PM Modi Birthday Special :: नया भारत, डिजिटल बदलाव और विकसित भारत @2047 का लक्ष्य

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रोशन नेमा, सम्पादक 

17 सितंबर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन की तारीख है। 1950 में गुजरात के वडनगर में जन्मे नरेंद्र मोदी की सार्वजनिक यात्रा स्थानीय संगठनात्मक कार्य से शुरू होकर गुजरात के मुख्यमंत्री और फिर भारत के प्रधानमंत्री तक पहुंची।

मोदी के राजनीतिक दौर को केवल चुनावी राजनीति के संदर्भ में देखना इस कहानी को छोटा कर देगा। पिछले वर्षों में
डिजिटल शासन, वित्तीय समावेशन, बुनियादी ढांचा, सामाजिक कल्याण, विनिर्माण, आत्मनिर्भरता और विदेश नीति
को जिस तरह राष्ट्रीय नीति के केंद्र में रखा गया, उसने भारत की विकास यात्रा को एक अलग दिशा दी।


‘नया भारत’ और ‘विकसित भारत @2047’

दोनों अवधारणाएं भारत की वर्तमान आकांक्षाओं और दीर्घकालीन राष्ट्रीय लक्ष्य को समझने की महत्वपूर्ण कुंजी हैं।

वडनगर से प्रधानमंत्री कार्यालय तक

नरेंद्र मोदी की राजनीतिक पहचान अचानक नहीं बनी। गुजरात में लंबे संगठनात्मक और प्रशासनिक अनुभव के बाद 2001 में वे राज्य के मुख्यमंत्री बने और लगभग 13 वर्षों तक गुजरात की राजनीति और प्रशासन का नेतृत्व किया।

2014 में राष्ट्रीय राजनीति में उनका प्रवेश प्रधानमंत्री पद तक पहुंचा। इसके बाद शासन में डिजिटल तकनीक, बुनियादी ढांचा, वित्तीय समावेशन और प्रत्यक्ष लाभ पहुंच जैसे विषय प्रमुख बने।

नया भारत और डिजिटल बदलाव

भारत के आर्थिक और प्रशासनिक बदलाव की सबसे महत्वपूर्ण कहानियों में से एक डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना की है।

जनधन, आधार, मोबाइल और UPI ने वित्तीय समावेशन तथा डिजिटल भुगतान की व्यवस्था को बड़े पैमाने पर विस्तार दिया।

डिजिटल भारत की नई पहचान

UPI की सफलता ने भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बनाया है। यह केवल भुगतान तकनीक नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर नागरिक उपयोग के लिए तैयार किए गए डिजिटल मॉडल का उदाहरण है।

‘विकसित भारत @2047’: लक्ष्य बड़ा, चुनौती उससे भी बड़ी

भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने पर 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की परिकल्पना को
Viksit Bharat @2047
के रूप में सामने रखा गया है।

इस विजन में आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक विकास, पर्यावरणीय स्थिरता और सुशासन को भी महत्वपूर्ण माना गया है।

‘नया भारत’
‘विकसित भारत @2047’

वर्तमान की आकांक्षा से भविष्य के राष्ट्रीय लक्ष्य तक की यात्रा

अर्थव्यवस्था की अगली चुनौती

भारत को आने वाले दशकों में करोड़ों युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण रोजगार पैदा करना होगा। प्रति व्यक्ति आय बढ़ानी होगी। कृषि की उत्पादकता सुधारनी होगी। MSME क्षेत्र को मजबूत करना होगा और विनिर्माण तथा उच्च तकनीक वाले उद्योगों में भारत की हिस्सेदारी बढ़ानी होगी।

इसलिए आर्थिक विकास की अगली कसौटी केवल GDP नहीं होगी।
रोजगार, उत्पादकता, प्रति व्यक्ति आय, कौशल और अवसरों का विस्तार
अधिक महत्वपूर्ण होंगे।

विश्व मंच पर भारत

मोदी सरकार के वर्षों में भारत की विदेश नीति अधिक सक्रिय और बहुआयामी दिखाई दी है। G20 की अध्यक्षता, Global South के साथ संवाद, अमेरिका और यूरोप के साथ रणनीतिक संबंध तथा इंडो पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती भागीदारी ने भारत की वैश्विक भूमिका को व्यापक बनाया है।

भारत की वैश्विक पहचान केवल आर्थिक आकार से नहीं बनेगी। इसके लिए
तकनीकी क्षमता, मानव पूंजी, रक्षा क्षमता, आर्थिक शक्ति और कूटनीतिक विश्वसनीयता
का मजबूत होना आवश्यक है।

युवा शक्ति और 2047

भारत की युवा आबादी उसकी सबसे बड़ी संभावित ताकतों में है। लेकिन युवा आबादी तभी आर्थिक शक्ति बनती है जब उसे शिक्षा, कौशल और रोजगार के अवसर मिलें।

Artificial Intelligence, semiconductor, robotics, biotechnology, space technology, renewable energy और advanced manufacturing जैसी तकनीकें आने वाले वर्षों की अर्थव्यवस्था को बदलने वाली हैं।

2047 का भारत कैसा होगा?

2047 का भारत केवल अधिक समृद्ध भारत नहीं होना चाहिए। वह ऐसा भारत होना चाहिए जहां विकास का लाभ व्यापक हो, अवसरों तक पहुंच बेहतर हो और तकनीकी प्रगति के साथ मानवीय गरिमा भी केंद्र में रहे।

17 सितंबर का व्यापक अर्थ

इस प्रश्न का उत्तर किसी भाषण, घोषणा या राजनीतिक दावे में नहीं मिलेगा। इसका वास्तविक उत्तर आने वाले वर्षों के परिणामों में दिखाई देगा। इतिहास यह देखेगा कि आज की नीतियों ने भारत की अर्थव्यवस्था, समाज, संस्थाओं और आने वाली पीढ़ियों के लिए कितनी मजबूत नींव तैयार की।

‘नया भारत’ वर्तमान की आकांक्षा है।

‘विकसित भारत @2047’ भविष्य का लक्ष्य है।

इन दोनों के बीच की यात्रा भारत की आने वाली पीढ़ियों का सबसे बड़ा राष्ट्रीय प्रयास होगी।

वडनगर से शुरू हुई एक राजनीतिक यात्रा आज ‘नया भारत’ और ‘विकसित भारत @2047’ जैसे बड़े राष्ट्रीय विमर्श से जुड़ चुकी है। अब आने वाला समय बताएगा कि इस संकल्प को भारत की वास्तविक उपलब्धियों में किस सीमा तक बदला जा सका।

क्योंकि इतिहास केवल यह नहीं पूछता कि किसी दौर में क्या कहा गया था। इतिहास यह भी पूछता है कि उस दौर ने आने वाली पीढ़ियों के लिए क्या बनाया।

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