तालाब की जमीन पर सड़क और प्लॉटिंग! NGT सर्वे में सामने आया केरवा-कलियासोत का चौंकाने वाला खुलासा

भोपाल। केरवा-कलियासोत क्षेत्र में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) द्वारा गठित विशेष टीम की ग्राउंड ट्रुथिंग के दौरान तालाब की सीमाओं, FTL और कथित अतिक्रमण को लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। सर्वे के दौरान तालाब के जलभराव क्षेत्र के भीतर सड़क निर्माण और प्लॉटिंग के लिए मुनारें लगाए जाने के आरोपों की भी जांच की गई।

विशेष टीम ने बुधवार सुबह करीब 11 बजे वाल्मी के सामने स्थित मोटल शिराज की संपत्ति से ग्राउंड ट्रुथिंग की शुरुआत की। टीम ने निचले क्षेत्र में मौजूद मुनारों की स्थिति, पानी के वास्तविक स्तर और FTL से उनके संबंध का मौके पर निरीक्षण किया। इसके बाद राजेश वाधवानी की संपत्ति के आसपास भी मुनारों और FTL की स्थिति देखी गई।

FTL से महज 10 फीट दूर मिला पक्का निर्माण

सर्वे के दौरान एक फिश फार्म क्षेत्र में FTL से करीब 10 फीट की दूरी पर पक्का निर्माण पाया गया। इसके समीप डेयरी का संचालन भी होता मिला। स्थानीय स्तर पर इस संपत्ति को एक पूर्व DGP से संबंधित बताया गया है। हालांकि, संपत्ति के स्वामित्व और निर्माण की वैधता को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगी।

खुदागंज में पानी FTL सीमा तक पहुंचा

इसके बाद टीम वार्ड क्रमांक 26 स्थित ग्राम खुदागंज पहुंची। यहां कई स्थानों पर पानी का स्तर FTL सीमा तक पहुंचा हुआ दिखाई दिया। टीम को पानी की सीमा से सटे कई रेस्टोरेंट और अन्य निर्माण भी मिले।

जल संसाधन विभाग (WRD) के अधिकारियों ने मौके पर FTL सीमा दर्शाने वाले पत्थरों की स्थिति और लोकेशन की जांच की। इसका उद्देश्य वास्तविक FTL सीमा को मौके पर स्पष्ट रूप से चिन्हित करना था।

तालाब के अंदर सड़क और प्लॉटिंग पर सवाल

ग्राउंड ट्रुथिंग के दौरान कलियासोत तालाब क्षेत्र में सड़क निर्माण और प्लॉटिंग को लेकर गंभीर सवाल सामने आए। आरोप है कि तालाब के जलभराव क्षेत्र के भीतर से सड़क बनाई गई है। इसके अलावा कई बड़े रेस्टोरेंट और व्यावसायिक निर्माण तालाब की सीमा के भीतर या उसके बेहद करीब होने की बात सामने आई।

कुछ स्थानों पर प्लॉटिंग के लिए मुनारें लगाए जाने और इनके कारण पानी के प्राकृतिक बहाव तथा जलभराव के रास्ते प्रभावित होने के आरोपों की भी जांच की गई।

केरवा डैम में फिलहाल नहीं हो सका ग्राउंड ट्रुथिंग सर्वे

इसके बाद विशेष टीम केरवा डैम क्षेत्र पहुंची। अधिकारियों ने टीम को बताया कि वर्तमान में केरवा डैम के FTL स्तर पर पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मौके पर FTL की वास्तविक स्थिति का ग्राउंड ट्रुथिंग सर्वे करना फिलहाल संभव नहीं है।

इस मुद्दे पर समिति के सदस्यों और अधिकारियों के बीच चर्चा हुई। विचार-विमर्श के बाद सहमति बनी कि केरवा की वास्तविक स्थिति स्पष्ट किए बिना जल्दबाजी में आगे की कार्रवाई नहीं की जाएगी।

15 सितंबर को NGT के सामने रखी जाएगी रिपोर्ट

केरवा की FTL और डैम से जुड़े तकनीकी एवं व्यावहारिक पहलुओं की रिपोर्ट आगामी 15 सितंबर को NGT के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। इसके बाद NGT के निर्देशों के आधार पर केरवा क्षेत्र में आगे की ग्राउंड ट्रुथिंग और जांच की प्रक्रिया तय की जाएगी।

याचिकाकर्ता ने कही वैज्ञानिक जांच की बात

याचिकाकर्ता राशिद नूर खान ने कहा कि पूरे मामले का समाधान न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल कागजों पर सीमा तय करने के बजाय मौके पर मौजूद पुरानी मुनारों, जलस्तर, FTL और प्राकृतिक जल प्रवाह की स्थिति को वैज्ञानिक एवं कानूनी आधार पर रिकॉर्ड किया जाना जरूरी है, ताकि आगे की कार्रवाई निष्पक्ष तरीके से हो सके।

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