हत्या को गैर-इरादतन हत्या में बदलने पर सुप्रीम कोर्ट नाराज, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से कहा- ‘यह दयनीय स्थिति’

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के एक फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई है, जिसमें हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति की सजा को उम्रकैद से घटाकर 10 साल कर दिया गया था। शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि न्यायाधीशों को आपराधिक कानून के बुनियादी प्रावधानों की जानकारी होनी चाहिए। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार और आरोपी चिंतामणि उर्फ चिंटू पटेल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

जस्टिस जेबी पार्डीवाला की पीठ ने क्या कहा?
14 अक्टूबर 2026 को मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के नवंबर 2024 के आदेश पर सवाल उठाए। जस्टिस पार्डीवाला ने टिप्पणी की कि हाई कोर्ट के न्यायाधीशों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304 के भाग एक और भाग दो के बीच अंतर की जानकारी होनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि हाई कोर्ट ने मामले में घातक चोटों की प्रकृति और मृतका को चोटें किस तरह लगीं, इन महत्वपूर्ण पहलुओं पर पर्याप्त विचार नहीं किया। शीर्ष अदालत ने पूछा कि हाई कोर्ट का आदेश रद्द कर निचली अदालत के फैसले को फिर से बहाल क्यों नहीं किया जाना चाहिए।
क्या है पूरा मामला?

यह मामला फरवरी 2021 में छत्तीसगढ़ में रायमोती पटेल नामक महिला की मौत से जुड़ा है। आरोप के मुताबिक, चिंतामणि उर्फ चिंटू पटेल ने नशे की हालत में महिला को धक्का दिया था, जिसके बाद वह ईंटों पर गिर गई और उसकी मौत हो गई। महिला ने मौत से पहले अपने पति को बताया था कि आरोपी ने उसके साथ मारपीट की थी।

मामले की सुनवाई के बाद निचली अदालत ने सितंबर 2022 में चिंतामणि को हत्या का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने नवंबर 2024 में दोषसिद्धि को हत्या से बदलकर गैर-इरादतन हत्या की श्रेणी में कर दिया और सजा घटाकर 10 साल कर दी। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में हत्या का मकसद और पूर्व साजिश साबित नहीं होने समेत अन्य पहलुओं पर विचार किया था।

IPC की धारा 304 के भाग एक और दो में क्या अंतर है?

धारा 304, भाग एक: ऐसे मामलों से संबंधित है, जहां गैर-इरादतन हत्या में मृत्यु कारित करने या ऐसी चोट पहुंचाने का इरादा शामिल हो, जिससे मृत्यु होने की आशंका हो।

धारा 304, भाग दो: ऐसे मामलों से संबंधित है, जहां आरोपी को अपने कृत्य से मृत्यु होने की आशंका का ज्ञान हो, लेकिन मृत्यु कारित करने का इरादा न हो।

सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी का प्रमुख कारण यही था कि हाई कोर्ट के फैसले में इन कानूनी प्रावधानों और मामले के तथ्यों का आकलन किस तरह किया गया।

अब सुप्रीम कोर्ट में आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और चिंतामणि पटेल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत इस बात पर विचार करेगी कि हाई कोर्ट का फैसला रद्द कर निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा बहाल की जानी चाहिए या नहीं। फिलहाल, शीर्ष अदालत की टिप्पणी के बाद मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है।

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