EMI बढ़ने का खतरा! RBI बढ़ा सकता है Repo Rate, 6% तक पहुंचने की आशंका

होम लोन और दूसरे फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज की EMI चुकाने वालों के लिए आने वाले दिनों में मुश्किल बढ़ सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 5 से 7 अक्टूबर 2026 तक होनी है और बाजार में रेपो रेट बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

पहली बार 2023 के बाद बढ़ सकता है रेपो रेट
RBI ने पिछली चार MPC बैठकों में रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है। हालांकि अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82% हो गई, जो RBI के 4% लक्ष्य से लगातार तीसरे महीने ऊपर रही। बढ़ती खाद्य और ऊर्जा कीमतों के साथ कच्चे तेल की कीमतों ने भी महंगाई का दबाव बढ़ाया है।

अर्थशास्त्रियों के बीच अक्टूबर में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिससे रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% हो सकता है। कुछ अनुमानों में दिसंबर तक एक और बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है।

6% तक पहुंचने का कितना खतरा?
कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि महंगाई और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के कारण आने वाले महीनों में RBI दरों में और बढ़ोतरी कर सकता है। मॉर्गन स्टेनली ने अप्रैल 2027 तक रेपो रेट 6.25% तक पहुंचने का अनुमान लगाया है, जबकि अन्य अनुमानों में मौजूदा चक्र के दौरान 50-75 बेसिस प्वाइंट तक बढ़ोतरी की बात कही गई है।

EMI पर पड़ेगा सीधा असर
अगर RBI रेपो रेट बढ़ाता है तो रेपो से जुड़े फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन और अन्य कर्ज की ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो सकती है। इसका असर या तो EMI बढ़ने या फिर समान EMI के साथ लोन की अवधि बढ़ने के रूप में सामने आ सकता है। हालांकि वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि बैंक RBI की बढ़ोतरी को ग्राहकों तक कितनी जल्दी और कितनी मात्रा में पहुंचाते हैं।

RBI का अंतिम फैसला 7 अक्टूबर को आएगा। फिलहाल 6% तक रेपो रेट पहुंचने की बात एक संभावित अनुमान है, कोई तय फैसला नहीं।

‘दृश्यम 3’ का बॉक्स ऑफिस पर धमाका, 150 करोड़ के पार पहुंची कमाई; 2026 की दूसरी सबसे बड़ी ओपनर

अजय देवगन की फिल्म ‘दृश्यम 3: द कन्क्लूजन’ ने रिलीज होते ही बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त रफ्तार पकड़ ली है। फिल्म ने अपने ओपनिंग वीकेंड में भारत में 150 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है। तीसरे दिन तक फिल्म की इंडिया नेट कमाई करीब 154 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

2026 की दूसरी सबसे बड़ी ओपनिंग
‘दृश्यम 3’ ने रिलीज के पहले ही दिन शानदार प्रदर्शन करते हुए 2026 की दूसरी सबसे बड़ी हिंदी ओपनर का रिकॉर्ड अपने नाम किया। फिल्म ने पहले दिन भारत में करीब 66.75 करोड़ रुपये नेट कमाए, जबकि वर्ल्डवाइड ओपनिंग करीब 95 करोड़ रुपये रही।

‘बॉर्डर 2’ समेत कई फिल्मों को छोड़ा पीछे
फिल्म की शानदार शुरुआत ने ‘बॉर्डर 2’, ‘मिर्जापुर: द मूवी’ और ‘आवारापन 2’ जैसी फिल्मों के ओपनिंग डे आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया। ट्रेड रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘दृश्यम 3’ ने कई बड़ी फिल्मों के रिकॉर्ड तोड़े हैं और अजय देवगन के करियर की भी सबसे बड़ी ओपनर बन गई है।

200 करोड़ की ओर बढ़ी फिल्म
गांधी जयंती के मौके पर रिलीज हुई इस क्राइम थ्रिलर को दर्शकों का मजबूत रिस्पॉन्स मिल रहा है। दूसरे दिन तक फिल्म की भारत में नेट कमाई 115.50 करोड़ रुपये पहुंच गई थी और वर्ल्डवाइड कलेक्शन करीब 177 करोड़ रुपये हो चुका था। अब फिल्म की नजर 200 करोड़ के आंकड़े पर है।

‘दृश्यम 3’ में अजय देवगन के साथ तब्बू, श्रिया सरन, इशिता दत्ता, प्रकाश राज और जयदीप अहलावत अहम भूमिकाओं में हैं। फिल्म का निर्देशन अभिषेक पाठक ने किया है।

स्थायी समिति की दोबारा कमान मिलने पर खुश हुए शशि थरूर, बोले- भारत के भविष्य पर गंभीर चर्चा का इंतजार

कांग्रेस सांसद शशि थरूर को एक बार फिर संसद की विदेश मामलों की स्थायी समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। संसदीय समितियों के पुनर्गठन के बाद मिली इस जिम्मेदारी पर थरूर ने खुशी जताई और इसे सम्मान की बात बताया।

थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि उन्हें विदेश मामलों की संसदीय समिति के अध्यक्ष के रूप में अपनी जिम्मेदारी जारी रखने का सम्मान मिला है। उन्होंने कहा कि वह मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत के भविष्य के रास्ते पर गंभीर और रचनात्मक चर्चा के लिए उत्सुक हैं।

31 सदस्यीय समिति में कई प्रमुख सांसद
विदेश मामलों की स्थायी समिति में लोकसभा से 21 और राज्यसभा से 10 सदस्य शामिल हैं। समिति में असदुद्दीन ओवैसी, रविशंकर प्रसाद, बांसुरी स्वराज, अभिषेक बनर्जी, दीपेंद्र सिंह हुड्डा और अरुण गोविल समेत कई सांसद शामिल हैं।

संसदीय समितियों का नया कार्यकाल 26 सितंबर 2026 से प्रभावी माना गया है। थरूर को दोबारा जिम्मेदारी मिलने के बाद विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़े मुद्दों पर समिति की भूमिका पर नजर रहेगी।

चुनाव प्रचार में बच्चे के इस्तेमाल का आरोप, उदयनिधि स्टालिन पर FIR दर्ज

तमिलनाडु के धारापुरम विधानसभा उपचुनाव के बीच विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया है। तिरुपुर जिला पुलिस के अनुसार, चुनाव प्रचार के दौरान कथित तौर पर एक बच्चे को राजनीतिक गतिविधि में शामिल किया गया था। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब धारापुरम सीट पर आदर्श आचार संहिता लागू है।

पेरियार की प्रतिमा के पास हुई थी सभा
पुलिस के मुताबिक, शनिवार को धारापुरम शहर में पेरियार की प्रतिमा के पास उदयनिधि स्टालिन की चुनावी सभा हुई थी। आरोप है कि इस दौरान एक बच्चे को प्रचार वाहन पर बुलाकर मंच से बोलने का मौका दिया गया। पुलिस का कहना है कि बच्चे से मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी भी कराई गई।

चुनाव आयोग के निर्देशों का हवाला
पुलिस ने कहा कि चुनाव आयोग के निर्देशों के तहत राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को चुनाव संबंधी गतिविधियों में बच्चों को शामिल करने से बचना होता है। इसी आधार पर धारापुरम पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई है। हालांकि, पुलिस ने अभी बच्चे की उम्र या पहचान और उसके कथित बयान का विवरण सार्वजनिक नहीं किया है।

6 अक्टूबर को है धारापुरम उपचुनाव
धारापुरम विधानसभा सीट पर 6 अक्टूबर को मतदान होना है, जबकि चुनाव प्रचार 4 अक्टूबर को समाप्त होगा। ऐसे में मतदान से ठीक पहले उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ दर्ज यह मामला चुनावी माहौल में चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और आरोपों को जांच पूरी होने से पहले अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।

वैभव सूर्यवंशी पर कप्तान श्रेयस अय्यर का बड़ा बयान, बोले- समय आने पर भारतीय क्रिकेट पर करेंगे राज

भारतीय टी20 टीम के कप्तान श्रेयस अय्यर ने युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर बड़ा बयान दिया है। वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 सीरीज से पहले अय्यर ने 15 वर्षीय वैभव की जमकर तारीफ की और उनके भविष्य को लेकर बड़ी बात कही।

अय्यर के मुताबिक वैभव मैदान के बाहर बेहद शांत और सहज स्वभाव के हैं, जबकि मैदान पर उनका अंदाज पूरी तरह अलग नजर आता है। वह बेहद आक्रामक और निडर बल्लेबाजी करते हैं। अय्यर ने बताया कि वह वैभव से क्रिकेट के अलावा उनके परिवार, जीवनशैली और दूसरी चीजों पर बातचीत करते हैं, ताकि युवा खिलाड़ी खुद को सहज महसूस कर सके।

‘सही समय आने पर छा जाएगा वैभव’
श्रेयस अय्यर ने कहा कि वैभव में भारतीय क्रिकेट पर बड़ा प्रभाव डालने की क्षमता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि टीम में अनुभवी सलामी बल्लेबाजों की मौजूदगी के कारण वैभव को लगातार मौके नहीं मिल पा रहे हैं, लेकिन जब उनका समय आएगा तो वह भारतीय क्रिकेट में अपना दबदबा कायम कर सकते हैं।

वैभव ने हाल ही में एशियन गेम्स में भारतीय टीम के लिए ओपनिंग की थी, जहां भारत ने स्वर्ण पदक जीता। अब वेस्टइंडीज के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज में भी वह भारतीय टीम का हिस्सा हैं। ऐसे में कप्तान के इस बयान से युवा बल्लेबाज के प्रशंसकों की उम्मीदें और बढ़ गई हैं।

CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 20 साल पुराने केस में जांच के आदेश, मलेशियाई इंजीनियर की आत्महत्या से जुड़ा मामला

केरल सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से जुड़े करीब 20 साल पुराने मामले में विजिलेंस जांच के आदेश दिए हैं। केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने यह कार्रवाई 2006 में कुमार के लोक निर्माण विभाग (PWD) सचिव रहते हुए सामने आए कथित अनियमितताओं के आरोपों के संबंध में की है।

यह मामला केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (KSTP) की सड़क परियोजना से जुड़ा बताया जा रहा है। परियोजना से जुड़े मलेशियाई सिविल इंजीनियर ली सी बीन की आत्महत्या के बाद उस समय जांच हुई थी। रिपोर्टों के मुताबिक, मृतक के सुसाइड नोट में ज्ञानेश कुमार का नाम भी आया था। हालांकि, जांच का आदेश आरोपों की पुष्टि नहीं करता, बल्कि पुराने मामले और कथित अनियमितताओं की दोबारा जांच का रास्ता खोलता है।

शिकायत के बाद फिर खुली पुरानी फाइल
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कांग्रेस नेता मलयिनकीझु वेणुगोपाल की शिकायत के बाद केरल गृह विभाग ने 2006 की प्रारंभिक विजिलेंस जांच से जुड़े रिकॉर्ड मंगवाए। आरोपों में सरकारी कामों के ठेके देने में कथित अनियमितताओं और तत्कालीन जांच पर बाहरी प्रभाव की आशंका की भी जांच की जाएगी।

यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब चुनाव आयोग और CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर SIR तथा मतदाता सूची के मुद्दे पर राजनीतिक विवाद चल रहा है। इसलिए पुराने मामले की दोबारा जांच ने राजनीतिक बहस को भी तेज कर दिया है।

अमेरिका में 50 देशों के नागरिकों पर वीजा बॉन्ड लागू, भारत को राहत; 20 हजार डॉलर तक जमा करने का नियम

अमेरिका ने कुछ देशों के नागरिकों के लिए वीजा बॉन्ड कार्यक्रम का दायरा बढ़ाते हुए 50 देशों को इसमें शामिल किया है। इन देशों के पात्र नागरिकों को अमेरिका के B1/B2 यानी बिजनेस और टूरिस्ट वीजा के लिए आवेदन करते समय 10 हजार, 15 हजार या 20 हजार डॉलर तक का बॉन्ड जमा करना पड़ सकता है। बॉन्ड की राशि का निर्धारण वीजा इंटरव्यू के दौरान कांसुलर अधिकारी करते हैं।

भारत को नहीं किया गया शामिल
भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए फिलहाल राहत की खबर है। अमेरिका के विदेश विभाग की 2 अक्टूबर 2026 को अपडेट की गई सूची में भारत का नाम शामिल नहीं है। हालांकि, दक्षिण एशिया के बांग्लादेश, भूटान और नेपाल इस व्यवस्था के दायरे में हैं।

बॉन्ड वीजा फीस से अलग
वीजा बॉन्ड सामान्य वीजा आवेदन शुल्क से अलग है। यह राशि कुछ शर्तों के तहत रिफंडेबल होती है। यदि यात्री अमेरिका के इमिग्रेशन नियमों और निर्धारित प्रवास अवधि का पालन करता है, तो बॉन्ड वापस किया जा सकता है। वहीं बॉन्ड जमा करना अपने आप में वीजा मंजूर होने की गारंटी नहीं है।

ओवरस्टे रोकने के लिए नियम
अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, यह व्यवस्था B1/B2 वीजा पर ओवरस्टे की दरों को ध्यान में रखकर लागू की गई है। संबंधित नियम 3 अगस्त 2026 को जारी अंतिम नियम के तहत स्थायी कार्यक्रम का हिस्सा बना।

अमेरिकी सरकार ने आवेदकों को यह भी चेतावनी दी है कि कांसुलर अधिकारी के निर्देश मिलने से पहले किसी वेबसाइट या माध्यम से बॉन्ड का भुगतान न करें। भुगतान के लिए आधिकारिक निर्देश और अमेरिकी ट्रेजरी के Pay.gov प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाता है।

गुजरात में मालधारी परिवारों के पुनर्वास की नई योजना: ₹15 लाख सहायता, 100 वर्ग गज प्लॉट और पशुधन के लिए भी प्रावधान

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गुजरात। गुजरात सरकार ने बर्दा वन्यजीव अभयारण्य (Barda Wildlife Sanctuary) में रहने वाले मालधारी परिवारों के स्वैच्छिक पुनर्वास के लिए नई योजना की घोषणा की है। योजना के तहत पात्र परिवारों को ₹15 लाख की एकमुश्त सहायता तथा 100 वर्ग गज तक का आवासीय प्लॉट उपलब्ध कराने का प्रावधान बताया गया है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने पोरबंदर में आयोजित 77वें वन महोत्सव के दौरान इस पहल की घोषणा की। सरकार की योजना में एक तरफ मालधारी परिवारों को बेहतर आवास और बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने तथा दूसरी तरफ बर्दा क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण को मजबूत करने का प्रयास किया गया है।

मालधारी कौन हैं और उनका जीवन कैसा है?

मालधारी गुजरात के उन पारंपरिक पशुपालक समुदायों के लिए इस्तेमाल होने वाला व्यापक शब्द है, जिनकी आजीविका लंबे समय से पशुपालन और प्राकृतिक चरागाहों से जुड़ी रही है।

मालधारी परिवारों के जीवन में पशुधन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि परिवार की आय, भोजन और आजीविका का आधार होता है। इसलिए ऐसे परिवारों का किसी वन क्षेत्र से दूसरे स्थान पर पुनर्वास सामान्य आवासीय स्थानांतरण से अलग विषय है।

यही वजह है कि बर्दा से पुनर्वास की योजना में आवास के साथ पशुधन और आजीविका को भी ध्यान में रखा गया है।

₹15 लाख और 100 वर्ग गज प्लॉट का क्या मतलब है?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बर्दा अभयारण्य क्षेत्र से स्वेच्छा से बाहर जाकर पुनर्वास स्वीकार करने वाले पात्र परिवारों को ₹15 लाख की एकमुश्त आर्थिक सहायता दी जाएगी।

इसके अलावा 100 वर्ग गज तक का आवासीय प्लॉट मुफ्त उपलब्ध कराने का प्रावधान है। पुनर्वास के लिए जमीन अभयारण्य और संबंधित Eco-Sensitive Zone से बाहर उपलब्ध कराने की व्यवस्था बताई गई है।

पशुधन रखने वालों के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान

मालधारी परिवारों की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक पशुओं के लिए जगह है। इसलिए योजना में पशुधन रखने वाले परिवारों के लिए अतिरिक्त जमीन का प्रावधान भी बताया गया है।

रिपोर्टों के अनुसार आवश्यकता के आधार पर 100 वर्ग गज तक अतिरिक्त प्लॉट दिया जा सकता है। हालांकि इस अतिरिक्त जमीन के बाजार मूल्य को परिवार को मिलने वाली ₹15 लाख की सहायता में समायोजित किया जाएगा।

बर्दा अभयारण्य इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

यह इस पूरी योजना को समझने का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।

गुजरात की पहचान एशियाई शेरों के लिए पूरी दुनिया में है। गिर के अलावा राज्य में शेरों के लिए दूसरे सुरक्षित आवास की आवश्यकता लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।

बर्दा वन्यजीव अभयारण्य को इसी उद्देश्य से शेरों के दूसरे आवास के रूप में विकसित किया जा रहा है। बर्दा पोरबंदर और देवभूमि द्वारका जिलों में स्थित है।

इसलिए सरकार के सामने दो समानांतर चुनौतियां हैं—

एक तरफ:
वन्यजीवों के लिए सुरक्षित और कम मानवीय दबाव वाला क्षेत्र तैयार करना।

दूसरी तरफ:
वहां लंबे समय से रहने वाले परिवारों को सम्मानजनक और टिकाऊ पुनर्वास देना।

क्या केवल घर देने से पुनर्वास पूरा हो जाएगा?

यही इस योजना से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक सवाल है।

किसी मालधारी परिवार के लिए पुनर्वास का अर्थ केवल नया मकान या जमीन मिलना नहीं है। यदि परिवार की पारंपरिक आजीविका पशुपालन है तो नए स्थान पर पशुओं के लिए जगह, चारा, पानी, बाजार और पशु चिकित्सा सुविधाएं भी जरूरी होंगी।

इसी तरह बच्चों की शिक्षा, परिवार के स्वास्थ्य, महिलाओं के रोजगार और नियमित आय के अवसर भी पुनर्वास की सफलता तय करेंगे।

इस दृष्टि से योजना का वास्तविक मूल्यांकन केवल ₹15 लाख की सहायता से नहीं, बल्कि पुनर्वास के बाद परिवारों की आय और जीवन-स्तर में होने वाले बदलाव से होगा।

योजना से क्या बदल सकता है?

यदि पुनर्वास प्रभावी तरीके से लागू होता है तो इसके कई संभावित सामाजिक और पर्यावरणीय परिणाम हो सकते हैं—

  • मालधारी परिवारों को बेहतर आवास मिल सकता है।
  • बच्चों को स्कूल और अन्य सुविधाओं तक बेहतर पहुंच मिल सकती है।
  • स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान हो सकती है।
  • परिवारों को नए रोजगार और आजीविका के अवसर मिल सकते हैं।
  • वन क्षेत्र पर मानवीय दबाव कम हो सकता है।
  • बर्दा क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण को मजबूती मिल सकती है।
  • शेरों के दूसरे सुरक्षित आवास के रूप में बर्दा का महत्व बढ़ सकता है।

पुनर्वास स्वैच्छिक क्यों रखा गया है?

योजना का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पुनर्वास स्वैच्छिक बताया गया है।

इसका अर्थ है कि पात्र परिवारों को योजना के तहत उपलब्ध लाभों के आधार पर पुनर्वास स्वीकार करने का विकल्प दिया जाएगा। ऐसे मामलों में परिवार की सहमति, पात्रता और दस्तावेजों का सत्यापन महत्वपूर्ण होगा।

यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय समुदायों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाना किसी भी पुनर्वास योजना की बड़ी चुनौती होती है।

योजना कौन लागू करेगा?

योजना के लिए राज्य और जिला स्तर पर समितियों की व्यवस्था बताई गई है। जिला स्तर पर संबंधित अधिकारी पात्र परिवारों की पहचान, दस्तावेजों के सत्यापन और पुनर्वास के इच्छुक परिवारों का विवरण तैयार करेंगे।

एक नजर में

विषय जानकारी
राज्य गुजरात
समुदाय मालधारी परिवार
पुनर्वास क्षेत्र बर्दा वन्यजीव अभयारण्य
पुनर्वास स्वैच्छिक
आर्थिक सहायता ₹15 लाख
आवासीय प्लॉट 100 वर्ग गज तक
अतिरिक्त जमीन पशुधन वाले परिवारों के लिए प्रावधान
प्रमुख उद्देश्य परिवारों का पुनर्वास और वन्यजीव संरक्षण
प्रमुख क्षेत्र पोरबंदर और देवभूमि द्वारका

जरूरी बात

यह योजना गुजरात के सभी मालधारी परिवारों के लिए सामान्य ₹15 लाख की योजना नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसका संबंध बर्दा अभयारण्य से स्वैच्छिक पुनर्वास के लिए पात्र परिवारों से है। अंतिम पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और लाभ लेने की शर्तें सरकार द्वारा जारी विस्तृत दिशा-निर्देशों पर निर्भर करेंगी।

गुजरात की मालधारी पुनर्वास योजना को केवल ₹15 लाख और 100 वर्ग गज जमीन की घोषणा के रूप में देखना अधूरा होगा। यह एक ऐसी पहल है जिसमें पारंपरिक पशुपालक समुदाय का पुनर्वास, ग्रामीण आजीविका, सामाजिक कल्याण और एशियाई शेरों का संरक्षण एक साथ जुड़े हुए हैं।

इस योजना की असली सफलता इस बात से तय होगी कि पुनर्वास के बाद मालधारी परिवारों को सम्मानजनक जीवन और स्थायी आजीविका कितनी मिलती है और बर्दा का वन्यजीव आवास कितना सुरक्षित बनता है।

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सलमान खान की ‘मातृभूमि’ को मिली हरी झंडी, सरकार से NOC के बाद रिलीज की बढ़ी उम्मीद

सलमान खान की बहुप्रतीक्षित वॉर ड्रामा फिल्म ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म के संशोधित वर्जन को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) मिल गया है। इसके साथ ही लंबे समय से अटकी फिल्म के सिनेमाघरों तक पहुंचने की उम्मीद बढ़ गई है।

फिल्म पहले ‘बैटल ऑफ गलवान’ नाम से बनाई जा रही थी और इसकी कहानी 2020 के गलवान घाटी में भारत-चीन सैनिकों के बीच हुए टकराव की पृष्ठभूमि पर आधारित है। फिल्म के कंटेंट और चीन के चित्रण को लेकर कथित आपत्तियों के बाद इसके रिलीज में देरी हुई थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, मेकर्स ने फिल्म में कई बदलाव किए हैं।

13 नवंबर की रिलीज पर नजर
NOC मिलने के बाद अब फिल्म के मेकर्स की नजर 13 नवंबर 2026 की संभावित रिलीज डेट पर बताई जा रही है। हालांकि यह तारीख अभी आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं हुई है। फिल्म को पहले CBFC के पास प्रमाणन के लिए भेजा जाएगा और सेंसर बोर्ड की मंजूरी के बाद ही रिलीज डेट पर अंतिम फैसला होगा।

फिल्म में किए गए बदलाव
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार की आपत्तियों के बाद फिल्म के नए वर्जन में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। सूत्रों के हवाले से दावा है कि संशोधित फिल्म में भारत-चीन संबंधों के सकारात्मक पहलुओं को भी जगह दी गई है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की मंजूरी के बाद अब अगला महत्वपूर्ण चरण CBFC सर्टिफिकेशन का है।

अपूर्व लाखिया के निर्देशन में बनी फिल्म
‘मातृभूमि’ का निर्देशन अपूर्व लाखिया ने किया है। फिल्म में सलमान खान के साथ चित्रांगदा सिंह भी अहम भूमिका में नजर आएंगी। फिल्म का निर्माण सलमा खान के प्रोडक्शन हाउस Salman Khan Films के बैनर तले किया गया है।

फिलहाल दर्शकों को आधिकारिक रिलीज डेट और CBFC की मंजूरी का इंतजार है। अगर प्रमाणन प्रक्रिया समय पर पूरी होती है, तो फिल्म नवंबर में सिनेमाघरों में दस्तक दे सकती है।

IISER भोपाल के विस्तारित ‘अत्रि’ परिसर का शिलान्यास, रिसर्च और इनोवेशन को मिलेगी नई दिशा

भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER) भोपाल में अत्याधुनिक शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए विस्तारित ‘अत्रि’ परिसर की आधारशिला रखी गई। कार्यक्रम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि रहे, जबकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति रही।

राज्य सरकार ने IISER भोपाल को नए परिसर के विकास के लिए 52 एकड़ भूमि आवंटित की है। प्रस्तावित अत्रि परिसर में उन्नत अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देने की योजना है।

AI, रोबोटिक्स और क्वांटम तकनीक पर रहेगा फोकस
IISER के अनुसार, नए परिसर में क्वांटम एवं उन्नत पदार्थ, ड्रोन तकनीक, सतत प्रणालियां एवं प्रौद्योगिकियां, मेडिकल डिवाइस एवं डायग्नोस्टिक्स जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही AI और रोबोटिक्स स्कूल विकसित करने की भी योजना है।

मध्य भारत में रिसर्च और इनोवेशन का प्रमुख केंद्र बनाने की तैयारी
प्रस्तावित परिसर को रिसर्च और इनोवेशन पार्क के रूप में विकसित करने की योजना है। संस्थान के मुताबिक इसका उद्देश्य शोध को नवाचार, कौशल विकास और उद्योग के साथ सहयोग से जोड़ना है। इससे विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को उभरती तकनीकों के क्षेत्र में काम करने के लिए नया प्लेटफॉर्म मिलने की उम्मीद है।

कार्यक्रम के दौरान IISER परिसर में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण भी किया गया। नए परिसर के निर्माण से भोपाल में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित शोध गतिविधियों के विस्तार को गति मिलने की उम्मीद है।

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