डिप्टी CM अजीत पवार की चार्टर्ड प्लेन क्रैश में मौत

डिप्टी CM अजीत पवार की चार्टर्ड प्लेन क्रैश में मौत
मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति से एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है। उपमुख्यमंत्री (डिप्टी CM) अजीत पवार का एक प्राइवेट चार्टर्ड विमान बुधवार सुबह बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में उपमुख्यमंत्री (डिप्टी CM) अजीत पवार की मौत हो गई हैं।

यह हादसा उस वक्त हुआ जब विमान बारामती हवाई अड्डे के रनवे पर उतर रहा था। बताया जा रहा है कि लैंडिंग के दौरान विमान अनियंत्रित होकर रनवे से उतर गया, जिसके बाद उसमें आग लग गई और वह पूरी तरह जल गया। विमान में अजीत पवार के साथ उनके निजी सहायक, सुरक्षाकर्मी और प्लेन का स्टाफ भी मौजूद था।

चुनाव प्रचार के लिए जा रहे थे बारामती
सूत्रों के मुताबिक, डिप्टी सीएम अजीत पवार जिला परिषद चुनावों के सिलसिले में एक जनसभा को संबोधित करने के लिए बारामती जा रहे थे। उन्होंने इसके लिए एक निजी विमान किराए पर लिया था। हालांकि, अपनी मंजिल पर पहुंचने से पहले ही यह दुखद हादसा हो गया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंच गए हैं।
पांच बार संभाल चुके हैं डिप्टी सीएम का पद

अजीत पवार महाराष्ट्र की राजनीति का एक बड़ा चेहरा हैं और पिछले 13 वर्षों में पांच बार उपमुख्यमंत्री का पद संभाल चुके हैं। उनका राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है।

उनका कार्यकाल इस प्रकार रहा:
1. पहली बार: 10 नवंबर 2010 से 25 सितंबर 2012 (CM पृथ्वीराज चव्हाण)
2. दूसरी बार: 25 अक्टूबर 2012 से 26 सितंबर 2014 (CM पृथ्वीराज चव्हाण)
3. तीसरी बार: 23 नवंबर 2019 से 26 नवंबर 2019 (CM देवेंद्र फडणवीस)
4. चौथी बार: 30 दिसंबर 2019 से 29 जून 2022 (CM उद्धव ठाकरे)
5. पांचवीं बार: 2 जुलाई 2023 से अब तक (CM एकनाथ शिंदे)

सम्राट विक्रमादित्य के योगदान से नई पीढ़ी को परिचित कराना आवश्यक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

सम्राट विक्रमादित्य के योगदान से नई पीढ़ी को परिचित कराना आवश्यक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सम्राट विक्रमादित्य के साहस और सृजन ने शौर्य और संगठन के नए प्रतिमान स्थापित करते हुए भारतीय संस्कृति को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सम्राट विक्रमादित्य पर केंद्रित विक्रमोत्सव में उनके व्यक्तित्व के सभी आयामों का प्रभावी प्रकटीकरण सुनिश्चित किया जाए। नई पीढ़ी को सम्राट विक्रमादित्य के योगदान से परिचित कराना, भारतीय ज्ञान और सांस्कृतिक परंपरा की निरंतरता के लिए आवश्यक है। विक्रमोत्सव देश-प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक चेतना का प्रभावशाली प्रतीक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिये कि आयोजन पूर्ण भव्यता, सुव्यवस्था और सांस्कृतिक गरिमा के उच्चतम मानकों के अनुरूप हो। उन्होंने उज्जैन में होने वाले विक्रमोत्सव-2026 की तैयारियों के संबंध में समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में बैठक के दौरान यह निर्देश दिए। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आयोजन की समग्र रूपरेखा, व्यवस्थाओं एवं विभागीय समन्वय की विस्तार से समीक्षा की। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन, अपर मुख्य सचिव संस्कृति शिवशेखर शुक्ला तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन प्रदेश तथा अन्य राज्यों के प्रमुख नगरों में भी किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्कूल-कालेजों में सम्राट विक्रमादित्य पर केंद्रित सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उज्जैन में कृषक कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत हो रहे विक्रमोत्सव में कृषि पर केंद्रित प्रदर्शनी तथा अन्य गतिविधियां आयोजित की जाएं। प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने, नरवाई के प्रबंधन, दुग्ध उत्पादक स्वस्थ पशुओं की प्रतियोगिता और उद्यानिकी को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित गतिविधियों को शामिल किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि सम्राट विक्रामादित्य के वैज्ञानिक पक्ष पर केंद्रित आयोजनों में विज्ञान महाविद्यालय, इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों को भी जोड़ा जाए। सम्राट विक्रमादित्य अलंकरण में भारत सरकार की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए उसे भव्य और राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया जाए।

मुख्यमंत्री साय से क्रेडाई और रियल एस्टेट के प्रतिनिधिमंडल ने की सौजन्य मुलाकात

मुख्यमंत्री साय से क्रेडाई और रियल एस्टेट के प्रतिनिधिमंडल ने की सौजन्य मुलाकात
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में क्रेडाई और रियल एस्टेट के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की।

इस दौरान क्रेडाई प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री साय को आने वाले माह में विकसित भारत 2047 की थीम पर राजधानी रायपुर में आयोजित होने वाले नेशनल कन्वेशन के लिए आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री साय ने सफल आयोजन के लिए अग्रिम बधाई एवं शुभकामनाएं दी।

इस अवसर पर क्रेडाई के अध्यक्ष पंकज लाहोटी, संजय रहेजा, अभिषेक बछावत सहित अन्य प्रमुख पदाधिकारीगण बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

पंचमढ़ी नगर एवं प्रदेश के 9 टाइगर रिज़र्व के अंतर्गत बफर क्षेत्रों का विकास की मंत्रि-परिषद ने स्वीकृति दी

पंचमढ़ी नगर एवं प्रदेश के 9 टाइगर रिज़र्व के अंतर्गत बफर क्षेत्रों का विकास की मंत्रि-परिषद ने स्वीकृति दी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा पंचमढ़ी नगर के साडा के नियंत्रण वाली नजूल क्षेत्र रकबा 395.931 हैक्टेयर भूमि को संशोधित कर रकबा 395.939 हैक्टेयर भूमि को पचमढ़ी अभयारण्य क्षेत्र से बाहर कर राजस्व नजूल घोषित करने की स्वीकृति दी गयी है।

मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश के 9 टाइगर रिज़र्व के अंतर्गत बफर क्षेत्रों का विकास करने के लिए आगामी 5 वर्षों, वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक के लिए कुल 390 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। इस नवीन योजना अंतर्गत बफर क्षेत्रों के विकास के तहत संवेदनशील क्षेत्रों में चेनलिंक फेसिंग, वन्यप्राणी सुरक्षा, चारागाह विकास, जल स्त्रोतों का विकास, अग्नि सुरक्षा, वन्य प्राणी उपचार एवं स्वास्थ्य परीक्षण और कौशल उन्नयन जैसे कार्य किये जायेंगे।

मंत्रि-परिषद द्वारा नर्मदापुरम में 2 सिंचाई परियोजनाओं के लिए 215 करोड़ 47 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। स्वीकृति अनुसार तवा परियोजना (दायीं तट नहर) की बागरा शाखा नहर होज सिंचाई परियोजना की लागत 86 करोड़ 76 लाख रूपये, प्रस्तावित सिंचाई क्षेत्र 4200 हैक्टेयर की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गयी। परियोजना से नर्मदापुरम जिले की बाबई एवं सोहागपुर तहसील के 33 ग्रामों को सिंचाई सुविधा का लाभ होगा।

नर्मदापुरम जिले की तवा परियोजना की दांयी तट नहर से पिपरिया ब्रांच केनाल होज सिंचाई परियोजना की लागत 128 करोड़ 71 लाख रूपये, प्रस्तावित सिंचाई क्षेत्र 6000 हैक्टेयर की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गयी है। परियोजना से नर्मदापुरम जिले की सोहागपुर तहसील के 30 ग्राम लाभान्वित होंगे।

मंत्रि-परिषद द्वारा जनजातीय कार्य विभाग, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग और राजस्व विभाग की वर्ष 2026-27 से वर्ष 2030-31 की अवधि के लिए 17 योजनाओं की निरंतरता के लिए 17,864 करोड़ 26 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई। स्वीकृति अुनसार जनजातीय कार्य विभाग की शुल्क की प्रतिपूर्ति, परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण, स्काउट गाइड, परिवहन, स्वास्थ्य, विभिन्न पुरस्कार आदि 15 योजनाओं के लिए 377 करोड़ 26 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई। इसी तरह खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की मुख्यमंत्री कृषक फसल उपार्जन सहायता के लिए 15 हजार करोड़ रूपये और राजस्व विभाग की तहसील, जिला संभाग के कार्यालय एवं आवासीय भवन का निर्माण योजनाओं के लिए 2,487 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है।

मंत्रि-परिषद द्वारा पिछड़े वर्ग के “बेरोजगार युवक-युवतियों को विदेश में रोजगार उपलब्ध कराने की योजना 2022” के स्थान पर संशोधित योजना “अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं के लिए विदेश में रोजगार नियोजन योजना 2025” की स्वीकृति प्रदान की गई। स्वीकृति अनुसार आगामी 3 वर्ष में 45 करोड़ रुपये व्यय किया जाकर प्रतिवर्ष पिछड़े वर्ग के 600 युवाओं को रोजगार के लिए विदेश भेजा जाएगा।

गौमाता के संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकार है प्रतिबद्ध- मुख्यमंत्री साय

गौमाता के संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकार है प्रतिबद्ध- मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में गौमाता पर बनी पहली फिल्म-‘गोदान’ का ट्रेलर लॉन्च किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गौमाता के संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। गौमाता ना सिर्फ आध्यात्मिक रूप से पूजनीय हैं बल्कि गाय का आर्थिक और वैज्ञानिक दृष्टि से भी बहुत महत्व है। मुख्यमंत्री साय ने फिल्म-‘गोदान’ को छत्तीसगढ़ में टैक्स फ्री किए जाने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री साय ने फिल्म-‘गोदान’ के ट्रेलर लॉन्च के अवसर पर कहा कि छत्तीसगढ़ में गौ संवर्धन के लिए बहुत कार्य हो रहा है। गौशाला में गायों के चारा के लिए दी जाने वाली अनुदान राशि को 20 रुपए से बढ़ाकर 35 रुपए किया गया है साथ ही गौशाला को अब 25 लाख रुपए की सहायता राशि दी जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा गोधाम भी बनाए जा रहे हैं जहां घुमंतू गौवंश की उचित देखभाल की जा रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मान्यता है कि गौमाता में 33 कोटि देवी- देवताओं का वास रहता है। हर अनुष्ठान से पहले पंचगव्य का उपयोग किया जाता है। ये बहुत खुशी की बात है कि गौमाता पर केंद्रित पहली फिल्म-‘गोदान’ का आज ट्रेलर लॉन्च किया जा रहा है। इस फिल्म के माध्यम से सभी को गौमाता के महत्व को और बेहतर तरीके से समझने का अवसर मिलेगा। मैं इस फिल्म से जुड़े सभी लोगों को बहुत बधाई देता हूं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमें गौमाता के महत्व के प्रति जन-जन को जागरूक करना है। गाय के गोबर से बनी जैविक खाद ही ऑर्गेनिक खेती का आधार है। दो घंटे 9 मिनट की इस फिल्म के माध्यम से गौ संवर्धन का संदेश दर्शकों तक पहुंचेगा। फिल्म का माध्यम एक बहुत सशक्त माध्यम है जिसके द्वारा एक बड़े दर्शक वर्ग तक सकारात्मक संदेश को पहुंचाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री साय ने फिल्म के पोस्टर तथा गीत ‘ गौमाता के प्राणों को बचा लो देशवासियों’ का भी लॉन्च किया। उन्होंने पंचगव्य उत्पाद के गिफ्ट पैक का भी विमोचन किया। गौमाता की महत्ता को अभिव्यक्त करने वाली कामधेनु फिल्म प्रोडक्शंस की फिल्म गोदान 6 फरवरी को भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

इस अवसर पर अजीत महापात्र, शांतनु शुक्ला, फिल्म के निर्माता एवं निर्देशक विनोद चौधरी, डॉ आईपी सिंह, सुबोध राठी सहित अन्य गणमान्यजन और मीडिया के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की घोषणा की

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की घोषणा की
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर दुनिया भर में चर्चा तेज है. यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ करार देते हुए कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है और आने वाले समय में भारत-EU की रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी. वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस समझौते को दोनों क्षेत्रों के लिए बड़े अवसर खोलने वाला बताया है.

‘आज इतिहास बना रहे हैं भारत और यूरोप’ : उर्सुला वॉन डेर लेयेन
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा, ‘आज यूरोप और भारत इतिहास बना रहे हैं. हमने ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ को पूरा कर लिया है. दो अरब लोगों के लिए एक मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाया गया है, जिससे दोनों पक्षों को फायदा होगा. यह तो बस शुरुआत है. हम अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेंगे.’

पीएम मोदी ने किया FTA पर हस्ताक्षर का ऐलान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर की घोषणा की. ‘भारतीय ऊर्जा सप्ताह’ को ऑनलाइन संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं आपको एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के बारे में बता रहा हूं. कल भारत और यूरोप के बीच एक बड़ा समझौता हुआ है.’ प्रधानमंत्री ने सभी को इस समझौते की बधाई दी और कहा कि इसे दुनिया भर में ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है.

वैश्विक जीडीपी का 25% और व्यापार का एक तिहाई हिस्सा
पीएम मोदी ने बताया कि भारत-EU का यह समझौता वैश्विक जीडीपी के करीब 25 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के एक तिहाई हिस्से को कवर करता है. उन्होंने कहा कि यह दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तालमेल का शानदार उदाहरण है.

140 करोड़ भारतीयों के लिए नए अवसर
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस समझौते से न सिर्फ यूरोप बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के लिए भी नए अवसर पैदा होंगे. उन्होंने बताया कि यह समझौता ब्रिटेन और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के साथ हुए व्यापार समझौतों का पूरक होगा, जिससे वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन मजबूत होगी.

विनिर्माण और सेवा क्षेत्र को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
पीएम मोदी ने कहा कि यह मुक्त व्यापार समझौता भारत के विनिर्माण क्षेत्र को नई रफ्तार देगा और सेवा क्षेत्र का भी विस्तार करेगा. उन्होंने विशेष रूप से वस्त्र, रत्न एवं आभूषण, चमड़ा और जूते-चप्पल जैसे क्षेत्रों से जुड़े युवाओं और कारोबारियों को बधाई दी.

दुनिया के निवेशकों का भारत पर भरोसा और मजबूत होगा
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस समझौते से दुनिया भर के व्यवसायों और निवेशकों का भारत पर भरोसा और बढ़ेगा. उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत आज हर क्षेत्र में वैश्विक साझेदारी के साथ आगे बढ़ रहा है.

माननीय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, छत्तीसगढ़ का गणतंत्र दिवस संदेश

माननीय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, छत्तीसगढ़ का गणतंत्र दिवस संदेश
जहाँ तक मेरी नजरें जा रही हैं, हर तरफ तिरंगे की शान दिख रही है। माँ भारती की हर संतान उल्लास से भरी हुई दिखती है। हर नागरिक के हृदय में राष्ट्रप्रेम हिलोरे ले रहा है। हर नागरिक के भीतर राष्ट्र निर्माण के संकल्प की ज्योति जल रही है। माँ भारती के ऐसे वीर संतानों का गणतंत्र दिवस के शुभअवसर पर मैं हार्दिक अभिनंदन करता हूँ।
आज का दिन राष्ट्रीय पर्व की खुशियां मनाने का दिन है। आज का दिन राष्ट्र के लिए बलिदान देने वाले हमारे महापुरुषों को याद करने का दिन है। हम सब कृतज्ञ हैं, उन सभी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के प्रति जिन्होंने आजादी के लिए कठिन संघर्ष किया और भारत को दुनिया का सबसे बड़ा गणतंत्र बनाया।
आज के दिन हम अपने संविधान निर्माताओं का स्मरण करते हैं। बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा बनाया गया हमारा संविधान बाबा गुरु घासीदास जी द्वारा दिये गये मनखे-मनखे एक समान के संदेश को आत्मसात करने की प्रेरणा देता है। भारतीय परंपरा में तुलसीदास और कबीरदास जैसे महान संतों ने राजव्यवस्था में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सबसे ऊपर रखा था। हमारा संविधान हर नागरिक को इसका अधिकार प्रदान करता है।

भारतीय गणतंत्र ने एक ऐसा खुला समाज बनाया है, जिसमें हर नागरिक राष्ट्र निर्माण के लिए अपने विचार रख सकता है। आज के दिन देश के सभी नागरिक संविधान द्वारा प्रदत्त इन अधिकारों का उत्सव मनाते हैं।

अभी हमने राज्य स्थापना का रजत महोत्सव मनाया है। हमारे पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने हमें छत्तीसगढ़ राज्य की सौगात दी थी। हमने उनके जन्मशताब्दी वर्ष को अटल निर्माण वर्ष के रूप में मनाया है।

रजत जयंती के मौके पर संविधान के मंदिर हमारे विधानसभा के नये भवन का लोकार्पण यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के हाथों सम्पन्न हुआ है।

हमारी लोकतांत्रिक आस्था का प्रतीक यह भवन सही मायने में छत्तीसगढ़ी अस्मिता का प्रतिनिधित्व करता है। धान की बालियों की डिजाइन और बस्तर-सरगुजा की लोककला से समृद्ध इस भवन की वास्तुकला में छत्तीसगढ़ की माटी का प्रतिबिम्ब झलकता है।

25 वर्ष पूर्व रायपुर के राजकुमार कॉलेज के जशपुर हॉल में हमारी विधानसभा का पहला सत्र आयोजित हुआ था। राज्य के साथ ही विधानसभा ने भी अपनी समृद्ध परंपरा की रजत जयंती मनाई है। यहां ऐसी अनेक लोकतांत्रिक परंपराएं स्थापित हुईं जिनका अनुकरण अन्य राज्यों की विधानसभा ने भी किया।

इस वर्ष हमने राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् की 150वीं जयंती भी मनाई। हमने नवनिर्मित विधानसभा भवन में राष्ट्र निर्माण में वन्दे मातरम् के योगदान पर विशेष चर्चा भी की।

सुकमा जिले के कोंटा से लेकर मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के सीतामढ़ी हरचौका तक प्रदेश के हर कोने में लोगों ने वन्दे मातरम् का सस्वर गान किया। माँ भारती की प्रशंसा में लिखे गये हमारे राष्ट्रगीत का यह सम्मान बंकिम दा को सच्ची श्रद्धांजलि है।

यह वर्ष डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी जी का 125 वां जयंती वर्ष भी है। एक राष्ट्र, एक निशान, एक विधान के माध्यम से उन्होंने माँ भारती की अखंडता के लिए बलिदान दिया। जब जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाई गई तो यह राष्ट्र की ओर से डॉ. मुखर्जी को सच्ची श्रद्धांजलि थी।

इस बार हमने जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150 वीं जयंती भी मनाई।

भगवान बिरसा मुंडा ने जनजातीय समाज में आत्मगौरव का भाव जगाया। उन्होंने ब्रिटिश शोषण और औपनिवेशिक कानूनों के विरुद्ध कड़ा संघर्ष किया और अपना बलिदान दिया।

छत्तीसगढ़ की धरती भी ब्रिटिश शोषण के विरुद्ध जनजातीय विद्रोहों की गवाह रही है। स्वतंत्रता संग्राम में जंगल सत्याग्रह के माध्यम से जनजातीय नायकों ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
छत्तीसगढ़ के जनजातीय नायकों के आजादी की लड़ाई में किये गये बलिदान की कहानी हम डिजिटल माध्यम से सुना रहे हैं। शहीद वीरनारायण सिंह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का लोकार्पण भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर किया। यह देश का पहला डिजिटल संग्रहालय है।

राष्ट्र की अस्मिता के लिए बलिदान देने वाले हमारे जनजातीय नायकों के चरित्र को दिखाने वाला यह म्यूजियम आज की पीढ़ी के लिए तीर्थस्थल की तरह है।

यहां बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं और अपने नायकों के प्रति श्रद्धा भाव से भर जाते हैं।

शहीदों की चिताओं पर जुड़ेंगे हर बरस मेले । वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा ।।

आज के दिन हम अभिनंदन करते हैं, अपने वीर जवानों का, जिन्होंने अपनी जान की बाजी लगाकर अपनी धरती को माओवाद के खतरे से मुक्त करने का बीड़ा उठाया।

माओवादी हिंसक विचारधारा देश के लोकतंत्र को बड़ी चुनौती है। इनकी आस्था संविधान में नहीं, राष्ट्र की अस्मिता में नहीं, राष्ट्र की अस्मिता के प्रतीक चिन्हों में नहीं। इस कैंसर की तरह व्याधि का उपाय यही है कि इसे जड़ से नष्ट किया जाए।

प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी के मार्गदर्शन में हमने सुनियोजित रणनीति अपनाकर माओवादियों को चुनौती दी।

हमारे जवानों ने रात-दिन कठिन मौसम और दुर्गम परिस्थितियों में हर पल खतरे का सामना करते हुए एरिया डामिनेशन किया और अपने साहस तथा शौर्य से हर लक्ष्य को प्राप्त किया।

माओवादी हिंसा को समाप्त करने का यह बेहद कठिन लक्ष्य अब पूरा होने को है। इसी साल के मार्च महीने तक हम माओवाद को इस सुंदर धरती से जड़मुक्त कर देंगे।
खुशी की बात यह है कि अनेक लोग जो रास्ता भटक चुके थे, वे अब लोकतंत्र की मुख्यधारा में वापस लौट रहे हैं।
उन्होंने हथियार रख दिये और अपने हाथों में बाबा साहेब का संविधान थामा। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के देश में यह सबसे सुंदर तस्वीर देखने में आई और इसने संविधान की सत्यमेव जयते की भावना को पुष्ट किया।

कुछ महीनों पहले जब मैं एक कार्यक्रम में भाग लेने जगदलपुर गया था। वहां मैं बस्तर कैफे गया, यहां आत्मसमर्पित नक्सली महिलाएं अब कैफे संभालती हैं। हिंसा की राह छोड़कर लोगों की सेवा की राह में आने से उनके चेहरे पर जो खुशी मैंने देखी, उसे बयान करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं है।

हर काली अंधेरी रात के बाद नई सुबह होती है। अब नक्सलमुक्त क्षेत्र में विकास का सूरज दमक रहा है। बच्चों के चेहरे से भय का साया हट गया है, उनके हाथों में किताबें हैं। बस्तर को इस नये रूप में देखना बहुत अच्छा लगता है।

किसी राज्य की रजत जयंती आत्मावलोकन का अवसर भी है। इसकी कसौटी यह है कि पुरखों द्वारा बताये गये आदर्शों पर हम कितने खरे उतर पाए।

छत्तीसगढ़ का समाज अपने पुरखों द्वारा दिखाये राह पर चलते हुए सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास की भावना से छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा में जुटा हुआ है।

भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान छत्तीसगढ़ में विद्रोह की मशाल शहीद वीरनारायण सिंह जी जैसे शूरवीरों ने जलाई। उन्होंने न केवल अंग्रेजी औपनिवेशिक शासन का विरोध किया, अपितु एक ऐसी वैकल्पिक व्यवस्था की राह भी दिखाई, जो अंत्योदय के प्रति गहरी संवेदना रखती है।

उन्होंने जमाखोरी का विरोध कर अकाल के दौरान भूख से पीड़ित लोगों के पेट की ज्वाला शांत की। छत्तीसगढ़ का पीडीएस मॉडल शहीद वीरनारायण सिंह जी को सच्ची श्रद्धांजलि है।

हमारे यहां कहावत है कि- दुब्बर बर दू असाढ़। इस कहावत से किसान भाइयों की दिक्कतें स्पष्ट रूप से समझ आती है कि खेती-किसानी करना कितना कठिन कार्य है।
राज्य बनने के बाद हमारी सबसे बड़ी चुनौती थी, अन्नदाता का सुख और संतोष । इस रजत जयंती की यात्रा में हमने किसान भाइयों की मुस्कान उन्हें लौटाई है। आज छत्तीसगढ़ के किसान को धान का सबसे अच्छा मूल्य मिल रहा है।

हमारे ग्रामीण परिवेश में समृद्धि का आंकलन घरों के कोठार से होता है। कोठार अनाज से भरे हों, तो समझ जाइये कि समृद्धि हर ओर फैली हुई है।

हमारे प्रदेश का कोठार अर्थात हमारा धान का कटोरा, धान से लबालब है। राज्य बनने के बाद व्यवस्थित रूप से धान की खरीदी हुई, जब धान खरीदी आरंभ हुई तो इसका आंकड़ा 5 लाख मीट्रिक टन था, पिछली बार खरीदी का यह आंकड़ा 149 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया। हमने पिछले दो साल में किसान हितैषी योजनाओं के माध्यम से किसानों के खाते में डेढ़ लाख करोड़ रुपए अंतरित किये हैं।

हमारी सरकार किसानों के हित में फैसले लेती है। अटल सिंचाई योजना के तहत वर्षों से अपूर्ण और लंबित पड़ी 115 सिंचाई योजनाओं को पूर्ण करने हमने 28 सौ करोड़ रुपए की योजना की मंजूरी दी है।

प्रधानमंत्री जी ने दीवाली के मौके पर जो जीएसटी रिफार्म्स किये, उसका सबसे अधिक लाभ हमारे किसान भाइयों को मिला है। ट्रैक्टर और अन्य कृषि उपकरण काफी सस्ते हो गये। कृषि मशीनरी बेचने वाले कारोबारियों के लिए तो काफी व्यस्तता का समय रहा।

खेती-किसानी से संबंधित उत्पादों पर कर घटाने का सबसे बड़ा लाभ यह हो रहा है कि हमारे किसान भाई आधुनिक खेती को तेजी से अपना रहे हैं।

हमारे छत्तीसगढ़ का चावल 120 देशों में निर्यात होता है। लागत घटने और सरकार द्वारा अच्छा मूल्य मिलने से किसानों के लिए अपने उत्पादों को प्रतिस्पर्धी रखने में काफी मदद मिलती है।

हमारा देश अन्य देशों के साथ व्यापार वार्ता भी कर रहा है। यह वार्ता महाशक्तियों के साथ भी हो रही है। प्रधानमंत्री जी ने स्पष्ट कह दिया है कि जो भी व्यापार समझौते होंगे, उनमें किसानों का किसी तरह से अहित नहीं होने दिया जाएगा।

डबल इंजन की सरकार किसानों के मुद्दे पर कभी झुकती नहीं, किसानों के मुद्दे पर सिर उठाकर खड़ी रहती है और किसान भाइयों को उनका हक दिलाती है।

किसानों के साथ ही श्रमिक भाइयों की समृद्धि हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हमारी सरकार ने दो वर्षों में 29 लाख से अधिक श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से 8 सौ करोड़ रुपए से अधिक राशि अंतरित की है।

महिला सशक्तीकरण के उद्देश्य को देखते हुए रात की पाली में भी महिला श्रमिकों के सशर्त नियोजन का प्रावधान किया गया है। 2 वर्ष में ही कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम के तहत बीमित कामगारों की संख्या 4 लाख 60 हजार से बढ़कर 6 लाख 26 हजार हो गई है। केंद्र सरकार ने जिन 29 पुराने श्रम कानूनों की जगह 4 श्रम संहिताएं लाई हैं, श्रमिक भाइयों के हित में उनका तेजी से क्रियान्वयन किया जा रहा है।

हमारी सरकार ने दो साल पूरे किये हैं। मोदी जी की गारंटी को पूरा करते हुए हमने पहले कैबिनेट की बैठक में ही 18 लाख आवास स्वीकृत करने का निर्णय लिया। प्रदेश में अब तक 26 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किये जा चुके हैं।

लोगों को आवास उपलब्ध कराने का यह काम हम मिशन मोड में कर रहे हैं। मुझे आपको यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि हर दिन लगभग 2 हजार आवास प्रदेश में बनाये जा रहे हैं।

यह गति पूरे देश में सबसे अधिक है। आप सभी छत्तीसगढ़ में हो रही आवास क्रांति के गवाह हैं। खप्पर वाली छतें अब बीते दिन की बात हो गई, अब हर घर पक्का और बुनियादी सुविधा से युक्त है, जहां जलजीवन मिशन से शुद्ध जल मिल रहा है।

राज्य स्थापना से पूर्व प्रदेश के लोगों को घंटों पॉवर कट का सामना करना पड़ता था। विद्युत उत्पादन के मामले में हम देश में अभी दूसरे नंबर पर है, और पहले नंबर की ओर तेजी से अग्रसर हैं। आज प्रदेश के बीपीएल परिवारों को एकल बत्ती योजना के तहत निःशुल्क बिजली तथा शेष परिवारों को चौबीस घंटे रियायती दरों पर बिजली मिल रही है।

एनर्जी सेक्टर में हम विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ की जरूरतों के अनुरूप कार्य कर रहे हैं, इसी क्रम में प्रधानमंत्री जी ने सीपत में 9790 करोड़ रुपए के सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी है। डबल इंजन की सरकार का फोकस शून्य कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य को लेकर है और इसी के अनुरूप कोरिया, सरगुजा, बलरामपुर जैसे जिलों में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन पाइप लाइन पर काम कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री सौर घर मुफ्त बिजली योजना में केंद्र सरकार के साथ राज्य सरकार की सब्सिडी भी मिल रही है, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोगों ने अक्षय ऊर्जा के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। हमने गेल से भी एमओयू किया है, जिसके तहत गैस आधारित उर्वरक परियोजना मुख्य रूप से 12.7 लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष क्षमता वाले यूरिया उत्पादन प्लांट पर केन्द्रित है।
नक्सलवाद की वजह से बस्तर में योजनाओं का क्रियान्वयन धीमा रह गया था लेकिन अब इसने रफ्तार पकड़ ली है। नक्सलवाद ने लोगों को बेघर किया है। हम हथियार छोड़ मुख्यधारा में लौटने वाले लोगों को पक्का घर दे रहे हैं। इसके लिए 15 हजार आवास हमने स्वीकृत किये हैं। पीएम जनमन योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजाति के लिए हम अब तक 33 हजार 217 आवास स्वीकृत कर चुके हैं।
हमने छत्तीसगढ़ महतारी को संवारने का संकल्प लिया है। छत्तीसगढ़ महतारी को गढ़ने में, संवारने में सबसे ज्यादा भूमिका हमारी माताओं-बहनों की है। मुझे खुशी है कि महिलाओं के सम्मान का पूरा ध्यान रखते हुए हमारी सरकार महतारी वंदन योजना के माध्यम से करीब 70 लाख महिलाओं को प्रति माह
एक-एक हजार रुपए की सम्मान राशि प्रदान कर रही है। अब तक 23 किश्तों में 14 हजार 948 करोड़ रुपए की राशि माताओं-बहनों के खाते में भेज चुके हैं।
प्रधानमंत्री जी ने अगले दस सालों में देश को मैकाले की मानसिकता से पूरी तरह से मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। भारत एक समय विश्वगुरु रहा लेकिन मैकाले की मानसिकता ने समाज पर ऐसा असर डाला कि लोग हर विचार को पश्चिमी नजरिये से देखने लगे और अपनी भारतीय संस्कृति के आदर्शों को भूलते गये। इस मानसिकता को भारतीय मूल्यों से युक्त शिक्षा से बदला जा सकता है।
जब हमने सरकार का कामकाज संभाला तो हमारे सामने एक बड़ी चुनौती शिक्षा को लेकर ही थी। यह दो कारणों से थी, पहला तो कोविड की वजह से जो ऑनलाइन क्लासेज हुईं, उनसे बच्चों को काफी लर्निंग लॉस हुआ। बच्चों को पढ़ने-लिखने और गणित की सामान्य क्रियाएं करने में भी परेशानी होती थी, इस लर्निंग लॉस को ठीक करना बड़ी चुनौती थी। इस पर हमने विशेष रूप से मेहनत की।

दूसरी इससे भी बड़ी समस्या दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी की थी। 453 ऐसे स्कूल थे जहां एक भी शिक्षक नहीं थे और 1428 स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे थे जबकि राष्ट्रीय छात्र-शिक्षक अनुपात की तुलना में हमारे प्रदेश में इसका अनुपात अच्छा है। हमने युक्तियुक्तकरण के माध्यम से शहरों के अतिशेष शिक्षकों की ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थापना की और इस तरह से यह समस्या दूर हुई।
अब जब मैं ग्रामीण क्षेत्रों में जाता हूँ, लोग बहुत खुशी से बताते हैं कि उनके स्कूल में शिक्षक पहुंच गये हैं। स्कूल में बढ़िया पढ़ाई हो रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होने के बाद बच्चे स्थानीय भाषाओं में पढ़ रहे हैं, इससे उन्हें सीखने में काफी आसानी हो रही है। हमने स्कूलों में आईटी आधारित मॉनिटरिंग को विद्या समीक्षा केंद्र के माध्यम से लागू किया है। हम राज्य के स्कूलों में 9 हजार स्मार्ट क्लास आरंभ करने जा रहे हैं और 22 हजार कंप्यूटर लगवाएंगे। हाल ही में राष्ट्रीय स्तर पर परख सर्वेक्षण हुआ। सर्वेक्षण में राज्य की स्थिति बेहतर हुई है, इसका श्रेय मैं सभी शिक्षकों को देना चाहूंगा।

उच्च शिक्षा में भी हमने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू किया है। पिछले महीने हमने कबीरधाम में मेडिकल कॉलेज भवन के निर्माण कार्य का शुभारंभ किया है। मुझे लगता है कि छत्तीसगढ़ की रजत जयंती यात्रा को समझना है, तो यहां मेडिकल शिक्षा के विकास को समझना होगा। पहले यहां रायपुर में ही मेडिकल कॉलेज था, अब प्रदेश में 15 मेडिकल कॉलेज स्वीकृत हो चुके हैं। हमारी सरकार ने बिलासपुर में मल्टी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के माध्यम से स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ किया है। इसके साथ ही कोनी में शासकीय फिजियोथेरेपी कॉलेज के लिए भूमि का चिन्हांकन भी कर लिया गया है। हमने एमबीबीएस की पढ़ाई हिंदी में कराने की व्यवस्था आरंभ की है। आईआईटी की तर्ज पर हम राज्य के जशपुर, बस्तर, कबीरधाम, रायपुर और रायगढ़ में प्रौद्योगिकी संस्थाओं का निर्माण करने जा रहे हैं।
हमारी युवा आबादी हमारे लिए बड़ी संभावना है। हम राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं को प्रदेश में ला रहे हैं। नवा रायपुर को हम एडुसिटी के रूप में विकसित कर रहे हैं। हम निफ्ट, नाइलिट और फॉरेसिंक यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान यहां आरंभ कर रहे हैं। युवाओं को पढ़ने-लिखने की बेहतर जगह मिल पाए, इसके लिए

हम रायपुर के नालंदा परिसर की तर्ज पर 34 नगरीय निकायों में अत्याधुनिक लाइब्रेरी बना रहे हैं। युवाओं के स्किल ट्रेनिंग से लेकर नये जमाने के कोर्सेस आदि की सुविधा देने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। 160 आईटीआई को हमने 484 करोड़ रुपए की लागत से मॉडल आईटीआई के रूप में उन्नयन किया है। हम पैन-आईआईटी संस्था के माध्यम से भी स्किल अपग्रेडेशन के लिए काम कर रहे हैं। नई स्टार्टअप नीति के माध्यम से हमने 50 हजार विद्यार्थियों को स्टार्टअप से जोड़ने का लक्ष्य रखा है।
हमारे देश ने वर्ष 2036 में ओलंपिक खेलों के लिए दावेदारी की है। देश में खेल अधोसंरचना को मजबूत करने एवं खेलों का शानदार माहौल तैयार करने यह कदम उठाया गया है। ओलंपिक खेलों में छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करें, इसके लिए हम खेल अधोसंरचना को बेहतर बनाने का काम मिशन मोड में कर रहे हैं। नवा रायपुर के सेक्टर 28 में स्पोर्ट्स कांप्लेक्स के लिए 85 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया है। हमारा राज्य जनजातीय बाहुल्य है। तीरंदाजी की कला हमारे जनजातीय क्षेत्र की पहचान रही है।

इसे निखारने के लिए हमने राष्ट्रीय आर्चरी एकेडमी की स्थापना हेतु नवा रायपुर में 13 एकड़ जमीन आवंटित की है। खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने हमने ओलंपिक खेलों में पदक विजेताओं के लिए विशेष धन राशि की घोषणा भी की है।
खेल प्रतियोगिताएं कभी अशांत जगहों में आयोजित नहीं होती। खेल सुकून के वातावरण में खेले जाते हैं। बस्तर में भी ऐसा ही सुकून लौट आया है। बस्तर ओलंपिक के आयोजन के माध्यम से हमने खेल के माध्यम से बस्तर की नई पहचान देश-दुनिया के सामने रखी है। पिछले वर्ष इन खेलों में 1 लाख 65 हजार लोगों ने हिस्सा लिया था, इस बार 2 लाख 92 हजार लोगों ने भाग लिया। इस साल हमें खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी भी मिली है। प्रदेशों में खेलों का परिदृश्य उज्ज्वल है और हम इसकी बेहतरी के लिए निरंतर कार्य करते रहेंगे।
प्रदेश की नई औद्योगिक नीति युवा आबादी के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की उम्मीदें लेकर आई है। नई नीति के तहत हम सिंगल विंडो सिस्टम और इज आफ डूइंग बिजनेस के तहत निवेश में अनुदान प्रावधान तथा अन्य आकर्षक सुविधाएं

निवेशकों को प्रदान कर रहे हैं। नई नीति के तहत हमने मुंबई, दिल्ली, अहमदाबाद और बंगलुरू जैसे महानगरों के साथ ही जापान एवं दक्षिण कोरिया में भी निवेश सम्मेलन किये।
जापान में आयोजित होने वाला ओसाका वर्ल्ड एक्सपो उद्यमियों के लिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण आयोजनों में से है। यहां हमने छत्तीसगढ़ की विशिष्टताओं को दिखाते हुए पवैलियन लगाया और नई औद्योगिक नीति तथा छत्तीसगढ़ की निवेश संभावनाओं के बारे में जानकारी दी। हमने यह सारी जानकारी जापानी भाषा में दी, यह उनके लिए अनूठा अनुभव था। दोनों ही देशों के निवेशकों ने छत्तीसगढ़ में निवेश करने पर रुचि दिखाई। देश-दुनिया से अब तक हमें 7 लाख 83 हजार करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, इन पर तेजी से काम किया जा रहा है।
हमने स्टेट कैपिटल रीजन का निर्माण किया है और इसके तेज विकास के लिए प्राधिकरण का गठन किया है। व्यवस्थित विकास और फ्यूचर प्लानिंग के चलते यह रीजन देश के सबसे तेजी से बढ़ते औद्योगिक केंद्र तथा इज आफ लिविंग के मामले में

देश के अग्रणी शहरों में होगा। यहां हम ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित करने पर भी काम कर रहे हैं ताकि दुनिया भर की बहुराष्ट्रीय कंपनियां यहां से अपना कार्य कर सकें।
भविष्य एआई का है। ऊर्जा की अपार उपलब्धता के चलते एआई से जुड़े उपक्रमों की धुरी छत्तीसगढ़ से संचालित होगी। हमने अटल नगर नवा रायपुर में एआई डाटा सेंटर पार्क आरंभकिया है। इसकी लोकेशन भी इसको महत्वपूर्ण बनाती है, यहां से देश के कोने-कोने में डाटा सबसे कम समय में पहुंचाया जा सकेगा। सेमीकंडक्टर यूनिट पर काम शुरू हो गया है। आईटी हब के साथ ही नवा रायपुर फार्मा हब के रूप में भी उभर रहा है। मेडिसिटी के पूरी तरह विकसित होने पर नवा रायपुर देश के सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल हब में से एक होगा।
छत्तीसगढ़ देश का दूसरा ऐसा राज्य है, जहां जनविश्वास विधेयक लाकर हमने अनेक प्रावधानों को अपराध मुक्त कर दिया है। इससे उद्यमियों और कारोबारियों में उत्साह का माहौल है।
नक्सलवाद के दंश ने बस्तर के विकास में काफी बाधा पहुंचाई। अब हमारे सामने बड़ी चुनौती यह है कि मिशन मोड पर विकास कार्य कर बस्तर को विकास की मुख्यधारा में शामिल किया जाए।

हमने इसके लिए पूर्व में गंभीर रूप से नक्सल प्रभावित रहे गांवों में नियद नेल्ला नार योजना शुरू की है। 69 सुरक्षा कैंपों के 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले 403 गांवों में इस योजना के तहत शासन के 17 विभागों की भागीदारी से 53 हितग्राही मूलक योजनाओं और 28 सामुदायिक सुविधाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है।
जब पहली बार महतारी वंदन योजना के लिए सर्वे हुआ तो गंभीर नक्सल प्रभावित होने की वजह से इन इलाकों की महिलाओं को इस योजना का लाभ नहीं मिल सका था। हमने इस योजना के तहत पुनः सर्वे किया और अब इन गांवों की माताओं-बहनों को भी इस योजना का लाभ मिल रहा है।
बस्तर में अधोसंरचना विकास के लिए जो मेहनत डबल इंजन की सरकार ने की है। वैसी मेहनत कभी नहीं हुई थी। विशाखापट्नम में गूगल द्वारा 15 बिलियन डॉलर की लागत से एशिया का सबसे बड़ा डाटा सेंटर हब बनाया जा रहा है। विशाखापट्नम से छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस-वे के माध्यम से जुड़ रहा है। यह एक्सप्रेस-वे छत्तीसगढ़ की समृद्धि रेखा बनेगा और पोर्ट सिटी के माध्यम से छत्तीसगढ़ के उत्पादों को दुनिया भर में पहुंचाने में मदद करेगा।

इंद्रावती और महानदी को जोड़े जाने की पहल बस्तर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। बस्तर और सरगुजा के अंदरूनी इलाकों में सड़कें बनाने के साथ ही यहां लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट उपलब्ध कराने के लिए हमने मुख्यमंत्री बस सेवा योजना आरंभ की, इसका संचालन स्थानीय लोग ही कर रहे हैं। इससे लोगों के समय की काफी बचत हो रही है और शिक्षा-स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं तक पहुंच आसान हो गई है।
हमारे प्रयासों से धरती के स्वर्ग बस्तर में पर्यटक लौट रहे हैं। इस साल नये वर्ष में एशिया का नियाग्रा कहा जाने वाला चित्रकोट जलप्रपात पर्यटकों की संख्या में आये उफान का गवाह भी रहा। बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता और इसकी अद्भुत जनजातीय संस्कृति को देश-दुनिया को दिखाने हमने इस वर्ष भी बस्तर पंडुम का आयोजन कर रहे हैं। स्वदेश दर्शन योजना के तहत हमने कवर्धा में भोरमदेव को शामिल किया और अब यहां काशी विश्वनाथ की तरह कारिडोर बनने का काम आरंभ हो गया है। हमें इस बात की हार्दिक खुशी है कि बिलासपुर जिले का कोपरा जलाशय छत्तीसगढ़ का पहला रामसर साइट घोषित किया गया है, इससे जैव-विविधता को सहेजने में मदद मिलेगी।

संस्कृत की श्रेष्ठ कविता मेघदूतम् की प्रेरणा कालिदास को सरगुजा से मिली। सरगुजा संभाग धरती के सबसे सुंदर हिस्सों में से है। यहां पर्यटन को प्रोत्साहित करने हम काम कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ का शिमला कहे जाने वाले मैनपाट में भी पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। नई औद्योगिक नीति में पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने और होम स्टे में निवेश पर आकर्षक प्रावधान देने का बेहतर नतीजा सामने आ रहा है। जशपुर में सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग मधेश्वर महादेव के दर्शन के लिए भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। जशपुर का मयाली भी स्वदेश दर्शन योजना में शामिल हो गया है।
रेल-सड़क और हवाई सेवाओं के विस्तार का असर सरगुजा संभाग के तेज विकास में नजर आ रहा है। यहां निवेश पर किये गये आकर्षक प्रावधानों के चलते तेजी से आर्थिक निवेश हो रहा है। शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी अधोसंरचना को भी हम बेहतर कर रहे हैं। जशपुर में मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए 359 करोड़ रुपए स्वीकृत किये गये हैं। इसके साथ ही यहां 220 बिस्तर वाले अत्याधुनिक अस्पताल के निर्माण के लिए 32 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है।

नगरीय निकायों की सुंदरता एवं यहां बुनियादी सुविधाओं को सुनिश्चित करने हम मिशन मोड में काम कर रहे हैं। इसके अच्छे नतीजे सामने आये हैं। स्वच्छता सर्वेक्षण में छत्तीसगढ़ के सभी शहरों ने अच्छा प्रदर्शन किया है। प्रधानमंत्री जी ने मन की बात कार्यक्रम में बिल्हा की स्वच्छता दीदियों की प्रशंसा भी की है। रायपुर को प्रामिसिंग स्वच्छ शहर का पुरस्कार मिला है और गार्बेज फ्री सिटीज की 7 स्टार रेटिंग मिली है। तीन लाख से 10 लाख की आबादी वाले शहरों की श्रेणी में बिलासपुर को दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है।
मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के माध्यम से हम 525 करोड़ रुपए की लागत से सभी नगर निगमों में अधोसंरचना के बुनियादी महत्व के कार्य करा रहे हैं। पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देते हुए प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के माध्यम से रायपुर में 100, दुर्ग-भिलाई में 50, बिलासपुर में 50 तथा कोरबा में 40 ई-बसों की स्वीकृति प्राप्त हुई है। अटल जी के जन्मशताब्दी को यादगार बनाने हम सभी नगरीय निकायों में अटल परिसर बना रहे हैं।

अटल जी द्वारा दिखाये सुशासन की राह पर हम निरंतर चल रहे हैं। प्रशासनिक कार्यप्रणाली के हर स्तर पर सुशासन को अपनाया गया है। सुशासन की पहली शर्त है पारदर्शिता, इसे अपनाते हुए हमने डिजिटल गवर्नेस को हर स्तर पर अपनाया है। ई-ऑफिस के माध्यम से हमने सरकारी कामकाज में समयसीमा, गुणवत्ता और पारदर्शिता स्थापित की है। बायोमीट्रिक अटेंडेंस हमने सभी विभागों में लागू किया है। ठीक सुबह 10 बजे अपनी उपस्थिति बायोमीट्रिक अटेंडेंस के माध्यम से दर्ज करानी होती है। अधिकारी-कर्मचारी तय समय पर अपनी जगह पर बैठ जाते हैं और कामकाज शुरू हो जाता है। हमने खरीदी में जेम पोर्टल को अपनाया है और इससे सरकारी खरीदी में होने वाले भ्रष्टाचार पर रोक लगी है।
शासन प्रणाली में आये इन असाधारण बदलावों का असर राज्य की जीएसडीपी में नजर आ रहा है। जीएसडीपी वर्ष 2024-25 का अग्रिम अनुमान 3 लाख 29 हजार 752 करोड़ रुपए है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 7.51 प्रतिशत अधिक है। इसी प्रकार 2023-24 की तुलना में राज्य की प्रति व्यक्ति आय 9.37 प्रतिशत बढ़कर 1 लाख 62 हजार 870 रुपए हो गई है।

हमारी छत्तीसगढ़ी संस्कृति का संरक्षण और संवर्धन हमारे लिए सबसे अहम है। रामलला हमारी सांस्कृतिक आस्था के केंद्र हैं। रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना से अब तक 40 हजार से अधिक श्रद्धालु प्रभु राम के पुण्य दर्शन का लाभ ले चुके हैं। भारतभूमि विलक्षण है जहां उत्तर-दक्षिण-पूरब-पश्चिम हर कोने में पुण्यस्थल मौजूद हैं। प्रदेशवासियों को इनके दर्शन कराने मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना भी शुरू की गई है, जिसमें अब तक 5 हजार श्रद्धालु तीर्थ स्थलों का दर्शन कर चुके हैं।
अभी रायपुर साहित्य उत्सव का आयोजन हमने किया। इस आयोजन के माध्यम से हमने ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल सहित दिग्गज साहित्यकारों की प्रेरणा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया है। अपनी बोली-भाषा, लोककला, लोकगीत और सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने हम ऐसे कार्यक्रम करते रहेंगे।

राज्य के सर्वांगीण विकास में शांति, सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था की प्रमुख भूमिका रही है। इसमें हमारे छत्तीसगढ़ पुलिस के जवानों का अनुकरणीय योगदान है। इन्होंने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के साथ नक्सल विरोधी अभियानों में अदम्य साहस का परिचय देते हुए अनेक जवानों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। इस उत्कृष्ट कार्य के लिए छत्तीसगढ़ पुलिस बल में कार्यरत समस्त बल को सम्मान स्वरूप राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ का पदक प्रदान किए जाने की मैं घोषणा करता हूं।
विकसित छत्तीसगढ़ के लिए बनाये गये अंजोर विजन डाक्यूमेंट के अनुरूप हम लगातार कार्य करते रहेंगे। जनभागीदारी से हम छत्तीसगढ़ महतारी को संवारते रहेंगे। मुझे इस अवसर पर स्व. लक्ष्मण मस्तूरिया जी की कविता की पंक्तियां याद आ रही हैं…
“सरग ला पृथ्वी मा ला देहूं प्रण अइसन ठाने हव मोर संग चलव रे मोर संग चलव जी मोर संग चलव गा मोर संग चलव रे”

मस्तूरिया जी की इन पंक्तियों को साकार करना है और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करना है। आप सभी की भागीदारी से निश्चित ही हम यह लक्ष्य प्राप्त करेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने गणतंत्र दिवस की बधाइ दी

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने गणतंत्र दिवस की बधाइ दी
सभी देश एवं प्रदेशवासियों को 77वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं

देश मना रहा 77वां गणतंत्र दिवस

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राष्ट्रपति ने 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर देश को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि ये पर्व हमें अतीत, वर्तमान, भविष्य में देश की दशा-दिशा का अवलोकन करने का अवसर देता है.

मुख्यमंत्री ने उज्जैन में पाटीदार समाज संगठन के प्रांतीय कार्यालय का किया भूमिपूजन

मुख्यमंत्री ने उज्जैन में पाटीदार समाज संगठन के प्रांतीय कार्यालय का किया भूमिपूजन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि एक भारत श्रेष्ठ भारत के प्रणेता, देश को एकता के सूत्र में पिरोने वाले लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल को में महाकाल की नगरी अवंतिका से प्रणाम करता है। कार्यक्रम में पधारे सभी पाटीदार समाज के बंधुओं का स्वागत एवं अभिनंदन है। भारत को एकता और अखंडता, किसी संयोग से नहीं मिली, यह सरदार पटेल की दृढ़ इच्छाशक्ति, अदम्य साहस और राष्ट्र के प्रति अगाध समर्पण का परिणाम है। वर्ष 1947 में जब भारत को आज़ादी मिली, तब देश 562 रियासतों में बंटा हुआ था। यह एक अत्यंत जटिल और चुनौतीपूर्ण समय था। ऐसे में सरदार पटेल ने केन्द्रीय गृह मंत्री एवं उप प्रधानमंत्री के रूप में जो दृढ़ संकल्प और राजनीतिक कौशल दिखाया, वह इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा गया। उन्होंने सभी को जोड़ कर संगठित भारत का निर्माण किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को उज्जैन में मध्यप्रदेश पाटीदार समाज संगठन के प्रांतीय कार्यालय का भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह भूमिपूजन सिर्फ भवन निर्माण का नहीं है अपितु मजबूत इच्छाशक्ति, एकजुटता और उज्जवल भविष्य की नींव है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के केवड़िया में दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्थापित करके सरदार पटेल की स्मृति को अमर कर दिया है। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में मध्यप्रदेश पाटीदार समाज संगठन के प्रदेश कार्यालय का भूमिपूजन करना सौभाग्य की बात है। पाटीदार समाज सरदार पटेल के आदर्शो पर चलने वाला समाज है। पाटीदार समाज खेती से लेकर उद्योग, व्यापार, शिक्षा, राजनीति से लेकर सामाजिक सेवा तक हर क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान रखता है और राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

राज्यसभा सांसद सु कविता पाटीदार ने कहा कि बाबा महाकाल के आशीर्वाद से मुख्यमंत्री डॉ. यादव के हाथों से कार्यालय का भूमिपूजन हो रहा है। कार्यालय में रोजगार सृजन के कार्य भी किए जाएंगे। उन्होंने सभी दानदाताओं को धन्यवाद भी दिया। कार्यक्रम में शाजापुर विधायक अरुण भीमावद ने भी संबोधन कर आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ और सरदार वल्लभ भाई पटेल की मूर्ति पर माल्यार्पण किया। कार्यक्रम में पाटीदार समाज संगठन के प्रदेश अध्यक्ष कृष्णकांत जी, शांतिलाल गामी, राजेश धाकड़, संजय अग्रवाल, रवि सोलंकी एवं हजारों की संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

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