स्वामी विवेकानंद ने दुनिया में बढ़ाया भारत की संस्कृति एवं सनातन का मान – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

स्वामी विवेकानंद ने दुनिया में बढ़ाया भारत की संस्कृति एवं सनातन का मान – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने अल्पायु में ही संपूर्ण विश्व को भारत की सनातन संस्कृति, अध्यात्म और दर्शन से परिचित कराते हुए देश का सम्मान बढ़ाया था। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज शाम राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित सेंड ऑफ सेरेमनी समारोह में युवाओं को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम का आयोजन खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा किया गया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के जन्मदिवस पर प्रतिवर्ष 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है तथा राष्ट्रीय युवा उत्सव का आयोजन किया जाता है। यह उत्सव भारत की युवा ऊर्जा, रचनात्मकता और राष्ट्र निर्माण की भावना का सशक्त प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि हम छत्तीसगढ़ वासियों के लिए यह बड़े सौभाग्य की बात है कि स्वामी विवेकानंद जी ने अपना अधिकांश समय रायपुर में बिताया। बूढ़ा तालाब एवं डे-भवन जैसी पावन स्थलों की स्मृतियाँ आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस वर्ष राष्ट्रीय युवा उत्सव में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करने के लिए 75 प्रतिभाशाली युवाओं का चयन किया गया है, जो पूरे राज्य के लिए गौरव की बात है। इनमें 45 युवा विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग से, 1 युवा डिजाइन फॉर भारत ट्रैक से तथा 29 प्रतिभागी सांस्कृतिक ट्रैक्स से शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय युवा उत्सव में छत्तीसगढ़ के युवाओं का प्रतिनिधित्व भारत की युवा शक्ति, रचनात्मकता, नेतृत्व क्षमता और विकसित भारत के संकल्प में सहभागी बनने का सुनहरा मौका है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के युवा राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, लोकनृत्य, लोकगीत और युवा नेतृत्व का प्रदर्शन करेंगे। इससे छत्तीसगढ़ की मिट्टी की खुशबू पूरे देश में बिखरेगी और राज्य गौरवान्वित होगा।मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रीय स्तर पर चयनित सभी प्रतिभागियों को बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के युवा 9 जनवरी को नई दिल्ली पहुँचकर देश के विभिन्न प्रांतों से आए युवा कलाकारों एवं यंग लीडर्स से मुलाकात करेंगे और विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। 11 जनवरी को इसरो के गगनयात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से मिलेंगे और उनके अंतरिक्ष अनुभवों से प्रेरणा प्राप्त करेंगे। इसके साथ ही 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस पर यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के युवा प्रतिभागियों को संबोधित करेंगे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि युवा शक्ति राष्ट्र की पहचान है और युवा शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद जी के प्रसिद्ध संदेश – “उठो, जागो और तब तक नहीं रुको, जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए” – का उल्लेख करते हुए युवाओं से इससे प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि जहाँ युवा समूह होता है, वहाँ ऊर्जा का स्वाभाविक संचार होता है। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का सपना है कि देश के यंग लीडर्स सभी क्षेत्रों में नेतृत्व करें। हमारी सरकार ने बेहतर व्यवस्थाओं के साथ विकासखंड स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक युवा महोत्सव का सफल आयोजन कराया है। इसके लिए उन्होंने विभागीय अधिकारियों की सराहना भी की। साव ने भी सभी चयनित प्रतिभागियों को बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने मुख्य मंच से चयनित प्रतिभागियों को वेशभूषा किट प्रदान किए। साथ ही कुछ प्रतिभागियों ने अपने अनुभव भी साझा किए।

इस मौके पर युवा आयोग अध्यक्ष विश्वविजय सिंह तोमर, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार सहित अन्य विभागीय अधिकारीगण एवं प्रतिभागी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल

चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल
वैश्विक बाजारों से मिल रहे मजबूत संकेतों और घरेलू मांग में उछाल के चलते भारतीय सर्राफा बाजार में मंगलवार को ऐतिहासिक तेजी देखी गई। दिल्ली के हाजिर बाजार में चांदी ने ₹2.51 लाख प्रति किलो के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर लिया है, जबकि सोना भी ₹1,41,500 प्रति 10 ग्राम के नए शिखर पर पहुंच गया है। सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नरम रुख के कारण कीमतों में इजाफा हुआ है।

ऑल इंडिया सराफा एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में चांदी की कीमतों में मंगलवार को ₹7,000 की भारी बढ़त दर्ज की गई। इसके साथ ही चांदी ₹2,51,000 प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। यह लगातार तीसरा दिन है जब चांदी की कीमतों में तेजी का रुख बना हुआ है। पिछले कारोबारी सत्र में यह ₹2,44,000 पर बंद हुई थी। सोने की कीमतों में भी लगातार चौथे दिन बढ़त जारी रही। दिल्ली में 99.9% शुद्धता वाला सोना ₹1,100 उछलकर ₹1,41,500 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, जो सोमवार को ₹1,40,400 पर बंद हुआ था।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतों का हाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में, कॉमेक्स गोल्ड फ्यूचर्स फॉर फरवरी में 24.9 अमेरिकी डॉलर या 0.56 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 4,476.4 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। मार्च डिलीवरी के लिए चांदी के वायदा भाव में भी निवेशकों की खरीदारी देखने को मिली। कॉमेक्स बाजार में, चांदी की कीमत में लगातार तीसरे दिन बढ़त जारी रही और यह 1.79 अमेरिकी डॉलर या 2.34 प्रतिशत बढ़कर 78.45 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

वेनेजुएल में हुए राजनीतिक उथल-पुथल ने सोने की मांग बढ़ाई
रिलायंस सिक्योरिटीज के वरिष्ठ अनुसंधान विश्लेषक जिगर त्रिवेदी ने कहा कि वेनेजुएला में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की बढ़ती मांग के कारण सोने की कीमतें 4,450 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस से ऊपर पहुंच गईं। यह लगातार तीसरे सत्र में बढ़त दर्ज कर रही हैं।

ट्रंप की धमकियों ने निवेशकों की भावना पर अधिक दबाव डाला
मेहता इक्विटीज लिमिटेड के कमोडिटीज के उपाध्यक्ष राहुल कलांत्री ने कहा कि मादक पदार्थों की खेप को लेकर कोलंबिया, क्यूबा और मैक्सिको के प्रति अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की धमकियों ने निवेशकों की भावना पर और अधिक दबाव डाला है। उन्होंने आगे कहा कि स्विस बैंकों द्वारा मादुरो से जुड़ी संपत्तियों को जब्त करने की खबरों ने भी कीमती धातुओं के पक्ष में बाजार की भावना को बदल दिया है।

पीएम-गृह मंत्री के खिलाफ नारे लगाने वाले होंगे निलंबित – जेएनयू

पीएम-गृह मंत्री के खिलाफ नारे लगाने वाले होंगे निलंबित
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) प्रशासन ने परिसर में हुई नारेबाजी को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि इसमें शामिल छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी और उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि किसी भी तरह की हिंसा, गैरकानूनी आचरण या राष्ट्रविरोधी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

नफरत की प्रयोगशाला नहीं बनने देंगे
जेएनयू की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि विश्वविद्यालय नवाचार और नए विचारों के केंद्र होते हैं, लेकिन उन्हें नफरत की प्रयोगशालाओं में बदलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। प्रशासन ने दो टूक कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर कानून और संस्थागत मर्यादाओं का उल्लंघन स्वीकार्य नहीं है।

नारे लगाने वाले छात्रों की हो रही पहचान
विवादित नारेबाजी को लेकर जेएनयू ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारे लगाने वाले छात्रों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ नियमों के तहत कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

छात्रों से की शांति और अनुशासन बनाए रखने की अपील
विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों से शांति और अनुशासन बनाए रखने की अपील करते हुए कहा है कि जेएनयू का माहौल अकादमिक विमर्श और रचनात्मक बहस के लिए है, न कि विभाजन और उकसावे के लिए।

क्या है पूरा विवाद
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ सोमवार रात को साबरमती हॉस्टल के बाहर कथित तौर पर आपत्तिजनक और भड़काऊ नारेबाजी की गई। इस संबंध में सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो गया है। इस मामले पर जेएनयू सुरक्षा विभाग ने वसंत कुंज(नॉर्थ) थाना एसएचओ को मुकदमा दर्ज करने के लिए शिकायत पत्र दिया है।

पुलिस को पत्र में जेएनयू प्रशासन में किया लिखा
नारेबाजी का आरोप जेएनयू छात्र संघ के पदाधिकारियों सहित कई दूसरे छात्रों पर लगा है। दरअसल, छात्र सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली दंगे मामले में आरोपी जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज होने और पांच जनवरी 2020 को परिसर में हुई हिंसा के खिलाफ नाराजगी और आक्रोश व्यक्त करने के लिए जुटे थे। इस बीच छात्रों की ओर से कथित आपत्तिजनक और भड़काऊ नारेबाजी की गई। इस मामले पर जेएनयू सुरक्षा विभाग द्वारा एसएचओ को लिखे पत्र के अनुसार साबरमती हॉस्टल के बाहर जेएनयू छात्र संघ से जुड़े छात्रों की ओर से गुरिल्ला ढाबा पर प्रतिरोध की रात शीर्षक के तहत एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। जिसका उद्देश्य पांच जनवरी 2020 को जेएनयू में हुई हिंसा की छठी वर्षगांठ मनाना था। कार्यक्रम की शुरुआत के समय ऐसा लगा कि छात्र सिर्फ वर्षगांठ के उपलक्ष्य में ही आए थे।

नारेबाजी के समय यह छात्र थे मौजूद
इस मौके पर छात्रों की संख्या लगभग 30-35 थी। कार्यक्रम के दौरान पहचाने गए प्रमुख छात्रों में जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष के.गोपिका बाबू, महासचिव सुनील यादव, संयुक्त सचिव दानिश अली के अलावा छात्र साद आजमी, महबूब इलाही, कनिष्क, पाकीजा खान, शुभम और दूसरे छात्र शामिल रहे। कार्यक्रम के दौरान उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं पर न्यायिक फैसले के बाद सभा का स्वरूप और लहजा बदल गया। कुछ छात्रों ने बेहद आपत्तिजनक, भड़काऊ और उत्तेजक नारे लगाने शुरू कर दिए। यह देश के सुप्रीम कोर्ट का प्रत्यक्ष अपमान है। इस तरह के नारे लगाना लोकतांत्रिक असहमति के बिल्कुल विपरीत है।

जानबूझकर परिसर में लगाए गए भड़काऊ और उत्तेजक नारे
यह जेएनयू आचार संहिता का उल्लंघन है। इससे सार्वजनिक व्यवस्था, परिसर में सद्भाव और विश्वविद्यालय के सुरक्षा और सुरक्षा वातावरण में गंभीर रूप से गड़बड़ी पैदा होने की संभावना है। पत्र के अनुसार नारे स्पष्ट रूप से सुनाई दे रहे थे। नारे जानबूझकर लगाए और उनको बार-बार दोहराया गया। जिससे यह संकेत मिलता है कि यह जानबूझकर और सोच-समझकर किया गया दुर्व्यवहार था न कि कोई सहज या अनजाने में की गई अभिव्यक्ति। यह कृत्य संस्थागत अनुशासन, शिष्ट संवाद के स्थापित मानदंडों और विश्वविद्यालय परिसर के शांतिपूर्ण शैक्षणिक माहौल की जानबूझकर अवहेलना को दर्शाता है। घटना के समय सुरक्षा विभाग के अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद और स्थिति पर कड़ी नजर रख हुए थे। विभाग को निर्देश मिले है कि इस घटना में बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करवाई जाएं।

जेएनयू का विवादों से है पुराना नाता
जेएनयू में भड़काऊ और आपत्तिजनक नारेबाजी का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी जेएनयू छात्रों के ऊपर नारेबाजी, प्रदर्शन और पुतला दहन करने के आरोप लगते रहे है। पिछले एक वर्ष से जेएनयू छात्र संघ के पदाधिकारियों और प्रशासन के बीच कई मामलों को लेकर गतिरोध देखने को मिला है। इसमें डॉ. बीआर अंबडेकर लाइब्रेरी में तोड़फोड़ करने से लेकर जेएनयू की दीवारों पर विवादित नारेबाजी लिखने के मामले सामने आ चुके है।

देवदत्त पडिक्कल ने विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 में 600 से ज्यादा रन बनाकर इतिहास रच डाला

देवदत्त पडिक्कल ने विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 में 600 से ज्यादा रन बनाकर इतिहास रच डाला
देवदत्त पडिक्कल अभी रेड-हॉट फॉर्म में चल रहे हैं। अपनी फॉर्म के अनुरूप ही प्रदर्शन कर पडिक्कल ने एक नया रिकॉर्ड अपने नाम कर दिया है। कर्नाटक के लिए खेलते हुए पडिक्कल ने विजय हजारे ट्रॉफी में ऐसा कारनामा किया, जो इससे पहले कोई बल्लेबाज नहीं कर पाया था। राजस्थान के खिलाफ हुए मैच में पडिक्कल ने 91 रन की पारी खेली। इसी के साथ ही पडिक्कल ने इस टूर्नामेंट में एक बार फिर 600 से ज्यादा रन बनाकर नया इतिहास रच दिया।

तीसरी बार पार किया 600 का आंकड़ा
देवदत्त पडिक्कल ने अपने छठे मैच में राजस्थान के खिलाफ 91 रन की पारी खेली, जिसके साथ ही वह एक बार फिर 600 रन के क्लब में शामिल हो गए हैं। इसी के साथ अब वह विजय हजारे ट्रॉफी में तीसरी बार 600 से अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। विजय हजारे ट्रॉफी में यह कारनामा करने वाले पडिक्कल पहले खिलाड़ी बन गए हैं। इससे पहले 2019-20 सीजन में उन्होंने 609 रन बनाए थे, जबकि 2020-21 सीजन में उनके बल्ले से 737 रन आए थे।

विजय हजारे ट्रॉफी के एक सीजन में 600 से ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची काफी सीमित है। अब तक कुल 10 बल्लेबाज ही यह उपलब्धि हासिल कर सके हैं। पडिक्कल के अलावा मयंक अग्रवाल और ऋतुराज गायकवाड़ ही ऐसे बल्लेबाज हैं, जिन्होंने एक से ज्यादा बार 600 रन का आंकड़ा छुआ है, लेकिन तीन बार ऐसा करने का रिकॉर्ड अब सिर्फ पडिक्कल के नाम दर्ज हुआ है।

शानदार फॉर्म में हैं पडिक्कल
देवदत्त पडिक्कल इस साल की विजय हजारे ट्रॉफी में शानदार फॉर्म में नजर आए। टूर्नामेंट की शुरुआत में पडिक्कल ने बैक-टू-बैक शतक लगाकर अपनी लय का संकेत दे दिया था। टूर्नामेंट के दौरान उन्होंने 6 मैचों में 4 शतक जड़े। झरखंड के खिलाफ पहले मैच में 147 रन और केरल के खिलाफ 124 रन की पारी खेली। इसके बाद तमिल नाडु के खिलाफ वह 22 रन ही बना सके, लेकिन फिर पुडुचेरी (113 रन) और त्रिपुरा (108 रन) के खिलाफ शतकीय पारियां खेलकर अपनी फॉर्म साबित की। इसके बाद राजस्थान के खिलाफ इस छठे मुकाबले में भी उन्होंने 82 गेंदों पर 91 रन की पारी खेली और इसी के साथ टूर्नामेंट में 600 रन का आंकड़ा भी पार किया।

‘ड्रैगन’ का यह दोहरा चेहरा भारत के लिए बड़ी सुरक्षा चुनौती

‘ड्रैगन’ का यह दोहरा चेहरा भारत के लिए बड़ी सुरक्षा चुनौती
चीन एक बार फिर अपनी फितरत के अनुसार लद्दाख (China military build-up Ladakh) की कड़ाके की ठंड और सीमा पर जारी कूटनीतिक वार्ताओं के बीच ‘डबल गेम’ खेलता हुआ नजर आ रहा है। पूर्वी लद्दाख में LAC Buffer Zone के पास उसकी नई सैन्य गतिविधियों ने एक बार फिर तनाव बढ़ा दिया है। हालिया सैटेलाइट तस्वीरों (Satellite imagery LAC border) से खुलासा हुआ है कि चीन पैंगोंग झील के विवादित इलाकों के पास स्थायी इमारतों और बंकर्स का निर्माण कर रहा है, जो 2020 के गतिरोध के बाद उसकी लंबी सैन्य मौजूदगी का संकेत है। एक तरफ दुनिया को शांति का संदेश देने वाला चीन, दूसरी तरफ गुपचुप तरीके से एलएसी (LAC) पर जंग की तैयारी में जुटा हुआ है।

आखिर क्या बना रहा है चीन ?
खुफिया सूत्रों और हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरों से मिली जानकारी के मुताबिक, चीन पैंगोंग झील के आसपास के भूगोल को सैन्य दृष्टि से बदलने में लगा है।

भारत के लिए ये निर्माण क्यों हैं ‘रेड सिग्नल’?
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की ये गतिविधियाँ ‘स्टेटस को’ (यथास्थिति) को बदलने की एक बड़ी साजिश हैं। यदि भविष्य में 2020 जैसा कोई टकराव होता है, तो चीन इन नए ढांचों की मदद से ‘फिंगर एरिया’ में भारतीय सेना से पहले अपनी भारी मौजूदगी दर्ज करा सकता है। यह न केवल सुरक्षा के लिहाज से चुनौतीपूर्ण है, बल्कि द्विपक्षीय वार्ताओं के भरोसे भी तोड़ता है।

इंदौर में नलों का ज़हर और सत्ता का झूठ: हाईकोर्ट में बेनकाब हुआ पूरा सिस्टम

इंदौर में नलों का ज़हर और सत्ता का झूठ: हाईकोर्ट में बेनकाब हुआ पूरा सिस्टम
इंदौर के दूषित पानी कांड ने अब यह स्पष्ट कर दिया है कि यह संकट प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि संस्थागत भ्रष्टाचार और सरकारी असफलता का जीवंत प्रमाण है। हाईकोर्ट में हुई सुनवाई ने सरकार के हर उस दावे की पोल खोल दी है, जो अब तक जनता को गुमराह करता रहा।

जब अदालत में कमेटी गठन की मांग उठी, तो सरकार की ओर से जवाब देने के बजाय समय मांगा गया। कोर्ट को कहना पड़ा कि पहले मुख्य सचिव का जवाब आने दिया जाए। सवाल यह है—जब लोग मर चुके हैं, तब भी सरकार को जवाब तैयार करने के लिए समय चाहिए?
अधिवक्ता अजय बागड़िया ने अदालत के सामने जो तथ्य रखे, वे किसी आरोप नहीं, बल्कि सरकारी दस्तावेज़ों से निकली सच्चाई हैं। वर्ष 2017-18 की प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में 60 में से 59 पानी के सैंपल फेल होना यह साबित करता है कि यह ज़हर अचानक नहीं फैला, बल्कि सालों से पिलाया जा रहा था। यदि यह जानकारी सरकार के पास थी और फिर भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह लापरवाही नहीं—आपराधिक चुप्पी है।

नगर निगम की कथित जल जांच प्रयोगशाला पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जांच हो ही नहीं रही। अधिवक्ता मनीष यादव का यह कहना कि केवल निलंबन या विभागीय जांच पर्याप्त नहीं है, पूरी तरह जायज़ है। जब निर्दोष नागरिकों की मौत हुई है, तब जिम्मेदारों पर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए, न कि उन्हें सिस्टम के भीतर बचाया जाए।
सबसे शर्मनाक स्थिति तब उजागर हुई, जब यह सामने आया कि कोर्ट के आदेश के बावजूद भागीरथपुरा जैसे क्षेत्रों में टैंकर से साफ पानी तक नहीं पहुंचाया गया, और नगर निगम ने शपथपत्र पर झूठी जानकारी दी। यदि अदालत के सामने झूठ बोला जा रहा है, तो जनता के साथ क्या किया जा रहा होगा—इसका अनुमान लगाना कठिन नहीं है।

सरकार की प्राथमिकता साफ पानी नहीं, बल्कि फेक न्यूज का हवाला देकर सच्चाई दबाना बनती जा रही है। अधिवक्ता रितेश इनानी द्वारा रोजाना हेल्थ बुलेटिन की मांग बताती है कि शासन आंकड़े छुपा रहा है। पारदर्शिता से डर किसे है—यह सवाल अब सत्ता से पूछा जाना चाहिए।

हाईकोर्ट द्वारा मुख्य सचिव को तलब किया जाना इस बात का संकेत है कि मामला निचले स्तर का नहीं, शीर्ष स्तर की जवाबदेही का है। 15 जनवरी को होने वाली सुनवाई केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि यह तय करेगी कि क्या शासन जनजीवन को लेकर गंभीर है या फिर इंदौर को एक प्रयोगशाला की तरह इस्तेमाल करता रहेगा।
यह संपादकीय स्पष्ट चेतावनी देता है—
यदि इस बार भी जांच को समय, कमेटी और काग़ज़ों में उलझाया गया,
यदि दोषियों पर आपराधिक मुकदमे दर्ज नहीं हुए,
तो यह माना जाएगा कि सरकार स्वयं इस अपराध की साझेदार है।
इंदौर अब केवल साफ पानी नहीं मांग रहा—
वह सच, जवाबदेही और न्याय मांग रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जयपुर में निवेशकों को मध्यप्रदेश में निवेश के लिए किया आमंत्रित

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जयपुर में निवेशकों को मध्यप्रदेश में निवेश के लिए किया आमंत्रित
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश, देश का सबसे युवा राज्य है। मध्यप्रदेश टाइगर स्टेट है, चीता स्टेट है, फारेस्ट स्टेट है, मिनरल स्टेट है, बिजली सरप्लस स्टेट है और अब देश का सबसे बेहतर इन्वेस्टमेंट फ्रेंडली स्टेट भी बन गया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश वर्ष 2025 में सबसे ज्यादा निवेश पाने वाला देश का तीसरा राज्य बना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश अनंत अवसर और संभावनायें लिए हुए है। मध्यप्रदेश में निवेश हर मायने में लाभ का सौदा है। देश के मध्य में होने के कारण मध्यप्रदेश व्यापार, व्यवसाय, उद्योग-धंधे और स्टार्ट-अप्स लगाने से लेकर अपने उत्पाद को निर्यात करने के लिए एक अनुपम केंद्र बन रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को पिंक सिटी जयपुर में राजस्थान डिजीफेस्ट-टाई ग्लोबल समिट 2026 में मध्यप्रदेश सेशन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश और राजस्थान दोनों सदियों से इतिहास, विरासत और व्यापार-व्यवसाय की समझ के मामले में साझा भागीदार रहे हैं। राजस्थान के मारवाड़ी व्यापारी मध्यप्रदेश में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। समिट में राजस्थान के उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा भी उपस्थित थे। मध्यप्रदेश सरकार इस प्रतिष्ठित ग्लोबल समिट में ‘स्टेट पार्टनर’ के रूप में सहभागिता कर रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश को विकास और अवसरों का केंद्र बताते हुए निवेशकों और उद्योगपतियों से कहा कि हमारा प्रदेश आज देश के उन चुनिंदा राज्यों में है, जहां प्राकृतिक संसाधन, उद्योग-अनुकूल नीतियां, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और सहयोगी सरकार सभी निवेशकों के लिए आदर्श वातावरण तैयार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में 18 नई उद्योग-अनुकूल नीतियां, विस्तृत लैंड बैंक, भरपूर जल उपलब्धता, स्किल्ड मानव संसाधन, उत्कृष्ट लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी और पारदर्शी प्रशासन निवेशकों को सर्वोत्तम सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर राजस्थान डिजिफेस्ट-टाई ग्लोबल समिट के मध्यप्रदेश सेशन का विधिवत् शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि सभी राज्यों के बीच औद्योगिक विकास की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा चल रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में देश के सभी राज्यों को आगे बढ़ने का समान अवसर मिल रहा है। वैश्विक अर्थव्यवस्था आज भी उहापोह की स्थिति में है, ऐसी परिस्थिति में भी भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। भारत के लोकतंत्र में ‘जियो और जीने दो’ की भावना समाहित है। उद्योग-व्यापार से कई लोगों के जीवन में सवेरा आता है। इससे पवित्र काम कुछ नहीं हो सकता है। मध्यप्रदेश विकास के सभी सेक्टर्स में लगातार आगे बढ़ रहा है। प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर भी कई बड़े पुरस्कार मिले हैं। हमारे टूरिज्म सेक्टर में सबसे अच्छे रिजल्ट देखने को मिल रहे हैं। पिछले दो साल में हमने प्रदेश में दो नए टाइगर रिजर्व बनाए हैं। मध्यप्रदेश टाइगर और वल्चर स्टेट तो है ही, हमारी धरती पर चीता भी तेजी से अपना कुनबा बढ़ा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। यहां 250 से अधिक नदियां बहती हैं। हमने राजस्थान के साथ जल बंटवारे का विवाद सुलझाया। हमारे कार्यों में परस्पर सौहार्द और बंधुता का भाव होना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने मेक इन इंडिया और इंडिया फर्स्ट का आह्वान किया है। यह सिर्फ शब्द नहीं हैं, इसके लिए बड़े मन से काम करने का मानस होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार निवेशकों और उद्योगपतियों को प्रोत्साहित करने के लिए शासकीय कामकाज को और भी सरल, सहज, पारदर्शी, आसान और सहयोगी बना रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में होटल, हास्पिटल, एआई, ड्रोन, सेमी कंडक्टर निर्माण एवं अन्य कई व्यवसाय स्थापित करने पर अनुदान दिया जा रहा है। राज्य सरकार ने पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल खोलने की शुरुआत की है। जिससे प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को गति मिलेगी और हमें पर्याप्त संख्या में डाक्टर्स भी मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि रिन्यूएबल एनर्जी, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, फार्मा, आईटी और पेट्रो केमिकल्स जैसे सभी प्रमुख सेक्टर्स में निवेश के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं। उन्होंने निवेशकों को औद्योगिक सहयोग के साथ-साथ शिक्षा, अनुसंधान, संस्कृति, कौशल विकास, अवसंरचना और पर्यटन में साझेदारी के लिए आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री ने निवेशकों को विश्वास दिलाया कि मध्यप्रदेश निवेशकों के साथ दीर्घकालिक साझेदारी के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। आप सभी आइडिया को जमीन पर उतारिए, हमारी सरकार हमेशा आपके साथ है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश और राजस्थान सरकार की संयुक्त भागीदारी से हुई इस समिट में हमारी सरकार ने आईटी और संबंधित सेक्टर्स के व्यवसायियों के बीच प्रदेश की औद्योगिक विशेषताओं और विलक्षणताओं को सबके समक्ष रखा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उम्मीद जताई कि मध्यप्रदेश औद्योगिक निवेश के लिए आईडियल स्टेट है। निवेशक मध्यप्रदेश में अपना व्यापार-व्यवसाय स्थापित करेंगे, तो हम सभी को पूरा सहयोग करेंगे। राजस्थान हमारा सहोदर भाई है। दोनों राज्यों में आईटी सेक्टर के उद्योग स्थापित हों, इसके लिए हमारी सरकार राजस्थान के साथ मिलकर काम करेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) परियोजना की सौगात दी। इससे राजस्थान के 15 और मध्यप्रदेश के 13 जिले लाभान्वित हो रहे हैं। इसी के साथ मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश के साथ केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना और महाराष्ट्र के साथ ताप्ती ग्राउंड वॉटर रीचार्ज मेगा परियोजना पर भी मिलकर काम कर रहा है।

राजस्थान के उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने निवेशकों, स्टार्ट-अप और युवाओं के लिए अधिक अवसर प्रदान करने के लिए राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच बढ़ते सहयोग पर जोर दिया। उन्होंने आर्थिक विकास में डिजिटल परिवर्तन, नवाचार और उद्यमिता की भूमिका पर प्रकाश डाला और म.प्र. के मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश के विकास संबंधी विजन की सराहना की। उन्होंने सक्षम नीतियों और प्रौद्योगिकी-आधारित शासन के प्रति राजस्थान की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

अपर मुख्य सचिव, विज्ञान एवं तकनीकी संजय दुबे ने मध्यप्रदेश की बेजोड़ खूबियों पर प्रकाश डालते हुए निवेशकों से कहा कि देश में टियर 2 सिटी टेक्नोलॉजी सेक्टर में लीडर बनकर उभर रही है। इनमें जयपुर, इंदौर और भोपाल भी शामिल हैं। टीयर 1 सिटीज में ट्रैफिक और प्रदूषण जैसी समस्याएं होती हैं। मध्यप्रदेश सरकार ने अपनी नई नीतियों में उद्योग-व्यापार को सहज-सरल बनाने पर ध्यान दिया गया है। मध्यप्रदेश सांस्कृतिक विविधता, खानपान दृष्टि से समृद्ध है। प्रदेश में 9 हवाई अड्डे है और यहाँ से इंटरनेशनल उड़ानें उपलब्ध हैं। प्रदेश में 21 अभायरण्य, 12 नेशनल पार्क और 7 टाइगर रिजर्व और 3 यूनेस्को साइट हैं। मध्यप्रदेश टाइगर और चीता स्टेट भी है। प्रदेश में बिजली सबसे सस्ती दरों पर मिलती है। भोपाल में एयरपोर्ट के पास 200 एकड़ भूमि पर एआई एवं नॉलेज सिटी प्रस्तावित है। राज्य सरकार डेटा सेंटर स्थापित करने पर 2 रुपए प्रति यूनिट इलेक्ट्रिसिटी सब्सिडी दे रही है। हमने जीसीसी पॉलिसी 2025 के माध्यम से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस का एक बेहतर माहौल तैयार किया है। प्रदेश में फिल्म निर्माण उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है। राज्य सरकार ने सेमी कंडक्टर पॉलिसी, स्टार्ट-अप पॉलिसी लॉन्च की हैं। प्रदेश में आईटी सेक्टर में 100 करोड़ निवेश करने पर 30 करोड़ रुपए की सब्सिडी दी जा रही है। इसी प्रकार ड्रोन टेक्नोलॉजी सेक्टर में 100 करोड़ निवेश करने पर 34 करोड़ और सेमी कंडक्टर में 100 करोड़ निवेश करने पर 38 करोड़ सब्सिडी देने का प्रावधान किया है।

समिट में मध्यप्रदेश की मजबूत उद्योग शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हुए, राज्य में मुख्यालय या परिचालन आधारित विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त कंपनियों द्वारा मध्यप्रदेश की प्रौद्योगिकी सफलता एवं वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उद्यमों को सशक्त बनाने में राज्य की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला गया।

सीईओ इम्पेटस टेक्नोलॉजीज संजीव अग्रवाल ने कहा कि वे पिछले 32 वर्षों से मध्यप्रदेश में कार्यरत हैं।उस समय राज्य में आईटी इको सिस्टम की शुरुआत हो रही थी। मध्यप्रदेश सरकार का व्यावहारिक सहयोग, संवाद के प्रति खुलापन, लागत-प्रभावशीलता पर जोर और गुणवत्तापूर्ण प्रतिभा पर ध्यान, ये सभी कारक मिलकर निवेश और विकास के लिए अत्यंत अनुकूल वातावरण का निर्माण करते हैं। अग्रवाल ने कहा कि आज राज्य वैश्विक ग्राहकों के साथ सफलतापूर्वक कार्य कर रहा है और निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।यदि कोई निवेशक सतत विकास, मजबूत सरकारी सहयोग और विश्वसनीय पारिस्थितिकी तंत्र की तलाश में है, तो मध्यप्रदेश इसके लिए सबसे उपयुक्त और आदर्श स्थान है।

सह-संस्थापक इंफोबीन्स टेक्नोलॉजीज सिद्धार्थ सेठी ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जहां विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) की स्थापना हुई थी। इंदौर का आईटी पार्क दिन-प्रतिदिन तेज़ गति से विकसित हो रहा है। ड्रोन और स्पेस टेक्नोलॉजी से जुड़ी समर्पित नीतियां सरकार की दूरदर्शी सोच तथा भविष्यपरक दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं।मध्यप्रदेश न केवल प्रगति कर रहा है, बल्कि इस क्षेत्र में नेतृत्व भी कर रहा है। उन्होंने सभी निवेशकों को मध्यप्रदेश में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया।

सह-संस्थापक यश टेक्नोलॉजीज धर्मेंद्र जैन ने कहा कि वर्तमान में इंदौर में कंपनी के 1,500 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार के स्पष्ट दृष्टिकोण की सराहना करते हुए कहा कि जब तक आवश्यकता नहीं होती, सरकार हस्तक्षेप नहीं करती; लेकिन उद्योग को आवश्यकता पड़ने पर पूरी मजबूती से साथ खड़ी रहती है। यहां समय पर वरिष्ठ अधिकारियों से मिलना और सीधा संवाद करना संभव है। सरकार द्वारा निर्मित मजबूत औद्योगिक इको सिस्टम का ही परिणाम है कि एक बार व्यवस्थित हों जाने के बाद उद्योग स्वतः गति पकड़ लेता है और निरंतर विकास करता है।

निदेशक क्लिनिसप्लाइज़ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के प्रेरिता बाहेती ने मध्यप्रदेश में क्लिनिसपलाइज़ के तेज़ी से विस्तार पर ज़ोर दिया, जिसमें उज्जैन के विक्रमादित्य मेडिकल डिवाइस पार्क में 100 करोड़ की मैन्युफ़ैक्चरिंग फ़ैसिलिटी शामिल है, जिससे 1,000 से ज़्यादा रोज़गार सृजित होंगे।इंदौर में भारत में अपना पहला ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित किया गया है। उन्होंने इस फैसले का श्रेय मज़बूत और स्थिर टैलेंट की उपलब्धता, सरकार के सक्रिय समर्थन, बिज़नेस करने में आसानी और अच्छी क्वालिटी की ज़िंदगी को दिया, और लंबे समय के निवेश के लिए राज्य की प्रगतिशील और भविष्य-केंद्रित नीतियों पर भरोसा जताया।

राजस्थान के उद्योगपति रजत अग्रवाल, चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर, ग्रेविटा इंडिया लिमिटेड ने रीसाइक्लिंग को एक भविष्य-उन्मुख उद्योग के रूप में बताया जो पर्यावरणीय स्थिरता को आर्थिक विकास के साथ जोड़ता है। उन्होंने मध्यप्रदेश की रणनीतिक केंद्रीय स्थिति, लॉजिस्टिक्स का फायदा और विकसित हो रहे सरकार-उद्योग साझेदारी मॉडल पर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि सही नेतृत्व और नीतियों के साथ, राज्य में सर्कुलर इकोनॉमी के लिए एक राष्ट्रीय और वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने की क्षमता है।

सु कार्लिना मारानी, ​​मैनेजिंग डायरेक्टर, एक्सेंचर ने एडवांस्ड डिजिटल स्किल्स की वैश्विक कमी और जैसे क्षेत्रों में विशेष टैलेंट की बढ़ती मांग पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत के टियर-2 शहर, मज़बूत टैलेंट पूल, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर जीवन स्तर के साथ, भविष्य में टेक्नोलॉजी से होने वाली ग्रोथ में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने मध्यप्रदेश में विस्तार के अवसरों को तलाशने में रुचि दिखाई।

समिट में एक विशेष एमपी पेवेलियन स्थापित किया गया जिसमे राज्य के प्रमुख स्टार्ट-अप्स एवं कंपनियों को प्रदर्शित किया गया।इस पेवेलियन में किंट्सुगी बिजनेस लैब्स प्राइवेट लिमिटेड, थ्रीवे स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड, कॉमन स्कूल (कॉमनफाई वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड), एसए डिजिटल (ग्रोबोट्स), यंगोवेटर एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड, Gradyn.ai तथा ज़ांगोह सहित कई प्रदर्शक शामिल थे। प्रौद्योगिकी, शिक्षा, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और उभरते क्षेत्रों में अपने अभिनव समाधानों का प्रदर्शन किया जिससे मध्यप्रदेश के तेजी से विकसित हो रहे स्टार्ट-अप एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सीईओ, निवेशकों तथा वैश्विक उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ व्यक्तिगत बैठक कर मध्यप्रदेश में रणनीतिक निवेश के अवसरों एवं दीर्घकालिक सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। दुबई के TECOM ग्रुप के कार्यकारी उपाध्यक्ष अम्मार अल मलिक के साथ चर्चा दुबई के सफल डिजिटल क्लस्टर मॉडल से प्रेरणा लेते हुए संस्थागत सहयोग पर केंद्रित रही। विशेष रूप से प्रस्तावित भोपाल AI नॉलेज सिटी के विकास तथा मध्यप्रदेश स्थित टेक्नोलॉजी कंपनियों को वैश्विक बाजारों तक पहुंच प्रदान करने पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।

ग्रेविटा इंडिया लिमिटेड के रजत अग्रवाल एवं इंसोलेशन एनर्जी लिमिटेड के विकास जैन के साथ बातचीत सर्कुलर इकोनॉमी, मेटल रीसाइक्लिंग और रिन्यूएबल एनर्जी मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों में विस्तार एवं निवेश के अवसरों पर केंद्रित रही।डेटा ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक अजय डेटा के साथ ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs), डेटा सेंटर्स और GPU-आधारित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, KGeN के संस्थापक मनीष अग्रवाल और पर्पल टेक्नोलॉजीज के संस्थापक धर मुप्पिडी के साथ विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी AI एवं गेमिंग-आधारित AVGC इको सिस्टम के निर्माण, वन-टू-वन फाइनेंस के संस्थापक एवं CEO डॉ. रवि मोदानी के साथ फिनटेक-आधारित MSME फाइनेंसिंग के अवसर, फ्रैक्टल एनालिटिक्स के उपाध्यक्ष कांत वेलामाकन्नी के साथ एडवांस्ड एनालिटिक्स तथा AI-आधारित गवर्नेंस, शुभाशीष ग्रुप के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक जय कृष्ण जाजू के साथ मध्यप्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स तथा शहरी विकास के संभावित अवसरों पर केंद्रित रही। ये वन-टू-वन बैठकें मध्यप्रदेश को नवाचार, सतत विकास तथा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगी।

दिल्ली में हुए मंथन से सड़क नेटवर्क विस्तार को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

दिल्ली में हुए मंथन से सड़क नेटवर्क विस्तार को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सिंहस्थ-2028 को दृष्टिगत रखते हुए प्रस्तावित सड़क परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन के लिए सुदृढ़, सुरक्षित और सुगम सड़क कनेक्टिविटी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने मध्यप्रदेश में सड़क परियोजनाओं की संतोषजनक प्रगति के लिए राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य के बेहतर समन्वय से सड़क परियोजनाओं के क्रियान्वयन में उल्लेखनीय गति आई है। यह बात केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री गडकरी ने, मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार, सुदृढ़ीकरण एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन को नई गति प्रदान करने के उद्देश्य से दिल्ली में समीक्षा बैठक में कही। बैठक में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव एवं म.प्र. विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर भी शामिल हुए।

केन्द्रीय मंत्री गडकरी ने राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के अंतर्गत ब्यूटीफिकेशन, ब्रिज निर्माण, पुलिया निर्माण तथा ब्लैक स्पॉट रेक्टिफिकेशन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सड़कें केवल यातायात का माध्यम नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास और जनसुविधा का आधार होती हैं, इसलिए इनके सौंदर्यीकरण और सुरक्षा उपायों पर विशेष ध्यान दिया जाना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि दुर्घटना संभावित स्थलों की पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर सुधारात्मक कार्य किए जाएं।

सड़क निर्माण की गुणवत्ता को दें सर्वोच्च प्राथमिकता
केंद्रीय मंत्री गडकरी ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सड़क परियोजनाओं में वृक्ष कटाई को न्यूनतम रखते हुए आधुनिक तकनीकों के माध्यम से ट्री ट्रांसप्लांट को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जिससे विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कॉन्ट्रैक्टर्स से सीधे संवाद कर प्रत्येक परियोजना की समीक्षा की और कहा कि सभी कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप ही किए जाएं।

केन्द्रीय मंत्री गडकरी ने पेचवर्क सहित सड़क रख-रखाव कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि टोल टैक्स वाली सड़कों की स्थिति उत्कृष्ट होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि किसी टोल रोड पर सड़क की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाई जाती है, तो संबंधित टोल संचालकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने लंबित परियोजनाओं को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश देते हुए समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर बल दिया।

दिल्ली में हुआ मंथन राजमार्ग परियोजनाओं के क्रियान्वयन की गति और गुणवत्ता करेंगी सुनिश्चित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह मंथन बैठक केंद्र एवं राज्य सरकार के बीच संस्थागत समन्वय को और अधिक सुदृढ़ करेगी तथा राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के क्रियान्वयन में गति और गुणवत्ता दोनों सुनिश्चित करेगी। उन्होंने कहा कि इस समीक्षा के माध्यम से लंबित एवं प्रगतिरत परियोजनाओं से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों-जैसे भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय स्वीकृतियां, निर्माण गुणवत्ता और समयबद्धता-पर समन्वित निर्णय लिए गए हैं, जिससे कार्यों को शीघ्रता से धरातल पर उतारा जा सकेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एक मजबूत, आधुनिक और सुरक्षित सड़क नेटवर्क प्रदेश की आर्थिक प्रगति, औद्योगिक विकास, निवेश आकर्षण और पर्यटन विस्तार की आधारशिला है। राष्ट्रीय राजमार्गों के सुदृढ़ीकरण से न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि व्यापार, लॉजिस्टिक्स, कृषि विपणन और रोजगार सृजन को भी नया प्रोत्साहन मिलेगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार के सहयोग और राज्य सरकार की सक्रिय भूमिका से मध्यप्रदेश में सड़क अवसंरचना को नई दिशा मिलेगी तथा आम नागरिकों को सुरक्षित, सुगम और विश्वस्तरीय यातायात सुविधाओं का लाभ प्राप्त होगा।

लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कुशल नेतृत्व में राज्य में सड़क नेटवर्क को सुदृढ़ और आधुनिक बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का निर्माण कार्य तेज़ गति से प्रगति पर है। उन्होंने बताया कि इन परियोजनाओं से आवागमन सुगम होगा, आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और आम नागरिकों को बेहतर परिवहन सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। उन्होंने राज्य में राष्ट्रीय राज्यमार्ग परियोजनाएँ तीव्र गति से प्रस्तावित करने के लिए केंद्रीय मंत्री गडकरी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने राज्य सरकार की परियोजनाओं में विकासात्मक उपलब्धियों की जानकारी भी साझा की।

मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को समय-सीमा में पूर्ण करने लिए में प्रति माह परियोजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की जा रही है। राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए हरसंभव सहयोग दिया जा रहा हैं। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं के लिए भूमि अर्जन, फॉरेस्ट क्लियरेंस आदि कार्यों में गति लाई जा रही है। सिंहस्थ-2028 के लिए परियोजनाओं को पूर्ण करने के लिए समय सीमा दिसम्बर-2027 रखी गई है। संभाग एवं जिला प्रशासन को राष्ट्रीय परियोजनाओं के कार्यों में गति लाने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए राज्य सरकार द्वारा विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव समिति के प्रतिनिधिमंडल ने की सौजन्य मुलाकात

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव समिति के प्रतिनिधिमंडल ने की सौजन्य मुलाकात
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज मंत्रालय महानदी भवन में राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव 2026 समिति के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब उपस्थित थे।

प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव में मुख्य अतिथि के रुप में आमंत्रित किया।

इस अवसर पर के.के. भारद्वाज, डॉ. संदीप जैन, नरेंद्र लोधी, गोविंद वर्मा, पुष्कर साहू, संतोष लोधी, अशोक चंद्राकर, देवनाथ साहु, राकेश सोनकर, हीरामन कोसले, विक्रम परमार, चंद्रशेखर साहू, गणेश राम साहू, दूजे राम धीवर उपस्थित थे।

भर्ती परीक्षाओं में निष्पक्षता और पारदर्शिता सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री साय

भर्ती परीक्षाओं में निष्पक्षता और पारदर्शिता सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक कर प्रदेश में आयोजित हो रही विभिन्न भर्ती परीक्षाओं की व्यापक समीक्षा की। बैठक का मुख्य उद्देश्य भर्ती प्रक्रियाओं को पूर्णतः पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध ढंग से संपन्न कराना है। इस दौरान उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा भी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि युवा कठिन परिश्रम और समर्पण के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, इसलिए शासन की प्रतिबद्धता है कि उनके साथ किसी भी प्रकार का अन्याय न हो। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी भर्ती परीक्षाएँ पारदर्शी ढंग से आयोजित की जाएँ तथा परीक्षा प्रणाली को वर्तमान चुनौतियों के अनुरूप और अधिक सुदृढ़ किया जाए। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता स्वीकार्य नहीं होगी और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि परीक्षाओं की शुचिता पर कोई प्रश्नचिह्न न लगे, इसके लिए पारदर्शिता बढ़ाने संबंधी सभी उपायों पर गंभीरतापूर्वक कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में सुधार सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है। इससे राज्य में भर्ती प्रणाली अधिक सरल, न्यायोचित और समयबद्ध बनेगी। बैठक में पुलिस बल सहित विभिन्न विभागों में चल रही भर्ती प्रक्रियाओं की भी समीक्षा की गई और चयन प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए।

बैठक में समान अहर्ता वाले पदों के लिए विभिन्न विभागों द्वारा अलग-अलग परीक्षाएँ आयोजित किए जाने की वर्तमान व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। समान पात्रता वाले पदों के लिए संयुक्त भर्ती परीक्षा आयोजित करने के प्रस्ताव पर विचार किया गया। इससे न केवल समय और संसाधनों की बचत होगी, बल्कि विभागों को समय पर मानव संसाधन उपलब्ध कराया जा सकेगा।

पीएससी की परीक्षा प्रणाली को और अधिक समकालीन, पारदर्शी तथा अभ्यर्थी हितैषी बनाने के संबंध में भी विस्तृत चर्चा की गई। यह भी विचार किया गया कि प्रतियोगी परीक्षाओं के पाठ्यक्रम को वर्तमान आवश्यकताओं एवं समसामयिक विषयों के अनुरूप और अधिक प्रासंगिक बनाया जाए।

बैठक में मुख्य सचिव विकास शील, अपर मुख्य सचिव मती रेणु जी. पिल्लै, अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विवेकानंद सिन्हा, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव अविनाश चंपावत, मुख्यमंत्री के सचिव मुकेश बंसल, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, सचिव हिमशिखर गुप्ता, उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एस.आर.पी. कल्लूरी, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अमित कुमार सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

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