CM शिवराज सिंह के साथ पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पौधे लगाए

planted saplings

 

भोपाल, 09 सितम्बर | मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने भोपाल के स्मार्ट उद्यान में पौध-रोपण किया। आज वरिष्ठ पत्रकार कल्याण संघ के पदाधिकारियों और सदस्यों चंद्रहास शुक्ला, रामभुवन सिंह कुशवाहा, हरि मोहन मोदी, वीरेन्द्र सिन्हा, पुरुषोत्तम सोडानी, प्रेम नारायण प्रेमी, दिनेश शर्मा आदि ने भी पौधे लगाए। पत्रकारों के प्रतिनिधि मण्डल ने प्रदेश के पत्रकारों के हित में की गई महत्वपूर्ण घोषणाओं के लिये मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के साथ एसओएस बालग्राम, भोपाल में रहने वाली बालिकाअपर्णा साहू ने भी पौध-रोपण किया। सुश्री अपर्णा का चयन नीट 2023 में एमबीबीएस पाठ्यक्रम के लिये हुआ है।

पौध-रोपण में आज अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं और जन-प्रतिनिधियों ने भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के साथ पौधे लगाए। आज नीम, करंज, मौलश्री और गुलमोहर के पौधे लगाए गए।

विधायक रामेश्वर बोले केजरीवाल को पगला

 

जावरा, भाजपा की जनआशीर्वाद यात्रा शुक्रवार को जावरा पहुंची। मीडिया से मिली जानकारी अनुसार घंटाघर पर रथ सभा में भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने भाषण के दौरान राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह को कबूतर, दिल्ली के सीएम केजरीवाल को पगला तक कह दिया। सोनिया- राहुल गांधी का नाम लेकर उन पर भी हमला किया। शर्मा ने सांसद सुधीर गुप्ता से कहा कि लोकसभा में प्राइवेट बिल लाकर अगली स्ट्राइक पर इन तीनों बंदरों को लटकाकर वहां उतार दें।

स्व-सहायता समूहों से लाड़ली बहनों को जोड़कर उनकी आमदनी बढ़ाना प्रमुख लक्ष्य : मुख्यमंत्री चौहान

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मध्यप्रदेश की लाड़ली बहनों को हर महीने मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में राशि दिलवाना ही एकमात्र लक्ष्य नहीं है बल्कि बहनों को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर उनकी आय प्रतिमाह 10 हजार रुपए तक ले जाना प्रमुख लक्ष्य है।

मुख्यमंत्री चौहान ने प्रदेश की लाड़ली बहनों के नाम विशेष संदेश में कहा है कि- “हमारा प्रयास है कि बहनों की आमदनी कम से कम 10 हजार रुपए प्रति माह की जाए। इसके लिए घर का कामकाज करते हुए सभी बहनों को स्व-सहायता समूह में सम्मिलित होना होगा। कई तरह की गतिविधियाँ शुरू कर बहनों की आमदनी बढ़ाएंगे। बहनों का संकल्प होना चाहिए कि हम गरीब नहीं रहेंगे, आँसू नहीं बहायेंगे, हम भी सुख से जियेंगे।”

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि लाड़ली बहनों के खातों में 10 सितम्बर को ग्वालियर से दोपहर 2 बजे मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की राशि अंतरित की जाएगी। लाड़ली बहनें अपने गाँव और शहर में एकत्र होंगी और संवाद में भी शामिल होंगी।

मुख्यमंत्री चौहान ने संदेश में यह भी कहा है कि- “इस बार का रक्षा-बंधन बहुत हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया है। मैं स्वयं को भाग्यशाली भाई मानता हूँ क्योंकि पूरे प्रदेश से लाखों बहनों ने राखियाँ और साथ ही पातियाँ भी भेजी हैं। इन सभी को मैंने सहेज कर रखा है। बहनों की जिंदगी में खुशियां लाना मेरा लक्ष्य है। आप सुखी हों, आपका मंगल और कल्याण हो। आपका जीवन सुखी हो। इसके लिए आपका भाई कोई कसर नहीं छोड़ेगा।”

मुख्यमंत्री चौहान ने बारिश में भीगते हुए जौरावासियों को दी नगरपालिका की सौगात

cm madhya pradesh

 

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुरैना जिले के जौरावासियों को अभूतपूर्व सौगात देते हुए नगर पंचायत जौरा को नगरपालिका बनाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री चौहान द्वारा दी गई सौगात का जौरावासियों ने करतल ध्वनि से आभार माना। मुख्यमंत्री चौहान ने जौरा के साथ ही जिले के सबलगढ़ और कैलारस में बहनों के सशक्तिकरण के लिये किये जा रहे कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि बहनों के जीवन को बेहतर बनाना ही मेरा मकसद है। उन्होंने कहा कि लाड़ली बहनों के खाते में 10 अक्टूबर को 1250 रूपये आयेंगे। आगे बढ़ाकर राशि को 3 हजार तक किया जायेगा।

मुख्यमंत्री चौहान ने पानी में भीगते हुए जौरा की जनता को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि नगर पंचायत को नगरपालिका बनाने की बहुप्रतीक्षित मांग आज पूरी हो गई है। भगवान महाकालेश्वर ने मेरी प्रार्थना को स्वीकार कर पूरे प्रदेश को बारिश कर राहत प्रदान की है। मुरैना जिले में शुक्रवार को सुबह से ही बारिश हो रही है। इसके बाद भी मुख्यमंत्री चौहान ने लाड़ली बहनों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में पहले लाड़ली लक्ष्मी योजना और उसके बाद लाड़ली बहना योजना के माध्यम से महिलाओं के सशक्तिकरण का कार्य किया जा रहा है। स्व-सहायता समूह की महिलाओं को भी आर्थिक संबल प्रदान करने हेतु प्रदेश में कार्य किया जायेगा। स्व-सहायता समूह की महिलायें, राशन की दुकान, स्कूली बच्चों की यूनीफॉर्म सिलने के साथ-साथ प्रदेश में दलिया बनाने के कारखानों का संचालन भी करेंगी।

 

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा है कि अब हमारी माता-बहनों को पानी लाने घर से दूर नहीं जाना पड़ेगा। अब पाइप लाइन बिछाकर हर घर में नल की टोंटी से पानी उपलब्ध कराया जायेगा। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लागू की गई जन कल्याणकारी योजनाओं और प्रदेश की कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से गाँव, गरीब और किसानों के जीवन में खुशहाली लाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गरीबों को निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आयुष्मान कार्ड बनाकर सुरक्षा कवच प्रदान किया है।

केन्द्रीय कृषि एवं किसान-कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि मध्यप्रदेश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में बेहतरीन कार्य हुआ है। केन्द्रीय मंत्री तोमर ने कहा कि मुख्यमंत्री चौहान मुरैना आए हैं तो खाली हाथ नहीं आए हैं, विकास कार्यों की सौगातें लेकर आए हैं। तोमर ने कहा कि महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में मुख्यमंत्री चौहान के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं, जिनकी सराहना सम्पूर्ण देश में हो रही है। तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास और जनकल्याण के कार्य किए जा रहे हैं। केन्द्र सरकार की योजनाओं और मध्यप्रदेश सरकार की योजनाओं के माध्यम से आम लोगों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में मध्यप्रदेश देश में अपनी अलग पहचान बना चुका है।

खजुराहो सांसद वी.डी. शर्मा ने भी सभाओं को संबोधित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री चौहान के नेतृत्व में आमजन के जीवन को बेहतर और खुशहाल बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कार्य हो रहे हैं। प्रदेश के विकास के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण, किसानों के जीवन में खुशहाली लाने और हर जरूरतमंद को योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित करने का कार्य किया गया है।

सेहत के लिए कई तरह से फायदेमंद है गर्म खाना

Hot food is beneficial

ठंडा खाना खाने से बॉडी में फ्लूइड का मूवमेंट कम हो जाता है और डाइजेशन प्रॉब्लम हो सकती है……

आजकल की भाग-दौड़ भरी जिन्दगी में ना खाने का कोई निश्चित समय रह गया है और ना ही शांति से बैठकर खाने की फुर्सत। शहरों में ज्यादातर कामकाजी लोगों को हफ्ते भर में किसी छुट्टी के दिन ही गर्म खाना नसीब होता है। बाकी दिनों में टिफिन के ठंडे खाने या कैंटीन की तले-भुने चीजों से काम चलाना पड़ता है। लेकिन ये आदत शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकती है। हेल्दी खाना भी अगर ठंडा हो, शरीर को उतना फायदा नहीं देता, जितना ताजा और गर्म खाना। ठंडा खाना खाने से बॉडी में फ्लूइड का मूवमेंट कम हो जाता है और डाइजेशन प्रॉब्लम हो सकती है। डाइट एन क्योर की डाइटिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट दिव्या गांधी ने बताया कि गर्म खाना खाने के शरीर को कितने तरह के फायदे हो सकते हैं।

आसानी से पचता है गर्म भोजन

ये तो सभी जानते हैं कि गर्म खाना, ठंडे खाने की तुलना में आसानी से पच जाता है। दरअसल, शरीर गर्म खाने को आसानी से एब्जॉर्ब कर लेता है। इसी वजह से गर्म खाना खाने से पेट खराब होने का रिस्क कम रहता है। ठंडा खाना हजम करने में शरीर को काफी मेहनत भी करनी पड़ती है। ऐसे में लगातार ठंडा खाने से अपच और पेट दर्द की समस्या पैदा हो सकती है।

हेल्दी होता है गर्म खाना

विशेषज्ञों के अनुसार, ठंडे खाने की तुलना में गर्म खाना ज्यादा पौष्टिक होता है। इसकी वजह ये है कि जैसे की खाने की चीजों का तापमान कम होता है, उसमें बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। वैसे, हानिकारक बैक्टीरिया के पनपने में कुछ घंटे लगते हैं, लेकिन इसकी प्रक्रिया शुरु हो जाती है। वहीं ताजा गर्म खाने में जर्म्स या बैक्टीरिया नहीं होते और इस वजह से पेट और सेहत के लिए ज्यादा लाभकारी होते हैं। अगर ठंडे खाने को भी गर्म कर लिया जाए, तो उसमें मौजूद बैक्टीरिया मर जाते हैं और ये ज्यादा स्वादिष्ट और पौष्टिक हो जाता है।

खाने का स्वाद

गर्म खाना हमेशा स्वादिष्ट लगता है और संतुष्टि देता है। इसकी वजह ये है कि गर्म खाना हमारी जीभ पर मौजूद सभी टेस्ट बड्स को सक्रिय करता है और इस वजह से खाना ज्यादा स्वादिष्ट लगता है। गर्म खाने में खुशबू भी होती है, जो स्वाद और भूख में वृद्धि करती है। गर्म खाना खाने से मानसिक तौर पर भी संतुष्टि का अहसास होता है। साथ ही ये मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करता है। वहीं ठंडा खाना सिर्फ पेट भरता है।

ज्यादा गर्म खाना नुकसानदेह

गर्म खाने का मतलब ये नहीं कि आप उबलती हुई चाय या बेहद गर्म चीज मुंह में डाल लें। बहुत ज्यादा गर्म खाना खाने से शरीर के इंटरनल पार्ट डैमेज हो सकते हैं। ज्यादा गर्म खाना, जीभ और गले की नली से लेकर इसोफेगस तक को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए बहुत ज्यादा गर्म खाने या पीने की चीज से बचें। विशेषज्ञों के मुताबिक खाना हमेशा हमारी बॉडी की बाहरी सतह यानी स्किन को सूट करने लायक गर्म होना चाहिए। दाल, सब्जी, रोटी या खाने की कोई भी चीज इतनी ही गर्म हो, जितनी हमारी उंगलियां या जीभ झेल सके। इस तापमान पर खाना हेल्दी होता है और आसानी से पचता है।

30 सितंबर से पहले निपटा लें ये काम, वरना PPF, NSC जैसी छोटी योजनाओं का खाता हो जाएगा फ्रीज

small schemes like PPF, NSC will freeze

 

अगर आपने सार्वजनिक भविष्य निधि (PPF), राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (NSC) और वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (SCSS) में निवेश किया है, तो आपका अकाउंट फ्रीज हो सकता है। इन खातों को आधार से लिंक होना जरूरी है। इसके लिए समयसीमा 30 सितंबर 2023 तक है। यदि समय अवधि तक आधार इन योजनाओं से लिंक नहीं हुआ तो खाता फ्रीज कर दिया जाएगा।

दरअसल, वित्त मंत्रालय ने छोटी बचत योजनाओं में निवेश के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य कर दिया है। इसके लिए केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2023 को अधिसूचना जारी की थी। इस स्मॉल सेविंग योजनाओं में निवेश करने के लिए आपको डाकघर या बैंक में खाता खुलवाना होगा।

अगर लिंक नहीं किया तो क्या होगा?

अगर आप आधार को इन योजनाओं से लिंक नहीं करते हैं, तो इन स्कीम्स के तहत मिलने वाला ब्याज का लाभ नहीं मिलेगा। साथ ही खाता फ्रीज कर दिया जाएगा।

आधार को कैसे लिंक करें?

आप अपने आधार को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से लिंक कर सकते हैं। इसे ऑफलाइन करने के लिए आपको पोस्ट ऑफिस या नजदीकी बैंक में जाना होगा। वहां से आधार लिंकिंग फॉर्म भरना होगा। साथ ही आधार की फोटो कॉपी के साथ जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे। आप इसे डाक घर की वेबसाइट या बैंक की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन कर सकते हैं।

90 वर्ष की हुयी आशा भोंसले

Asha Bhosle turns 90

 

मुंबई, 08 सितंबर| बॉलीवुड की जानीमानी पार्श्वगायिका आशा भोंसले आज 90 वर्ष की हो गयी। महाराष्ट्र के सांगली गांव में 08 सितम्बर 1933 को जन्मीं आशा भोंसले के पिता पंडित दीनानाथ मंगेश्कर मराठी रंगमंच से जुड़े हुए थे। नौ वर्ष की छोटी उम्र में ही आशा के सिर से पिता का साया उठ गया और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी को उठाते हुए आशा और उनकी दीदी लता मंगेश्कर ने फिल्मों में अभिनय के साथ साथ गाना भी शुरू कर दिया।

आशा भोंसले ने अपना पहला गीत वर्ष 1948 में ‘सावन आया’ फिल्म चुनरिया में गाया। सोलह वर्ष की उम्र में अपने परिवार की इच्छा के विरुद्ध जाते हुये उन्होंने अपनी उम्र से काफी बड़े गणपत राव भोंसले से शादी कर ली। उनकी वह शादी ज्यादा सफल नहीं रही और अंततः उन्हें मुंबई से वापस अपने घर पुणे आना पड़ा। उस समय तक गीतादत्त, शमशाद बेगम और लता मंगेश्कर फिल्मों में बतौर पार्श्वगायिका अपनी धाक जमा चुकी थीं। वर्ष 1957 में संगीतकार ओ.पी. नैय्यर के संगीत निर्देशन में बनी निर्माता-निर्देशक बी. आर. चोपड़ा की फिल्म ‘नया दौर’ आशा भोंसले के सिने करियर का अहम पड़ाव लेकर आई। वर्ष 1966 मे तीसरी मंजिल मे आशा भोंसले ने आर. डी. बर्मन के संगीत में ‘आजा आजा मैं हूं प्यार तेरा’ गाना को अपनी आवाज दी जिससे उन्हे काफी ख्याति मिली।साठ और सत्तर के दशक में आशा भोसले हिन्दी फिल्मों की प्रख्यात नर्तक अभिनेत्री ‘हेलन’ की आवाज समझी जाती थी। आशा ने हेलन के लिये तीसरी मंजिल में ‘ओ हसीना जुल्फों वाली’, कारवां में ‘ पिया तू अब तो आजा’, मेरे जीवन साथी में ‘आओ ना गले लगा लो ना’ और डॉन में ‘ये मेरा दिल यार का दीवाना’ गीत गाया। शास्त्रीय संगीत से लेकर पाश्चात्य धुनो पर गाने में महारत हासिल करने वाली आशा भोंसले ने वर्ष 1981 में प्रदर्शित फिल्म उमराव जान से अपने गाने के अंदाज में परिवर्तन किया। फिल्म उमराव जान से वह एक कैबरे सिंगर और पॉप सिंगर की छवि से बाहर निकली और लोगों को यह अहसास हुआ कि वह हर तरह के गीत गाने में सक्षम है।उमराव जान के लिये आशा ने ‘दिल चीज क्या है’ और ‘इन आंखों की मस्ती के’ जैसी गजलें गाकर आशा को खुद भी आश्चर्य हुआ कि वह इस तरह के गीत गा सकती है। इस फिल्म के लिये उन्हें अपने करियर का पहला नेशनल अवार्ड भी मिला ।

वर्ष 1994 मे अपने पति आर. डी. बर्मन की मौत से उन्हें गहरा सदमा लगा और उन्होंने गायिकी से मुंह मोड़ लिया। लेकिन उनकी जादुई आवाज आखिर दुनिया से कब तक मुंह मोड़े रहती। उनकी आवाज की आवश्यकता हर संगीतकार को थी। कुछ महीनों की खामोशी के बाद इसकी पहल संगीतकार ए. आर. रहमान ने की।रहमान को अपने रंगीला फिल्म के लिये आशा की आवाज की जरूरत थी। उन्होंने 1995 में ‘तन्हा तन्हा’ गीत फिल्म रंगीला के लिये गाया। आशा के सिने करियर मे यह एक बार फिर महत्वपूर्ण मोड़ आया और उसके बाद उन्होने आजकल की धूम धड़ाके से भरे संगीत की दुनिया में कदम रख दिया। आशा भोंसले को बतौर गायिका आठ बार फिल्म फेयर पुरस्कार मिल चुका है। उन्हें वर्ष 2001 में फिल्म जगत के सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इससे पूर्व उन्हें उमराव जान और इजाजत में उनके गाये गीतों के लिये राष्ट्रीय पुरस्कार भी दिया गया। आज रिमिक्स गीतों के दौर में बनाये गये गानों पर यदि एक नजर डाले तो पायेंगे कि उनमें से अधिकांश नगमें आशा भोंसले ने ही गाये थे। इन रिमिक्स गानों में पान खाये सइयां हमार, पर्दे में रहने दो, जब चली ठंडी हवा, शहरी बाबू दिल लहरी बाबू, झुमका गिरा रे बरेली के बाजार में, काली घटा छाये मोरा जिया घबराये, लोगो न मारो इसे, कह दूं तुम्हें या चुप रहूं और मेरी बेरी के बेर मत तोड़ो जैसे सुपरहिट गीत शामिल है। आशा भोंसले ने हिन्दी फिल्मी गीतों के अलावा गैर फिल्मी गाने गजल, भजन और कव्वालियो को भी बखूबी गाया है । जहां एक ओर संगीतकार जयदेव के संगीत निर्देशन में जयशंकर प्रसाद और महादेवी वर्मा की कविताओं को आशा ने अपने स्वर से सजाया है वही फिराक गोरखपुरी और जिगर मुरादाबादी के रचित कुछ शेर भी गाये है। जीवन की सच्चाइयों को बयान करती जिगर मुरादाबादी की गजल ‘मैं चमन में जहां भी रहूं मेरा हक है फसले बहार पर’ उनके जीवन को भी काफी हद तक बयां करती है ।हिंदी के अलावा आशा भोंसले ने मराठी, बंगाली, गुजराती, पंजाबी, तमिल, मलयालम, अंग्रेजी और अन्य भाषा के भी अनेक गीत गाये हैं।

आईसीसी ने की पुरुष क्रिकेट विश्व कप के लिए मैच अधिकारियों की घोषणा

Men's Cricket World Cup

 

दुबई/ दिल्ली 08 सितंबर| अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने भारत में होने वाले पुरुष क्रिकेट विश्व कप 2023 के लीग दौर के लिए 20 मैच अधिकारियों की घोषणा की है। टूर्नामेंट के 13वें संस्करण में सोलह अंपायर अंपायरिंग करेंगे, जिसमें आईसीसी के एमिरेट्स एलीट पैनल के सभी 12 अंपायर और आईसीसी इमर्जिंग अंपायर पैनल के चार सदस्य शामिल हैं। जिनमें क्रिस ब्राउन, कुमार धर्मसेना, मराइस इरास्मस, क्रिस गैफनी, माइकल गफ, एड्रियन होल्डस्टॉक, रिचर्ड इलिंगवर्थ, रिचर्ड केटलबोरो, नितिन मेनन, अहसान रज़ा, पॉल रिफ़ेल, शरफुद्दौला इब्ने शैद, रॉड टकर, एलेक्स व्हार्फ, जोएल विल्सन और पॉल विल्सन के नाम हैं।

वाहक और बीमार व्यक्ति को काउंसलिंग कार्ड तत्काल मिले – राज्यपाल मंगुभाई पटेल

get counseling cards immediately

 

राज्यपाल ने सिकल सेल एवं टी.बी. उन्मूलन कार्यक्रमों की समीक्षा की

भोपाल, 08 सितम्बर | राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि सिकल सेल जाँच के बाद वाहक अथवा बीमार व्यक्ति को काउंसलिंग कार्ड निश्चित समय में मिलने की व्यवस्था बनाई जाये। उन्होंने कहा कि सिकल सेल जाँच कार्य की गति के लिए संवेदनशील क्षेत्रों और समुदायों को चिन्हित कर जाँच का कार्य कराया जाये।राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि स्वास्थ्य कार्यक्रमों की चुनौतियों का पूरी ताकत और संवेदनशीलता के साथ किये जाये। निर्वाचन कार्यों से स्वास्थ्य कार्यक्रमों की गति रुके नहीं, इसकी अग्रिम कार्य-योजना बनाई जाये।

राज्यपाल मंगुभाई पटेल सिकल सेल एवं टी.बी. उन्मूलन कार्यक्रमों की समीक्षा बैठक को राजभवन में संबोधित कर रहे थे। बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, अपर मुख्य सचिव लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण मोहम्मद सुलेमान और राज्यपाल के प्रमुख सचिव डी.पी. आहूजा भी उपस्थित थे।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि जनजाति बहुल क्षेत्रों के बड़े अस्पतालों में सिकल सेल के इलाज के लिए एक अलग विशेष वार्ड बनाया जाना चाहिए। वार्ड में सिकल सेल की जाँच और उपचार की एकीकृत व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जानी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग स्क्रीनिंग, कार्ड वितरण, उपचार आदि कार्यों की चरणबद्ध प्रभावी मॉनिटरिंग करें।

पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में भी तलाशें सिकलसेल का इलाज

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने गुजरात के 95 प्रतिशत जनजाति बहुल जिले डांग का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ पर सिकल सेल रोग के कुछ सौ मरीज ही हैं। संभवतः वहाँ जड़ी-बूटी की व्यापक उपलब्धता, उनका वातावरण पर प्रभाव और समुदाय के पारंपरिक जड़ी-बूटी के ज्ञान का प्रभाव हो सकता है। उन्होंने होम्योपैथी के चिकित्सकों द्वारा औषधि की सफलता की जानकारी भी दी और विभाग को इसके लिये शोध और अनुसंधान के प्रयास करने के लिए कहा। देश भर के अलग-अलग क्षेत्रों में सिकल सेल उपचार प्रयासों की जानकारी भी ली जानी चाहिए।

निःक्षय मित्रों का करें सम्मान

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि वर्ष 2025 तक टी.बी. उन्मूलन का लक्ष्य प्राप्त करना है। टी.बी. उन्मूलन के लिए जागरूकता कार्यक्रम करें। रोगी पोषण प्रयासों में सक्रिय जन-भागीदारी प्राप्त करने के लिए सक्रिय निक्षय मित्रों का सम्मान और उनका उत्साहवर्धन करें। इन कार्यक्रमों में स्थानीय जन-प्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों और उद्योगपतियों को भी जोड़ा जाए।

प्रधानमंत्री के भरोसे को सिद्ध करें

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रारंभ किये गये सिकल सेल के राष्ट्रीय मिशन को प्रदेश में लांच कर सिकल सेल एनीमिया निवारण के कार्यों को संरक्षण दिया है। प्रदेश के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि वह कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन का आदर्श प्रस्तुत करें। बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संचालक प्रियंका दास ने सिकल सेल और टी. बी. उन्मूलन कार्यक्रम की प्रगति के आयामों की जानकारी दी। समीक्षा बैठक में आयुक्त स्वास्थ्य डॉ. सुदाम खाड़े, जनजाति प्रकोष्ठ के सदस्य सचिव बी.एस. जामोद, राज्यपाल के उप सचिव स्वरोचिष सोमवंशी एवं अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

G20 की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस का आगाज

G-20 conference

अमिताभ कांत ने कहा- भारत ने 60 शहरों में कराएं सम्मेलन की बैठकें

दिल्ली। दिल्ली में जी 20 शिखर सम्मेलन के लिए विदेशी मेहमानों का आगमन शुरू हो चुका है। जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक राजधानी पहुंच गए हैं। बतौर सुनक यह भारत का उनका पहला दौर है। उनसे पहले बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना नई दिल्ली पहुंची। वहीं, शिखर सम्मेलन की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस शेरपा अमिताभ कांत ने की। उन्होंने जी 20 के आगामी कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी।

अध्यक्षता समावेशी और महत्वाकांक्षी होनी चाहिए

अमिताभ कांत ने कहा कि भारत ने महसूस किया कि हमें अपनी अध्यक्षता वसुधैव कुटुंबकम ‘दुनिया एक परिवार है’ की थीम के साथ शुरू करनी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश की अध्यक्षता समावेशी, निर्णायक और महत्वाकांक्षी होनी चाहिए। हम अपनी अध्यक्षता के दौराम समावेशी, महत्वाकांक्षी और निर्णायक होने के उनके दृष्टिकोण पर खरे उतरे हैं।

29 देशों और 11 अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने हिस्सा लिया

अमिताभ कांत ने कहा, ‘इस सम्मेलन में 29 विशेष आमंत्रित देशों और 11 अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने हिस्सा लिया है। हमने इस अवसर का इस्तेमाल करते हुए बैठकों को भारत के 60 शहरों और केंद्र शासित प्रदेशों में आयोजित की।’ उन्होंने कहा कि जब जी20 दूसरे देशों में आयोजित हुआ तो अधिकतम दो शहरों में आयोजित होता था। भारत ने इसे 60 शहरों में आयोजित किया।

भारत की अध्यक्षता महत्वपूर्ण है

उन्होंने कहा कि हमारे लिए दूसरी प्रमुख प्राथमिकता विकास लक्ष्यों को गति देना था। 169 एसडीजी में से सिर्फ 12 पटरी पर हैं। हम तय समय से पीछे हैं। हम 2030 एक्शन प्वॉइंट के मध्य में हैं। अमिताभ कांत ने कहा, ‘हम बहुत पीछे हैं। इसलिए एसडीजी में तेजी लाना, सीखने के परिणामों में सुधार लाना और स्वस्थ परिणाम ये सभी भारत की अध्यक्षता के लिए महत्वपूर्ण थे।’

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