश की थी
इस मामले में मुकदमा दर्ज न होने पर पीड़िता ने लखनऊ जाकर आत्मदाह का प्रयास भी किया था। इसके बाद पुलिस ने शालीमार गार्डन थाने में उत्तर कुमार के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया था। मुकदमा दर्ज होने के कुछ ही दिन बाद शालीमार गार्डन पुलिस ने मामले की चार्जशीट बनाकर डीसीपी ट्रांस हिंडन निमिष पाटील के पास संस्तुति के लिए भेजी थी।

जांच एसीपी इंदिरापुरम को सौंपी गई
लेकिन उस पर आपत्ति लगाते हुए जांच एसीपी इंदिरापुरम को स्थानांतरित कर दी गई। एसीपी इंदिरापुरम अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि शुरुआती जांच में मामले से जुड़े साक्ष्य पुलिस को मिले हैं। इसके बाद सोमवार को दुष्कर्म आरोपी उत्तर कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है।

एक्टर को अमरोहा के फार्म हाउस से पकड़ा
जानकारी के लिए बता दें कि एक्ट्रेस से दुष्कर्म के मामले में गिरफ्तारी हुई है। पुलिस ने अमरोहा के फार्म हाउस से पकड़ा है। पीड़िता ने 2020 में हरियाणवी एल्बम में उत्तर कुमार के साथ काम किया था। उसके बाद से लगातार शारीरिक शोषण करने का आरोप लगाया है। साथ ही जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने का भी आरोप है। महिला की शिकायत के बाद गाजियाबाद की शालीमार गार्डन थाने में मुकदमा हुआ था। वहीं बीते दिनों पीड़िता ने लखनऊ में आत्मदाह का प्रयास किया था। साथ ही उत्तर कुमार के खिलाफ प्रदर्शन भी किया था।

यूपीआई के नियमों में आज से हुए ये बड़े बदलाव

यूपीआई के नियमों में आज से हुए ये बड़े बदलाव
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) का इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए बड़ी खबर है। अगर आप भी Phonepe, Paytm या Gpay जैसे ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए है। नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने यूपीआई ट्रांजैक्शन के नियमों में कुछ बेहद जरूरी और अहम बदलाव किए हैं। दरअसल, NPCI ने बड़े लेनदेन की सीमा को बढ़ा दिया। यह नियम 15 सितम्बर 2025 यानी आज से लागू हो गए हैं। अब इंश्योरेंस, कैपिटल मार्केट, लोन ईएमआई और ट्रैवल जैसी कैटेगरी में एक दिन में 10 लाख रुपये तक का पेमेंट किया जा सकेगा।

यह नियम पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) पेमेंट पर लागू होंगे। यानी व्यापारी या संस्थानों को पेमेंट करने पर नई लिमिट लागू होगी, जबकि पर्सन-टू-पर्सन (P2P) यानी एक व्यक्ति से दूसरे को पैसे भेजने की सीमा पहले जैसी ही रहेगी-1 लाख रुपये प्रतिदिन रहेगी।

NPCI ने कहा है कि नई लिमिट सिर्फ Person-to-Merchant (P2M) पेमेंट्स पर लागू होगी। Person-to-Person (P2P) ट्रांसफर की लिमिट पहले जैसे ही एक लाख रुपये ही रहेगी, लेकिन बैंक अपनी रिस्क पॉलिसी के आधार पर कम लिमिट भी तय कर सकते हैं।

इंश्योरेंस प्रीमियम और कैपिटल मार्केट निवेश की सीमा 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है। इसके अलावा 24 घंटे में अधिकतम 10 लाख रुपये तक का ट्रांजैक्शन किया जा सकेगा।

यात्रा क्षेत्र में एक बार में अब 5 लाख रुपये तक का भुगतान किया जा सकता है। पहले यह लिमिट एक लाख रुपये थी। इसी प्रकार गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस पर टैक्स और ईएमडी पेमेंट्स भी अब प्रति ट्रांजैक्शन 5 लाख रुपये तक किए जा सकेंगे और 10 लाख रुपये प्रतिदिन होगी।

लोन और ईएमआई कलेक्शन के लिए ट्रांजैक्शन लिमिट 5 लाख रुपये कर दी गई है, तो वहीं रोजाना की सीमा 10 लाख रुपये होगी। क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट्स अब एक बार में 5 लाख रुपये तक कर सकते हैं, तो वहीं दैनिक सीमा 6 लाख रुपये ही रखी गई है।

ज्वेलरी खरीद की सीमा को बढ़ाकर 1 लाख से 2 लाख रुपये कर दिया गया है और दैनिक सीमा 6 लाख कर गई है। बैंकिंग सर्विसेज में टर्म डिपॉजिट्स के लिए डिजिटल ऑनबोर्डिंग पर अब 5 लाख रुपये तक ट्रांजैक्शन कर सकते हैं, जबकि विदेशी मुद्रा भुगतान (Forex) BBPS के जरिए अब 5 लाख रुपये तक ट्रांजैक्शन हो सकेगा।

15 सितंबर यानी सोमवार से हुए बदलाव को लेकर NPCI ने कहा कि यूपीआई लोगों की पहली पसंद बन चुका है। हर दिन के छोटे पेमेंट्स से लेकर बड़े निवेश और बिल पेमेंट्स तक, हर जगह यूपीआई इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे में बाजार की मांग को देखते हुए बड़ी लिमिट तय की गई है, ताकि हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन्स भी बिना परेशानी पूरे किए जा सकें।

‘सेफ डोज’ में भी पैरासिटामोल का अधिक सेवन खतरनाक- डॉक्टर

‘सेफ डोज’ में भी पैरासिटामोल का अधिक सेवन खतरनाक- डॉक्टर
यह सच है कि सामान्य दर्द, सिरदर्द, बुखार या शरीर में हल्के असहजपन के समय दवा के नाम पर सबसे पहले हमारे जहन में पैरासिटामोल का नाम आता है। भारत में इस दवा का व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता रहा है। यह दवा लंबे समय से घरों की दवा पेटी का हिस्सा रही है और आसान उपलब्धता के कारण लोग बिना डॉक्टर की सलाह के भी इसका इस्तेमाल करते रहते हैं। पैरासिटामोल शरीर में दर्द और बुखार को कम करने में मदद करता है। असल में ये दिमाग में उन रसायनों की गतिविधि को नियंत्रित करता है जो दर्द और तापमान बढ़ाते हैं। यह सही मात्रा में उपयोग करने पर प्रभावी और सुरक्षित है, लेकिन इसकी अधिकता का शरीर पर कई प्रकार से असर हो सकता है।

विशेषज्ञ कहते हैं, ये व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली दवा है, जिसे आपने भी शायद पिछले कुछ हफ्तों में कभी न कभी खुद भी लिया होगा। लेकिन क्या पैरासिटामोल का बार-बार उतना ही सुरक्षित है जितना लगता है? इसको लेकर ब्रिटिश डॉक्टर्स की टीम ने आगाह किया है।

डॉक्टर कहते हैं, मैं खुद एक डॉक्टर हूं लेकिन मैं इसके अक्सर इस्तेमाल से बचता हूं और लोगों को भी यही सलाह देता हूं।

सीमित मात्रा से अधिक हो रहा है पैरासिटामोल का इस्तेमाल

नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) की एक रिपोर्ट बताती है कि एक औसत ब्रिटिश नागरिक हर साल लगभग पैरासिटामोल की 70 गोलियां खाता है, लगभग छह खुराक प्रति माह। नवीनतम आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि इंग्लैंड में एनएचएस ने 2024-25 में इस दर्द निवारक के लिए 1.5 करोड़ से ज्यादा प्रिस्क्रिप्शन लिखे, जिनकी लागत £80.6 मिलियन (965.45 करोड़) थी।

इस बीच हाल के कई अध्ययनों ने इस दवा के नियमित इस्तेमाल को लिवर फेलियर, हाई ब्लड प्रेशर, गैस्ट्रोइंटस्टाइनल ब्लीडिंग और हृदय रोगों से जोड़ा है। कुछ अध्ययनों में यहां तक कहा गया है कि पैरासिटामोल का अधिक इस्तेमाल टिनिटस, ऑटिज्म और अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (एडीएचडी) जैसी विकासात्मक समस्याओं का भी कारण बन सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के सभी प्रावधानों पर रोक लगाने से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के सभी प्रावधानों पर रोक लगाने से किया इनकार
शीर्ष अदालत ने सोमवार को वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 को लेकर बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने कानून पर रोक लगाने की मांग पर विचार करने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून पर केवल दुर्लभतम मामलों में ही रोक लगाई जा सकती है। हमने माना है कि अनुमान हमेशा कानून की संवैधानिकता के पक्ष में होता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य वक्फ बोर्डों और केंद्रीय वक्फ परिषदों में गैर-मुस्लिमों की संख्या तीन से अधिक नहीं हो सकती। अपना फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि हमने प्रत्येक धारा को दी गई चुनौती पर प्रथम दृष्टया विचार किया है और पाया है कि पूरे कानून पर रोक लगाने का कोई मामला नहीं बनता। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उस प्रावधान पर रोक लगा दी है, जिसके अनुसार पिछले पांच वर्षों से इस्लाम का पालन करने वाले व्यक्ति ही वक्फ बना सकते हैं। कोर्ट ने कहा है कि यह प्रावधान तब तक स्थगित रहेगा, जब तक यह तय करने के लिए नियम नहीं बन जाते कि कोई व्यक्ति इस्लाम का अनुयायी है या नहीं।

किन तीन मुद्दों पर सुनाया अंतरिम फैसला?
क्या वक्फ घोषित की गई संपत्तियों को अदालतें वक्फ की सूची से हटा (डिनोटिफाई करना) सकती हैं या नहीं?
क्या कोई संपत्ति उपयोग के आधार पर वक्फ (वक्फ बाय यूजर) या किसी दस्तावेज के जरिए वक्फ (वक्फ बाय डीड) घोषित की जा सकती है?
अगर किसी जमीन को पहले अदालत ने वक्फ घोषित कर दिया हो, तो क्या सरकार बाद में उसे वक्फ की सूची से हटा सकती है या नहीं?

अधिवक्ता एमआर शमशाद ने कहा कि हमारा मानना है कि वक्फ संशोधन अधिनियम पर आज का आदेश उचित है। वक्फ से संबंधित एक मुद्दे को छोड़कर सभी मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट ने विचार किया है। उनमें से अधिकांश पर रोक लगा दी गई है। किसी व्यक्ति के लिए पांच वर्षों तक मुस्लिम होने की अनिवार्यता पर रोक लगा दी गई है। वक्फ परिषद, जहां गैर-मुस्लिम सदस्यों की संख्या अस्पष्ट थी, की संरचना को चार सदस्यों तक सीमित कर दिया गया है। इसी प्रकार वक्फ बोर्ड की संख्या भी तीन सदस्यों तक सीमित कर दी गई है। जहां तक कलेक्टर की शक्ति का प्रश्न है, सरकार द्वारा उत्पन्न विवादों के लंबित रहने के दौरान कलेक्टर राजस्व रिकॉर्ड में यह प्रविष्टि दर्ज करेगा कि यह वक्फ संपत्ति नहीं है, जब तक कि उपयुक्त प्राधिकारी या न्यायिक मंच द्वारा इसका निर्णय नहीं हो जाता। न्यायालय ने कहा है कि यह शक्ति पृथक्करण के सिद्धांत का उल्लंघन करता है। इसलिए इस पर विशेष रूप से रोक लगा दी गई है और कहा गया है कि किसी भी राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव नहीं किया जाएगा और जब तक अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक किसी तीसरे पक्ष के अधिकार का सृजन नहीं किया जाएगा। इसलिए ये अंतरिम आदेश हैं। यह एक अच्छा आदेश है। हम उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ के बारे में पढ़ेगे और फिर उस पर प्रतिक्रिया देंगे।

अधिवक्ता वरुण सिन्हा ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए संशोधनों पर कोई रोक नहीं है। केवल याचिकाकर्ताओं के पक्ष में एक अंतरिम आदेश है कि संशोधित कानून सहित कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना उन्हें वक्फ संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। यदि सरकार को कोई वक्फ लेना है, तो वक्फ अधिनियम में निर्धारित प्रक्रिया, जिसमें वक्फ में संशोधन भी शामिल है, का पालन न्यायाधिकरण के साथ-साथ उच्च न्यायालय द्वारा भी किया जाना आवश्यक है। इसलिए न्यायाधिकरण के निर्णय के बाद वह आदेश भी प्रभावी हो सकता है। जो वक्फ पंजीकृत नहीं हैं, उन्हें वक्फ संपत्ति नहीं माना जाएगा। जिन लोगों ने पांच साल तक इस्लाम का पालन नहीं किया है, वे वक्फ नहीं बना सकते, उस प्रावधान पर रोक लगा दी गई है।

अधिवक्ता अनस तनवीर (वक्फ अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता) ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने पहली नजर में पाया है कि कुछ प्रावधानों पर रोक लगाने का प्रथम दृष्टया मामला बनता है। उन्होंने सभी प्रावधानों पर रोक नहीं लगाई है। कुछ प्रावधानों पर रोक लगा दी गई है, जैसे कि वह प्रावधान जिसमें कहा गया था कि आपको पांच साल तक मुस्लिम होना चाहिए, पर रोक लगा दी गई है, क्योंकि यह निर्धारित करने के लिए कोई तंत्र नहीं है कि कोई व्यक्ति पांच साल तक मुस्लिम रहा है या नहीं। जहां तक गैर-मुस्लिम सदस्यों का संबंध है तो अदालत ने कहा है कि वक्फ बोर्ड में, यह धारा 9 में 3 से अधिक और 4 से अधिक नहीं हो सकता है, और पंजीकरण पर अदालत ने स्पष्ट रूप से समय सीमा बढ़ा दी है, लेकिन प्रावधान पर रोक नहीं लगाई है।

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