बुरी तरह नाकाम हुआ पाकिस्तानी सेना का शाहीन-3 मिसाइल परीक्षण – बलूच नेता

बुरी तरह नाकाम हुआ पाकिस्तानी सेना का शाहीन-3 मिसाइल परीक्षण – बलूच नेता
पाकिस्तानी सेना ने हाल ही में अपनी शाहीन-3 मिसाइल का परीक्षण किया। लेकिन यह परीक्षण में बुरी तरह नाकाम रहा। यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है। मिसाइल बलोचिस्तान के डेरा गाजी खान इलाके से छोड़ी गई थी, जो नागरिक इलाकों के पास जाकर गिरी। बलूच नेता मीर यार बलोच ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी।

बलूच विद्रोही बलूचिस्तान को पाकिस्तान का हिस्सा नहीं मानते हैं और इस पर पाकिस्तान के कब्जे का विरोध करते हैं। बलूच नेता मीर यार बलोच ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, बलूच गणराज्य पाकिस्तान के बार-बार नाकाम मिसाइल परीक्षणों की कड़ी निंदा करता है। पाकिस्तान लगातार बलूचिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन कर रहा है और आम नागरिकों की जान खतरे में डाल रहा है। उन्होंने कहा, पाकिस्तान की कब्जा करने वाली सेना ने 22 जुलाई को बलूचिस्तान गणराज्य में एक नाकाम मिसाइल परीक्षण किया। स्थानीय लोगों ने बताया कि यह मिसाइल बलूचिस्तान के डेरा गाजी खान इलाके से छोड़ी गई, जो नागरिक इलाकों के पास लूप सहरानी लेवी स्टेशन से केवल 500 मीटर उत्तर की ओर गिरी। अगर यह मिसाइल थोड़ी भी दिशा से भटक जाती, तो भारी जनहानि और संपत्ति को बड़ा नुकसान हो सकता था।

उन्होंने कहा, यह कोई एकमात्र मामला नहीं है। पाकिस्तानी सेना लंबे समय से मिसाइल परीक्षण को एक बहाना बनाकर रणनीतिक क्षेत्रों से बलूच लोगों को जबरन हटाने का काम कर रही है, जिसमें डेरा बुगती, कहान और आसपास के इलाके शामिल हैं। स्थानीय लोगों ने धमकियों और डराने-धमकाने की घटनाओं की जानकारी दी है, जो एक बेहद चिंताजनक चलन (पैटर्न) की ओर इशारा करता है। जबरन विस्थापन की नीति सरकारी स्तर पर की जा रही है, ताकि संसाधनों के दोहन के लिए खुला रास्ता मिल सके।

मीर यार बलोच ने कहा, हाल के वर्षों में पाकिस्तान ने बलूचिस्तान का और अधिक सैन्यकरण कर दिया है। विदेशी ताकतों के साथ मिलकर इस क्षेत्र को उसने बैलिस्टिक मिसाइलों और अन्य आधुनिक हथियारों के परीक्षण स्थल में बदल दिया है। यह याद रखना जरूरी है कि यह पहली बार नहीं हुआ है। अक्तूबर 2023 में एक और नाकाम मिसाइल परीक्षण किया गया था, जिसमें पंजाब से छोड़ी गई मिसाइल डेरा बुगती की कृषि भूमि में गिर गई थी, जो आबादी वाले इलाकों के बेहद करीब थी।

उन्होंने बताया, 28 मई 1998 को पाकिस्तान ने कब्जे वाले बलूचिस्तान के चगई जिले में बिना स्थानीय जनता की सहमति के छह परमाणु परीक्षण किए थे। दशकों बाद भी वह इलाका खतरनाक परमाणु विकिरण से प्रभावित है, जिससे कैंसर, पुरानी त्वचा की बीमारियां और दूसरी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं अब भी स्थानीय बलूच लोगों में देखी जा रही हैं। उन्होंने आगे लिखा, हम संयुक्त राष्ट्र, यूएन सुरक्षा परिषद और संबंधित अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से अपील करते हैं कि पाकिस्तान पर हथियारों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया जाए; उसके बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों पर सख्त प्रतिबंध लगाए जाएं; बलूचिस्तान में आम नागरिकों और संप्रभुता पर बार-बार हो रहे हमलों की जांच करवाई जाए; मिसाइल परीक्षणों और वायु सेना की बमबारी के डर से हो रहे बलूच आबादी के जबरन विस्थापन की निगरानी की जाए।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा सिया विवाद,कोठारी,उमा महेश्वरी की एप्को से छुट्टी

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा सिया विवाद,कोठारी,उमा महेश्वरी की एप्को से छुट्टी

भोपाल। राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण यानी सिया में पर्यावरण से जुड़े प्रकरणों में संचालक मंडल का दरकिनार कर दी गई अनुमति का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस पर बुधवार को हुए सुनवाई में कोर्ट ने नाराजगी जताई। इसके बाद देर शाम एप्को आयुक्त,महानिदेशक तथा पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव डॉ.नवनीत मोहन कोठारी व एप्को की कार्यकारी संचालक उमा महेश्वरी को इन पदों से हटा दिया गया है।

आज जारी आदेश के मुताबिक,डॉ.कोठारी की पदस्थापना राजभवन में की गई है। वह राज्यपाल के प्रमुख सचिव होंगे,जबकि राज्यपाल के मौजूदा अपर मुख्य सचिव केसी गुप्ता को समान पद पर कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग में पदस्थ किया गया है। वन विभाग के अपर मुख्य सचिव एवं कृषि आयुक्त अशोक वर्णवाल को एप्को आयुक्त,महानिदेशक व अपर मुख्य सचिव पर्यावरण पद का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

उमा की जगह दीपक आर्य को एप्को का दायित्व

इसी तरह,एमपी आरआरडीए के सीईओ दीपक आर्य को एप्को कार्यपालन संचालक पद का अतिरिक्त दायित्व दिया गया।आर्य के कार्यभार ग्रहण करने पर आयुष आयुक्त एवं एप्को की मौजूदा कार्यपालन संचालक उमा महेश्वरी अतिरिक्त प्रभार के इस पद से मुक्त होंगी। वहीं राजभवन से हटाए गए केसी गुप्ता के कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग में कार्यभार संभालने पर वाणिज्य कर विभाग के प्रमुख सचिव अमित राठौर इस पद के अतिरिक्त दायित्व से मुक्त होंगे।

चंद्रमौली शुक्ला की सीएम सचिवालय में एंट्री
इसी आदेश के तहत एमपी एसआईडीसी के एमडी चंद्रमौली शुक्ला को अपने मौजूदा ​दायित्वों के साथ मुख्यमंत्री के अपर सचिव पद का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। ज्ञात हो कि मंगलवार रात को जारी एक अन्य आदेश के तहत मुख्यमंत्री के सचिव सीबी चक्रवर्ती को सीएम सचिवालय से हटाकर मप्र भवन विकास निगम का प्रबंध संचालक बनाया गया था।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा सिया विवाद
सिया में अध्यक्ष व संचालक मंडल को दरकिनार कर अधिकारिक स्तर पर बड़ी संख्या में पर्यावरणीय अनुमति दिए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। कोर्ट ने इससे जुडी याचिका स्वीकार करने के साथ ही बाला—बाला अनुमति दिए जाने पर नाराजगी जताई। कोर्ट का रुख सामने आते ही राज्य सरकार ने आनन—फानन में कोठारी व उमा महेश्वरी को एप्को से हटाने का निर्णय लिया। बता दें कि सिया के अध्यक्ष एसएनएस चौहान ने अधिकारिकस्तर पर पर्यावरणीय प्रकरणों में अनुमति दिए जाने पर आपत्ति जताई ​है।उन्होंने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव को भी की। शासनस्तर से तत्काल इस पर निर्णय ​नहीं लिए जाने के बाद दोनों पक्षों की ओर से लगातार बयानबाजी सामने आई। इससे यह विवाद और गहराया।

भोपाल। राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण यानी सिया में पर्यावरण से जुड़े प्रकरणों में संचालक मंडल का दरकिनार कर दी गई अनुमति का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस पर बुधवार को हुए सुनवाई में कोर्ट ने नाराजगी जताई। इसके बाद देर शाम एप्को आयुक्त,महानिदेशक तथा पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव डॉ.नवनीत मोहन कोठारी व एप्को की कार्यकारी संचालक उमा महेश्वरी को इन पदों से हटा दिया गया है।

आज जारी आदेश के मुताबिक,डॉ.कोठारी की पदस्थापना राजभवन में की गई है। वह राज्यपाल के प्रमुख सचिव होंगे,जबकि राज्यपाल के मौजूदा अपर मुख्य सचिव केसी गुप्ता को समान पद पर कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग में पदस्थ किया गया है। वन विभाग के अपर मुख्य सचिव एवं कृषि आयुक्त अशोक वर्णवाल को एप्को आयुक्त,महानिदेशक व अपर मुख्य सचिव पर्यावरण पद का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

उमा की जगह दीपक आर्य को एप्को का दायित्व

इसी तरह,एमपी आरआरडीए के सीईओ दीपक आर्य को एप्को कार्यपालन संचालक पद का अतिरिक्त दायित्व दिया गया।आर्य के कार्यभार ग्रहण करने पर आयुष आयुक्त एवं एप्को की मौजूदा कार्यपालन संचालक उमा महेश्वरी अतिरिक्त प्रभार के इस पद से मुक्त होंगी। वहीं राजभवन से हटाए गए केसी गुप्ता के कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग में कार्यभार संभालने पर वाणिज्य कर विभाग के प्रमुख सचिव अमित राठौर इस पद के अतिरिक्त दायित्व से मुक्त होंगे।

चंद्रमौली शुक्ला की सीएम सचिवालय में एंट्री
इसी आदेश के तहत एमपी एसआईडीसी के एमडी चंद्रमौली शुक्ला को अपने मौजूदा ​दायित्वों के साथ मुख्यमंत्री के अपर सचिव पद का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। ज्ञात हो कि मंगलवार रात को जारी एक अन्य आदेश के तहत मुख्यमंत्री के सचिव सीबी चक्रवर्ती को सीएम सचिवालय से हटाकर मप्र भवन विकास निगम का प्रबंध संचालक बनाया गया था।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा सिया विवाद
सिया में अध्यक्ष व संचालक मंडल को दरकिनार कर अधिकारिक स्तर पर बड़ी संख्या में पर्यावरणीय अनुमति दिए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। कोर्ट ने इससे जुडी याचिका स्वीकार करने के साथ ही बाला—बाला अनुमति दिए जाने पर नाराजगी जताई। कोर्ट का रुख सामने आते ही राज्य सरकार ने आनन—फानन में कोठारी व उमा महेश्वरी को एप्को से हटाने का निर्णय लिया। बता दें कि सिया के अध्यक्ष एसएनएस चौहान ने अधिकारिकस्तर पर पर्यावरणीय प्रकरणों में अनुमति दिए जाने पर आपत्ति जताई ​है।उन्होंने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव को भी की। शासनस्तर से तत्काल इस पर निर्णय ​नहीं लिए जाने के बाद दोनों पक्षों की ओर से लगातार बयानबाजी सामने आई। इससे यह विवाद और गहराया।

4लाख करोड़ के कर्जदार मप्र के अफसरों का शाही अंदाज, 1 घंटे के प्रोग्राम पर फूंके 27 लाख रुपए

4लाख करोड़ के कर्जदार मप्र के अफसरों का शाही अंदाज, 1 घंटे के प्रोग्राम पर फूंके 27 लाख रुपए

भोपाल। सरकारी सिस्टम में कामकाज की महिमा ही न्यारी है। सरकार का कोई कार्यक्रम हो या कल्याणकारी योजना। प्रशासनिकअमला इन्हें जमीन पर उतारने से पहले अपने लाभ का गणित जरूर लगाता है। ऐसा ही एक मामला भोपाल वन मंडल में सामने आया। जब एक घंटे के सरकारी कार्यक्रम में आयोजक अफसरों ने 7लाख रुपए सिर्फ पेट्रोल खर्च के नाम पर उड़ा डाले।
मौका ​था बीते दिसंबर में रातापानी टाइगर रिजर्व के लोकार्पण का। इसे जन कल्याण पर्व नाम दिया गया। भोपाल वन मंडल की ओर से इस आयोजन पर करीब 27 लाख रुपए खर्च होना बताया गया। इसका खुलासा आरटीआई में मिली जानकारी के आधार पर वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने किया। दुबे ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को पत्र लिखकर इस शाही खर्च के लिए जिम्मेदार वन अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करने व सक्षम एजेंसी से जांच कराने की मांग भी की।
दुबे ने बताया कि महज एक घंटे के इस कार्यक्रम के लिए भोपाल,रायसेन व सीहोर से 5सौ बाइकर्स की रैली प्लान की गई। इनकी बाइक में 6 हजार 644 लीटर पेट्रोल भरना बताया गया। यानी एक—एक बाइक में 13 लीटर से अधिक पेट्रोल भरा जाना बताया गया। जबकि एक सामान्य बाइक के पेट्रोल टैंक की भंडारण क्षमता ही 5 से 10लीटर होती है। बाइकर्स के पेट्रोल खर्च पर वन अधिकारियों ने सात लाख रुपए खर्च किए।

11.50 लाख का भोजन,ढाई लाख के हेलमेट बांटे

कार्यक्रम में बाइकर्स पांच सौ बुलाए जाने का दावा है,लेकिन भोजन पांच हजार लोगों को कराया गया। इस पर प्रति मेहमान की दर से करीब साढ़े 11 लाख रुपए खर्च हुए। वहीं सवा दो लाख के हेलमेट बाइकर्स को दिए गए तो साढ़े पांच लाख रुपए कार्यक्रम स्थल पर टेंट लगाने में खर्च हो गए। विभागीय भुगतान बिलों में बाइकर्स व भोजन ग्रहण करने वालों की संख्या का गणित एकदम पुख्ता है,जबकि सूत्रों का दावा है कि कार्यक्रम में न तो 5सौ बाइकर्स जुटे,ना ही 5हजार की भीड़। राह चलते तमाशबीनों को मेहमान बताकर यह आंकड़ा तैयार किया गया।
4लाख करोड़ के कर्जदार मप्र के अफसरों का शाही अंदाज
दुबे कहते हैं,मध्य प्रदेश चार लाख करोड़ के कर्ज में डूबा है। प्रदेश को इससे उबारने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव रात दिन कड़ी मेहनत कर रहे हैं। दूसरी ओर अफसरशाही का यह शाही अंदाज हैरत पैदा करता है। इसके चलते उन्होंने पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ शुभ रंजन सेन और भोपाल डीएफओ लोकप्रिय भारती को तत्काल हटाकर लोकायुक्त से समूचे मामले की जांच कराने की मांग की है।

भोज मुक्त विवि में लगी आग एक बड़ी साजिश का हिस्सा,फॉरेंसिक जांच में मिले आग लगाने के सबूत सिद्धहस्त नहीं निकला साजिश को अंजाम देने वाला

भोज मुक्त विवि में लगी आग एक बड़ी साजिश का हिस्सा,फॉरेंसिक जांच में मिले आग लगाने के सबूत
सिद्धहस्त नहीं निकला साजिश को अंजाम देने वाला

भोपाल। मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में चार दिन पहले हुई आगजनी एक सोची समझी साजिश का हिस्सा है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में इससे जुड़े तथ्यों का खुलासा हुआ है।

प्रारंभिक जांच में यह तथ्य साफ होने के बाद चूना भट्टी पुलिस ने मंगलवार को विवि रजिस्ट्रार को नोटिस थमाकर जवाब तलब किया है।

सूत्रों के मुताबिक,प्रारंभिक जांच में पुलिस को घटनास्थल से माचिस की जली हुई तीलियां,आग लगाने के लिए इस्तेमाल किए गए मुड़े हुए अधजले कागज एवं कुछ इस तरह के अन्य साक्ष्य मिले हैं,जो बताते हैं कि पुस्तकालय में आग एक सोची समझी साजिश के तहत लगाई गई। बताया जाता है,कि वारदात को अंजाम देने से पहले ​सेल्फ में रखी पुस्तकों का पहले नीचे ढेर लगाया गया। पुस्तकालय में लगे पर्दे निकालकर पुस्तकों के ढेर पर डाले गए,लेकिन संयोग यह रहा कि पर्दों व पुस्तकों ने आग नहीं पकड़ी और वारदात में चंद पुस्तकों को ही नुकसान पहुंचा। वहीं पर्दे भी अधजले रह गए। फॉरेसिंक जांच व घटना स्थल पर मिले साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने मंगलवार को विवि रजिस्ट्रार सुशील मंडेरिया को नोटिस थमाकर जवाब तलब किया है।

दस लाख की किताबों की हेराफेरी
सूत्रों के मुताबिक,पु​स्तकालय में आगजनी की इस वारदाता के पीछे दस लाख रुपए कीमत की किताबों की हेराफेरी भी एक बड़ी वजह बताई जाती है। इसकी विभागीय जांच भी जारी है। कांग्रेस विधायक योगेंद्र सिंह बाबा ने यह मामला राज्य विधानसभा में भी बीते साल उठाया था,लेकिन विवि प्रशासन की ओर से सदन को गलत जानकारी भेजे जाने पर कांग्रेस सदस्य ने विधानसभा प्रमुख सचिव को पत्र सौंपकर इस मामले की जांच सदन की प्रश्न एवं संदर्भ समिति से कराए जाने की मांग की थी। बताया जाता है कि ​विधायक की मांग पर सदन की संबंधित समिति भी प्रकरण की जांच कर रही है।

अवैध नियुक्तियों को लेकर भी है विवाद
विश्वविद्यालय 72 अधिकारी,कर्मचारियों की ​बैकडोर पदस्थापना को लेकर भी विवादों में रहा है। यहां तक कि पूर्व में हुई जांच में आरोप सही पाए जाने पर राज्य शासन ने इन नियुक्तियों को निरस्त कर दिया था,लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने हठधर्मिता ​दिखाते हुए
संबंधित अधिकारी,कर्मचारियों की सेवा को निरंतर रखा। इसे लेकर विधानसभा के पिछले ही सत्र में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने जांच कराने का आश्वासन सदन को दिया था। इसी माह शुरू हो रहे विधानसभा के पावस सत्र में एक बार फिर यह मामला गर्माने के आसार हैं। विश्वविद्यालय के पुस्तकालय प्रभारी एलएन झारिया ने कहा कि पुलिस जांच में साजिशकर्ता का जल्द ही पर्दाफाश होगा।

अतिवर्षा और बाढ़ की स्थिति में पुख्ता सूचना-तंत्र की व्यवस्था हो सुनिश्चित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

अतिवर्षा और बाढ़ की स्थिति में पुख्ता सूचना-तंत्र की व्यवस्था हो सुनिश्चित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि अतिवर्षा और बाढ़ की स्थिति में जान-माल की हानि न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए समय रहते सूचना-तंत्र की पुख्ता व्यवस्था की जाए। राज्य शासन जनसामान्य की सुरक्षा के प्रति संवेदनशील है। बाढ़ उन्मुख नदियों के लेवल पर लगातार निगरानी रखी जाए, बाढ़ संवेदनशील क्षेत्रों का पूर्व आंकलन कर राहत कैम्प की तैयारी रखें। आवश्यकता होने पर राहत शिविर लगाकर आवास और भोजन उपलब्ध कराया जाए। इन कार्यों में आवश्यकता होने पर सामाजिक, धार्मिक संस्थाओं का भी सहयोग लिया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश में अतिवृष्टि एवं बाढ़ के दृष्टिगत आवश्यक तैयारियों की मंत्रालय में समीक्षा कर रहे थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्षाकाल में आने वाले त्यौहारों में उचित व्यवस्था और आवश्यक सावधानियां बरतना जरूरी हैं। आपदाओं से बचाव के संबंध में सामान्य जानकारियों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए और जनसामान्य को मॉकड्रिल व आपदा प्रबंधन संबंधी प्रशिक्षण में भी शामिल किया जाए। बैठक में राजस्व मंत्री श्री करण सिंह वर्मा, किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाना और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में अब तक 61 प्रतिशत से अधिक वर्षा हुई है। सर्वाधिक वर्षा टीकमगढ़, मंडला, छतरपुर, निवाड़ी और सीधी में दर्ज की गई। आगामी माहों में वर्षा के अनुमान को देखते हुए प्रदेश में बाढ़ और अतिवृष्टि से बचाव के लिए एनडीआरएफ की 2 टीमों को भोपाल में, एक-एक टीम जबलपुर, ग्वालियर और धार में तैनात की गई हैं। एसडीईआरएफ की टीमें भी तैनात हैं। आपदा की स्थिति में सेना से सहायता प्राप्त करने के लिए सेना के जिलेवार नोडल अधिकारियों की सूची जिलों को प्रदान की गई है। जिलों को मोटर बोट, लाइफ जैकेट, फ्लड लाइट, प्राथमिक उपचार किट और अन्य आपदा उपकरण उपलब्ध करा दिए गए हैं। बैठक में प्रदेश के बांधों में जलभराव की स्थिति की जानकारी भी प्रस्तुत की।

वरिष्ठ IAS भास्कर लाक्षाकार के कविता संग्रह ‘रामदास का मरना तय था’ का लोकार्पण

वरिष्ठ IAS भास्कर लाक्षाकार के कविता संग्रह ‘रामदास का मरना तय था’ का लोकार्पण
भोपाल: वरिष्ठ IAS अधिकारी भास्कर लाक्षाकार के कविता संग्रह ‘रामदास का मरना तय था’ का लोकार्पण आज दुष्यन्त कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय में हुआ। समारोह की अध्यक्षता पूर्व आईएएस अधिकारी, राज्य निर्वाचन आयुक्त और वरिष्ठ साहित्यकार मनोज श्रीवास्तव ने की। देश के सुप्रसिद्ध कवि राजेश जोशी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे।

इस आयोजन के मुख्य अतिथि राजेश जोशी ने कहा कि भास्कर लाक्षाकार प्रशासनिक पाले से कविता के पाले में आ गये है, पर यह जरूरी है क्योंकि व्यक्ति अपने व्यक्तिगत जीवन में संवेदनशील होता है और वह घटनाओं को अपनी दृष्टि से देखता है। उन्होंने कहा कि वैसे ब्यूरोक्रेसी का अपना संसार है और उसे समझना कठिन है पर भास्कर जैसे लोगों के माध्यम से ही ये बातें सामने आ पाती है। कविता संग्रह के शीर्षक से आम आदमी की पीड़ा व्यक्त होती है।

इस अवसर पर अपने अध्यक्षीय उद्वोधन में मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि हमारे पूर्वज कवि ग़ालिब नहीं है क्योंकि ग़ालिब तो अपनी पेंशन बढ़ाने के लिए तीन हजार
किलोमीटर की यात्रा कर दिल्ली से कोलकाता गए थे, पर हमारे पूर्वज कवि रघुवीर सहाय है। रघुवीर सहाय ने अपने दौर में जो कविताएं आम आदमी की तकलीफों को लेकर थी वहीं आस्वाद भास्कर की कविताओं में है।उन्होंने कहा कि मानस में तुलसी ने सभी विगत और आगत कवियों के प्रति आभार व्यक्त किया है और उनका यह आभार बताता है कि उन्हें विश्वास था कि अगर विगत में सामाजिक विसंगतियों और अंधकार से लड़ने की रचना हुई है तो भविष्य में भी इस तरह के रचनाएं होती रहेगी।उन्होंने कहा कि संग्रह में 31 कविताएं अपने समय की वास्तविकता को बताती हैं। उन्होंने कहा कि भास्कर की कविताओं में ईश्वर के साथ जटिल रिश्तेदारी है और इस जटिल रिश्तेदारी से ऐसा लगता है कि ईश्वर भी मूर्खों की जमात से मुक्ति पाना चाहता है।

IAS सिबि चक्रवर्ती को सीएम सचिवालय से हटाया

IAS सिबि चक्रवर्ती को सीएम सचिवालय से हटाया
भोपाल। स्पेन और दुबई के दौरे से डॉ. मोहन यादव की वापसी के बाद मंगलवार रात को सीएम सचिवालय से मुख्यमंत्री के सचिव सिबी चक्रवर्ती एम. को हटा दिया गया। सिबी चक्रवर्ती एम. को भरत यादव की जगह सीएम सचिवालय में सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

राज्य शासन ने आज मुख्यमंत्री के सचिव सिबि चक्रवर्ती को भवन विकास निगम का एम डी यानि प्रबंध संचालक नियुक्त किया है। अभी तक उनके पास इस पद का अतिरिक्त प्रभार था।नीरज मंडलोई को मुख्यमंत्री का अपर मुख्य सचिव बनाए जाने के बाद सीएम सचिवालय में यह बड़ा बदलाव माना जा रहा है। चक्रवर्ती को राज्य शासन के मंगलवार को जारी आदेश में मध्य प्रदेश भवन विकास निगम का एमडी बनाया गया है। उनके पास यह विभाग मुख्यमंत्री के सचिव के साथ अतिरिक्त प्रभार के रूप में था।

मुख्यमंत्री सचिवालय में उनकी जगह किसी नए अफसर की पदस्थापना नहीं की गई है। सचिवालय में पहले से इलैया राजा टी सचिव के रूप में पदस्थ हैं। इससे पहले अपर सचिव के रूप में यहां आलोक कुमार सिंह की पदस्थापना की जा चुकी है।

मुख्युमंत्री डॉ यादव से फिल्मकार अनुपम खेर की भेंट,तन्वी दू ग्रेट के विशेष प्रदर्शन के अवसर पर भोपाल आए

मुख्युमंत्री डॉ यादव से फिल्मकार अनुपम खेर की भेंट,तन्वी दू ग्रेट के विशेष प्रदर्शन के अवसर पर भोपाल आए
भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से मंगलवार की शाम समत्व भवन मुख्यमंत्री निवास में जाने-माने अभिनेता और फिल्म निर्देशक अनुपम खेर ने भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने अनुपम खेर का अंग वस्त्र से सम्मान किया। अनुपम खेर भोपाल में फिल्म तन्वी द ग्रेट के विशेष प्रदर्शन के अवसर पर आए हैं। इस अवसर पर फिल्म की अभिनेत्री शुभांगी दत्त और बाल कलाकार विराज अग्रवाल भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ यादव ने अनुपम खेर को एक श्रेष्ठ उद्देश्य पूर्ण फिल्म के निर्माण के लिए बधाई दी। अनुपम खेर ने मुख्यमंत्री डॉ यादव को अपनी पुस्तक डिफरेंट बट नो लेस भी भेंट की।

महाराष्ट्र के बाद अब बंगाल में भाषा को लेकर विवाद

महाराष्ट्र के बाद अब बंगाल में भाषा को लेकर विवाद
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में एक जनसभा को संबोधित करते हुए सोमवार (21 जुलाई, 2025) को तीखे शब्दों में भाषाई असहिष्णुता के खिलाफ अपनी आवाज उठाई है. उन्होंने सवाल किया कि क्या बंगाली भाषा में बात करना गुनाह है? क्यों रोका जाता है? क्यों टोका जाता है? सीएम ममता बनर्जी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देशभर में भाषाओं को लेकर चर्चा तेज हो रही है.

सीएम ममता बनर्जी ने अपने भाषण में कहा कि अगर बिहार की तरह बंगाल में भी बंगाली भाषा को दबाने की कोशिश हुई तो तृणमूल कांग्रेस उसका पुरजोर विरोध करेगी. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “हम घेराव करेंगे, हम वोट नहीं कटने देंगे.” उन्होंने बंगाल की सांस्कृतिक विरासत का भी उल्लेख किया.

ममता बनर्जी ने कही ये बड़ी बात
ममता बनर्जी ने बंगाल की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा, “बंगाल की धरती ने रवींद्रनाथ टैगोर को जन्म दिया. यहीं से ‘जन गण मन’ और’वंदे मातरम’ जैसे राष्ट्रगीत निकले.” उन्होंने यह भी कहा कि वे हिंदी, गुजराती, मराठी और सभी भारतीय भाषाओं का सम्मान करती हैं, लेकिन यह स्वीकार्य नहीं कि बंगाली भाषा से नफरत की जाए या इसे बोलने से रोका जाए.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम में बंगाल की भूमिका को याद दिलाते हुए कहा, “आजादी की लड़ाई में बंगाली ने भाग लिया था. हमारी भाषा, हमारी पहचान है और इसे दबाने की कोई भी कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी.”

महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर भावनाएं उबाल पर

बता दें कि देश में भाषा को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है. महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर भावनाएं उबाल पर हैं. लोगों का कहना है कि हिंदी या अन्य भाषाएं थोपने की कोशिश संविधान की आत्मा के खिलाफ है.

दो स्तरीय टेस्ट प्रणाली पर विचार के लिए कार्य समिति गठित

दो स्तरीय टेस्ट प्रणाली पर विचार के लिए कार्य समिति गठित
आईसीसी ने नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजोग गुप्ता की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय एक कार्यसमूह का गठन किया है। यह समिति टेस्ट क्रिकेट को दो-स्तरीय प्रणाली में पुनर्गठित करने की संभावना का पता लगाएगी। इस समिति का गठन सिंगापुर में आईसीसी की वार्षिक आम बैठक के दौरान अध्यक्ष जय शाह और गुप्ता के अखिल भारतीय नेतृत्व में किया गया। संजोग गुप्ता को इसी महीने की शुरुआत में आईसीसी का सीईओ नियुक्त किया गया था।

‘द गार्डियन’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पैनल के अन्य सदस्यों में इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिचर्ड गोल्ड और क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (सीए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टॉड ग्रीनबर्ग भी शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘कोई भी बदलाव विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के अगले चक्र के लिए किया जाएगा, जो 2027 से 2029 तक चलेगा। इसमें मौजूदा नौ टीम के प्रारूप के बजाय छह-छह के दो डिवीजन का प्रस्ताव है।’

समिति को इस साल के आखिर तक आईसीसी को अपनी सिफारिशें पेश करनी होगी। गोल्ड और ग्रीनबर्ग के समिति में शामिल होने का मतलब है कि नई दो-स्तरीय प्रणाली लागू होने की पूरी संभावना है, क्योंकि सीए और ईसीबी इसके प्रमुख समर्थक रहे हैं। मौजूदा समय में, विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में नौ टीमें प्रतिस्पर्धा करती हैं, लेकिन यदि प्रस्तावित दो-स्तरीय प्रणाली लागू की जाती है, तो संरचना छह-छह टीमों के दो डिवीजनों में बदल जाएगी, जिसमें टीमों को प्रमोट भी किया जाएगा और खराब खेलने वाली टीमों को डिमोट किया जाना शामिल है।

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया और ईसीबी ने पिछले साल दो-स्तरीय प्रणाली पर चर्चा की थी। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया इसका एक प्रमुख समर्थक रहा है और एक ऐसे मॉडल पर जोर दे रहा है जिसमें ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और भारत हर तीन साल में दो बार आमने-सामने हों, जो हर चार साल में दो सीरीज के वर्तमान प्रारूप से बेहतर है।
चैंपियंस लीग टी20 का फिर से आगाज
इस बीच सिडनी मार्निंग हेराल्ड के अनुसार क्लब स्तर की अंतरराष्ट्रीय टी20 प्रतियोगिता चैंपियंस लीग अगले साल से फिर से शुरू हो सकती है। आईसीसी इस प्रतियोगिता को फिर से शुरू करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है। इसको लेकर चर्चा जारी है जिसमें भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के क्रिकेट बोर्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

चैंपियंस लीग को इससे पहले आखिरी बार 2014 में भारत में आयोजित किया गया था, जिसमें चेन्नई सुपर किंग्स ने बेंगलुरु में हुए फाइनल में कोलकाता नाइट राइडर्स को हराकर खिताब जीता था। उस प्रतियोगिता में भारत की तीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका की दो-दो तथा पाकिस्तान, वेस्टइंडीज और न्यूजीलैंड की एक-एक टीम ने भाग लिया था। इस प्रतियोगिता को चेन्नई सुपर किंग्स और मुंबई इंडियंस ने दो-दो, जबकि ऑस्ट्रेलिया की न्यू साउथ वेल्स और सिडनी सिक्सेस ने एक-एक बार जीता है।

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