इंदौर में पूर्व मंत्री रंजना बघेल के बेटे सहित तीन चौरल नदी में बहे

minister Ranjana Baghel

 

इंदौर। शुक्रवार को भारी बारिश के कारण नदी-नाले उफान आ गए। पूर्व मंत्री रंजना बघेल के बेटे यश सहित तीन युवक चौरल नदी(कालाकुंड) में बह गए। पुलिस और ग्रामीणों ने एक युवक तेजस को तो बचा लिया लेकिन तेजस गहरे पानी में चला गया। तेजस ने एक पैड़ की टहनी पकड़ ली। सरपंच शिव दुबे के मुताबिक तीनों पिकनिक मनाने आए थे।

एसपी(ग्रामीण)घटना रात करीब 8 बजे चौरल के समीप उतेड़िया गांव की है। तेजस,यश और तेजस की बुआ का बेटा जीप(थार) से इंदौर की तरफ आ रहे थे। चौरल नदी में बहाव होने के कारण जीप बह गई। बताते हैं इसी दौरान तीनों में से किसी एक ने परिचित को काल कर घटना बता दी।

एसपी के मुताबिक सूचना मिलते ही सिमरोल टीआइ मंशाराम ग्रामीणों के साथ पहुंच गए लेकिन जिस जगह युवक फंसे थे वहां तक जाना संभव नहीं था। पुलिया पर ही पानी भरा हुआ था। टीआइ और ग्रामीणों ने जेसीबी की मदद से एक युवक को निकाल लिए लेकिन मदद तेजस तक नहीं पहुंच सकी।

देर रात एसडीआरएफ के दल को बुलाया गया। डीएसपी(मुख्यालय) उमाकांत चौधरी भी महू पुलिस कंट्रोल रूम का बल लेकर पहुंचे। तेजस के बुआ के बेटे के बारे में बताया वह खुद ही नदी के दूसरी तरफ चला गया। ग्रामीणों ने बताया उस तरफ तो घना जंगल है। रात 12 बजे तक जीप दिखाई दे रही थी लेकिन उसके बाद वह भी बह गई।

कोकेरनाग में 72 घंटे बाद में मुठभेड़ जारी, 2020 के बाद चल रहा सबसे लंबा एनकाउंटर

longest ongoing encounter after 2020

 

कश्मीर के कोकेरनाग इलाके में आतंकियों के साथ चल रही मुठभेड़ अब भी जारी है। मुठभेड़ स्थल पर सुरक्षा बल कड़ी निगरानी कर रहे हैं। पहाड़ी पर घने पेड़ों की ओट में छिपे आतंकियों अपने ठिकानों से बम दाग रहे हैं। यह मुठभेड़ वर्ष 2020 के बाद से कश्मीर में अब तक की यह सबसे लंबी मुठभेड़ है। जम्मू-कश्मीर में अनंतनाग के जंगल में 72 घंटे से ज्यादा समय से यह मुठभेड़ चल रही है। मिली जानकारी के मुताबिक घेराबंदी में फंसे आतंकियों की संख्या 2 से 3 बताई जा रही है।

रूक-रूक कर जारी है गोलीबारी

आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच बीते 72 घंटे से गोलीबारी जारी है। इस मुठभेड़ में अभी तक 4 जवान शहीद हो चुके हैं। चिनार कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई, विक्टर फोर्स के कमांडर मेजर जनरल बलवीर सिंह और जम्मू-कश्मीर पुलिस के महानिदेशक दिलबाग सिंह सहित सेना के वरिष्ठ अधिकारी इस अभियान की निगरानी कर रहे हैं।

शुक्रवार सुबह जवानों ने आतंकियों को मार गिराने का अभियान एक बार फिर शुरू किया था और पैरा कमांडो दस्ता जैसे ही पहाड़ी पर आतंकी ठिकानों की तरफ बढ़ा तो आतंकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। दोपहर 2 बजे एक जवान शहीद हो गया था। आपको बता दें कि अनंतनाग के गडोल में मुठभेड़ मंगलवार रात करीब 1 बजे शुरू हुई थी, जहां 4 से 5 आतंकियों के छुपे होने की सूचना मिली थी।

गांव के आखिरी छोर पर पहाड़ी पर ठिकाना

आतंकियों ने गांव के बाहरी छोर पर स्थित पहाड़ी पर ठिकाना अपना ठिकाना बनाया था। इस मुठभेड़ में सेना के कर्नल मनप्रीत सिंह, मेजर आशीष धौंचक और जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक DSP मुजम्मिल हुमायूं शहीद हो गए। मुठभेड़ के दौरान पांच जवान जख्मी भी हुए और एक लापता था, जिसकी पार्थिव शरीर शुक्रवार को मिला। ADGP विजय कुमार के मुताबिक, आतंकियों के खिलाफ अभियान जारी है। यह आतंकियों के खात्मे के साथ ही खत्म होगा। उन्हें मार गिराने की कार्रवाई जारी है।

भोपाल में झमाझम, 12 घंटे में दो इंच बरसा पानी, आज भी राहत के आसार नहीं

Heavy rain in Bhopal,

 

शनिवार को भी शहर में झमाझम वर्षा होने की संभावना है

भोपाल। जुलाई-अगस्त माह में भले ही मानसून ने भले ही निराश किया, लेकिन सितंबर माह में हो रही झमाझम वर्षा ने शहर वासियों के गिले शिकवे दूर कर दिए हैं। इसी क्रम में शुक्रवार को सुबह से ही बौछारें पड़ने का सिलसिला शुरू हो गया था, जो रातभर भी जारी रहा। सुबह साढ़े आठ बजे से रात साढ़े आठ बजे तक शहर में 58 मिलीमीटर वर्षा हो चुकी थी। जो 11 वर्ष में दूसरी बार सितंबर माह में और इस सीजन में पहली बार एक दिन में हुई सर्वाधिक वर्षा रिकार्ड हुई। घने बादल छाए रहने के कारण सुबह साढ़े आठ बजे से नौ बजे तक एयरपोर्ट में दृश्यता 800 मीटर रह गई थी। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक शनिवार को भी शहर में झमाझम वर्षा होने की संभावना है।

फिलहाल जारी रहेगा बारिश का सिलसिला

मौसम विज्ञान केंद्र से मिली जानकारी के मुताबिक इस सीजन में एक जून से लेकर शुक्रवार सुबह साढ़े आठ बजे तक राजधानी में 653.1 मिमी. वर्षा हुई है। जो सामान्य वर्षा (905.7 मिमी.) की तुलना में 28 प्रतिशत कम है। दरअसल इस बार जुलाई और अगस्त माह में मानसून शिथिल रहने के कारण औसत से काफी कम वर्षा हुई। हालांकि पांच सितंबर के बाद मानसून के सक्रिय होने से अच्छी वर्षा होने का सिलसिला जारी है। मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्व वरिष्ठ मौसम विज्ञानी अजय शुक्ला ने बताया कि शहर में शनिवार-रविवार को भी तेज बौछारें पड़ने के आसार हैं। उधर 18 सितंबर को बंगाल की खाड़ी में हवा के ऊपरी भाग में एक और चक्रवात बनने जा रहा है। इस वजह से वर्षा का दौर अभी बना रहने की भी संभावना है।

शहर में कई जगह हुआ जलभराव

शुक्रवार को भारी बारिश के चलते भोपाल शहर में कई जगहों पर जलभराव की स्थिति निर्मित हो गई। सुबह से ही जारी वर्षा के कारण गड्ढों में पानी भर गया था, जिसके कारण लोगों को परेशान होना पड़ा। बारिश के साथ तेज हवाओं के कारण कुछ जगहों पर पेड़ गिरने की घटनाएं भी हुईं।

18 सितंबर को कोलार पधारेंगे श्रीमंत दगडूसेठ हलवाई

 

भोपाल, उपनगर कोलार में गणेशोत्सव की तैयारी जोर शोर से चल रही हैं। जानकारी आई है की क्षेत्र के युवाओं की टोली इस बार गुरुकृपा टॉवर के पास श्रीमंत दगडूसेठ हलवाई की मूर्ति विराजमान करने जा रहे है। श्रीमंत दगडूसेठ हलवाई का प्रसिद्ध मंदिर महाराष्ट्र के पुणे शहर में स्थित है। अभी हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी भगवान श्री गणेश के दर्शन करने मन्दिर पहुंचे थे।

आयोजन समिति के आर्यन कटारे ने बताया सनातन धर्म हिन्दू उत्सव समिति द्वारा हर वर्ष गणेशोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है इस वर्ष श्रीमंत दगडूसेठ हलवाई को हम विराज रहे है जिनका नगर आगमन 18 सितंबर को हो रहा है।

कोलार के खाटू श्याम मन्दिर में विराजेंगे श्री गणेश महाराज

 

भोपाल, Kolar Road Bhopal श्री हनुमान गणेश एवं दुर्गा सेवा उत्सव समिति, खाटू श्याम मंदिर (khatu shyam mandir), ए सेक्टर, सर्वधर्म पर 19 सितंबर से गणेशोत्सव पर होने वाले कार्यक्रम की जानकारी देते हुए ऋषि पुरी गोस्वामी ने बताया मंदिर प्रांगण में गणपति महाराज की झांकी बनाई जा रही है जिसमें मूर्ति स्थापना के साथ गणेशोत्सव में होने वाले कार्यक्रम चालू हो रहे है, प्रमुख कार्यक्रम महिला संगीत एवं म्यूजिकल चेयर रेस, साईंबाबा प्रसादी वितरण, मटकी फोड़ एवं गायन प्रतियोगिता, संगीतमय सुन्दरकाण्ड, खाटूश्याम भजन संध्या, विशाल देवी जागरण, विशाल भंडारा, चल समारोह एवं आतिशबाजी, प्रतिदिन आरती का समय प्रातः 8 बजे एवं रात्रि 7:30 बजे रहेगा। सभी कार्यक्रम पंडित बैजनाथ पुरी गोस्वामी के मार्गदर्शन में सम्पन्न होंगे।

Khatu shyam mandir kolar road bhopal

मीडिया का कार्य है शासन के सभी अंगों को सचेत करना -उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़

media is to alert all the organs of governance

 

भोपाल, 15 सितम्बर | उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा है कि लोकतंत्र के चतुर्थ स्तंभ के रूप में मीडिया का कार्य शासन के सभी अंगों को सचेत करना, सच्चाई, सटीकता एवं निष्पक्षता के साथ जनमानस तक जानकारी देना है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र प्रेस लोकतांत्रिक राष्ट्र की रीढ़ है। प्रेस की स्वतंत्रता के साथ प्रेस का ज़िम्मेदार होना भी महत्वपूर्ण है। सकारात्मक समाचार को तरजीह देना आवश्यक है। इससे समाज में हो रहे सकारात्मक बदलाव को गति प्राप्त होती है।

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ आज यहां माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। वे विश्वविद्यालय के कुलाध्यक्ष भी है। उन्होने विश्वविद्यालय के भोपाल के बिशनखेड़ी में स्थित नवीन परिसर का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में जनसम्पर्क एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री राजेन्द्र शुक्ल और उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव विशेष रूप से उपस्थित थे।

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने विश्वविद्यालय को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दी एवं विश्वास व्यक्त किया कि यह संस्थान पत्रकारिता जगत में अपना उत्कृष्ट योगदान निरंतर जारी रखेगा। उपराष्ट्रपति ने कहा कि पत्रकारिता व्यवसाय नहीं समाजसेवा है। पत्रकार लोकतंत्र के प्रहरी हैं। व्यावसायिक लाभ व्यक्तिगत हित से ऊपर उठकर सेवा-भाव से काम करें।

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने उपाधि प्राप्तकर्ता समस्त विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि प्राप्त ज्ञान का उपयोग सभी विद्यार्थी लोक कल्याण के लिए करेंगे। उन्होंने आह्वान किया कि राष्ट्रकवि, लेखक एवं पत्रकार पंडित माखनलाल चतुर्वेदी की सोच अनुरूप देशहित को सर्वोपरि रखकर राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ भारत की विकास यात्रा में अपना सशक्त योगदान दें।

वैदिक मंत्रोचार के साथ हुआ दीक्षांत समारोह का शुभारंभ

दीक्षांत समारोह में पारंपरिक परिधान और अंगवस्त्र के प्रति उपराष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारत के उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम – चारों दिशाओं की झलक देखने को मिलती है। यह देश के लिए बहुत बड़ा सार्थक संदेश है। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ने कहा कि आज भारत आर्थिक, शैक्षणिक, शोध हर क्षेत्र में नये कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। यह गौरव का विषय है। आज ऐसा वातावरण है कि हर व्यक्ति जो चाहे वह निखार स्वयं में ला सकता है और भारत को विश्वगुरु बनाने में योगदान दे सकता है। दीक्षांत समारोह में कुलसचिव डॉ. अविनाश वाजपेयी की अगुवाई में विद्वत् यात्रा ने वैदिक मंत्रोचार की पवित्र ध्वनि के बीच सभागार में प्रवेश किया। स्वस्ति वाचन एवं मंगलाचरण के उच्चारण के साथ उपराष्ट्रपति ने दीप प्रज्वलन कर दीक्षांत कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

समारोह में विश्वविद्यालय के 2018 से 2023 तक के 23 शोधार्थियों को उपराष्ट्रपति द्वारा पीएचडी की उपाधि प्रदान की गयी। इसके साथ ही मीडिया, मीडिया प्रबंधन, कंप्यूटर एवं सूचना प्रोद्योगिकी पाठ्यक्रम के लगभग 450 विद्यार्थियों को विभिन्न विधाओं में मास्टर ऑफ़ आर्ट्स, मास्टर ऑफ़ साइंस, मास्टर ऑफ़ बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन, मास्टर ऑफ़ कंप्यूटर एप्लीकेशन, मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म, मास्टर ऑफ़ लाइब्रेरी एंड इनफार्मेशन साइंस और मास्टर ऑफ़ फिलोसफी की उपाधि प्रदान की गयी। उपराष्ट्रपति श्री धनखड़ द्वारा सत्र 2020-22 में विश्वविद्यालय के फ़िल्म प्रोडक्शन में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने के लिए सुश्री वागेश्वरी नंदिनी को स्व. डॉ. अनिल चौबे स्मृति पदक, 21 हज़ार रुपये का चेक एवं प्रमाण पत्र, सत्र 2020-22 में एम.ए. विज्ञापन एवं जनसंपर्क पाठ्यक्रम में सर्वोच्च सर्वोच्च अंक प्राप्त करने के लिए सुश्री श्वेता रानी को स्व. अम्बा प्रसाद श्रीवास्तव स्मृति पदक एवं प्रमाण पत्र और सत्र 2021-23 में विश्वविद्यालय के पत्रकारिता स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने के लिए अंजलि को स्व. डॉ. रामेश्वर दयाल तिवारी स्मृति पदक, 11 हज़ार रुपये का चेक एवं प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।

कुलपति डॉ. के.जी. सुरेश ने विश्वविद्यालय का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। डॉ. सुरेश ने बताया कि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय एशिया का प्रथम एवं देश का सबसे बड़ा पत्रकारिता विश्वविद्यालय है, जो विगत 32 वर्षों से पत्रकारिता, प्रसारण पत्रकारिता, जनसंपर्क एवं विज्ञापन, फिल्म अध्ययन, जनसंचार, पुस्तकालय विज्ञान, मीडिया प्रबंधन, कंप्यूटर विज्ञान और अनुप्रयोग, नवीन मीडिया प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और संचार शोध विषयों में शिक्षण- प्रशिक्षण देता है। इंडिया टुडे ओपन मैगजीन सर्वे और द वीक मैगजीन की रैंकिंग में, हाल ही में, इसे श्रेष्ठ मीडिया संस्थानों में शामिल किया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत मीडिया पाठ्यक्रमों को लागू करने वाला, यह देश का प्रथम विश्वविद्यालय है। आज प्रदेश में पांच परिसरों, 1600 से अधिक अध्ययन केंद्रों में 2 लाख से अधिक विद्यार्थी हैं। अकादमिक उन्नयन की दिशा में, UN पॉपुलेशन फंड समेत विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय स्तर के अनेक शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक संस्थानों एवं विश्वविद्यालयों से परस्पर सहमति अनुबंध किया है जिसका लाभ विद्यार्थियों के ज्ञान एवं कौशल में हो रहा है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत, रोजगारमूलक फिल्म अध्ययन और चलचित्र विभाग स्थापित किया गया है। मध्यभारत का यह पहला अध्ययन केंद्र, समाज में सकारात्मक, सृजनात्मक और राष्ट्र निर्माण के उद्देश्यों को डिजिटल फिल्म मेकिंग के जरिए पूरा करेगा। हमने हिंदी के प्रथम समाचार पत्र उदंत मार्तण्ड के संस्थापक संपादक पंडित जुगल किशोर शुक्ल के स्मृति में देश का प्रथम डिजिटल समाचार पत्र संग्रहालय ‘न्यूज़ियम’ बनाने का भी सैद्धांतिक निर्णय लिया है। डॉ. सुरेश ने विश्वविद्यालय की गतिविधियों, उपलब्धियों एवं आगामी कार्ययोजना की विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की। कुलपति द्वारा उपाधि प्राप्तकर्ता विद्यार्थियों को दीक्षोपदेश प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तकनीकी व्यवधान के कारण कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से शामिल नहीं हो सके। सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, विधायक पी.सी. शर्मा एवं विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, विद्यार्थी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन विवेक सावरीकर ने किया।

उपराष्ट्रपति ने सपत्नीक कदंब के पौधे रोपे

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने पत्नी डॉ. सुदेश धनखड़ के साथ विश्वविद्यालय के नवीन परिसर में कदंब के पौधों का रोपण किया।

राज्यपाल मंगुभाई पटेल लंदन में अंतर्राष्ट्रीय उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित

honored with International

 

भोपाल, 15 सितम्बर | राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि उत्कृष्ट एवं असाधारण कार्य का अभिनंदन ही मानवता के विकास का आधार है। मानव जीवन की बेहतरी के लिए सकारात्मक प्रयासों और उत्कृष्ट कार्यों की सराहना समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा उत्कृष्टता के सम्मान की पहल मानव जाति की भलाई के लिए शांति और सद्भाव के प्रयासों को मजबूत करने का सराहनीय प्रयास है।

राज्यपाल मंगुभाई पटेल वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा लंदन में ब्रिटिश पार्लियामेंट आयोजित सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में राज्यपाल मंगुभाई पटेल को अंतर्राष्ट्रीय उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किया गया। संपूर्ण विश्व के सामाजिक, शैक्षिक, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण, आध्यात्मिक, पुरातात्विक, ऐतिहासिक, अनुसंधान और विकास और सांस्कृतिक गतिविधियों में अतुलनीय योगदान करने वाली 20 विशिष्ट विभूतियाँ सम्मानित हुईं। समारोह में राज्यपाल की पत्नी नर्मदाबेन पटेल, केंद्रीय सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री रामदास अठावले भी उपस्थित थे।

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि उत्कृष्टता के लिए किसी प्रमाण-पत्र की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि किसी भी क्षेत्र का उत्कृष्ट कार्य महान प्रयासों और दक्षता का परिणाम होता है, लेकिन व्यवहारिक जगत में उत्कृष्टता बढ़ाने के लिए कीर्तिमानी प्रतिभाशाली लोगों को सम्मानित करना जरूरी है। उत्कृष्ट कार्यों का सम्मान विजेताओं के उत्कृष्ट कार्यों के अनुसरण के लिए युवाओं और अन्य को प्रेरित और नये कीर्तिमान स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करता है। जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत व्यक्तियों के असाधारण कार्यों को मान्यता देना एक सराहनीय प्रयास है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने विश्व भर में उत्कृष्ट कार्यों की पहचान और उनका दस्तावेजीकरण करने के गहन प्रयासों के लिए वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के पदाधिकारियों को बधाई दी। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने सम्मानित विभूतियों को शुभकामनाएं दीं और कहा कि वे गरीब एवं वंचित वर्ग के कल्याण के लिए निरंतर और बेहतर प्रयास करते रहेंगे। कार्यक्रम में मेम्बर ऑफ़ पार्लियामेंट यू.के. वीरेंद्र शर्मा, आध्यात्मिक नेता राज राजेश्वर गुरूजी, मनोविज्ञानी डॉ. दिवाकर सुकुल, अनुरुद्ध, डिप्टी मेयर लंदन राकेश अग्रवाल, वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स के प्रेसीडेंट संतोष शुक्ला, पुरस्कार विजेता एवं गणमान्य जन उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने ओंकारेश्वर में वैदिक रीति-रिवाज से पूजा अर्चना की

offered prayers according to Vedic

 

आदिगुरु शंकराचार्य जी की मूर्ति के अनावरण के लिए विशेष धार्मिक अनुष्ठान आरंभ

भोपाल ,15 सितम्बर | मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने एकात्म धाम, ओंकारेश्वर में आदिगुरु शकराचार्य जी की मूर्ति के अनावरण कार्यक्रम के लिए वैदिक रीति-रिवाज से पूजा-अर्चना की और संतों के साथ यज्ञ शाला में आहुति अर्पित कर विशेष धार्मिक अनुष्ठान का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह 18 सितंबर को ओंकारेश्वर में 108 फीट ऊंची आदि गुरु शंकराचार्य जी की बहु धातु की प्रतिमा का अनवारण करेंगे।

उल्लेखनीय है कि चिन्मय मिशन के स्वामी मित्रानंद ने शंकर संदेश वाहिनी के रूप में एक विशेष बस बनवाई, जिसमें आचार्य शंकर की कांस्य प्रतिमा स्थापित की गई इस बस को 29 दिसम्बर 2017 को वैलियानाड, केरल से मुख्य मंत्री शिवराज सिंह , स्वामी परमात्मानंद जी, चिन्मय मिशन के स्वामी अयानन्द जी और संस्कृति सचिव मनोज श्रीवास्तव ने हरी झंडी दिखाई। यह यात्रा भारत की चारों दिशाओं में स्थित उन चारों मठों में भी गई, जिन्हें आचार्य शंकर ने ही स्थापित किया। इस तरह समाज के बीच कण-कण में शंकर जाग्रत करते हुए, ‘एकात्मता की मूर्ति का निर्माण प्रगति पथ पर था। इस तरह आदि गुरु शंकराचार्य की इस 108 फीट ऊंची मूर्ति में उन्हीं का दिया संदेश सर्वं खल्विदं ब्रह्म समाहित हुआ।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि जगद्गुरु शंकराचार्य जी महाराज को यही ज्ञान प्राप्त हुआ था यही उन्हें गुरु मिले। भारत का मूल संदेश है कि सब में एक ही चेतना है, दो कहीं है ही नहीं, इसलिए हम एक हैं, यह एकात्मता का संदेश पूरे जगत को यहां से जाएगा। अद्वैत वेदांत ही है जो दुनिया को संघर्षों से बचा सकता है और शांति, स्नेह, प्रेम, आत्मीयता का संदेश दे सकता है। मेरा विश्वास है कि एकात्म धाम संघर्ष नहीं शांति, घृणा नहीं प्रेम और समन्वय के संदेश के साथ संपूर्ण विश्व को एक नई प्रेरणा देगा। सब सुखी हो, सबका मंगल हो, सबका कल्याण हो, सब निरोगी रहें यही संदेश यहां जाएगा। एकात्म धाम के रूप में अद्भुत रचना ओंकारेश्वर में हो रही है। पहले चरण में आचार्य भगवन की प्रतिमा का अनावरण होगा, उसके बाद बाकी के कार्य प्रारंभ होंगे।

एकात्मता की मूर्ति की शिल्प विशेषता

यह प्रतिमा 12 वर्ष के किशोर शंकर की 108 फीट ऊंची बहु धातु प्रतिमा है, जिसमें 16 फीट ऊंचे पत्थर से बना कमल का आधार है, 75 फीट ऊंचा पेंडिस्टल का निर्माण है। वहीं प्रतिमा में 45 फीट ऊंचा शंकर स्तम्भ पत्थर पर उकेरे गए आचार्य शंकर की जीवन यात्रा को दर्शाता है। इस मूर्ति के निर्माण में 250 टन से 31GL ग्रेड की स्टेनलेस स्टील का उपयोग हुआ है. साथ 100 टन मिश्रधातु कांस्य में 88 टन तांबा, 4 टन जस्ता और 8 टन टिन का मिश्रण है। इस प्रतिमा में कान्क्रीट के पेडिस्टल को 500 वर्षों का जीवन दर्शाने के उद्देश्य से निर्मित किया गया है। इस मूर्ति में 12 वर्षीय किशोर आचार्य शंकर के भाव भंगिमाएं जीवंत रूप से दिखाई पड़ेंगी, जो जन मानस में एकात्म भाव का संचार करते हुए लोगों के जीवन को सकारात्मक ऊर्जा से भर देगी।

क्या है एकात्मता की मूर्ति की परिकल्पना

आदि गुरु शंकर की प्रतिमा एकात्मता की मूर्ति की कल्पना ने 9 फरवरी 2017 को तब जन्म लिया, जब ओंकारेश्वर में नर्मदा सेवा यात्रा के दौरान साध्वी ऋतंभरा स्वामी अवधेशानन्द गिरि, स्वामी तेजोमयानंद जैसे अनेक महान संतों के मध्य आदि शंकर की स्मृति का संचार हुआ। इसी दिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने संतों की उपस्थिति में जनता के सामने शंकर की विशाल प्रतिमा की स्थापना का संकल्प लिया और एकात्मता की मूर्ति की घोषणा की। आचार्य शंकर की अमर स्मृति को धरातल पर उतारने के लिए एक बार फिर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के साथ संतों और विद्वानों की बैठक हुई जिसमें शंकर के विचारों के प्रचार-प्रसार पर केंद्रित सभी गतिविधियों और आयोजनों के लिए 1 मई 2017 को आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास के गठन की बात रखी गई।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने भारत रत्न सर विश्वेश्वरैया की जयंती पर किया नमन

tribute to Bharat Ratna Sir Visvesvaraya

भोपाल , 15 सितम्बर | मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने महान अभियंता भारत रत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती पर उन्हें नमन किया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने मुख्यमंत्री निवास कार्यालय के सभागार में उनके चित्र पर माल्यार्पण कर पुष्पांजलि अर्पित की।

सर विश्वेश्वरैया भारत के महान अभियन्ता एवं राजनयिक थे। उन्हें वर्ष 1955 में भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से विभूषित किया गया था। देश में उनका जन्मदिन अभियन्ता दिवस के रूप में मनाया जाता है। विश्वेश्वरैया का जन्म कर्नाटक के कोलार जिले में 15 सितंबर 1860 को हुआ था। कृष्णराजसागर बांध, भद्रावती आयरन एंड स्टील वर्क्स, मैसूर संदल ऑयल एंड सोप फैक्ट्री, मैसूर विश्वविद्यालय, बैंक ऑफ मैसूर सहित अन्य कई विशिष्ट उपलब्धियाँ सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया के अथक प्रयास से ही संभव हो पाईं।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के साथ यूनिसेफ इंडिया प्रतिनिधि सिंथिया मैक्फ्री ने किया पौध-रोपण

UNICEF India representative

 

भोपाल, 15 सितम्बर | मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने श्यामला हिल्स स्थित स्मार्ट सिटी पार्क में यूनिसेफ इंडिया की प्रतिनिधि सुश्री सिंथिया मैक्फ्री के साथ बरगद, जामुन और कदम्ब के पौधे रोपे। यूनिसेफ मध्यप्रदेश प्रमुख सुश्री मारग्रेट ग्वाडा भी साथ थीं।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के साथ वाल्मीकि समाज ग्वालियर के प्रांताध्यक्ष रामसेवक वाल्मीकि तथा राजेश कटारे, अनिल वाल्मीकि, राजू पचरोल, राकेश कुमार, विक्रम घारिया, मनोज चौधरी और रामवरण वाल्मीकि ने भी पौध-रोपण किया। प्रकाश डावी, प्रकाश चौहान, जीतेन्द्र चौहान, अशोक चौहान और विनोद पंवार भी पौध-रोपण में शामिल हुए।

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