रेल यात्रियों के लिए बड़ी खबर, नई बाईपास लाइन से इंदौर-जबलपुर का सफर होगा तेज

मध्य प्रदेश के रेल नेटवर्क को बड़ी मजबूती मिलने जा रही है। इंदौर-बुधनी के बीच करीब 205 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन तैयार की जा रही है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद इंदौर और जबलपुर के बीच रेल दूरी करीब 68 से 74 किलोमीटर तक कम होने की उम्मीद है। साथ ही ट्रेनों को इटारसी के लंबे रूट से बचने के लिए एक सीधा बाईपास मार्ग मिलेगा।

मुंबई, नागपुर और हैदराबाद की कनेक्टिविटी होगी बेहतर
नई रेल लाइन से इंदौर और जबलपुर की कनेक्टिविटी मुंबई, नागपुर, हैदराबाद, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे बड़े शहरों से मजबूत होगी। जबलपुर से दक्षिण भारत की ओर जाने वाली ट्रेनों को इटारसी होकर जाने की जरूरत कम होगी और वे बुधनी के रास्ते सीधे दक्षिण भारत की ओर बढ़ सकेंगी।

इंदौर-जबलपुर का सफर होगा छोटा
फिलहाल इंदौर से जबलपुर जाने वाली ट्रेनें भोपाल और इटारसी होकर गुजरती हैं। मौजूदा रेल मार्ग करीब 554 किलोमीटर का है। नई लाइन शुरू होने के बाद दूरी में लगभग 68 से 74 किलोमीटर तक की कमी आने का अनुमान है। इससे यात्रियों के सफर में करीब 1 से 2 घंटे तक की बचत हो सकती है।

भोपाल-इटारसी रेल नेटवर्क का दबाव भी घटेगा
इंदौर-बुधनी लाइन को एक वैकल्पिक बाईपास रूट के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पश्चिमी मध्य प्रदेश और मध्य व पूर्वी भारत के बीच ट्रेनों की आवाजाही के लिए एक नया रास्ता उपलब्ध होगा। मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों को इटारसी के व्यस्त रूट से वैकल्पिक मार्ग मिल सकेगा।

दक्षिण भारत से आने वाली ट्रेनें भी जबलपुर के रास्ते प्रयागराज, वाराणसी और बिहार की ओर जा सकेंगी। वहीं इंदौर और उज्जैन से नागपुर, हैदराबाद, बेंगलुरु और चेन्नई की ओर जाने वाली ट्रेनों के लिए भी कनेक्टिविटी बेहतर होगी।

8.64 KM की सुरंग भी बनेगी
परियोजना की खास बात यह है कि पूरी रेल लाइन को लेवल-क्रॉसिंग मुक्त रखने की योजना है। धंतलाब घाट क्षेत्र में करीब 8.64 किलोमीटर लंबी सुरंग भी बनाई जा रही है। परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पहले ही आगे बढ़ चुकी है और विभिन्न हिस्सों में निर्माण कार्य जारी है।

2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य
इंदौर-बुधनी रेल लाइन परियोजना के लिए करीब ₹7,500 करोड़ का बजट तय किया गया है। रेलवे ने इसे 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। परियोजना पूरी होने के बाद मध्य प्रदेश के मालवा और महाकौशल क्षेत्र के बीच रेल संपर्क मजबूत होने के साथ देश के कई प्रमुख शहरों तक पहुंच भी आसान होगी।

रोजगार में महिलाओं की बढ़ी भागीदारी, छत्तीसगढ़ में 57% हिस्सेदारी के साथ आगे ग्रामीण महिलाएं

छत्तीसगढ़ में ग्रामीण रोजगार के क्षेत्र से बड़ी तस्वीर सामने आई है। प्रदेश में हर दिन करीब 11 लाख ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार मिल रहा है। खास बात यह है कि इसमें महिलाओं की भागीदारी 57 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

ग्रामीण परिवारों को मिल रहा रोजगार का सहारा
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ने से बड़ी संख्या में श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर काम मिल रहा है। इससे उन्हें रोजगार के लिए दूसरे शहरों या राज्यों की ओर पलायन करने की जरूरत कम हो रही है। ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यों के जरिए गांवों में ही रोजगार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

रोजगार में महिलाओं की मजबूत भागीदारी
कुल रोजगार में महिलाओं की 57 प्रतिशत हिस्सेदारी इस पहल की खास उपलब्धि मानी जा रही है। इससे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ने के साथ परिवार की आय में भी उनका योगदान मजबूत हो रहा है।

छत्तीसगढ़ में ग्रामीण श्रमिकों के लिए रोजगार के साथ-साथ आजीविका और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी विभिन्न योजनाएं भी संचालित हैं। राज्य के श्रम विभाग की ओर से निर्माण श्रमिकों के लिए शिक्षा, आवास, कौशल विकास, पेंशन और अन्य सहायता योजनाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

रोजगार के साथ विकास कार्यों पर जोर
ग्रामीण रोजगार से जुड़ी गतिविधियों का उद्देश्य सिर्फ मजदूरी उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि गांवों में जल संरक्षण, आधारभूत ढांचे और आजीविका से जुड़े स्थायी संसाधनों का निर्माण करना भी है। इससे रोजगार के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिल रही है।

प्रदेश में ग्रामीण श्रमिकों को बड़ी संख्या में प्रतिदिन रोजगार मिलने और महिलाओं की भागीदारी 57 प्रतिशत होने को ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की बढ़ती भूमिका के महत्वपूर्ण संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

लाड़ली बहना योजना को मिली 5 साल की और मंजूरी, सरकार खर्च करेगी ₹1.14 लाख करोड़

मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण से जुड़ी लाड़ली बहना योजना को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में योजना को आगामी पांच वर्षों तक जारी रखने के लिए ₹1,14,365 करोड़ की राशि मंजूर की गई है।

पांच साल तक जारी रहेगी योजना
कैबिनेट के फैसले के मुताबिक, प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से लाड़ली बहना योजना को अगले पांच वर्षों तक निरंतर चलाया जाएगा। सरकार की ओर से योजना के लिए बड़ी राशि स्वीकृत किए जाने से इसके लाभार्थियों को आगे भी आर्थिक सहायता मिलती रहेगी।

महिलाओं के सशक्तीकरण पर सरकार का फोकस
मध्य प्रदेश सरकार ने महिला एवं बाल कल्याण से जुड़ी योजनाओं को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने के लिए कुल ₹1,32,828 करोड़ का बजट मंजूर किया है। इसमें लाड़ली बहना और लाड़ली लक्ष्मी योजनाओं के साथ प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना भी शामिल है।

सरकार के मुताबिक, इन योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है। लाड़ली बहना योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने सीधे बैंक खाते में आर्थिक सहायता दी जाती है।

अन्य योजनाओं के लिए भी बड़ी राशि मंजूर
कैबिनेट ने लाड़ली लक्ष्मी योजना के लिए आगामी पांच वर्षों के लिए ₹16,326 करोड़ और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लिए ₹2,137 करोड़ मंजूर किए हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए ₹11,835 करोड़ तथा आईटी और तकनीकी विकास से जुड़ी परियोजनाओं के लिए ₹492 करोड़ की स्वीकृति दी गई है।

सरकार के इस फैसले को प्रदेश में महिला कल्याण और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को दी जा रही प्राथमिकता के तौर पर देखा जा रहा है।

गॉल टेस्ट में भारत का शिकंजा मजबूत, श्रीलंका को जीत के लिए रचना होगा इतिहास

भारत और श्रीलंका के बीच खेले जा रहे पहले टेस्ट में टीम इंडिया ने मेजबान के सामने जीत के लिए 372 रनों का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा है। चौथे दिन भारत अपनी दूसरी पारी में 193 रन पर ऑलआउट हुआ, जिसके बाद श्रीलंका को मुकाबला जीतने के लिए 372 रन बनाने होंगे।

पंत ने खेली तूफानी पारी
भारत की दूसरी पारी में ऋषभ पंत ने तेजतर्रार 66 रन बनाए। इस पारी के दौरान उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में अपने 100 छक्के भी पूरे किए और ऐसा करने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बने। पंत ने महज 51 टेस्ट मैचों में यह उपलब्धि हासिल की।

गॉल में रिकॉर्ड चेज की चुनौती
372 रन का लक्ष्य गॉल के मैदान पर श्रीलंका के लिए बेहद मुश्किल चुनौती है। इस मैदान पर सफलतापूर्वक हासिल किया गया सबसे बड़ा लक्ष्य 344 रन है, जिसे पाकिस्तान ने श्रीलंका के खिलाफ हासिल किया था। ऐसे में श्रीलंका को भारत के खिलाफ जीत दर्ज करने के लिए गॉल में नया रिकॉर्ड बनाना होगा।

भारतीय स्पिनरों से बड़ी उम्मीद
भारत के गेंदबाजों ने पहली पारी में श्रीलंका को 284 रन पर समेट दिया था। डेब्यू कर रहे मानव सुथार ने 4 विकेट लिए, जबकि रवींद्र जडेजा ने 3 विकेट चटकाए। दोनों ने मिलकर श्रीलंका की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी थी।

अब श्रीलंका के सामने 372 रन का पहाड़ है। अगर भारतीय स्पिनरों ने गॉल की पिच का फायदा उठाया तो मेजबान टीम के लिए लक्ष्य तक पहुंचना बेहद मुश्किल होगा। वहीं, श्रीलंका को इतिहास रचने के लिए लंबी और बेहद संयमित बल्लेबाजी करनी होगी।

‘सनातन धर्म राष्ट्रीय पहचान’, देउबा गुट के प्रस्ताव से नेपाल में हिंदू राष्ट्र पर बहस तेज

नेपाल में एक बार फिर देश को हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। पूर्व प्रधानमंत्री और नेपाली कांग्रेस के नेता शेर बहादुर देउबा के नेतृत्व वाले गुट के राष्ट्रीय सम्मेलन में सनातन धर्म को नेपाल की राष्ट्रीय पहचान के तौर पर बढ़ावा देने का प्रस्ताव सामने आने के बाद सियासी हलचल बढ़ गई है।

देउबा गुट के सम्मेलन में क्या हुआ?
नेपाली कांग्रेस के देउबा गुट के तीन दिवसीय सम्मेलन के समापन पर पांच सूत्रीय घोषणा जारी की गई। इसमें सनातन धर्म को राष्ट्रीय पहचान के रूप में बढ़ावा देने की बात कही गई, साथ ही हिंदू, बौद्ध, किरात और प्रकृति-आधारित आस्थाओं तथा सभी समुदायों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा का भी उल्लेख किया गया। यह धार्मिक प्रावधान अंतिम समय में घोषणा में जोड़ा गया था।

क्या नेपाल फिर आधिकारिक तौर पर बनेगा हिंदू राष्ट्र?
फिलहाल ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ है। नेपाल 2008 में राजशाही खत्म होने के बाद धर्मनिरपेक्ष संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य बना था। हिंदू राष्ट्र की मांग लंबे समय से देश की राजनीति में मौजूद रही है और 2026 में भी कुछ राजनीतिक दलों ने इसे अपने प्रमुख मुद्दों में शामिल किया है।

बालेन शाह सरकार का क्या रुख है?
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि उनकी सरकार हिंदू राष्ट्र की बहाली या राजशाही की वापसी के पक्ष में नहीं है। ऐसे में देउबा गुट की ओर से सनातन धर्म को राष्ट्रीय पहचान बनाने की पहल ने नेपाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सनातन धर्म को राष्ट्रीय पहचान देने की मांग आगे चलकर संविधान में बदलाव और नेपाल को दोबारा हिंदू राष्ट्र बनाने की राजनीतिक मुहिम में बदलती है, या यह केवल पार्टी के भीतर की राजनीतिक रणनीति तक सीमित रहती है।

CJP प्रोटेस्ट लाठीचार्ज मामले में पुलिस का SC में हलफनामा, कहा- प्रदर्शन में शामिल थे ‘असामाजिक तत्व’

जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन के दौरान पुलिस लाठीचार्ज और कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग के मामले में दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर अपना पक्ष रखा है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक या गैरकानूनी बल प्रयोग के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कार्रवाई के दौरान अधिकतम संयम बरता गया और केवल न्यूनतम आवश्यक बल का इस्तेमाल किया गया।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 20 जुलाई को जंतर-मंतर के आसपास करीब 30 हजार प्रदर्शनकारी मौजूद थे और व्यवस्था संभालने के लिए लगभग 5 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। पुलिस का दावा है कि प्रदर्शन की शुरुआत शांतिपूर्ण थी, लेकिन बाद में भीड़ के एक हिस्से ने बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की। इसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए चरणबद्ध तरीके से बल का इस्तेमाल किया गया।

हलफनामे में पुलिस ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों के बीच कुछ असामाजिक तत्व और अपराधी शामिल थे। पुलिस के अनुसार, भीड़ के बीच सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों की तैनाती का उद्देश्य ऐसे तत्वों की पहचान करना और जरूरत पड़ने पर लोगों की मदद करना था।

‘कील वाली लाठी’ के आरोप से भी इनकार
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान ‘कील वाली लाठी’ या नुकीले डंडों के इस्तेमाल के आरोपों को भी खारिज किया है। पुलिस ने कहा कि उसने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की। पुलिस ने संसद की ओर मार्च को भी अनुमति के बिना किया गया प्रयास बताया।

पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि प्रदर्शन से जुड़े मामले में 2,873 लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। वहीं, प्रदर्शन के दौरान चेहरे की पहचान तकनीक के इस्तेमाल को पुलिस ने अनुपातिक कदम बताया है।

यह मामला ऐसे समय में सुप्रीम कोर्ट के सामने है जब शीर्ष अदालत पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार संरक्षित है और केवल प्रदर्शन होने के आधार पर पुलिस अत्यधिक बल का इस्तेमाल नहीं कर सकती।

मध्यप्रदेश सिंचाई विभाग क्षेत्रीय स्पोर्ट्स क्लब भोपाल में खेल प्रतियोगिताएं आयोजित

भोपाल। 80वें स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में मध्यप्रदेश सिंचाई (जल संसाधन) विभाग क्षेत्रीय स्पोर्ट्स क्लब भोपाल के अध्यक्ष गिरीश दाड़कर के नेतृत्व में विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।
प्रतियोगिता के तहत कैरम में अखिलेश श्रीवास्तव विजेता और मोहम्मद साजिद खान उपविजेता रहे। शतरंज में अभिषेक झा ने प्रथम तथा दिनेश श्रीवास्तव ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। वहीं टेबल टेनिस में संदीप साकल्ले विजेता और सतीश अग्रवाल उपविजेता रहे।
प्रतियोगिता में शामिल खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए स्पोर्ट्स क्लब के पदाधिकारियों ने प्रतिभागियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। आयोजन का उद्देश्य खेल भावना को बढ़ावा देने के साथ विभागीय कर्मचारियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और आपसी सहयोग की भावना विकसित करना रहा।

एका वेलफेयर फाउंडेशन का कपड़े दान अभियान, जरूरतमंदों को वस्त्र के साथ मिला सम्मान और अपनत्व

जरूरतमंद परिवारों की मदद के लिए आगे आए नागरिक

अभियान के दौरान नागरिकों और सहयोगकर्ताओं ने जरूरतमंद परिवारों की सहायता के लिए कपड़े दान किए। इस अवसर पर नेहा बग्गा ने कहा कि समाज में ऐसे अनेक परिवार हैं, जिन्हें अपनी मूलभूत जरूरतों को पूरा करने के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। ऐसे में सक्षम लोगों का छोटा-सा सहयोग भी किसी परिवार के लिए बड़ी राहत और सम्मान का कारण बन सकता है।

उन्होंने कहा कि **“जरूरतमंदों को सिर्फ वस्त्र नहीं, बल्कि सम्मान, अपनत्व और यह विश्वास देना हमारा संकल्प है कि समाज उनके साथ खड़ा है।”** सेवा को केवल किसी एक दिन या कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसे सामाजिक संस्कार और निरंतर जिम्मेदारी के रूप में अपनाने की जरूरत है।

समाजसेवा से अधिक लोगों को जोड़ने का प्रयास

नेहा बग्गा ने कहा कि एका वेलफेयर फाउंडेशन का उद्देश्य जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने के साथ अधिक से अधिक लोगों को समाजसेवा से जोड़ना है। कपड़े दान अभियान के माध्यम से मानवता, संवेदना और सामूहिक सहयोग का संदेश दिया गया।

उन्होंने कहा कि जब समाज का सक्षम वर्ग आगे बढ़कर वंचित परिवारों की मदद करता है, तो इससे केवल उनकी जरूरत पूरी नहीं होती, बल्कि समाज में सहयोग, संवेदना और भाईचारे की भावना भी मजबूत होती है।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में एका वेलफेयर फाउंडेशन की टीम और सहयोगकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समापन अवसर पर जरूरतमंदों की सेवा का यह कार्य निरंतर जारी रखने तथा भविष्य में भी व्यापक स्तर पर जनहितकारी एवं समाजसेवी अभियान आयोजित करने का संकल्प लिया गया।

रक्षाबंधन पर रोडवेज का बड़ा फैसला, कर्मचारियों को प्रोत्साहन राशि और बहनों के लिए बेहतर बस सेवा

रक्षाबंधन के त्योहार को देखते हुए रोडवेज ने यात्रियों की सुविधा के लिए खास तैयारियां शुरू कर दी हैं। बहनों को अपने भाइयों तक सुरक्षित और आसानी से पहुंचाने के लिए बस सेवाओं को सुगम बनाने पर जोर दिया जा रहा है। वहीं, त्योहार के दौरान बेहतर सेवा देने वाले रोडवेज के चालकों और परिचालकों को प्रोत्साहन राशि देने का फैसला किया गया है।

रोडवेज की ओर से रक्षाबंधन के दौरान ड्यूटी करने वाले पात्र चालकों और परिचालकों को 1,200 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसका उद्देश्य त्योहार के दौरान अतिरिक्त यात्रियों की भीड़ के बीच कर्मचारियों को बेहतर सेवाएं देने के लिए प्रोत्साहित करना है।

बहनों के लिए बस सेवा पर विशेष फोकस
रक्षाबंधन के मौके पर बसों में यात्रियों की संख्या सामान्य दिनों के मुकाबले बढ़ जाती है। इसे देखते हुए प्रमुख रूटों पर बसों की उपलब्धता और संचालन को बेहतर रखने की तैयारी की गई है। यात्रियों की बढ़ती संख्या के अनुसार अतिरिक्त बसों के संचालन और फेरे बढ़ाने पर भी जोर रहेगा।

भीड़ को देखते हुए किए जाएंगे इंतजाम
रोडवेज प्रशासन की ओर से बस अड्डों और प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की तैयारी है। यात्रियों को बसों की उपलब्धता, संचालन और अन्य जरूरी जानकारी समय पर मिल सके, इसके लिए संबंधित कर्मचारियों को भी निर्देश दिए गए हैं।

रक्षाबंधन के दौरान बहनों की यात्रा को सुगम बनाने के साथ-साथ रोडवेज का लक्ष्य यात्रियों को सुरक्षित और व्यवस्थित परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है। त्योहार के चलते बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए कर्मचारियों की ड्यूटी और बस संचालन पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।

सावन के तीसरे सोमवार पर दर्दनाक घटनाएं, लखीसराय में भगदड़ और उज्जैन में भीड़ का दबाव

सावन के तीसरे सोमवार पर देशभर के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, लेकिन आस्था के इस दिन कई जगह हादसों ने माहौल को गमगीन कर दिया। बिहार के लखीसराय स्थित अशोक धाम मंदिर में सुबह भारी भीड़ के बीच भगदड़ मचने से कई श्रद्धालु हताहत हुए। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, घटना में कम से कम सात लोगों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए हैं।

प्रशासन के अनुसार, मंदिर में अचानक भीड़ बढ़ने और बैरिकेडिंग टूटने के बाद अफरा-तफरी की स्थिति बनी। इसी दौरान बिजली का पोल गिरने और करंट फैलने की अफवाह से लोगों में दहशत फैल गई, जिससे भगदड़ जैसे हालात पैदा हुए। राहत और बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर घायलों को अस्पताल पहुंचाया।

उज्जैन में भी बिगड़े हालात

मध्य प्रदेश के उज्जैन में भी सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के मौके पर महाकालेश्वर मंदिर में लाखों श्रद्धालु पहुंचे। नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन के लिए उमड़ी भारी भीड़ के बीच हरसिद्धि मंदिर के सामने बैरिकेडिंग वाले क्षेत्र में भीड़ का दबाव बढ़ गया। कई श्रद्धालुओं के बेहोश होने और कुछ के घायल होने की जानकारी सामने आई।

महाकाल मंदिर प्रबंधन समिति ने मंदिर में अव्यवस्था और भगदड़ से जुड़ी कुछ खबरों को भ्रामक बताया है। प्रशासन और पुलिस की ओर से भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास किए गए।

सावन के तीसरे सोमवार पर धार्मिक स्थलों में उमड़ी भारी भीड़ के बीच सामने आई इन घटनाओं ने बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा इंतजामों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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