अमेरिकी विदेश मंत्री बोले- व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी, रूस से तेल खरीद और प्रतिबंधों पर भी की बात

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को कहा कि दोनों देश ट्रेड डील को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही इस समझौते को पूरा किया जा सकता है। रुबियो के इस बयान से भारत-अमेरिका के आर्थिक संबंधों को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं।

ट्रेड डील पर तेजी से आगे बढ़ रही बातचीत
मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका इस समय भारत के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहा है और बातचीत में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। भारत और अमेरिका के बीच इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के व्यापारिक हितों को मजबूत करना और आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाना है।

इससे पहले भारत के वाणिज्य मंत्रालय की ओर से भी संकेत दिया गया था कि समझौते के पहले चरण का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया अंतिम दौर में है। हालांकि, समझौते पर हस्ताक्षर और इसे लागू करने की औपचारिक तारीख की घोषणा अभी नहीं हुई है।

रूस से तेल खरीद और प्रतिबंधों पर भी चर्चा
रुबियो ने रूस से तेल और गैस खरीदने के मामले में प्रतिबंधों से जुड़ी छूट पर भी बात की। उन्होंने कहा कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखते हुए अमेरिका को पिछले कुछ महीनों में प्रतिबंधों के मामले में छूट देनी पड़ी है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि विदेश नीति से जुड़े फैसलों में ऊर्जा की उपलब्धता, वैश्विक बाजार और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे कई पहलुओं पर विचार करना पड़ता है। भारत की ऊर्जा जरूरतों और रूस से उसके तेल आयात का मुद्दा भी इसी व्यापक संदर्भ में महत्वपूर्ण है।

रुबियो के भारत दौरे पर भी नजर
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के 20 अक्टूबर से भारत दौरे पर आने की संभावना है। इस दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ उनकी मुलाकात और आर्थिक तथा ऊर्जा सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा अहम मानी जा रही है।

अब सभी की नजरें इस बात पर रहेंगी कि दोनों देश ट्रेड डील को कब अंतिम रूप देते हैं और समझौते की शर्तें भारतीय कारोबारियों, निर्यातकों तथा अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा को किस तरह प्रभावित करती हैं।

चार साल बाद टी20 टीम में लौटे भुवी, न्यूजीलैंड दौरे पर तेज गेंदबाजी संयोजन में बदलाव के संकेत

भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की वापसी ने न्यूजीलैंड दौरे से पहले टीम चयन को लेकर चर्चा तेज कर दी है। करीब चार साल बाद टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम में लौटे भुवनेश्वर अपनी स्विंग गेंदबाजी और शुरुआती ओवरों में विकेट लेने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं। न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में उनकी यह कला टीम इंडिया के लिए अहम साबित हो सकती है।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) की रिपोर्ट के अनुसार, भुवनेश्वर को न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी पांच मैचों की टी20 सीरीज के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया है। उनका पिछला टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला नवंबर 2022 में था। ऐसे में उनकी वापसी को टीम के तेज गेंदबाजी आक्रमण को अनुभव देने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

किस खिलाड़ी की हो सकती है छुट्टी?
भुवनेश्वर कुमार की वापसी के बाद प्लेइंग इलेवन में तेज गेंदबाजों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ना तय है। अर्शदीप सिंह, मयंक यादव और प्रिंस यादव जैसे गेंदबाजों के बीच टीम संयोजन को लेकर कप्तान और टीम प्रबंधन को फैसला करना होगा। हालांकि, किस खिलाड़ी को बाहर बैठना पड़ेगा, इसकी आधिकारिक पुष्टि मैच की अंतिम एकादश घोषित होने के बाद ही होगी।

न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में भुवी से उम्मीदें
न्यूजीलैंड में नई गेंद से स्विंग मिलने की संभावना भुवनेश्वर कुमार के अनुभव को उपयोगी बना सकती है। वह शुरुआती ओवरों में बल्लेबाजों पर दबाव बनाने के साथ डेथ ओवरों में भी अपनी गेंदबाजी से योगदान दे सकते हैं। भारतीय टीम प्रबंधन उनसे प्रभावी प्रदर्शन की उम्मीद करेगा।

अब सबकी नजरें न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज पर रहेंगी, जहां भुवनेश्वर की वापसी और भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण का संयोजन चर्चा का विषय होगा।

टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग मामले में बड़ी कार्रवाई, कोटा से तीनों शूटर गिरफ्तार

अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। मामले में फायरिंग करने के आरोपी तीनों शूटरों को राजस्थान के कोटा से गिरफ्तार किए जाने की खबर है। बताया जा रहा है कि तीनों आरोपी ट्रेन से दिल्ली की ओर जा रहे थे, इसी दौरान पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें पकड़ लिया।

गिरफ्तारी के बाद पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि फायरिंग की घटना को अंजाम देने के पीछे क्या वजह थी और इस मामले में अन्य लोगों की कोई भूमिका है या नहीं।

इस कार्रवाई से मामले की जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, घटना का पूरा घटनाक्रम, आरोपियों की पहचान और फायरिंग के पीछे की वजह जैसे पहलुओं की पुष्टि आधिकारिक पुलिस जानकारी के आधार पर की जानी बाकी है।

सरकारी कल्याण योजनाओं से 22 करोड़ लोगों के जीवन स्तर में सुधार, MoSPI के अध्ययन में खुलासा

Government welfare schemes have improved the living standards of 22 crore people
Government welfare schemes have improved the living standards of 22 crore people

नई दिल्ली। भारत में सरकारी सामाजिक कल्याण योजनाओं के माध्यम से गरीब और जरूरतमंद परिवारों को मिलने वाली मुफ्त या रियायती वस्तुओं से उनके जीवन स्तर में सुधार दर्ज किया गया है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के सांख्यिकीविदों के अध्ययन के अनुसार, देश में लगभग 22 करोड़ लोगों के जीवन स्तर में सुधार का अनुमान सामने आया है। यह आंकड़ा 2022-23 के घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण के आंकड़ों पर आधारित अध्ययन में सामने आया, जिसकी रिपोर्ट 17 अक्टूबर 2026 को द इंडियन एक्सप्रेस ने प्रकाशित की।

किन सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का हुआ अध्ययन?

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की पत्रिका सर्वेक्षण (Sarvekshna) में प्रकाशित शोधपत्र में सरकारी कल्याण कार्यक्रमों के अंतर्गत मुफ्त या रियायती दर पर मिलने वाली वस्तुओं के अनुमानित आर्थिक मूल्य को शामिल करके परिवारों के उपभोग स्तर का विश्लेषण किया गया।

अध्ययन में खाद्यान्न, लैपटॉप, साइकिल और स्कूल यूनिफॉर्म जैसी वस्तुओं को शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने यह तुलना की कि इन सुविधाओं के मूल्य को परिवारों के मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय में जोड़ने पर उनकी उपभोग श्रेणी में कितना बदलाव आता है।

यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 22 करोड़ का आंकड़ा सीधे नकद आय बढ़ने या इतने लोगों के गरीबी रेखा से बाहर निकलने का प्रमाण नहीं है। यह सरकारी सहायता के रूप में मिलने वाली चुनिंदा वस्तुओं के अनुमानित मूल्य को शामिल करने के बाद उपभोग श्रेणी में सुधार का आकलन है।

ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक प्रभाव

अध्ययन के अनुसार, सरकारी वस्तुगत सहायता का प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों में अपेक्षाकृत अधिक पाया गया।

क्षेत्र जीवन स्तर में सुधार का अनुमान
भारत 15.8% आबादी
ग्रामीण क्षेत्र 18.8% आबादी
शहरी क्षेत्र 8.4% आबादी

ग्रामीण क्षेत्रों में सहायता का अनुमानित मूल्य शामिल करने के बाद 4 से 33 प्रतिशत आबादी विभिन्न उपभोग श्रेणियों में ऊपर गई। शहरी क्षेत्रों में यह दायरा 1 से 22 प्रतिशत रहा।

किन राज्यों में सबसे अधिक सुधार दर्ज किया गया?

अध्ययन में प्रमुख राज्यों के बीच भी अंतर सामने आया। पश्चिम बंगाल में 40.5 प्रतिशत आबादी के उपभोग स्तर में सुधार का अनुमान दर्ज किया गया। इसके बाद छत्तीसगढ़ में 29.2 प्रतिशत, असम में 29 प्रतिशत और कर्नाटक में 28.4 प्रतिशत का आंकड़ा सामने आया।

राज्य अनुमानित आबादी में सुधार
पश्चिम बंगाल 40.5%
छत्तीसगढ़ 29.2%
असम 29.0%
कर्नाटक 28.4%

ये आंकड़े अध्ययन में इस्तेमाल की गई पद्धति के आधार पर हैं। इन्हें राज्यों की समग्र गरीबी दर में कमी के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।

मुफ्त खाद्यान्न और अन्य सहायता का आर्थिक महत्व

सरकारी कल्याण योजनाओं के अंतर्गत मिलने वाली वस्तुओं का आर्थिक मूल्य परिवारों के वास्तविक उपभोग संसाधनों को समझने में मदद करता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी परिवार को मुफ्त खाद्यान्न मिलता है, तो उसे बाजार से उतनी मात्रा में खाद्यान्न खरीदने पर खर्च नहीं करना पड़ता। इससे परिवार की अन्य जरूरी जरूरतों के लिए उपलब्ध संसाधनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

अध्ययन में ग्रामीण भारत का औसत मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय वस्तुगत सहायता का अनुमानित मूल्य शामिल करने पर ₹3,773 से बढ़कर ₹3,860 हुआ। शहरी भारत में यह ₹6,459 से बढ़कर ₹6,521 हुआ। ये आंकड़े 2022-23 के सर्वेक्षण से संबंधित हैं, वर्तमान मासिक खर्च के आंकड़े नहीं।

स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं का मूल्य शामिल नहीं

अध्ययन की एक महत्वपूर्ण सीमा यह है कि इसमें आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत उपलब्ध मुफ्त चिकित्सा सेवाओं और मुफ्त शिक्षा सेवाओं का अनुमानित मूल्य शामिल नहीं किया गया। शोधपत्र के अनुसार, इन सुविधाओं को शामिल करने पर विशेष रूप से निम्न उपभोग श्रेणियों वाले परिवारों के जीवन स्तर का आकलन और बेहतर हो सकता था।

सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह अध्ययन?

यह अध्ययन बताता है कि गरीबी और जीवन स्तर का आकलन करते समय केवल नकद आय या परिवार के सीधे खर्च को देखना पर्याप्त नहीं हो सकता। मुफ्त खाद्यान्न और अन्य सरकारी सहायता का आर्थिक मूल्य भी परिवार की वास्तविक उपभोग क्षमता को प्रभावित करता है।

हालांकि, योजनाओं का वास्तविक प्रभाव समझने के लिए लाभार्थियों तक सहायता पहुंचने, पात्रता, वितरण की नियमितता और परिवारों की जरूरतों के अनुरूप लाभ मिलने का आकलन भी जरूरी है।

 

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स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस, 17 अक्टूबर 2026; MoSPI/NSO के 2022-23 घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण पर आधारित अध्ययन, Sarvekshna पत्रिका।

पीएम मोदी ने एशियाई खेलों के भारतीय खिलाड़ियों से की मुलाकात, बोले- खिलाड़ियों ने तिरंगे का मान बढ़ाया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में एशियाई खेल 2026 में हिस्सा लेने वाले भारतीय खिलाड़ियों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय खिलाड़ियों ने तिरंगे का गौरव बढ़ाया है और देश को गर्व करने का अवसर दिया है।

भारत ने जीते 85 पदक
जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियाई खेलों में भारत ने कुल 85 पदक हासिल किए। इनमें 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदक शामिल रहे। भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा। प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों, उनके प्रशिक्षकों, सहयोगी स्टाफ और परिवारों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।

महिला खिलाड़ियों के प्रदर्शन को सराहा
प्रधानमंत्री ने भारतीय महिला खिलाड़ियों के योगदान की विशेष रूप से प्रशंसा की। भारतीय महिला खिलाड़ियों ने कुल 85 पदकों में से 38 पदक जीते, जिनमें 11 स्वर्ण पदक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देश में खेलों के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और क्षमता को दर्शाती है।

युवा खिलाड़ियों से की खास अपील
पीएम मोदी ने खिलाड़ियों से आग्रह किया कि वे अपने गांवों, शहरों और स्कूलों में जाकर युवा प्रतिभाओं को प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों के अनुभव और संघर्ष की कहानियां नई पीढ़ी को खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर सकती हैं।

प्रधानमंत्री ने वर्ष 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक, 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों और 2036 ओलंपिक की मेजबानी की भारत की आकांक्षा का भी उल्लेख किया। उन्होंने विश्वास जताया कि भारतीय खिलाड़ी आने वाले वर्षों में देश के लिए और बड़ी उपलब्धियां हासिल करेंगे।

प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि अनुशासन, मेहनत, आत्मविश्वास और कठिन परिस्थितियों से उबरने की क्षमता भी विकसित करते हैं।

यामी गौतम की ‘नई नवेली’ की बॉक्स ऑफिस पर अच्छी शुरुआत, पहले दिन दुनियाभर में कमाए ₹4.6 करोड़

बॉलीवुड अभिनेत्री यामी गौतम धर की नई फिल्म ‘नई नवेली’ ने रिलीज के पहले दिन बॉक्स ऑफिस पर 4.6 करोड़ रुपये का कारोबार किया। 16 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई यह फिल्म हॉरर, कॉमेडी और फैंटेसी का मिश्रण है। फिल्म की ओपनिंग से निर्माताओं को वीकेंड पर कमाई बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक भारतीय बॉक्स ऑफिस पर फिल्म की शुरुआत सामान्य रही है।

पहले दिन भारत में कितनी हुई कमाई?
ट्रेड वेबसाइट Sacnilk के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, फिल्म ने पहले दिन भारत में करीब 3.25 करोड़ रुपये नेट कमाए। भारत में इसका ग्रॉस कलेक्शन लगभग 3.83 करोड़ रुपये रहा, जबकि विदेशों से करीब 75 लाख रुपये की कमाई हुई। इस तरह फिल्म का पहले दिन का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन लगभग 4.58 करोड़ रुपये रहा।

हॉरर और कॉमेडी का अनोखा मेल
‘नई नवेली’ का निर्देशन बालाजी मोहन ने किया है। फिल्म की कहानी हिमांशु शर्मा और दिव्य निधि शर्मा ने लिखी है। इसमें यामी गौतम के साथ आदिनाथ कोठारे, सुनीता राजवर, मीता वशिष्ठ, सोनल झा और सुष्मिता मुखर्जी भी अहम भूमिकाओं में नजर आते हैं। फिल्म को आनंद एल. राय और हिमांशु शर्मा ने प्रोड्यूस किया है।

वीकेंड पर टिकी निगाहें
फिल्म को पहले दिन दर्शकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली। अब शनिवार और रविवार की कमाई से पता चलेगा कि फिल्म दर्शकों के बीच कितनी लोकप्रियता हासिल कर पाती है। ट्रेड विश्लेषकों के लिए वीकेंड का प्रदर्शन महत्वपूर्ण रहेगा, क्योंकि इससे फिल्म की आगे की बॉक्स ऑफिस यात्रा का अंदाजा लगेगा।

यामी गौतम की पिछली फिल्मों के प्रदर्शन को देखते हुए ‘नई नवेली’ से भी उम्मीदें थीं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म आने वाले दिनों में अपनी कमाई में कितना इजाफा कर पाती है।

यूपी में मौसम की मार से पहले मिलेगा अलर्ट, योगी सरकार 22.45 करोड़ रुपये से लगाएगी 5 डॉप्लर वेदर रडार

उत्तर प्रदेश में आंधी, तूफान, तेज बारिश और अन्य मौसमी आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए योगी सरकार ने आधुनिक तकनीक की मदद से मौसम निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की पहल की है। प्रदेश के पांच शहरों में डॉप्लर वेदर रडार लगाए जा रहे हैं। इस परियोजना पर रडार और उनसे जुड़ी साइटों के निर्माण कार्य सहित कुल 22.45 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इससे किसानों से लेकर आम नागरिकों तक को मौसम की गंभीर परिस्थितियों के बारे में समय रहते जानकारी मिलने में मदद मिलेगी।

पांच शहरों में स्थापित होंगे हाईटेक रडार
राज्य सरकार की योजना के तहत लखनऊ, आजमगढ़, झांसी, अलीगढ़ और वाराणसी में डॉप्लर वेदर रडार स्थापित किए जा रहे हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, आजमगढ़ और वाराणसी में रडार स्थापित हो चुके हैं, जबकि लखनऊ, झांसी और अलीगढ़ में काम जारी है।

ये रडार बादलों की स्थिति, बारिश की तीव्रता और मौसम में तेजी से होने वाले बदलावों की निगरानी करने में मदद करेंगे। इससे मौसम संबंधी चेतावनी और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को बेहतर बनाया जा सकेगा।

22.45 करोड़ रुपये होंगे खर्च
इस परियोजना के लिए लगभग 19.50 करोड़ रुपये रडार व्यवस्था पर और 2.95 करोड़ रुपये संबंधित स्थलों पर सिविल कार्यों के लिए निर्धारित किए गए हैं। इस प्रकार कुल निवेश 22.45 करोड़ रुपये होगा।

किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा
मौसम की सटीक और समय पर जानकारी मिलने से किसानों को फसलों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने में मदद मिल सकती है। तेज बारिश, आंधी या अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों की चेतावनी मिलने पर किसान कटाई, सिंचाई, खाद और कृषि उपज के भंडारण से जुड़े फैसले बेहतर तरीके से ले सकेंगे।

इससे फसलों, पशुधन और कृषि गतिविधियों को होने वाले संभावित नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।
आपदा प्रबंधन में भी मिलेगी मदद

डॉप्लर रडार से मिलने वाले आंकड़े प्रशासन को संवेदनशील इलाकों की पहचान करने और जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव की तैयारियां करने में सहायता देंगे। खराब मौसम की स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और जरूरी एहतियाती कदम उठाने के लिए भी अतिरिक्त समय मिल सकता है।

उत्तर प्रदेश सरकार की इस पहल का उद्देश्य आधुनिक मौसम निगरानी तकनीक के जरिए आपदा से होने वाले नुकसान को कम करना और आम लोगों की सुरक्षा को मजबूत बनाना है। हालांकि, रडार की स्थापना अपने आप में हर आपदा से बचाव की गारंटी नहीं है; इसका लाभ समय पर चेतावनी जारी करने और लोगों तक सूचना पहुंचाने की व्यवस्था पर भी निर्भर करेगा।

शिक्षकों को पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा – मुख्यमंत्री योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भाजपा सरकार ने शिक्षकों और उनके परिवारों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने शिक्षकों को सालाना पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा देने का उल्लेख किया। साथ ही विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए संचालित योजनाओं का भी जिक्र किया।

योगी ने दावा किया कि ऑपरेशन कायाकल्प और निपुण भारत अभियान के माध्यम से सरकारी स्कूलों में पेयजल, शौचालय, स्मार्ट क्लास और डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाओं का विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना और शिक्षकों को सम्मान देना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

23 अक्टूबर को विधान परिषद चुनाव
मुख्यमंत्री ने आगामी विधान परिषद चुनाव का उल्लेख करते हुए भाजपा प्रत्याशियों इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह और उमेश द्विवेदी के पक्ष में मतदान की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षक और स्नातक मतदाता ऐसे प्रतिनिधियों का चयन करें, जो उनकी समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठा सकें।

योगी आदित्यनाथ के इस बयान से उत्तर प्रदेश में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होने के संकेत हैं। सम्मेलन में शिक्षा, शिक्षकों के सम्मान, रोजगार और प्रदेश के विकास को प्रमुख मुद्दों के रूप में उठाया गया।

बच्चों को इंटरनेट से पूरी तरह दूर नहीं रख सकते, यह उनका मौलिक अधिकार: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों के इंटरनेट इस्तेमाल को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि इंटरनेट तक पहुंचना और उसका उपयोग करना बच्चों सहित प्रत्येक व्यक्ति का मौलिक अधिकार है। अदालत ने कहा कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के नाम पर उन्हें इंटरनेट से पूरी तरह वंचित करना उचित नहीं है। बच्चों की सुरक्षा और उनकी स्वतंत्रता एक-दूसरे के विरोध में नहीं, बल्कि दोनों को साथ लेकर चलना जरूरी है।

संविधान के अनुच्छेद 21 और 19(1)(a) का दिया हवाला
न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने 15 अक्टूबर 2026 को दिए आदेश में कहा कि इंटरनेट तक पहुंचने और उसका उपयोग करने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 तथा अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत संरक्षित है। यह अधिकार बच्चों को भी उनकी उम्र की परवाह किए बिना प्राप्त है।

अदालत ने माना कि इंटरनेट आज शिक्षा, जानकारी हासिल करने, विचारों की अभिव्यक्ति और दूसरों से जुड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए यह सीखने और नई जानकारियां प्राप्त करने का प्रमुख साधन हो सकता है।

ऑनलाइन सुरक्षा के नाम पर पूर्ण प्रतिबंध समाधान नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों को इंटरनेट से दूर रखने के बजाय ऑनलाइन खतरों से बचाने के प्रभावी उपायों पर जोर दिया। अदालत के अनुसार, यदि बच्चों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाता है, तो वे अनियंत्रित और अधिक खतरनाक वेबसाइटों या प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में उनकी सुरक्षा और मुश्किल हो सकती है।

पीठ ने यह भी चिंता जताई कि इंटरनेट इस्तेमाल करने पर सजा मिलने के डर से ऑनलाइन उत्पीड़न, धमकी या शोषण का सामना करने वाले बच्चे अपने माता-पिता अथवा भरोसेमंद वयस्कों को इसकी जानकारी देने से हिचक सकते हैं।

बच्चों की सुरक्षा के लिए सख्त व्यवस्था पर जोर
यह मामला इंटरनेट और सोशल मीडिया पर बाल यौन शोषण तथा दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री के प्रसार को रोकने के प्रयासों से संबंधित था। अदालत ने ऐसी सामग्री की पहचान करने और उसे हटाने की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और संबंधित एजेंसियों को बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने होंगे।

अभिभावकों की जिम्मेदारी भी अहम
फैसले का अर्थ यह नहीं है कि बच्चों को इंटरनेट पर बिना किसी निगरानी के सब कुछ करने की छूट मिल गई है। बच्चों की उम्र के अनुरूप सुरक्षा उपाय, अभिभावकों की निगरानी, अनजान लोगों के संदेशों पर नियंत्रण और हानिकारक सामग्री को रोकने जैसी व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण हैं।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का प्रमुख संदेश है कि बच्चों को डिजिटल दुनिया से पूरी तरह अलग करने के बजाय उन्हें सुरक्षित इंटरनेट उपयोग के लिए तैयार किया जाना चाहिए। बच्चों के अधिकारों की रक्षा और ऑनलाइन खतरों से सुरक्षा—दोनों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।

नवरात्रि में कन्या पूजन के बिना अधूरा माना जाता है व्रत, जानें इंद्रदेव से जुड़ी मान्यता और बटुक पूजा का महत्व

शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के साथ कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। नवरात्रि के अंतिम दिनों, विशेषकर अष्टमी और नवमी तिथि पर, छोटी कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है और उन्हें भोजन कराया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि कन्या पूजन के बिना नवरात्रि व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। इस परंपरा में कन्याओं के साथ बटुक यानी बालक की पूजा भी खास मानी जाती है।
कन्या पूजन क्यों है महत्वपूर्ण?

हिंदू धार्मिक परंपरा में छोटी कन्याओं को मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों का प्रतीक माना गया है। कन्या पूजन के दौरान उनके पैर धोए जाते हैं, तिलक लगाया जाता है, चुनरी या वस्त्र भेंट किए जाते हैं और श्रद्धापूर्वक भोजन कराया जाता है। इसके बाद सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा और उपहार देकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है।

मान्यता है कि कन्या पूजन से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्तों को सुख, समृद्धि, आरोग्य तथा खुशहाली का आशीर्वाद देती हैं। यही कारण है कि नवरात्रि के दौरान अनेक परिवार इस परंपरा का विधिपूर्वक पालन करते हैं।

इंद्रदेव से जुड़ी है परंपरा की मान्यता
कन्या पूजन की परंपरा को लेकर विभिन्न धार्मिक कथाएं और मान्यताएं प्रचलित हैं। कुछ धार्मिक वर्णनों में इसका संबंध देवराज इंद्र से जोड़ा जाता है। इन कथाओं के अनुसार, देवी शक्ति की आराधना और कन्याओं के सम्मान को शुभ फल प्राप्त करने का माध्यम माना गया है। हालांकि, इंद्रदेव से इस परंपरा की शुरुआत होने के दावे को प्रमाणित ऐतिहासिक तथ्य के बजाय धार्मिक मान्यता के रूप में ही देखना उचित है।

कन्या पूजन में बटुक को भोजन कराने का क्या है महत्व?
कन्या पूजन में छोटी कन्याओं के साथ एक बालक को भोजन कराने की परंपरा भी प्रचलित है। इस बालक को बटुक भैरव का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में भगवान भैरव को मां दुर्गा का रक्षक और शक्तिपीठों का संरक्षक बताया गया है।

हालांकि, बटुक को भोजन कराना सभी परंपराओं में अनिवार्य नहीं माना जाता। यह परिवार की धार्मिक मान्यता और स्थानीय परंपरा पर निर्भर करता है।

कन्या पूजन में किन बातों का रखें ध्यान?

कन्याओं को स्वच्छ स्थान पर सम्मानपूर्वक बैठाएं।

श्रद्धानुसार उनके पैर धोकर तिलक लगाएं।

हलवा, पूरी और काले चने जैसे पारंपरिक प्रसाद का भोजन कराएं।

भोजन के बाद दक्षिणा या उपहार देकर उनका सम्मान करें।

पूजा के दौरान बच्चों की इच्छा, सहजता और सम्मान का विशेष ध्यान रखें।

नवरात्रि में कन्या पूजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि कन्याओं के सम्मान, सेवा और नारी शक्ति के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का भी प्रतीक है।

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