भोपाल, 02 जुलाई/ भोपाल से दुर्ग के बीच चलने वाली गाड़ी संख्या 12854 अमरकंटक एक्सप्रेस ट्रेन छह घंटे री शेड्यूल होकर भोपाल स्टेशन से प्रस्थान करेगी। भोपाल मंडल की ओर से मुहैया करायी गयी जानकारी के अनुसार दुर्ग से चलकर भोपाल स्टेशन आने वाली गाड़ी संख्या 12853 दुर्ग-भोपाल अमरकंटक एक्सप्रेस विलंबित होने के कारण आज गाड़ी संख्या 12854 भोपाल-दुर्ग अमरकंटक एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय 16 बजे से 06 घंटे री-शेड्यूल होकर भोपाल स्टेशन से 22 बजे गन्तव्य के लिए प्रस्थान करेगी।
भारत में मशहूर हैं ये 5 तरह की बिरयानी, एक बार जरूर चखें इनका स्वाद
शायद ही कोई ऐसा हो जिसे बिरयानी न पसंद हो। भारत में कई सारे पकवान मिलते हैं जो देश ही नहीं विदेश में भी काफी पसंद किए जाते हैं। बिरयानी इन्हीं पकवानों में से एक है। इसके अनोखे स्वाद और लोकप्रियता को देखते हुए हर साल जुलाई के पहले रविवार को विश्व बिरयानी दिवस के रूप में मनाया जाता है।
भारत अपने खानपान और विशेष स्वाद के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। यहां कई तरह व्यंजन मशहूर हैं। बिरयानी इन्हीं मशहूर व्यंजन में से एक है। यह एक ऐसा पकवान है, जो हर किसी को पसंद होता है। बिरयानी सिर्फ एक व्यंजन नहीं है, बल्कि दुनिया भर में लाखों लोगों द्वारा साझा की जाने वाली एक भावना है।
बिरयानी के इसी महत्व को देखते हुए हर साल जुलाई के पहले रविवार को विश्व बिरयानी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस खास मौके आज हम आपको बताएंगे भारत में मिलने वाली 5 बिरयानी के बारे में, जो अपने स्वाद के लिए पूरी दुनिया में मशहूर हैं
हैदराबादी बिरयानी
हैदराबादी बिरयानी भारत की सबसे प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित बिरयानी में से एक है। यह अपने बेहतरीन स्वाद, लंबे दाने वाले बासमती चावल और मसालों के उत्तम मिश्रण के लिए जानी जाती है। यह पारंपरिक रूप से चिकन या मटन के साथ तैयार की जाती है और अक्सर इसे तले हुए प्याज और उबले अंडे से सजाया जाता है।
लखनवी बिरयानी
अवधी बिरयानी के नाम से भी जानी जाने वाली, लखनवी बिरयानी की उत्पत्ति उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर में हुई थी। यह अपने लाजवाब स्वाद के लिए जानी जाती है, जो इसे धीमी आंच पर पकाने और केसर-गुलाब जल जैसे सुगंधित मसालों के उपयोग के जरिए प्राप्त किया जाता है। लखनवी बिरयानी आमतौर पर बासमती चावल और चिकन या मटन के साथ बनाई जाती है।
कोलकाता बिरयानी
कोलकाता बिरयानी का एक अलग स्वाद है, अवधी और मुगलई दोनों व्यंजनों से प्रभावित है। यह सुगंधित बासमती चावल, मांस (आमतौर पर चिकन या मटन) और मसालों के मिश्रण से तैयार किया जाता है। कोलकाता बिरयानी को जो चीज अलग बनाती है, वह है आलू, दालचीनी और जायफल जैसे सुगंधित मसालों का उपयोग।
मालाबार बिरयानी
मालाबार बिरयानी केरल के मालाबार क्षेत्र की खासियत है। यह अपने अनूठे स्वाद के लिए जानी जाती है, जो मसालों, नारियल और छोटे दाने वाले जीरकासाला चावल के उपयोग से बनाई जाती है। मालाबार बिरयानी आमतौर पर चिकन, मटन या मछली के साथ तैयार की जाती है और इसे अक्सर रायता या अचार सर्व किया जाता है।
सिंधी बिरयानी
सिंधी बिरयानी सिंध क्षेत्र (अब पाकिस्तान का हिस्सा है) के सिंधी व्यंजनों से बना एक खास वेरिएंट है। यह एक स्वादिष्ट और मसालेदार बिरयानी है, जिसमें सुगंधित मसाले, बासमती चावल और मांस (आमतौर पर मटन या चिकन) को मिलाया जाता है। सिंधी बिरयानी में जो बात अलग है, वह है इसमें आलू मिलाना और अनोखे स्वाद के लिए सूखे आलूबुखारे और तले हुए प्याज का इस्तेमाल करना।
राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी रहे ऋतेश
लंदन, 02 जुलाई/ इंग्लैंड में आयोजित राष्ट्रमंडल भारोत्तोलन चैंपियनशिप में भारत के ऋतेश डोगरा को सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित किया गया। द्रोणाचार्य भूपेन्द्र धवन के नेतृत्व में प्रशिक्षण हासिल करने वाले भारतीय खिलाड़ियों ने इस प्रतियोगिता में आठ स्वर्ण सहित 12 पदक हासिल किये। ऋतेश ने 90 किग्रा भार वर्ग की रॉ डेडलिफ्ट में 300 किग्रा भार उठाकर अपना नया रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने कुल 767.5 किग्रा लिफ्ट करते हुए तीन स्वर्ण पदक जीते।
वर्षा शुरू होते ही बढ़ा डेंगू, मलेरिया का खतरा
बारिश के दिनों में गली-मोहल्ले में जगह-जगह पानी जमा हो जाता है। जिसके कारण मच्छरों की संख्या बढ़ने लगती है। मच्छरों के काटने से इन दिनों सबसे ज्यादा डेंगू और मलेरिया होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में हमें ध्यान देना चाहिए कि हम मच्छरों से कैसे बच सकें।
अपने घरों के आसपास पानी एकत्रित नहीं होने दें। यदि हमारे घर या घर के आसपास सात दिनों से अधिक समय तक पानी जमा हो रहा है तो उसे साफ कर दें या फिर ढंक कर रखें। क्योंकि यहीं से मच्छर पनपते हैं। वहीं रात में सोते समय मच्छरदानी का उपयोग रोजाना करना चाहिए। पूरी बाह के कपड़े पहनना चाहिए। घर में और आसपास नीम के पत्ते का धुआं करें।
मच्छरों से बचाव वाली क्रीम लगाई जा सकती है। लोगों को मलेरिया और डेंगू के लक्षण भी पहचानने चाहिए। मलेरिया के लक्षण तेज बुखार आना, दो दिन में बुखार रिपीट होना आदि हैं। वहीं डेंगू में तेज बुखार के साथ जोड़ों में तेज दर्द होता है। यदि ऐसे कोई भी लक्षण पाए जाते हैं तो हमें इसकी जांच करवानी चाहिए। ताकि समय पर बीमारी का पता चल सके और उसका बेहतर इलाज भी मिल सके। इन बीमारियों के लिए सरकार द्वारा जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। जिसमें भी इनसे बचाव के उपाय बताए जाते हैं।
श्रीलंकाई नौसेना ने केंदू पत्तों की तस्करी के आरोप में संदिग्ध को गिरफ्तार किया
कोलंबो, 02 जुलाई/ श्रीलंकाई नौसेना ने रविवार को कहा कि उसने रविवार सुबह देश के पश्चिमी तट पर 1,947 किलोग्राम केंदू पत्तों के साथ एक संदिग्ध तस्कर को गिरफ्तार किया। नौसेना ने कहा कि नौसेना के पोत एसएलएनएस विजया के कर्मचारियों ने पुट्टलम में कराटिव समुद्री तट पर चलाए गए एक विशेष अभियान में संदिग्ध तस्कर की गिरफ्तारी की है।
इंदौर में हादसा, सेल्फी लेने के चक्कर में छात्र 800 फीट गहरी खाई में गिरा
इंदौर,2 जुलाई/ इंदौर के ग्रामीण क्षेत्र में एक हादसा हो गया। दोस्तों के साथ घूमने गया एक छात्र गहरी खाई में गिर गया। पुलिस, ग्रामीण और एनडीआरएफ की टीम ने रविवार सुबह शव को निकाल लिया। हादसा सेल्फी लेने के दौरान हुआ है।
एसआइ सत्येंद्र सिसोदिया के मुताबिक इलियास कालोनी (खजराना) निवासी मोइन उर्फ अनस पुत्र इकबाल खान दोस्तों के साथ मुहाड़ी फाल में घुमने गया था। सेल्फी लेने के दौरान अनस और उसका दोस्त इरफान झाड़ियों में गिर गए। इरफान तो झाड़ियों में उलझ गया और साथियों की मदद से बाहर आ गया। अनस ढुलकते हुए गहरी खाई में जा गिरा। रात को अंधेरा होने के कारण सर्चिंग रोकना पड़ी। सुबह से टीम सर्चिंग में जुटी और करीब 12 बजे अनस का शव ऊपर लाया गया।
प्रधानमंत्री को बहुत पसंद आया शहडोल के महुआ का मालपुआ
प्रधानमंत्री को बहुत पसंद आया शहडोल के महुआ का मालपुआ
शहडोल/ प्रधानमंत्री का एक जुलाई को शहडोल में दौरा हुआ। इस दौरान वे पकरिया गांव में आदिवासियों के बीच काफी देर तक रुके और वही देशी भोजन किया जिसे वर्षो से आदिवासी समाज के लोग खाते आ रहे हैं। आजीविका मिशन के स्वसहायता समूह की दीदियों के द्वारा प्रधानमंत्री के लिए भोजन तैयार किया गया था, जिसमें महुआ का मालपुआ भी बनाया गया था। प्रधानमंत्री को महुआ का मालपुआ बहुत पंसद आया।
आज मैने दो रोटी अधिक खाया
प्रधानमंत्री ने इस बारे में रेखा दीदी से बात करते हुए कहा कि महुआ मालपुआ बहुत अच्छा है। दो पीस मालपुआ खाने के बाद उन्होंने इसकी खूब प्रशंसा की। इसके साथ उन्हें पूरा भोजन पंसद आया और प्रसन्नता के साथ भोजन करने बाद उन्होंने दीदियों से कहा कि भोजन बहुत अच्छा बना था,आज मैने दो रोटी अधिक खाया है।
प्रधानमंत्री ने शरबत भी पी और तारीफ की
दीदी से शरबत के बारे में पूछा कि ये कौन-कौन से शरबत है और कैसे बनाया है। इसके बाद शरबत भी पिया। थोड़ा-थोड़ा सभी देशी व्यंजनों का स्वाद लेने के बाद महुआ मालपुआ खाने के बाद उनका मन प्रसन्न हो गया, जिसकी उन्होंने खुलकर तारीफ की और कहा फिर कभी मौका मिलेगा तो खाएंगे।
इन देसी व्यंजनों को प्रधानमंत्री ने चखा
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री ने पकरिया में बाजरे का सूप, बेल शरबत,आम का पना, रोजलेटा पत्ती का ड्रिंक, सलाद पापड़ और जामुन का स्वाद चखा। चावल,ज्वार की रोजी,उड़द की दाल,भुंजी तुअरदाल, कोदो की खीर, इंद्रहर की कड़ी, चाैराई भाजी, लाल भाजी,अमरुद की चटनी, हल्दी का आचार, कुटकी की खीर, महुआ का मालपुआ तैयार किया गया था। इन सभी का स्वाद प्रधानमंत्री ने चखा और दीदीयों की जमकर तारीफ किया।आजीविका मिशन के प्रबंधक वविष्णुकांत विश्वकर्मा ने बताया की दीदीयों ने अपने हाथ से भोजन बनकर प्रधानमंत्री को खिलाया है और कहा कि हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि प्रधानमंत्री को शहडोल के देशी व्यजन खूब प्रसंद आए।
राष्ट्रपति ने मानसून सत्र के लिए 20 जुलाई से राज्यसभा की बैठक बुलाई
दिल्ली, 02 जुलाई/ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के मानसून सत्र के लिए 20 जुलाई से राज्य सभा की बैठक बुलाई है। राज्यसभा सचिवालय ने रविवार को जारी वक्तव्य में कहा कि राष्ट्रपति ने आगामी मानसून सत्र के लिए राज्यसभा की बैठक 20 जुलाई से आहूत की है। वक्तव्य में कहा है गया है कि निर्धारित विधायी कामकाज को देखते हुए मानसून सत्र 11 अगस्त को संपन्न होगा। सत्र के दौरान कुल 17 बैठकें होंगी। उल्लेखनीय है कि संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शनिवार को कहा था कि मानसून सत्र 20 जुलाई को शुरू होकर 11 अगस्त तक चलेगा।
17 बैठकें होंगी, 23 दिनों तक चलेगा सत्र
23 दिनों तक चलने वाले इस सत्र में कुल 17 बैठकें होंगी। बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 मई को नए संसद भवन का उद्घाटन किया था। उम्मीद है कि सरकार के पास सत्र के लिए महत्वपूर्ण विधायी एजेंडा होगा। विपक्षी दल भी कई मुद्दों पर सरकार को घेरने के लिए कमर कस रही हैं।
जेएनयू में 72 हूरें की विशेष स्क्रीनिंग
दिल्ली 02 जुलाई/ टीजर लांच से ही विवादों के बीच रही फिल्म 72 हूरें की विशेष स्क्रीनिंग यहां जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय (जेएनयू) में चार जुलाई को जायेगी। फिल्म के निर्माता ने रविवार को इसकी घोषणा की।
फिल्म 72 हूरें का ट्रेलर सामने आने के बाद से यह फिल्म विवादों में घिर गई है। अब मेकर्स ने एलान किया है कि वह अपनी इस फिल्म एक विशेष स्क्रीनिंग जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में करने वाले हैं। विवादों से घिरी इस फिल्म की 4 जुलाई को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्याल (JNU) परिसर में स्पेशल स्कीनिंग की जाएगी।
संजय पूरन सिंह चौहान के निर्देशन में बनी इस फिल्म का निर्माण गुलाब सिंह तंबर, किरण डागर, अनिरुद्ध तंवर ने किया है, जबकि अशोक पंड़ित ने इस फिल्म को प्रोड्यूस किया है। यह फिल्म 7 जुलाई, 2023 को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
इन फिल्मों की हो चुकी है JNU में स्पेशल स्क्रीनिंग
बता दें कि 72 हूरें फिल्म से पहले जेएनयू में द केरल स्टोरी, छपाक, बीबीसी की विवादित डॉक्यूमेंट्री की स्पेशल स्क्रीनिंग हो चुकी है। जिनको लेकर काफी बवाल हुआ था।
19 साल बाद सावन में महाकाल की 10 पालकी का संयोग
इस बार सावन का माह 4 जुलाई से प्रारंभ होकर 31 अगस्त तक चलेगा। यानी पूरे 59 दिन का एक माह होगा। हिन्दू पंचांग अनुसार आषाढ़ माह के बाद श्रावण का मास प्रारंभ होता है। इस माह में शिव पूजा और सावन के सोमवार के व्रत रखने का महत्व है। ज्योतिषचार्य डॉ पं गणेश शर्मा ने बताया अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 3 जुलाई को आषाढ़ी पूर्णिमा रहेगी। इसके बाद सावन का महीना प्रारंभ हो जाएगा। यानी 4 जुलाई से सावन मास प्रारंभ होगा।
इस बार श्रावण का माह 2 माह तक इसलिए रहेगा क्योंकि इस बार सावन माह में अधिकमास भी रहेगा। 18 जुलाई से अधिकमास प्रारंभ होगा जो 16 अगस्त को समाप्त होगा। अधिकमास के भी दिन जुड़ जाने के कारण इस बार श्रावण मास 59 दिन होगा जिसमें 8 सोमवार रहेंगे।
चूंकि कोई सा भी माह कृष्ण पक्ष 1 से प्रारंभ होकर शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पर समाप्त होता है ऐसे में अधिक मास के दिन जुड़ जाने से श्रावण मास कृष्ण पक्ष के बाद शुक्ल पक्ष आए और पुन: कृष्ण पक्ष प्रारंभ होकर यह पुन: शुक्ल पक्ष प्रारंभ होकर पूर्णिमा पर समाप्त होगा। 19 साल बाद ऐसा योग बना है कि सावन माह में महाकाल बाबा की 10 बार पालकी निकलेंगी। इस विशेष संयोग में शिव पूजा का महत्व बढ़ जाएगा और साथ ही उनका भरपूर आशीर्वाद भी प्राप्त होगा।














