भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र को मिलेगा बड़ा बढ़ावा, 17 सितंबर को SEMICON India 2026 का आगाज

भारत के तेजी से उभरते सेमीकंडक्टर क्षेत्र को नई गति मिलने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर को नई दिल्ली में SEMICON India 2026 का उद्घाटन करेंगे। इस आयोजन में सेमीकंडक्टर निर्माण, डिजाइन, पैकेजिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े वैश्विक उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है।

सेमीकंडक्टर को आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। मोबाइल फोन, ऑटोमोबाइल, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रक्षा उपकरण, दूरसंचार और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों से लेकर अत्याधुनिक तकनीकों तक इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में भारत सरकार देश को सेमीकंडक्टर निर्माण और डिजाइन का प्रमुख वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है।

SEMICON India 2026 के जरिए भारत में निवेश, अत्याधुनिक तकनीक और वैश्विक कंपनियों के साथ साझेदारी को बढ़ावा देने पर विशेष जोर रहेगा। इससे देश में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम मजबूत होने के साथ-साथ रोजगार और नई तकनीकी क्षमताओं के विकास के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

भारत की रणनीति केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि एक मजबूत सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन तैयार करने की है। सरकार के प्रोत्साहन और निजी क्षेत्र की भागीदारी के बीच यह क्षेत्र आने वाले वर्षों में देश की औद्योगिक और तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

BRICS के बाद वैश्विक मंच पर भारत की कूटनीतिक सक्रियता तेज, कई देशों के साथ रिश्तों को नई धार

BRICS शिखर सम्मेलन के बाद वैश्विक मंच पर भारत की कूटनीतिक सक्रियता और तेज होती नजर आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन के दौरान और उसके बाद विभिन्न देशों के शीर्ष नेताओं के साथ मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों, व्यापार, निवेश, तकनीक, रक्षा और वैश्विक चुनौतियों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की।

भारत की विदेश नीति में रणनीतिक स्वायत्तता और बहुपक्षीय सहयोग को लगातार प्राथमिकता दी जा रही है। BRICS जैसे मंचों के जरिए भारत विकासशील देशों की आवाज को मजबूती देने के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में अपनी भूमिका को और प्रभावी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

बैठकों के दौरान ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला, डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरिक्ष सहयोग और आतंकवाद से मुकाबले जैसे विषय भी प्रमुखता से सामने आए। भारत विभिन्न देशों के साथ आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को विस्तार देने पर जोर दे रहा है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, BRICS के बढ़ते प्रभाव और बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत की सक्रिय कूटनीति उसे एक महत्वपूर्ण वैश्विक शक्ति और विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार के रूप में स्थापित करने में मदद कर सकती है। आने वाले दिनों में भारत की इन द्विपक्षीय और बहुपक्षीय पहलों पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।

14 सितंबर को हिंदी दिवस, भाषा की समृद्ध विरासत और महत्व पर होंगे विशेष आयोजन

आज 14 सितंबर को देशभर में हिंदी दिवस मनाया जा रहा है। इस अवसर पर स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी संस्थानों और विभिन्न सामाजिक एवं साहित्यिक संगठनों की ओर से हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार और भारतीय भाषाओं के संरक्षण-संवर्धन को लेकर विविध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

हिंदी दिवस के मौके पर निबंध लेखन, कविता पाठ, भाषण, वाद-विवाद, संगोष्ठी और साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से हिंदी के महत्व, उसकी समृद्ध साहित्यिक परंपरा और दैनिक जीवन में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग को लेकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

हिंदी दिवस केवल हिंदी भाषा के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह भारत की भाषाई विविधता और मातृभाषाओं के संरक्षण का संदेश भी देता है। विभिन्न मंचों से भारतीय भाषाओं के बीच समन्वय और स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है।

गौरतलब है कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को देवनागरी लिपि में संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। इसी ऐतिहासिक निर्णय की स्मृति में हर वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है।

PM-KMY के 7 साल पूरे: किसानों को 60 साल बाद ₹3,000 Pension, जानिए पात्रता

नई दिल्ली। छोटे और सीमांत किसानों को सामाजिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (PM-KMY) ने अपने 7 वर्ष पूरे कर लिए हैं। यह योजना ऐसे किसानों के लिए वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, जिनके पास सीमित कृषि भूमि है और जिनकी आय खेती पर निर्भर रहती है।

PM-KMY यानी Pradhan Mantri Kisan Maandhan Yojana को केंद्र सरकार ने छोटे और सीमांत किसानों के लिए पेंशन योजना के रूप में शुरू किया था। योजना का उद्देश्य किसानों को 60 वर्ष की आयु के बाद नियमित मासिक पेंशन के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है।

60 साल की उम्र के बाद मिलेगी ₹3,000 मासिक Pension

प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना के तहत पात्र किसानों को 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद ₹3,000 प्रति माह की निश्चित पेंशन का प्रावधान है। इस तरह पात्र किसान को सालाना ₹36,000 तक की पेंशन मिल सकती है।

यह योजना खास तौर पर उन Small and Marginal Farmers को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जिनकी कृषि भूमि सीमित है और जिन्हें भविष्य में नियमित आय की जरूरत हो सकती है।

किसानों को खुद भी करना होता है योगदान

PM-KMY एक contributory pension scheme है। इसमें पात्र किसान को अपनी उम्र के अनुसार निर्धारित मासिक योगदान करना होता है। केंद्र सरकार भी किसान के योगदान के बराबर राशि का योगदान करती है।

किसान की उम्र जितनी कम होती है, शुरुआती स्तर पर उसका मासिक योगदान अपेक्षाकृत कम होता है। योजना में शामिल होने के बाद किसान निर्धारित योगदान करता है और केंद्र सरकार भी matching contribution के जरिए पेंशन फंड में हिस्सा डालती है।

PM-KMY के लिए कौन किसान पात्र हैं?

प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना मुख्य रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए है। योजना में सामान्यतः 18 से 40 वर्ष की आयु के पात्र किसान शामिल हो सकते हैं।

पात्रता निर्धारित करते समय किसान की कृषि भूमि, आयु और योजना में निर्धारित अन्य शर्तों को देखा जाता है। इसलिए आवेदन करने से पहले आधिकारिक नियमों और पात्रता मानदंड की जांच करना जरूरी है।

योजना का उद्देश्य क्या है?

PM-KMY का मुख्य उद्देश्य किसानों को केवल कृषि आय पर निर्भर रहने के बजाय बुढ़ापे में सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है। खेती से जुड़ी अनिश्चित आय और बढ़ती उम्र में काम करने की क्षमता कम होने की स्थिति में पेंशन किसानों के लिए आर्थिक सहारा बन सकती है।

योजना के जरिए सरकार का फोकस ग्रामीण क्षेत्र में Social Security, Pension Security और Financial Protection को मजबूत करने पर है।

किसान कैसे ले सकते हैं योजना का लाभ?

PM-KMY में पंजीकरण के लिए पात्र किसान अपने नजदीकी Common Service Centre (CSC) के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के दौरान आवश्यक दस्तावेज और पात्रता से संबंधित जानकारी उपलब्ध करानी होती है।

किसान योजना में शामिल होने से पहले यह जरूर जांच लें कि वे सभी निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं या नहीं।

PM-KMY क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत में बड़ी संख्या में किसान छोटी या सीमांत कृषि भूमि पर निर्भर हैं। ऐसे किसानों के लिए खेती के अलावा भविष्य की नियमित आय का विकल्प सीमित हो सकता है। PM-KMY की ₹3,000 मासिक पेंशन व्यवस्था इसी सामाजिक सुरक्षा जरूरत को ध्यान में रखती है।

योजना के सात वर्ष पूरे होना इस बात को रेखांकित करता है कि किसानों के लिए Pension Security और Social Welfare को सरकारी योजनाओं में लगातार महत्व दिया जा रहा है।

नोट: योजना की पात्रता, योगदान राशि और अन्य शर्तों में समय-समय पर सरकारी बदलाव हो सकते हैं। आवेदन से पहले आधिकारिक पोर्टल या CSC से नवीनतम जानकारी जरूर जांचें।

पण्डोखर सरकार की चुनौती: भविष्य बताने वालों को ₹1.41 करोड़ इनाम, जानें पूरी शर्त

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दतिया/पण्डोखर धाम। पर्चा लिखकर भविष्य बताने का दावा करने वालों के लिए पण्डोखर सरकार धाम के पीठाधीश्वर एवं त्रिकालदर्शी संत श्री गुरुशरण जी महाराज ने बड़ी चुनौती की घोषणा की है। उन्होंने ऐसे दावेदारों को चुनौती देते हुए ₹1 करोड़ 41 लाख की पुरस्कार राशि देने का ऐलान किया है। यह प्रतियोगिता अप्रैल 2027 में पण्डोखर धाम में आयोजित होने वाले 5151 कुण्डीय अश्वमेध राजसूय महायज्ञ के दौरान आयोजित की जाएगी।

पण्डोखर सरकार धाम के व्यवस्थापक सचिन मिश्रा के अनुसार, यह घोषणा पण्डोखर सरकार के दिव्य दरबार में सत्संग के दौरान श्री गुरुशरण जी महाराज ने की। उन्होंने देशभर में पर्चा लिखकर भविष्य बताने का दावा करने वाले लोगों को इस प्रतियोगिता में शामिल होने की चुनौती दी है।

पांच सवालों में चार के सही जवाब पर भी मिलेगा पुरस्कार

घोषणा के अनुसार प्रतियोगिता में प्रतिभागियों के सामने पांच प्रश्न रखे जाएंगे। चुनौती यह है कि प्रतिभागी इन सवालों के जवाब पहले से लिखकर बताए। यदि पांच में से चार प्रश्नों के उत्तर भी हूबहू सही साबित होते हैं, तो प्रतिभागी को ₹1 करोड़ 41 लाख की पुरस्कार राशि देने की घोषणा की गई है।

इस चुनौती का केंद्र पर्चा लिखकर भविष्य की घटनाओं अथवा तथ्यों को पहले से बताने के दावों की वास्तविकता को सामने लाना बताया गया है। प्रतियोगिता में जवाबों की जांच और मूल्यांकन किस प्रक्रिया के तहत होगा, इसकी विस्तृत जानकारी आयोजन से पहले जारी की जाएगी।

अप्रैल 2027 में होगा 5151 कुण्डीय अश्वमेध राजसूय महायज्ञ

पण्डोखर धाम में 20 अप्रैल से 28 अप्रैल 2027 तक विशाल 5151 कुण्डीय अश्वमेध राजसूय महायज्ञ का आयोजन प्रस्तावित है। इसी धार्मिक आयोजन के दौरान भविष्य बताने संबंधी दावों को लेकर घोषित प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी।

श्री गुरुशरण जी महाराज ने इस अवसर पर अश्वमेध यज्ञ के आध्यात्मिक, धार्मिक और सामाजिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में इस प्रकार की चुनौती के माध्यम से पर्चा लिखकर भविष्य बताने के दावों की वास्तविकता को प्रत्यक्ष रूप से परखा जा सकता है।

प्रतियोगिता के नियम कब होंगे जारी?

प्रतियोगिता में कौन भाग ले सकेगा, आवेदन या पंजीयन कैसे होगा, प्रश्न किस प्रकार दिए जाएंगे, उत्तरों का मूल्यांकन कौन करेगा और ₹1 करोड़ 41 लाख की पुरस्कार राशि किस प्रक्रिया के तहत प्रदान की जाएगी—इन सभी बिंदुओं पर विस्तृत नियम आयोजन से पहले सार्वजनिक किए जाने की जानकारी दी गई है।

फिलहाल इस घोषणा के बाद पण्डोखर धाम की यह चुनौती चर्चा में है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि देशभर में पर्चा लिखकर भविष्य बताने का दावा करने वाले लोग इस चुनौती को स्वीकार करते हैं या नहीं।

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को दीं गणेश चतुर्थी और तीज पर्व की शुभकामनाएं

मध्य प्रदेश में आस्था और उल्लास से भरे गणेश चतुर्थी एवं तीज पर्व को लेकर उत्साह का माहौल है। इसी अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को दोनों पर्वों की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भगवान श्री गणेश से प्रदेश के हर परिवार के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली बनाए रखने की प्रार्थना की तथा तीज पर्व को नारी शक्ति, श्रद्धा और पारिवारिक प्रेम का प्रतीक बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गणेश चतुर्थी का पर्व विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश की आराधना के साथ नई ऊर्जा, सकारात्मकता और मंगल भाव का संदेश देता है। वहीं, तीज पर्व महिलाओं की आस्था, समर्पण और परिवार की सुख-समृद्धि की मंगलकामना से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है।

डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से दोनों पर्वों को उत्साह, श्रद्धा और आपसी भाईचारे के साथ मनाने का आह्वान किया। उन्होंने कामना की कि इन पावन पर्वों से मध्य प्रदेश के प्रत्येक घर में खुशियां आएं और प्रदेश निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़े।

जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ने का सबसे सशक्त माध्यम है शिक्षा : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति के जीवन को नई दिशा देने और समाज को आगे बढ़ाने की सबसे मजबूत आधारशिला है। शिक्षा के जरिए युवा अपनी प्रतिभा और क्षमता को निखारकर जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज के बदलते दौर में शिक्षा के साथ कौशल विकास, तकनीकी ज्ञान और नवाचार भी बेहद जरूरी हैं। विद्यार्थियों को ऐसी शिक्षा मिलनी चाहिए, जो उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के साथ रोजगार और उद्यमिता के नए अवसरों के लिए तैयार करे।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए स्कूलों और उच्च शिक्षा संस्थानों में आवश्यक सुविधाओं के विस्तार, डिजिटल शिक्षा तथा विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से पूरी लगन और मेहनत के साथ अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से न केवल व्यक्ति का भविष्य बेहतर बनता है, बल्कि एक शिक्षित और सक्षम युवा प्रदेश एवं देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वैश्विक मंच पर सशक्त हुई भारत की भूमिका : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत और प्रभावशाली पहचान बनाई है। आज दुनिया भारत को एक मजबूत, आत्मविश्वासी और निर्णायक राष्ट्र के रूप में देख रही है। उन्होंने कहा कि भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा देश की सामर्थ्य, कूटनीतिक सक्रियता और प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारत ने बीते वर्षों में आर्थिक विकास, तकनीक, रक्षा, अंतरिक्ष, डिजिटल नवाचार और वैश्विक सहयोग के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की आवाज को पहले की तुलना में अधिक गंभीरता से सुना जा रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना के साथ दुनिया के देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत किया है। भारत वैश्विक चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ ही विकासशील देशों की आवाज को भी प्रभावी ढंग से सामने रख रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की यह बढ़ती भूमिका प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाएगा तथा विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।

भारतीय बेटियों ने रचा इतिहास, AHF जूनियर एशिया कप-2026 पर जमाया कब्जा; CM यादव ने दी बधाई

भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम ने एएचएफ जूनियर एशिया कप-2026 का खिताब जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है। टीम की इस शानदार उपलब्धि पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खिलाड़ियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय बेटियों की यह ऐतिहासिक सफलता देश के करोड़ों खेलप्रेमियों के लिए गर्व और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का विषय है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि टीम की जीत खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत, अनुशासन, समर्पण और उत्कृष्ट खेल प्रतिभा का परिणाम है। भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी प्रतिभा और जुझारू क्षमता का परिचय दिया।

उन्होंने टीम के सभी खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और सहयोगी स्टाफ को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की बेटियां लगातार खेलों के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं और उनकी उपलब्धियां नई पीढ़ी को खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

डॉ. यादव ने विश्वास जताया कि भारतीय महिला हॉकी टीम भविष्य में भी देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करती रहेगी और आने वाली प्रतियोगिताओं में शानदार सफलता हासिल करेगी।

स्टारडम का सिंहासन हिलने लगा! जनता अब ‘किंग’ नहीं, किरदार देख रही है

रोशन नेमा, संपादक

जिसे कल तक जनता ‘किंग’ कहकर सिर पर बैठाती थी, आज उसी से पूछ रही है—किरदार कहां है?
‘हनुमान अंश’ का एक विचार याद आता है—आपकी दृष्टि ही तय करती है कि आपको दुनिया कैसी दिखाई देगी। शायद दर्शक की दृष्टि बदल चुकी है। अब उसे पर्दे पर स्टार का रुतबा नहीं, अभिनेता का अभिनय दिखाई देना चाहिए।

कभी सिर्फ किसी बड़े स्टार का नाम फिल्म को भीड़ खींचने के लिए काफी होता था। ‘किंग’, ‘बादशाह’ और ‘सुपरस्टार’ जैसे तमगे लोकप्रियता के प्रतीक थे। लेकिन अब वही तमगे कई बार दर्शक को आकर्षित करने के बजाय सवाल खड़ा करते हैं—इतना बड़ा नाम है, लेकिन फिल्म में कितना दम है?

यही बदलाव बॉलीवुड के पुराने स्टार सिस्टम के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

दर्शक अब केवल चमक-दमक और बड़े नाम से प्रभावित नहीं होता। उसे ऐसी कहानी चाहिए जिसमें वह खुद को देख सके और ऐसा अभिनेता चाहिए जो अपने नाम को पीछे छोड़कर किरदार बन जाए।

यही वह जगह है जहां नए और कम चर्चित कलाकार बड़े सितारों को चुनौती देते दिखाई देते हैं। उनके पास भारी उपाधियां नहीं होतीं, लेकिन उनके पास अभिनय के लिए पूरी जगह होती है।

अभिनेता और राजा में एक बुनियादी फर्क है—राजा के पास राज्य होता है, अभिनेता के पास दर्शक। और दर्शक किसी का स्थायी प्रजा नहीं होता।

आज ओटीटी और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने विकल्प बढ़ा दिए हैं। दर्शक के पास किसी एक स्टार को स्वीकार करने की मजबूरी नहीं है। वह टिकट न खरीदकर, स्क्रीन बदलकर या फिल्म छोड़कर भी अपना फैसला सुना सकता है।

स्टार का नाम फिल्म को शुरुआत दे सकता है, लेकिन किरदार ही उसे यादगार बनाता है।

शायद इसलिए स्टारडम का सिंहासन हिल रहा है। जनता सितारों को गिरा नहीं रही—वह बस ताज देखने के बजाय कहानी देखने लगी है।

 

 

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