भौम प्रदोष व्रत आज

भौम प्रदोष व्रत आज
भौम प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है। ऐसा कहा जाता है कि इस व्रत को रखने से रोग मुक्ति, कर्ज से छुटकारा और जीवन में खुशहाली आती है। इस बार भौम प्रदोष व्रत 02 दिसंबर 2025 यानी आज के दिन रखा जा रहा है। वहीं, जो साधक इस कठिन व्रत का पालन करते हैं, उन्हें इसकी पावन कथा का पाठ जरूर करना चाहिए, क्योंकि इसके पाठ के बिना व्रत का फल नहीं मिलता है,

भौम प्रदोष व्रत का महत्व (Bhaum Pradosh Vrat Significance)
मंगलवार को आने वाले इस प्रदोष व्रत को करने से भक्तों को भगवान शिव और मंगल ग्रह दोनों का आशीर्वाद मिलता है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायी है, जो लंबे समय से किसी बीमारी से जूझ रहे हैं। इसके अलावा इस व्रत का पालन करने से कर्ज मुक्ति, जीवन में साहस, शक्ति और आत्मविश्वास आता है, और कुंडली से मंगल के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।

भौम प्रदोष व्रत की पावन कथा (Bhaum Pradosh Vrat Katha)
एक नगर में एक गरीब ब्राह्मण रहता था। उसकी पत्नी और एक पुत्र था। एक दिन, ब्राह्मण अपनी पत्नी और पुत्र को लेकर कमाने के लिए दूसरे शहर की ओर चला। रास्ते में उन्हें एक किसान मिला, जो अपनी पत्नी के साथ गायों को चरा रहा था। किसान ने उन्हें आश्रय दिया। उसी स्थान पर, ब्राह्मण की भेंट एक सिद्ध महात्मा से हुई। महात्मा ने ब्राह्मण से कहा कि वह प्रदोष व्रत का पालन करे, जो सभी दुखों को दूर करने वाला है। ब्राह्मण ने महात्मा की बात मानकर विधिपूर्वक प्रदोष व्रत करना शुरू कर दिया। कुछ ही समय में, ब्राह्मण के जीवन में परिवर्तन आने लगा। उसकी आर्थिक स्थिति सुधर गई और उसे सुख-शांति मिली।

एक बार, ब्राह्मण अपनी पत्नी और पुत्र के साथ एक नगर से गुजर रहा था। उस नगर में एक अनाथ राजकुमारी थी, जिसके पिता का राज्य छिन गया था। राजकुमारी बहुत दुखी थी और एक पेड़ के नीचे बैठ कर रो रही थी। ब्राह्मण ने अपनी पत्नी के कहने पर, दुखी राजकुमारी को सहारा दिया और उसे अपने घर ले आया।

ब्राह्मण ने राजकुमारी को भी प्रदोष व्रत की महिमा बताई। राजकुमारी ने भौम प्रदोष व्रत रखना शुरू कर दिया। कुछ समय बाद, राजकुमार, जिसने राजकुमारी का राज्य छीना था, एक युद्ध में बुरी तरह घायल हो गया। राजकुमारी की भक्ति और व्रत के प्रभाव से शिव जी ने उस राजकुमार को सपने में दर्शन दिए और उसे राजकुमारी से क्षमा मांगने को कहा। राजकुमार ने राजकुमारी से विवाह किया और उसे उसका राज्य वापस लौटा दिया। इस तरह प्रदोष व्रत के प्रभाव से राजकुमारी को उसका खोया हुआ सुख और साम्राज्य वापस मिला।

प्रदेश के हर नगर में बनेंगे नये गीता भवन – मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रदेश के हर नगर में बनेंगे नये गीता भवन – मुख्यमंत्री डॉ. यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव और गीता जयंती के पावन अवसर पर एक बड़ी सौगात देते हुए मध्यप्रदेश में शासकीय क्षेत्र के पहले अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त नये गीता भवन का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस तरह के गीता भवन प्रदेश के सभी नगर निगम, नगर पालिकाओं और नगर पंचायत स्तर पर भी बनाये जाएंगे। इंदौर का लोकार्पित यह नया गीता भवन परंपरा एवं आधुनिकता का अनूठा संगम है। राज्य शासन द्वारा धार्मिक एवं सांस्कृतिक अध्ययन एवं इससे जुड़े विभिन्न आयामों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से गीता भवन परियोजना के अंतर्गत ऐतिहासिक गोपाल मंदिर परिसर को आधुनिक गीता भवन के रूप में विकसित कर प्रदेश को समर्पित किया गया है। इस योजना के तहत स्मार्ट सिटी द्वारा इस नये गीता भवन में विकसित विविध आधुनिक सुविधाएँ नागरिकों के लिए उपलब्ध कराई गई हैं।

कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक गोलु शुक्ला, सुमित मिश्रा, श्रवण सिंह चावड़ा, अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के अध्यक्ष सावन सोनकर, गौरव रणदिवे, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव, भारत न्यास के सचिव श्रीराम तिवारी, स्मार्ट सिटी के सीईओ अर्थ जैन विशेष रूप से मौजूद थे।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मालवा की गौरवशाली विरासत, कृष्ण भक्ति और गीता का संदेश मध्यप्रदेश की दिशा तय करते हैं। उन्होंने कहा कि मालवा क्षेत्र कृष्ण लीलाओं से अछूता नहीं है। कृष्ण भगवान ने मालवा के उज्जैन में शिक्षा ग्रहण की। उन्होंने कहा कि मालवा की अहिल्या बाई होलकर ने देश में अनेक धर्म स्थलों का जीर्णोद्धार कराया और सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गीता संघर्ष में आत्मबल और जीवन में मार्गदर्शन देती है। गीता का प्रत्येक अध्याय ज्ञान, विज्ञान, दर्शन, योग और कर्तव्य की भावना से परिपूर्ण है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने विराट स्वरूप के माध्यम से मानव को भय से मुक्त कर कर्तव्य के प्रति जागरूक किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गीता जयंती के अवसर पर अनेक रिकार्ड कायम किये गये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गीता जयंती के अवसर पर आयोजित प्रतियोगिता के विजेताओं की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि विजेताओं का नगद के साथ ही ई-रिक्शा, ई-बाईक, लैपटॉप आदि प्रदान किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से संघठन, साहस, धर्म की रक्षा और अन्याय के प्रतिकार का संदेश मिलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गीता जीवन के हर चरण में मार्गदर्शक है। गीता से भक्ति मार्ग, ज्ञान मार्ग और कर्म मार्ग से मोक्ष प्राप्ति का रास्ता भी दिखायी देता है। गीता संकट में बल देती है, संघर्ष में आत्मबल, उलझन में सारथी और अंधकार में अटल साथी बनती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है ‍कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्मार्ट सिटी परियोजना प्रारंभ की है। इस परियोजना से विरासत का संरक्षण करते हुए हम विकास की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य शासन के संस्कृति विभाग के अंतर्गत वीर भारत न्यास द्वारा प्रकाशित तथा रामेश्‍वर लखनलाल पाटीदार द्वारा ‍लिखित श्रीकृष्ण चरित मानस और राघवदास पंडितदास द्वारा लिखित अमृतस्य अवंतिका का विमोचन भी किया। उन्होंने श्रीकृष्ण चरित मानस के लेखक रामेश्वर लखनलाल पाटीदार को पाँच लाख रूपये ‍दिये जाने की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम के बाद संजीव मालवीय द्वारा निर्देशित कृष्ण लीलाओं पर आधारित नृत्य नाटिका को भी देखा।

इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि इंदौर के लिये आज गौरव का दिन है। उन्होंने कहा कि गीता ने ‍सिखाया है कि अगर हम सभी अपने-अपने धर्म एवं कर्तव्यों का पालन करेंगे तो अधिकारों का संरक्षण स्वत: होगा। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में मध्यप्रदेश में नया सांस्कृतिक प्रवाह देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नेतृत्व में विरासत से ‍विकास की ओर तेजी से बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गोपाल मंदिर में किया पूजन-अर्चन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम के पूर्व ऐतिहासिक गोपाल मंदिर में पूजन-अर्चन किया। उन्होंने प्रदेश की खुशहाली और समृद्धि के लिए कामना की। उन्होंने गोपाल मंदिर में हुए विकास कार्यों विशेषकर अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त लाइब्रेरी और प्रदर्शनी विथिका का अवलोकन भी किया।

अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त गीता भवन
इंदौर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अंतर्गत राजवाड़ा स्थित गोपाल मंदिर में नया गीता भवन बनाया गया है। इस गीता भवन की विशेषता यह है कि यहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों, प्रवचनों और शैक्षणिक आयोजनों हेतु अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त 550 सीट का एक खूबसूरत सभागृह भी बनाया गया है।

सकारात्मक एवं आध्यात्मिक वातावरण से युक्त 50-सीटर रीडिंग हॉल तथा आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना की गई है। लाइब्रेरी में अध्यात्म, दर्शन, योग, ध्यान, भारतीय संस्कृति, माइंडफुलनेस तथा जीवन-प्रबंधन से संबंधित लगभग 1200 पुस्तकों का समृद्ध संग्रह उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त, डिजिटल आर्काइव के माध्यम से अनेक ई-बुक्स, ऑडियो-वीडियो व्याख्यान, ऑनलाइन कोर्स तथा अन्य डिजिटल संसाधनों तक सरलतापूर्वक पहुँच सुनिश्चित की गई है। लाइब्रेरी की आंतरिक सज्जा को प्राकृतिक रंगों, आध्यात्मिक कलाकृतियों, इनडोर पौधों तथा सौम्य प्रकाश व्यवस्था के माध्यम से इस प्रकार डिज़ाइन किया गया है कि उपयोगकर्ताओं को शांत, प्रेरणादायी तथा एकाग्रता-उन्मुख वातावरण प्राप्त हो सके।

मंदिर परिसर के पुनर्विकसित भागों में प्रदर्शनी कक्ष विकसित किए गए हैं, जिससे यह स्थल धार्मिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ कला एवं संस्कृति को एक साथ बढ़ावा देते हुए जनता के लिए एक समावेशी सांस्कृतिक अवसंरचना भी प्रदान करेगा।

मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना से बदलेगी शहरों की सूरत और सीरत

मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना से बदलेगी शहरों की सूरत और सीरत
छत्तीसगढ़ के शहरों में आइकॉनिक (Iconic) विकास कार्यों के लिए राज्य शासन ने इस साल मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना शुरू की है। पहले चरण में इसे राज्य के सभी 14 नगर निगमों में लागू किया गया है। इसके तहत शहरों में मजबूत अधोसंरचना के विकास के बड़े काम मंजूर किए जा रहे हैं। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद योजना के अंतर्गत अब तक 13 नगर निगमों में 26 कार्यों के लिए 429 करोड़ 45 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इनमें मरीन ड्राइव विस्तार, ऑक्सीजोन-कम-स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, अंतरराज्यीय बस टर्मिनल, रोड जंक्शन, हाइटेक बस स्टैंड, ऑडिटोरियम, तालाब सौंदर्यीकरण, उद्यान विकास, जलापूर्ति सुदृढ़ीकरण, कॉरीडोर निर्माण, गौरव पथ निर्माण, सड़क बाइपास एवं चौड़ीकरण जैसे वृहद कार्य शामिल हैं। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में योजना के लिए 500 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। स्वीकृत कार्यों में से पांच कार्यों के लिए संबंधित फर्म्स को कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं। वहीं पांच कार्यों का भूमिपूजन भी हो गया है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य शासन की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के बारे में कहा कि इस योजना से शहरों के अधोसंरचना विकास में बड़ा बदलाव आएगा। शहरों के सतत् विकास और नागरिक केंद्रित समाधानों को ध्यान में रखते हुए यह योजना तैयार की गई है। छत्तीसगढ़ के शहरों को आधुनिक, सुंदर और जीवंत बनाने में यह योजना प्रभावी साबित होगी। शहरों की सूरत और सीरत बदलने में इसकी अहम भूमिका होगी।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बताया कि जीवंत शहरों के निर्माण और इज ऑफ लीविंग के लिए इस साल के बजट में शामिल कार्ययोजना के अनुसार मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना प्रारंभ की गई है। पहले चरण में राज्य के सभी नगर निगमों को इसमें शामिल किया गया है। चरणबद्ध रूप से इसे सभी नगरीय निकायों में लागू किया जाएगा। योजना के माध्यम से शहरों में बढ़ती आबादी के मद्देनजर सुगम यातायात के लिए मुख्य सड़कों के निर्माण, चौड़ीकरण, बाइपास सड़क, फ्लाई-ओव्हर, सर्विस-लेन, अंडर-पास तथा अन्य बुनियादी ढांचों का विकास किया जाएगा। राज्य के शहरों को सुंदर, आधुनिक, व्यवस्थित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए रिवर-फ्रंट डेवलपमेंट और भव्य उद्यानों का भी निर्माण योजना के तहत किए जाएंगे। योजना में ऐसे आइकॉनिक कार्य व परियोजनाएं ली जाएंगी जो शहर के विकास का उदाहरण बन सके।

मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना से होंगे ये काम
मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना से प्रमुख रूप से मुख्य सड़क निर्माण एवं मुख्य सड़क चौड़ीकरण कार्य, बाइपास रोड निर्माण, मुख्य सड़क में सर्विस रोड निर्माण कार्य, फ्लाई-ओव्हर निर्माण कार्य, अंडर-पास सड़क निर्माण कार्य, जलप्रदाय योजना के कार्य, सीवरेज नेटवर्क निर्माण कार्य, एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के कार्य, मुख्य सड़कों में रोटरी चौक निर्माण पुनर्व्यवस्था कार्य, स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स निर्माण, हाइटेक बस स्टैण्ड निर्माण, ऑडिटोरियम निर्माण, भव्य उद्यान विकास एवं रिवर-फ्रंट डेवलपमेंट कार्य तथा पर्यटन स्थलों के विकास के कार्य किए जाएंगे। इनके साथ ही शहर की जरूरत के अनुसार अन्य विशिष्ट कार्य भी किए जाएंगे।

कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति करेगी मॉनिटरिंग
मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के कार्यों की मॉनिटरिंग और निगरानी कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय समिति द्वारा की जाएगी। समिति प्रगतिरत कार्यों की नियमित समीक्षा कर समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करेगी। संबंधित नगर निगम के आयुक्त समिति के सदस्य-सह-सचिव होंगे। वहीं जिले में लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन अभियंता समिति के अन्य सदस्य होंगे।

रायपुर में 91.27 करोड़, रायगढ़ में 64.66 करोड़ और बिलासपुर में 57.92 करोड़ के काम, कोरबा में गौरव पथ के लिए 36.55 करोड़
मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना से रायपुर नगर निगम में कुल 91 करोड़ 27 लाख रुपए के चार कार्यों की स्वीकृति दी गई है। इनमें नौ करोड़ दो लाख रुपए की लागत से 18 रोड जंक्शन्स (Road Junctions) के विकास, 23 करोड़ 38 लाख रुपए से जल आपूर्ति व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण, 18 करोड़ 86 लाख रुपए के महादेव घाट पुनरूद्धार योजना फेज-1 और तेलीबांधा में 40 करोड़ रुपए के टेक्नीकल टॉवर का निर्माण शामिल है। रायगढ़ नगर निगम में कुल 64 करोड़ 66 लाख रुपए के तीन कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इनमें 29 करोड़ 57 लाख रुपए का न्यू शनि मंदिर से छठघाट तक मरीन ड्राइव विस्तार, 12 करोड़ 81 लाख रुपए का एफ.सी.आई. के पास ऑक्सीजोन-कम-स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स विकास कार्य और 22 करोड़ 28 लाख रुपए का न्यू सारंगढ़ बस स्टैंड (अंतरराज्यीय बस टर्मिनल) का उन्नयन कार्य शामिल है।

बिलासपुर नगर निगम में योजना के तहत कुल 57 करोड़ 92 लाख रुपए की लागत के नौ कार्य मंजूर किए गए हैं। इनमें 17 करोड़ रुपए का अशोक नगर-बिरकोनी रोड चौड़ीकरण, नौ करोड़ 74 लाख रुपए का अरपा इंद्रा सेतु से राम सेतु तक अटल पथ निर्माण, पांच करोड़ नौ लाख रुपए का मंगला चौक से आजाद चौक तक सड़क निर्माण, पांच करोड़ 26 लाख रुपए का गुरुनानक चौक से मोपका/राजकिशोर नगर तिराहा तक डामरीकरण एवं नाला निर्माण, दो करोड़ 22 लाख रुपए का रकबंधा तालाब उसलापुर का सौंदर्यीकरण, छह करोड़ 82 लाख रुपए का सिरगिट्टी क्षेत्र में सीसी रोड एवं नाली निर्माण तथा एक करोड़ 70 लाख रुपए का जोन-7 के अंतर्गत सीसी रोड विकास कार्य शामिल हैं। तिफरा में सीसी रोड और नाली निर्माण के लिए छह करोड़ 48 लाख रुपए तथा शहर में स्ट्रीट लाइट व विद्युत लाइट पोल के प्रतिस्थापन के लिए तीन करोड़ 62 लाख रुपए से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। कोरबा में सीएसईबी चौक से जैन चौक – आईटीआई चौक से कोसाबाड़ी चौक तक गौरव पथ के निर्माण के लिए 36 करोड़ 55 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं।

धमतरी में बनेगा हाइटेक बस स्टैंड और ऑडिटोरियम, अंबिकापुर में मां महामाया कॉरीडोर के लिए 11.6 करोड़
योजना के तहत धमतरी नगर निगम में दो कार्यों के लिए कुल 24 करोड़ 64 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं। इनमें 17 करोड़ 70 लाख रुपए का नवीन हाइटेक बस स्टैंड निर्माण और छह करोड़ 94 लाख रुपए का ऑडिटोरियम निर्माण शामिल है। जगदलपुर नगर निगम में भी दो कार्यों के लिए कुल 19 करोड़ 95 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इनमें दस करोड़ छह लाख रुपए का मुक्तिधाम से समुद्र चौक, पॉवर हाउस चौक, पंचपथ चौक होते हुए लालबाग आमागुड़ा चौक तक मार्ग चौड़ीकरण और नौ करोड़ 89 लाख रुपए का दलपत सागर विकास व सौंदर्यीकरण कार्य शामिल है। बीरगांव नगर निगम में दो कार्यों के लिए 24 करोड़ 75 लाख रुपए से अधिक की राशि मंजूर की गई है। इनमें सात करोड़ 90 लाख रुपए की लागत से उरला नाला निर्माण (5.08 किलोमीटर) तथा 16 करोड़ 85 लाख रुपए का शनि मंदिर से फिल्टर प्लांट होते हुए कन्हेरा मोड़ तक सड़क निर्माण शामिल है।

नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा योजना के तहत चिरमिरी नगर निगम में चार कार्यों के लिए कुल 14 करोड़ 84 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं। इनमें आठ करोड़ 65 लाख रुपए का सोनामली नाका से दीनदयाल चौक पौढ़ी तक बाइपास निर्माण, तीन करोड़ 57 लाख रुपए का कोरिया कॉलरी शाखा शिवमंदिर के पास विकास एवं सौंदर्यीकरण, 69 लाख रुपए का पोड़ी वेस्ट चिरमिरी में अटल परिसर से मालवीय नगर तक सड़क चौड़ीकरण तथा एक करोड़ 93 लाख रुपए का अहिंसा चौक हल्दीवाड़ी से अग्रसेन चौक बड़ा बाजार तक सड़क चौड़ीकरण कार्य शामिल है। अंबिकापुर नगर निगम में दो कार्यों के लिए कुल 13 करोड़ 99 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इनमें दो करोड़ 39 लाख रुपए की लागत से पुष्पवाटिका सरगांव पार्क का विकास एवं जल आपूर्ति व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के साथ ही 11 करोड़ 60 लाख रुपए की लागत से मां महामाया कॉरीडोर का निर्माण शामिल है।

भिलाई-चरोदा में बनेगा केनाल रोड, रिसाली में तीन सड़कों के विकास और चौड़ीकरण के लिए 17.33 करोड़
दुर्ग नगर निगम में नौ करोड़ 84 लाख रुपए की लागत से धमधा मार्ग से आदित्य नगर होते हुए रायपुर नाका अंडर-ब्रिज की ओर तथा हनुमान नगर होते हुए जुनवानी रोड तक फोरलेन निर्माण, भिलाई-चरोदा नगर निगम में डभरा पारा से इन्द्रानगर तक केनाल रोड निर्माण के लिए 29 करोड़ 43 लाख रुपए और भिलाई नगर निगम में 24 कार्यों के लिए 24 करोड़ 30 लाख रुपए मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना से स्वीकृत किए गए हैं। रिसाली नगर निगम में तीन कार्यों के लिए कुल 17 करोड़ 33 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं। इनमें मैत्री कुंज से मधुरिशा फेज-3 तक, आजाद चौक से कृष्णा टॉकीज रोड तक तथा श्रीराम चौक से बालाजी अपार्टमेंट (वार्ड क्रमांक-23) तक सड़क के विकास एवं चौड़ीकरण के लिए क्रमशः पांच करोड़ 21 लाख, सात करोड़ 97 लाख तथा चार करोड़ 15 लाख रुपए शामिल हैं।

महमूद मदनी के बयान पर विवाद बढ़ा, हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने फूंका मौलाना का पुतला

महमूद मदनी के बयान पर विवाद बढ़ा, हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने फूंका मौलाना का पुतला
राजधानी में शनिवार को एक कार्यक्रम में मौलाना महमूद मदनी द्वारा जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा वाले बयान ने तूल पकड़ लिया है। इसी क्रम में रविवार दोपहर में हिंदू संगठनों ने रोशनपुरा चौराहा पर मौलान मदनी के पुतले को जूतों की माला पहनाई। जूतों से पीटा उसके बाद पुतले में आग लगा दी।

विश्व हिंदू परिषद एवं बजरंग दल ने मौलाना के बयान को देश और हिंदू समाज के खिलाफ बताते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की है। बजरंग दल का कहना है कि मौलाना मदनी ने वंदे मातरम, देश और हिंदू धर्म के खिलाफ बयान दिए हैं।

 

विश्व हिंदू परिषद के प्रांत सह मंत्री जितेंद्र चौहान ने कहा कि मौलाना मदनी ने बयान दिया है कि जिहाद जब तक चलेगा…जुल्म होगा, तो बताएं कि कहां जुल्म हो रहा है?

उन्होंने कहा कि बंटवारा के समय मुसलमानों की मांग पर पाकिस्तान दे दिया गया, अब उन्हें कौन सा पाकिस्तान चाहिए। लगातार वंदे मातरम, सुप्रीम कोर्ट का विरोध कर ये लोग मुस्लिम युवाओं को बहकाकर जिहाद और गृह युद्ध की तैयारी कर रहे हैं।

परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि मदनी जैसे लोग मुस्लिम युवाओं को जुल्म, जन्नत और जिहाद जैसे नारों के नाम पर भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ कट्टरपंथी तत्व देश की न्याय व्यवस्था और राष्ट्रीय स्वाभिमान को आहत करने की कोशिश कर रहे हैं। मुस्लिम समाज को भी समय रहते ऐसे कट्टरपंथी तत्वों से दूरी बनानी होगी।

उनका आरोप है कि हलाल के नाम पर अवैध कमाई कर आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने की कोशिश की जाती है, लेकिन अब ऐसा संभव नहीं होगा।

बता दें कि भोपाल में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की एक बैठक में शनिवार को मौलाना महमूद मदनी ने कहा था कि मौजूदा दौर में इस्लाम और मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने की कोशिशें बढ़ गई हैं। जिहाद जैसे मुकद्दस शब्द को आतंक और हिंसा से जोड़ना जानबूझकर किया जा रहा है।

उन्होंने कहा था कि लव जिहाद, लैंड जिहाद, थूक जिहाद जैसे शब्द मुसलमानों को बदनाम करने के लिए गढ़े गए हैं। इस्लाम में जिहाद का मतलब अन्याय और ज़ुल्म के खिलाफ संघर्ष है। जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा।

छत्तीसगढ़ में 37 नक्सलियों ने किया सरेंडर, माओवादियों पर था 65 लाख रुपये का इनाम

छत्तीसगढ़ में 37 नक्सलियों ने किया सरेंडर, माओवादियों पर था 65 लाख रुपये का इनाम
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में 37 नक्सलियों ने सरेंडर किया है। मिनपा जैसी घटना में शामिल नक्सली ने अपने 36 साथियों के साथ आत्मसमर्पण किया है। इस समर्पण के साथ ही एक और टीम बिखरती हुई नजर आ रही है, इन सभी नक्सलियों के ऊपर 65 लाख का इनाम घोषित था। दंतेवाड़ा पुलिस अधीक्षक गौरव राय ने बताया कि पूना मारगेम जिसका अर्थ पुनर्वास से पुनर्जीवन पहल पर भरोसा जताते हुए नक्सली हिंसा का मार्ग छोड़कर शांति और प्रगति के मार्ग को अपना रहे हैं और समाज की मुख्यधारा में शामिल हो रहे है।

20 महीने में 508 नक्सलियों ने किया सरेंडर
भारत सरकार और छत्तीसगढ़ राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रेरित होकर, पिछले 20 महीनों में दंतेवाड़ा जिला में 165 ईनामी नक्सली सहित कुल 508 से अधिक नक्सलियों ने हिंसा का मार्ग छोड़कर सामाजिक मुख्यधारा को अपनाया है। नक्सलियों के नेतृत्व से लेकर आधार क्षेत्र के सक्रिय कैडर तक बड़ी संख्या में नक्सली संगठन से अलग हो चुके हैं। लोन वर्राटू अभियान के तहत अब तक 333 इनामी नक्सली सहित कुल 1160 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। जिसमें जिला दन्तेवाड़ा के साथ-साथ सीमावर्ती जिलों बस्तर, बीजापुर एवं नारायणपुर के 916 पुरूष नक्सली तथा 244 महिला नक्सली शामिल हैं।

उज्जैन में मुख्यमंत्री के बेटे का सामूहिक विवाह: सादगी, सामाजिक समानता और भारतीय परंपराओं का अनोखा संगम

उज्जैन में मुख्यमंत्री के बेटे का सामूहिक विवाह: सादगी, सामाजिक समानता और भारतीय परंपराओं का अनोखा संगम
उज्जैन।मध्यप्रदेश के इतिहास में 30 नवंबर 2025 का दिन एक अनूठे और यादगार सामाजिक आयोजन के रूप में दर्ज हो गया, जब प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के छोटे बेटे अभिमन्यु यादव ने उज्जैन में आयोजित एक सामूहिक विवाह सम्मेलन में वैदिक विधि से अपनी पत्नी इशिता के साथ सात फेरे लिए। यह आयोजन सिर्फ एक पारिवारिक समारोह नहीं था; यह सामाजिक समरसता, सादगी और समानता का ऐसा उदाहरण बन गया जिसने पूरे प्रदेश में चर्चा का केंद्र बना दिया।

इस सामूहिक विवाह सम्मेलन में कुल 22 जोड़े विवाह बंधन में बंधे। मुख्यमंत्री के बेटे का उसी मंच पर, उसी वैदिक पद्धति से, सामान्य परिवारों के युवाओं के साथ विवाह सम्पन्न होना उस सामाजिक संदेश को मजबूत करता है, जिसे आज का समाज बड़ी उम्मीद से देख रहा है—कि विवाह जीवन का संस्कार है, और इसमें आर्थिक दिखावे या वर्गीय भेदभाव की कोई आवश्यकता नहीं।

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बैलगाड़ी में बारात और सादगी का असाधारण संदेश
अभिमन्यु यादव की बारात का सबसे चर्चित दृश्य वह रहा जब वे अपनी शादी के लिए बैलगाड़ी में बारात लेकर पहुंचे। मुख्यमंत्री के बेटे की ऐसी सरल और ग्रामीण परंपरा से भरी एंट्री ने लोगों के मन में उत्साह, आश्चर्य और सम्मान का अनोखा मिश्रण पैदा कर दिया। कई बुजुर्गों ने कहा कि वे पहली बार किसी बड़े राजनीतिक परिवार के बेटे को इतनी सादगी में विवाह रचाते देख रहे हैं।

बैलगाड़ी, शहनाई, परंपरागत वाद्य, गाँव की झलक… यह सब मिलकर ऐसा प्रतीक बना मानो समारोह यह कह रहा हो कि भारतीय संस्कृति का असली सौंदर्य भव्यता नहीं बल्कि उसकी सरलता और पारिवारिक अपनत्व में है।

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सामूहिक विवाह: सामाजिक समानता का चित्र
इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत थी कि मुख्यमंत्री के बेटे ने उसी मंडप में विवाह किया जहाँ ड्राइवर, मजदूर, किसान और निम्न-मध्यम वर्गीय परिवारों के अन्य 21 जोड़े बैठे थे। किसी भी जोड़े के लिए मंच, विधि, समय या अवसर में कोई भेदभाव नहीं किया गया।

मंच के नीचे लोग यह कहते हुए सुनाई दिए—
“एक मंडप के नीचे मुख्यमंत्री का बेटा भी फेरे ले रहा है और एक मजदूर का बेटा भी। यही तो असली समानता है।”

समारोह में मौजूद सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस आयोजन को “प्रगतिशील संदेश” बताते हुए कहा कि इस प्रकार के विवाह उन युवाओं को प्रेरणा देंगे जो बढ़ते विवाह खर्च के कारण आर्थिक बोझ महसूस करते हैं।

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विशेष अतिथियों की उपस्थिति, लेकिन आयोजन फिर भी ‘जनपक्षीय’
कार्यक्रम में आध्यात्मिक गुरू संतों, सामाजिक हस्तियों और कई बड़े राजनीतिक नेताओं की उपस्थिति रही। बाबा रामदेव, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जैसी हस्तियों ने युवाओं को आशीर्वाद दिया। कई राष्ट्रीय स्तर के नेता इस विवाह के साक्षी बने, लेकिन फिर भी यह आयोजन अपने मूल चरित्र में जनसुलभ और सहज बना रहा।

ना कोई भव्य मंच, ना कोई विशेष VIP एरिया।
सभी लोग एक ही पंडाल में, एक ही फर्श पर बैठे—यह दृश्य अपने आप में दुर्लभ था।

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विवाह की वैदिक परंपरा और संस्कृति की झलक
सभी 22 जोड़ों के विवाह संस्कार एक ही समय में, वैदिक पद्धति के अनुसार पूरे किए गए। पंडाल के भीतर वेदों के मंत्र गूंजते रहे।
हवन, फेरे, कन्यादान, आशीर्वाद—हर अनुष्ठान में परंपरा की गहरी छाप थी।
अभिमन्यु–इशिता समेत सभी जोड़े एक सरल, शांत, आध्यात्मिक वातावरण में विवाह बंधन में बंधे।

विवाह स्थलों की वह अव्यवस्था, शोरगुल, बैंडबाजा और भीड़भाड़ यहाँ देखने को नहीं मिली। इसके बजाय पंडाल में अनुशासन, संतुलन और शांति की अनुभूति होती रही।

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आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को लाभ
सामूहिक विवाह सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण पहलू यह था कि आयोजन समिति ने प्रत्येक नवविवाहित जोड़े को गृहस्थ जीवन शुरू करने के लिए आवश्यक सामग्री—जैसे बर्तन, चादरें, कपड़े, छोटे घरेलू उपकरण, पूजन सामग्री—इत्यादि प्रदान की।
इससे कई परिवारों का आर्थिक बोझ कम हुआ और विवाह के बाद नए घर की शुरुआत सरल हो सकी।

कई परिवारों ने यह कहा कि यदि सामूहिक विवाह न होता, तो वे व्यक्तिगत विवाह करने की स्थिति में नहीं थे।
इस दृष्टि से यह समारोह सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि कई परिवारों के लिए जीवन बदल देने वाला अवसर बना।

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मुख्यमंत्री मोहन यादव का दृष्टिकोण और संदेश
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने न केवल आयोजन की सादगी की सराहना की बल्कि यह संदेश भी दिया कि समाज को ऐसी ही पहलें बढ़ानी चाहिए।
उन्होंने कहा—
“विवाह उत्सव है, लेकिन दिखावा नहीं होना चाहिए। समाज का दायित्व है कि वह परंपराओं को जीवित रखते हुए आर्थिक बोझ कम करे।”

उन्होंने यह भी बताया कि उनका परिवार वर्षों से सामूहिक विवाह कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करता रहा है और यह उनका व्यक्तिगत निर्णय था कि उनका पुत्र भी इसी परंपरा का हिस्सा बने।

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उज्जैन के लिए गर्व का क्षण
उज्जैन—जो अपनी आध्यात्मिकता, महाकाल की नगरी और सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है—ऐसे अवसर का साक्षी बनकर गर्व महसूस कर रहा था।
लोगों ने कहा कि जिस शहर ने करोड़ों श्रद्धालुओं को कुंभ में संभाला, वह इस तरह सामाजिक एकता और निरीह वर्ग के सम्मान का उदाहरण बनते देख और अधिक गौरवान्वित है।

नगरवासियों की भावनाएँ भी अनूठी थीं।
सारा शहर इस बात का चर्चा में था कि प्रदेश का शीर्ष परिवार भी उन्हीं आयोजनों में शामिल होकर विवाह कर रहा है, जिनके माध्यम से समाज के कमजोर और मेहनतकश वर्ग को सहारा मिलता है।

पांच जिलों से कुल 2 करोड़ 87 लाख रुपये से अधिक की अवैध शराब जब्त

पांच जिलों से कुल 2 करोड़ 87 लाख रुपये से अधिक की अवैध शराब जब्त
भोपाल, 30 नवम्बर 2025। पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा द्वारा विगत दिनों की गई समीक्षा बैठक में जिलों को अत्यधिक सजग और सक्रिय रहने के निर्देश दिए थे। उन्होंने पुलिस की उपस्थिति हर स्तर पर महसूस होने, पेट्रोलिंग को पूर्णतः प्रभावी और सतत रखने, निरीक्षण नियमित और गंभीरता से करने के निर्देश दिए थे। इन्हीं निर्देशों के अनुपालन में मध्यप्रदेश पुलिस ने अवैध शराब के निर्माण, परिवहन और विक्रय के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत उल्लेखनीय सफलता अर्जित की है। पुलिस की निरंतर और सटीक कार्यवाहियों के परिणामस्वरूप राज्य के भोपाल, देवास, मंदसौर, छतरपुर और अनूपपुर जिलों से लगभग 2 करोड़ 87 लाख रुपये से अधिक मूल्य की अवैध शराब, वाहन और अन्य सामग्रियां जब्त की गई हैं।
जिलों द्वारा की गई प्रमुख कार्रवाई-
भोपाल- थाना खजूरी सड़क पुलिस ने अवैध शराब तस्करी के संगठित नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई करते हुए 1200 पेटी अंग्रेजी शराब से भरे ट्रक सहित कुल 1 करोड़ 60 लाख 42 हजार रूपए की संपत्ति जब्‍त की है। यह कार्रवाई शराब तस्करी के बड़े नेटवर्क पर महत्वपूर्ण प्रहार मानी जा रही है
देवास- पुलिस ने “ऑपरेशन प्रहार” के तहत अवैध शराब तस्करी के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई की है। सोनकच्छ प्रगति नगर बायपास पर वाहन चैकिंग के दौरान ट्रक को रोककर उसमें भरी 85 लाख 35 हजार 440 रूपए की 675 पेटी, कुल 5936.4 लीटर अवैध अंग्रेजी शराब तथा करीब 20 लाख रूपए का ट्रक जप्त किया है। आरोपी ट्रक में बाहर की ओर भूसे की बोरियां रखकर भीतर शराब की पेटियाँ छिपाकर परिवहन कर रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों में दीपक रावत पिता सज्जन रावत तथा लालु रावत पिता मुकाम रावत दोनों निवासी ग्राम आम्बुआ, जिला अलीराजपुर शामिल हैं।
मंदसौर- थाना नाहरगढ़ पुलिस ने एक ट्रक कंटेनर में भरी 120 पेटी अवैध अंग्रेजी शराब जप्त की। ट्रक में शराब को भरकर लोहे के पलंग की फर्जी बिल्टी के माध्यम से ले जाया जा रहा था। जब्‍त की गई संपत्ति की कीमत लगभग 20 लाख रूपए है।
छतरपुर- थाना बमनौरा पुलिस ने ग्राम डोंगरपुर में अवैध शराब के संग्रह स्थल पर छापा मारकर 20 पेटी (180 लीटर) अवैध शराब लगभग 90 हजार रूपए, बरामद की है।
अनूपपुर- जिले की कोतवाली पुलिस ने 62.55 लीटर अवैध अंग्रेजी शराब और बिना नंबर की स्कूटी सहित 54 हजार 210 रूपए की संपत्ति जब्‍त की है। आरोपी को गिरफ्तार कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
इस प्रकार इन जिलों की कार्रवाई में पुलिस ने लगभग 2 करोड़ 87 लाख रूपए से अधिक की अवैध शराब एवं वाहन जब्त किए हैं। इन कार्रवाइयों में पुलिस ने तस्करों को भी गिरफ्तार किया है तथा आबकारी अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किए गए हैं।
अवैध शराब के निर्माण, परिवहन या विक्रय में संलिप्त किसी को बख्शा नहीं जाएगा। मध्यप्रदेश पुलिस नशे के अवैध व्यापार एवं संबद्ध आपराधिक गतिविधियों के विरुद्ध अपने सतत, दृढ़ एवं निर्णायक अभियान को जारी रखेगी, ताकि राज्य में शांति, सुरक्षा एवं सामाजिक स्वास्थ्य को और अधिक सशक्त किया जा सके।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव का शुभारंभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव का शुभारंभ
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, 1 दिसंबर, सोमवार को गीता जयंती के अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव का शुभारंभ करेंगे। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के 313 विकासखंड, 55 जिला मुख्यालय और 10 संभागों में आचार्यों की सन्निधि में 3 लाख से अधिक गीताभक्तों द्वारा श्रीमद्भगवद्गीता के 15वें अध्याय का सामूहिक सस्वर पाठ किया जायेगा। गीता जयंती पर उज्जैन, भोपाल एवं इंदौर में विशेष आयोजन किये गये है। इंदौर के राजवाड़ा स्थित गोपाल मंदिर में मध्यप्रदेश के पहले गीता भवन का लोकार्पण हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में होगा। इस अवसर पर मध्यप्रदेश में 16 से 28 नवंबर 2025 तक आयोजित हुई श्रीमद्भगवद्गीता ज्ञान प्रतियोगिता के विजेताओं के
नामों की घोषणा भी की जायेगी।

वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने बताया कि गीता जयंती 1 दिसंबर 2025 को मध्यप्रदेश में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव भव्य स्तर पर मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि जीवन जीने की कला सिखाती है। यह महोत्सव समाज में ज्ञान, कर्तव्य, अनुशासन और सकारात्मकता का वातावरण बनाने का माध्यम बनेगा।

उज्जैन में तीन दिवसीय भव्य आयोजन, पहले दिन अभिनेता पुनीत इस्सर की प्रस्तुति
उज्जैन के दशहरा मैदान पर 1 से 3 दिसंबर तक विविध सांस्कृतिक आयोजन किये जा रहे है। इसमें पहले दिन अभिनेता पुनीत इस्सर द्वारा निर्देशित नृत्य नाटिका जय श्रीकृष्णा का मंचन होगा। दूसरे दिन नई दिल्ली की वैष्णवी शर्मा का काव्य पाठ विराटजयी तथा मुंबई के मोहित शेवानी एवं दल द्वारा कृष्णायन की सांगीतिक प्रस्तुति होगी। अंतिम दिन उमेश तरकसवार द्वारा निर्देशित विश्ववंदनीय एवं बैंगलोर के डॉ. सलाउद्दीन पाशा द्वारा निर्देशित गीता ऑन व्हील्स की प्रस्तुति होगी। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर लघु चित्र शैली में माधव दर्शनम् प्रदर्शनी को प्रदर्शित किया जा रहा है।

भोपाल के रवीन्द्र भवन में दिव्यांग कलाकारों द्वारा गीता ऑन व्हील्स का मंचन
मुख्यमंत्रीजी डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में दोपहर 1 बजे रविन्द्र भवन में श्रीमद्भगवद्गीता के 15वें अध्याय का सस्वर पाठ एवं प्रदर्शनी का लोकार्पण होगा। रवीन्द्र भवन के हंसध्वनि सभागार में मोहित शेवानी के निर्देशन में कृष्णायन की प्रस्तुति होगी। यह प्रस्तुति भगवान श्रीकृष्ण और मध्यप्रदेश की कहानी पर केंद्रित है। आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए इस प्रस्तुति को आकर्षक एवं रोचक बनाने का प्रयास किया गया है। इसके पूर्व बैंगलोर के डॉ. सलाउद्दीन पाशा के निर्देशन में गीता ऑन व्हील्स जिसमें दिव्यांग कलाकार गीता के प्रसंगों को मंचित करेंगे तथा विश्व गीता प्रतिष्ठानम् की ओर से श्रीमद्भगवद्गीता नृत्य नाटिका की प्रस्तुति होगी। प्रस्तुतियाँ शाम 6 बजे शुरू होंगी।

बस्तर की धरती अब पुनः शांति, स्थिरता और विकास की ओर मजबूती से अग्रसर – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

बस्तर की धरती अब पुनः शांति, स्थिरता और विकास की ओर मजबूती से अग्रसर – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
छत्तीसगढ़ सरकार की मानवीय, संवेदनशील और परिणाम-उन्मुख पुनर्वास नीति के तहत आज बस्तर में एक और महत्वपूर्ण सफलता दर्ज की गई। “पूना मारगेम : पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल के अंतर्गत 37 माओवादियों ने हिंसा का मार्ग छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का निर्णय लिया है। यह आत्मसमर्पण न केवल व्यक्तिगत पुनर्जीवन की दिशा में कदम है, बल्कि बस्तर क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास की दिशा में एक मजबूत संकेत है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज के आत्मसमर्पण का स्वागत करते हुए कहा कि बस्तर की धरती अब पुनः शांति, स्थिरता और विकास की ओर मजबूती से अग्रसर है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों की सतत कार्रवाई, प्रशासनिक समन्वय और सरकार की पुनर्वास-केंद्रित नीतियों के कारण माओवादी हिंसा के खिलाफ निर्णायक सफलता प्राप्त हो रही है।

छत्तीसगढ़ में अब तक 487 से अधिक नक्सली न्यूट्रलाइज, 1849 से ज्यादा गिरफ्तार, तथा 2250 से अधिक नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आंकड़े बदलते बस्तर और सरकार की नीतियों में बढ़ते विश्वास का स्पष्ट प्रमाण हैं। लगातार बढ़ते आत्मसमर्पण से बस्तर में नई सुबह की शुरुआत हुई है, जहाँ अब शांति, प्रेम, भाईचारा और स्थायी समृद्धि का वातावरण निर्मित हो रहा है।

उन्होंने कहा कि पुलिस, सुरक्षा बल और प्रशासन की समन्वित कोशिशों ने बस्तर में सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया है, जिससे माओवादी हिंसा पर प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ है। आज का आत्मसमर्पण इस निरंतर बदलती परिस्थिति और क्षेत्र में विश्वास के वातावरण को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री साय ने पुनः यह स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति, पूना मारगेम और नियद नेल्ला नार योजना के अंतर्गत हर आत्मसमर्पित व्यक्ति को सुरक्षा, सम्मान और पुनर्वास की पूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना हमारी प्रतिबद्धता है। उन्होंने कहा कि ये योजनाएं बस्तर के सामाजिक ताने-बाने को मजबूती देने और हिंसा की छाया से बाहर निकालने का सशक्त माध्यम हैं।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि बस्तर में जारी यह सकारात्मक परिवर्तन आगे भी जारी रहेगा और क्षेत्र स्थायी शांति, विकास, रोज़गार, शिक्षा एवं सामाजिक समरसता की नई पहचान बनाएगा।

मुख्यमंत्री से अखिल विश्व गायत्री परिवार के सदस्यों ने सौजन्य मुलाकात की

मुख्यमंत्री से अखिल विश्व गायत्री परिवार के सदस्यों ने सौजन्य मुलाकात की
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज शाम राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रतिनिधिमण्डल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमण्डल ने मुख्यमंत्री साय को आगामी 09 दिसंबर से 12 दिसंबर तक सक्ती जिले के ग्राम हसौद में आयोजित होने वाले 251 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ में शामिल होने हेतु आमंत्रित किया।

मुख्यमंत्री ने आमंत्रण के लिए गायत्री परिवार के सदस्यों का धन्यवाद देते हुए आयोजन की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर निर्मल सिन्हा, कैलाश साहू, कृष्ण कुमार जायसवाल, आदर्श वर्मा, हेमंत पटेल एवं अन्य सदस्य उपस्थित थे।

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