मोहन भागवत ने प्रह्लाद पटेल के 30 साल पुराने अनुभवों की पुस्तक ‘परिक्रमा’ का किया विमोचन

मोहन भागवत ने प्रह्लाद पटेल के 30 साल पुराने अनुभवों की पुस्तक ‘परिक्रमा’ का किया विमोचन

 

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने मप्र की नदियों के उद्गम को बचाने शुरू की अपनी ‘उद्गम मानस यात्रा’ को लेकर संकल्पों को दृढ़ता से दुहराया है। उन्होंने कहा कि अगर वो केंद्र से मप्र की राजनीति में न लौटते, तो शायद नदियों के उद्गम को बचाने का संकल्प न ले पाते।

 

पटेल नर्मदा परिक्रमा के अनुभवों पर लिखी अपनी पुस्तक ‘परिक्रमा-कृपा सार’ के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि पटेल ने 2 वर्ष पहले ‘उद्गम मानस यात्रा’ शुरू की थी। इसके तहत वो अब तक 108 नदियों के उद्गम स्थलों तक पहुंचे हैं। इसका उद्देश्य मप्र की जीवनदायिनी नदियों के पुनर्जीवन और संरक्षण को लेकर जनजाग्रति लाना है। साथ ही पर्यावरण के प्रति लोगों को चेताना भी है।

 

कौन-कौन थे अतिथि?

इंदौर के ‘ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर’ में 14 सितंबर(हिंदी दिवस) पर मंत्री पटेल की नर्मदा परिक्रमा के अनुभवों और अनुभूतियों पर संकलित पुस्तक ‘परिक्रमा-कृपा सार’ का विमोचन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघसंचालक मोहन भागवत के मुख्य आतिथ्य और महामंडलेश्वर श्रीश्री 1008 श्री ईश्वरानंद जी महाराज की विशेष आतिथ्य में किया गया था।

 

विमोचन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. भागवत ने कहा-‘नर्मदा परिक्रमा में जो कुछ प्रहलाद जी को बोध मिला होगा, उस बोध(पुस्तक) को सरसरी तौर पर जो मैंने पढ़ा है, उसमें तो यही है कि-मैं और मेरा छोड़ो; अंतःकरण पवित्र करो। स्वार्थ बिल्कुल मत रखो। कर्तव्य, कर्म करते चलो। सबको अपना मानकर चलते जाओ।’

 

पटेल ने अनुभव किए साझा

डॉ. भागवत पुस्तक को सारगर्भित तरीके से समझाया कि दुनिया में झगड़े इसलिए होते हैं क्योंकि लोग “मैं और मेरा” की भावना में बंधे रहते हैं। धर्म का असली अर्थ है – बिना किसी को दु:ख दिए जीवन जीना। धर्म कभी किसी को दु:ख नहीं देता, दुनिया लॉजिक से नहीं धर्म से चलती है।

 

कार्यक्रम के दौरान पटेल ने पुस्तक के लेखन से जुड़े अनुभव साझा करते हुए कहा कि 30 वर्ष पूर्व उन्होंने अपने आराध्य श्रीश्री बाबाश्री जी की सेवा करते हुए नर्मदा परिक्रमा की थी। इस यात्रा का राजनीति से कोई संबंध नहीं था। उसी दौरान के अनुभव और अनुभूतियों को संकलन करके यह किताब सामने आई है।

 

मंत्री ने क्या खुलासा किया?

पटेल ने कहा कि नर्मदा परिक्रमा के दौरान जब वो श्रीश्री बाबाश्री जी के साथ चलते थे, तब उन्होंने कहा था कि संगम नदियों का हो; संगम पहाड़ों का हो या संगम स्त्री पुरुष का हो, वहाँ जीवन की संभावना होती है, उसे कुचलने की गलती मत करना। तब यह बात उन्हें समझ में नहीं आई।

 

चेतने में उन्हें 30 वर्ष लग गए। पटेल ने खुलासा किया कि वे नर्मदा के अपने अनुभवों को बेचना नहीं चाहते थे, इसलिए कभी पुस्तक छपवाने की इच्छा नहीं हुई। लेकिन अब उनके मित्रों के आग्रह पर यह पुस्तक सामने आई है। इससे जो भी प्राप्त होगा, वो गौसेवा और नर्मदा सेवा में लगाया जाएगा।

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मजदूरों के खाते में सरकार भेजेगी 5000 रूपया

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मजदूरों के खाते में सरकार भेजेगी 5000 रूपया
बिहार में विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। चुनाव के करीब आते ही बिहार की नीतीश सरकार सौगतों की बारिश कर रही है। नौकरी, रोजगार, पेंशन में बढ़ोतरी के बाद सरकार बिहार में काम करने वाले रजिस्टर्ड मजदूरों को भी दीवाली पर एक बड़ा गिफ्ट देने का फैसला किया है। सूत्रों का कहना है कि बिहार सरकार की ओर से इसकी पूरी तैयारी कर ली गई है। इसकी औपचारिक घोषणा 17 सितंबर को होने की संभावना है।

श्रमिकों को मिलेंगे 5000 रुपये
बिहार सरकार प्रदेश के रजिस्टर्ड मजदूरों (श्रमिकों) को 17 सितंबर को 5000 रूपया देने की घोषणा कर सकती है। बिहार सरकार विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर यह सौगात देने का फैसला किया है। सरकार के इस सौगात का लाभ श्रम विभाग में एक साल पहले तक निबंधित करीब 1750000 श्रमिकों को प्रति परिवार 5000 रुपये एकमुश्त कपड़े खरीदने के लिए देगी। इस पर सरकार को 900 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। श्रम विभाग प्रदेश में होने वाले प्रत्येक निमार्ण कार्य पर 1 % लेबर सेश लेती है।

चुनाव से पहले सरकार देगी यह पैसा
इस लेबर सेस कोष में अभी विभाग के पास 3000 करोड़ की राशि जमा है। इस राशि को किसी अन्य मद में सरकार खर्च नहीं कर सकती है। इसका उपयोग श्रमिकों के हित में ही किया जा सकता है। सरकार ने इसको देखते हुए मजदूरों को चुनाव से पहले 5000 रूपया पोशाक खरीदने के लिए देने का फैसला किया है।

चुनाव से सौगातों की बारिश
विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती जैसे जैसे करीब आ रही है। बिहार में नीतीश सरकार और केंद्र की मोदी सरकार बिहार के लोगों के लिए अपना पूरा खजाना खोल दिया है। सरकार एक के बाद एक बड़ी सौगात देकर चुनाव मैदान में उतरना चाहती है। ताकि बिहार के लोगों से एक बार सरकार बनाने के लिए वोट मांग सकें। सरकार ने हाल ही में नौकरी, रोजगार और पेंशन को लेकर बड़ा फैसला लिया है। 125 यूनिट बिजली बिल जहां माफ कर दिया वहीं सामाजिक पेंशन की राशि बढ़ा दी। सरकार के इस फैसले की हर ओर चर्चा भी हो रही है।

पीएम मोदी ने पूरे देशवासियों से की बड़ी अपील

पीएम मोदी ने पूरे देशवासियों से की बड़ी अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने रविवार को कांग्रेस पर जबरदस्त हमला बोला। उन्होंने घुसपैठ और जनसांख्यिकी परिवर्तन को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक बताया। उन्होंने असम के दरांग जिले में एक जनसभा के दौरान कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठियों की मदद से जनसांख्यिकी बदलने की साजिश रची जा रही है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।

घुसपैठिये हमारी माताओं और बहनों के साथ अत्याचार करते हैं- पीएम मोदी
पीएम मोदी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा की सरकार घुसपैठियों को देश के साधनों और संसाधनों पर कब्जा करने नहीं देगी। भारत के किसानों, नौजवानों और हमारे आदिवासियों का हक हम किसी को छीनने नहीं देंगे। ये घुसपैठिये हमारी माताओं और बहनों के साथ अत्याचार करते हैं और ऐसा हम होने नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि देश में एक डेमोग्राफी मिशन (जनसांख्यिकी मिशन) शुरू किया जा रहा है। भाजपा का उद्देश्य देश को घुसपैठियों से बचाना और उसकी अखंडता को बहाल करना है।

वे घुसपैठियों को बचाने में कितनी ताकत लगाएंगे, मैं भी देखता हूं- पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि मैं उन राजनेताओं को कहना चाहता हूं, अगर वे चुनौती लेकर मैदान में आएंगे तो मैं उनका सीना तानकर सामना करूंगा। मैं भी देखता हूं कि वे घुसपैठियों को बचाने में कितनी ताकत लगाएंगे। हम घुसपैठियों को हटाने में अपना जीवन लगा देंगे, वे सामने आएं और मुकाबला करें। घुसपैठियों को बचाने के लिए निकले लोगों को भुगतना पड़ेगा और उन्हें मेरे ये शब्द जरूर सुनने चाहिए। यह देश उनको माफ नहीं करेगा। प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi In Assam) ने आगे कहा कि असम की विरासत को बचाना और विकास करना, इसके लिए हमें मिलकर काम करना है। हमें असम को ‘विकसित’ भारत का इंजन बनाना है।

पीएम मोदी ने मंच से कर दी बड़ी अपील
प्रधानमंत्री ने जनता से स्वदेशी उत्पादों को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि मैं आपसे वादा मांगता हूं कि अब जो भी खरीदेंगे, वह ‘स्वदेशी’ होगा। मेरे लिए स्वदेशी की परिभाषा सरल है। कंपनी दुनिया के किसी भी कोने से हो, लेकिन मेहनत मेरे देश के युवा सैनिकों की होनी चाहिए। जो भारत में बनेगा, उसमें मेरी भारतीय मिट्टी की खुशबू होनी चाहिए।

अगले 72 घंटे इन राज्यों में भारी बारिश, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

अगले 72 घंटे इन राज्यों में भारी बारिश, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट
देश में इस बार मानसून में अच्छी बारिश हुई है। कई राज्यों में भारी बारिश के कारण बाढ़ भी आई। अब मानसून के वापस लौटने का समय आ गया है। मौसम विभाग के ताजा अपडेट के मुताबिक रविवार को राजस्थान के कुछ हिस्सों से वापस लौट चुका है। इसके अलावा अगले 2-3 दिनों में राजस्थान के कुछ और हिस्सों, साथ ही पंजाब और गुजरात के कुछ हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून के लौटने की स्थिति अनुकूल बनी हुई है। साथ ही मौसम विभाग ने बताया कि अगले 3 दिनों तक पूर्वोत्तर राज्यों और महाराष्ट्र में भयंकर बारिश हो सकती है।

इन राज्यों में होगी भारी बारिश
मौसम विभाग के ताजा अपडेट के मुताबिक 14 और 17 सितंबर को अरुणाचल प्रदेश, 15 और 16 सितंबर को असम और मेघायल, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इसके अलावा 15 और 16 तारीख को अरुणाचल प्रदेश, 14 सितंबर को नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा तथा असम और मेघालय में बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है।

तूफान की जताई संभावना
IMD के मुताबिक 14 से 16 सितंबर के दौरान पश्चिमी मध्य प्रदेश, विदर्भ में अधिकांश जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इन जगहों पर गरज के साथ तूफान की भी संभावना जताई है। 14 और 15 तारीख को पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़; 14 और 17-19 तारीख के दौरान अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, 16-18 तारीख के दौरान उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम और 14-16 सितंबर के दौरान बिहार में अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

इन जगहों पर होगी हल्की बारिश
पश्चिम भारत की भारत की जाए तो 16 सितंबर को कोंकण एवं गोवा, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश गरज के साथ हो सकती है। इसके अलावा 14 और 15 सितंबर को कोंकण एवं गोवा, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है।

हिमालच प्रदेश में होगी हल्की बारिश
14 सितंबर को हिमाचल प्रदेश में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है। 14 और 16 सितंबर को उत्तराखंड में; 14-20 सितंबर के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश में तथा 15 सितंबर को उत्तराखंड में बहुत भारी बारिश की संभावना है।

छत्‍तीसगढ़ के इन गांवों में शुरू होगी होम-स्टे योजना – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

छत्‍तीसगढ़ के इन गांवों में शुरू होगी होम-स्टे योजना – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज जशपुर जिले में सामुदायिक पर्यटन की एक नई पहल की शुरुआत की। मुख्यमंत्री ने कैंप कार्यालय से जशपुर के पाँच ग्रामों-देओबोरा, केरे, दनगरी, छिछली और घोघरा में होम-स्टे योजना का शुभारंभ किया। इस अवसर पर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

युवाओं को मिलेगा रोजगार
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार पर्यटन क्षेत्र को एक उद्योग के रूप में विकसित करने के लिए कृत संकल्पित है। होम-स्टे नीति न केवल पर्यटन को ( CG News) नई पहचान देगी, बल्कि स्थानीय युवाओं और समुदायों के लिए रोजगार और उद्यमशीलता के अवसर भी प्रदान करेगी। उन्होंने बताया कि आदिवासी संस्कृति, परंपराएँ, खान-पान और जीवन शैली को लेकर अन्य प्रदेशों और देशों के लोगों में गहरी जिज्ञासा रहती है।

जशपुर को मिलेगी नई पहचान

होम-स्टे के माध्यम से पर्यटकों को सीधे गाँवों में रहकर स्थानीय संस्कृति, पूजन पद्धति और सादगी का अनुभव करने का अवसर मिलेगा, जो उनके लिए अविस्मरणीय साबित होगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह पहल जशपुर को न केवल पर्यटन के नक्शे पर एक नई पहचान दिलाएगी, बल्कि स्थानीय संस्कृति और समुदाय को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षण प्राप्त पर्यटन मित्रों को प्रमाण पत्र वितरित किए। यह प्रशिक्षण सामुदायिक पर्यटन और होम-स्टे विकास पर आधारित था, जिससे संबंधित ग्रामों को इको-टूरिज्म गंतव्य के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।
मकरभंजा जलप्रपात

कार्यक्रम में विधायक रायमुनी भगत ने कहा कि जशपुर का मकरभंजा जलप्रपात छत्तीसगढ़ का सबसे ऊँचें जलप्रपात में से एक है, और इसके साथ जिले के अनेक झरने व दर्शनीय स्थल जशपुर को पर्यटन की दृष्टि से अनोखा बनाते हैं। विधायक गोमती साय ने कहा कि जशपुर प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है और यहाँ आने वाले पर्यटक जीवनभर इस जगह की यादों को संजोए रखते हैं।

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, कलेक्टर रोहित व्यास, पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार, डिप्टी कलेक्टर समीर बड़ा सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और ग्रामीण उपस्थित रहे।

 

भारतीय संस्कृति और राष्ट्रभाषा के नवजागरण का उद्घोष है, तूर्यनाद : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भारतीय संस्कृति और राष्ट्रभाषा के नवजागरण का उद्घोष है, तूर्यनाद : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हिंदी वैश्विक मंच पर भारत की पहचान बन चुकी है। संयुक्त राष्ट्र से लेकर ब्रिक्स, जी-20 जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रधानमंत्री श्री मोदी हिन्दी के माध्यम से भारत के स्वाभिमान और संस्कृति से दुनिया को परिचित कराते हैं। हिन्दी विश्व की सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। भारत की आजादी के आंदोलन में हिन्दी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभ भाई पटेल, विनोबा भावे जैसे गैर-हिंदी भाषी राज्यों से आने वाले महापुरूषों ने भी एक स्वर में हिंदी को सभी भाषाओं से ऊपर रखा। हिंदी भाषा में आत्मीयता का भाव प्रकट होता है। यह सभी राज्यों की भाषाओं में मातृभाषा का स्थान रखती है, जो सभी भाषाओं के साथ सम्पर्क का माध्यम है। हिंदी हमारी भाषा नहीं बल्कि हमारी पहचान भी है। वर्तमान समय हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्थापित करने का है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार शाम भोपाल के मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) परिसर में आयोजित तूर्यनाद-25 महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती पूजन कर महोत्सव का शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि तूर्यनाद महोत्सव ने कम समय में ही अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। मुख्यमंत्री ने तूर्यनाद कला प्रदर्शन को वार्षिक उल्लास पर्व बताते हुए कहा कि यह आयोजन हिन्दी भाषा एवं भारतीय संस्कृति के नवजागरण का उद्घोष है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने तूर्यनाद महोत्सव के आयोजन एवं प्रबंधन में मदद करने और तूर्यनाद आयोजन समिति को राष्ट्रभाषा के संवर्धन के लिए मुख्यमंत्री निवास में कार्यक्रम करने के लिए आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभागार में उपस्थित दिव्यांग विद्यार्थी श्री राजा पटेल के साथ सेल्फी लेकर उत्साहवर्धन किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन में देश में शिक्षा नीति 2020 लागू की गई है। प्रदेश के प्रत्येक विश्वविद्यालयों में सभी विषयों के कोर्स संचालित किए जा रहे हैं। पहले मध्यप्रदेश में चिकित्सा महाविद्यालयों की संख्या कम थी और विद्यार्थियों को मेडिकल की शिक्षा के लिए विदेश जाना पड़ता था। लेकिन अब प्रदेश में बड़ी संख्या में मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों की स्थापना की जा रही है। इसका लाभ छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों और नागरिकों को मिल रहा है। साथ ही मध्यप्रदेश में मेडिकल की पढ़ाई हिंदी भी कराई जा रही है। हमारी भाषा ही

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी पहचान होती है। मातृ भाषा की उन्नति के बगैर किसी समाज के प्रगति नहीं हो सकती। हिंदी केवल एक भाषा नहीं, यह चेतना और हमारा स्वाभिमान है। हिंदी भाषा के कारण ही आज भारत विश्व में एक अलग स्थान रखता है। स्वामी विवेकानंद और पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने विश्व में हिंदी को सम्मान दिलाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि दक्षिण अमेरिकी देश सूरीनाम का वास्तविक नाम ‘श्रीराम’ है। यह बात उन्हें उज्जैन के एक कार्यक्रम में अतिथि के रूप पधारीं सूरीनाम की राजदूत ने बताई थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मैनिट के छात्र-छात्राओं, प्राध्यपकगण एवं तूर्यनाद महोत्सव में उपस्थित सभी अतिथियों को अभियंता दिवस (15 सितम्बर) की शुभकामनाएं दीं।

मैनिट के कार्यकारी निदेशक श्री शैलेन्द्र जैन ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने छात्रों के अनौपचारिक आमंत्रण को स्वीकार किया। हमारी संस्था तकनीकी शिक्षा के साथ 35 से अधिक समितियों के माध्यम से गैर शैक्षणिक गतिविधियां संचालित करती हैं, जिससे विद्यार्थियों का संस्थान में सर्वांगीण विकास हो सके।

आरएनटीयू के कुलगुरू एवं मेनिट के विद्यार्थी रहे डॉ. संतोष चौबे ने कहा कि 14 सितम्बर को राष्ट्रीय हिंदी दिवस है। आज विश्व के 100 देशों में हिंदी बोली जाती है और 150 विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जाती है। लगभग 60 करोड़ लोग विश्व में हिंदी बोलते हैं। देश में तकनीकी और चिकित्सा की पढ़ाई हिंदी में कराई जा रही है। हिंदी की स्वीकार्यता हर क्षेत्र में बढ़ रही है।

तूर्यनाद आयोजन समिति की संयोजिका श्रीमती सविता दीक्षित ने कहा कि तूर्यनाद महोत्सव से विद्यार्थियों में सांस्कृतिक मूल्य, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्वों का विकास हो रहा है। साथ ही वे अपनी प्राचीन समृद्ध विरासत से भी परिचित हो रहे हैं। इस अवसर पर छात्र परिषद के अध्यक्ष मृत्युंजय सिंह चौहान सहित बड़ी संख्या में संस्थान के विद्यार्थी उपस्थित थे।

कृषि आधारित उद्योगों के प्रोत्साहन के लिए लगाएं बहुउद्देशीय कृषि मेले : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

कृषि आधारित उद्योगों के प्रोत्साहन के लिए लगाएं बहुउद्देशीय कृषि मेले : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कृषि आधारित उद्योगों के प्रचार-प्रसार के लिए कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन एवं मत्स्य पालन विभाग द्वारा आपसी तालमेल से बहुउद्देशीय कृषि मेले आयोजित किए जाएं। इन मेलों में किसानों को उनकी फसल सहित अन्य सहायक उत्पादों के लाभयुक्त विक्रय एवं मार्केटिंग की जानकारियां भी दी जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि धार जिले के भैंसोला गांव में निर्मित हो रहे पीएम मित्रा पार्क से प्रदेश के कपास और रेशम उत्पादक किसानों की जीवन रेखा बदल जाएगी। उन्होंने कहा कि पीएम मित्रा पार्क से प्रदेश के 6 लाख से अधिक कपास उत्पादक किसानों को लाभ मिलने के साथ 1 लाख लोगों को प्रत्यक्ष एवं 2 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि पीएम मित्रा पार्क में निवेश करने के लिए बड़ी-बड़ी कंपनियों ने रुचि व्यक्त की है। जिस तेजी से पीएम मित्रा पार्क में निवेश के लिए कंपनियां आ रही हैं, यह हमें और बेहतर करने के लिए उत्साहित करता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार की देर रात मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग की गतिविधियों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पीएम मित्रा पार्क बनने से मालवा क्षेत्र के किसानों द्वारा उत्पादित कपास की खपत लोकल लेवल पर ही हो जाएगी। इससे लोगों को रोजगार मिलेगा और रॉ-मैटेरियल सप्लाई की एक पूरी चैन तैयार होगी। पीएम मित्रा पार्क प्रदेश के किसानों के लिए वरदान की तरह है। प्रदेश में निवेश करने के इच्छुक सभी निवेशकों का सरकार पलक पावड़े बिछाकर स्वागत करेगी। हम निवेशकों को सभी जरूरी मदद और सहयोग भी उपलब्ध कराऐंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सार्वजनिक/लोक उपक्रमों में निजी भागीदारी से ही देश का विकास संभव है। पीएम मित्रा पार्क में निवेशकों द्वारा किए जाने वाले पूंजी निवेश से जितनी उच्च कोटि के परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं, हर संभव प्रयास कर हम यह करके दिखाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पीएम मित्रा पार्क का प्रचार-प्रसार इस तरह किया जाए कि प्रदेश में मौजूद सभी प्रकार के कृषि आधारित उद्योग को भी भरपूर प्रोत्साहन मिले।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश में कुल 7 पीएम मित्रा पार्क मंजूर किए गए हैं। जहां दूसरे राज्य पीएम मित्रा पार्क की स्थापना के लिए प्राथमिक तैयारियां ही कर रहे हैं, वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से हमारी सरकार 17 सितंबर को धार जिले के भैंसोला गांव में देश के पहले और सबसे बड़े पीएम मित्रा पार्क का भूमिपूजन कराने जा रही है। उन्होंने कहा कि हम इसे देश का मॉडल पीएम मित्रा पार्क बनायेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पीएम मित्रा पार्क प्रदेश की कॉटन इंडस्ट्री को पुनर्स्थापित करेगा। यहां कपास से धागा, धागे से कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट्स, होजियरी आइटम्स सहित ऑल वेदर वियरिंग्स तैयार किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पीएम मित्रा पार्क की स्थापना के बारे में प्रदेश के किसानों को हर तरीके से जानकारी दी जाए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हर्ष व्यक्त करते हुए बताया कि देश के सबसे बड़े इंडस्ट्रियल पार्क (पीएम मित्रा पार्क) में भूमिपूजन होने से पहले ही लैंड एलॉटमेंट की कार्रवाई पूरी कर ली गई है। पीएम मित्रा पार्क में भूमि आवंटन के लिए 114 कंपनियों के आवेदन मिले थे। इन कंपनियों ने पीएम मित्रा पार्क में निवेश करने की प्रबल रुचि व्यक्त कर लैंड अलॉटमेंट के लिए के लिए आवेदन किया है। आवेदन करने वाली कंपनियों में से 91 कंपनियों के आवेदन मंजूर कर इन्हें लैंड एलॉटमेंट कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पीएम मित्रा पार्क में लैंड अलॉटमेंट कमेटी द्वारा विभिन्न कंपनियों और निर्माण इकाइयों को कुल 1294.19 एकड़ भूमि आवंटित करने की अनुशंसा कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम मित्रा पार्क में अधोसंरचना विकास के लिए सभी जरूरी निर्माण कार्य जारी हैं। इन निर्माण कार्यों के साथ लैंड अलॉटमेंट पाने वाली कंपनियों द्वारा अपने कारखाने और निर्माण इकाइयां भी समानांतर रूप से निर्मित की जाएंगी। इससे आने वाले एक से डेढ़ साल के दौरान ही निवेशक कंपनियों की निर्माण इकाइयों में उत्पादन भी प्रारंभ हो जाएगा।

बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव वन, पर्यावरण तथा सहकरिता अशोक वर्णवाल, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय नीरज मंडलोई, सचिव किसान कल्याण एवं कृषि विकास निशांत बरवड़े, आयुक्त जनसंपर्क दीपक कुमार सक्सेना सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

PM Modi ने मिजोरम को दी 9000 करोड़ की सौगात

PM Modi ने मिजोरम को दी 9000 करोड़ की सौगात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिजोरम को पहली बार भारतीय रेल नेटवर्क (Indian Railway) से जोड़ने वाली बैराबी-सैरांग नई रेल लाइन का उद्घाटन किया है। मिजोरम की राजधानी आइजोल, भारत के रेलवे मानचित्र में शामिल हो गया है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने तीन ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। बैराबी-सैरांग नई रेल लाइन 8,070 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से बनकर तैयार हुई है। इसके लिए जटिल भौगोलिक स्थितियों के तहत 45 सुरंगें बनाई गई हैं। इसमें 55 बड़े पुल और 88 छोटे पुल भी शामिल हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े। वे मिजोरम के लिए निकले थे। हालांकि, दुर्भाग्य से खराब मौसम के कारण वे आइजोल नहीं पहुंच पाए। इसके बाद मिजोरम एयरपोर्ट पर ही उन्होंने वर्चुअली कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मिजोरम भारत की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह राष्ट्र के लिए, विशेषकर मिजोरम के लोगों के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। अब आइजोल भारत के रेलवे मानचित्र पर होगा।

पीएम मोदी ने कहा कि कुछ साल पहले मुझे आइजोल रेलवे लाइन की आधारशिला रखने का अवसर मिला था और आज हम इसे देशवासियों को समर्पित करते हुए गर्व महसूस करते हैं। दुर्गम भूभाग सहित कई चुनौतियों को पार करते हुए बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन एक वास्तविकता बन गई है। हमारे इंजीनियरों के कौशल और हमारे कार्यकर्ताओं के उत्साह ने इसे संभव बनाया है।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पहली बार मिजोरम का सैरांग राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सीधे जुड़ेगा। यह सिर्फ एक रेलवे नहीं है, बल्कि परिवर्तन की जीवनरेखा है। यह मिजोरम के लोगों के जीवन और आजीविका में क्रांति लाएगी। मिजोरम के किसान और व्यवसाय देश भर के ज्यादा बाजारों तक पहुंच पाएंगे। लोगों को शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के बेहतर अवसर भी मिलेंगे। इस विकास से कई क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

ट्रंप ने माना, भारत पर टैरिफ लगाने से संबंधों में पड़ी दरार

ट्रंप ने माना, भारत पर टैरिफ लगाने से संबंधों में पड़ी दरार
भारत (India) और अमेरिका (United States Of America) के संबंधों में पिछले कुछ समय में दरार पड़ गई है। इसकी वजह है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) का ‘टैरिफ वॉर’। ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया हुआ है और इसी वजह से दोनों देशों के संबंधों में दरार पड़ी है। ट्रंप लगातार भारत को रूस (Russia) से तेल न खरीदने की धमकी भी दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद नहीं किया है। टैरिफ के इस मामले में अब ट्रंप ने एक बड़ी बात कही है।

ट्रंप ने माना, भारत पर टैरिफ लगाने से संबंधों में पड़ी दरार
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पहली बात सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया है भारत पर टैरिफ लगाने से दोनों देशों के संबंधों में दरार पड़ी है। ट्रंप ने एक इंटरव्यू के दौरान इस विषय पर बात करते हुए कहा, “भारत, रूस का सबसे बड़ा ग्राहक (तेल खरीदने के मामले में) है। मैंने भारत पर 50% टैरिफ लगाया है क्योंकि वो रूस से तेल खरीद रहे हैं। ऐसा करना आसान नहीं है। यह एक बड़ी बात है और इस वजह से भारत के साथहमारे संबंधों में दरार पड़ी है।”

कौन है रूसी तेल का सबसे बड़ा ग्राहक?
ट्रंप ने भले ही भारत को रूसी तेल का सबसे बड़ा ग्राहक बता रहे हैं, पर ऐसा नहीं है। रूस से सबसे ज़्यादा मात्रा में तेल चीन (China) खरीदता है। हालांकि इसके लिए ट्रंप ने चीन पर कोई एक्स्ट्रा टैरिफ नहीं लगाया है।

क्या है असल वजह?
कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि रूसी तेल तो सिर्फ एक बहाना है। असल में ट्रंप ने भारत पर इसलिए टैरिफ लगाया है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने भारत-पाकिस्तान सीज़फायर के लिए ट्रंप को क्रेडिट नहीं दिया और न ही शांति के नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकित किया। पीएम मोदी ने कई मौकों पर यह साफ कर दिया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सीज़फायर में किसी भी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी। बाद में पाकिस्तान की तरफ से भी यह बात स्वीकार कर ली गई थी कि सीज़फायर के लिए उन्होंने अमेरिका से नहीं, भारत से ही संपर्क किया था।

संबंधों को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं ट्रंप?
भारत और अमेरिका के संबंधों में पड़ी दरार जगजाहिर है। ट्रंप को भी इस बात का पता है। ऐसे में अब लग रहा है कि वह, भारत से संबंधों को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले कुछ दिन में ट्रंप के सुर बदल गए हैं और वह भारत और पीएम मोदी के बारे में बड़ी ही विनम्रता से बात कर रहे हैं। साथ ही ट्रंप ने कई मौकों पर पीएम मोदी को अपना अच्छा दोस्त भी बताया है और कहा है कि दोनों हमेशा अच्छे दोस्त रहेंगे और भारत-अमेरिका के बीच जल्द ही ट्रेड डील होगी।

Mutual Fund में पैसा लगाने वालों का अब नहीं कटेगा मुनाफा

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बाजार नियामक सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने शुक्रवार को म्यूचुअल फंड में इन्वेस्टर प्रोटेक्शन और फाइनेंशियल इन्क्लूजन को बढ़ावा देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। बोर्ड ने मैक्सिमम परमीसिबल एग्जिट लोड को 5 फीसदी से घटाकर 3 फीसदी कर दिया है। इससे म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों को फायदा मिलेगा, क्योंकि यह लोड फंड से निकासी के समय लगता है। सेबी ने इस बैठक में आइपीओ, कमोडिटी और बीमा सेक्टर से जुड़े नियमों को सरल किया है, जिससे निवेशक आकर्षित हो सके।

क्या है एग्जिट लोड और किसे मिलेगा फायदा?
जब आप किसी म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं और कुछ समय बाद अपने यूनिट्स बेचकर बाहर निकलते हैं, तो फंड हाउस आपसे एक शुल्क ले सकता है। इसे एग्जीट लोड कहा जाता है। एग्जीट लोड कम होने से सीधे तौर म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों को फायदा मिलेगा, क्योंकि अब उन्हें कम निकासी शुल्क देना होगा।

बड़ी कंपनियों के लिए हुआ यह फैसला
सेबी ने कहा कि 50,000 करोड़ रुपए से एक लाख करोड़ रुपए के बीच मार्केट कैप वाली कंपनियों के लिए 25 प्रतिशत का कम से कम पब्लिक शेयर रखने के मानदंड को अब मौजूदा तीन सालों की जगह पांच सालों में हासिल किया जा सकता है। जिन कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 1 लाख करोड़ से 5 लाख करोड़ के बीच है, उनके लिए सेबी ने न्यूनतम 6,250 करोड़ या आइपीओ के बाद मार्केट कैप का 2.75 प्रतिशत तक का रखने की बात कही है। वहीं, 5 लाख करोड़ से अधिक मार्केट कैप वाली कंपनियों के लिए, सेबी ने न्यूनतम सार्वजनिक पेशकश का आकार 15,000 करोड़ रुपए या 1 प्रतिशत रखने की बात कही है।

एंकर कोटे में मिलेगी प्राथमिकता
एंकर कोटे में बीमा कंपनियों और पेंशन फंडों के लिए 7 फीसदी अतिरिक्त कोटा होगा। यानी बीमा, पेंशन फंड और म्यूचुअल फंडों के लिए 40 प्रतिशत कोटा होगा। इसके अलावा 250 करोड़ रुपए से अधिक के स्वीकार्य एंकर आवंटियों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी गई है। बीमा कंपनियों और पेंशन फंडों को आईपीओ एंकर बुक के लिए रिजर्व कैटेगरी में शामिल किया जाएगा।

एमपीएस नियम हो जाएंगे सरल
इससे जियो जैसे मेगा इश्यू के लिए पब्लिक ऑफर और एमपीएस नियम अब ज्यादा सरल हो जाएंगे। कॉर्पोरेट्स पर दबाव घटेगा कंपनियों को कम समय में बड़े पैमाने पर इक्विटी डायल्यूशन से बचने का मौका मिलेगा। ऑफर्स से रिटेल और संस्थागत निवेशकों को ज्यादा अवसर मिलेंगे।

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