health-अंग प्रत्यारोपण यानी ऑर्गन ट्रांसप्लांट (Organ Transplant) कई मरीजों के लिए जीवन बचाने का आखिरी विकल्प होता है। लेकिन भारत (India) में ज़रूरतमंद मरीजों के लिए नया अंग मिलना आज भी मुश्किल है। द लैंसेट के रीजनल हेल्थ-साउथईस्ट एशिया में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार अंग प्रत्यारोपण की संख्या के मामले में दुनिया में तीसरे स्थान पर होने के बावजूद 2021 में भारत में किडनी, लिवर, हार्ट और फेफड़ों के प्रत्यारोपण की कुल अनुमानित ज़रूरत का सिर्फ करीब 3.5% ही पूरा हो सका। इनमें हार्ट ट्रांसप्लांट की स्थिति सबसे खराब रही, जहाँ ज़रूरत का सिर्फ 0.2% ही पूरा हुआ।
अंग प्रत्यारोपण की मांग और उपलब्धता (2021)
2021 के आंकड़ों पर गौर किया जाए, तो किडनी की अनुमानित वार्षिक आवश्यकता 1,26,172 थी। हालांकि इसमें से 9,040 ही ट्रांसप्लांट हुई। यानी पूरी हुई ज़रूरत सिर्फ 7.2% रही। लिवर की अनुमानित वार्षिक आवश्यकता 1,85,197 थी। हालांकि इसमें से 2,777 ही ट्रांसप्लांट हुए। यानी पूरी हुई ज़रूरत सिर्फ 1.5% रही। हार्ट की अनुमानित वार्षिक आवश्यकता 84,347 थी। हालांकि इसमें से 188 ही ट्रांसप्लांट हुए। यानी पूरी हुई ज़रूरत सिर्फ 0.2% रही। फेफड़े की अनुमानित वार्षिक आवश्यकता 10,911 थी। हालांकि इसमें से 133 ही ट्रांसप्लांट हुए। यानी पूरी हुई ज़रूरत सिर्फ 1.2% रही।
किन जगहों पर हुए सबसे ज़्यादा ट्रांसप्लांट?
तमिलनाडु, दिल्ली-एनसीआर, केरल, महाराष्ट्र और तेलंगाना में देश की लगभग 29% आबादी निवास करती है। हालांकि ट्रांसप्लांट की दर पर गौर किया जाए, तो यह 80% से 96% है। हार्ट, लिवर और फेफड़ों के 85% से ज़्यादा ट्रांसप्लांट इन्हीं पांच राज्यों में हुए थे। किडनी प्रत्यारोपण के मामले में केरल सबसे आगे रहा।
अंग प्रत्यारोपण की मांग (2040)
2040 के आंकड़ों पर गौर किया जाए, तो किडनी की ज़रूरत बढ़कर 1,43,722 तक होने की संभावना है। लिवर की ज़रूरत बढ़कर 2,10,649 तक हो सकती है। हार्ट की ज़रूरत बढ़कर 95,711 तक पहुंच सकती है। फेफड़े की ज़रूरत बढ़कर 12,780 तक हो सकती है।
बच सकती है जान
सही समय पर सही अंग मिल जाने पर कई मरीजों की जान भी बच सकती है। हालांकि इसके लिए व्यवस्था में सुधार के साथ-साथ जागरूकता फैलाना भी ज़रूरी है, जिससे लोग मृत्यु से पहले अपने अंग दान कर सके।

























