दोपहर 2.30 बजे इंदौर पहुंचेंगे गृह मंत्री अमित शाह, कार्यकर्ताओं को देंगे जीत का मंत्र

Home Minister Amit Shah will reach Indore at 2.30 pm, will give the mantra of victory to the workers

 

इंदौर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रविवार दोपहर करीब 2.30 बजे इंदौर आएंगे। इंदौर आने के पहले वे भगवान परशुराम की जन्मस्थली जानापाव जाएंगे। इंदौर में वे संभागीय कार्यकर्ता सम्मेलन में भाजपा के बूथ कार्यकर्ताओं को जीत का मंत्र देंगे। इसमें इंदौर संभाग के नौ जिलों के 186 मंडल अध्यक्ष, 10311 बूथ अध्यक्ष सहित करीब 50 हजार कार्यकर्ता शामिल होंगे। सभी कार्यकर्ताओं के लिए बसों का इंतजाम किया गया है। कनकेश्वरी धाम में होने वाले सम्मेलन की तैयारी की जानकारी देते भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि संभाग के जिलों से 15 हजार कार्यकर्ता पहुंचेंगे, जबकि जिले की नौ विधानसभा से 35 हजार कार्यकर्ता शामिल होंगे।

आयोजन स्थल पर दो वाटरप्रूफ डोम बनाए गए हैं, इसी के आसपास के एक किमी हिस्से में पार्किंग की व्यवस्था की गई है। सम्मेलन में शामिल होने के बाद वे भगवान परशुराम की जन्म स्थली जानापाव भी जाएंगे। कार्यकर्ता सम्मेलन में शामिल होने के बाद शाह होटल मैरिएट में संभाग के नेताओं के साथ चर्चा भी करेंगे। पहले यह बैठक जावरा कंपाउंड कार्यालय में होनी थी, लेकिन इसका स्थान बदला गया है। बैठक में मालवा-निमाड की सीटों की स्थिति पर चर्चा की जाएगी।

50000 कार्यकर्ताओं के पहुंचने का दावा
खबर है कि इस सम्मेलन में इंदौर संभाग के नौ जिलों के 186 मंडल अध्यक्ष, 10311 बूथ अध्यक्ष सहित करीब 50 हजार कार्यकर्ता शामिल होंगे। सभी कार्यकर्ताओं के लिए बसों का इंतजाम किया गया है। संभाग के जिलों से 15 हजार कार्यकर्ता पहुंचेंगे, जबकि जिले की नौ विधानसभा से 35 हजार कार्यकर्ता शामिल होंगे। कार्यक्रम स्थल पर मंच के साथ कार्यकर्ताओं के बैठने के लिए तीन विशाल वाटर और सन प्रूफ डोम बनाए जा रहे हैं। इन डोम में 35 हजार लोग आसानी से बैठ पाएंगे। मैदान में एक मुख्य डोम बन रहा है, जिसके आस-पास दो अन्य डोम बनाए जा रहे हैं।मंच एरिया के बाद वीआईपी, प्रेस, मीडिया सहित खास लोगों और पार्टी के पदाधिकारियों को बैठने के लिए स्थान दिया गया है। उसके बाद कार्यकर्ताओं के बैठने के लिए कुर्सियां लगाई गई हैं।

जानापाव पहुंचने वाले पहले गृहमंत्री होंगे अमित शाह

सम्मेलन में शामिल होने के बाद वे भगवान परशुराम की जन्म स्थली जानापाव भी जाएंगे। इसी के साथ शाह का नाम जानापाव जाने वाले देश के पहले गृहमंत्री के रूप में दर्ज हो जाएगा। इससे पहले कभी कोई गृहमंत्री जानापाव नहीं आया है। रविवार को इंदौर के एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जानापाव पहुंचेंगे । केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह दोपहर करीब 4 बजे जानापाव पहुंचेंगे। वह जानापाव में करीब आधा घंटा रुकेंगे। इस दौरान वह जनकेश्वर महादेव का अभिषेक करेंगे। इसके बाद नवनिर्मित परशुराम मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे। पूजन के बाद शाह हेलीकाप्टर से इंदौर के लिए रवाना होंगे। इसके बाद शाह होटल मैरिएट में संभाग के नेताओं के साथ चर्चा भी करेंगे, इसमें मालवा-निमाड की सीटों की स्थिति पर चर्चा की जाएगी।

ऐसा रहेगा पूरा कार्यक्रम
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दोपहर 2.20 बजे इंदौर एयरपोर्ट पहुंचेंगे। यहां से मां कनकदेवी मंदिर, आईटीआई के समीप पहुंचेंगे और दोपहर 2.30 बजे से बूथ कार्यकर्ताओं के सम्मेलन को संबोधित करेंगे।
यहां से शाह वापस एयरपोर्ट पहुंचेंगे और हैलीकॉप्टर के द्वारा शाम 4.10 बजे भगवान परशुराम की जन्मस्थली जानापाव के लिए रवाना होंगे। शाह यहां दर्शन एवं पूजन के बाद शाम 5.15 बजे इंदौर एयरपोर्ट के लिए रवाना होंगे।
एयरपोर्ट से शाह शाम 6.00 बजे होटल मैरियट पहुंचेंगे और पदाधिकारियों की बैठक को संबोधित करेंगे। रात के भोजन के बाद अमित शाह 8.30 बजे होटल से एयरपोर्ट पहुंचेंगे और 8.35 बजे दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे।

मध्यप्रदेश आज बदल रहा है : CM शिवराज सिंह

Madhya Pradesh is changing today: CM Shivraj Singh

भोपाल , 29 जुलाई | मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि पूरा मध्यप्रदेश आज बदल रहा है। प्रदेश में तेजी से विकास और जन-कल्याण के कार्य हो रहे हैं। प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय जो कभी 11 हजार रूपये थी, अब एक लाख 40 हजार रूपये हो गई है। पूरे प्रदेश में सड़कों का जाल बिछ गया है। हर खेत में सिंचाई का पानी और हर घर नल से जल पहुँचाने का कार्य हो रहा है। बिजली की आपूर्ति निरंतर है। विकास के सभी मानकों में मध्यप्रदेश आगे है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की घोषणाएँ

बायां में नाले की रिटेनिंग वॉल निर्माण एवं पक्कीकरण।
सलकनपुर कॉरिडोर निर्माण के लिये सर्वे।Madhya Pradesh is changing today: CM Shivraj Singh

एक हजार मीटर आंतरिक मार्ग स्वीकृत।

सामुदायिक भवन निर्माण।

हायर सेकेण्‍डरी स्कूल में कॉमर्स कक्षाएँ प्रारंभ करना।

नया कचरा संग्रहण वाहन।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह आज विकास पर्व के दौरान सीहोर जिले के ग्राम बायां में विशाल जन-समुदाय को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने 25 करोड़ 98 लाख रूपये के विकास कार्यों का भूमि-पूजन/लोकार्पण किया। इनमें 25 करोड़ 32 लाख 84 हजार रूपये के भूमि-पूजन एवं 65 लाख 64 हजार रूपये के लोकार्पण शामिल हैं। उन्होंने विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ भी वितरित किये। प्रारंभ में बेटियों का पूजन किया।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि लाड़ली बहना मेरी जिंदगी की सबसे महत्वपूर्ण योजना है। मैंने बचपन से बेटियों के प्रति भेदभाव देखा और संकल्प लिया कि इसे मिटा कर रहूँगा। प्रदेश में बेटियों को सम्मान और मजबूती प्रदान करने के लिये निरंतर कार्य हो रहे हैं। लाड़ली लक्ष्मी, मुख्यमंत्री कन्या-विवाह/निकाह, पंचायतों में 50 प्रतिशत आरक्षण, संबल जैसी योजनाओं के बाद लाड़ली बहना योजना बनाई गई है। यह योजना बहनों को समाज में सम्मान दिलायेगी और उनका आत्म-विश्वास बढ़ायेगी। इस योजना पर एक वर्ष में लगभग 15 हजार करोड़ रूपये खर्च होंगे। आगामी समय में इसकी राशि को बढ़ा कर 3000 रूपये तक किया जायेगा। बहनों को सशक्त बनाने के लिये स्व-सहायता समूहों से जोड़ा जा रहा है और उनकी आमदनी प्रतिमाह कम से कम 10 हजार रूपये करने के प्रयास किये जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि बचपन से मैं बायां आया करता हूँ। गाँव के लगभग सभी घरों में मैं गया हूँ। बायां की दाल और गुड़ पट्टी मुझे आज भी याद आती है। आज मैं यहाँ की दाल खाकर जाऊँगा। उन्होंने बायां के सरकारी स्कूल में मरम्मत और क्षेत्र के विकास के लिये अनेक घोषणाएँ भी कीं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि सलकनपुर में देवी माँ का भव्य मंदिर बन रहा है, जहाँ पूरी दुनिया से लोग दर्शन करने आयेंगे। बुधनी में 750 करोड़ की लागत से मेडिकल कॉलेज बनाया जा रहा है। बायां में फोरलेन का कार्य भी किया जा रहा है, जिसे राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित किया गया है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि बच्चे खूब पढ़ें और आगे बढ़ें। मैं उनकी पढ़ाई में कोई बाधा नहीं आने दूँगा। इसके लिये विद्यार्थियों को हर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। बारहवीं कक्षा में 75 प्रतिशत अंक लाने पर लैपटॉप दिया जाता है, पाँचवीं से छटवीं और आठवीं से नौंवी अन्य गाँव में पढ़ने जाने के लिये साइकिल दी जाती है और अब बारहवीं कक्षा में टॉप करने वाले एक बेटे और एक बेटी को स्कूटी दी जायेगी। मेधावी विद्यार्थी योजना में उच्च शिक्षा की फीस भी सरकार भरवा रही है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि प्रदेश में रोजगार और स्व-रोजगार के व्यापक अवसर दिलाये जा रहे हैं। एक लाख सरकारी पदों पर भर्ती चल रही है और 50 हजार पदों पर आगे होगी। मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना में सरकार स्व-रोजगार के लिये अपनी गारंटी पर ऋण और ब्याज अनुदान दिलवाती है। 12वीं पास अथवा आईटीआई करने वाले विद्यार्थियों को सीखो-कमाओ योजना में प्रशिक्षण के साथ 8 हजार रूपये प्रतिमाह मानदेय भी दिया जाता है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि पुरानी सरकार ने जन-कल्याण की बहुत सी योजनाएँ बंद कर दीं। मुख्यमंत्री कन्या-विवाह, मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन, संबल जैसी योजनाएँ बंद कर दी गईं। हमारी सरकार ने इन्हें पुन: चालू किया है। अब बुजुर्गों को हवाई जहाज से भी तीर्थ-यात्रा करवाई जा रही है।

सांसद रमाकांत भार्गव ने क्षेत्र के विकास के लिये मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का आभार माना। विधायक करण सिंह वर्मा, श्री गुरु प्रसाद शर्मा रघुनाथ सिंह भाटी, राजेन्द्र सिंह राजपूत, आदिवासी वित्त विकास निगम अध्यक्ष निर्मला बारेला, श्री महेश उपाध्याय, जिला पंचायत अध्यक्ष गोपाल सिंह इंजीनियर, रवि मालवीय, मारुति शिशिर, सीमा जुगल पटेल सहित अन्य जन-प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में जन-समुदाय उपस्थित था।

MP में आशा, ऊषा कार्यकर्ताओं और आशा पर्यवेक्षकों को सेवानिवृत्ति पर मिलेंगे 1 लाख रुपए, सीएम शिवराज की घोषणा

Asha, Usha workers and Asha supervisors in MP will get Rs 1 lakh on retirement, CM Shivraj announces

 

मध्‍य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह ने आज भोपाल में एक अहम घोषणा की है। इसमें उन्‍होंने कहा है कि प्रदेश में आशा, ऊषा कार्यकर्ताओं और आशा पर्यवेक्षकों को सेवानिवृत्ति पर 1 लाख रुपए दिए जाएंगे। वे लाल परेड ग्राउंड, भोपाल में आयोजित आशा, ऊषा और आशा पर्यवेक्षक कार्यकर्ताओं के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।उन्‍होंने कहा, स्वास्थ्य विभाग की समस्त गतिविधियों में भाग लेकर अभियानों को सफल बनाना हो, तो हमारे पास एक ही नाम होता है… “आशा बहनें”। बहुत सारे काम मेरी आशा बहनों के जिम्मे हैं…। कोविड काल में हमारी आशा और ऊषा बहनों ने अपनी जान हथेली पर रखकर दूसरों की जिंदगी बचाने का काम किया, बहनों को प्रणाम!

 

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा है कि आशा और ऊषा कार्यकर्ता स्वास्थ्य विभाग की पर्याय बनकर उभरी हैं। गाँव में आशा बहनें एवं शहरों में ऊषा बहनें स्वास्थ्य सेवाएँ देती हैं। आशा और ऊषा बहनों ने ग्राम आरोग्य केन्द्रों के माध्यम से प्राथमिक उपचार, दवाओं का वितरण, रोग नियंत्रण की निगरानी और स्वास्थ्य विभाग की समस्त गतिविधियों में भाग लेकर अभियानों को सफल बनाने में सहयोग किया है। साथ ही कोविड के समय अपनी जान हथेली पर रखकर दूसरों की जिन्दगी बचाने का कार्य भी किया है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की प्रमुख घोषणाएँ

आशा, ऊषा बहनें और आशा पर्यवेक्षकों की सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष की जाएगी।

आशा कार्यकर्ता और पर्यवेक्षकों को मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ दिया जाएगा।

प्रत्येक आशा और ऊषा बहनों को मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में सम्मिलित किया जाएगा।

आशा पर्यवेक्षकों का मानदेय बढ़ाकर 13,500 रूपए किया जाएगा।

आशा पर्यवेक्षकों के मानदेय में प्रतिवर्ष बढ़ोत्तरी की जाएगी।

आशा, ऊषा बहनों का मानदेय 2 हजार से बढ़ाकर 6 हजार रूपए किया जाएगा।

आशा, ऊषा बहनों को मिलने वाले मानदेय में प्रतिवर्ष 1000 रूपए की वृद्धि की जाएगी।

आशा, ऊषा बहनों तथा आशा पर्यवेक्षकों को सेवानिवृत्ति के बाद एक लाख रूपए दिए जाएंगे।

आशा, ऊषा बहनों तथा आशा पर्यवेक्षकों को 5 लाख रूपए का चिकित्सा तथा दुर्घटना बीमा करवाकर दिया जाएगा।

बिना गंभीर लापरवाही के किसी को सेवा से पृथक नहीं किया जाएगा।

आकस्मिक अवकाश दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह आज लाल परेड ग्राउण्ड में आशा, ऊषा कार्यकर्ता और आशा पर्यवेक्षकों के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी, अन्य जन-प्रतिनिधि, निर्धन वर्ग कल्याण आयेाग के अध्यक्ष श्री शिव कुमार चौबे, अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य मोहम्मद सुलेमान, स्वास्थ्य आयुक्त डॉ. सुदाम खाड़े उपस्थित थे।

आशा और ऊषा बहनों का कार्य सराहनीय

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि आशा-ऊषा बहनों का कार्य सराहनीय है। आशा-ऊषा बहनें घर-घर सर्वे, बच्चों के जन्म प्रमाण-पत्र बनवाने, गर्भवती माताओं के रिकार्ड, टीकाकरण, सुरक्षित संस्थागत प्रसव, नवजात शिशुओं की देखभाल, समस्त आयु वर्ग के बच्चों का टीकाकरण, ग्राम स्वास्थ्य की सेवाओं में सहयोग, विवाहितों को छोटे परिवार के लिए प्रेरित करने, पोषण-आहार प्रदाय सहित विभिन्न कार्य दक्षता से करती हैं। आशा-ऊषा बहनें कैंसर, डायबिटीज तथा ब्लड प्रेशर के मरीजों की पहचान और उनका फॉलोअप कराने का कार्य करती हैं।

प्रदेश में मातृ और शिशु मृत्यु दर लगातार कम हो रही

 

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का आभार माना

प्रदेश में आशा, ऊषा कार्यकर्ता और आशा पर्यवेक्षकों के हित में विभिन्न निर्णय करने के लिये मध्यप्रदेश आशा कार्यकर्ता एवं पर्यवेक्षक संगठन की अध्यक्ष विभा श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का आभार एवं धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह द्वारा आशा, ऊषा कार्यकर्ता एवं पर्यवेक्षकों का मानदेय और सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने, सेवानिवृत्ति के बाद एकमुश्त राशि देने और उन्हें स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ देने जैसे निर्णय सराहनीय हैं। इससे न केवल उनकी स्थिति बेहतर होगी, उनका मनोबल बढ़ेगा, अपितु वे अपने कार्य को बेहतर ढंग से कर सकेंगी।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि प्रदेश में मातृ और शिशु मृत्यु दर लगातार कम हो रही है। मातृ मृत्यु दर 498 से घटकर 173 रह गई है। शिशु मृत्यु दर 82 से घटकर 43 रह गई है। नेशनल हेल्थ सर्वे स्कीम में प्रदेश से 60 प्रतिशत बच्चे कम वजन के पाए गए थे, लेकिन नेशनल फैमिली हेल्थ-पाँच सर्वे में घटकर केवल 33 प्रतिशत रह गए हैं। अति गंभीर कुपोषित बच्चों की संख्या घटकर 12.6 से 6.5 प्रतिशत रह गई है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने निर्देश दिया कि आशा-ऊषा कार्यकर्ताओं को मिलने वाले इन्सेंटिव के कार्य का सरलीकरण किया जाए। जिला स्तर के साथ ही ब्लॉक स्तर पर इसकी व्यवस्था की जाए, जिससे जिलों में इन बहनों को भटकना न पड़े।

रिमोट द्वारा जबलपुर से 145 कि.मी. दूर सिवनी में ऊर्जीकृत हुआ पॉवर ट्रांसफार्मर

145 km from Jabalpur by remote Power transformer energized in distant Seoni

 

एम.पी. ट्रांसको (मध्य प्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी) ने सिवनी जिले के 132 के.व्ही. सबस्टेशन सिवनी में एक 63 एम.व्ही.ए. क्षमता का नया पावर ट्रांसफार्मर स्थापित किया है। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि जबलपुर से 145 कि.मी. दूर स्थापित इस ट्रांसफार्मर को बिजली कंपनी के मुख्यालय जबलपुर से पावर सेक्टर की एडवांस टेक्नालॉजी के माध्यम से ऊर्जीकृत करने में सफलता हासिल हुई है। लगभग 5 करोड़ रूपये की अनुमानित लागत से स्थापित इस ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने से सिवनी जिले की पारेषण क्षमता सुदृढ़ हुई है।

इस ट्रांसफार्मर के स्थापित होने से सिवनी की 132 के.व्ही. सबस्टेशन की क्षमता बढ़कर 113 एम.व्ही.ए. की हो गई है। इससे सिवनी शहर के अलावा बरघाट, मलारा, केवलारी, कुरई, अरी, कारीरात एवं गोपालगंज ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े विद्युत उपभोक्ताओं के साथ सिवनी शहर में पानी की आपूर्ति करने वाले पी.एच.ई. फीडर को काफी फायदा पहुँचेगा। अब उन्हें उचित वोल्टेज पर गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति होगी।

सिवनी क्षेत्र में पहली बार रिमोट से हुआ ट्रांसफार्मर ऊर्जीकृत

जबलपुर से एच.एम.आई (हयूमन मशीन इंटरफेस) तकनीक का उपयोग करते हुये कम्प्यूटर का माउस क्लिक कर 145 किलोमीटर दूर सिवनी में इस ट्रांसफार्मर को ऊर्जीकृत किया गया। सिवनी जिले में ट्रांसफार्मर ऊर्जीकृत करने के लिए इस तकनीक का उपयोग पहली बार किया गया है। इस तकनीक में मानव और कम्प्यूटर मशीनों के तालमेल से सबस्टेशनों के उपकरणों को नियंत्रित और संचालित किया जाता है।

सिवनी जिले की पारेषण क्षमता में बढोत्तरी

म.प्र. पावर ट्रांसमिशन कंपनी के कार्यपालन अभियंता अरूण कुमार वैद्य ने बताया कि इस ट्रांसफार्मर के ऊर्जीकृत होने से सिवनी जिले की कुल ट्रांसफारमेशन क्षमता बढ़कर 883 एम.व्ही.ए. की हो गई है। इसमें 220 के.व्ही. साइड 520 एम.व्ही.ए. तथा 132 के.व्ही. साइड 363 एम.व्ही.ए. की स्थापित क्षमता शामिल है। मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी सिवनी जिले में अपने 4 सबस्टेशनों के माध्यम से विद्युत पारेषण करती है, जिसमें 220 के.व्ही. के 1 सबस्टेशन तथा 132 के.व्ही. क्षमता के 3 सबस्टेशन क्रियाशील है।

नरेंद्र तोमर और भूपेंद्र यादव पहुंचे भोपाल, कल आएंगे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह

Narendra Tomar and Bhupendra Yadav reached Bhopal, Union Home Minister Amit Shah will come tomorrow

भोपाल। विधानसभा चुनाव का समय नजदीक आने के साथ केंद्रीय नेताओं के भी प्रदेश में दौरे बढ़ गए है। कल यानी रविवार को केंद्रीय गृहमंत्री व भाजपा के वरिष्‍ठ नेता अमित शाह भोपाल आ रहे हैं। इससे पहले आज मध्यप्रदेश भाजपा के चुनाव प्रबंधन समिति संयोजक व केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और पार्टी के मध्यप्रदेश चुनाव प्रभारी भूपेंद्र यादव भोपाल पहुंचे। राजा भोज विमानतल पर विधायक रामेश्वर शर्मा, पार्टी के जिलाध्यक्ष सुमित पचौरी, प्रदेश महामंत्री रणवीर सिंह रावत, पूर्व मंत्री रामपाल सिंह समेत अन्‍य कार्यकर्ताओं ने उनका आत्‍मीय स्‍वागत किया। यहां से तोमर व यादव सीधे पार्टी के प्रदेश मुख्‍यालय के लिए रवाना हो गए। यहां पार्टी नेताओं के साथ उनकी बैठकों का दौर चNarendra Tomar and Bhupendra Yadav reached Bhopal, Union Home Minister Amit Shah will come tomorrow
ल सकता है।

इसके अलावा कल केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भोपाल आएंगे। जुलाई माह में यह उनका तीसरा भोपाल दौरा होगा। पहले वह आज शाम को भोपाल आने वाले थे और कल उनका यहां से इंदौर जाने का कार्यक्रम था, लेकिन अब वह कल सुबह पहले भोपाल आएंगे और इसके बाद इंदौर रवाना होंगे। भोपाल में वह एक प्रेस कांफ्रेंस को भी संबोधित करेंगे।

झारखंड और गुजरात में हाई टेंशन तार से टकराया ताजिया, कुल 6 की मौत

Tajia collided with high tension wire in Jharkhand and Gujarat, total 6 killed

 

मुहर्रम के अवसर पर शनिवार को ताजिया जुलूस निकालते समय झारखंड और गुजरात में दो हादसे हो गए। दोनों राज्यों में ताजिया ऊपर से गुजर रही हाई टेंशन लाइन से टकरा गया और करंट फैल गया। कुल मिलाकर 6 लोगों की मौत हुई है।

झारखंड के बोकारो में ताजिया जुलूस के दौरान बड़ा हादसा हो गया। शनिवार सुबह जब जुलूस निकाला जा रहा था, तब ताजिया हाईटेंशन बिजली तार के सम्पर्क में आ गया, जिससे करंट फैल गया। अब तक 4 लोगों के मारे जाने की सूचना है।

सूचना मिलने पर आला अधिकारी मौके पर पहुंचे। कुछ लोग घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल पहुंचाया गया है। अब तक की जानकारी के मुताबिक, हादसा बोकारो के बेरमो अनुमंडल के पेटरवार थाना क्षेत्र अंतर्गत खेतको में सामने आया है। 10-15 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं जिन्हें बोकारो थर्मल और बोकारो बीजीएच में भर्ती कराया गया है।

घायलों में तीन की हालत अति गंभीर है। घटना के बाद मौके पर अफरातफरी मच गई। अस्पताल में घायलों के स्वजन सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग जुटे हैं।

कुछ ऐसा ही हादसा गुजरात के धोराजी में भी हुआ। हादसा रसूलपुरा इलाके में उस समय हुआ, जब मुहर्रम के अवसर पर ताजिया जुलूस निकाला जा रहा था। कुल 24 लोग करंट की चपेट आई। 2 की मौत हो गई है। घायलों में कुछ की हालत खराब है।

64 वर्ष के हुये संजय दत्त

Sanjay Dutt turns 64

Sanjay Dutt turns 64

बॉलीवुड के जानेमाने अभिनेता संजय दत्त आज 64 वर्ष के हो गये। 29 जुलाई 1959 को मुंबई में जन्में संजय दत्त को अभिनय की कला विरासत में मिली। उनके पिता सुनील दत्त अभिनेता और मां नरगिस जानी-मानी फिल्म अभिनेत्री थी। घर में फिल्मी माहौल रहने के कारण संजय दत्त अक्सर अपनी माता-पिता के साथ शूटिंग देखने जाया करते थे। इस वजह से उनका भी रूझान फिल्मों की ओर हो गया और वह भी अभिनेता बनने के ख्वाब देखने लगे।

संजय दत्त ने बतौर बाल कलाकार अपने सिने करियर की शुरूआत अपने पिता के बैनर तले बनी फिल्म रेशमा और शेरा से की। बतौर अभिनेता उन्होंने अपने करियर की शुरूआत वर्ष 1981 में प्रदर्शित फिल्म रॉकी से की। दमदार निर्देशन पटकथा और गीत-संगीत के कारण फिल्म टिकट खिड़की पर सुपरहिट साबित हुयी। वर्ष 1982 मे संजय दत्त को निर्माता -निर्देशक सुभाष घई की फिल्म विधाता में काम करने का अवसर मिला। यूं तो पूरी फिल्म अभिनेता दिलीप कुमार, संजीव कुमार और शम्मी कपूर जैसे नामचीन अभिनेताओं के इर्द गिर्द घूमती थी लेकिन संजय दत्त ने फिल्म में अपनी छोटी सी भूमिका में दर्शकों का दिल जीत लिया। वर्ष 1982 से 1986 तक का वक्त संजय दत्त के सिने कैरियर के लिये बुरा साबित हुआ। इस दौरान उनकी जानी आइ लव यू, मै आवारा हूं , बेकरार, मेरा फैसला, जमीन आसमान , दो दिलो की दास्तान, मेरा हक और जीवा जैसी कई फिल्में बॉक्स आफिस पर असफल हो गयी। हालांकि, वर्ष 1985 में प्रदर्शित फिल्म जान की बाजी टिकट खिड़की पर औसत कारोबार करने में सफल रही।

संजय दत्त की किस्मत का सितारा वर्ष 1986 में प्रदर्शित फिल्म नाम से चमका। यूं तो यह फिल्म राजेन्द्र कुमार ने अपने पुत्र कुमार गौरव को फिल्म इडस्ट्री में दोबारा स्थापित करने के लिये बनायी थी। लेकिन फिल्म में संजय दत्त की भूमिका को दर्शकों द्वारा ज्यादा पसंद किया गया। फिल्म की सफलता के साथ ही संजय दत्त एक बार फिर से फिल्म इंडस्ट्री में अपनी खोई हुयी पहचान बनाने में कामयाब हो गये। फिल्म नाम की सफलता के बाद संजय दत्त की छवि एंग्री यंग मैन स्टार के रूप में बन गयी । इस फिल्म के बाद निर्माता-निर्देशकों ने अधिकतर फिल्मों में संजय दत्त की इसी छवि को भुनाया।इन फिल्मों में जीते है शान से, खतरो के खिलाड़ी, ताकतवर, हथियार, इलाका, जहरीले, क्रोध और खतरनाक जैसी फिल्में शामिल है । वर्ष 1991 में प्रदर्शित फिल्म सड़क संजय दत्त के सिने करियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में शुमार की जाती है । महेश भटृ के निर्देशन में बनी इस फिल्म में संजय दत्त के अभिनय में एक्शन के साथ ही रोमांस का अनूठा संगम देखने को मिला ।

वर्ष 1991 में ही प्रदर्शित फिल्म साजन संजय दत्त के सिने करियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में शुमार की जाती है । लारेंस डिसूजा के निर्देशन में बनी संगीतमय इस फिल्म में संजय दत्त के अभिनय का नया रूप देखने को मिला । इस फिल्म में निर्देशक ने उनकी मारधाड़ वाली छवि को छोड़ उन्हें एक नये अंदाज में पेश किया । फिल्म में अपने दमदार अभिनय के कारण वह अपने सिने करियर में पहली बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिये नामांकित हुये । वर्ष 1993 में प्रदर्शित फिल्म खलनायक संजय दत्त के सिने करियर की सुपरहिट फिल्मों में शुमार की जाती है । फिल्म में संजय दत्त का यह किरदार पूरी तरह ग्रे शेडस लिये हुये था बावजूद इसके वह दर्शको की सहानुभूति पाने में कामयाब हुये और अपने दमदार अभिनय से फिल्म को सुपरहिट बना दिया। वर्ष 1993 संजय दत्त के व्यक्तिगत जीवन में काला वर्ष साबित हुआ।मुंबई बम विस्फोट में नाम आने की वजह से उन्हें जेल तक जाना पड़ा।वर्ष 1993 से 1999 तक संजय दत्त की कुछ फिल्में प्रदर्शित हुयी जो टिकट खिड़की पर खास कमाल नही दिखा सकी। वर्ष 1999 में प्रदर्शित फिल्म वास्तव संजय दत्त के सिने करियर की महत्वपूर्ण फिल्म साबित हुयी। फिल्म में अपने दमदार अभिनय के लिये संजय दत्त अपने सिने करियर में पहली बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किये गये। वर्ष 1999 में संजय दत्त के सिने करियर की एक और सुपरहिट फिल्म हसीना मान जायेगी प्रदर्शित हुयी। डेविड धवन निर्देशित इस फिल्म में संजय दत्त के अभिनय का नया रंग देखने को मिला।इस फिल्म से पहले उनके बारे में यह धारणा थी कि वह केवल संजीदा या मारधाड़ वाली भूमिकाएं निभाने में ही सक्षम है लेकिन इस फिल्म में उन्होंने गोविन्दा के साथ जोड़ी जमाकर अपने जबरदस्त हास्य अभिनय से दर्शको को मंत्रमुग्ध कर दिया। वर्ष 2003 में प्रदर्शित फिल्म मुन्ना भाई एम.बी बी.एस संजय दत्त के सिने करियर की सर्वाधिक सुपरहिट फिल्मों में शुमार की जाती है। फिल्म में संजय दत्त और अरशद वारसी की जोड़ी ने जबरदस्त धमाल मचाकर सिने प्रेमियों को रोमांचित कर दिया। फिल्म में अपने दमदार अभिनय के लिये संजय दत्त सर्वश्रेष्ठ हास्य कलाकार के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किये गये ।

वर्ष 2006 में फिल्म की सफलता को देखते हुये इसका सीक्वल लगे रहो मुन्ना भाई बनाया गया जिसे टिकट खिड़की पर जबरदस्त सफलता मिली । संजय दत्त के सिने करियर में उनकी जोड़ी अभिनेत्री माधुरी दीक्षित के साथ काफी पसंद की गयी। संजय दत्त ने कई फिल्मों में अपने पार्श्वगायन से भी श्रोताओं को दीवाना बनाया है। संजय ने तीन शादियां की है। संजय दत्त ने रिया पिल्लई, रिचा शर्मा और मान्यता दत्त के साथ शादी की। संजय दत्त ने अपने सिने करियर में अबतक लगभग 200 फिल्मों में अभिनय किया है। संजय दत्त बॉलीवुड के साथ ही दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी अपने अभिनय का जौहर दिखा रहे हैं।

सरसों तेल और मूंगफली तेल में नरमी

softening of mustard oil and groundnut oil

दिल्ली 29 जुलाई| स्थानीय स्तर पर उठाव सुस्त रहने से आज दिल्ली थोक जिंस बाजार में सरसों तेल और मूंगफली तेल में गिरावट को छोड़कर शेष खाद्य तेल समेत सभी जिंसों में टिकाव रहा। तेल-तिलहन : इस दौरान घरेलू बाजार में चुनिंदा खाद्य तेलों में नरमी रही। सरसों तेल 220 रुपये प्रति क्विंटल और मूंगफली तेल 147 रुपये प्रति क्विंटल उतर गया जबकि सूरजमुखी तेल, सोया रिफाइंड, पाम ऑयल और वनस्पति तेल के भाव में कोई बदलाव नहीं हुआ।

पांच उच्च न्यायालयों में 15 स्थायी न्यायाधीश नियुक्त

15 permanent judges appointed in five high courts

दिल्ली, 29 जुलाई| राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पांच उच्च न्यायालयों के 15 अतिरिक्त न्यायाधीशों को पदोन्नत कर स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया है। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग की ओर से शुक्रवार को उनकी नियुक्ति से संबंधित पांच अलग-अलग अधिसूचना जारी की गईं। अधिसूचना के अनुसार, कलकत्ता उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति कृष्णा राव, न्यायमूर्ति बिभास रंजन डे और न्यायमूर्ति अजय कुमार मुखर्जी को पदोन्नत कर स्थाई न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। इसी प्रकार केरल उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति बसंत बालाजी, न्यायमूर्ति सी के जयचंद्रन, न्यायमूर्ति सोफी थॉमस और न्यायमूर्ति पी. वी. जी. पी. अजित कुमार15 permanent judges appointed in five high courts
 को स्थाई न्यायाधीश नियुक्त किया गया। गौहाटी उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति काखेतो सेमा, न्यायमूर्ति देवाशीष बरुआ, न्यायमूर्ति मालाश्री नंदी, न्यायमूर्ति मार्ली वानकुंग और न्यायमूर्ति अरुण देव चौधरी को पदोन्नत कर स्थाई न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। बॉम्बे उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए ए पानसरे और न्यायमूर्ति एस सी मोरे के अलावा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति दीपक कुमार तिवारी को स्थाई न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।

मध्य प्रदेश फिर बना टाइगर स्टेट, देश में सबसे ज्यादा 785 बाघ हैं यहां

Madhya Pradesh again became Tiger State, it has maximum 785 tigers in the country

 

देश में सबसे ज्यादा बाघों के साथ टाइगर स्टेट कहे जाने वाले मध्य प्रदेश में अपना यह दर्जा कायम रखते हुए बहुत आगे निकल गया है। आज जारी आंकड़ों के अनुसार देश में सबसे ज्यादा 785 बाघ मध्य प्रदेश में हैं। इसके बाद 563 बाघों के साथ कर्नाटक दूसरे और 560 बाघों के साथ उत्तराखंड तीसरे नंबर पर है।

टाइगर डे पर शनिवार को देशव्यापी बाघ गणना के आंकड़े जारी हो गए, जिसमें 165 बाघों के साथ बांधवगढ़ मध्य प्रदेश में अव्वल है। हाल में जारी रिपोर्ट में अभी प्रदेश में बाघो की संख्या का जिक्र है। बांधवगढ़ ग्रोथ रेट के मामले में अव्वल रहा है। वर्ष 2018 की गणना में भी बांधवगढ़ बाघों की ग्रोथ रेट में मध्य प्रदेश में अव्व

Madhya Pradesh again became Tiger State, it has maximum 785 tigers in the country

ल रहा था।

‘टाइगर स्टेट’ होने पर गर्व : शिवराज ‘टाइगर स्टेट’ होने पर गर्व- CM शिवराज सिंह

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने आज विश्व बाघ दिवस

की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रदेश के ‘टाइगर स्टेट’ होने पर हमें गर्व है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने अपने ट्वीट में कहा कि मध्यप्रदेश के ‘टाइगर स्टेट’ होने पर हमें गर्व है। बाघों के संरक्षण को बढ़ावा देने के साथ ही उनके प्राकृतिक आवासों की रक्षा के लिये हम और श्रेष्ठतम कार्य करें, ताकि टाइगर स्टेट का गौरव आगे भी हमारे पास रहे।

ग्रोथ रेट में अव्वल रहने की चार वजह

बांधवगढ़ की सभी 139 बीट में बाघों की मौजूदगी के निशान पाए गए हैं।
बांधवगढ़ में पिछले 1 साल में 21 सौ से ज्यादा कैटल किल की घटनाएं हुई हैं।
बांधवगढ़ में बाघों के द्वारा मनुष्य पर हमले की घटनाएं भी लगातार बढ़ी है।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हर वर्ष 40 से 50 नए शावक देखे गए हैं।

बांधवगढ़ और आसपास का जंगल

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अंदर ही एक सौ पचास से ज्यादा बाघ होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। बांधवगढ़ की सभी बीट में बाघ होने के संकेत मिले थे। एक ही क्षेत्र में सात से आठ बाघ घूमते हुए देखे जा रहे हैं। जबकि बांधवगढ़ से लगे हुए जंगलों में बीस से ज्यादा बाघ होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। यह बाघ भी बांधवगढ़ के जंगल में आते-जाते रहते हैं। इस तरह अकेले बांधवगढ़ और इससे लगे जंगल में ही पिछले चार साल में लगभग पचास बाघों के बढ़ने की संभावना बनी हुई है।

सर्किल में बढ़े बाघ

सिर्फ बांधवगढ़ ही नहीं पूरा सर्किल में बाघों की भरमार है। शहडोल सर्किल में घुनघुटी, ब्यौहारी, जयसिंहनगर, अनूपपुर का जंगल शामिल है। इस पूरे क्षेत्र में बाघ दिखाई देते हैं। इस तरह कहा जा सकता है कि बाघों का संसार टाइगर रिजर्व की सीमाओं के बाहर भी बढ़ रहा है। टाइगर रिजर्व में तो बाघों के संरक्षण के लिए करोड़ो रूपए खर्च किए जाते हैं लेकिन रेग्युलर फारेस्ट में बिना ऐसे किसी बजट के बाघों की मौजूदगी ने मध्य प्रदेश को एक बार फिर बाघों से उन्नत प्रदेश बनने की संभावना से भर दिया है। यह जानकारी स्टेट फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट जबलपुर के उस रिसर्च में भी सामने आई थी जो प्रदेश में हुई चार वर्षीय गणना के विभिन्न स्तर को लेकर किया गया था।

यहां हुआ विस्तार

शहडोल जिले के घुनघुटी के जंगल में पहले भी बाघ दिखाई देते थे और इस बार भी यहां बाघ होने के चिन्ह पाए गए हैं।
सीधी, ब्यौहारी, अमरकंटक, डिडौंरी सहित कई अन्य जंगलाें में भी बाघ दिखाई दिए हैं।
रिसर्च के अनुसार इस बार की गणना में सतना जिले के जंगल में टाइगर दिखाई दिए और अनुमान है कि यहां 6 से 8 टाइगर हैं।

वर्ष 2018 में 741 बाघ बढ़े थे इस बार 200

चार वर्षीय बाघ आंकलन की 9 अप्रैल को जारी हुई रिपोर्ट ने वन्य प्राणी प्रमियों को चौंका दिया था। नो अप्रैल को जारी हुई रिपोर्ट के अनुसार देश में बाघों की ग्रोथ रेट बुरी तरह से डाउन हुई है। वर्ष 2022 में हुए स्टीमेशन की रिपोर्ट के अनुसार देश में इस बार महज दो सौ बाघ बढ़े हैं। जबकि वर्ष 2018 के स्टीमेशन में पूरे देश में 741 बाघ बढ़ गए थे। यह चिंतन का विषय है कि आखिर देश में बाघों की ग्राथ रेट किन वजहों से इतनी ज्यादा गिर गई है। हालांकि वन्य प्राणियों के क्षेत्र में काम करने वालों का मानना है कि 29 जुलाई को कुछ बदलाव के साथ रिपोर्ट जारी की जाएगी जिसमें बाघों की संख्या बढ़ सकती है।

इस तरह बढ़े बाघ

वर्ष 2006 में देश में महज 1411 बाघ थे। वर्ष 2010 में 295 बाघ बढ़ गए और बाघों की संख्या 1706 हो गई। वर्ष 2014 के स्टीमेशन की रिपोर्ट जारी हुई तो वह पहले से ज्यादा खुशियां लेकर आई क्योंकि इस साल देश मे 520 बाघ बढ़े थे और देश में बाघों की संख्या 2226 हो गई थी। इससे ज्यादा खुशियां वर्ष 2018 की गणना में तब आई जब देश में 741 बाघ बढ़े और बाघों की संख्या 2967 हो गई। वर्ष 2022 में हुए स्टीमेशन के बाद जो रिपोर्ट आई है उसमें महज दो सौ बाघ ही बढ़े हैं जो पिछले कई सालों की बढ़त से काफी कम है।

वर्ष 2010 में बाघों की ग्रोथ रेट 20.90 प्रतिशत थी। वर्ष 2014 में ग्रोथ रेट 30.58 प्रतिशत हो गई। वर्ष 2018 में ग्रोथ रेट 32.38 प्रतिशत हो गई। जबकि वर्ष 2022 के बाघ स्टीमेशन की रिपोर्ट के अनुसार ग्रोथ रेट महज 27.73 प्रतिशत ही है। यह ग्रोथ रेट पिछले स्टीमेशन यानी वर्ष 2018 के मुकाबले में 4.65 प्रतिशत कम है। इसकी वजह अब वे अफसर बताएंगे जो प्रोजेक्ट टाइगर के नाम पर आने वाले करोड़ों रुपयों को जंगल में खर्च करते हैं।

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