महिला स्व-सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आजीविका गतिविधियों को विस्तार देने की दिशा में सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में समूहों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई, जिससे महिलाएं अपने छोटे व्यवसाय और स्वरोजगार गतिविधियों को आगे बढ़ा सकेंगी।
आर्थिक संबल मिलने से महिला समूहों को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने और अपनी आय में वृद्धि करने में मदद मिलेगी। समूहों से जुड़ी महिलाएं कृषि, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, लघु उद्योग और अन्य गतिविधियों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।
सरकार का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं को संगठित कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण, ऋण, बाजार और अन्य आवश्यक सुविधाओं से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है।
महिला समूहों को मिल रहा आर्थिक सहयोग न केवल उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में सहायक होगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति देगा। इससे महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ने के साथ उन्हें स्वरोजगार और उद्यमिता के नए अवसर मिलेंगे।
























