अमेरिका ने इस देश पर कर दी एयरस्ट्राइक, ISIS के ठिकाने तबाह

अमेरिका ने इस देश पर कर दी एयरस्ट्राइक, ISIS के ठिकाने तबाह
सीरिया में इस्लामिक स्टेट के खिलाफ अमेरिका ने एक बार फिर बड़ा सैन्य अभियान छेड़ दिया है. पल्मायरा इलाके में हुए घातक हमले में अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद पेंटागन ने सख्त जवाब देने का फैसला किया. इस हमले के बाद अमेरिकी सेना ने ‘ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक’ की शुरुआत कर दी है, जिसका मकसद ISIS के नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करना बताया गया है.

पेंटागन प्रमुख पीट हेगसेथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि 13 दिसंबर को सीरिया में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हुए हमले में दो अमेरिकी सैनिक और एक नागरिक की जान चली गई थी, जबकि तीन सैनिक गंभीर रूप से घायल हुए थे. इसी हमले के जवाब में यह सैन्य कार्रवाई शुरू की गई है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका अपने नागरिकों और सैनिकों पर हमले को बर्दाश्त नहीं करेगा और जो भी दुनिया में कहीं भी अमेरिकियों को निशाना बनाएगा, उसका पीछा कर उसे खत्म किया जाएगा.

सीरिया में 70 से ज्यादा आतंकी ठिकाने तबाह
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान के तहत मध्य सीरिया में ISIS से जुड़े करीब 70 ठिकानों पर हमले किए गए हैं. इनमें आतंकियों के छिपने के ठिकाने, हथियारों के भंडारण केंद्र और ट्रेनिंग बेस शामिल थे. पेंटागन ने संकेत दिए हैं कि हालात के अनुसार आने वाले दिनों में और भी सैन्य कार्रवाई हो सकती है.

किन हथियारों से की गई एयरस्ट्राइक?
इस ऑपरेशन में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया. हमलों में एफ-15 ईगल फाइटर जेट, ए-10 थंडरबोल्ट अटैक एयरक्राफ्ट, AH-64 अपाचे हेलीकॉप्टर और HIMARS रॉकेट सिस्टम का उपयोग किया गया. इसके अलावा जॉर्डन के एफ-16 लड़ाकू विमानों ने भी अभियान में हिस्सा लिया.

आतंकियों को ट्रंप की सख्त चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस सैन्य कार्रवाई पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह हमले ISIS के मजबूत गढ़ों को निशाना बना रहे हैं. ट्रंप ने चेतावनी दी कि जो भी आतंकी संगठन अमेरिका पर हमला करने या धमकी देने की कोशिश करेगा, उसे पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक जवाब दिया जाएगा. उन्होंने सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शारा के प्रति अपना समर्थन भी दोहराया.

मप्र विधानसभा: एक माह में तीसरी बार फिर जुटेंगे मंत्री,विधायक

मप्र विधानसभा: एक माह में तीसरी बार फिर जुटेंगे मंत्री,विधायक
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा में मंत्री व विधायक एक बार फिर जुटेंगे। यह तीसरा मौका है जब महज एक माह यानी दिसंबर में विधानसभा सचिवालय ने सदन के सभी सदस्यों को बुलाया है।

दिसंबर में तीसरी बार बुलाया गया
विधानसभा का पावस सत्र 1से 5 दिसंबर तक आयोजित हुआ। इसके बाद,विधानसभा की 70 वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में गत 17 दिसंबर को एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया और अब 23 दिसंबर को विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम है। इसमें सदन के सभी सदस्यों को अनिवार्य रूप से मौजूद रहने के लिए कहा गया है।

70वें साल में पूरी तरह डिजीटल हुई विधानसभा
दरअसल,मध्य प्रदेश विधानसभा अपने 70वें साल में अब पूरी डिजीटल स्वरूप में तैयार है। नए साल का बजट भी 360 डिग्री तक घूम सकने वाले ई—टैबलेट पर ही पढ़ा जा सकेगा। ​इस नई व्यवस्था में विधायकों,मंत्रियों को पारंगत करने 23 दिसंबर को एक दिन का विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम रखा गया है।

ई—विधान वाला 15 वां राज्य बना मप्र
मध्य प्रदेश देश का 15वां राज्य है,जहां विधानसभा अब पूरी तरह डिजिटल होगी। इसे नेशनल ई-विधान परियोजना के तहत करीब साढ़े तीन सौ करोड़ के बजट से तैयार किया गया है। जहां सेमसंग कंपनी के आधुनिक तकनीक वाले टैबलेट विधायकों को उनकी मेज पर मिलेंगे।

360 डिग्री घूम सकेगा टैबलेट
विधायकों के लिए सदन में टैबलेट एक विशेष किस्म के रोज गोल्ड कलर स्टैंड पर फिट रहेगा। स्टैंड की खूबी यह कि टैबलेट को विधायक अपनी सुविधा के मुताबिक,360 डिग्री तक घुमा सकेंगे। करीब एक फीट लंबाई वाले टैबलेट का कवर भी रोज गोल्ड कलर में रखा गया है।

पूरी तरह पेपरलेस होगी विधानसभा
नए साल में मध्य प्रदेश विधानसभा पूरी तरह से डिजिटल और पेपरलेस होगी। विधानसभा के बजट सत्र में डिजिटल व्यवस्था देखने को मिलेगी। विधायकों को टैबलेट दिए जाएंगे, उनके प्रश्नों के उत्तर भी डिजिटल ही प्राप्त होंगे। मप्र का बजट उप मुख्यमंत्री व वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा टैबलेट पर ही पढ़ेंगे। कार्यवाही को लाइव दिखाने बड़ी स्क्रीन भी सदन के गर्भगृह में होगी।

मंत्री,विधायकों के लिए ट्रेनिंग 23 को
विधानसभा की नई डिजिटल व्यवस्था में सदस्यों को पारंगत करने विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम 23 दिसंबर को मानसरोवर सभागार में होगा। इसमें सभी मंत्रियों व विधायकों को अनिवार्य रूप से शामिल होने के लिए कहा गया है।

अधिकारी,कर्मचारियों की भी होगी ट्रेनिंग
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे सत्र में सभी विभागीय मुख्यालयों के 5—5 अधिकारी,कर्मचारियों को भी बुलाया गया है। ये वे अधिकारी,कर्मचारी होंगे,जो सदन में पूछे जाने वाले सवालों के जवाब तैयार करने में अहम भूमिका अदा करते हैं।

निक्सी को सौंपा गया है काम
नेशनल ई-विधान परियोजना (नेवा) भारत सरकार की एक ई-गवर्नेस पहल है, जिसका लक्ष्य देश की सभी विधानसभाओं को पूरी तरह से डिजिटल और पेपरलेस बनाना है। मप्र विधानसभा को इसके लिए करीब 350 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया।

विधानसभा को ​डिजिटल स्वरूप देने का काम एनआईसी की एक सरकारी कंपनी निक्सी को दिया गया है। विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा ने बताया कि विधानसभा को ई—स्वरूप देने का काम तेज गति से किया जा रहा है। नए साल के बजट सत्र से इसकी शुरुआत होने के आसार हैं।

जिसे जांच करनी थी,उसे पता ही नहीं;सदन में बताया,जांच रिपोर्ट नहीं मिली

जिसे जांच करनी थी,उसे पता ही नहीं;सदन में बताया,जांच रिपोर्ट नहीं मिली
सदन में अफसरशाही का एक और झूठ
भोपाल। जिस जांच समिति की रिपोर्ट का हवाला देकर सरकार विधानसभा में जवाब दे रही है, उसी समिति को यह तक नहीं पता कि उसे किसी मामले की जांच सौंपी गई है। न जांच का औपचारिक आदेश मिला, न फाइलें और न ही दस्तावेज। ऐसे में सदन में यह कहना कि जांच रिपोर्ट अब तक प्राप्त नहीं हुई, सरकारी कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

मामला उच्च शिक्षा विभाग के अधीन भोज मुक्त विश्वविद्यालय में वर्ष 2013 व 2014 के दौरान हुई नियुक्तियों से जुड़ा है। जो वर्षों से सरकार के लिए गले की फांस बना हुआ है। खुद विभागीय मंत्री इंदर सिंह परमार विधानसभा में नियुक्तियों को अवैध बताते हुए इस मामले की जांच का भरोसा जता चुके हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि दो माह बीतने के बाद भी जांच प्रक्रिया औपचारिकता से आगे नहीं बढ़ सकी।

सदन को बताया जांच के आदेश,रिपोर्ट नहीं
हाल ही में संपन्न विधानसभा सत्र में कांग्रेस विधायक नारायण सिंह पट्टा ने पुराने सवालों और सरकारी जवाबों का हवाला देते हुए मामले की अद्यतन स्थिति पूछी। जवाब में बताया गया कि जांच समिति गठित कर दी गई है और उसने काम शुरू कर दिया है। जबकि वास्तविकता यह है कि समिति न तो सक्रिय है और न ही उसके पास जांच से जुड़ा कोई अधिकृत आदेश या रिकॉर्ड उपलब्ध है।

2014 की भर्ती, दस्तावेज 2013 के
चौंकाने वाली बात यह रही कि सदन में भोज विश्वविद्यालय की ओर से जो दस्तावेज पेश किए गए, वे 2014 की बजाय 2013 की भर्तियों से जुड़े थे। बताया जाता है कि पहली भर्ती से जुड़े कुछ कर्मचारी न्यायालय गए हैं और विश्वविद्यालय ने पुराने दस्तावेज प्रस्तुत कर प्रकरण को न्यायालयीन दर्शाने का प्रयास किया।

समिति बदली, सूचना नहीं
उच्च शिक्षा विभाग ने गत 22 जुलाई को तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर संचालक वित्त जितेंद्र सिंह को समन्वयक बनाया था। इसके ठीक दो माह बाद 25 सितंबर को जारी आदेश में उनकी जगह उपसंचालक वित्त चंद्रमणि खोबरागढ़े को जिम्मेदारी सौंप दी गई। विडंबना यह कि इस बदलाव की लिखित सूचना आज तक न तो नए समन्वयक को मिली और न ही समिति के अन्य सदस्य प्रो. अनिल शिवानी (हमिदिया कॉलेज) और अजय वर्मा (अंबेडकर विश्वविद्यालय, महू)को।

खुद समन्वयक खोबरागढ़े का कहना है कि उन्होंने केवल सुना है कि किसी जांच की जिम्मेदारी उन्हें दी गई है, लेकिन न आदेश मिला है और न कोई दस्तावेज। ऐसे में जांच का भविष्य क्या होगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं।

सियासत में शालीनता का पल:दिग्विजय ने कैलाश को कहा साहसी, बोले— काश!और भी ऐसे होते

सियासत में शालीनता का पल:दिग्विजय ने कैलाश को कहा साहसी, बोले— काश!और भी ऐसे होते
पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश विधानसभा में अपने कार्यकाल की सराहना किए जाने पर प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का आभार जताया है। उन्होंने विजयवर्गीय को साहसी बताते हुए कहा कि आज के राजनीतिक माहौल में ऐसी निष्पक्ष तारीफ दुर्लभ है।

तारीफ के लिए चाहिए साहस
दिग्विजय सिंह ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर लिखा कि राजनीतिक प्रतिशोध के इस दौर में किसी विरोधी नेता के कामों की प्रशंसा करना आसान नहीं होता। यह वही कर सकता है, जो खुले विचारों वाला और साहसी हो। उन्होंने इस टिप्पणी के लिए विजयवर्गीय को धन्यवाद दिया।

काश! और भी ऐसे नेता होते
पूर्व मुख्यमंत्री ने संसदीय कार्य मंत्री की सराहना करते हुए कहा कि काश, उनकी और अन्य पार्टियों में भी कुछ और नेता ऐसे होते, जो दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सच को स्वीकार कर सकें।

विधानसभा के विशेष सत्र में हुई सराहना
मध्य प्रदेश विधानसभा के 70 वर्ष पूरे होने पर गत बुधवार को विशेष सत्र आयोजित किया गया था। इस दौरान संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मप्र में अब तक के सभी मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल और प्रदेश के विकास में उनके योगदान पर चर्चा की।

गिनाईं थी दिग्विजय के कार्यकाल की उपलब्धियां
विजयवर्गीय ने कहा कि प्रदेश में संजय गांधी ताप विद्युत परियोजना और कोलार जल परियोजना दिग्विजय सिंह की देन हैं। उन्होंने बाणसागर परियोजना को गति देने और इंदौर में आईआईएम की स्थापना में भी दिग्विजय सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका बताई।

हिंसक झड़प में बदला चुनावी जीत का जश्न
पंजाब में ब्लॉक समिति चुनाव में जीत का जश्न मना रहे आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच गुरुवार (18 दिसंबर) को हिंसक झड़प हो गई. जानकारी के मुताबिक आप नेता जीत का जुलूस निकाल रहे थे, इसी दौरान कांग्रेसी भी वहां आ गए. जिसके बाद उनके बीच बहस हो गई.

आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उनके साथ जमकर मारपीट की गई. इसके बाद फायरिंग की गई, जिसमें पांच से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. इनमें से चार लोगों की हालत गंभीर है.जिनकी पहचान गुरमुख सिंह (65), रविन्द्र सिंह (44), गुरदीप सिंह (32), उदमवीर सिंह (25) साल और मनदीप सिंह (36) के तौर पर हुई है. तीनों को आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

गिरफ्तारी की मांग को लेकर धरना
यह मामला गिल क्षेत्र स्थित बचित्तर नगर का है. घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंच गई है. मामले की जांच की जा रही है. घायलों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं. वहीं गुस्साए लोगों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर धरना लगा दिया है.

AAP ने कांग्रेस नेता पर लगाया आरोप
अस्पताल में भर्ती घायल रविंदर सिंह ने बताया कि वह आम आदमी पार्टी की जीत की खुशी में इलाके में धन्यवाद रैली निकाल रहे थे. जिसके बाद मौके पर कांग्रेस के नेता जसबीर सिंह गाली-गलौज करने लगा. हमने उसे कुछ नहीं कहा. वह गुस्से में आकर मारपीट करने लगा. उसने कई लोगों के साथ झड़प की और गोलियां चलाई दी. रविंदर मुताबिक 15 से 20 गोलियां चली है. गांव के 3 से 4 लोग घायल हुए है. जो लोग घायल हुए है उनकी टांगों पर गोलियां लगी है.

वहीं आप कार्यकर्ताओं ने थाने के बाहर धरना लगा दिया और अरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने की मांग की. उधर दूसरी ओर थाना सदर की पुलिस मामले की जांच की बात तो कर रही है लेकिन कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से बच रही है.

मोबाईल फॉरेसिंक वैन से अपराध अनुसंधान तकनीकी होगी सुदृढ़ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मोबाईल फॉरेसिंक वैन से अपराध अनुसंधान तकनीकी होगी सुदृढ़ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
मुख्यमंत्री ने मोबाईल फॉरेंसिक वैन को झंडी दिखाकर किया रवाना
तकनीकी क्षमता संवर्धन के लिए 36 करोड़ रुपए से अधिक की खरीदी गई फॉरेंसिक वैन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में अपराध अनुसंधान, साक्ष्य संकलन एवं वैज्ञानिक विवेचना की क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए तैयार की गई मोबाइल फॉरेंसिक वैनों को पुलिस मुख्यालय भोपाल से झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि मोबाईल फॉरेसिंक वैन मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में सीन ऑफ क्राइम के इनवेस्टीगेशन में अत्याधिक कारगर साबित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में पुलिस विभाग द्वारा की गई यह पहल फॉरेंसिक-आधारित, त्वरित और सटीक विवेचना को बढ़ावा देगी, जिससे अपराधों के शीघ्र खुलासे, दोषसिद्धि दर में वृद्धि और नागरिकों में सुरक्षा का भरोसा और सुदृढ़ होगा।

मध्यप्रदेश पुलिस को कुल 57 मोबाईल फॉरेंसिक वैन उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनकी लागत 36 करोड़ 94 लाख 17 हजार 969 रुपए है। राशि केंद्र सरकार द्वारा प्रदाय की गई है। इनमें से 14 मोबाईल फॉरेंसिक वैन 16 दिसंबर 2025 को प्राप्त हुई है, जिन्हें रवाना किया गया है। शेष मोबाईल फॉरेसिंक वैन भी शीघ्र ही जिलों को उपलब्ध कराई जाएंगी।

मोबाईल फॉरेंसिक वैन अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित हैं, जिनमें स्टीरियो माइक्रोस्कोप, वेइंग बैलेंस, डीएसएलआर कैमरा, मिनी फ्रिज, एलईडी टीवी स्क्रीन, थर्मल प्रिंटर, बॉडी-वॉर्न कैमरा सहित आवश्यक उपकरण शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, वैनों में जांच किट, अपराध स्थल सुरक्षा किट, फिंगर प्रिंट, रक्त व बाल पहचान, हाई-इंटेंसिटी फॉरेंसिक लाइट सोर्स, पैर व टायर निशान, आगजनी, साक्ष्य पैकिंग, बुलेट होल, गनशॉट अवशेष, नशीले पदार्थ, विस्फोटक पहचान तथा डीएनए कलेक्शन एवं चेन ऑफ कस्टडी से संबंधित किट भी उपलब्ध हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुलिस महानिदेशक- महानिरीक्षक सम्मेलन- 2025 को किया संबोधित

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुलिस महानिदेशक- महानिरीक्षक सम्मेलन- 2025 को किया संबोधित
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की धरती से नक्सलवाद को उखाड़ फेंकने के लिए पुलिस फोर्स को बधाई और शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस मोर्चे पर अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि 17 दिसंबर के विधानसभा के विशेष सत्र में भी पुलिस फोर्स की सराहना हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नक्सलवाद से प्रभावित रहे क्षेत्रों में विकास और जनकल्याण की गतिविधियां इस प्रकार संचालित की जाएं, ताकि नक्सलवाद पुनः अंकुरित ना हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव पुलिस मुख्यालय में पुलिस महानिदेशक-महा निरीक्षक सम्मेलन वर्ष 2025 को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अपने प्रभार के क्षेत्रों में आकस्मिक निरीक्षण जैसी गतिविधियां तत्काल आरंभ करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के पुलिस मुख्यालय आगमन पर उन्हें गार्ड आफ ऑनर दिया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सलामी गारद का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना तथा वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वागत किया। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव गृह शिवशेखर शुक्ला, तथा वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में आरंभ हुई कान्फ्रेंस में पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने बताया कि यह कान्फ्रेंस, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में “विकसित भारत: सुरक्षा आयाम” विषय पर रायपुर में हुऐ पुलिस महानिदेशक- महानिरीक्षकों के अखिल भारतीय सम्मेलन के निर्देश और क्रियात्मक बिंदुओं के प्रदेश में क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए आयोजित की गई है। उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय सम्मेलन में आंतरिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था, पुलिस आधुनिकीकरण, महिला सुरक्षा, पुलिस थाना परिसरों के पुनर्विकास, सिंहस्थ-2028 और साइबर इनीशिएटिव्स, पुलिसिंग में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग, नवीन कानूनों के प्रचार- प्रसार, कम्युनिटी पुलिसिंग, आपदा प्रबंधन में पुलिस की भूमिका, नशा-मुक्ति के लिए किए जा रहे प्रयासों, टूरिस्ट पुलिसिंग, फॉरेंसिक साइंस, साइबर अपराधों की रोकथाम और सड़क सुरक्षा आदि विषयों पर राज्य शासन से अपेक्षाओं के संबंध में विचार-विमर्श हुआ।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान युग में सोशल मीडिया अत्यंत शक्तिशाली साधन होने के साथ-साथ गंभीर चुनौती बनकर उभरा है। इसके दुरुपयोग से अफवाह, अपराध और भ्रम फैलाने की संभवनाएं भी बढ़ी हैं। इसलिए आवश्यक है कि हम सोशल मीडिया की शक्ति का सकारात्मक और रचनात्मक सामग्री के उपयोग करें। किसी भी भ्रामक या उकसाऊ सामग्री को समय रहते पहनाकर उस पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करना आज की आवश्यकता है। इसके साथ ही सोशल मीडिया के युग में पुलिस से त्वरित सहायता की अपेक्षा भी जनसामान्य में बढ़ी है। इन अपेक्षाओं और भावनाओं के अनुरूप पीड़ित को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए पुलिस बल को तकनीकी रूप से दक्ष और साधन संपन्न होना होगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुलिस के बारे में जनसामान्य की धारणा बदलने और पुलिस के जनता से बेहतर संवाद के लिए विशेष पहल करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि पुलिस अपनी उपलब्धियों और सकारात्मक गतिविधियों के संबंध में जनप्रतिनिधियों और जनसामन्य से जानकारियां साझा करें। पुलिस अधिकारी बेहतर संवाद के लिए मीडिया के माध्यम से सक्रिय रहें। पुलिस की छवि मदद करने वाली हो, हमारा प्रयास हो कि लोग पुलिस को भय नहीं विश्वास की नजरों से देखें। पुलिस से अपराधियों में भय हो लेकिन आमजन में भरोसे और सुरक्षा की भावना विकसित हो। इस विश्वास को बनाये रखना ही हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। सामुदायिक पुलिसिंग गतिविधियों को प्रोत्साहित करते हुए महिला सुरक्षा और बच्चों की सुरक्षा के लिए समाज में वातावरण बनाना आवश्यक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी भाषा और व्यवहार के प्रति सजग-सतर्क रहने की सलाह दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पुलिस में नवाचार करने और सामाजिक सरोकार से गतिविधियां संचालित करने वालों को प्रोत्साहित किया जाए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी के लिए पुलिस को जागरूकता और तकनीक दोनों पर कार्य करना होगा। दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में ब्लैक स्पॉट की पहचान कर विशेष रणनीति बनाई जाए। संवेदनशील मार्गों पर नियमित पेट्रोलिंग, गति नियंत्रण, शराब पीकर वाहन चलाने पर सख्त निगरानी तथा यातायात नियमों के पालन को सुनिश्चित करने से दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है। उन्होंने सड़क दुर्घटना में घालय व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने वालों के लिए लागू राहवीर योजना की जानकारी का विस्तार करने की आश्यकता बताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ड्रायवरों के आँखों के परीक्षण के लिए विशेष शिविर आयोजित किए जाएं। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि 108 एम्बुलेंस के ड्रायवरों का निजी अस्पतालों से गठजोड़ विकसित नहीं हो।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महिला सुरक्षा राज्य सरकार और पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। जिन क्षेत्रों में महिलाओं के विरूद्ध अपराधों की संभावना अधिक रहती है वहां विशेष निगरानी, नियमित गश्त और त्वरित कार्यवाही की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। प्रदेश में नशे के विरुद्ध वातावरण बनाने के उद्देश्य से ही धार्मिक शहरों में शराब बंदी लागू की गई है। इन शहरों में अन्य तरीकों से शराब बेचने वालों के विरूद्ध कठोर कार्यवाही की जाए। शराब के अलावा दवा या अन्य रासायनिक पदार्थों के नशे की गतिविधियों को किसी भी स्थिति में बरदाश्त नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पुलिस की विभिन्न गतिविधियों और विशेषज्ञताओं पर प्रशिक्षण की व्यवस्था एक ही कैम्पस में सुनिश्चित की जाए। बैठक में घनी आबादी वाले, कानून व्यवस्था की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों के विकास के लिए नगरीय प्रशासन विभाग से मिलकर कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन, बुरहानपुर सहित प्रदेश के कई शहरों में लोगों ने स्वप्रेरणा और सामुदायिक सहभागीता से अतिक्रमण हटाकर विकास गतिविधियों के क्रियान्वयन को सुगम बनाया है। ऐसे उदाहरणों को अन्य शहरों के लोगों से भी साझा किया जाए, इससे विकास गतिविधियों के संचालन के लिए सकारात्मक वातावरण बनाने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने छत्तीसगढ़ के बस्तर ओलम्पिक के समान प्रदेश में भी जनजातीय संस्कृति और परम्परा के अनुरूप सामाजिक सांस्कृतिक गतिविधियां संचालित करने के निर्देश दिए।

कॉन्फ्रेंस में आतंकवाद विरोधी दस्ते, कानून व्यवस्था, वामपंथी उग्रवाद, पुलिस आधुनिकीकरण, महिला सुरक्षा, सिंहस्थ 2028, साइबर सुरक्षा, पुलिस में तकनीक और आर्टीफिशियल उपयोग तथा फौरेंसिक गतिविधियों पर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा प्रस्तुतिकरण दिए गए

बाबा के बताए मार्ग पर चलकर ही बनेगा विकसित छत्तीसगढ़: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

बाबा के बताए मार्ग पर चलकर ही बनेगा विकसित छत्तीसगढ़: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
बाबा गुरु घासीदास द्वारा बताए गए सत्य, समानता और मानवता के मार्ग पर चलकर ही छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार महापुरुषों के आदर्शों और सपनों के अनुरूप समतामूलक, न्यायपूर्ण और समृद्ध छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में निरंतर प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज मुंगेली जिले के लालपुर में आयोजित गुरु घासीदास जयंती एवं तीन दिवसीय मेला कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर लालपुर में नवीन महाविद्यालय की स्थापना, मेला एवं कार्यक्रम आयोजन हेतु दी जाने वाली राशि को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये करने, कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश द्वार निर्माण के लिए 25 लाख रुपये तथा मुंगेली सतनाम भवन के जीर्णोद्धार हेतु 25 लाख रुपये की स्वीकृति की घोषणा की।

कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्यमंत्री साय ने बाबा गुरु घासीदास मंदिर एवं जैतखाम में विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, खुशहाली और जनकल्याण के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अधिकांश गारंटियों को पूरा किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक 18 लाख आवासों की स्वीकृति दी जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रत्येक पात्र किसान से धान खरीदी के लिए पूर्णतः संकल्पित है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बीते दो वर्षों में धान के रकबे और किसानों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश की 70 लाख महिलाओं को महतारी वंदन योजना का लाभ दिया जा रहा है। पीएसी चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में नई औद्योगिक नीति लागू की गई है, जिससे समाज के प्रत्येक वर्ग का बेटा-बेटी उद्यमी बन सके। उन्होंने सभी के सहयोग से विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का आह्वान किया। इस अवसर पर सतनाम आचार संहिता एवं जागरूकता कैलेंडर का भी विमोचन किया गया।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि अनुसूचित जाति प्राधिकरण को सशक्त करते हुए इसके बजट को 50 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 75 करोड़ रुपये किया गया है। कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में सर्व समाज का समावेशी विकास हो रहा है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित समाज के पांच प्रतिभावान बेटा-बेटियों को पायलट प्रशिक्षण हेतु 15-15 लाख रुपये की सहायता देने का निर्णय सरकार की दूरदर्शिता को दर्शाता है।

कार्यक्रम में खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, विधायक डोमन लाल कोरसेवाड़ा, पूर्व विधायक सनम जांगड़े, जिला पंचायत अध्यक्ष कांत पांडेय, उपाध्यक्ष मती शांति देवचरण भास्कर, जनपद अध्यक्ष लोरमी मती वर्षा विक्रम सिंह, नगर पंचायत अध्यक्ष सुजीत वर्मा सहित अनेक जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में सतनामी समाज के अनुयायी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ सरकार बाबा गुरु घासीदास के बताए मार्ग पर चलकर सभी समाज के हित में कर रही है कार्य – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

छत्तीसगढ़ सरकार बाबा गुरु घासीदास के बताए मार्ग पर चलकर सभी समाज के हित में कर रही है कार्य – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज दुर्ग जिले के भिलाई सेक्टर-6 स्थित सतनाम भवन में आयोजित परमपूज्य बाबा गुरु घासीदास जी की 269वीं जयंती एवं गुरु पर्व कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने सतनाम भवन में बाबा गुरु घासीदास जी की गुरु-गद्दी के दर्शन कर विधिवत पूजा-अर्चना की तथा प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि एवं कल्याण की कामना की।

इस गरिमामय आयोजन में प्रदेश के तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, कौशल विकास तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग, विधि एवं विधायी मंत्री गजेन्द्र यादव, अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं विधायक डोमन लाल कोर्सेवाड़ा तथा विधायक रिकेश सेन विशेष रूप से उपस्थित थे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि 18वीं सदी में जब समाज में छुआछूत, भेदभाव और असमानता चरम पर थी, उस समय बाबा गुरु घासीदास जी ने “मनखे-मनखे एक समान” का महान संदेश देकर मानवता को नई दिशा प्रदान की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार बाबा गुरु घासीदास जी के इन्हीं आदर्शों और शिक्षाओं को आत्मसात करते हुए सभी समाज वर्गों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार भी समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के हर वर्ग तक सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना, मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना, रामलला दर्शन योजना तथा 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी जैसी योजनाओं का सीधा लाभ किसानों और आम नागरिकों को मिल रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज के समग्र विकास के उद्देश्य से अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण का गठन किया गया है, जिसमें अहिवारा विधायक डोमन लाल कोर्सेवाड़ा को प्राधिकरण का उपाध्यक्ष बनाया गया है। समाज के विकास के लिए प्राधिकरण के माध्यम से 75 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। साथ ही समाज के बेटा-बेटियों को उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने हेतु सरकार द्वारा 15 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शिक्षा ही विकास का मूलमंत्र है। इसी उद्देश्य को साकार करने के लिए जिला मुख्यालयों में नालंदा परिसर का निर्माण किया जा रहा है, जिससे प्रदेश के बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर उच्च पदों तक पहुँच सकें। उन्होंने समाज में फैल रही नशाखोरी पर चिंता व्यक्त करते हुए इसके विरुद्ध कठोर कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बेरोजगारी दूर करने के लिए राज्य सरकार द्वारा नई उद्योग नीति लागू की गई है, जिसके माध्यम से युवाओं को रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस उद्योग नीति के अंतर्गत अब तक लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। उन्होंने समाज से शिक्षा को बढ़ावा देने, समानता, सद्भाव और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री साय ने गुरु घासीदास सेवा समिति की मांगों का उल्लेख करते हुए सतनाम भवन सेक्टर-06 भिलाई में डोम निर्माण के लिए 50 लाख रुपये तथा प्रति वर्ष बाबा गुरु घासीदास जयंती कार्यक्रम के आयोजन हेतु 10 लाख रुपये की स्वीकृति देने की घोषणा की।

प्रदेश के तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने अपने उद्बोधन में कहा कि यदि बाबा गुरु घासीदास जी के “मनखे-मनखे एक समान” के संदेश को पूर्ण भाव से जीवन में उतार लिया जाए, तो समाज की सभी बुराइयों का स्वतः अंत हो जाएगा। उन्होंने सतनाम मार्ग पर चलने वालों से खान-पान और आचरण को शुद्ध रखने का आह्वान किया।

स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने अपने संक्षिप्त संबोधन में बाबा गुरु घासीदास जी के बताए मार्ग और संदेशों को जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम को अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं विधायक डोमन लाल कोर्सेवाड़ा ने भी संबोधित किया।

इस अवसर पर पूर्व विधायक सांवला राम डाहरे, गुरु घासीदास सेवा समिति के अध्यक्ष भरत लाल कुर्रे, उपाध्यक्ष मती उर्मिला भास्कर एवं समिति के अन्य पदाधिकारी, जिला पंचायत अध्यक्ष मती सरस्वती बंजारे सहित अनेक जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु और नागरिक उपस्थित थे।

जीएसटी दरों में बदलाव से मध्यप्रदेश की कमाई घटी,नवाचारों से भरपाई का दावा

जीएसटी दरों में बदलाव से मध्यप्रदेश की कमाई घटी,नवाचारों से भरपाई का दावा
भोपाल। उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने यह माना कि जीएसटी दरों में हुए बदलाव व अन्य दीगर कारणों से इस साल जीएसटी से अनुमानित राजस्व संग्रह में कमी आ सकती है। बावजूद इसके सरकार नवाचारों व लंबित वसूली पर फोकस कर साल के अंत तक अपेक्षित लक्ष्य हासिल कर लेगी।

साल के बकाया 4 माह से काफी उम्मीद
देवड़ा गुरुवार को अपने विभागों की उपलब्धियां बता रहे थे। सरकार के दो साल पूरे होने पर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने यह माना कि वित्तीय साल की पहली छमाही में राजस्व संग्रह में लक्ष्य को हासिल करने में कमी रही,लेकिन बीते दो माह में राजस्व जुटाने में तेजी आई है।उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष के बकाया चार महीनों में लक्ष्य को हासिल करने के पूरे जतन होंगे।
राजस्व जुटाने नवाचारों पर फोकस
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व संग्रह का लक्ष्य हासिल करने सभी विभागों को नवाचार पर फोकस करने के लिए कहा गया है। साल की पहली छमाही में जीएसटी राजस्व संग्रह में करीब 13.5 प्रतिशत की कमी थी। समीक्षा के बाद,जीएसटी की,जीएसटीएन,बोगस पंजीयन व कर चोरी पर सख्ती से रोक,विभागीय गोपनीय एंट्रीज का स्पेरो सॉफ्टवेयर से आनलाइन प्रबंधन, कर संबंधी डेटा एनालिसिस के लिए दिशा पोर्टल का उपयोग शुरू किया गया। नतीजतन,बीते दो माह में ही
जीएसटी राजस्व कलेक्शन में 5557 करोड़ का इजाफा हुआ। इसी तरह,पंजीयन एवं मुद्रांक मामलों में ही कसावट लाकर बीते 8 माह में 7579 करोड़ राजस्व जुटाया गया। जो इसी अवधि तक बीते साल की तुलना में 10.15 प्रतिशत ज्यादा है।

जीएसटी दरों में बदलाव एक बड़ी वजह
वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी दरों में बीते माह से हुए बदलाव से इस मद में रेवन्यू कलेक्शन में कमी संभव है। इसकी पूर्ति अन्य कराधानों से करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए वृत्ति कर अधिनियम यानी वैट में भी ईज आफ डूइंग विजनस के तहत अनेक तरह की सुविधाएं करदाताओं को दी गई।
बता दें कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में जीएसटी से 42,140 करोड़ रुपए राजस्व संग्रह का अनुमान बजट में लगाया गया था। मौजूदा साल के गुजरे 8 महीनों में सिर्फ 22,513 करोड़ रुपए जीएसटी से मिले। बकाया 4 महीनों में 19,627 करोड़ रुपए का शेष लक्ष्य हासिल करना आसान नहीं है।
राज्य की प्रगति के लिए जरूरी है कर्ज
एक सवाल के जवाब में वित्त मंत्री देवड़ा ने कहा कि आमतौर पर कर्ज को लेकर काफी शोर मचाया जाता है,लेकिन राज्य की प्र​गति के लिए कर्ज लेना कोई बुरी बात नहीं है। मध्य प्रदेश उन राज्यों में शामिल है जो लिए गए कर्ज का ब्याज भी अदा कर पा रहा है और मूल भी। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की मौजूदा जीएसडीपी करीब 17 लाख करोड़ से अधिक है। लिया गया कर्ज जीएसडीपी व केंद्र सरकार द्वारा तय मानकों के अनुरूप ही है।

महंगी शराब बेचने पर 5 करोड़ की पेनाल्टी
उप मुख्यमंत्री ने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि प्रदेश में एमएसपी से अधिक दाम पर शराब बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। ऐसे मामलों में संबंधित ठेकेदारों पर अब तक करीब पांच करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया। उन्होंने कहा कि आबकारी ठेकेदारों पर लंबित बकाया रकम की वसूली पर भी काम हो रहा है,लेकिन कई मामले कोर्ट में लंबित होने से वसूली में कठिनाई भी पेश आती है।

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