लंपी संक्रमण: बालाघाट में बैल व हाट बाजार पर प्रतिबंध, 300 से अधिक मवेशियों की मौत

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बालाघाट। लंपी वायरस के नए वैरिएंट के चलते महज दो माह भीतर(मार्च से अब तक) 300 से अधिक मवेशियों की मौत बालाघाट जिले में हो चुकी है। नए स्ट्रेन की पहचान के लिए विशेषज्ञों की टीम बालाघाट से सैंपल ले गई है। रिपोर्ट आने के बाद ही इस नए स्ट्रेन के बारे में जानकारी मिलेगी। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में लंपी बीमारी अलग-अलग रूप ले रही है। 2022 की अपेक्षा 2023 में जिन मवेशियों को लंपी संक्रमण हो रहा है, उन मवेशियों में लंपी के सामान्य लक्षण के साथ ही नए लक्षण भी देखने को मिल रहे हैं, जिससे ये बीमारी मवेशियों के लिए पहले की तुलना में अधिक घातक साबित हो रही है।

छत्तीसगढ़ के रास्ते मध्यप्रदेश में आया संक्रमण

बालाघाट जिले में लंपी बीमारी 2022 में छत्तीसगढ़ के रास्ते आई थी, जिससे लांजी क्षेत्र में सबसे अधिक मवेशी बीमार हुए थे। इसके बाद पूरे जिले में बीमारी फैली थी। हालांकि इस दौरान तीन मवेशियों की मौत हुई थी। मवेशियों में लंपी होने पर बुखार, खान-पान बंद, शरीर पर गठान व सूजन थी।

नए लक्षण

इस वर्ष मार्च माह से मवेशियों में लंपी संक्रमण के लक्षण दिखाई दिए। इस बार मवेशी पहले की तुलना में अधिक बीमार मिले। इस बार मवेशियों के पैरों में लगड़ापन व सूजन हो रही है। जिससे मवेशी चल भी नहीं पा रहे है और नतीजन गंभीर स्थिति में पहुंच रहे है जिससे उनकी मौत भी हो रही है।

बालाघाट जिले में धारा 144 लगाकर बैल बाजार, हाट बाजार के साथ ही सार्वजनिक स्थल, तालाबों में मवेशियों को ले जाने पर प्रतिबंध भी लगा दिया गया है। जिले के 404 गांवों में बीमारी में फैल गई है। जिले में छह लाख से भी अधिक मवेशी हैं, जिन पर लंपी के नए स्ट्रेन का खतरा है।

भोपाल में ज्वेलर से आयकर अधिकारी बनकर ठगी करने वाला निकला कुख्यात बदमाश

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राजस्थान के पाली जिले के कुख्यात बदमाश 40 वर्षीय सुरेश कुमार को राज्य साइबर क्राइम पुलिस ने बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात राजस्थान से गिरफ्तार कर लिया। उसने भोपाल के एक ज्वेलर से आयकर अधिकारी बनकर पांच लाख 20 हजार रुपये की धोखाधड़ी की थी। आरोपित एक साल की सजा काटकर कुछ दिन पहले ही बाहर आया था और आते ही इस वारदात को अंजाम दिया। पुलिस उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है। राज्य साइबर पुलिस के मुताबिक भोपाल के एक नामी ज्वेलर ने 14 अप्रैल 2023 को साइबर सेल में शिकायत की थी कि अज्ञात व्यक्ति ने स्वयं को आयकर अधिकारी बताकर करीब पांच लाख 20 हजार रुपये तीन बार में आरटीजीएस के माध्यम से अपने बैंक खाते में जमा करा लिए।

आरोपित ने मार्च में ज्वेलर से संपर्क किया और उनके यहां आयकर छापे से संबंधित बात की। नौ से 19 मार्च के बीच उसने रुपये अपने खाते में ट्रांसफर कराए। साइबर क्राइम पुलिस ने धोखाधड़ी की धाराओं में एफआइआर दर्ज कर आरोपित की तलाश शुरू की थी। दो दिन रैकी और खाते से संबंधित जानकारी मिलने के बाद टीम ने उसे खोजकर पाली राजस्थान से गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपित के पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड और एक लाख रुपये नकद जब्त किए गए हैं। आरोपित पहले भी पूर्व मंत्री, कलेक्टर और वरिष्ठ अधिकारी बनकर राजस्थान में वारदात कर चुका है। आरोपित पर 62 अपराध दर्ज हैं।
छापे के बाद बनाता है निशाना – कुख्यात जालसाज के बारे में कहा जाता है कि वह आयकर छापे के तीन माह या उससे ज्यादा पहले की कार्रवाई के बारे में इंटरनेट मीडिया के अलग-अलग माध्यमों से जानकारी जुटा लेता था। इसके बाद आयकर विभाग में फोन कर वरिष्ठ अधिकारी बनकर उस व्यक्ति का मोबाइल नंबर लेता था, जिसके यहां आयकर की कार्रवाई हुई हो। इसके बाद वह आयकर अधिकारी बनकर उस व्यक्ति से बात कर मामले में जोड़तोड़ कराने के नाम पर पीड़ित से रुपये मांगता था।

प्रीति जिंटा के होश उड़ा दिए विराट कोहली ने कप्‍तान बनते ही

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विराट कोहली करीब दो साल बाद अपनी टीम आरसीबी की कप्‍तानी कर रहे हैं। टीम के कप्‍तान फॉफ डुप्‍लेसी पूरी तरह से फिट नहीं हैं, इसलिए वे आज का मैच बतौर कप्‍तान नहीं खेल रहे थे, लेकिन वे इम्‍पैक्‍ट प्‍लेयर के तौर पर मैदान में आए और धुआंधार पारी खेलकर चले गए। लेकिन कप्‍तानी की जिम्‍मेदारी एक बार फिर से विराट कोहली संभाल रहे हैं। हालांकि पिछले मैच में ही फॉफ डुप्‍लेसी कुछ मुश्किल में थे और यही कारण रहा कि उस मैच में कुछ देर के लिए जब वे मैदान छोड़ कर गए तो कप्‍तानी ग्‍लेन मैक्‍सवेल ने संभाली। लेकिन इस बार पूरे मैच में कोहली कप्‍तानी करते हुए दिखाई दिए। वे टॉस के लिए मैदान में आए। मजे की बात ये रही कि दोनों टीमों के नियमित कप्‍तान आज कप्‍तानी नहीं कर रहे थे। शिखर धवन के साथ भी दिक्‍कत है और उनकी जगह सैम करन कप्‍तानी कर रहे हैं। इस बीच जब आरसीबी की गेंदबाजी आई तो विराट कोहली ने पारी की दूसरी ही गेंद पर एक ऐसा फैसला किया, जिससे पंजाब किंग्‍स की सह मालकिन प्रीति जिंटा के होश ही उड़ गए। इसके बाद चौथे ओवर में फिर कुछ इसी तरह की घटना हुई। चलिए आपको विस्‍तार से बताते हैं कि आखिर हुआ क्‍या है।
विराट कोहली ने मोहम्‍मद सिराज की गेंद पर पहले ही ओवर में लिया सटीक डीआरएस

दरअसल आरसीबी ने बल्‍लेबाजी करते हुए चार विकेट पर 174 रन बनाए, यानी पंजाब किंग्‍स के सामने जीत के लिए 175 रनों का लक्ष्‍य था। ये लक्ष्‍य ऐसा होता है कि दोनों में से कोई भी टीम जीत सकती है। यानी बराबरी का मौका। शिखर धवन की गैर मौजूदगी में सलामी बल्‍लेबाज के तौर पर पंजाब किंग्‍स ने अथर्व ताइडे और प्रभसिमरन सिंह को भेजा। उधर गेंदबाजी की कमान कोहली ने सिराज के हाथ में दी। मोहम्‍मद सिराज की पहली ही गेंद पर अथर्व ने चौका लगा दिया। इसके बाद अगली गेंद पर रोमांच देखने के लिए मिला। ऐसा लगा कि गेंद अर्थव पैड पर लगी, मोहम्‍मद सिराज समेत पूरी टीम ने जोरदार एलबीडब्‍ल्‍यू की अपील की। लेकिन अंपायर ने इस नकार दिया। विराट कोहली ने अपने साथियों से बात की और तय किया वे डीआरएस लेंगे। जब रिप्‍ले देखा गया तो पता चला कि गेंद और बैट का सम्‍पर्क नहीं हुआ था और गेंद सीधे पैड पर जाकर लग रही थी और उसके बाद स्‍टंप पर जाकर लगती। तीसरे अंपायर ने आउट दिया। यानी डीआरएस काम आ गया। पहली गेंद पर चौका खाने के बाद सिराज ने अपना बदला पूरा कर लिया। इसके बाद टीवी स्‍क्रीन पर पंजाब किंग्‍स की सहमालकिन प्रीती जिंटा दिखाई दीं, जो काफी हैरान परेशान नजर आ रही थीं। अथर्व ताइडे ने दो गेंदों का सामना किया और चार रन बनाकर आउट हो गए। इसके बाद पूरे मोहली के मैदान पर आरसीबी आरसीबी की गूंज सुनाई देने लगी, जबकि ये पंजाब किंग्‍स का होम ग्राउंड है।

विराट कोहली ने डीआरएस लेकर लियाम लिविंगस्‍टेन को भी किया
इसके बाद मैच के चौथे ओवर में फिर से ऐसा ही कुछ देखने के लिए मिला। इस बार भी गेंदबाज मोहम्‍मद सिराज ही थे, वहीं बल्‍लेबाज लियाम लिविंगस्‍टेन थे। जो इस साल के आईपीएल में पहली बार खेलने के लिए उतरे थे। अपनी चौथी ही गेंद पर लियाम लिविंगस्‍टेन गच्‍चा खा गए और गेंद उनके पैड पर जाकर लगी। मोहम्‍मद सिराज ने फिर से अपील की, लेकिन अंपायर ने आउट नहीं दिया। कप्‍तान विराट कोहली ने सिराज और विकेटकीपर दिनेश कार्तिक से एक छोटी सी चर्चा की और डीआरएस के लिए चले गए। यहां भी पता चला कि गेंद स्‍टंप पर जाकर लग रही है। चार गेंद पर दो रन बनाकर लियाम लिविंगस्‍टेन आउट होकर पवेलियन लौट गए। इस तरह से मैच की शुरुआत में ही दो बार ऐसा हुआ कि विराट कोहली ने सटीक डीआरएस लिया और दोनों बार वो सही भी साबित हुए। इसके अलावा भी विकेट गिरते रहे और बार बार स्‍क्रीन पर प्रीती जिंटा दिखाई देती। जब बल्‍लेबाज चौका या छक्‍का लगाते तो प्रीती जिंटा ताली बजाते हुए उनकी हौसलाअफजाई कर रही थी, लेकिन आउट होने पर निराश होते हुए भी दिख रही थीं।

मशहूर एक्ट्रेस हुई गिरफ्तार, 15 हजार रुपये में कराती थी ऐसे काम

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मुंबई, क्राइम ब्रांच यूनिट 11 ने सोमवार को बड़ी सफलता हासिल करते हुए फिल्म इंडस्ट्री में चल रहे एक सेक्स रैकेट का पर्दाफाश कर दिया है। मुंबई क्राइम ब्रांच के मुताबिक देह व्यापार का रैकेट कथित रूप से कास्टिंग डायरेक्टर आरती मित्तल द्वारा चलाया जा रहा था। पुलिस ने आरती को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।

क्राइम ब्रांच की टीम ने गोरेगांव में एक जगह से दो मॉडलों को रेस्क्यू भी किया है और उन्हें रिहैब सेंटर भेजा गया है। मॉडल्स ने पुलिस को बताया कि आरती ने उन्हें 15-15 हजार रुपए देने का वादा किया था। पुलिस ने डमी ग्राहकों को होटल में भेजा था और इस तरह उन्होंने इस रैकेट का खुलासा किया और आरोपी आरती मित्तल को गिरफ्तार कर लिया।

 

सुरक्षित पत्रकारिता के लिए पत्रकार सुरक्षा कानून की जरूरी: रास बिहारी

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दिल्ली, नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) और दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ने पत्रकारों के लिए सुरक्षित माहौल में काम करने के लिए केंद्र सरकार से पत्रकार सुरक्षा कानून और नेशनल रजिस्टर फॉर जर्नलिस्ट्स बनाने का मांग की है।
इसके साथ ही दोनों संगठनों ने मीडिया में बड़े पैमाने पर हो रहे बदलावों के मद्देनजर मीडिया काउंसिल और मीडिया कमीशन के गठन की मांग की है। पत्रकार संगठनों की तरफ से राज्यों में पत्रकारों को मान्यता देने के मामले में भेदभाव बरतने के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में याचिका दाखिल करने का फैसला किया गया है।
इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स से संबद्ध एनयूजे-आई के अध्यक्ष रास बिहारी ने बुधवार को आयोजित एक बैठक में कहा कि प्रयागराज में पत्रकार बनकर बदमाशों द्वारा माफिया सरगना और उसके भाई की हत्या के बाद मीडिया के सामने बड़ी समस्या आ रही है। उन्होंने कहा कि मीडिया के लिए तो पहले सही दिशा-निर्देश बने हुए है। जरूरत तो फर्जी खबरों और फर्जी पत्रकारों पर रोक लगाने की है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारें दिशा निर्देश बनाएं।
बैठक में एनयूजे के महासचिव प्रदीप तिवारी, कोषाध्यक्ष डॉ. अरविन्द सिंह, सचिव अमलेश राजू, दिल्ली पत्रकार संघ के संयोजक राकेश थपलियाल, सहसंयोजक प्रमोद कुमार, के पी मलिक, वरिष्ठ पत्रकार मनोज वर्मा, मुकेश वत्स, प्रतिभा शुक्ल, संतोष सूर्यवंशी, प्रदीप श्रीवास्तव, अनुराग पुनैठा, अतुल मिश्र, रविन्द्र मिश्र, नेत्रपाल शर्मा आदि ने विचार रखे।
रास बिहारी ने कहा कि फर्जी पत्रकारों और फर्जी खबरों पर पत्रकार सुरक्षा कानून और राष्ट्रीय पत्रकार रजिस्टर बनाकर रोक लगाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि राज्यों में मीडिया कर्मियों के साथ मान्यता देने में भेदभावपूर्ण नीति अपनाए जाने के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता अश्वनी दुबे के माध्यम से याचिका दायर की जाएगी। इस अवसर अश्वनी दुबे ने कहा कि मीडिया के स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शिता के साथ काम करने के लिए सुरक्षा कानून की आवश्यकता है।
एनयूजे महासचिव प्रदीप तिवारी ने कहा कि केंद्र सरकार को मीडिया में बदलावों को देखते हुए तुरंत प्रभाव से मीडिया काउंसिल का गठन करना चाहिए।कोषाध्यक्ष डॉ अरविन्द सिंह ने कहा कि देश में दो प्रेस आयोग का गठन किया गया। अब मीडिया की स्थिति का अध्ययन करने के लिए मीडिया कमीशन बनाने की आवश्यकता है।दिल्ली पत्रकार संघ के संयोजक राकेश थपलियाल, सहसंयोजक प्रमोद कुमार सिंह, के पी मलिक ने कहा कि फर्जी पत्रकारों के कारण बार-बार पत्रकारों को काम करने में समस्या पैदा होती है। सभी पत्रकारों की तरफ से छत्तीसगढ़ में पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने को लेकर भूपेश बघेल सरकार का धन्यवाद किया गया। बैठक में फैसला किया गया है कि पत्रकार संगठनों की मांगों को लेकर जल्दी ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को ज्ञापन दिया जाएगा। बैठक में पत्रकारों की मांगों को लेकर सभी राज्यों में अभियान चलाने का फैसला किया गया।

सूरत कोर्ट से राहुल को मानहानि मामले में राहत नहीं, अर्जी खारिज

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सूरत, कांग्रेस नेता राहुल गांधी को गुरुवार को सूरत की सत्र अदालत से उस समय जबरदस्त झटका लगा जब मोदी उपनाम मानहानि मामले में उनकी याचिका खारिज कर दी गयी।
गांधी के पास सत्र अदालत के फैसले के बाद अब गुजरात उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का विकल्प बचा है। कांग्रेस नेता पर मोदी उपनाम को लेकर की गयी उनकी टिप्पणी के बाद उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया गया था। इस पर सूरत की एक निचली अदालत ने 23 मार्च को उन्हें दोषी करार देते हुए दो साल की सजा सुनाई थी।
गांधी केरल में वायनाड सीट से लोकसभा सांसद थे। निचली अदालत के फैसले के बाद उनकी संसद सदस्यता खत्म कर दी गयी थी। उनके खिलाफ सुनाये गये फैसले के दिन ही तीन अप्रैल को ही सूरत की सत्र अदालत ने गांधी की जमानत मंजूर कर ली थी। इसके बाद उन्होंने अपनी सजा पर रोक लगाने और दोषसिद्धि को लेकर दो याचिकाएं दायर की थी, जिसे अदालत ने आज खारिज कर दिया।
सत्र अदालत से झटका लगने के बाद गांधी के पास अब गुजरात उच्च न्यायालय का रुख करने का विकल्प बचा है। गौरतलब है कि गांधी के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी के गुजरात के विधायक पूर्णेश मोदी ने मानहानि का मुकदमा दायर किया था।

रक्षा मंत्री  राजनाथ कोरोना से संक्रमित

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दिल्ली, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की कोविड जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने से उनके कोरोना से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है।रक्षा मंत्री को गुरूवार को यहां वायु सेना के कमांडरों के एक सम्मेलन में भाग लेना था, लेकिन कोविड की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद अब वह इस कार्यक्रम में नहीं जा सके।रक्षा मंत्री को फिलहाल हल्के लक्षण हैं और वह घर पर क्वारंटीन हैं। चिकित्सकों की टीम ने उनकी जांच की है और उन्हें आराम करने की सलाह दी गई है।सिंह ने बुधवार को सेना के कमांडरों के सम्मेलन को संबोधित किया था।

बुद्ध के मार्ग पर ही मिलेगा दुनिया को वैश्विक चुनौतियों से बचाने का रास्ता: मोदी

Modi ji in buddha purnima

 

दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भगवान गौतम बुद्ध की शिक्षाओं को ‘मानवता का विश्वास’ बताते हुए आज कहा कि दुनिया को आर्थिक अस्थिरता, आतंकवाद एवं मजहबी उन्माद तथा जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौतियों से बचाने के लिए बुद्ध के मार्ग पर चलना होगा।मोदी ने यहां शुरू हुए दो दिवसीय वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए यह बात कही। कार्यक्रम में केन्द्रीय विधि एवं न्याय मंत्री किरण रिजीजू, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जी किशन रेड्डी, संस्कृति एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, संस्कृति एवं विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी, अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के महासचिव, देश-विदेश से आये बौद्ध भिक्षु शामिल हुए।प्रधानमंत्री ने कहा, “आज का ये समय इस सदी का सबसे चुनौतीपूर्ण समय है। आज एक ओर, महीनों से दो देशों में युद्ध चल रहा है, तो वहीं दुनिया आर्थिक अस्थिरता से भी गुजर रही है। आतंकवाद और मजहबी उन्माद जैसे खतरे मानवता की आत्मा पर प्रहार कर रहे हैं। जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौती पूरी मानवता के अस्तित्व पर आफत बनकर मंडरा रही है। ग्लेशियर्स पिघल रहे हैं, पारिस्थितिकीय तंत्र नष्ट हो रही है, प्रजातियाँ विलुप्त हो रहीं हैं। लेकिन इस सबके बीच, हमारे आप जैसे करोड़ों लोग भी हैं जिन्हें बुद्ध में आस्था है, जीव मात्र के कल्याण में विश्वास है। ये उम्मीद, ये विश्वास ही इस धरती की सबसे बड़ी ताकत है। जब ये उम्मीद एकजुट होगी, तो बुद्ध का धम्म विश्व की धारणा बन जाएगा, बुद्ध का बोध मानवता का विश्वास बन जाएगा।”मोदी ने अपने संबोधन की शुरूआत करते हुए वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन आने वाले अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि बुद्ध की इस धरती की परंपरा है- ‘अतिथि देवो भवः’! अर्थात, अतिथि हमारे लिए देवता के समान होते हैं। लेकिन, भगवान बुद्ध के विचारों को जीने वाले इतने व्यक्तित्व जब हमारे सामने हों, तो साक्षात् बुद्ध की उपस्थिति का अहसास होता है। क्योंकि, बुद्ध व्यक्ति से आगे बढ़कर एक बोध हैं। बुद्ध स्वरूप से आगे बढ़कर एक सोच हैं। बुद्ध चित्रण से आगे बढ़कर एक चेतना है और बुद्ध की ये चेतना चिरंतर है, निरंतर है। ये सोच शाश्वत है। ये बोध अविस्मरणीय है।प्रधानमंत्री ने कहा कि अलग-अलग देशों से, अलग-अलग भौगोलिक सांस्कृतिक परिवेश से लोग यहाँ एक साथ उपस्थित हैं। यही भगवान बुद्ध का वो विस्तार है, जो पूरी मानवता को एक सूत्र में जोड़ता है। हम कल्पना कर सकते हैं, दुनिया के अलग-अलग देशों में बुद्ध के करोड़ों अनुयायियों का ये सामर्थ्य जब एक साथ कोई संकल्प लेता है, तो उसकी ऊर्जा कितनी असीम हो जाती है। उन्होंने कहा कि जब इतने सारे लोग विश्व के बेहतर भविष्य के लिए एक विचार के साथ काम करेंगे, तो भविष्य निश्चित रूप से भव्य ही होगा। और इसलिए ऐसा विश्वास है कि पहला वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन इस दिशा में हम सभी देशों के प्रयासों के लिए एक प्रभावी मंच का निर्माण करेगा।उन्होंने कहा कि वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन की मेजबानी एक ऐसे समय में हो रही है जब भारत ने अपनी आजादी के 75 वर्ष पूरे किए हैं, भारत अपनी आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। इस अमृतकाल में भारत के पास अपने भविष्य के लिए विशाल लक्ष्य भी हैं, और वैश्विक कल्याण के नए संकल्प भी हैं। भारत ने आज अनेक विषयों पर विश्व में नई पहल की हैं। और इसमें हमारी बहुत बड़ी प्रेरणा भगवान बुद्ध ही हैं।उन्होंने कहा कि आप सभी परिचित हैं कि बुद्ध का मार्ग है- परियक्ति, पटिपत्ति और पटिवेध, यानी, पाठ, अभ्यास एवं अनुभव। पिछले 9 वर्षों में भारत इन तीनों ही बिन्दुओं पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। हमने भगवान बुद्ध के मूल्यों का निरंतर प्रसार किया है। हमने बुद्ध की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए एक समर्पण भाव से काम किया है। उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल में बुद्ध सर्किट का विकास हो, सारनाथ और कुशीनगर जैसे तीर्थों के कायाकल्प के प्रयास हों, कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा हो, लुम्बिनी में भारत और अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के सहयोग से भारत अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संस्कृति एवं विरासत केन्द्र का निर्माण हो, भारत के ऐसे हर काम में ‘पटिपत्ति’ की प्रेरणा शामिल है। ये भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का पटिवेध ही है कि भारत विश्व के हर मानव के दुःख को अपना दुःख समझता है।मोदी ने कहा कि दुनिया के अलग-अलग देशों में शांति मिशन हों, या तुर्किए के भूकम्प जैसी आपदा हो, भारत अपना पूरा सामर्थ्य लगाकर, हर संकट के समय मानवता के साथ खड़ा होता है, ‘मम भाव’ से खड़ा होता है। आज भारत के 140 करोड़ लोगों की इस भावना को दुनिया देख रही है, समझ रही है, और स्वीकार भी कर रही है। और अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ का ये मंच इस भावना को नया विस्तार दे रहा है। ये हम सभी समान साेच एवं समान भावनाओं वाले देशों को एक परिवार के रूप में बुद्ध धम्म और शांति के विस्तार के नए अवसर देगा। वर्तमान चुनौतियों को हम किस तरह से हैंडल करते हैं, इस पर चर्चा अपने आप में न केवल प्रासंगिक है, बल्कि विश्व के लिए इसमें उम्मीद की किरण भी समाहित है।उन्होंने कहा कि हमें याद रखना है कि समस्याओं से समाधान की यात्रा ही बुद्ध की यात्रा है। बुद्ध ने महल इसलिए नहीं छोड़ा था, क्योंकि उन्हें कोई कष्ट था। बुद्ध ने महल, राजसी ठाठ-बाट इसलिए छोड़ा था, क्योंकि उनके लिए उपलब्ध सब सुख-सुविधाओं के बाद भी दूसरों के जीवन में दुःख था। यदि हमें विश्व को सुखी बनाना है, तो स्व से निकलकर संसार, संकुचित सोच को त्यागकर, समग्रता का ये बुद्ध मंत्र ही एकमात्र रास्ता है। हमें हमारे आस-पास गरीबी से जूझ रहे लोगों के बारे में सोचना ही होगा। हमें संसाधनों के अभाव में फंसे देशों के बारे में सोचना ही होगा। एक बेहतर और स्थिर विश्व की स्थापना के लिए यही एक मार्ग है, यही आवश्यक है। आज ये समय की मांग है कि हर व्यक्ति की, हर राष्ट्र की प्राथमिकता, अपने देश के हित के साथ ही, विश्व हित भी हो, ‘वैश्विक हित’ भी हो।उन्होंने कहा कि आधुनिक विश्व की ऐसी कोई समस्या नहीं है, जिसका समाधान सैकड़ों वर्ष पहले बुद्ध के उपदेशों में हमें प्राप्त न हुआ हो। आज दुनिया जिस युद्ध और अशांति से पीड़ित है, बुद्ध ने सदियों पहले इसका समाधान दिया था। बुद्ध कहा था- जीत वैर को जन्म देती है, और हारा हुआ व्यक्ति भी दु:ख की नींद सोता है। इसलिए, हार-जीत, लड़ाई-झगड़ा इन्हें छोड़कर ही हम सुखी हो सकते हैं। भगवान बुद्ध ने युद्ध से उबरने का रास्ता भी बताया है। भगवान बुद्ध ने कहा है- वैर से वैर शांत नहीं होता। वैर अवैर से शांत होता है। भगवान बुद्ध का वचन है- संघों के बीच एकता में ही सुख समाहित है। सभी लोगों के साथ, मिलजुलकर रहने में ही सुख है।मोदी ने कहा कि आज अपने विचारों, अपनी आस्था को दूसरों पर थोपने की सोच दुनिया के लिए बहुत बड़ा संकट बन रही है। लेकिन, भगवान् बुद्ध ने कहा था- पहले खुद सही आचरण करना चाहिए, फिर दूसरे को उपदेश देना चाहिए। आधुनिक युग में हम देखते हैं कि चाहे गांधी जी हों या फिर विश्व के अनेक नेताओं, उन्होंने इसी सूत्र से प्रेरणा पाई। लेकिन हमें याद रखना है, बुद्ध सिर्फ इतने पर ही नहीं रुके थे। उन्होंने एक कदम आगे बढ़कर कहा था- अप्प दीपो भवः यानी अपना प्रकाश स्वयं बनो। आज अनेकों सवालों का उत्तर भगवान बुद्ध के इस उपदेश में ही समाहित है। इसलिए, कुछ साल पहले, संयुक्त राष्ट्र में मैंने गर्व के साथ कहा था कि भारत ने दुनिया को युद्ध नहीं बुद्ध दिए हैं। जहां बुद्ध की करुणा हो, वहां संघर्ष नहीं समन्वय होता है, अशांति नहीं शांति होती है।प्रधानमंत्री ने कहा कि बुद्ध का मार्ग भविष्य का मार्ग है, निरंतरता का मार्ग है। अगर विश्व, बुद्ध की सीखों पर चला होता, तो जलवायु परिवर्तन जैसा संकट भी हमारे सामने नहीं आता। ये संकट इसलिए आया क्योंकि पिछली शताब्दी में कुछ देशों ने दूसरों के बारे में, आने वाली पीढ़ियों के बारे में सोचना ही बंद कर दिया। दशकों तक वो ये सोचते रहे कि प्रकृति से इस छेड़छाड़ का प्रभाव उनके ऊपर नहीं आएगा। वो देश इसे दूसरों के ऊपर ही डालते रहे। लेकिन भगवान बुद्ध ने धम्मपद में स्पष्ट रूप से कहा है कि जैसे बूंद-बूंद पानी से घड़ा भर जाता है, वैसे ही लगातार की हुई गलतियाँ विनाश का कारण बन जाती हैं। मानवता को इस तरह सतर्क करने के बाद बुद्ध ने ये भी कहा कि- अगर हम गलतियों को सुधारें, लगातार अच्छे काम करें, तो समस्याओं के समाधान भी मिलते हैं। किसी कर्म का फल हमारे पास नहीं आएगा, ये सोचकर पुण्यकर्म की अवहेलना ना करें। बूंद-बूंद पानी गिरने से घड़ा भर जाता है। ऐसे ही, थोड़ा-थोड़ा संचय करता हुआ धीर व्यक्ति, पुण्य से भर जाता है।उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति का हर काम किसी न किसी रूप में धरती को प्रभावित कर रहा है। हमारी जीवनशैली चाहे जो हो, हम जो भी पहनते हों, हम जो भी खाते हों, हम जिस भी साधन से यात्रा करते हों, हर बात का प्रभाव होता ही होता है, फर्क पड़ता ही पड़ता है। हर व्यक्ति जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से लड़ भी सकता है। अगर लोग जागरूक होकर अपनी जीवनशैली में बदलाव करें तो इस बड़ी समस्या से भी निपटा जा सकता है और यही तो बुद्ध का मार्ग है। इसी भावना को लेकर भारत ने मिशन लाइफ की शुरुआत की है। मिशन लाइफ यानी पर्यावरण के जीवनशैली। ये मिशन भी बुद्ध की प्रेरणाओं से प्रभावित है, बुद्ध के विचारों को आगे बढ़ाता है।प्रधानमंत्री ने कहा कि आज बहुत आवश्यक है कि विश्व, कोरी भौतिकता और स्वार्थ की परिभाषाओं से निकल कर ‘भवतु सब्ब मंगलन्’ इस भाव को आत्मसात करें। बुद्ध को केवल प्रतीक नहीं, बल्कि प्रतिबिंब भी बनाया जाए, तभी ‘भवतु सब्ब मंगलम्’ का संकल्प चरितार्थ होगा। इसलिए, हमें बुद्ध के वचन को याद रखना है- “मा निवत्त, अभि-क्कम”! यानी, पीछे मत मुड़ो, आगे बढ़ो! हमें आगे बढ़ना है, और लगातार आगे बढ़ते जाना है।मोदी ने कहा, “मुझे विश्वास है, हम सब साथ मिलकर अपने संकल्पों को सिद्धि तक लेकर जाएंगे। इसी के साथ, आप सभी को एक बार फिर हमारे निमंत्रण पर यहां पधारने के लिए आभार भी व्‍यक्‍त करता हूं और इस दो दिवसीय विचार-विमर्श से मानवता को नया प्रकाश मिलेगा, नई प्रेरणा मिलेगी, नया साहस मिलेगा, नया सामर्थ्‍य मिलेगा।”

 

ladli bahan yojana Madhya Pradesh, 10 जून से बहनों के खाते में आने लगेंगे 1000 रूपये

ladli bahan yojana Madhya Pradesh shivraj singh chouhan

 

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मध्यप्रदेश में बहनों की जिंदगी बदलने का महा अभियान चल रहा है। सरकार ने अब लाड़ली बहना योजना बनाई है, जिसमें गरीब और निम्न मध्यम वर्ग की महिलाओं को प्रति माह 1000 रूपये मिलेंगे। उन्होंने कहा कि लाड़ली बहना सिर्फ योजना नहीं एक सामाजिक क्रांति है। मेरी बहनों को अब अपनी छोटी-मोटी जरूरतें पूरी करने के लिए किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना होगा। यह एक भाई का अपनी बहन के लिए उपहार है, जो उन्हें केवल रक्षाबंधन पर नहीं, पूरे वर्ष मिलता रहेगा।

मुख्यमंत्री चौहान आज सिवनी जिले के केवलारी में मुख्यमंत्री लाड़ली बहना महासम्मेलन में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने 129 करोड़ रूपये के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया। साथ ही मुख्यमंत्री आवासीय भू-अधिकार योजना के पट्टे हितग्राहियों को वितरित किए। हितग्राहियों को अन्य योजनाओं में हितलाभ भी वितरित किया गया।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में महिला सशक्तिकरण के लिए चल रहे अभियान में मेरी बहनों का अपार जन-समर्थन मिल रहा है। आज भी यहाँ टेंट छोटा पड़ गया है। मैं अपनी बहनों के प्यार, स्नेह और समर्थन के लिए दिल से आभारी हूँ। भाई-बहन का रिश्ता अद्भुत रिश्ता है। मैंने प्रण किया है कि मैं अपनी बहनों की आँखों में आँसू नहीं आने दूँगा। आज मैं मन की बात आपसे कहने आया हूँ, भाषण देने नहीं।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्राचीन भारत में महिलाओं की बहुत इज्जत और सम्मान था। मध्य काल में इसमें कमी आई और बेटियों के साथ भेदभाव और अन्याय किया जाने लगा। मैं बचपन से बेटियों के प्रति भेदभाव देखता आया हूँ। तभी मैंने प्रण लिया था कि इस भेदभाव और अन्याय को समाप्त करूंगा। मैं इसे पूरा करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा हूँ।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में सबसे पहले लाड़ली लक्ष्मी योजना बनाई गई और बेटियों को उनके जन्म के समय 30 हजार रूपये का बचत-पत्र खरीद कर दिए जाने लगा। इसमें समय-समय पर उन्हें पढ़ाई के लिए राशि मिलती है और 21 वर्ष की आयु पूरी होने पर उन्हें एक लाख रूपये एकमुश्त मिलते हैं। आज मध्यप्रदेश में 44 लाख से अधिक लाड़ली लक्ष्मी हैं।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि बहनों को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने के लिए मध्यप्रदेश में पंचायत और स्थानीय निर्वाचन में 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप आज ग्राम पंचायतों से लेकर जिला पंचायतों तक मेरी बहनें सरकार चला रही हैं। जमीन, जायदाद बहनों के नाम से करने पर रजिस्ट्री शुल्क 1 प्रतिशत ही लिया जाता है। पुलिस और शिक्षकों की भर्ती में भी बेटियों को आरक्षण दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह-निकाह योजना में गरीब बहनों की शादी सरकार करवाती है। संबल योजना में भी बहनों को लाभ दिया जाता है।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि लाड़ली बहना योजना का लाभ 23 से 60 वर्ष तक की उन बहनों को मिलेगा, जिनके परिवार की सालाना आय ढाई लाख रूपये से कम हो, घर में 5 एकड़ से अधिक भूमि न हो और कोई 4 पहिया वाहन न हो। योजना के फॉर्म 30 अप्रैल तक भरे जा रहे हैं, मई माह में इनका परीक्षण होगा और आगामी 10 जून से पात्र बहनों के खाते में 1000 रूपये प्रतिमाह आने लगेंगे।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि सिवनी क्षेत्र के लिए की गई लगभग सभी माँगों को पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिले के कुछ गाँव पीने के पानी पहुँचने से छूट गए हैं, उन सभी को जल जीवन मिशन में शामिल किया जाएगा। जिले के लाल माटी क्षेत्र में सिंचाई के पानी की व्यवस्था के लिए सर्वे कर समाधान किया जाएगा।

मुख्यमंत्री चौहान ने कार्यक्रम का शुभारंभ कन्या-पूजन, दीप प्रज्ज्वलन और जन-नायकों के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। केवलारी क्षेत्र की बहनों ने अपने भईया शिवराज को लिखी पाती और श्रीराम दरबार की प्रति-कृति भेंट की। मुख्यमंत्री चौहान ने सम्मेलन में बड़ी संख्या में आयीं बहनों का पुष्प-वर्षा कर स्वागत किया।

केंद्रीय इस्पात एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि देश के इतिहास में पहली बार किसी सरकार ने महिलाओं के कल्याण के लिए मुख्यमंत्री लाड़ली बहना जैसी योजना संचालित की हैं। उन्होंने कहा कि लाड़ली बहना योजना निश्चित रूप से प्रदेश की महिलाओं की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति को सशक्त करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

विधायक राकेश पाल ने बहुउद्देश्यीय परियोजना भीमगढ़ नहर की स्वीकृति मिलने पर मुख्यमंत्री चौहान का धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि नहर का सीमेंटीकरण हो जाने से आखरी छोर तक के किसानों को समय पर सिंचाई के लिये पानी मिल सकेगा और पानी का अपव्यय भी कम होगा। कार्यक्रम में एमएसएमई मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा, जन-प्रतिनिधि, अधिकारी सहित बड़ी संख्या में बहने और नागरिक उपस्थित थे।

 

गुजरात दंगे से जुड़े नरोदा गाम नरसंहार मामले में अहमदाबाद कोर्ट ने माया कोडनानी, बाबू बजरंगी समेत तमाम आरोपी बरी

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अहमदाबाद, साल 2002 गुजरात दंगे से जुड़े नरोदा गाम नरसंहार मामले में अहमदाबाद की विशेष अदालत ने गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाया. कोर्ट ने माया कोडनानी, बाबू बजरंगी समेत तमाम आरोपियों को बरी कर दिया है. अदालत का यह फैसला 21 साल बाद आया है. एसआईटी मामलों के स्पेशल जज एसके बक्शी की अदालत ने यह फैसला सुनाते हुए गुरुवार (20 अप्रैल 2023) को सारे 68 आरोपियों को निर्दोष करार दिया है. ये दंगे साल 2002 में हुए थे, जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई थी. माया कोडनानी उस वक्त गुजरात सरकार में मंत्री थे और बाबू बजरंगी बजरंग दल के नेता.

जांच के दौरान पुलिस ने माया कोडनानी और बाबू बजरंगी समेत 86 लोगों को केस में आरोपी बनाया था, जिसमें से 18 की मौत हो चुकी है. साल 2002 में गुजरात के गोधरा रेलवे स्टेशन पर एक ट्रेन को आग के हवाले कर दिया था, जिसमें 58 लोग जलकर मर गए थे. इसके अगले दिन विरोध में बंद बुलाया गया था. इसके बाद अहमदाबाद के नरोदा गाम ने सांप्रदायिक हिंसा का वो वक्त देखा, जिसमें 11 लोग अपनी जान गंवा बैठे. देखते-देखते इन दंगों ने पूरे गुजरात को अपने आगोश में ले लिया.

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