मुख्यमंत्री ने पंडित माखनलाल चतुर्वेदी की प्रतिमा का किया अनावरण

मुख्यमंत्री ने पंडित माखनलाल चतुर्वेदी की प्रतिमा का किया अनावरण
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पत्रकारिता, सम्प्रेषण का ही स्वरूप है और प्रत्येक युग में सम्प्रेषण कला का विशेष महत्व रहा है। रामायण काल में हुनमान जी के संवाद हों या महाभारत काल के यक्ष प्रश्न, दोनों में हुए सम्प्रेषण ने इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सम्प्रेषण और पत्रकारिता में किसी भी घटना की प्रभावशीलता को व्यापक या सूक्ष्म स्वरूप देने की क्षमा विद्यमान है। वर्तमान और आने वाले समय में पत्रकारिता विधा में दक्ष हो रहे विद्यार्थियों पर यह महत्वपूर्ण दायित्व है कि वे सूचना सम्प्रेषण के माध्यम से समाज के नैतिक मूल्यों और लोकतांत्रिक व्यवस्था का बेहतर स्वास्थ्य बनाए रखने के‍लिए सदैव सजग, सक्रिय और तत्पर रहें। सत्य के लिए संघर्षशीलता से ही पत्रकारिता का समृद्ध स्वरूप जीवंत रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के वर्ष 2025-26 के सत्रारंभ तथा नवागत विद्यार्थियों के प्रबोधन कार्यक्रम “अभ्युदय 2025” को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रोचार के बीच दीप प्रज्‍ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

पंडित माखनलाल चतुर्वेदी के जीवन के गौरवशाली पक्षों को आगे लाना जरूरी
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पत्रकारिता के क्षेत्र में ‘अभ्युदय’ का अर्थ मात्र आरंभ नहीं, बल्कि निरंतर जागरूकता, सत्य की खोज और समाज को नई दिशा देने वाले उत्तरदायित्व की यात्रा है। नारद जी को पत्रकारिता का आद्य प्रवर्तक माना जाता है। पत्रकारिता के क्षेत्र में माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय की पूरे देश में विशिष्ट पहचान है। यह गौरव का विषय है कि दादा माखनलाल का जन्म मध्यप्रदेश के बबाई नगर में हुआ और उन्होंने खंडवा को अपनी कर्मभूमि बनाया। उन्होंने पत्रकारिता के माध्यम से समाज को अंग्रेजों के अत्याचारों के खिलाफ एकजुट करने के साथ सामाजिक कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पंडित माखनलाल चतुर्वेदी ने हिंदी भाषा को पुनर्प्रतिष्ठित करने का महत्वपूर्ण अभियान चलाया। उन्होंने गौमाता और गौशाला के संरक्षण के लिए सागर में ब्रिटिश हुकूमत के सामने आंदोलन कर मोर्चा खोल दिया था। पंडित माखनलाल चतुर्वेदी और श्रद्धेय माधवराव सप्रे ने अपने पत्रकारीय कार्यों से हिंदी भाषा को समृद्ध भी किया। विश्वविद्यालय के माध्यम से पंडित माखनलाल चतुर्वेदी के जीवन के विविध गौरवशाली पक्षों को आगे लाने के लिए गतिविधियां संचालित की जाएंगी।

भारतीय ज्ञान परम्परा के साथ ही देश की संस्कृति के प्रति भी संवदेनशील है राज्य सरकार
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरू को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने का माध्यम माना गया है। गुरू की इस गरिमा को स्थापित करने के उद्देश्य से ही प्रदेश के विश्वविद्यालयों में हमने कुलपति के स्थान पर ‘कुलगुरु’ शब्द के प्रयोग की परंपरा प्रारंभ की। यह हमारी शिक्षा परंपरा में गुरु को सर्वोच्च स्थान देने का प्रतीक है। राज्य सरकार भारतीय ज्ञान परम्परा के साथ ही देश की संस्कृति के प्रति भी संवदेनशील है। हमारे प्रत्येक त्यौहार में कोई न कोई संदेश निहित है, जनसामान्य इन संदेशों में विद्यमान अर्थ को समझें, इस उद्देश्य से राज्य सरकार ने सभी त्यौहार धूमधाम से मनाने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में विजयादशमी को मात्र रावण दहन तक सीमित न रखते हुए इस महत्वपूर्ण त्यौहार पर शस्त्रपूजन भी आरंभ किया गया है।

भाषा, पत्रकारिता की समझ और समाचार लेखन में दक्षता के लिए प्रिंट मीडिया का अनुभव आवश्यक
प्रख्यात कवि कुमार विश्वास ने कहा कि इतिहास साक्षी है कि जब-जब देश को आवश्यकता हुई, युवा पीढ़ी ने देश की बेहतरी के लिए संघर्ष किया। उन्होंने चाणक्य की सम्प्रेषण कला का उल्लेख करते हुए कहा कि सामान्य नागरिक, सामान्य हितचिंतक और परस्पर संस्कृतियों का सम्मान करते हुए किया गया सम्प्रेषण सर्वाधिक प्रभावी और ग्राह्य होता है। उन्होंने हनुमानजी और अंगद को सम्प्रेषण कला का विशेषज्ञ बताया। राष्ट्रीय समरसता के सांस्कृतिक पृष्ठ को गढ़ने वाले आचार्य, दादा माखनलाल चतुर्वेदी के नाम से स्थापित यह विश्वविद्यालय, सम्प्रेषण विधा की शिक्षा में इस भूमिका का श्रेष्ठतम स्वरूप में निर्वहन कर रहा है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपने लक्ष्य के संबंध में स्पष्टता रखें, अपनी विधा में दक्ष हों और तटस्थता तथा ईमानदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने सोशल मीडिया के दौर में विश्वसनीयता के संकट का जिक्र करते हुए कहा कि युवा पत्रकारों को अपनी भाषा, पत्रकारिता की समझ और समाचार लेखन में दक्षता प्राप्त करने के लिए कम से कम तीन साल प्रिंट मीडिया में अवश्य कार्य करना चाहिए। श्री विश्वास ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा विश्वविद्यालयों में कुलपति को कुलगुरू का संबोधन प्रदान करने की पहल की सराहना की। उन्होंने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

विश्वविद्यालय के कुलगुरू विजय मनोहर तिवारी ने अभ्युदय कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए विश्वविद्यालय की प्राथमिकताओं तथा आरंभ किए गए नवाचारों की जानकारी दी। कार्यक्रम में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर, भोपाल की महापौर मालती राय, विधायक रामेश्वर शर्मा, विधायक भगवानदास सबनानी, विधायक उमाकांत शर्मा सहित विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थीं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लगाया कृष्णवट का पौधा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने परिसर में स्थापित दादा माखनलाल चतुर्वेदी की प्रतिमा का अनावरण किया और विश्वविद्यालय के सत्रारंभ अवसर पर पौधरोपण अभियान के अंतर्गत का पौधा रोपा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंच पर मां सरस्वती, भारत माता और दादा माखनलाल चतुर्वेदी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। साथ ही 100 साल : 100 सुर्खियां-स्वाधीनता से पहले और स्वाधीनता के बाद की देश की महत्वपूर्ण घटनाओं पर विभिन्न समाचार पत्रों के फ्रंट पेज कवरेज पर केंद्रित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को कर्मवीर समाचार पत्र का चित्र और विश्वविद्यालय द्वारा विकसित साहित्य भेंटकर विश्वविद्यालय के कुलगुरू डॉ. विजय मनोहर तिवारी ने स्वागत किया। उन्हें जनजातीय चित्रकला से निर्मित चित्र भी भेंट किया गया। प्रख्यात कवि श्री कुमार विश्वास और सचिव जनसंपर्क डॉ. सुदाम खाड़े ने भी पौधरोपण किया।

सम्पूर्णता अभियान से आकांक्षी जिलों और विकासखंडों के रहवासियों के जीवन में आया सकारात्मक बदलाव : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

सम्पूर्णता अभियान से आकांक्षी जिलों और विकासखंडों के रहवासियों के जीवन में आया सकारात्मक बदलाव : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और प्रतिबद्धता के परिणाम स्वरूप देश ने विकास की नई गति प्राप्त की है। पिछड़े जिलों‍ और विकासखंडों को आकांक्षी रूप में चिन्हित कर विकास के लिए समन्वित प्रयास करना, इस दिशा में उठाया गया प्रभावी कदम है। आज आयोजित सम्पूर्णता अभियान सम्मान समारोह, जिला और विकासखंड स्तर पर स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, आधारभूत संरचना और सुशासन में आए सकारात्मक परिवर्तन का सशक्त उदाहरण है। इन जिलों और विकासखंडों के रहवासियों के जीवन और जीवन जीने की परिस्थितियों में आया बदलाव अभियान की सफलता को अभिव्यक्त करता है। सम्पूर्णता अभियान से आकांक्षी जिलों और विकासखंडों में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य परीक्षण और उन्हें पोषक भोजन की उपलब्धता, बच्चों के टीकाकरण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण, स्कूलों में बिजली की उपलब्धता और समय पर पाठ्य पुस्तक वितरण जैसी गतिविधियों में सुधार हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को राज्य स्तरीय सम्पूर्णता अभियान सम्मान समारोह के अंतर्गत कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्पूर्णता अभियान में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रदेश के आकांक्षी जिलों और विकासखंडों के अधिकारियों को उनकी टीम सहित सम्मानित किया।

राज्य नीति आयोग की कॉफी टेबल बुक का विमोचन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने राज्य नीति आयोग द्वारा प्रदेश में संचालित विकास गतिविधियों और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों पर विकसित कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया। कार्यक्रम में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप, खेल एवं युवा कल्याण तथा सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर उपस्थित रही। मुख्य सचिव अनुराग जैन, नीति आयोग भारत सरकार के अपर सचिव रोहित कुमार और सदस्य प्रोफेसर रमेशचंद्र ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।

राज्य सरकार प्रत्येक पात्र हितग्राही को सभी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए प्रतिबद्ध
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार सभी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र हितग्राही को दिलाने के लिए प्रयासरत हैं। प्रदेश में शिक्षा, कृषि, उद्योग, रोजगार, ऊर्जा सहित सभी क्षेत्रों में लक्ष्य निर्धारित कर कार्य किये जा रहे है। प्रदेश में अब 30 मेडिकल कॉलेज हो चुके हैं, इनमें से 10 पिछले सवा साल में शुरू किए गए। सिंचाई का रकबा बढ़ाने के लिए नदी जोड़ो परियोजना की शुरुआत की गई है। सवा साल में साढ़े सात लाख हेक्टेयर सिंचाई रकबा बढ़ा है। प्रदेश में खेती के साथ मत्स्य पालन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश में किसानों के लिए कृषि मेले, निवेश और उद्योग बढ़ाने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टर समिट और विभिन्न सेक्टर्स की रीजनल इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव आयोजित की गई हैं। उन्होंने कहा कि जो कलेक्टर और अन्य अधिकारी बेहतर कार्य करेंगे उन्हें सम्मानित किया जाएगा। कार्य में लापरवाही को राज्य सरकार किसी भी स्थिति में अनदेखा नहीं करेगी।

सम्पूर्णता अभियान ने शासन-प्रशासन की कार्य संस्कृति को दी नई दिशा : मुख्य सचिव जैन
मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि सम्पूर्णता अभियान ने शासन-प्रशासन की कार्य संस्कृति को नई दिशा दी है। डेटा आधारित मूल्यांकन और स्कोरिंग प्रणाली तथा प्राथमिकताओं की स्पष्टता व पारदर्शिता से प्रशासनिक दक्षता और जन सेवा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। इससे जिलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को भी प्रोत्साहन मिला है। नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद्र ने कहा कि प्रदेश के समुख बड़ी चुनौती थी, परंतु प्रदेश के अधिकारियों के समर्पित प्रयासों से लक्षित संकेतों में सम्पूर्णता प्राप्त करना संभव हुआ है। रमेश चंद्र ने स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े संकेतकों में मध्यप्रदेश में हुए कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड कार्यक्रम में हुए बेहतर कार्य से कृषि क्षेत्र में न केवल उत्पादकता सुधरेगी अपितु उपज की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। उन्होंने आकांक्षी कृषि जिलों की अवधारणा का उल्लेख करते हुए इसे कृषि विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। नीति आयोग के अपर सचिव श्री रोहित कुमार ने कहा कि सम्पूर्णता कार्यक्रम में स्थानीय प्रशासन और समुदाय की सक्रिय भागीदारी से सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं। मध्यप्रदेश द्वारा इस क्षेत्र में अर्जित उपलब्धियां अन्य राज्यों के लिए उदाहरण हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर सहित जिले की टीम को किया सम्मानित
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्मान समारोह के अंतर्गत जिला बड़वानी और विकासखंड पाटी के लिए तत्कालीन कलेक्टर राहुल फटिंग, जिला दमोह और विकासखंड तेंदूखेड़ा के लिए कलेक्टर सुधीर कोचर, जिला धार तथा विकासखंड तिरला के लिए कलेक्टर प्रियंक मिश्रा, जिला खंडवा और विकासखंड छैगांव माखन के लिए कलेक्टर ऋषभ गुप्ता और तत्कालीन कलेक्टर अनूप कुमार सिंह, जिला निवाड़ी और विकासखंड पृथ्वीपुर के लिए कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ और तत्कालीन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा, जिला टीकमगढ़ और विकासखंड बलदेवगढ़ के लिए कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय और तत्कालीन कलेक्टर अवधेश शर्मा, जिला विदिशा और विकासखंड बासौदा के लिए कलेक्टर अंशुल गुप्ता (प्रशिक्षण पर), तत्कालीन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह, जिला झाबुआ और विकासखंड थांदला, मेघनगर, रामा व राणापुर के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत जितेन्द्र सिंह चौहान, जिला रतलाम और विकासखंड बाजना के लिए कलेक्टर राजेश बाथम, जिला अनूपपुर और विकासखंड पुष्पराजगढ़ के लिए कलेक्टर हर्षुल पंचोली और जिला शहडोल और विकासखंड पाली के अधिकारियों को सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिला डिण्डौरी और आकांक्षी विकासखंड करंजिया, मेहेंदवानी व बजाग के लिए संयुक्त कलेक्टर भारती मेरावी तथा तत्कालीन कलेक्टर हर्ष सिंह, जिला खरगोन और विकासखंड भगवानपुर तथा झिरन्या के लिए कलेक्टर भाव्या मित्तल और तत्कालीन कलेक्टर कर्मवीर शर्मा, जिला राजगढ़ और विकासखंड जीरापुर के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अर्पित गुप्ता, जिला श्योपुर और विकासखंड श्योपुर, कराहल तथा विजयपुर के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अतेन्द्र सिंह गुर्जर तथा तत्कालीन कलेक्टर लोकेश कुमार जांगीड़, जिला अलीराजपुर और विकासखंड कट्ठीवाड़ा के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत प्रखर सिंह, जिला छतरपुर और विकासखंड बक्सवाहा के लिए सीईओ जिला पंचायत तपस्या परिहार तथा तत्कालीन कलेक्टर संदीप जीआरजी, जिला पन्ना और विकासखंड अजयगढ़ के लिए सीईओ जिला पंचायत उमराव सिंह, जिला सतना और विकासखंड मझगवां के लिए सीईओ जिला पंचायत संजना जैन तथा तत्कालीन कलेक्टर अनुराग वर्मा तथा टीम को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।

वर्ष 2018 में आकांक्षी जिला और 2023 में आकांक्षी विकासखंड कार्यक्रम हुए आरंभ
उल्लेखनीय है कि आकांक्षी जिलों और विकासखंडों में गर्भवती महिलाओं के समय पर पंजीयन और पोषण, बच्चों के टीकाकरण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण, मधुमेह और उच्च रक्तचाप की स्क्रीनिंग, स्कूलों में बिजली की उपलब्धता, समय पर पाठ्य पुस्तक वितरण और स्व-सहायता समूहों को वित्तीय सहयोग जैसे बिन्दुओं पर पूर्ण सेचुरेशन सुनिश्चित करना सम्पूर्णता अभियान का उद्देश्य है। अपेक्षाकृत पिछड़े जिलों में स्वास्थ्य, पोषण,‍ शिक्षा, कृषि, वित्तीय समावेशन और आधारभूत संरचना जैसे क्षेत्रों में तीव्र सुधार सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार द्वारा वर्ष 2018 में आकांक्षी जिला कार्यक्रम आरंभ किया गया था। इसके सफल परिणामों के आधार पर वर्ष 2023 आकांक्षी विकासखंड कार्यक्रम आरंभ‍ किया गया। विकास की मूलभूत सुविधाओं को समाज के अंतिम छोर तक पहुंचाना और क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना इन कार्यक्रमों का लक्ष्य है।

मोहम्मद सालाह ने रिकॉर्ड तीसरी बार पीएफए ‘प्लेयर ऑफ द ईयर’ का अवॉर्ड जीतकर रचा इतिहास

मोहम्मद सालाह ने रिकॉर्ड तीसरी बार पीएफए ‘प्लेयर ऑफ द ईयर’ का अवॉर्ड जीतकर रचा इतिहास
लिवरपूल के दिग्गज खिलाड़ी मोहम्मद सालाह को 2024-25 के लिए पीएफए पुरुष प्लेयर ऑफ द ईयर का खिताब दिया गया है। सालाह ने तीसरी बार ये खिताब अपने नाम करते हुए इतिहास रच दिया है। वह तीन इस खिताब को जीतने वाले पहले खिलाड़ी बन गए हैं। इस खिताब के लिए छह खिलाड़ियों को अंतिम रूप से शॉर्ट लिस्ट किया गया था। इसमें लिवरपूल के एलेक्सिस मैक एलिस्टर का नाम भी शामिल था। लेकिन वोटिंग में सालाह ने बाजी मारी। यह 10वां मौका है, जब लिवरपूल के किसी खिलाड़ी ने पीएफए पुरुष प्लेयर ऑफ द ईयर का खिताब जीता है।

2017-18 और 2021-22 में भी जीता था खिताब
इससे पहले टेरी मैकडरमोट (1979-80), सर केनी डगलिश (1982-83), इयान रश (1983-84), जॉन बार्न्स (1987-88), स्टीवन गेरार्ड (2005-06), लुइस सुआरेज़ (2013-14) और वर्जिल वैन डाइक (2018-19) लिवरपूल में रहते हुए पुरुषों के पीएफए प्लेयर्स प्लेयर ऑफ द ईयर चुने जाने वाले अन्य खिलाड़ी हैं। मिस्त्र के मोहम्मद सालाह ने पूर्व में 2017-18 और 2021-22 में यह खिताब जीता था।

302 मैचों में दागे 187 गोल
मोहम्मद सालाह के लिए यह साल काफी अच्छा रहा है। वह 2024-25 सत्र के लिए फुटबॉल राइटर्स एसोसिएशन फुटबॉलर ऑफ द ईयर और प्रीमियर लीग प्लेयर ऑफ द सीजन पुरस्कार जीत चुके हैं। सालाह 2017-18 सीजन से लिवरपूल के लिए खेल रहे हैं। वह बतौर फॉर्वर्ड खेलते हैं। पिछले 8 साल में क्लब की सफलता में सालाह की अहम भूमिका रही है। 302 मैचों में वह 187 गोल कर चुके हैं। वहीं, 87 गोल में उन्होंने एसिस्ट किया है।

2011 में मिस्त्र सीनियर टीम के लिए किया था डेब्यू
मोहम्मद सालाह ने 2011 में मिस्त्र सीनियर टीम के लिए डेब्यू किया था। अपने देश के लिए 105 मैचों में 60 गोल कर चुके हैं। सालाह ने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत 2010 में अल-मोकावलून टीम ने की थी। इसके बाद वह बासेल, चेल्सी, फियोरेंशिया, रोमा जैसे क्लबों के लिए खेले। 2017 से वह लिवरपूल के साथ जुड़े हैं।

शादी के दबाव से नाराज होकर प्रेमी संग नेपाल चली गई थी अर्चना

शादी के दबाव से नाराज होकर प्रेमी संग नेपाल चली गई थी अर्चना

 

भोपाल, इंदौर में रहकर सिविल जज की तैयारी कर रही अर्चना तिवारी को रेलवे पुलिस सही सलामत भोपाल लेकर आ गई है। 13 दिन से लापता अर्चना ने दोस्तों के साथ नेपाल जाने का प्लान बनाया और फिर एक दोस्त सारांश के साथ वहां पहुंच गई। पुलिस के अनुसार अर्चना का सारांश के साथ अफेयर था और वह उससे शादी करना चाहती थी, लेकिन उसके माता-पिता उसकी मर्जी के खिलाफ उसकी शादी करना चाहते थे इसलिए वह बिना बताए चली गई।

 

दो दोस्तों के साथ मिलकर बनाया प्लान लेकिन एक के साथ काठमांडू पहुंची

 

नेपाल बॉर्डर से लेकर आई रेलवे पुलिस ने माता-पिता को सौंपा

 

हालांकि बाद में सारांश पलट गया और उसे पुलिस ने पहले राउंडअप कर लिया। बाद में अर्चना ने लौटते समय नेपाल बॉर्डर पर लखीमपुर खीरी से अपनी मां को फोन किया तब पुलिस को उसकी लोकेशन का पता चला। अर्चना को उसके माता-पिता के सुपुर्द करने की कार्रवाई की जा रही है। भोपाल रेलवे पुलिस अधीक्षक राहुल लोढ़ा ने बताया कि पिछले कुछ समय से अर्चना के माता-पिता उस पर शादी का दबाव डाल रहे थे, जो उसे मंजूर नहीं था। इसी बात पर उसने नाराज होकर अपने दोस्तों के साथ दूर चले जाने का फैसला किया। इन दोस्तों में एक इंदौर का रहने वाला सारांश है जबकि एक इटारसी का रहने वाला तेजेंदर है। खास बात यह है कि यह दोनों अर्चना से इंदौर में ही मिले थे और प्लानिंग में शामिल थे, लेकिन उसके साथ नेपाल नहीं गए। पुलिस ने इन दोनों को भी पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन चूंकि अर्चना बालिग है और अपनी मर्जी से गई थी, इसलिए कोई केस दर्ज नहीं किया गया है।

 

यह है मामला: कटनी निवासी अर्चना तिवारी राखी से दो दिन पूर्व 7 अगस्त को इंदौर बिलासपुर एक्सप्रेस से कटनी जाने के लिए निकली थी। इसके बाद वह ट्रेन में सफर के दौरान रहस्यमय तरीके से लापता हो गई। उसका मोबाइल बंद हुआ तो परिजन को चिंता हुई और परिजन ने जीआरपी में अर्चना की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। जीआरपी की टीम ने अर्चना तिवारी के मोबाइल की टॉवर लोकेशन और सीडीआर निकलवाई। सीडीआर में पता चला कि वह ग्वालियर के पुलिसकर्मी से दो साल से संपर्क में थी। जीआरपी ने पुलिसकर्मी से संपर्क किया तो पता चला कि उसकी दोस्ती अर्चना से है, लेकिन उसे नहीं पता कि अर्चना अभी कहां है।

 

फोन कॉल पर नेपाल-भारत सीमा पर बुलवाया

 

जानकारी के मुताबिक अर्चना नेपाल की राजधानी काठमांडू में थीं। लोकेशन ट्रेस करने के बाद पुलिस ने उसे फोन कॉल पर नेपाल-भारत सीमा पर बुलवाया और भारत की सीमा में प्रवेश करते ही उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी से बरामद कर लिया। भोपाल की रानी कमलापति जीआरपी थाना टीम अर्चना को लेकर

भोपाल आ गई है।

उपराष्ट्रपति पद के लिए NDA उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने दाखिल किया नामांकन

उपराष्ट्रपति पद के लिए NDA उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने दाखिल किया नामांकन
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार और महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन (CP Radhakrishnan) ने आज, 20 अगस्त 2025 को संसद भवन में अपना नामांकन दाखिल किया। नामांकन प्रक्रिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) मुख्य प्रस्तावक के रूप में शामिल हुए।

चार सेटों में दाखिल किया नामांकन
नामांकन चार सेटों में दाखिल किया गया, जिसमें प्रत्येक सेट में 20 प्रस्तावकों और 20 समर्थकों के हस्ताक्षर शामिल हैं। पहले सेट में प्रधानमंत्री मोदी के हस्ताक्षर थे, जबकि बाकी सेटों में केंद्रीय मंत्रियों और NDA के वरिष्ठ नेताओं के हस्ताक्षर शामिल किए गए। नामांकन दाखिल करने के दौरान लगभग 160 NDA सांसद और मंत्री मौजूद थे, जो गठबंधन की एकजुटता को दर्शाता है।

BJP संसदीय बोर्ड की बैठक में किया नियुक्त
सीपी राधाकृष्णन, जो तमिलनाडु के कोयंबटूर से दो बार सांसद रह चुके हैं और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता हैं, को 17 अगस्त को NDA ने उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया था। यह निर्णय BJP संसदीय बोर्ड की बैठक में लिया गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित वरिष्ठ नेता शामिल थे।

भाजपा के खिलाफ ठाकरे ब्रदर्स ने लड़ा पहला चुनाव

भाजपा के खिलाफ ठाकरे ब्रदर्स ने लड़ा पहला चुनाव
शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे को तगड़ा झटका लगा है। दोनों ठाकरे भाइयों ने पहली बार भाजपा के खिलाफ मिलकर चुनाव लड़ा था लेकिन खाता तक नहीं खुल सका। शिवसेना (उबाठा) और मनसे ने मुंबई में बेस्ट एम्प्लॉईज को-ऑपरेटिव्ह क्रेडिट सोसायटी (BEST Election 2025) का चुनाव साथ लड़ा। इस चुनाव का बहुप्रतीक्षित नतीजा देर रात घोषित हुआ। लेकिन इस नतीजे ने ठाकरे ब्रदर्स को बड़ा झटका दिया है। उनके ‘उत्कर्ष पैनल’ को एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं हो पाई। इस हार के साथ ही ठाकरे की शिवसेना ने बेस्ट क्रेडिट सोसायटी में लगभग 9 साल पुराना कब्जा खो दिया है।

उद्धव गुट बोला- हम हैरान है
शिवसेना उद्धव गुट और मनसे के ‘उत्कर्ष पैनल’ को बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (बेस्ट) से जुड़े कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी के चुनाव में सभी 21 सीटों पर हार का मुंह देखना पड़ा है। ठाकरे गुट की बेस्ट कामगार सेना के अध्यक्ष सुहास सामंत ने कहा कि बेस्ट क्रेडिट सोसायटी के चुनाव में भाजपा ने पैसों का जमकर उपयोग किया और इसी पैसों के चलते उनकी हार हुई। सभी 21 उम्मीदवारों की हार से हम हैरान है। वहीं, मनसे ने आरोप लगाया कि मतदाताओं को लुभाने के लिए पैसे का इस्तेमाल किया गया है।

BJP ने कसा तंज
आगामी मुंबई महानगरपालिका चुनावों (BMC Election) की पृष्ठभूमि में उद्धव ठाकरे गुट और मनसे की राजनीतिक समीकरणों के लिए यह हार बड़ा धक्का मानी जा रही है। इस हार के बाद अब भाजपा ने ठाकरे भाईयों को घेरना शुरू कर दिया है। भाजपा प्रवक्ता केशव उपाध्ये (Keshav Upadhye) और भाजपा विधायक प्रसाद लाड ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके मनसे और शिवसेना (ठाकरे गुट) का मजाक उड़ाया है। उपाध्ये ने कहा कि शून्य को मिलाने पर शून्य ही आता है।

उन्होंने एक्स पर लिखा, “एक के पास खोने के लिए कुछ नहीं बचा है और दूसरे के पास पाने के लिए कुछ नहीं बचा है। ऐसे दो ‘शून्यों’ को जोड़ भी दिया जाए और उसके आगे कितने ही शून्य लगा दिए जाएं, तब भी उत्तर शून्य ही आता है। यह जवाब तो बिना पढ़े-लिखे बच्चे भी जानते हैं। अगर यह समझा नहीं गया तो क्या होगा… इसका जवाब जानना हो तो ‘बेस्ट कामगार क्रेडिट सोसायटी’ के चुनाव नतीजों को देखिए! कल तक दो शून्य अपनी कीमत आंकने की चुनौती दे रहे थे, आज उन्हें खुद ही अपनी कीमत का अंदाजा हो गया है!!”

क्यों अहम था यह चुनाव?
मुंबई महानगरपालिका (BMC) के उपक्रम बेस्ट के कर्मचारियों से जुड़ी इस हाई-प्रोफाइल सोसायटी के चुनाव के लिए सोमवार को मतदान हुआ था। सभी 21 सीटों की मतगणना मंगलवार को शुरू हुई और देर रात तक जारी रही।

बेस्ट क्रेडिट सोसाइटी का चुनाव राज्य में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए ठाकरे भाईयों के बीच संभावित गठबंधन की अटकलों के बीच हुआ। इस चुनाव के लिए शिवसेना (उबाठा) और मनसे ने ‘उत्कर्ष’ नाम का एक पैनल गठित किया था। इस पैनल में 21 सदस्य थे, जिनमें से शिवसेना (उबाठा) से 18, मनसे से दो और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति संघ से एक सदस्य थे।

बेस्ट एम्प्लॉइज कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड में इस निकाय के मौजूदा और पूर्व कर्मचारी सदस्य हैं, जो निर्वाचक मंडल का गठन करते हैं। इस क्रेडिट सोसाइटी के 15,000 से ज़्यादा सदस्य हैं और वर्षों से इस पर बेस्ट कामगार सेना का दबदबा रहा है, जो उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उबाठा) से जुड़ी है।

इज़रायल, गाज़ा सिटी पर कब्ज़ा करने के लिए पूरी तरह तैयार

इज़रायल, गाज़ा सिटी पर कब्ज़ा करने के लिए पूरी तरह तैयार
इज़रायल (Israel) और हमास (Hamas) के बीच 7 अक्टूबर 2023 से चल रहा युद्ध अभी भी जारी है और इस वजह से तबाही मचने का सिलसिला भी बरकरार है। इज़रायली हमलों में 61 हज़ार से ज़्यादा फिलिस्तीनियों की मौत हो चुकी है। युद्ध पर सीज़फायर लागू करने की तमाम कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हो रहा है। लगातार हो रहे इज़रायली हमलों से गाज़ा में हाहाकार मचा हुआ है। इसी बीच इज़रायली रक्षा मंत्री इज़रायल काट्ज़ (Israel Katz) ने अपनी सेना के एक बड़े प्लान को मंजूरी दे दी है।
इज़रायल करेगा गाज़ा सिटी पर कब्ज़ा
इज़रायली रक्षा मंत्री काट्ज़ ने गाजा सिटी (Gaza City) पर कब्ज़ा करने के सेना के प्लान को मंज़ूरी दे दी है। रक्षा मंत्रालय ने आज, बुधवार, 20 अगस्त को इसकी पुष्टि की है। रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने मीडिया से बात करते हुए इस फैसले पर मुहर लगाई। कुछ दिन पहले इज़रायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) ने भी गाज़ा सिटी पर कब्ज़ा करने के लिए अपनी सेना को प्लान बनाने के लिए ग्रीन सिग्नल दिया था।
60 हज़ार रिज़र्व सैनिकों को बुलाया जाएगा
गाज़ा सिटी पर कब्ज़ा करने के लिए इज़रायली सेना करीब 60 हज़ार रिज़र्व सैनिकों बुलाएगी, जिससे जल्द से जल्द ग्राउंड ऑपरेशन शुरू किया जा सके। रक्षा मंत्री काट्ज़ ने इस फैसले को मंजूरी दे दी है।
सीज़फायर प्रस्ताव पर सहमति बनने में हो रही है देरी
इज़रायल और हमास के बीच सीज़फायर प्रस्ताव पर सहमति बनने में देरी हो रही है। हालांकि मध्यस्थों के सुझाए सीज़फायर प्रस्ताव को मानते हुए हमास ने इज़रायल के साथ 60 दिन के सीज़फायर को स्वीकार कर लिया है, जिसमें गाज़ा में बंधक बनाए गए आधे लोगों की वापसी और इज़रायल द्वारा कुछ फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई शामिल है। हालांकि अभी तक इज़रायल की तरफ से इस सीज़फायर प्रस्ताव को ग्रीन सिग्नल नहीं मिला है। इज़रायल की तरफ से फिलहाल हमास की सहमति संबंधित रिस्पॉन्स पर गौर किया जा रहा है।

एनएचएम कर्मचारियों के 30 दिन की विशेष छुट्टी स्वीकृत का आदेश

एनएचएम कर्मचारियों के 30 दिन की विशेष छुट्टी स्वीकृत का आदेश
बस्तर संभाग में नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के कर्मचारियों की हड़ताल जारी है, जिसने मेडिकल कॉलेज (मेकाज) और महारानी अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को काफी हद तक प्रभावित किया है। हड़ताल की वजह से मेकाज में व्यवस्था सबसे अधिक सेवाएं प्रभावित हुई हैं। यहां एनएचएम कर्मचारी के आंदोलन की वजह से नाइट शिफ्ट में वार्ड के लिए स्टाफ नर्सों की भारी कमी हो रही है। इसे देखते हुए ही अब एमएमसी फाइनल इयर की छात्राओं को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

हालांकि इन्हें ज्यादा समस्या न हो इसके लिए सीनियर व नियमित स्टाफ नर्स वार्ड की जिम्मेदारी संभाल रही है और वे इनकी निगरानी में काम कर रहीं है। वहीं ग्रामीण इलाके में भी मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही हड़तालस्थल पर कर्मचारियों ने मंत्रीमंडल का मुखौटा पहनकर उन्हें सदब़द्धि देने के लिए हवन किया।

मेकाज में करीब 50 एनएचएम कर्मचारी हड़ताल पर हैं, जिसके चलते अस्पताल प्रशासन ने एमएससी नर्सिंग की फाइनल इयर की छात्राओं को वार्डों की जिम्मेदारी सौंपी है। ये छात्राएं, जो अभी प्रशिक्षण के दौर से गुजर रही हैं, अचानक मरीजों की देखभाल और वार्ड प्रबंधन का बोझ संभालने को मजबूर हैं। मेकाज के अधीक्षक डॉ. अनुरूप साहू ने दावा किया कि नियमित कर्मचारियों ने स्थिति संभाल ली है और इलाज पर कोई असर नहीं पड़ रहा। हमने वैकल्पिक व्यवस्था कर ली है। हालांकि छात्राओं और उनके प्रोफेसरों का कहना है कि यह कदम उनके प्रशिक्षण और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

महारानी अस्पताल में 60 से अधिक एनएचएम कर्मचारी हड़ताल पर हैं, जिसके कारण नियमित कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ गया है। इन कर्मचारियों को अब 12-14 घंटे तक लगातार ड्यूटी करने के लिए कहा जा रहा है, और किसी को भी छुट्टी नहीं दी जा रही। अधीक्षक डॉ. संजय प्रसाद ने चिंता जताई, ’’अगर हड़ताल ज्यादा दिन तक चली तो अस्पताल की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है।

हमारी कोशिश है कि मरीजों को परेशानी न हो, लेकिन संसाधनों की कमी एक बड़ी चुनौती है।’’ कर्मचारी यूनियन का कहना है कि यह स्थिति उनके स्वास्थ्य और कार्यक्षमता को प्रभावित कर रही है। हड़ताल का सबसे बुरा असर ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है, जहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पहले से ही सीमित संसाधनों से जूझ रहे थे। कई जगहों पर मरीजों को इलाज के लिए एक केंद्र से दूसरे केंद्र तक भटकना पड़ रहा है, जबकि कुछ मामलों में वे बिना इलाज के लौटने को मजबूर हैं।

 म प्र सरकार के इस फैसले ने भू—माफिया के मंसूबों पर पानी फेरा

म प्र सरकार के इस फैसले ने भू—माफिया के मंसूबों पर पानी फेरा

भोपाल। मुरैना जिले में कैलारस शुगर मिल की 26 हेक्टेयर जमीन को सरकार स्वयं विकसित करेगी,लेकिन इसका उपयोग सिर्फ रोजगार पैदा करने वाले कामों के लिए ही किया जा सकेगा। मंगलवार को संपन्न कैबिनेट बैठक में सहकारिता विभाग के इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिली।

मिल मजदूरों को मिलेंगे 55 करोड़ रुपए

बैठक में तय हुआ कि मुरैना की बंद शुगर मिल को आधुनिक मिल के रूप में विकसित किया जाए और यदि यह संभव नहीं होता तो मिल की जमीन को सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्योगों के लिए आवंटित किया जाए। इससे जिले में रोजगार के नए अवसर पैदा हों। बैठक में मिल मजदूरों की बकाया 54.81 करोड़ रुपये की राशि अदा करने का भी निर्णय लिया गया।  बताया जाता है कि विगत दिनों मुरैना प्रवास के दौरान सीएम डॉ मोहन यादव कैलारस शुगर मिल की देनदारी अदाकर यहां रोजगारपरक निवेश करवाने की घोषणा की थी। इसके चलते कैबिनेट बैठक में मिल से जुड़ा प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूर किया गया।

भू—माफिया के मंसूबों पर फिर पानी

सरकार के इस फैसले ने भू—माफिया के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। जो बंद मिल की जमीन खुर्द—बुर्द करने की उम्मीद लगाए ​था। इसके लिए करीब छह माह पहले एक बड़ा आंदोलन खड़ाकर भ्रम फैलाने की कोशिश भी हो चुकी है। साल के शुरुआत में हुए आंदोलन को यह कहते हुए धार देने की कोशिश हुई कि सरकार मिल की सहकारी जमीन को नीलाम करना चाहती है।

इस आदेश ने आग में घी का काम किया

किसानों व मिल मजदूरों के आंदोलन के दौरान ही जिला प्रशासन ने न्यायालय के एक आदेश पर मिल की करीब 4 बीघा जमीन की नीलामी की कार्यवाही शुरू करना चाहा। प्रशासन के इस आदेश ने आग में घी का काम किया।

कैलारस में सत्याग्रह आंदोलन के नाम पर करीब दस हजार से ज्यादा लोग जमा हुए और जंगी प्रदर्शन किया। सैकड़ों लोगों ने जेल भरो आंदोलन के तहत गिरफ्तारियां भी दी। प्रदर्शन की व्यापकता को देखते हुए जिला प्रशासन के हाथ—पैर फूल गए और नीलामी की कार्यवाही को रोकना पड़ा था। तब जिला कलेक्टर अंकित अस्थाना को आगे आकर स्थिति का खुलासा करना पड़ा।

कौड़ी के दाम मिली जमीन अब बेशकीमती

कैलारस शुगर मिल की स्थापना सहकारिता कानून के तहत साल 1971—72 में हुई थी। तब इसके लिए जुटाई गई जमीन की कीमत कुछ सौ रुपए प्रति एकड़ थी। जबकि वर्तमान में इसकी कीमत करोड़ों में है। प्रदेश की अन्य शुगर मिलों की तरह कैलारस शुगर मिल भी

कुप्रबंधन का शिकार हुई। अपनी उपज का समय पर भुगतान नहीं होने से गन्ना उत्पादक किसानों ने भी इससे दूरी बना ली।जैसे—तैसे साल 2009 तक मिल चालू रही। इसके बाद साल 2011 में इसे पूरी तरह बंद कर दिया गया,लेकिन अदालती प्रकरणों के चलते मिल मजदूरों व किसानों की देनदारियां बकाया रही। मप्र न्यूज,मुरैना न्यूज

लोकसभा में अमित शाह ने PM-CM को हटाने संबंधी विधेयक को किया पेश

लोकसभा में अमित शाह ने PM-CM को हटाने संबंधी विधेयक को किया पेश
संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तीन विधेयकों को पेश किया। इन विधेयकों में पीएम, सीएम, केंद्रीय मंत्री या केंद्र शासित प्रदेश के मंत्री को गंभीर आपराधिक आरोपों में लगातार 30 दिनों तक गिरफ्तार या हिरासत में रखने पर पद से हटाने का प्रावधान है। इस विधेयक का कांग्रेस और AIMIM ने विरोध किया। विपक्ष ने सदन में जमकर नारेबाजी भी की।

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