AIMIM पार्षद सहर शेख ने बयान पर मांगी माफी

AIMIM पार्षद सहर शेख ने बयान पर मांगी माफी
बीजेपी के नेता किरीट सोमैया ने बताया है कि एआईएमआईएम की नवनिर्वाचित पार्षद सहर शेख ने अपने विवादित बयान पर माफी मांग ली है. उन्होंने कहा कि सहर शेख का मुंबई को हरा बनाने वाला बयान भड़काऊ है, यह हिंदुओं को भड़काता है. हमारी शिकायत के बाद पुलिस ने उन्हें दो बार बुलाया था. पुलिस में शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद सहर शेख ने माफी मांगी है.

किरीट सोमैया ने बताया, ”सहर शेख ने लिखकर माफी मांगी है. उसने लिखा, ”मेरा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं था और इसलिए मैं माफी मांगती हूं. मेरी राय में, हरा रंग मेरी पार्टी का झंडा है, लेकिन मैं जिंदगी भर भारत के तिरंगे के लिए काम करूंगी.” सोमैया ने कहा कि चूंकि सहर छोटी हैं, इसलिए हमने उनकी माफी भी मान ली है.

AIMIM के नेता अगली पीढ़ी को कट्टरपंथी बना रहे- सोमैया
बीजेपी नेता ने आगे कहा, ”चिंता की बात यह है कि एआईएमआईएम के नेता अब अपनी अगली पीढ़ी को जगा रहे हैं और उन्हें कट्टरपंथी बना रहे हैं. AIMIM का मतलब है न्यू मुस्लिम लीग, वे मुसलमानों को भड़काते हैं. उन्होंने मालेगांव को हरा-भरा बनाया, मानखुर्द को हरा-भरा बनाया, अगर वे मुंब्रा को हरा-भरा बना देते हैं, तो बहुत हो गया और अब वे मुंबई को हरा-भरा बनाने की कोशिश कर रहे हैं और हमें यह मंज़ूर नहीं है.”

हम सहर शेख की माफी को स्वीकार करते हैं- किरीट सोमैया
किरीट सोमैया कहा, ”सहर शेख 22 साल की लड़की है, उसने माफी मांग ली है. हम उनकी माफी भी स्वीकार करते हैं. लेकिन ये मुस्लिम कट्टरपंथी जिन्हें बाहर से मदद मिल रही है, अब अपनी नई पीढ़ी को बर्बाद कर रहे हैं. जहां भी भारतीय जनता पार्टी सत्ता में है, हमने कहीं भी भेदभाव नहीं किया है. प्यारी बहन शिंदे और देवा भाऊ की प्यारी बहन नहीं हैं. चाहे मुस्लिम हो या हिंदू, सभी बहनें प्यारी हैं. आने वाले सालों में मुंबई को मुसलमानों में बदलना चाहते हैं. देवेंद्र फडणवीस सरकार अब इसके खिलाफ मैदान में है.”
कौन हैं सहर शेख?

AIMIM पार्षद सहर शेख ने बैठक के दौरान भाषण देते हुए कहा था कि हम मुंब्रा को हरा बना देंगे. इसके बाद विवाद बढ़ गया और सहर शेख देशभर में चर्चा में आ गईं. सहर युनुस शेख, जिसने हाल ही में हुए ठाणे महानगरपालिका में मुंब्रा वार्ड 30 से AIMIM से पार्षद चुनकर आई हैं. एक युवा चेहरा होने के कारण, युवाओं के बीच उनका बहुत क्रेज है.

सहर शेख ने मुंबई यूनिवर्सिटी से बिजनेस मैनेजमेंट स्टडीज़ (BMS) में बैचलर डिग्री पूरी की है. उनकी हायर एजुकेशन ने उन्हें कैंपेन में फ़ायदा पहुंचाया है. अपने नॉमिनेशन पेपर में, उन्होंने कार वॉशिंग सेंटर को अपना मुख्य पेशा बताया. सहर के पिता युनुस के मुताबिक वो IAS की तैयारी कर रही थी तो लेकिन NCP शरद पवार गुट के नेता जितेंद्र आव्हाड ने ही उनकी बेटी को एक्टिव पॉलिटिक्स में शामिल होने के लिए प्रेरित किया.

दुनियाभर में बजा सनी देओल की बॉर्डर 2 का डंका

दुनियाभर में बजा सनी देओल की बॉर्डर 2 का डंका
सनी देओल की फिल्म बॉर्डर 2 ने बॉक्स ऑफिस पर गर्दा उड़ा दिया है. फिल्म आते ही छा गई है और जमकर कमाई करने में लगी हुई है. बॉर्डर 2 ने पहले ही दिन शानदार कमाई करके कई फिल्मों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. इसे सिर्फ इंडिया में ही नहीं बल्कि वर्ल्डवाइड भी बहुत पसंद किया गया है. बॉर्डर 2 का पहले दिन का वर्ल्डवाइड कलेक्शन सामने आ गया है और इसने पहले ही दिन रणवीर सिंह की धुरंधर को पीछे छोड़ दिया है.

बॉर्डर 2 को बहुत पॉजिटिव रिव्यू मिले हैं. जो भी इस फिल्म को देख रहा है वो इमोशनल हो रहा है और तारीफ करते नहीं रुक रहा है. क्रिटिक्स से लेकर ऑडियंस तक हर किसी को बॉर्डर 2 पसंद आ रही है. बॉर्डर 2 को इस लॉन्ग वीकेंड जमकर फायदा होने वाला है.

दुनियाभर में बजा डंका
बॉर्डर 2 का इंडिया कलेक्शन तो सुबह ही सामने आ गया था. अब फिल्म का वर्ल्डवाइड कलेक्शन भी सामने आ गया है. सैकनिल्क की रिपोर्ट के मुताबिक बॉर्डर 2 ने वर्ल्डवाइड पहले दिन 41 करोड़ का कलेक्शन किया है. जिसमें 36 करोड़ ग्रॉस इंडिया कलेक्शन है और ओवरसीज इस फिल्म ने 5 करोड़ का कलेक्शन किया था. जिसके बाद टोटल कलेक्शन 41 करोड़ हो गया है.

धुरंधर को छोड़ा पीछे
बॉर्डर 2 ने रणवीर सिंह की धुरंधर को 1 करोड़ से पीछे छोड़ दिया है. धुरंधर के पहले दिन के वर्ल्डवाइड कलेक्शन की बात करें तो इसने 40 करोड़ कमाए थे. दोनों फिल्मों में बस 1 करोड़ का फर्क है. हालांकि शुरू के तीन दिन धुरंधर ने हाईएस्ट कमाई नहीं की थी. 3 दिन बाद इस फिल्म को अचानक से हाइप मिला था.

बॉर्डर 2 की बात करें तो अनुराग सिंह ने इसे डायरेक्ट किया है. फिल्म में सनी के साथ अहान शेट्टी, दिलजीत दोसांझ और वरुण धवन लीड रोल में नजर आए हैं. इनके अलावा फिल्म में मोना सिंह, मेधा राणा और अन्या सिंह भी नजर आईं हैं.

नोबेल विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने बंगाल में SIR प्रक्रिया पर जताई चिंता

नोबेल विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने बंगाल में SIR प्रक्रिया पर जताई चिंता
नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने पश्चिम बंगाल में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर गहरी चिंता जताई है. उन्होंने चेतावनी दी है कि यह कवायद अनावश्यक जल्दबाजी में की जा रही है और कुछ ही महीनों में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले यह लोकतांत्रिक भागीदारी को खतरे में डाल सकती है.

उन्होंने मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लोकतांत्रिक महत्व पर विचार करते हुए कहा कि यह प्रक्रिया तभी मताधिकारों को मजबूत कर सकती है, जब इसे सावधानी के साथ और पर्याप्त समय लेकर अंजाम दिया जाए. उनके अनुसार, बंगाल के मामले में ये दोनों शर्तें नदारद हैं.

यह मतदाताओं के साथ अन्याय है: अमर्त्य सेन
92 वर्षीय अमर्त्य सेन ने अमेरिका के बोस्टन में पीटीआई-भाषा को दिए एक इंटरव्यू में कहा, ‘मतदाता सूचियों का गहन पुनरीक्षण अगर सावधानी से और पर्याप्त समय लेकर किया जाए, तो यह एक अच्छी लोकतांत्रिक प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन इस समय पश्चिम बंगाल में ऐसा नहीं हो रहा है.’

उन्होंने कहा, ‘SIR की कवायद जल्दबाजी में की जा रही है और मताधिकार रखने वाले लोगों को आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए अपने अधिकार को साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज जमा करने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहा है. यह न सिर्फ मतदाताओं के साथ अन्याय है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र के साथ भी अनुचित है.’

चुनाव आयोग के अधिकारियों के पास भी समय नहीं होता: सेन
बंगाल में मतदाता सूचियों के SIR के दौरान अपने अनुभव को साझा करते हुए सेन ने कहा कि समय का दबाव चुनाव अधिकारियों पर भी साफ दिखाई देता है. उन्होंने कहा कि कभी-कभी चुनाव आयोग के अधिकारियों के पास ही पर्याप्त समय नहीं होता है.

उन्होंने कहा, ‘जब शांति निकेतन से मैं पहले भी मतदान कर चुका हूं और वहां मेरे नाम-पते सहित अन्य विवरण आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज हैं, इसके बावजूद मेरे मताधिकार पर सवाल उठाया गया. मुझसे मेरी जन्मतिथि के समय मेरी दिवंगत मां की उम्र के बारे में पूछा गया, जबकि मेरी मां के विवरण भी चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में मौजूद थे.’

SIR को लेकर सेन ने साझा किए अपने अनुभव
प्रख्यात अर्थशास्त्री ने दस्तावेजों से जुड़ी कठिनाइयों का भी जिक्र किया, जो ग्रामीण इलाकों में जन्मे अनेक भारतीयों के लिए आम हैं. उन्होंने कहा, ‘ग्रामीण भारत में जन्मे कई भारतीय नागरिकों की तरह (मेरा जन्म तत्कालीन गांव शांति निकेतन में हुआ था), मेरे पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं है और मतदान करने की मेरी पात्रता के लिए मेरी ओर से अतिरिक्त दस्तावेज प्रस्तुत करने की आवश्यकता पड़ी.’ हालांकि, उनका मामला सुलझ गया, लेकिन उन्होंने उन लोगों के लिए चिंता जताई जिनके पास ऐसी मदद उपलब्ध नहीं होती.

उन्होंने व्यंग्यात्मक रूप से कहा कि वह तो दोस्तों की थोड़ी मदद से इस प्रक्रिया से निकल आए, लेकिन हर किसी के पास इतने सहायक मित्र नहीं होते. सेन ने कहा, ‘भले ही मैं खुशी-खुशी कह सकता हूं कि ओह, मेरा अपने दोस्तों की थोड़ी मदद से काम चल गया, लेकिन मुझे उन लोगों की चिंता है जिनके पास इतने वफादार दोस्त नहीं हैं. मेरे दोस्तों ने मुझे शक्तिशाली चुनाव आयोग की कठोर बाधा को पार करने में मदद की.’

लोकतांत्रिक अखंडता सर्वोपरि रहनी चाहिए: सेन
मतदाता सूची में उनके और उनकी मां अमिता सेन की उम्र के अंतर को लेकर आयोग की ओर से तार्किक विसंगति पाए जाने के बाद 90-वर्षीय सेन को सुनवाई के लिए तलब किया गया था. यह पूछे जाने पर कि क्या एसआईआर से किसी राजनीतिक दल को लाभ हो सकता है, सेन ने कहा कि वह इसका कोई निश्चित उत्तर नहीं दे सकते. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक अखंडता सर्वोपरि रहनी चाहिए.

कांग्रेस के दिग्गज नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने छोड़ी पार्टी

कांग्रेस के दिग्गज नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने छोड़ी पार्टी
उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्य में सियासी जमीन तलाश रही कांग्रेस को शनिवार को बड़ा झटका लगा है. वेस्ट यूपी के पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने पार्टी अध्यक्ष मलिक्कार्जुन खड्गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और यूपी प्रभारी अविनाश पांडेय के साथ ही प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को इस्तीफा भेजा है. सूत्रों के मुताबिक अजय राय उन्हें मनाने उनके घर जा सकते हैं. फिलहाल यह कांग्रेस के लिए यूपी में बड़ा झटका माना जा रहा है.

शनिवार दोपहर नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अपना इस्तीफा पार्टी नेतृत्व को भेजा. जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड्गे समेत सभी सीनियर लीडर भी शामिल हैं. लेकिन सिद्दीकी ने अचानक इस्तीफे का फैसला क्यों लिया ? इसकी जानकारी अभी तक नहीं हो पायी है. शुरूआती जानकारी में प्रदेश के सीनियर नेताओं को उनसे बात करने भेजा जा रहा है.

क्या हो सकती है वजह ?
सूत्रों के मुताबिक इस्तीफे की स्पष्ट वजह नसीमुद्दीन ने जाहिर पत्र में नहीं की है, लेकिन अपने समर्थकों के साथ ही उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है. जबकि बताया यही जा रहा है कि वे शीर्ष नेतृत्व से नाराज थे और पिछले काफी समय से पार्टी में साइड लाइन चल रहे थे.

मनाने जा सकते हैं अजय राय
यूपी प्रदेश अध्यक्ष अजय राय नसीमुद्दीन सिद्दीकी से बात करने और इस्तीफे को वापस लेने के लिए उनके आवास पर मनाने जा सकते हैं. अजय राय इससे पहले भी कई नेताओं के घर उन्हें मनाने पहुंचे थे. उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में नसीमुद्दीन सिद्दीकी जैसे नेता का जाना पार्टी के लिए बड़ा नुकसान है. क्यूंकि यहां अल्पसंख्या वोट काफी मायने रखता है. बुन्देलखण्ड के साथ ही सिद्दीकी का वेस्ट यूपी में भी अच्छा नेटवर्क है. एक साल बाद होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है.

भारत ने जीता पहला टी20, न्यूजीलैंड को 48 रनों से हराया

भारत ने जीता पहला टी20, न्यूजीलैंड को 48 रनों से हराया
न्यूजीलैंड ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया था. भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 238 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया. अभिषेक शर्मा ने 35 गेंदों में 240 की स्ट्राइक रेट से 84 रन बनाए, इसमें उन्होंने 8 छक्के और 5 चौके लगाए. रिंकू सिंह ने 20 गेंदों में 3 छक्के और 4 चौकों की मदद से नाबाद 44 रन बनाए.

लक्ष्य का पीछा करते हुए न्यूजीलैंड ने अपने 2 विकेट 1 रन के स्कोर पर गंवा दिया था. अर्शदीप सिंह ने पहले और हार्दिक पांड्या ने दूसरे ओवर में विकेट लिया. इसके बाद ग्लेन फिलिप्स ने काफी हद तक संघर्ष किया, लेकिन वह अपनी टीम को जीत तक नहीं ले जा पाए. उन्होंने 40 गेंदों में 6 छक्के और 4 चौकों की मदद से 78 रन बनाए. न्यूजीलैंड की पारी 190 रनों पर समाप्त हुई और भारत ने 48 रनों से ये मुकाबला जीत लिया.

सुगम व्यापार नीतियों से विकास को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

सुगम व्यापार नीतियों से विकास को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार निवेश और उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सुगम व्यापार वातावरण (ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस) पर केंद्रित नीतियों के माध्यम से विकास को नई गति दे रही है। उन्होंने राज्य की सुदृढ़ अवसंरचना, बेहतर कनेक्टिविटी और जल, भूमि, श्रम और प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुर उपलब्धता को निवेशकों के लिए बड़ी ताकत बताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह बात ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम’ दावोस में ‘इन्वेस्ट इन इंडिया: मध्यप्रदेश – एक रणनीतिक निवेश केंद्र’ पर आयोजित राउंडटेबल मीटिंग में कही। राउंड टेबल मीटिंग में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश को देश के प्रमुख और उभरते निवेश केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में ऑटोमोबाइल, नवकरणीय ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स, वस्त्र, आईटी–आईटीईएस, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क जैसे क्षेत्रों में निवेश के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं। उन्होंने अंतर्राराष्ट्रीय एवं घरेलू निवेशकों से इन क्षेत्रों में राज्य सरकार द्वारा दी जा रही नीतिगत सहायता और विभिन्न प्रोत्साहनों की जानकारी भी साझा की।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार उन उद्योगों और व्यवसायों को विशेष सहयोग देगी, जो मध्यप्रदेश में रोजगार और आजीविका के नए अवसर सृजित करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यदि किसी निवेश प्रस्ताव को विशेष या अनुकूलित समर्थन की आवश्यकता होगी, तो निवेश प्रोत्साहन के लिए गठित मंत्रिमंडलीय समिति (कैबिनेट कमेटी फॉर इन्वेस्टमेंट प्रमोशन) ऐसे प्रस्तावों पर सकारात्मक रूप से विचार करेगी।

राउंडटेबल चर्चा में शामिल निवेशकों और उद्योग प्रतिनिधियों ने पर्यटन, मनोरंजन, डिजाइन, नवकरणीय ऊर्जा, निर्यात, रसायन, अल्कोहल, टेक्सटाइल पार्क, वित्तीय क्षेत्र, आईटी–आईटीईएस, जीसीसी और बौद्धिक संपदा जैसे क्षेत्रों में नीतियों को और अधिक प्रभावी बनाने को लेकर अपने सुझाव साझा किए। इनमें जिरोधा के सह-संस्थापक निखिल कामथ, हिताची इंडिया के कार्यकारी अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. भारत कौशल, एमोविया की सह-संस्थापक एवं सीईओ सु कैरन बाएर्ट, एंटोरा एनर्जी के सीईओ एंड्रयू पोर्निक, AB InBev के ग्लोबल वाइस प्रेसिडेंट (कॉर्पोरेट अफेयर्स) एंड्रिस पेनेटा, न्यू दिल्ली हब के संस्थापक एवं अध्यक्ष ईशान प्रताप सिंह, एचसीएल टेक्नोलॉजीज के ग्लोबल सीटीओ कल्याण कुमार शामिल रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी सुझावों का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार निवेश अनुकूल नीतियों के माध्यम से मध्यप्रदेश को वैश्विक निवेश मानचित्र पर और सशक्त रूप से स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की मैनचेस्टर यूनाइटेड के निदेशक से चर्चा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की मैनचेस्टर यूनाइटेड के निदेशक से चर्चा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश खेल अधोसंरचना, प्रशिक्षण, अकादमियों और अंतर्राष्ट्रीय साझेदारियों के माध्यम से राज्य को एक उभरते खेल हब के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि खेलों से जुड़े निवेश, प्रशिक्षण शिविर, अंतर्राष्ट्रीय मैच और टूर्नामेंट जैसे आयोजन राज्य में खेल पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोज़गार के नए अवसर भी सृजित कर सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम–2026, दावोस में विश्व प्रसिद्ध फुटबॉल क्लब मैनचेस्टर यूनाइटेड के एक्ज़ीक्यूटिव को-चेयर एवं निदेशक अवराम एवी ग्लेज़र से मुलाक़ात कर खेल विकास, निवेश, जमीनी स्तर पर फुटबॉल को बढ़ावा देने, खेल पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों से जुड़े संभावित सहयोग पर चर्चा कर रहे थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चर्चा में कहा कि मध्यप्रदेश खेलों को केवल प्रतिस्पर्धा तक सीमित न रखते हुए शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, युवाओं के विकास तथा सामाजिक जुड़ाव का प्रभावी माध्यम मानता है। उन्होंने विशेष रूप से फुटबॉल का उल्लेख करते हुए कहा कि यह खेल युवाओं में अनुशासन, टीम भावना और फिटनेस के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर राज्य की पहचान बनाने का सशक्त माध्यम बन सकता है।

मैनचेस्टर यूनाइटेड के निदेशक अवराम एवी ग्लेज़र ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से सहमति जताते हुए कहा कि फुटबॉल न केवल स्वास्थ्य और युवाओं के विकास में सहायक हो सकता है, बल्कि खेल पर्यटन को भी नई गति दे सकता है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय क्लबों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और आयोजनों के माध्यम से किसी क्षेत्र को वैश्विक खेल मानचित्र पर स्थापित किया जा सकता है। निदेशक ग्लेजर ने कहा कि मध्यप्रदेश की आर्थिक और औद्योगिक क्षमताओं को देखते हुए मैनचेस्टर क्लब और उससे जुड़े नेटवर्क मध्यप्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग करने को तैयार है।

बैठक के दौरान खेल विकास, ग्रासरूट फुटबॉल कार्यक्रम, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता के आदान-प्रदान और खेल पर्यटन आधारित सहयोग मॉडल जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

नवा रायपुर को आईटी एवं स्टार्ट-अप हब बनाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल

नवा रायपुर को आईटी एवं स्टार्ट-अप हब बनाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी, नवाचार एवं स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र को नई ऊँचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय, रायपुर में आयोजित मंत्रि-परिषद की बैठक में नवा रायपुर अटल नगर में चार नवीन सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप ( Centres of Entrepreneurship ) की स्थापना हेतु सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) के साथ एमओयू के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया।

मंत्रिपरिषद का यह निर्णय छत्तीसगढ़ को आईटी-आईटीईएस, स्टार्ट-अप, नवाचार, अनुसंधान एवं विकास तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर एक सशक्त पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था है, जिसकी स्थापना देश में आईटी-आईटीईएस उद्योग एवं तकनीकी स्टार्ट-अप इको-सिस्टम को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से की गई है। वर्तमान में एसटीपीआई के देशभर में 68 परिचालित केंद्र हैं, जिनमें से अधिकांश टियर-2 एवं टियर-3 शहरों में स्थित हैं।

एसटीपीआई द्वारा पूरे भारत में 24 डोमेन-विशिष्ट उद्यमिता केन्द्र स्थापित किए जा चुके हैं, जो स्टार्ट-अप्स को इन्क्यूबेशन, मेंटरशिप, फंडिंग सपोर्ट, तकनीकी मार्गदर्शन एवं बाजार से जुड़ने में सहयोग प्रदान करते हैं।

नवा रायपुर अटल नगर, छत्तीसगढ़ शासन के अधीन नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित भारत की पहली ग्रीनफील्ड स्मार्ट सिटी है। 237 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विकसित यह नगर थीम-आधारित सेक्टरों, अत्याधुनिक अधोसंरचना एवं शासकीय-शैक्षणिक संस्थानों से युक्त है।

यहाँ महानदी भवन, इंद्रावती भवन, विधानसभा, आईआईआईटी, हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर तथा आगामी भारत का प्रथम निजी एआई आधारित विशेष आर्थिक क्षेत्र स्थित है। ऐसे में एसटीपीआई के सहयोग से सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप की स्थापना नवा रायपुर को एक राष्ट्रीय तकनीकी हब के रूप में विकसित करेगी।

मंत्रि-परिषद के अनुमोदन के पश्चात एसटीपीआई राज्य शासन एवं अन्य हितधारकों के सहयोग से नवा रायपुर अटल नगर में कुल चार नए सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एआई, हर्बल मेडिसिन एवं वन उत्पाद आधारित सेंटर, स्मार्ट सिटी सेंटर, स्मार्ट एग्री सेंटर की स्थापना करेगा। ये चारों आगामी 3 से 5 वर्षों में लगभग 135 डोमेन-विशिष्ट स्टार्ट-अप्स को सहयोग प्रदान करेंगे, जिससे स्थानीय युवाओं, उद्यमियों एवं नवाचारियों को बड़ा मंच मिलेगा।

इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं विकास केंद्र राज्य में हार्डवेयर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को सशक्त करने के उद्देश्य से एसटीपीआई के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं विकास केंद्र की भी स्थापना की जाएगी। प्रतिवर्ष 30 से 40 हार्डवेयर स्टार्ट-अप्स एवं एमएसएमई को तकनीकी सहायता प्रदान करेगा। ईएसडीएम उत्पादों के प्रोटोटाइप विकास में छात्रों, शोधकर्ताओं और उद्योगों को सहयोग देगा।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए व्यापक वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। 04 सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप की स्थापना एवं संचालन हेतु कुल 105.30 करोड़ रूपए, जिसमें से 51.50 करोड़ रूपए राज्य बजट से, शेष राशि एसटीपीआई द्वारा इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय एवं अन्य हितधारकों से प्राप्त की जाएगी।

इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं विकास केंद्र की स्थापना हेतु कुल 78 करोड़, जिसमें से 35 करोड़ राज्य बजट से वहन किए जाएंगे। नवा रायपुर अटल नगर के सेक्टर-21 में 2 एकड़ भूमि अथवा 50 से 60 हजार वर्गफुट निर्मित स्थान एसटीपीआई को निःशुल्क लीज पर उपलब्ध कराया जाएगा।

नए आईटी-आईटीईएस टॉवर के निर्माण तक टॉवर-सी, सीबीडी, सेक्टर-21 में 25,000 वर्गफुट स्थान अस्थायी रूप से निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। एसटीपीआई द्वारा एमओयू की तिथि से 12 माह के भीतर सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप एवं इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं विकास केंद्र की स्थापना हेतु आवश्यक स्वीकृतियाँ प्राप्त कर कार्य प्रारंभ किया जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कहना है कि इस निर्णय से राज्य में आईटी निवेश एवं रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। स्थानीय युवाओं को स्टार्ट-अप एवं नवाचार का मंच मिलेगा। छत्तीसगढ़ आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर होगा। हमारी यह पहल राज्य को डिजिटल, नवाचार एवं उद्यमिता आधारित अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है।

छत्तीसगढ़ की धरती जनजातीय शौर्य और बलिदान की साक्षी : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

छत्तीसगढ़ की धरती जनजातीय शौर्य और बलिदान की साक्षी : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज अखिल भारतीय हल्बा-हल्बी आदिवासी समाज के तत्वावधान में साइंस कॉलेज ग्राउंड रायपुर में आयोजित शहीद शिरोमणि गैंदसिंह के 201वें शहादत दिवस एवं श्रद्धांजलि सभा कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने महान जनजातीय नायक एवं स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत शहीद गैंदसिंह का पुण्य स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने शहीद गैंदसिंह के सम्मान में नया रायपुर में चौक के नामकरण एवं मूर्ति स्थापना, चंगोराभाटा स्थित समाज के सामुदायिक भवन के जीर्णोद्धार, तथा बालोद जिले के देवरी, कांकेर जिले के मरकाटोला, दानीटोला, नगरी, डोंगरगांव एवं बस्तर जिले के भानपुरी तथा करूटोला में हल्बा समाज के सामाजिक केंद्रों के निर्माण हेतु प्रत्येक स्थान के लिए 10-10 लाख रुपये प्रदान किए जाने की घोषणा की। इसके साथ ही ग्राम कितूर में रंगमंच निर्माण तथा चपका बस्तर में राम मंदिर के जीर्णोद्धार की भी घोषणा मुख्यमंत्री द्वारा की गई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि जनजातीय समाज का इतिहास अत्यंत गौरवशाली और समृद्ध रहा है। उन्होंने कहा कि देश में स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत भले ही वर्ष 1857 से मानी जाती है, किंतु उससे बहुत पहले ही छत्तीसगढ़ की धरती पर जनजातीय क्रांतियों की गूंज सुनाई देने लगी थी। महान क्रांतिकारी शहीद गैंदसिंह अंग्रेजी हुकूमत से संघर्ष करते हुए वर्ष 1825 में शहीद हुए, और उस कालखंड में भी आदिवासी समाज ने आजादी की लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाई।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में एक-दो नहीं बल्कि कुल 14 जनजातीय क्रांतियां हुईं, जिन्होंने अंग्रेजों की सत्ता की नींव हिला दी। यह धरती शहीद वीर नारायण सिंह, शहीद गैंदसिंह और वीर गुण्डाधुर जैसे महान जननायकों की भूमि रही है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यवश इन वीरों और जनजातीय नायकों को लंबे समय तक इतिहास के पन्नों में उचित स्थान नहीं मिला। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनजातीय नायकों के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाने का कार्य किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में हुई 14 जनजातीय क्रांतियों पर आधारित ट्राइबल म्यूजियम नया रायपुर में निर्मित किया गया है, जिसका लोकार्पण स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया। इस संग्रहालय में इन सभी क्रांतियों का सचित्र विवरण एवं गहन जानकारी प्रस्तुत की गई है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि सभी लोग इस म्यूजियम का अवश्य अवलोकन करें, ताकि छत्तीसगढ़ की बलिदानी धरती में जनजातीय नायकों के योगदान को भली-भांति समझा जा सके।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज देश के सर्वोच्च पद पर जनजातीय समाज की बेटी राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मू आसीन हैं और छत्तीसगढ़ प्रदेश का नेतृत्व भी जनजातीय समाज के बेटे के हाथों में है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास के लिए ऐतिहासिक निर्णय लिए। उनके नेतृत्व में जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन किया गया, जो आज हजारों करोड़ रुपये के बजट के साथ जनजातीय समाज के विकास को नई दिशा दे रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की जयंती 15 नवंबर को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय ऐतिहासिक है। धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना एवं प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से जनजातीय समाज के कल्याण की नई इबारत लिखी जा रही है। जनजातीय बहुल क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का कार्य राज्य सरकार द्वारा प्राथमिकता से किया जा रहा है। इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान भी प्राप्त हुआ है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारे पुरखों ने शिक्षा को विकास का मूलमंत्र बताया है। शिक्षा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय प्रगति की है और आज प्रदेश में आईआईएम, आईआईटी और एम्स जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थान संचालित हो रहे हैं। उन्होंने समाज के प्रबुद्धजनों से शिक्षा को बढ़ावा देने, शासन की योजनाओं की जानकारी समाज तक पहुंचाने तथा युवाओं को अपने अधिकारों और लक्ष्यों के प्रति जागरूक करने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अंचल में नक्सलवाद लंबे समय तक विकास में सबसे बड़ी बाधा रहा है, किंतु डबल इंजन सरकार के संकल्प और हमारे सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से इस बाधा को दूर किया जा रहा है। वर्षों से विकास से वंचित इस अंचल में अब विकास की नई धारा प्रवाहित हो रही है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि शहीद गैंदसिंह छत्तीसगढ़ के पहले वीर शहीद जननायक थे, जिन्होंने वर्ष 1824-25 में अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध संघर्ष का बिगुल फूंका। उन्होंने अंग्रेजों द्वारा संसाधनों की लूट और आदिवासियों के शोषण के खिलाफ साहसिक संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ के जनजातीय नायकों का योगदान अतुलनीय रहा है।

कार्यक्रम में अखिल भारतीय हल्बा-हल्बी आदिवासी समाज के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. देवेंद्र माहला, महामंत्री गिरवर सिंह ठाकुर, महेश गागड़ा सहित समाज के अनेक गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में स्थापित मंत शंकर देव शोध पीठ का हुआ लोकार्पण

पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में स्थापित मंत शंकर देव शोध पीठ का हुआ लोकार्पण
राज्यपाल रमेन डेका की पहल पर पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में स्थापित महान संत, समाज सुधारक और सांस्कृतिक चेतना के प्रणेता मंत शंकरदेव के विचारों, दर्शन और साहित्य को समर्पित शोध संस्थान का भव्य लोकार्पण आज गरिमामय समारोह में सम्पन्न हुआ।

इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यपाल रमेन डेका ने की। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा, डॉ. कृष्ण गोपाल जी सह-सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ सहित शिक्षा जगत के विद्वान, शोधार्थी, युवा वर्ग तथा गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इसके साथ ही पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ तथा पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के मध्य एम.ओ.यू. पर भी हस्ताक्षर किया गया। एम.ओ.यू. के पश्चात दोनों ही विश्वविद्यालय के शोधार्थी एक-दूसरे विश्वविद्यालय में अंतरविषयक अनुसंधान कर सकेंगे।

इस अवसर पर अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि मंत शंकर देव के विचार आज भी समाज को जोड़ने, सामानता स्थापित करने और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने की प्रेरणा देते हैं।

डेका ने कहा कि इस शोध पीठ की स्थापना उत्तर पूर्वी भारत और मध्य भारत की सांस्कृतिक विरासत को अकादमी एवं शोध के स्तर पर जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह शोध पीठ भारत की महान संत परंपरा, भक्ति आंदोलन और सामाजिक सुधारों पर केंद्रित अध्ययन का सशक्त केंद्र बनेगी। उन्होंने कहा कि ऐसे अकादमिक प्रयास देश की सांस्कृतिक एकता को और मजबूत करते हैं।

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा इस शोध पीठ के संचालन हेतु वर्तमान वित्तीय वर्ष में 2 करोड़ रूपये दिए गए हैं जिसके लिए उन्हांेने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को धन्यवाद दिया।

राज्यपाल ने कहा कि मंत शंकर देव ने समाज सुधारक, शिक्षाविद, कलाकार, नाटककार, नाट्य निर्देशक, चित्रकार, साहित्यकार, गीतकार, संगीत और वैष्णव धर्म के प्रवर्तक व प्रचारक के रूप में ख्याति अर्जित की है। मंत शंकर देव को उत्तर पूर्व भारत के महान समाज सुधारक बताते हुए कहा कि उन्होंने जाति, वर्ग और धर्म से ऊपर उठ कर समरस समाज की कल्पना की। नामघर और सत्र परंपरा के माध्यम से उन्होंने समानता, करूणा और उदारता पर आधारित सामाजिक व्यवस्था को सुदृढ़ किया। मंत शंकर देव द्वारा रचित साहित्य अंकिया नाट और बोरगीत आज भारतीय सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर हैं। उनके विचारों ने असमिया समाज को एक सूत्र में पिरोया और सामाजिक चेतना को नई दिशा दी।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि पूज्य शंकरदेव जी का कार्यक्षेत्र भले ही असम था, लेकिन उनके द्वारा सामाजिक जागरण का जो कार्य किया गया, उसका प्रभाव संपूर्ण देश पर पड़ा। मंत शंकर देव जी द्वारा रचित साहित्य, नाटक, भजन में भारतीय संस्कृति का उद्घोष है।. हमारा देश अपनी एकता और अखंडता के लिए जाना जाता है। इसके पीछे शंकरदेव जी जैसे भारत माता के सपूत हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश की संस्कृति को समर्पित किया। वर्तमान और नई पीढ़ी को अपने पूर्वजों के योगदान को बताकर हम एक सक्षम और समृद्ध भारत बना सकते हैं। इससे लोगों में देशभक्ति की भावना का संचार होता है। शंकर देव जी ने अपनी एक रचना में कहा कि भारत भूमि में जन्म लेना सबसे सौभाग्य की बात है। उन्होंने 500 वर्ष पहले एक भारत का जो संदेश दिया, उसे आज हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत‘ का नारा देकर साकार कर रहे हैं।

मुख्य वक्ता डॉ कृष्ण गोपाल जी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा असम राज्य विविधताओं से भरा हुआ है। यहां विविध प्रकार की जनजाति भौगालिक, नदी, पहाड़, जंगल, घने वन उपस्थित है। जिस कारण यहां हजारों वर्षों से दूर दूर विविध जनजाति निवास करते है। इन जनजातियों को एक सूत्र में बांधने का महत्वपूर्व कार्य मंत शंकर देव ने किया। उन्होंने कृष्ण भक्ति के माध्यम से किया लोगो को जोड़ा। वे भक्ति आंदोलन के प्रमुख व्यक्तिव है उन्होंने भक्ति के साहित्य का लेखन किया, नाट्य, गायन खड़े प्रशिक्षण दिया। गांव गांव में नाम घर की स्थापना किए। आज असम के हर गांव है जिसे नाम स्थापित है। भक्ति, संस्कृति एवं सामाजिक सद्भाव का घर कहलाता है। उन्होंने मंत शंकर देव के योगदान पर विस्तृत प्रकाश डाला।

उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि मंत शंकरदेव ने शिक्षा को केवल साक्षरता तक सीमित न रखकर उसे संस्कार और संस्कृति से जोड़ा। यह शोध संस्थान केवल भवन नहीं, बल्कि विचारों की कार्यशाला बनकर उभरेगा। यहाँ से निकलने वाले शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पहचान दिलाएंगे।

कार्यक्रम के अंत में संस्थान की स्थापना से जुड़े सभी सहयोगियों और प्रबंधन समिति को बधाई देते हुए आशा व्यक्त की गई कि यह केंद्र भविष्य में ज्ञान, नवाचार और सत्य की खोज का प्रमुख केंद्र बनेगा तथा वसुधैव कुटुम्बकम् के संदेश को विश्व पटल पर स्थापित करेगा।

गौरतलब है मंत शंकरदेव शोध पीठ की स्थापना का मुख्य उद्देश्य उत्तरपूर्वी भारत तथा मध्य भारत के भक्ति आन्दोलन से जुड़े महान संतों के योगदान एवं व्यापक प्रभाव को भारतीय जनमानस के समक्ष लेकर आना साथ ही दोनों ही क्षेत्रों के जनजातीय सांस्कृतिक विरासत की मौखिक परंपरा को लेखबद्ध करना है। शोधपीठ के द्वारा शोधवृत्ति भी शोधार्थियों को प्रदान किया जाएगा। शोधपीठ में भाषा, साहित्य, इतिहास, प्राचीन भारतीय इतिहास, क्षेत्रीय अध्ययन, समाजशास्त्र एवं समाजकार्य के विषय के शोधार्थी शोधकार्य कर सकते हैं।

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