भारत के ऑस्ट्रेलिया दौरे में फेरबदल

भारत के ऑस्ट्रेलिया दौरे में फेरबदल
भारतीय महिला क्रिकेट टीम अगले वर्ष ऑस्ट्रेलिया का दौरा करेगी, जिसमें तीन टी20, तीन वनडे और एक टेस्ट मैच खेला जाएगा। 1 मार्च को खेले जाने वाले तीसरे वनडे मैच का वेन्यू बदला गया है। अब यह मैच होबार्ट के बेलेरिव ओवल में खेला जाएगा। क्रिकेट विक्टोरिया (सीवी) ने क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (सीए) को सूचित किया है कि जंक्शन ओवल डे-नाइट मैच की मेजबानी नहीं कर पाएगा। यह जंक्शन ओवल का पहला डे-नाइट वनडे इंटरनेशनल मैच होना था, लेकिन फ्लडलाइट इंस्टॉलेशन में योजना संबंधी अड़चनों और जारी काम के कारण दर्शकों की आवाजाही प्रभावित होती। ऐसे में क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने मैच को तस्मानिया शिफ्ट करने का फैसला किया।

पीटर रोच ने जताया अफसोस
27 फरवरी को होबार्ट में होने वाले डे-नाइट मैच के कम समय को देखते हुए मुकाबले को दिन के मैच के रूप में आयोजित करना भी व्यावहारिक नहीं था। वहीं, एमसीजी मैदान के नवीनीकरण कार्यों के कारण उपलब्ध नहीं था। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के हेड ऑफ क्रिकेट ऑपरेशंस एंड शेड्यूलिंग पीटर रोच ने कहा कि हमें अफसोस है कि यह मैच जंक्शन ओवल में नहीं हो सकेगा। इस सीजन मेलबर्न में कोई महिला अंतरराष्ट्रीय मुकाबला नहीं होगा।

एमसीजी रेनोवेशन के चलते उपलब्ध नहीं
हमें उम्मीद थी कि जंक्शन ओवल की लाइट्स इस मैच से कई हफ्ते पहले तैयार हो जाएंगी और हम मैदान पर पहला अंतरराष्ट्रीय डे-नाइट मुकाबला का लुत्फ उठाएंगे, लेकिन दुर्भाग्यवश, एमसीजी रेनोवेशन के चलते उपलब्ध नहीं है। कॉम्पैक्ट मल्टीफॉर्मेट शेड्यूल के साथ-साथ जंक्शन ओवल पर जारी लाइटिंग कार्य की वजह से हम इस मैच को दिन में भी आयोजित नहीं कर सकते।

क्रिकेट तस्मानिया का जताया आभार
उन्होंने कहा कि हम क्रिकेट तस्मानिया के आभारी हैं, जिन्होंने होबार्ट में दूसरा मुकाबला कराने के लिए हामी भरी। उम्मीद है कि तस्मानिया के फैंस इन दोनों मुकाबलों में हमारी विश्व चैंपियन महिला टीम का हौसला बढ़ाने जरूर पहुंचेंगे। हम उन फैंस से माफी चाहते हैं, जिन्होंने टिकट खरीदे थे। रिफंड अगले 24 घंटे में ऑटोमैटिक प्रोसेस हो जाएंगे। रोच ने कहा कि हम भारत के खिलाफ शानदार सीरीज की उम्मीद कर रहे हैं। अगले सीजन मेलबर्न में महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की वापसी होगी।

कर्नाटक में कांग्रेस का एक और विधायक गिरफ्तार

कर्नाटक में कांग्रेस का एक और विधायक गिरफ्तार
कर्नाटक में कांग्रेस के एक और विधायक को गिरफ्तार कर लिया गया है। उनपर करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया गया है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कारवार के विधायक सतीश कृष्ण सैल को कल देर रात हिरासत में लिया। पूछताछ के बाद मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़े एक अवैध लौह अयस्क निर्यात मामले में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।

आज कांग्रेस विधायक को अदालत में पेश किया जाएगा। बता दें कि पिछले महीने ईडी ने 13 और 14 अगस्त, 2025 को विधायक के कारवार (उत्तर कन्नड़), गोवा, मुंबई और नई दिल्ली में कई ठिकानों पर एकसाथ छपामारी भी की थी।

सैल पर ये है आरोप
सतीश कृष्ण सैल पर आरोप है कि उन्होंने 19 अप्रैल 2010 से 10 जून 2010 के बीच लगभग 1.25 लाख मीट्रिक टन लौह अयस्क चूर्ण का अवैध रूप से निर्यात किया। सैल ने कुछ कंपनियों और बेलेकेरी पोर्ट अधिकारियों के साथ मिलकर यह अवैध निर्यात किया।

बताया जा रहा है कि सैल द्वारा किए गए अवैध निर्यात का कुल मूल्य 86.78 करोड़ रुपये था। बता दें कि ईडी की जांच विशेष अदालत के दोषसिद्धि आदेश पर आधारित है, जिसमें सैल समेत सभी आरोपियों को दोषी ठहराया गया था।

1.41 करोड़ रुपये कैश जब्त
ईडी ने सैल के आवास से 1.41 करोड़ रुपये नकदी और उनके परिवार के बैंक लॉकरों से 6.75 किलोग्राम सोने के आभूषण जब्त किए।

इसके अलावा, श्री मल्लिकार्जुन शिपिंग प्राइवेट लिमिटेड, सतीश सैल और अन्य सहित आरोपी संस्थाओं के लगभग 14.13 करोड़ रुपये वाले बैंक खाते भी जब्त कर लिए गए हैं। वहीं, जांचकर्ताओं ने आपत्तिजनक दस्तावेज, ईमेल और रिकॉर्ड भी बरामद किए।

सैल को मिलाकर कर्नाटक के दो कांग्रेस विधायकों को अब तक गिरफ्तार किया जा चुका है। इससे पहले चित्रदुर्ग के विधायक केसी वीरेंद्र को ईडी ने अवैध सट्टेबाजी से जुड़े धन शोधन मामले में गिरफ्तार किया था। उनके ठिकानों से 12 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी, सोना और चांदी बरामद हुई।

विरोध प्रदर्शन की आग में झुलसा नेपाल

विरोध प्रदर्शन की आग में झुलसा नेपाल
नेपाल में चल रहा विरोध प्रदर्शन इस समय दुनियाभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर सरकार की तरफ से लगाए गए बैन और सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े पैमाने पर शुरू हुए विरोध प्रदर्शन की वजह से नेपाल में राजनीतिक भूचाल आ गया। दरअसल नेपाल सरकार ने 4 सितंबर को फेसबुक, इंस्टाग्राम, वॉट्सऐप, यूट्यूब, और एक्स (ट्विटर) समेत 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगा दिया। सरकार का तर्क था कि ये प्लेटफॉर्म्स देश में संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में पंजीकरण कराने में विफल रहे। हालांकि देश की जनता ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला और सरकारी भ्रष्टाचार को छिपाने की कोशिश माना। ऐसे में 8 सितंबर को ‘हामी नेपाल’ नाम के एक एनजीओ द्वारा विरोध प्रदर्शन की शुरुआत हुई।

विरोध प्रदर्शन की आग में झुलसा नेपाल
प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस, वॉटर कैनन, रबर बुलेट्स, और लाइव एमुनिशन का इस्तेमाल किया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस हिंसा में 20 लोगों की मौत हो गई। सरकार को कई जगह कर्फ्यू लगाना पड़ा। स्थिति को बिगड़ता देखकर सरकार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगाए बैन के फैसले को वापस लेना पड़ा। लेकिन इस फैसले से भी विरोध प्रदर्शन की आग शांत नहीं हुई और इसमें नेपाल झुलस गया।

दुनिया के टॉप 2 बल्लेबाज बने अभिषेक और तिलक वर्मा

दुनिया के टॉप 2 बल्लेबाज बने अभिषेक और तिलक वर्मा
इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर वनडे गेंदबाजों की रैंकिंग में तीसरे पायदान पर पहुंच गए हैं। जोफ्रा आर्चर ने हाल ही में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू सीरीज में शानदार प्रदर्शन किया था। हालांकि, सीरीज में मेजबान टीम को 1-2 से हार का सामना करना पड़ा। जोफ्रा आर्चर ने वनडे गेंदबाजों की रैंकिंग में 16 पायदान की छलांग लगाई है। उन्होंने साउथ अफ्रीका के खिलाफ सीरीज में कुल आठ विकेट लिए। इस दौरान साउथेम्प्टन में 18 रन देकर चार विकेट हासिल करना भी शामिल है।

केशव महाराज नंबर वन
इस लिस्ट में साउथ अफ्रीका के केशव महाराज शीर्ष पर हैं। वहीं, इंग्लैंड का यह दाएं हाथ का तेज गेंदबाज उनसे सिर्फ 26 रेटिंग अंक पीछे है। साउथ अफ्रीकी स्पिनर केशव महाराज ने इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज में आठ विकेट लेकर रैंकिंग में अपना शीर्ष स्थान बरकरार रखा है। आर्चर के साथी आदिल रशीद ने वनडे गेंदबाजों की इस लिस्ट में सात स्थान की छलांग लगाई है। वह वनडे गेंदबाजों की रैंकिंग में आठवें पायदान पर पहुंच गए हैं।

बल्लेबाजी रैंकिंग की बात करें, तो इंग्लैंड की तिकड़ी ने धमाल मचाया है। रूट पांच पायदान ऊपर उठकर 19वें स्थान पर पहुंच गए हैं, जबकि जोस बटलर सात पायदान ऊपर 35वें स्थान पर आ गए हैं। इनके अलावा जैकब बेथेल ने 56 पायदान की छलांग लगाते हुए 65वें स्थान अपने नाम कर लिया है। मेजबान संयुक्त अरब अमीरात और अफगानिस्तान की टीमों के साथ टी20 त्रिकोणीय सीरीज में पाकिस्तान ने शानदार जीत दर्ज की थी, जिसके बाद कई खिलाड़ियों ने टी20 अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में सुधार किया है। पाकिस्तान के बाएं हाथ के स्पिनर सूफियान मुकीम ने फाइनल में दो विकेट हासिल किए थे। वह सात पायदान ऊपर चढ़कर 15वें स्थान पर पहुंच गए हैं।

टी20 बल्लेबाजों की रैंकिंग में अभिषेक शर्मा अभी भी नंबर पर कायम हैं। तिलक वर्मा दूसरे स्थान पर है। इंंग्लैंड के फिल साल्ट तीसरे स्थान पर हैं। इंग्लैंड के पूर्व कप्तान जोस बटलर चौथे स्थान पर है। ट्रेविस हेड पांचवें स्थान पर हैं तो टीम इंडिया के कप्तान सूर्यकुमार यादव छठे स्थान पर हैं।

पिछले 4 उपराष्ट्रपतियों में सबसे अमीर हैं सीपी राधाकृष्णन

पिछले 4 उपराष्ट्रपतियों में सबसे अमीर हैं सीपी राधाकृष्णन
9 सितंबर 2025 को हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन (सीपी राधाकृष्णन) को भारत का 15वां उपराष्ट्रपति चुना गया। उन्होंने विपक्षी गठबंधन इंडिया के उम्मीदवार जस्टिस (रिटायर्ड) बी। सुदर्शन रेड्डी को 452 वोटों से हराया, जबकि रेड्डी को 300 वोट मिले।

बता दें कि सीपी राधाकृष्णन पिछले पांच उपराष्ट्रपतियों में सबसे अमीर वाइस प्रेसिडेंट हैं। हलफनामे में उपलब्ध रिपोर्ट्स के अनुसार उनकी कुल संपत्ति लगभग 68 करोड़ रुपये है।

उपराष्ट्रपति के पास मौजूद चल संपत्ति (जैसे बैंक जमा, निवेश, गहने और व्यवसायिक हित) की कीमत करीब 7.31 करोड़ है। वहीं, अचल संपत्ति (जैसे कृषि भूमि, रियल एस्टेट और अन्य संपत्तियां) की कीमत लगभग 48 करोड़ रुपये से अधिक है। उनकी कुल दायित्व (ऋण) लगभग 2.36 करोड़ रुपये है।

जगदीप धनखड़ की संपत्ति
पूर्व राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के पास कुल संपत्ति लगभग 7.8 करोड़ रुपये है। इसमें चल संपत्ति की कीमत करीब 4.5 करोड़ रुपये है। वहीं, अचल संपत्ति की कीमत लगभग 3.3 करोड़ रुपये है। यह आंकड़े 2025 की हालिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं, जो उनके चुनावी हलफनामे और मीडिया अनुमानों से लिए गए हैं।

उनकी आय के स्रोतों में उपराष्ट्रपति के रूप में वेतन, कानूनी प्रैक्टिस, कृषि आय और पेंशन शामिल हैं। इस्तीफे के बाद भी उन्हें पेंशन और अन्य सुविधाएं मिलती रहेंगी।

वेंकैया नायडू की कुल संपत्ति
वेंकैया नायडू 2017 से 2022 तक भारत के 13वें उपराष्ट्रपति के रूप में कार्य किया। वेंकैया नायडू की कुल संपत्ति की सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नवीनतम जानकारी 2017-18 के वित्तीय वर्ष की है, जो उनके मंत्रालय के समय की घोषणा पर आधारित है।

उनकी संपत्ति मुख्य रूप से उनकी पत्नी उषा नायडू के नाम पर है। कुल अचल संपत्ति लगभग 8.80 करोड़ रुपये और चल संपत्ति लगभग 3.20 करोड़ रुपये है, जिससे कुल संपत्ति करीब 12 करोड़ रुपये बनती है। दायित्व घटाने के बाद शुद्ध संपत्ति लगभग 11.50 करोड़ रुपये है।

मोहम्मद हामिद अंसारी की संपत्ति
मोहम्मद हामिद अंसारी भारत के 12वें उपराष्ट्रपति थे, जिन्होंने 2007 से 2017 तक दो कार्यकालों में इस पद पर कार्य किया। मोहम्मद हामिद अंसारी की कुल संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अनुमान है कि उनकी कुल संपत्ति लगभग 8.5 करोड़ रुपये है।

भैरों सिंह शेखावत की संपत्ति
भैरों सिंह शेखावत ने 2002 से 2007 तक भारत के 11वें उपराष्ट्रपति के रूप में कार्य किया। भैरों सिंह शेखावत की कुल संपत्ति के बारे में उपलब्ध जानकारी साल 2002 के राज्या सभा चुनाव की घोषणा पर आधारित है, जब वे सांसद थे।

उनकी कुल संपत्ति लगभग 1.5 करोड़ रुपये (तत्कालीन मूल्यांकन के अनुसार) थी, जो मुख्य रूप से कृषि भूमि और आवासीय संपत्ति पर आधारित थी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बस्तर में 11 सितंबर को करेंगे छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्ट का शुभारंभ

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बस्तर में 11 सितंबर को करेंगे छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्ट का शुभारंभ
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 11 सितंबर को बस्तर में आयोजित होने वाले छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्ट का शुभारंभ करेंगे। यह आयोजन क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को नई गति देने के साथ-साथ अवसरों के नए द्वार खोलने वाला साबित होगा। उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं में बस्तर का विकास सदैव अग्रणी रहा है। इन्वेस्टर कनेक्ट इसी संकल्प को और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। समावेशी विकास की इस सोच के अंतर्गत उद्योग और निवेश को केवल आर्थिक गतिविधियों तक सीमित न रखकर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सशक्तिकरण जैसे मूलभूत क्षेत्रों से जोड़ा गया है, ताकि बस्तर का विकास केवल औद्योगिक प्रगति तक सीमित न रहकर सामाजिक उन्नति का आधार भी बन सके। इन्वेस्टर कनेक्ट न केवल बस्तर में नए उद्योगों और व्यापक रोजगार के अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि विकास की प्रत्येक उपलब्धि का लाभ सीधे स्थानीय समुदायों तक पहुँचे और वे इस प्रगति यात्रा के सक्रिय भागीदार बनें।

छत्तीसगढ़ में वन्य प्राणियों का संरक्षण और संवर्धन हमारी प्राथमिकता – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

छत्तीसगढ़ में वन्य प्राणियों का संरक्षण और संवर्धन हमारी प्राथमिकता – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या पिछले तीन वर्षों में दोगुनी हो गई है। वर्ष 2022 में जहां बाघों की संख्या 17 थी, वहीं अप्रैल 2025 के सर्वेक्षण में यह बढ़कर 35 हो गई। यह जानकारी आज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में सम्पन्न छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव कल्याण बोर्ड की 15वीं बैठक में दी गई।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बैठक में कहा कि छत्तीसगढ़ में वन्य प्राणियों का संरक्षण और संवर्धन हमारी प्राथमिकता है। हमारा राज्य वन संपदा और वन्य प्राणियों के मामले में अत्यंत समृद्ध है। इन्हें सुरक्षित और विकसित करने के लिए सरकार पूर्णतः प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य में बाघों की संख्या में तीन वर्षों के भीतर हुई दोगुनी वृद्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बाघों की संख्या 17 से बढ़कर 35 होना इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में संतोषजनक कार्य हुआ है। उन्होंने कहा कि अब हमें अन्य वन्यजीवों के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में भी ठोस प्रयास करने होंगे। छत्तीसगढ़ के कई इलाके ऐसे हैं जिन्हें वन्यजीव संरक्षण के माध्यम से विकसित किया जा सकता है। जशपुर जिले के नीमगांव में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं। यहां प्रवासी पक्षियों के संरक्षण और संवर्धन हेतु आवश्यक कार्य किए जाने की आवश्यकता है। इसी तरह अन्य क्षेत्रों की पहचान कर उनका भी विकास किया जाना चाहिए। इससे न केवल पर्यटन बढ़ेगा बल्कि रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

बोर्ड के उपाध्यक्ष एवं वनमंत्री केदार कश्यप ने अपने उद्बोधन में कहा कि राज्य में बाघों की संख्या के साथ-साथ अन्य वन्य प्राणियों के संरक्षण और संवर्धन में भी वृद्धि हुई है तथा उनके रहवासों में सुधार के प्रयास जारी हैं। आगे इसके और बेहतर परिणाम जनता के सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि आज पारित प्रस्ताव जनहित के महत्वपूर्ण कार्य हैं, जो शांति का वातावरण स्थापित करने में सहायक होंगे। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि वन्यजीवों एवं जैव विविधता को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे।

बोर्ड के सदस्य सचिव अरुण कुमार पांडेय, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) द्वारा विभागीय उपलब्धियों और एजेण्डा पर प्रस्तुतीकरण दिया गया। सदस्य सचिव ने बताया कि राज्य में सर्वाधिक बाघ अचानकमार टाइगर रिज़र्व में हैं। राज्य वन्यजीव बोर्ड की 14वीं बैठक में पारित निर्णय के परिप्रेक्ष्य में राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण, नई दिल्ली द्वारा उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व और गुरु घासीदास तमोर पिंगला टाइगर रिज़र्व में मध्यप्रदेश से बाघ एवं बाघिन के ट्रांसलोकेशन की अनुमति मिल चुकी है। शीघ्र ही ट्रांसलोकेशन की कार्यवाही पूर्ण की जाएगी।

उन्होंने बताया कि राजकीय पशु वनभैंसा की संख्या बढ़ाने के लिए विभाग द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। असम से लाए गए वनभैंसों की संख्या में वृद्धि हो रही है। इसी प्रकार राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना के संरक्षण हेतु भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। “मैना मित्र” नामक समूह का गठन किया गया है, जो मैना के संरक्षण और उनके रहवास की निगरानी करता है। टाइगर रिज़र्व और कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए अन्य सुविधाएं विस्तारित की जा रही हैं, जिससे समीपवर्ती ग्रामवासियों को रोजगार मिलेगा और वन्यजीव संरक्षण में भी सहयोग प्राप्त होगा।

बैठक में वन्यजीव संरक्षण और संवर्धन हेतु गश्ती मार्ग निर्माण तथा संरक्षित क्षेत्र के युक्तियुक्तकरण के प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व, गरियाबंद अंतर्गत धवलपुर से कुकरार तक सड़क निर्माण कार्य; मिशन अमृत योजना के तहत पाइपलाइन विस्तार कार्य; तथा कवर्धा वनमंडल में इंटरनेट सुविधा के लिए ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने की अनुमति प्रदान की गई। इससे वन क्षेत्रों में निवासरत ग्रामीणों को मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी, शासकीय योजनाओं के अंतर्गत लाभार्थियों को डिजिटल भुगतान की सुविधा मिलेगी, ग्रामीणों के सामाजिक-आर्थिक विकास में सुधार होगा और क्षेत्रीय अमलों के लिए सूचना संप्रेषण मजबूत होगा।

बैठक में राज्य वन्यजीव कल्याण बोर्ड के सदस्यों ने वन्यजीव संरक्षण के लिए अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिए। बैठक में विधायक धर्मजीत सिंह, विधायक चैतराम अटामी, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, अपर मुख्य सचिव वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ऋचा शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख व्ही. श्रीनिवास राव, सचिव वन अमरनाथ प्रसाद तथा अन्य माननीय सदस्य और गैर-शासकीय संस्थाओं के प्रख्यात वन्यजीव विशेषज्ञ उपस्थित थे।

अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना से निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए खुला बेहतर शिक्षा का रास्ता – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना से निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए खुला बेहतर शिक्षा का रास्ता – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में श्रम विभाग द्वारा श्रमिक बच्चों के लिए संचालित “अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना” का शुभारंभ किया। उन्होंने चयनित बच्चों का सम्मान करते हुए उन्हें शुभकामनाएँ दीं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना से निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा का मार्ग प्रशस्त हुआ है। मुख्यमंत्री साय ने घोषणा की कि अगले शैक्षणिक सत्र से इस योजना का लाभ 200 बच्चों को मिलेगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि श्रमिक अनेक समाज के हित के लिए कार्य करता है, परंतु अपने परिवार के लिए बहुत कम समय, संसाधन, ऊर्जा और ध्यान दे पाता है। उनके भी सपने होते हैं कि उनके घर के बच्चे पढ़-लिखकर बेहतर जीवन जिएँ, ताकि भविष्य में मजदूर का बेटा-बेटी केवल मजदूरी न करे, बल्कि समाज के साथ कदम से कदम मिलाकर आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर, इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, वकील और राजनेता बने।इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गारंटी के अंतर्गत श्रमिक बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हमारी सरकार ने छत्तीसगढ़ में “अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना” प्रारंभ की है। इसके तहत प्रदेश के श्रमिकों के बच्चों को कक्षा छठवीं से बारहवीं तक श्रेष्ठ आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा प्राप्त होगी। इनका पूरा खर्च श्रम विभाग द्वारा वहन किया जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से कार्यक्रम के दौरान निर्माण श्रमिकों एवं उनके बच्चों ने मिलकर योजना का शुभारंभ पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना से अब हम अपने बच्चों के भविष्य को लेकर निश्चिंत हो गए हैं। इस योजना के माध्यम से बच्चों को अच्छी शिक्षा और भविष्य सँवारने का सुनहरा अवसर मिल गया है। हमारे लिए यह एक सपना था, जो अब पूरा हो गया है।

मुख्यमंत्री साय ने श्रमिकों से चर्चा करते हुए कहा कि निर्माण श्रमिकों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह योजना लागू की गई है। योजना के तहत चालू वर्ष में 100 निर्माण श्रमिकों के बच्चों को 14 निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। इन विद्यालयों में सीबीएसई और आईसीएसई पाठ्यक्रम के माध्यम से बच्चों की पढ़ाई कराई जाएगी।

श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज श्रम विभाग के सहयोग से श्रमिक परिवारों के 100 बच्चों का दाखिला प्रदेश के 14 निजी आवासीय विद्यालयों में कराया गया है। सरकार की सोच है कि श्रमिक का बच्चा केवल श्रमिक न रहकर अधिकारी बने और देश की सेवा करे। उन्होंने बताया कि श्रम विभाग द्वारा श्रमिकों के बच्चों के लिए निःशुल्क कोचिंग योजना भी संचालित की जा रही है, जिसके निश्चित ही दूरगामी परिणाम सामने आएँगे।

श्रम मंत्री देवांगन ने आगे कहा कि श्रम विभाग के अंतर्गत तीन मंडल संचालित हैं, जिनमें लगभग 70 से अधिक योजनाएँ चलाई जा रही हैं। राज्य सरकार द्वारा पिछले 20 माह में लगभग 600 करोड़ रुपये का लाभ श्रमिकों को डीबीटी के माध्यम से पहुँचाया गया है। उन्होंने योजना के तहत चयनित बच्चों को शुभकामनाएँ देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह ने कहा कि श्रद्धेय अटल जी के संकल्पों को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सुशासन की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। राज्य में लगभग 30 लाख से अधिक पंजीकृत श्रमिक हैं, जिनके बच्चे अच्छे विद्यालयों में नहीं पढ़ पाते थे। उनके लिए “अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना” किसी वरदान से कम नहीं है। इस योजना से श्रमिकों के बच्चों को बेहतर विद्यालयों में पढ़ने का अवसर मिलेगा। उन्होंने चयनित बच्चों एवं अभिभावकों को शुभकामनाएँ दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

इस मौके पर श्रम विभाग के सचिव हिम शिखर गुप्ता ने स्वागत भाषण दिया। इस अवसर पर संयुक्त सचिव फरिहा आलम, श्रम कल्याण मंडल के सचिव गिरीश रामटेके सहित बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे एवं उनके अभिभावक उपस्थित थे।

मप्र में उच्च शिक्षा के बुरे हाल:हाईकोर्ट से विधानसभा तक बैकफुट पर सरकार

मप्र में उच्च शिक्षा के बुरे हाल:हाईकोर्ट से विधानसभा तक बैकफुट पर सरकार
रवि अवस्थी,भोपाल।
मध्य प्रदेश के पांच विश्वविद्यालयों में एक भी असिस्टेंट प्रोफेसर नहीं,बाकी में इनके 70 फीसद पद खाली,93 विषयों के मास्टर ही नहीं हैं। हाईकोर्ट हो या विधानसभा विभाग से जुड़े अधिकतर मामलों में सरकार को बैकफुट पर आना पड़ रहा है।

जूनियर को बनाया,प्राचार्य,कोर्ट ने लगाई फटकार

मप्र हाईकोर्ट ने दो दिन पहले ही उच्च शिक्षा विभाग के उस फैसले को अमान्य कर दिया गया,जिसके तहत प्रदेश के 72 प्रधानमंत्री एक्सीलेंस कॉलेजों में जूनियर शिक्षकों को प्राचार्य बना दिया गया था। इस फैसले के खिलाफ विभाग हाईकोर्ट की डबल बैंच में अपील की तैयारी कर रहा है।

पक्ष रखने में कमी रही हो:ओएसडी
विभाग के ओएसडी राकेश श्रीवास्तव ने कहा कि प्रभारी प्राचार्यों की पदस्थापना को लेकर साल 2024 में बनी नीति को कोर्ट में मान्य हुई। इसी के तहत प्रभारी प्राचार्य पदस्थ किए गए। न्यायालय के ताजा फैसले को लेकर उन्होंने कहा,हो सकता है विभाग का पक्ष मजबूती से रख पाने में कोई कमी रही हो।

बहरहाल,इससे पहले भी विभाग को गुना के याचिकाकर्ता प्रो.बृजमोहन तिवारी के प्रकरण में हार का सामना करना पड़ा। याचिका क्रमांक 1187/25 को लेकर मंगलवार को आया हाईकोर्ट का फैसला भी विभाग की नीतियों के खिलाफ है। यानी विभाग को उच्च न्यायालय में दायर प्रकरणों में धड़ाधड़ हार का सामना करना पड़ रहा है।

विधानसभा में भी बैकफुट पर सरकार

राज्य विधानसभा में भी उच्च शिक्षा विभाग को लेकर काफी तीखे सवाल सामने आ रहे हैं। इनमें अधिकांश में सरकार का जवाब या तो गोलमोल होते है या गलत जानकारी देने के आरोप लगते हैं। कुछ मामलों में तो विभागीय मंत्री को टाइपिंग की मिस्टेक बताकर पल्ला झाड़ना पड़ा। बीते साल 16 दिसंबर को तो हद हो गई। एक सवाल के जवाब में विभागीय मंत्री इंदर सिंह परमार को कांग्रेस विधायक जयवर्धन के सवाल के जवाब में कहना पड़ा कि उनके पूर्व के प्रश्न में राघौगढ़ की जगह किसी और कॉलेज की जानकारी दे दी गई थी। इस पर कांग्रेस विधायक ने मंत्री से नियमानुसार खेद जताने को कहा।बहरहाल,बात आई गई हो गई। पिछले मानसून सत्र में ही कुछ सवालों की जानकारी में लिपिकीय त्रुटि स्वीकार की।

विभाग मुख्यालय में ओएसडी की भरमार

उच्च शिक्षा विभाग में मैदानीस्तर पर कुर्सियां खाली हैं। दूसरी ओर पढ़ाने से कतराने वाले कई शिक्षक जोड़—तोड़कर मुख्यालय में पदस्थ हैं। इनके अलावा प्रतिनियुक्ति पर सेवाएं देने वालों की कमी नहीं है। मुख्यालय में ओएसडी के सिर्फ चार पद स्वीकृत हैं,लेकिन इनके मुकाबले एक दर्जन अधिकारी इस पदनाम के साथ काम कर रहे हैं।
अर्थात, जो प्रतिनियुक्ति पर आया या अटैच हुआ, वह विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी बन गया। दूसरी ओर मुख्यालय में ही अपर संचालक वित्त का एकमात्र पद,संयुक्त संचालक वित्त के तीनों पद,उप संचालक वित्त को एक मात्र पद,अतिरिक्त संचालक के सातों पद,सहायक संचालक के 12 में से 11 पद का रिक्त है। विभाग में जमे ओएसडी इन पदों के लिए भी सेवाएं दे रहे हैं।

इन विश्वविद्यालयों में नहीं हैं असिस्टेंट प्रोफेसर

राज्य विधानसभा के पिछले मानसून सत्र में विभाग को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई।विधायक संजय उइके के सवाल के जवाब में ​मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि प्रदेश के पांच सरकारी विश्वविद्यालयों में एक भी सहायक प्राध्यापक नहीं है। ये वि​श्वविद्यालय हैं—राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय छिंदवाड़ा, महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय छतरपुर,रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय सागर,क्रांतिवीर तात्या टोपे विश्वविद्यालय गुना व क्रांति सूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय खरगोन शामिल नहीं है।

93 कोर्स पढ़ाने वाले शिक्षक ही नहीं
मंत्री परमार ने विधानसभा में बताया कि मध्य प्रदेश के 17 सरकार विश्वविद्यालयों में भी शिक्षकों की कमी है। यहां स्वीकृत 1076 पदों में से सिर्फ 276 पदों पर असिस्टेंट प्रोफेसर ही सेवाएं दे रहे हैं।
इसी जवाब में कहा गया कि प्रदेश के सरकारी वि​श्वविद्यालयों में 93 पाठ्यक्रम ऐसे हैं जिन्हें पढ़ाने वाले सहायक प्राध्यापक फिलहाल नहीं हैं। परमार ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न कॉलेजों में वैकल्पिक व्यवस्था के बतौर अतिथि विद्वानों की नियुक्तियां की गई हैं।

मध्य प्रदेश में उच्च शिक्षा अतिथि विद्वानों के भरोसे है।मुख्यालय के अनेक खाली पदों पर जोड़—तोड़ वाले काबिज हैं। जिनका ना शिक्षा से ज्यादा सरोकार है,ना विभाग की साख से।

नए वाहनों पर “सर्टिफ़िकेट ऑफ़ डिपॉजिट” से मोटरयान कर में 50 प्रतिशत की छूट दिये जाने का निर्णय-मुख्यमंत्री डॉ. यादव

नए वाहनों पर “सर्टिफ़िकेट ऑफ़ डिपॉजिट” से मोटरयान कर में 50 प्रतिशत की छूट दिये जाने का निर्णय-मुख्यमंत्री डॉ. यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार कोमंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा पंजीकृत वाहन स्क्रेपिंग सुविधा में स्क्रेपिंग को बढ़ावा देने के लिए बीएस-I और पूर्ववती तथा बीएस-॥ व्यापक उत्सर्जन मानक मानदंडों वाले वाहनों को जारी “सर्टिफ़िकेट ऑफ़ डिपॉजिट” के विरुद्ध पंजीकृत किये जाने वाले नए गैर परिवहन यानों तथा नए परिवहन वाहनों पर 50 प्रतिशत की मोटरयान कर में छूट प्रदान किये जाने की स्वीकृति शर्तों के अधीन प्रदान की गयी है।

स्वीकृति अनुसार समस्त यान जो व्यापक उत्सर्जन मानक भारत चरण 1 (बीएस-1) मानक और पूर्ववती व्यापक उत्सर्जन मानक मानदंडों अनुसार विनिर्मित किये गए है तथा मध्यम मालयान/भारी मालयान/ मध्यम यात्री मोटरयान/भारी पात्री मोटरयान जो व्यापक उत्सर्जन मानक भारत चरण 2 (बीएस-।।) मानदंडों के अनुसार विनिर्मित किये गए हैं, को इसके तहत छूट प्रदान की गयी हैं।

प्रदेश में वर्ष 2024-25 में 1563 नए वाहन पंजीकरण पर लगभग 17 करोड़ 5 लाख रूपये की छूट प्रदान की गई है। वर्तमान में BS-1 एवं BS-II श्रेणी के लगभग 99 हजार मोटरयान ऑनरोड है। इनको मोटरयान कर में 50% छूट दिए जाने पर 100 करोड़ रूपये का वित्तीय भार आएगा। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा पंजीकृत वाहन स्क्रेपिंग सुविधा में स्क्रेपिंग को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश को 200 करोड़ रुपये की विशेष सहायता प्राप्त होगी। भारत में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए भारत स्टेज (बीएस-1) उत्सर्जन मानदण्डों को सबसे पहले अप्रैल 2000 में लाया गया था।

स्वीकृति अनुसार जिस व्यक्ति के नाम से तत्समय “Certificate of Deposih धारित होगा उसी व्यक्ति के नाम पर नया वाहन क्रय किये जाने पर मोटर यान कर में छूट प्रदान की जाएगी। वाहन स्वामी दवारा नया वाहन खरीदने पर प्रोत्साहन और लाभ प्राप्त करने के लिए, “Certificate of Deposit एक आवश्यक और पर्याप्त दस्तावेज होगा, इस प्रमाण-पत्र की वैधता जारी होने की तिथि से 3 वर्ष होगी।

“सर्टिफ़िकेट ऑफ़ डिपॉज़िट” इलेक्ट्रॉनिक रूप से विनिमय योग्य होगा। प्रत्येक नए मालिक को “Certificate of Deposit” का हस्तांतरण फॉर्म 2 डी के अनुसार ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर किया जाएगा। “Certificate of Deposit” का एक बार उपयोग हो जाने पर, उस क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय या डीलर दवारा उसे वाहन डेटाबेस में “रद्द” के रूप में चिह्नित कर दिया जाएगा, जिसके द्वारा उक्त प्रमाण-पत्र के धारक को लाभ प्रदान किया गया है।

मोटरयान कर में छूट तभी प्रदान की जाएगी, जब नया वाहन मध्यप्रदेश राज्य में पंजीकृत किसी आर.वी.एस.एफ द्वारा ही जारी “Cerificate of Deposit के विरुद्ध पंजीकृत किया जाये। यदि “Certificate of Deposit” मध्यप्रदेश राज्य के अलावा किसी अन्य राज्य में स्थित आर.वी.एस.एफ. दवारा जारी किया गया हो तो मोटरयान कर में छूट प्रदान नहीं की जाएगी।

जिस श्रेणी का वाहन स्क्रैप किया गया है उसी श्रेणी का नया वाहन क्रय करने पर मोटर यान कर में छूट प्रदान की जाएगी। जीवनकाल कर जमा किये जाने की स्थिति में गैर-परिवहन/परिवहन यानों पर 50% मोटरयान कर में एकमुश्त छूट प्रदान की जाएगी। जिन वाहनों पर मासिक/त्रैमासिक/वार्षिक आधार पर कर उद्ग्रहित किया जाता है, उन्हें मासिक/त्रैमासिक/वार्षिक कर में 8 वर्ष तक 50% की छूट प्रदान की जाएगी।

मध्यप्रदेश शासन, परिवहन विभाग द्वारा 8 सितंबर 2022 को जारी अधिसूचना के अंतर्गत प्रदाय की जाने वाली मोटरयान कर की छूट उन वाहनों पर लागू नहीं होगी, जिन्हें इस अधिसूचना के अंतर्गत मोटर यान कर छूट प्रदान की गई है।

मध्यप्रदेश नगर पालिका (संशोधन) अध्यादेश 2025 की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश की नगर पालिका परिषद नगर परिषदों के अध्यक्ष पद का निर्वाचन आगामी आम-निर्वाचन में प्रत्यक्ष प्रणाली से सीधे मतदाताओं द्वारा कराये जाने के लिए मध्यप्रदेश नगरपालिका (संशोधन) अध्यादेश 2025 लाये जाने की स्वीकृति प्रदान की गई।

मध्यप्रदेश में नगरीय निकायों के अध्यक्ष पद का निर्वाचन प्रत्यक्ष प्रणाली से सीधे मतदाताओं द्वारा वर्ष 1999 से 2014 तक लगातार किया जाता रहा है। कोविड महामारी के आ जाने से वर्ष 2019 में निर्वाचन नहीं हो सके। इसके बाद वर्ष 2022 के नगरीय निकाय चुनाव में अध्यक्ष पद का निर्वाचन अप्रत्यक्ष प्रणाली से किया गया। वर्ष 2027 के नगरीय निकायों में अध्यक्ष पद का निर्वाचन प्रत्यक्ष प्रणाली से सीधे मतदाताओं द्वारा किया जाना है। उपरोक्त स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 की संबंधित धाराओं में संशोधन के लिए मध्यप्रदेश नगरपालिका (संशोधन) अध्यादेश 2025 लाये जाने की स्वीकृति प्रदान की गई।

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