मुख्यमंत्री ने किया 31वें आईईएस- डिजिआना इंटरप्रेस क्रिकेट टूर्नामेंट का शुभारंभ

मुख्यमंत्री ने किया 31वें आईईएस- डिजिआना इंटरप्रेस क्रिकेट टूर्नामेंट का शुभारंभ
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि पत्रकार साथियों की कलम की बाउंसर, शब्दों की गुगली और रिपोर्टर्स का रन रेट लोकतंत्र में चार चांद लगाता है। हमारा मध्यप्रदेश हमेशा से दमदार खिलाड़ियों और मजबूत पत्रकारों की धरती रहा है। देश हित में पत्रकारिता को दिशा देने वाले प्रदेश के पत्रकारों ने दिल्ली तक को गौरवान्वित किया है। पंडित माखनलाल चतुर्वेदी और भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेई जैसे कई पत्रकारों का साहित्य और पत्रकारिता में योगदान अनुकरणीय और वंदनीय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को भोपाल खेल पत्रकार संघ द्वारा ओल्ड कैंपियन ग्राउंड पर आयोजित 31वें आईईएस- डिजिआना इंटरप्रेस क्रिकेट टूर्नामेंट का शुभारंभ कर संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल खेल पत्रकार संघ लगातार तीन दशक से इंटर प्रेस क्रिकेट टूर्नामेंट का निरंतर आयोजन कर रहा है। इस आयोजन में क्रिकेट मैच के साथ- साथ आत्मीयता की भी वर्षा होती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वे स्वयं भी इस क्रिकेट टूर्नामेंट में आने की हैट्रिक लगा रहे हैं। क्रिकेट टूर्नामेंट को निरंतरता देने संस्था का प्रयास सराहनीय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टूर्नामेंट के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग, पूर्व विधायक ध्रुव नारायण सिंह, वरिष्ठ पत्रकार मृगेंद्र सिंह, विजय दास, तेजेंद्र सिंह, जिला अध्यक्ष रवीन्द्र यति, समाजिक कार्यकर्ता राहुल कोठारी सहित बड़ी संख्या में प्रतिभागी, अधिकारी, पत्रकार और खेल प्रेमी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री रवीन्द्र भवन में आयोजित मीना समाज के सम्मेलन में हुए शामिल

मुख्यमंत्री रवीन्द्र भवन में आयोजित मीना समाज के सम्मेलन में हुए शामिल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मीना समाज ने अपनी मेहनत और ईमानदारी से प्रदेश और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। समाज बंधु अपने सामाजिक दायित्वों का भी बख़ूबी निर्वहन कर रहे हैं। शिक्षा, सामाजिक उन्नति का सबसे मजबूत आधार है। पिछले वर्षों में लगभग 550 प्रतिभाओं का सम्मान इस बात का प्रमाण है कि मीना समाज, शिक्षा और उत्कृष्टता को अपना पथ-प्रदर्शक मानता है। मृत्यु भोज जैसी कुप्रथाओं का विरोध, दहेज मुक्त और सादे विवाहों का समर्थन एवं सामूहिक विवाह सम्मेलनों को प्रोत्साहन देकर समाज ने सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध मजबूत संदेश दिया है। ऐसे प्रयास समाज को शिक्षित और कुरीतियों से मुक्त करते हुए समाज बंधुओं को प्रगति की राह पर अग्रसर करते हैं। यह प्रयास प्रदेश और राष्ट्र के सर्वांगीण विकास को भी नई दिशा देते हैं। राज्य सरकार मीना समाज के इन प्रयासों में पूरी तरह साथ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को रवीन्द्र भवन के हंसध्वनि सभागार में आयोजित मीना समाज सम्मेलन और मेधावी विद्यार्थियों के सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समारोह का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मध्यप्रदेश मीना समाज सेवा संगठन की ओर से तीन बड़ी मालाऐं पहनाकर स्वागत अभिनंदन और साफा बांधकर अंग वस्त्रम भेंट कर सम्मान किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के लिए पूर्व मंत्री राम निवास रावत ने अभिनंदन पत्र का वाचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में चयनित, खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने और पदक विजेयता एवं अन्य विधाओं में उपलब्धियां अर्जित करने वाले मीना समाज के 16 विद्यार्थियों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सामाजिक गतिविधियों के लिए दान देने तथा अन्य पहल करने वाले मीना समाज के वरिष्ठजन को भी सम्मानित किया। कार्यक्रम में खेल एवं युवा कल्याण, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग तथा पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मती कृष्णा गौर विशेष रूप से उपस्थित थीं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मीना समाज पर हरि की अत्यंत कृपा रही है, भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार से जुड़ी मीना समाज की उत्पत्ति जन सामान्य को जल और जीवन का महत्व बताती है।मीना समाज में बहुत प्रतिभाएं हैं, समाज नवरत्नों से परिपूर्ण है और युवा पीढ़ी तो पढ़ाई तथा खेल में अपना लोहा मनवा रही है। समाज के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में पदक जीतें, यही कामना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि समाज ने हर परिस्थिति में संघर्ष किया और परिवारों के लिए प्रगति की राह प्रशस्त की। मीना समाज के सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक उत्थान के उद्देश्य से वर्ष 1980 में मीना समाज सेवा संगठन स्थापित किया गया था। संगठन के कार्यों के सकारात्मक परिणाम वर्तमान में दिखाई दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों के जीवन को सरल बनाने के लिए व्यवस्थाओं में कई नवाचार किए हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ही प्रदेश में देश की पहली तीन नदी जोड़ो परियोजनाओं का कार्य आरंभ हुआ है। इन परियोजनाओं से श्योपुर, गुना सहित चंबल और मालवा का क्षेत्र सिंचित होगा, जिसका मीना समाज को विशेष रूप से लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर जातिगत जनगणना का बड़ा निर्णय लिया गया है। इसके अंतर्गत इस वर्ष मकानों की गिनती होगी और आगामी कार्यवाही वर्ष 2027 में की जाएगी। जातिगत जनगणना से अतीत के कई उल्झे प्रश्नों का समाधान निकलेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित कर रही है। समाज बंधु उद्योग धंधे लगाने और उद्यमिता के क्षेत्र में भी आगे बढ़ें, राज्य सरकार हर कदम पर उनके साथ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से ही भगवान राम अयोध्या में मुस्कुरा रहे हैं। भगवान राम की तरह भगवान कृष्ण भी भगवान विष्णु के अवतार हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार मीनेष बोर्ड के गठन पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि समाज की धर्मशाला के निर्माण में राज्य शासन की ओर से सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आशा व्यक्त की कि मीना समाज शिक्षा, संस्कार और संगठन के बल पर निरंतर आगे बढ़ता रहेगा और प्रदेश एवं देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से की सौजन्य मुलाकात, ‘बस्तर पंडुम 2026’ में किया आमंत्रित

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से की सौजन्य मुलाकात, ‘बस्तर पंडुम 2026’ में किया आमंत्रित
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली में राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु से सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु को छत्तीसगढ़ में आयोजित होने वाले राज्यस्तरीय जनजातीय सांस्कृतिक महोत्सव ‘बस्तर पंडुम 2026’ में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का आमंत्रण दिया।

मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रपति को बस्तर अंचल की समृद्ध जनजातीय कला, संस्कृति, परंपराओं एवं लोक जीवन से अवगत कराते हुए कहा कि बस्तर पंडुम राज्य की जनजातीय विरासत के संरक्षण, संवर्धन और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यह आयोजन तीन चरणों में आयोजित किया जाएगा, जिसका अंतिम चरण फरवरी 2026 में बस्तर में संपन्न होगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रपति को छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, बुनियादी ढांचे के विस्तार एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति से भी अवगत कराया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उनकी सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु ने जनजातीय संस्कृति से जुड़े इस आयोजन की सराहना करते हुए बस्तर पंडुम 2026 के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।

उल्लेखनीय है कि बस्तर पंडुम 2026 के माध्यम से लोकनृत्य, लोकगीत, पारंपरिक वाद्ययंत्र, हस्तशिल्प, जनजातीय व्यंजन, वेशभूषा सहित विभिन्न सांस्कृतिक विधाओं का प्रदर्शन किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि विश्वास, विकास और सुरक्षा ही बस्तर की नई दिशा है, जहाँ अब हिंसा नहीं, शांति ही एकमात्र विकल्प बन चुकी है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर रेंज के बीजापुर और सुकमा जिलों में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए नक्सल विरोधी अभियान में निर्णायक सफलता प्राप्त हुई है, जिसमें 14 माओवादियों को न्यूट्रलाइज़ किया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुरक्षा बलों की सटीक रणनीति, सतत दबाव और मजबूत जमीनी पकड़ के कारण माओवादी नेटवर्क तेजी से कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा कि बस्तर अब विकास, निवेश, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसरों के साथ आगे बढ़ रहा है। यह परिवर्तन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन, केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व, सुरक्षा बलों की अदम्य वीरता एवं प्रतिबद्धता, संवेदनशील पुनर्वास नीति तथा बस्तर की जनता के अटूट विश्वास का परिणाम है।
मुख्यमंत्री ने सुरक्षा बलों के शौर्य को नमन करते हुए अभियान में शामिल सभी जवानों को बधाई दी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जो लोग अब भी हिंसा का रास्ता चुन रहे हैं, वे आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा से जुड़ें, सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाएँ और सम्मानपूर्वक जीवनयापन करें अन्यथा राज्य शासन और सुरक्षा बल कानून एवं संविधान के अनुरूप अपने दायित्वों के निर्वहन के लिए पूरी तरह सक्षम और प्रतिबद्ध हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की अंधेरी रात अब अपने अंतिम चरण में है और बस्तर में शांति, विश्वास और विकास का स्थायी सूर्योदय सुनिश्चित है।

घर में रखी छोटी-छोटी चीज़ें भी हमारे भाग्य को करती प्रभावित

घर में रखी छोटी-छोटी चीज़ें भी हमारे भाग्य को करती प्रभावित
हमारे जीवन और घर का माहौल सिर्फ हमारे कर्मों से नहीं, बल्कि आसपास मौजूद वस्तुओं की ऊर्जा से भी प्रभावित होता है। वास्तु और ज्योतिष के अनुसार हर वस्तु एक खास तरह की ऊर्जा उत्सर्जित करती है। यदि वस्तु सही स्थिति में है तो शुभ ऊर्जा देती है, लेकिन अगर वही वस्तु खराब, टूटी या अनुपयोगी हो जाए तो नकारात्मक ऊर्जा पैदा कर सकती है। यही नकारात्मकता धीरे-धीरे जीवन में दुर्भाग्य और रुकावटों का कारण बनती है।

बंद घड़ियां: रुका हुआ समय, रुकी हुई किस्मत
घर में बंद पड़ी घड़ियां इस बात का संकेत मानी जाती हैं कि जीवन की गति थम गई है। घड़ी समय के प्रवाह का प्रतीक है। यदि घड़ी बंद है तो माना जाता है कि बुरा समय भी लंबा खिंच जाता है।
उपाय: सभी घड़ियों को चालू रखें। जो घड़ियां इस्तेमाल में नहीं हैं, उन्हें घर से हटा दें।

बंद ताले: करियर और विवाह में रुकावट
ऐसे ताले जिनकी चाबी खो चुकी हो और जो सालों से बंद पड़े हों, जीवन में अवसरों को रोकते हैं।
उपाय: या तो ताले खुलवाएं या उन्हें कबाड़ में बेच दें। घर में बंद ताले न रखें।

फटे जूते-चप्पल: बढ़ता संघर्ष
जूते-चप्पल संघर्ष और मेहनत के प्रतीक हैं। फटे या खराब जूते जीवन में अनावश्यक मेहनत और परेशानियां बढ़ाते हैं।
उपाय: जूते ठीक कराकर इस्तेमाल करें या शनिवार के दिन जरूरतमंद को दान कर दें।

पुराने और फटे कपड़े: भाग्य पर असर
कपड़ों का सीधा संबंध भाग्य से माना जाता है। अलमारी में भरे अनुपयोगी कपड़े नकारात्मकता बढ़ाते हैं।
उपाय: जो कपड़े नहीं पहनते, उन्हें धोकर, साफ कर दान कर दें।

फेड हो चुकी मूर्तियां और चित्र
घर में रखी देवी-देवताओं की खंडित या रंग उड़े हुए चित्र-मूर्तियां मानसिक और आध्यात्मिक असंतुलन पैदा करती हैं।
उपाय: ऐसी मूर्तियों को सम्मानपूर्वक जल में प्रवाहित करें या जमीन में दबाएं, और नई मूर्तियां स्थापित करें।

DGCA ने जारी की गाइडलाइंस

DGCA ने जारी की गाइडलाइंस
फ्लाइट में उड़ान के दौरान अब आप फोन या दूसरे गैजेट्स चार्ज करने के लिए पावर बैंक का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने उड़ान के दौरान पावर बैंक का इस्तेमाल प्रतिबंधित कर दिया है।

DGCA ने जारी की एडवायजरी
DGCA की ओर से रविवार को जारी एक एडवायजरी में कहा गया है कि उड़ान में पावर बैंक से मोबाइल, लैपटॉप या कोई भी गैजेट चार्ज नहीं कर सकते। यहां तक कि प्लेन की सीट में लगे पावर सॉकेट से भी पावर बैंक को चार्ज नहीं कर सकते। यह एडवायजरी दुनिया भर में लिथियम बैटरी के ओवरहीटिंग या आग पकड़ने की कई घटनाओं के बाद आई है। पावर बैंक और स्पेयर लीथियम बैटरी सिर्फ हैंड बैगेज या कैबिन बैग में ही ले जा सकते हैं। इन्हें ओवरहेड बिन यानी सिर के ऊपर जो शेल्फ बनी होती हैं, जहां यात्री अपना सामान रखते हैं, उसमें भी नहीं रख सकते हैं। चेक-इन बैगेज में तो पहले से ही बैन है।

नवंबर में जारी हुआ था सर्कुलर
दरअसल, DGCA ने नवंबर में एक ‘Dangerous Goods Advisory Circular’ जारी किया था। जिसमें कहा गया था कि पावर बैंक और स्पेयर बैटरी केवल हैंड बैगेज में ही ले जाने की इजाजत होगी। उन्हें ओवरहेड कम्पार्टमेंट में लेकर नहीं जा सकते। यह नियम इसलिए बनाया गया क्योंकि ओवरहेड केबिन में होने वाली किसी भी आग का आसानी से पता नहीं चल पाता।

सर्कुलर में कहा गया “आजकल ज्यादातर रिचार्ज होने वाले उपकरणों जैसे मोबाइल, लैपटॉप में लीथियम बैटरी का इस्तेमाल होता है। इसलिए हवाई जहाज़ में लोग ज्यादा लीथियम बैटरी ले जाने लगे हैं। पावर बैंक, पोर्टेबल चार्जर और ऐसे ही बाकी उपकरणों में मौजूद लीथियम बैटरी आग लगने का कारण बन सकती हैं और प्लेन के अंदर आग लग सकती है।

PM मोदी की पहल ‘परीक्षा पे चर्चा 2026’ में छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक उपलब्धि

PM मोदी की पहल ‘परीक्षा पे चर्चा 2026’ में छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक उपलब्धि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परीक्षा को तनावमुक्त उत्सव के रूप में मनाने की पहल “परीक्षा पे चर्चा 2026” में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। छत्तीसगढ़ ने पालकों की भागीदारी में प्रथम स्थान हासिल कर पूरे देश में उदाहरण प्रस्तुत किया है।

अब तक छत्तीसगढ़ से 25.16 लाख प्रतिभागियों ने पंजीयन किया है, जिनमें 22.75 लाख विद्यार्थी, 1.55 लाख शिक्षक और 81,533 पालक शामिल हैं। यह उपलब्धि राज्य में परीक्षा प्रबंधन, समय प्रबंधन, पालकों को अपने बच्चों को परीक्षा में अधिक अंक लाने हेतु अनावश्यक दबाव देने से बचने तथा उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए किए जा रहे सुनियोजित प्रयासों को दर्शाती है।

छत्तीसगढ़ पूरे देश में प्रथम स्थान पर
‘परीक्षा पे चर्चा’ में पालकों की भागीदारी के मामले में छत्तीसगढ़ पूरे देश में प्रथम स्थान पर है। कुल पंजीयन के मामले में छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर चौथे स्थान पर है। बलौदाबाजार जिले में 14,658 तथा सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में 9,952 पालकों द्वारा पंजीयन किया गया है, जो इस अभियान के प्रति अभिभावकों की बढ़ती जागरूकता, सहभागिता और विश्वास का स्पष्ट प्रमाण है। यह उपलब्धि केवल संख्यात्मक सफलता नहीं है, बल्कि यह परीक्षा के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव का भी संकेत देती है।

इस उल्लेखनीय सफलता के पीछे राज्य में अपनाई गई नवाचारपूर्ण रणनीतियाँ महत्वपूर्ण रही हैं। जिला स्तरीय समीक्षा बैठकों के माध्यम से अधिकतम सहभागिता सुनिश्चित की गई, शिक्षक प्रशिक्षण केंद्रों पर ऑन-साइट पंजीयन की व्यवस्था की गई तथा युवा क्लब और “अंगना म शिक्षा कार्यक्रम” के माध्यम से समुदाय को बड़े पैमाने पर जोड़ा गया।

सारंगढ़-बिलाईगढ़ में आयोजित “परीक्षा पे चर्चा मेला” से एक ही दिन में 10,000 से अधिक पंजीयन दर्ज हुए, जबकि इससे पहले प्रतिदिन औसत पंजीयन लगभग 1500 के आसपास था। पिछले प्रयासों के रूप में आयोजित शिक्षक-पालक सम्मेलन और मेगा पीटीएम ने भी अभिभावकों की सजगता और सहभागिता को नई दिशा दी है।

मंत्री विजयवर्गीय ने सभी विधायकों व अधिकारियों से की चर्चा

मंत्री विजयवर्गीय ने सभी विधायकों व अधिकारियों से की चर्चा
इंदौर में दूषित पानी की वजह से 15 लोगों की मौत हो गई। 200 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती हैं। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस मध्य प्रदेश सरकार पर लगातार हमलावर है। इस बीच इंदौर में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बड़ी बैठक बुलाई है। इसमें जिले के सभी विधायकों को बुलाया गया है। कलेक्टर शिवम् वर्मा, निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल और महापौर पुष्यमित्र भार्गव भी शामिल हैं।

प्रदेशभर में कांग्रेस के आंदोलन के बाद बढ़ा तनाव
बताया जा रहा है कि कांग्रेस पूरे प्रदेश में इस घटना के विरोध में आंदोलन कर रही है। इसी के चलते अचानक यह बैठक आयोजित की गई है।

कांग्रेसी नेताओं को भाजपाइयों ने चाय नाश्ते पर बैठा लिया
इंदौर में कुछ कांग्रेस नेता दो नंबर क्षेत्र के विधायक रमेश मेंदोला के घर विरोध प्रदर्शन करने गए थे, लेकिन वे नाश्ता-पानी कर लौट गए। कांग्रेस नेता मनोहर रघुवंशी ने बताया कि रविवार सुबह कांग्रेस कार्यकर्ता क्षेत्रीय विधायकों के आवासों का घेराव करने वाले थे। इसी क्रम में वे स्वयं क्षेत्रीय विधायक रमेश मेंदोला के घर पहुंचे थे।

टी20 विश्व कप के लिए भारत नहीं आएगी बांग्लादेश की टीम

टी20 विश्व कप के लिए भारत नहीं आएगी बांग्लादेश की टीम
बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) ने फैसला किया है कि वह टी20 विश्व कप के लिए अपनी टीम भारत नहीं भेजेगा। भारत और बांग्लादेश के बीच विवाद उस वक्त से गरमा गया है जब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने आईपीएल फ्रेंचाइजी कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) से बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को टीम से बाहर करने कहा था। अब बीसीबी की तरफ से इस पूरे मुद्दे को लेकर बयान जारी किया गया है। उन्होंने आईसीसी से श्रीलंका में विश्व कप के मैच कराने की मांग की है।

बीसीबी ने आईसीसी से की श्रीलंका में मैच कराने की मांग
बीसीबी ने कहा, ‘बोर्ड ने पिछले 24 घंटों के घटनाक्रम को ध्यान में रखते हुए स्थिति की विस्तार से समीक्षा की और भारत में होने वाले मैचों में बांग्लादेश नेशनल टीम की भागीदारी से जुड़ी कुल परिस्थितियों पर गहरी चिंता व्यक्त की।

मौजूदा स्थिति का पूरी तरह से आकलन करने और भारत में बांग्लादेश दल की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं और बांग्लादेश सरकार की सलाह पर विचार करने के बाद, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने फैसला किया है कि मौजूदा हालात में बांग्लादेश नेशनल टीम टूर्नामेंट के लिए भारत नहीं जाएगी।’

बयान में आगे कहा गया, ‘इस फैसले को देखते हुए, बीसीबी ने इवेंट अथॉरिटी के तौर पर इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) से औपचारिक रूप से रिक्वेस्ट की है कि बांग्लादेश के सभी मैचों को भारत के बाहर किसी दूसरी जगह (सह-मेजबान श्रीलंका) पर शिफ्ट करने पर विचार किया जाए।’

खेल मंत्रालय ने बीसीबी को दिए थे निर्देश
इससे पहले, बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के खेल मंत्री ने बीसीबी को निर्देश दिया था कि वह आईसीसी से बांग्लादेश के मुकाबले श्रीलंका में आयोजित करने की मांग उठाने कहा था। बांग्लादेश के खेल मंत्रालय का मानना है कि मुस्तफिजुर को बाहर करने के बाद खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। बीसीबी के अध्यक्ष और बांग्लादेश के पूर्व कप्तान अमीनुल इस्लाम बुलबुल ने मुस्तफिजुर को आईपीएल से बाहर करने के बाद बोर्ड की आपातकालीन बैठक बुलाई थी।

चार लीग मैच बांग्लादेश को भारत में खेलने हैं
बांग्लादेश को अपने चार लीग मैच में से तीन कोलकाता और एक मुंबई में खेलना है। बांग्लादेश के लीग मैच वेस्टइंडीज (सात फरवरी), इटली (नौ फरवरी) और इंग्लैंड (14 फरवरी) के खिलाफ कोलकाता में और नेपाल (17 फरवरी) के खिलाफ मुंबई में है। बांग्लादेश को ग्रुप सी में इटली, नेपाल, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के साथ रखा गया है।

आईपीएल का विवाद आईसीसी तक पहुंचा
दरअसल, पूरे विवाद की शुरुआत मुस्तफिजुर को आईपीएल से बाहर करने से शुरू हुई। केकेआर ने पिछले महीने मिनी नीलामी में मुस्तफिजुर को 9.20 करोड़ रुपये में खरीदा था। लेकिन बीसीसीआई के निर्देश पर केकेआर ने इस बांग्लादेशी गेंदबाज को टीम से बाहर कर दिया। मुस्तफिजुर को लेने पर भारत में विरोध हो रहा था और कई राजनेताओं तथा कथावाचक ने इसे लेकर केकेआर के मालिका शाहरुख खान को घेरा था। मुस्तफिजुर को बाहर करने के बाद बीसीबी बौखला गया है और यही कारण है कि उसने भारत में अपनी टीम भेजने से इनकार कर दिया है। हालांकि, इस पर आखिरी फैसला क्रिकेट की वैश्विक संस्था आईसीसी को लेना है जिसके अध्यक्ष जय शाह हैं।

बीसीसीआई की भी आई थी प्रतिक्रिया
बांग्लादेश के खेल मंत्रालय ने जब बीसीबी को टी20 विश्व कप मैच भारत के बजाए श्रीलंका में कराने की बात कही थी तो इस पर बीसीसीआई की भी प्रतिक्रिया आई थी। बीसीसीआई सूत्र ने कहा था कि सूत्र ने कहा था, आप किसी की मनमर्जी पर खेल का प्रारूप नहीं बदल सकते। यह एक बहुत बड़ी समस्या है। विपक्षी टीमों के बारे में सोचिए। उनके हवाई टिकट, होटल सब बुक होते हैं। साथ ही हर दिन तीन-तीन मैच होने हैं, यानी एक मैच श्रीलंका में होना है। प्रसारण दल भी मौजूद है। इसलिए यह कहना आसान है, करना मुश्किल। कार्यक्रम में अब बदलाव असंभव है क्योंकि टूर्नामेंट शुरू होने में एक महीने का समय बचा है।

अमेरिका कैसा शासन चलाने का कर रहा इशारा

अमेरिका कैसा शासन चलाने का कर रहा इशारा
अमेरिका ने शनिवार (3 जनवरी) को एक गुप्त अभियान में वेनेजुएला के अंदर अपने विशेष बल- डेल्टा फोर्स को भेजकर देश के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को बंधक बना लिया। इस अभियान के दौरान वेनेजुएला में कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले भी किए गए। बाद में मादुरो और उनकी पत्नी को यूएसएस इवो जिमा नाम के एक युद्धक जहाज पर ले जाया गया, जहां से दोनों को न्यूयॉर्क पहुंचाया गया। मादुरो के कई वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल भी हो रही हैं। इनमें से एक में मादुरो कैमरे के सामने हैप्पी न्यू ईयर कहते दिख रहे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर जब अमेरिका इस पूरे अभियान के तहत मादुरो को काराकास से न्यूयॉर्क ला रहा था, तब वेनेजुएला में क्या चल रहा था? मादुरो के हटने के बाद वहां क्या हालात पनपे हैं? डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के शासन और उसके नियंत्रण को लेकर क्या एलान किया है? अमेरिका आगे किसे वेनेजुएला के सत्ता की चाभी सौंप सकता है? इसके अलावा इस देश में आगे क्या हालात होने वाले हैं?

वेनेजुएला के शासन को लेकर अमेरिका का क्या रुख?
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो रोड्रिगेज से बात कर रहे थे। ट्रंप ने इशारा किया कि रोड्रिगेज अमेरिकी हितों के हिसाब से शासन करेंगी।
उन्होंने रोड्रिगेज को समर्थन देते हुए कहा, “वे वेनेजुएला को फिर से महान बनाने के लिए वह सब करने के लिए तैयार हैं, जो उन्हें जरूरी लगता है।”
ट्रंप ने विपक्षी नेता मारिया कोरिन माचाडो को देश का नेतृत्व करने के लिए पर्याप्त समर्थन-सम्मान न होने के कारण उन्हें सत्ता में स्थापित करने से इनकार कर दिया।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने घोषणा की अमेरिका देश को तब तक चलाएगा जब तक कि एक सुरक्षित, उचित और न्यायसंगत परिवर्तन नहीं हो जाता।

विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप ने वेनेजुएला का नियंत्रण लेने के साथ वहां के तेल इन्फ्रास्ट्रक्चर और अन्य संसाधनों को नियंत्रित करने की घोषणा की है। हालांकि, अमेरिका के पास अलग-अलग संघर्षों में उलझने का अनुभव है और इन संघर्षों की सीख भी है। इसलिए खुद ट्रंप, वहां की संसद (कांग्रेस) और आम लोग भी वेनेजुएला पर लंबी अवधि के कब्जे के समर्थन में बिल्कुल नहीं होंगे।

वेनेजुएला में विपक्ष क्या कर रहा?
वेनेजुएला के पूर्व नेता निकोलस मादुरो को पकड़े जाने के बाद, देश में विपक्ष ने अमेरिकी कार्रवाई का जश्न मनाया। पश्चिमी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वेनेजुएला में विपक्ष के पास देश में मजबूत समर्थन है, और सर्वेक्षणों से पता चलता है कि करीब 80 प्रतिशत लोग उसका समर्थन करते हैं।
मौजूदा समय में विपक्ष का नेतृत्व एडमंडो गोंजालेज कर रहे हैं, जो 2024 के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार थे। तब कई पर्यवेक्षकों का मानना था कि उन्होंने निकोलस मादुरो को हराकर चुनाव जीता था। उनकी संरक्षक और 2025 में नोबेल जीतने वाली मारिया कोरिन माचाडो ने भी तब गोंजालेज से सत्ता संभालने की अपील की थी। हालांकि, बाद में उन्हें वेनेजुएला छोड़ना पड़ा था। यानी मौजूदा समय में गोंजालेज और माचाडो दोनों ही वेनेजुएला से बाहर हैं।

अमेरिकी थिंक टैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशन (सीएफआर) में डायरेक्टर ऑफ स्टडी के वाइस प्रेसिडेंट शैनन के. ओनील के मुताबिक, चूंकि विपक्ष के दोनों बड़े चेहरे गोंजालेज और माचाडो वेनेजुएला से बाहर हैं और मादुरो के करीबी मंत्री और सैन्य अफसर अब भी देश की सत्ता-सेना में अच्छा-खासा प्रभाव रखते हैं, इसलिए गोंजालेज और माचाडो का लौटना बिना अमेरिका के सशस्त्र समर्थन के बड़ा फर्क नहीं पैदा कर पाएगा। दोनों को इस स्थिति में वेनेजुएला की सड़कों से अपने लिए समर्थन जुटाने में खासी मुश्किल आएगी, क्योंकि वेनेजुएला का शासन अब भी मादुरो के खास लोगों के पास ही है।

ट्रंप के दावों के बाद आगे क्या हो सकती है वेनेजुएला की सियासी स्थिति?
सीएफआर में विश्लेषक इलियॉट के मुताबिक, अगर अमेरिका पिछले साल विपक्ष के उम्मीदवार रहे एडमंडो गोंजालेज का समर्थन करता है, तो वह सत्ता लेने और लोकतांत्रिक परिवर्तन का नेतृत्व करने में सक्षम होंगे। हालांकि, यदि ट्रंप वेनेजुएला में मादुरो के समर्थकों से निपटने और उन्हें उखाड़ फेंकने पर ध्यान केंद्रित करते हैं तो वेनेजुएला में अस्थिरता पैदा हो सकती है। वहां से नशीले पदार्थों की तस्करी और शरणार्थियों का संकट भी बढ़ सकता है।”

अटलांटिक काउंसिल में एड्रियन अर्श्ट लैटिन अमेरिकी सेंटर के वाइस प्रेसिडेंट और वरिष्ठ निदेशक जेसन मार्कजैक के मुताबिक, ट्रंप ने वेनेजुएला में न्यायसंगत सत्ता परिवर्तन का वादा किया है। चूंकि देश में एक मौजूदा राष्ट्रपति अब सत्ता में नहीं है और उनकी उपराष्ट्रपति अब अंतरिम राष्ट्रपति बनी हैं, ऐसे में उनकी जिम्मेदारी होगी कि चुनाव को जल्द से जल्द कराया जाए। आम स्थिति में यह समयसीमा 30 दिन की होती है, लेकिन मादुरो को अमेरिकी सेना द्वारा बंधक बनाए जाने के बाद वहां आपातकाल लगा है। ऐसे में वेनेजुएला की स्थिति पर नजर बनी रहेगी।

अमेरिका के अभियान के बाद जमीन पर कितने बदलने वाले हैं वेनेजुएला के हालात?
वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद, विशेषज्ञ देश के भविष्य को लेकर काफी अनिश्चितता और जटिल चुनौतियों की चेतावनी दे रहे हैं। उनका मानना है कि सामरिक सफलता (मादुरो को पकड़ना) जरूरी नहीं कि रणनीतिक लाभ यानी लोकतंत्र की दोबारा स्थापना और स्थिरता में बदल जाए।

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